टीम एबीएन, रांची। आज रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक में शामिल हुआ। संघर्ष से उपजी पार्टी है झारखंड मुक्ति मोर्चा। यही कारण है कि हमने हमेशा हक-अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी है। लड़कर जीत हासिल की है, कभी हार नहीं मानी है।
विगत विधानसभा चुनाव में आप सभी कर्मठ नेताओं और जुझारू कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत तथा करोड़ों राज्यवासियों के आशीर्वाद के फलस्वरूप झारखंड में मजबूत अबुआ सरकार का गठन हुआ। आप सभी को इसके लिए हार्दिक बधाई और जोहार।
आने वाले समय में हमें झामुमो परिवार की जड़ों को राज्य के प्रत्येक कोने में पंहुचा मजबूत करने का काम करना है; वंचित, शोषित समेत समाज के सभी वर्ग को हक-अधिकार देने का काम करना है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा संचालित सीजीएल परीक्षा का विरोध तेज हो गया है। विरोध में छात्र सड़कों पर उतर आये हैं। मंगलवार को प्रशासन ने हजारीबाग के आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज किया है। लाठी चार्ज से कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। घायल छात्र फिलहाल अस्पताल में इलाजरत है। जिससे छात्रों एवं अभिभावको में भारी नाराजगी है। इस बेरहमी लाठी चार्ज का झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन ने भी विरोध किया।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष सह छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आज बुधवार को सरकार और प्रशासन के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला। यह संध्याकालीन कैंडल मार्च जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान शहिद अल्बर्ट एक्का रांची में छात्रों एवं अभिभावको का भारी जूटान देखा गया। छात्रों में भारी नाराजगी एवं गुस्सा देखा गया। अभ्यर्थियों ने जमकर जेएसएससी आयोग और राज्य सरकार विरोधी नारे लगाये। घंटो तक सड़कों में जाम की स्थिति बन रही।
मौके पर मीडिया संबोधन में लाठी चार्ज का कडी निंदा करते हुए छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने दोषी अधिकारियों पर करवाई करने का मांग किया। एवं सीजीएल परीक्षाफल पर धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि कट-आॅफ अंक जारी नही कर सिधे चयनित छात्रों का सुची जारी करना सेटिंग-गेटिंग साबित होता है।
पहले दिन के इस परीक्षा में लगभग मात्र 82 छात्रों का ही सिलेक्शन हुआ जबकि दूसरे दिन 22 सितम्बर को हुए परीक्षा में लगभग 2149 छात्रों का सिलेक्शन हुआ है जो कि एक गंभीर जांच का विषय है। छात्रों का भविष्य का ख्याल रखते हुए तत्काल डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन पर रोका लगाया जाय एवं इस विवादित परीक्षाफल को रद्द कर पुन: प्रदर्शिता के साथ परीक्षा का आयोजन होनी चाहिए।
राजधानी रांची में कैंडल मार्च के दौरान आज देवेंद्र नाथ महतो, चंदन रजक, खगेन महतो, हर्षित सिंह, कर्मु मुंडा, लक्ष्मी कुमारी, रवि मंडल, विजय, प्रभु, विष्णु आदि हजारों की संख्या में अभ्यर्थी, कोचिंग संचालक शिक्षक एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे। आक्रोशित छात्र जेएसएससी सीजीएल परीक्षाफल रद्द करना होगा, झारखंड सरकार हाय-हाय, सेटिंग गेटिंग नाय चलतो और सरकार विरोधी नारे जम कर लगे।
टीम एबीएन, रांची। षष्ठम झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 11,697.45 करोड़ का अनुपूरक बजट सभा पटल पर रखा। इसके जरिए सरकार ने महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिए 6,390 करोड़ 55 लाख खर्च करने की मांग रखी है।
दरअसल, सरकार को मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुक महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक किस्त जारी करनी है। इसके अलावा सर्वजन पेंशन योजना के लाभुकों को भी 1000 रुपये बतौर मासिक किस्त देना है। इससे स्पष्ट है कि अपने वादे को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने अनुपूरक बजट के जरिए राशि प्रबंध करने की पहल की है।
हालांकि, एक बात स्पष्ट है कि मंईयां सम्मान के लाभुकों को दिसंबर माह का किस्त मिलने में थोड़ा विलंब हो सकता है। वैसे, सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में ही राशि निर्गत करने का फैसला ले लिया गया था। इसी आधार पर झामुमो की ओर से घोषणा की गयी थी कि 11 दिसंबर को महिलाओं के खाते में 2,500 रुपये ट्रांसफर हो जायेंगे।
इसके अलावा अनुपूरक बजट में ऊर्जा विभाग के लिए 2,577.92 करोड़ की जरूरत बतायी गयी है। इससे साफ है कि बिजली बिल माफी योजना में दी गयी राशि की भरपाई के लिए विभाग को इस राशि की जरूरत है। इसके अलावा गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (गृह प्रभाग) के लिए 445 करोड़ 96 लाख, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (सेकेंडरी शिक्षा प्रभाग) के लिए 301 करोड़ 89 लाख और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (प्राथमिक एवं व्यस्क शिक्षा प्रभाग) के लिए 245 करोड़ की मांग रखी गयी है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर, (पलामू)। प्रमंडलीय आयुक्त बाल किशुन मुंडा क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (जोनल रिसर्च सेंटर/ जेडआरएस), चियांकी परिसर में अवस्थित संतरा बागान का भ्रमण कर संतरा के पेड़ों एवं उसमें लगे फलों का अवलोकन किया। कम बारिश एवं उच्च तापमान वाले पलामू जैसे स्थान पर संतरा के फलों को देखकर वे काफी प्रभावित हुए।
भ्रमण के दौरान उपस्थित जेडआरएस के सह निदेशक डॉ अखिलेश साह ने आयुक्त को जेडआरएस द्वारा किये जा रहे कार्यों एवं अनुसंधान के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। आयुक्त ने संतरा बागान के साथ-साथ वहां मेढ़ विधि मेंं लगे अरहर की खेती एवं विभिन्न प्रजातियों के गेहूं की लग रही फसलों का अवलोकन किया। उन्होंने संतरा का स्वाद का नागपुरी संतरा के स्वाद से तुलनात्मक जानकारी ली।
इसके अलावा अनुसंधान केंद्र में तैयार किये जा रहे पौधे, पॉली हाउस के माध्यम से खेती की विधि, उनके गुणवत्ता एवं उपज, आम, आंवला, अमरूद की बागवानी के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने किसानों को यहां भ्रमण कराते हुए अधिक उत्पादन वाले खेती करने एवं उद्यानिकी फसलों को लगाने की दिशा में प्रेरित कराने की सलाह दी।
इधर, पिछले दिनों आयुक्त ने हरिहरगंज प्रखंड क्षेत्र के कटकोंबा गांव में बंजर भूमि पर किसान अजय मेहता द्वारा की गयी अमरूद की खेती सहित मौसंबी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों का अवलोकन कर जानकारी ली। किसान अजय मेहता सैकड़ों एकड़ भूमि पर उद्यानिकी फसलों को लगाया है। आयुक्त को किसान अजय मेहता ने बताया कि उनके बागान में उत्पादित थाई प्रजाति की अमरूद बिहार के पटना, गया एवं अन्य दूसरे शहरों में भेजा जाता है।
आयुक्त ने कहा कि उद्यानिकी फसलों में पलामू प्रमंडल के किसान आत्मनिर्भर हो सकते हैं। पलामू में कृषि विज्ञान केन्द्र, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र स्थापित है। यहां के किसान भी इनोवेटिव हैं, जो कृषि एवं उद्यानिकी फसलों में प्रयोग कर अपनी पहचान बनाये हुए हैं। इसके अलावा सरकार के द्वारा किसानों को जागरूक एवं प्रेरित किया जाता रहा है।
साथ की किसानों को उन्नत प्रभेद की बीज उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना से भी बागवानी कर किसान अपनी जिंदगी बदल रहे हैं। उन्होंने पलामू प्रमंडल के किसानों से भी कृषि वैज्ञानिकों से सलाह एवं मिट्टी की जांच कराकर तथा ट्रायल के उपरांत फसलों का विस्तार देने की सलाह दी है। आयुक्त के भ्रमण के दौरान जेडआरएस के सह निदेशक अखिलेश साह, प्रमंडलीय जनसंपर्ककार्यालय के सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी बिजय कुमार ठाकुर आदि उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र का आज तीसरा दिन है। सत्र के तीसरा दिन हेमंत सोरेन के लिए बहुत खास है। दरअसल, आज यानी बुधवार को हेमंत सोरेन की सरकार विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वासमत हासिल करेगी।
बता दें कि आज ही राज्यपाल का अभिभाषण भी होगा। इसके बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अनुपूरक बजट पेश किया जायेगा। कल यानी गुरुवार को भी अंतिम दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा और फिर अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी। इसके बाद अनुपूरक बजट पारित कर दिया जायेगा।
ज्ञात हो कि इंडिया गठबंधन के दल झामुमो से 34 विधायक हैं। कांग्रेस से 16 जबकि राजद से चार विधायक हैं। वही सरकार को बाहर से भी दो विधायकों का समर्थन मिला हुआ हैं। इस प्रकार सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। हेमंत सोरेन आसानी से बहुमत हासिल कर लेंगे। सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 है।
टीम एबीएन, हजारीबाग। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा परिणाम को रद्द करने के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों पर हजारीबाग पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया है। वहीं उग्र छात्रों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया है।
जिसमें एक दर्जन से अधिक गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई हैं, जो गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई है उसमें पुलिस की गाड़ी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी शामिल है। मंगलवार को हजारीबाग बंद को लेकर छात्रों ने जमकर बवाल काटा है। अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत छात्रों ने हजारीबाग बंद का ऐलान किया था। इस बाबत छात्रों ने एसडीओ ऑफिस को सूचना भी दी थी।
छात्रों ने शहर में जहां विभिन्न दुकानों को निशाना बनाया तो दोपहर 1:20 बजे NH-33 जाम कर दिया और लगभग 4 घंटे तक छात्रों ने एनएच को जाम रखा। इस दौरान प्रशासन के समझने के बावजूद छात्र इस बात को लेकर अड़े रहे कि परीक्षा परिणाम रद्द किया जाये। जब स्थिति बिगड़ी हुई देखी तो प्रशासन ने लाठीचार्ज करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया।
लगभग आधे घंटे तक पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया। वहीं उग्र छात्रों ने इस दौरान जमकर पथराव किया। जिसमें एक दर्जन से अधिक गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गयीं, जिसमें पुलिस की गाड़ी भी शामिल हैं। यही नहीं जाम में फंसे बस और छोटे चार पहिया गाड़ी को भी निशाना बनाया गया।
इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। घटनास्थल पर एसडीओ सदर अशोक कुमार, एडिशनल एसपी अमित कुमार पांच थाना के थाना प्रभारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। इस हंगामे को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात की गयी।
इस घटना पर हजारीबाग सदर एसडीओ अशोक कुमार ने कहा कि बहुत समझाने के बावजूद स्थिति नियंत्रण के बाहर गयी तब भीड़ को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। छात्रों की ओर से भी पथराव किया गया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को उदय कुमार मेहता और बरकट्ठा के महेंद्र यादव की अगुवाई में की जा रही थी। आगे विधि-सम्मत कार्रवाई भी की जायेगी।
इस घटना की जानकारी मिलने के बाद रांची से विधानसभा सत्र से हिस्सा लेने के बाद विधायक प्रदीप प्रसाद भी भारत माता चौक पहुंचे और छात्रों को समझने की कोशिश की। लेकिन छात्र इस बात को लेकर अड़े रहे कि परीक्षा परिणाम अविलंब रद्द किया जाये। जब स्थिति अनियंत्रित हुई तब सदर विधायक प्रदीप प्रसाद की घटनास्थल से निकाल गये।
विधायक ने कहा कि छात्रों की मांग जायज है, उनके साथ अन्याय तो हुआ है और परीक्षा परिणाम रद्द भी होना चाहिए। जिस तरह से आंदोलन किया जा रहा है और सड़क जाम है यह सरासर गलत है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मामला उठाया जायेगा। इस दौरान उन्होंने अफसोस जाहिर किया और कहा कि छात्रों ने उनकी बात भी नहीं मानी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि मानवाधिकार दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने, उनके उल्लंघन के खिलाफ संघर्ष करने और मानवाधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
मानवाधिकार उन मौलिक अधिकारों को कहते हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त होते हैं, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, भाषा या राष्ट्रीयता का हो। इनमें जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, श्रम का अधिकार, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण अधिकार शामिल हैं। मानवाधिकारों का उल्लंघन न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरे में डालता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास को भी बाधित करता है।
1948 में संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। यह घोषणा एक अंतर्राष्ट्रीय मानक के रूप में सामने आई, जो दुनियाभर में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक रोडमैप बनी। इस घोषणा में 30 अनुच्छेदों में विभिन्न प्रकार के अधिकारों का वर्णन किया गया है, जैसे कि जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, और शरण का अधिकार।
मानवाधिकार दिवस के अवसर पर विभिन्न संगठनों और देशों में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन अधिकारों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना होता है। यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि मानवाधिकारों का संरक्षण और उनका उल्लंघन रोकना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। आज के समय में जब दुनिया भर में असमानताएं, संघर्ष, और उत्पीड़न की स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, मानवाधिकारों की रक्षा और संरक्षण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
हिंसा, शोषण, भेदभाव, और उत्पीड़न की घटनाएं आज भी हमारे समाज में व्याप्त हैं, और इन पर रोक लगाना हमारे सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करता है। आजकल के डिजिटल युग में, सूचना की स्वतंत्रता, गोपनीयता और डिजिटल अधिकारों का उल्लंघन भी एक प्रमुख चिंता का विषय बन गया है। साइबर हमलों, डेटा चुराने और आनलाइन उत्पीड़न के कारण लोगों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, जिसके खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
मानवाधिकार दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम समाज में समानता, न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए क्या कर सकते हैं। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने और किसी भी प्रकार के भेदभाव या असमानता के खिलाफ खड़े होने का प्रेरणा देता है। केवल तभी हम एक समान और न्यायपूर्ण समाज की ओर कदम बढ़ा सकते हैं, जहां सभी को उनके अधिकार पूरी तरह से प्राप्त हों।
मानवाधिकार किसी एक देश या समाज की नहीं, बल्कि समूची मानवता की समस्या है। जब तक दुनिया भर में हर व्यक्ति को उसके अधिकार नहीं मिलते, तब तक यह दिवस हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा और हमें सशक्त बनाएगा ताकि हम मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास करें। यही असली उद्देश्य है मानवाधिकार दिवस का हर व्यक्ति को स्वतंत्रता, समानता, और न्याय का अधिकार प्रदान करना।
टीम एबीएन, रांची। आज दिन रविवार दोपहर 2 बजे से गंगा आश्रम होटल में अतिथि शिक्षकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बतलाया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। अतिथि शिक्षकों को काम करने से रोका जा रहा है, जबकि माननीय उच्च न्यायालय का निर्देशन है कि जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती है तब तक अतिथि शिक्षकों को नहीं हटाया जा सकता है।
इसके बावजूद रांची विश्वविद्यालय के द्वारा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग झारखंड सरकार के संकल्प का हवाला देते हुए काम करने से रोका जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय के पदाधिकारी विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य को मौखिक रूप से निर्देशन दिया है कि अतिथि शिक्षकों से काम नहीं लिया जाये एवं इन्हें हाजरी बनाने से रोका जाये। जिसके कारण अतिथि शिक्षकों की हाजिरी का रजिस्टर हटा दिया गया है।
वहीं कुछ महाविद्यालयों में हाजरी रजिस्टर और बायोमेट्रिक मशीन भी हटा दिया गया है। वहीं दूसरी ओर इन अतिथि शिक्षकों को 18 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। संघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि पिछली हेमंत सरकार ने 14/ 10/ 2024 को अपने अंतिम कैबिनेट में अतिथि शिक्षकों को आवश्यकता आधारित शिक्षक के रूप में समायोजित करने का प्रस्ताव पारित किया लेकिन इसके द्वारा जो संकल्प बनाया गया संकल्प काफी भ्रामक है, जिसके कारण अतिथि शिक्षकों का न तो अभी तक समायोजन हो पाया है। वहीं दूसरी ओर इसी संकल्प का हवाला देते हुए हमें काम करने से रोका जा रहा है।
इस पर इन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अतिथि शिक्षकों से संबंधित अंतिम कैबिनेट में पारित संकल्प पर पुनर्विचार किया जाये एवं उस पर संशोधन किया जाए तथा हमारी समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाये। वहीं मोहम्मद ताल्हा ने कहा कि हमें पिछले 18 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है जिसके कारण सभी अतिथि शिक्षकों की माली हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर इन्होंने बताया कि लगभग 9 वर्ष पूर्व हमारी नियुक्ति विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी तथा GER बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। इसके लिए सभी विभागों में विद्यार्थियों के नामांकन की संख्या बढ़ा दी गयी, जिसके कारण वर्तमान समय में सभी विभागों में डबल संख्या में विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
अब स्थिति यह हो चुकी है कि विद्यार्थियों की संख्या तो बढ़ चुकी है लेकिन इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों को हटाने का प्रावधान कर दिया गया है। डॉ साहब आर्यन ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा सबसे पहले हमारी नियुक्ति नियम संगत तरीके से विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से हुई है इसके बावजूद हमें फिर से नयी नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन कराना हमारे साथ दुर्व्यवहार और शिक्षकों के सम्मान से खिलवाड़ है।
संघ के संयोजक डॉ धीरज कुमार सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि कैबिनेट के द्वारा उस संकल्प को भी समाप्त कर दिया गया, जिस संकल्प के द्वारा हमारी नियुक्ति की गयी थी अर्थात हमारा आधार ही समाप्त हो जाये, जिससे हम अपना अधिकार भी न मांग सके।
अतः अतिथि शिक्षक संघ ने राज्य सरकार से राज्य सरकार से मांग किया कि तत्काल संकल्प संख्या 1609 में आवश्यक संशोधन करते हुए अतिथि शिक्षकों को आवश्यकता आधारित सहायक प्रध्यापक के रूप में समायोजित करें साथी उनके सभी बकाया मानदेय का भी तत्काल भुगतान करें।
इस दौरान प्रेम शंकर तिवारी, शिवकुमार, आलोक उत्पल, राजु हजाम, डॉ विद्याधर मेहता, निहारिका महतो, शहबाज आलम, मोहम्मद तल्हा, डॉ हैदर अली, सुमित बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखंड अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने दी।
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