झारखंड

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Published / 2025-03-23 19:35:12
छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन का मनाया गया 140वीं वर्षगांठ

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमगाईं, रांची। जमगाईं ग्राम में स्थित छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स येo सo के आगमन के स्मरण में संस्थापित तीर्थस्थल पर ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स येo सo के आगमन की 140वीं वर्षगांठ मनाया गया। इस उपलक्ष्य पर रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया।

आज रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के हुलहुंडू पल्ली के अंतर्गत जमगाईं में स्थित तीर्थस्थल पर छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन की 140वीं वर्षगांठ मनाई गई। इस अवसर पर हज़ारों विश्वासी तीर्थयात्री के रूप में आए एवं प्रार्थना समारोह में शामिल हुए। तीर्थस्थल पर तीर्थयात्रियों के लिए पापस्वीकार संस्कार का भी आयोजन रहा जिसके माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिक लाभ उठाया एवं अपने पापों की क्षमा के लिए प्रार्थना किया।

महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने इस अवसर पर समारोही मिस्सा बलिदान की अगुवाई की। उन्होंने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने धर्मोपदेश में कहा कि छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स ने एक मिशनरी बन कर शिक्षा, न्याय एवं विश्वास का आग जलाया और आग जलती रहे का नारा दिया। उसी आग को हमारे जीवन में जलाए रखने की जिम्मेदारी हम प्रत्येक की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके आगमन से ही हमारे आदिवासियों की ज़मीन बची रही, हम शिक्षित हो पाए हैं और हम अपना अस्तित्व संभाल कर रख पाने में सक्षम हुए हैं। दो दिनों से बारिश होने के बावजूद हज़ारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी इस समारोह में शामिल हुए। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने लोगों के विश्वास एवं उत्साह की सराहना की। जमगाईं एवं हुलहुंडू पल्ली के सभी लोगों को उनके अथक प्रयास एवं कार्य के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

छोटानागपुर के प्रेरित ईश सेवक फाo कॉन्स्टेंट लीवन्स के आगमन के 140वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीर्थयात्रा एवं समारोही  मिस्सा बलिदान में  महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, रांची येसु धर्मसंघ के प्रोविंशियल फाo अजीत कुमार खेस्स , टीo ओo आरo रांची के प्रोविंशियल फाo मनोज वेंगातनम, हुलहुंडू के पल्ली पुरोहित फाo विंसेंट मिंज, तीर्थस्थल के निर्देशक फ़ाo एडविन मिंज, 55 पुरोहितगण, धर्मबहनें एवं हज़ारों की संख्या में ख्रीस्तीय विश्वासी उपस्थित रहे।

  • छोटानागपुर के प्रेरित ईश-सेवक फा. कोन्सटन्ट लीवन्स की संक्षिप्त जीवनी (1856-1893)

यूरोप महादेश के बेल्जियम में पश्चिमी फ्लैंडर्स प्रदेश में मोर्सलेड नामक एक गाँव है। इसी गाँव में जोन लीवन्स और बारबारा डेपूयित नामक एक धर्मी दम्पति रहते थे। यह एक साधारण परिवार था और खेती-बारी द्वारा उनकी जीविका चलती थी। इसी परिवार में सातवीं संतान के रूप में फादर कोन्सटन्ट लीवन्स का जन्म 11 अप्रैल 1856 ई. में हुआ। बाद में इस परिवार में और चार संतान हुए। इस तरह माता-पिता, पाँच पुत्र और छः पुत्रियों से मिलकर 11 सदस्यों का एक बड़ा परिवार बना। 

इनका परिवार गाँव के अन्य परिवारों के लिए आदर्श था क्योंकि वे बड़ा परिवार होने पर भी बड़े मेल-प्रेम से एक दूसरे की परवाह करते हुए श्रद्धा एवं प्रेम से रहते थे। इनके परिवार में रोज दिन शाम के समय एक-साथ पारिवारिक प्रार्थना होती थी। इसी का फल रहा कि आगे चलकर ईश-सेवक फादर कोन्सटन्ट लीवन्स, महान मिशनरी छोटानागपुर के प्रेरित कहलाए। 

जब फादर कोन्सटन्ट लीवन्स सात साल के थे उस समय पल्ली के निकट सिस्टरों के विद्यालय से उनकी प्रारंभिक पढ़ाई शुरू हुई। 11 साल की उम्र में अच्छी तैयारी करके इन्होंने पहला परमप्रसाद ग्रहण किया। इसी वर्ष उनकी माँ की तबीयत बिगड़ी और उनका देहांत हो गया। उसकी माँ उसके लिए पूरी दुनिया थी इसलिए उसकी मृत्यु लीवन्स को पूरी तरह से झकझोर दिया। वह माता के वियोग में विद्यालय जाना बन्द कर दिया। 

वह घर में रहकर घर और खेतों के कामों में मदद करने लगा। पशुओं को चराना, उन्हें दाना पानी देना और गोशालों की साफ-सफाई करना उनकी निदचर्या बन गई। हर काम वह खुशी से करता था। कोई भी काम उसे बोझ या भारी नहीं लगता था। खुले खेतों में काम करने और पेड़ों की छाया में मवेशियों की देख-रेख करते हुए उन्हें प्रकृति से अद्भुत लगाव हो गया था। इसी कारण अकेले रहने पर भी उन्हें अकेलापन का एहसास नहीं होता था। 

अवसर मिलने पर वह अपने हम उम्र के बच्चों को उदारतापूर्वक धर्म की शिक्षा दिया करता था। कभी-कभी उन्हें घोड़ों की देखभाल करने का मौका मिला। इसका लाभ लेते हुए वह घुड़सवारी सीखने का प्रयास भी करता था। इसी तरह दो तीन साल बीत गये। ईश्वर की योजना विचित्र होती है। उनकी पल्ली में अम्पे नामक एक नया पल्ली पुरोहित का आगमन हुआ और वहाँ के हर विश्वासी को अपने प्रवचनों से बहुत प्रभावित किया। 

उन्होंने नवयुवकों को पुरोहित बनने के लिए चुनौती दी। उनके प्रवचन से प्रभावित होकर फादर कोन्सटन्ट लीवन्स के मन में पुरोहित बनने की लालसा जगी। जब यह बात उनके पल्ली के अन्य पुरोहितों तक आयी तो वे बहुत खुश हुए और उन्होंने पढ़ाई फिर से जारी करने की सलाह दी। इतना ही नहीं उनकी पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की व्यवस्था भी कर दी। इस तरह तीन साल बाद फिर से वह अपनी पढ़ाई शुरू किया। 

प्रारंभ में उन्हें बहुत दिक्कत हुई, पर पुरोहित बनने की ललक, उनको लगातार लगे रहने के लिए प्रेरित करता रहा। साथ ही वह खूब प्रार्थना करता था। धीरे-धीरे उनकी पढ़ाई-लिखाई में सुधार हुई और कुछ वर्षों के अंतराल वह अपने को इस काबिल कर लिया कि उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। वह सेमेनरी गया जहाँ उन्होंने अपनी पुरोहित बनने की पढ़ाई प्रारंभ की। वह एक मिशनरी बनना चाहता था।

उन्होंने पाया कि धर्मप्रांतीय बनने से मिशनरी बनने की संभावना बहुत कम थी। अतः मिशनरी बनने के लिए धर्मप्रांतीय पुरोहित को पढ़ाई छोड़कर, येस संधी धर्मसमाज में भर्ती हुआ और पूरी उत्सुकता और समर्पित होकर दो साल के नोभिशियेट की पढ़ाई आसानी से खत्म की। लीवन्स ने प्रार्थना और अच्छे आचरण से अधिकारियों का दिल जीता और यह प्रमाणित किया कि वह मिशनरी बनने का दम रखता है। 

इस तरह प्रथम मन्नत लेने से पहले ही उनकी काबिलयत और मिशनरी बनने की भावना और उत्साह के कारण, उन्हें भारत के बंगाल मिशन के लिए चुन लिया गया। अतः मन्नत लेने के पश्चात् दूसरे ही दिन उसे भारत देश भेज दिया गया। वह पाँच सप्ताह की लम्बी यात्रा तय कर 2 दिसम्बर 1880 को वह कलकत्ता पहुँचा। एक महीने के बाद वे आसनसोल गये और वहाँ से अपने ईश शास्त्र की पढाई जारी रखी। 

वहीं उन्होंने हिन्दी सहित कई अन्य भाषाओं का भी अध्ययन किया। 14 जनवरी 1883 को कलकत्ता के आर्चबिशप पी. गथौल्स ये.स. के कर कमलों से उसे परोहित अभिषेक दिया गया और जब तक ईश-शास्त्र की पढाई, पूरी नहीं हई तब तक वह कलकत्ता के संत जेवियर कॉलेज में देश दुनिया के तौर-तरीकों का अनुभव करते हुए अपनी सेवाएँ दीं। बाद में उन्हें छोटानागपुर मिशन पर भेजा गया और यहीं से उनकी असली प्रेरिताई कार्य शुरू हुई।

वे 8 मार्च 1885 को गिरीडीह होते हुए डोरंडा आये और अगले ही दिन अर्थात 19 मार्च को वे जमगाई पहुँचे और आठ महीने वे यहाँ रहे। इस दरम्यान उन्होंने अलग-अलग जगहों का भ्रमण किया और लोगों से भेंट-मुलाकात की। वे लोगों की भाषा, संस्कृति और परिस्थिति से अवगत हुए। बाद में मिशन कार्य करने के लिए उन्हें तोरपा एक उपयुक्त जगह लगी और वे वहाँ जाकर मुंडा आदिवासियों के बीच करीब ढाई साल रहे। यहीं से उनहोंने खीस्त के प्रेम और उस पर विश्वास करने की आग जलायी जो बाद में धीरे-धीरे पूरे छोटानागपुर में फैल गई। 

कई लोग उनके पास आये और अपने दुःख, दर्द और समस्याओं को उनके समक्ष रखे। फादर लीवन्स उन्हें बड़े ध्यान से सुना और अपने विश्वास और ज्ञान के आधार पर उनको सलाह और सुझाव दिये। उनकी सरल बातें और उनके साथ एक अनोखी आत्मीयता का भाव, उन लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। फादर कोन्सटन्ट लीवन्स हर तरह से हर संभव उनकी मदद की। यही वजह थी कि कई लोग स्वेच्छा से बपतिस्मा ग्रहण करने के लिए तैयार हुए और ईसाई धर्म को अपनाये। 

अपने अधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए 1888 को वे राँची आये और मनरेसा हाउस में रहकर अपने मिशन कार्य को जारी रखे। वे लोहरदगा मिशन के निदेशक बनाये गये और पाँच वर्षों तक इस जिम्मेदारी को उन्होंने बड़ी निपुणता के साथ निभाया। वे नियमित रूप से अपने मिशन क्षेत्रों का दौरा करते रहे। वे अपने सरल व्यवहार और मिलनसारी भाव के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हुए। उनकी बारवे यात्रा की शुरूआत बड़ी नाटकीय और दिलचस्प थी। 1889 ई. को नवाडीह के निकट बिरीं गाँव के कुछ लोग कोर्ट कचहरी के काम से राँची आये थे। 

कोर्ट परिसर में उनकी भेंट फादर कोन्सटन्ट लीवन्स से हुई। फादर कोन्सटन्ट लीवन्स अपने स्वभाव के अनुसार आत्मीय भाव से उनसे बातचीत की, उनके मुद्दों को अपने संज्ञान में लिया और उनका उचित मार्गदर्शन भी किया। इसका फल यह हुआ कि जो बहुत कठिन मामला था, वह आसानी से सुलझ गया और उन्हें आसानी से जीत मिली। अतः यह बिरों के लोगों को इतना अधिक प्रभावित किया कि वे उन्हें बारवे आने का निमंत्रण दिया। इस तरह उनका बारवे का दौरा हआ। रांची से वे पाँच बार बारवे का यात्रा की पर इन्हीं यात्राओं से उन्होंने सम्पूर्ण बारवे को खीस्त के चरणों में ला दिया। 

उन्होंने एक अद्भुत व्यवस्था बनाई जिससे लोग बपतिस्मा लेने के लिए तैयार हुए और हजारों की संख्या में विश्वासी खीस्तीय होते गये। यह मिशन आसान नहीं था, पर लोगों की मासूमियत और उत्सुकता, उसे हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। कई बार उनका घोडा जिसका नाम जेनरल था अपनी बहादुरी से उनके विरोधियों और जंगली जानवरों से बचाया। उन्होंने आदिवासियों में दो बड़ी समस्यायें पाई। एक था अंधविश्वास जो बेवजह उन्हें डराती थी और दूसरा जमीनदारों का जुल्म था। 

फादर लीवन्स ने येस खीस्त को मुक्तिदाता के रूप में देकर उनके अंधविश्वास को दूर किया कानूनी किताबों का ज्ञान देकर और लोगों के हक और अधिकार से उनको अवगत कराकर जमीनदारों के जुल्म से उन्हें मुक्त कराया। उन्होंने उन्हें आध्यात्मिक और शारीरिक उन्नति करने के उपाय बताये। ये दो मदद उन साधारण लोगों के लिए किसी दैवीय मदद से कम नहीं थी। अतः वे बड़ी तत्परता और उत्सुकता से बडी संख्या में बपतिस्मा ग्रहण किये और खीस्तीय बने। 

जरूर अन्य पुरोहितों का भी इसमें योगदान था पर जो माहौल फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स ने अपने कठिन परिश्रम और अपने आराम और खुशियों का त्याग कर बनाया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। अत्याधिक यात्रा करने, शारीरिक थकावट और सही खान-पान के अभाव के कारण वे क्षय या टी.बी. रोग के शिकार हुए। इसके बावजूद वह काम करते रहे। उन्हें अपना स्वस्थ्य की परवाह नहीं रही। जब इलाज शुरू 4 हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के लिए वे अपने देश बेल्जियम लौटे। 

पर वहाँ का बेहतर इलाज भी उनकी नहीं बचा पाया और 7 नवम्बर 1893 ई. को बेल्जियम के लूभेन में मात्र 37 साल की उम्र में उनका देहान्त हो गया। अपने अल्पकालिक जीवक व्यक्तित्व से मात्र सात-आठ साल में ही फादर लीवन्स ने पूरे छोटानागपुर का कायापलट कर दिया। छोटानागपुर में कई मिशनरी आये पर उनमें अगर कोई अधिक साहसी, उत्साही और प्रतिभावन थे तो वह फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स ही थे। यही वजह है कि आज वे छोटानागपुर के प्रेरित कहलाते हैं। 

आग जलती रहे फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स का आदर्श वावक्य था। इसमें वे येसु खीस्त के प्रेम और खीस्तीय विश्वास में जलते रहने की बात कहे थे। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स और हमारे पुरखे जो उनके सहयोगी थे उनमें जो जोश, आपसी प्रेम, एकता और खीस्तयता को स्वीकार करने और जीने की जो जज्बा थी वह आज भी हमारे लिए एक मिसाल है। 

उन्होंने हमें विश्वास का अमूल्य दान दिया। आप माने या न मानें लेकिन इसी विश्वास के कारण आज हम लोगों के जीवन में, रहन-सहन और कई चीजों में बहुत बड़ा बदलाव आया है और हम एक सम्मानित जीवन जीने लायक बन पाये हैं। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स हमारे बीच एक सुसंगठित समाज की स्थापना करना चाहते थे जो उनका एक बड़ा सपना था। फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स और अपने सहयोगियों से इसे पूरा करने का वे भरसक प्रयास किये। 

आज हमारे लिए उसी सपने को पूरा करना और उनके माध्यम से मिली ईश्वरीय महती दया, प्रेम और विश्वास को और अधिक जीवन्त एवं क्रियाशील बनाने की जम्मेदारी है। अगर हम ऐसा कर पाते हैं तो यही हमारे द्वारा फादर कॉन्सटन्ट लीवन्स के लए सबसे बड़ा सम्मान और श्रद्धांजलि होगी। ऐसा करने में ईश्वर हमारी मदद करे और खीस्त की ज्योति हर घर-घर में जले और फैले और हम हर एक जन एक सम्मानित जीवन जी पायें।

Published / 2025-03-23 18:43:09
लातेहार ने पलामू को 20 रन से हराया

  • इंटर डिस्ट्रिक्ट सीनियर क्रिकेट टूर्नामेंट प्लेट ग्रुप (रणधीर वर्मा ट्रॉफी)

टीम एबीएन, कोडरमा। झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के तत्वावधान में खेले जा रहे हैं इंटर डिस्ट्रिक्ट सीनियर क्रिकेट टूर्नामेंट प्लेट ग्रुप (रणधीर वर्मा ट्रॉफी) के मैच में रविवार को चंदवारा स्थित पुलिस लाइन मैदान में लातेहार और पलामु के बीच मैच खेला गया। लातेहार ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 29 ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 168 रन बनाए। जिसमें गोल्डी शर्मा ने 46 रन धनंजय कुमार ने 44 रन और श्रवन महली ने 42 रन का योगदान दिया। 

गेंदबाजी करते हुए पलामू की ओर से अनिकेत में तीन विकेट और सुदीप निखिल विकास और आर्यन ने एक-एक विकेट लिए। बाद में बल्लेबाजी करने उतरी पलामू की टीम 28.01 ओवर में 148 रन ही बना सकी। पलामू की ओर से सौरव कुमार ने 61 रन और स्पर्श राज ने 17 रन का योगदान दिया ।

 गेंदबाजी करते हुए लातेहार की ओर से गोल्डी शर्मा ने 4 विकेट प्रियांशु ने तीन विकेट रामकुमार ने दो विकेट और अमित कुमार ने एक विकेट लिए ।बेहतर खेल के लिए गोल्डी शर्मा को मैन ऑफ द मैच झुमरी तिलैया नगर परिषद के सिटी मैनेजर लेमांशु कुमार के हाथों दिया गया। 

मौके पर टीआरडीओ विकास कुमार रानू, अंपायर इफ्तिखार आलम, मनोरंजन कांजीलाल स्कोरर गजेंद्र कुमार, शुभम मेहता , अमरजीत सिंह छाबड़ा, दिनेश सिंह , आलोक पांडे ,सुमन कुमार ,सुरेंद्र प्रसाद, सिटी मैनेजर लेमांशु कुमार, दिलीप प्रसाद, क्लोरोफिल स्कूल के डायरेक्टर अजय अग्रवाल, महेश भारती, विशाल कुमार, गांधौरी रजक, अमित जायसवाल ,धर्मेंद्र कौशिक, सोनू खान ,प्रेम यादव ,श्रवण कुमार, नीतीश कुमार सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2025-03-23 18:40:51
शहादत दिवस पर याद किये गये भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव

टीम एबीएन, कोडरमा। शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 95 वें शहादत दिवस पर डीवाईएफआई, सीटू और किसान सभा के बैनर तले अम्बेडकर पार्क में विचार गोष्ठी आयोजित किया गया। सर्व प्रथम शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया. जहां शहीद भगत सिंह राजगुरु सुखदेव अमर रहे, इन्कलाब जिन्दाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, शहीदों ले लो लाल सलाम आदि जोशीले नारे लगाए जा रहे थे। 

सीटू के जिला सचिव रमेश प्रजापति की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी को सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान और झारखंड राज्य किसान सभा के संयुक्त सचिव असीम सरकार ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शहादत केवल बलिदान नहीं, विचारों की विरासत होती है।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का सपना था कि एक ऐसा भारत जहाँ राष्ट्रवाद बाँटने का नहीं, जोड़ने का हो, समाजवाद केवल नारा नहीं, बराबरी की नींव हो, धर्मनिरपेक्षता केवल सहिष्णुता नहीं, सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध हो। आज जिस प्रकार से 300 वर्ष पहले के औरंगजेब के कब्र को उखाड़ने की माहौल पैदा कर सांप्रदायिक जहर बो कर देश में दंगे करवाये जा रहे हैं।

यह आम आदमी के मूल मुद्दों से भटकाने की साजिश है। आज देश की सत्ता पर ऐसी सरकार का कब्जा है, जो पूंजीवाद के हित में और सांप्रदायिक और जनविरोधी है। महंगाई की मार से आम जनता कराह रही है, दूसरी तरफ पूंजीपतियों का मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। सरकारी सम्पत्तियों को औने पौने दामों पर चहेते पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है।

नई शिक्षा नीति से भारत के बहुसंख्यक गरीब मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से दूर हो रहे हैं। नौजवान बेरोजगारी की चक्की में पीसे जा रहे हैं। वक्ताओं ने किसान मजदूरों और छात्र युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि एक नये भारत के निर्माण और शोषण मुक्त समाज की स्थापना के लिए भगत सिंह के रास्ते पर चलते हुए एक नयी क्रांति का आगाज करें। 

कार्यक्रम में सीटू के महेन्द्र तुरी, फेकुलाल विद्यार्थी, सियाराम, डीवाईएफआई बासुदेव साव, शम्भु कुमार, किसान सभा के बाबूलाल साव, सरयु दास, प्रमोद कुमार, पंकज कुमार, रौशन कुमार, चंदन कुमार, अजय कुमार दास, जितेन्द्र कुमार, पवन कुमार, विक्की कुमार आदि शामिल थे।

Published / 2025-03-23 18:38:07
पूर्णिमा टॉकीज ग्राउंड में डिजनीलैंड मेला का हुआ शुभारंभ

हवामहल गेट से डिजनीलैंड मेला का प्रवेश

एबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। शहरवासियों को परिवार के साथ मनोरंजन के लिए डिजनीलैंड मेला पूर्णिमा टॉकीज ग्राउंड में लग चुका है। मेला का भव्य शुभारंभ समाजसेवी बीरेंद्र यादव(बीरू) के द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ फीता काट कर किया गया। झुमरी तिलैया वाले को लंबे समय बाद परिवार बच्चों के साथ एंजॉय करने का बेहतर मौका है।

शुभारंभ के मौके पर समाजसेवी बीरेंद्र यादव (बीरू) ने कहा कि आज भी भारतीय समाज में मेला मनोरंजन का बड़ा माध्यम है यहां बच्चों के झूलों के साथ घरेलू वस्तुओं की भी खरीदी करने का मौका है। डिजनीलैंड मेला परिवार और आमजन को अपना शुभकामना देते हुए कहा अपना नगर स्वच्छ रखने में लोग सहयोग करें।

डिजनीलैंड मेला का मुख्य आकर्षण जो पहली बार चाँद तारा झूला साथ में टोरा टोरा, ब्रेक डांस, टॉय ट्रेन, ड्रैगन, रशियन झूला मिकी माउस, वॉल वंशी किड्स राइट्स है। मेले में गगनचुंबी इमारत ट्रिन टावर, एफिल टावर भी देखने को मिलेगा। मेले में आकर्षक रूप से युवकों के लिए विशेष प्रकार की सेल्फी जोन बनाई गई है। इस मेले में मनोरंजन के साथ-साथ आने वाले त्योहार के लिए जमकर खरीदारी भी दर्शक कर सकेंगे।

मेले में मुख्य रूप से राजस्थानी अचार, जयपुरी अचार, चूरनसहारनपुर के फर्नीचर के साथ महिलाओं से संबंधित हर प्रकार के सौंदर्य उपयोगी सामान उपलब्ध है। मौके पर मेला के राजू कुमार ने बताया कि आज के दौर में बच्चों में सामाजिक सांस्कृतिक समझ को विकसित करने के लिए परिवार बच्चों के साथ मेला जरूर देखें जाने चाहिए।

डिजनीलैंड मेला के आयोजक महावीर बिजनेस एंड मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक ने यह भी बताया कि हवामहल गेट से प्रवेश करने के साथ ही लोगों में रोमांच भर जायेगा। महिलाओं के लिए ज्वेलरी आइटम, राजस्थानी कंगन मुंबई के फैसी वामल जूते और अन्य जरूरत के समान यहां किफायती दाम पर मिलेंगे। 

खरीदारी करने के साथ-साथ खानपान की विशेष व्यवस्था की गई है। भारतीय व्यंजन एवं चाइनीज फास्ट फूड के साथ भेलपुरी पाव भाजी, पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, पेस्टीज आदि की बेहतर व्यवस्था की गई है। मेले में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा के साथ-साथ सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की गई है। मेला रोजाना 3 बजे से रात्रि के 10 बजे तक चलेंगे।

Published / 2025-03-23 18:32:25
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कल डीसी को आवेदन

  • निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर अभिभावक संघ की बैठक संपन्न,
    कल डीसी को सौपेंगे ज्ञापन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। चित्रगुप्त नगर के अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार अभय कुमार के आवास पर अभिभावक संघ कोडरमा जिला की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता नरेंद्र सिंह चंदेल ने की। बैठक में जिले के निजी स्कूलों की मनमानी, प्रत्येक वर्ष एनसीआरटी गाइडलाइन के विपरीत किताबों को बदलने आदि कई मुद्दे पर चर्चा कि गयी।

 जिसके बाद निर्णय लिया गया कि सोमवार को निजी स्कूलों की मनमानी को बंद करने, निजी स्कूलों में एनसीआरटी गाइडलाइन का पालन करने आदि मांगो को लेकर एक ज्ञापन कोडरमा उपायुक्त व डिईओ को देने का निर्णय लिया गया। 

साथ ही बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ज्ञापन देने के एक सप्ताह के अंदर संतोषजनक कार्यवाई नहीं हुई तो अभिभावक संघ के द्वारा पहले कोडरमा समाहरणालय में धरना प्रदर्शन करने तथा उसके बाद भी कार्यवाई नहीं होने की सूरत पर आजरण-अनशन करने करने की बात कही।

इस दौरान संघ के अध्यक्ष संजय साजन व सचिव भानु प्रताप सिंह ने कहा कि निजी स्कूलों में प्रत्येक वर्ष एनसीआरटी के दिशा निर्देश के विपरीत किताबों को बदल दिया जा रहा वहीं कुछ स्कुल ऑनलाइन पेमेंट पर भी जीएसटी लेने लगे है जो गलत है उन्होंने कहा लोग अपनी पेट काट कर बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते पर कुछ स्कूलों के द्वारा भय दोहन कही से उचित नहीं। 

मौके पर अध्यक्ष संजय साजन, सचिव भानु प्रताप सिंह,अंकित कुमार यादव सह सचिव, अली हैदर बंटी संरक्षक सिकंदर कुमार, उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह चंदेल (संरक्षक), रविन्द्र कुमार (मोती) (संरक्षक) अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार अभय (संरक्षक) आदि लोग मौजूद रहे।

Published / 2025-03-23 18:25:58
विशाल पाड़िया के अध्यक्ष बनने पर रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन ने दी बधाई

टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के सत्र -2025- 27 के प्रांतीय अध्यक्ष के चुनाव मे रांची के युवा विशाल पाड़िया विजयी होकर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष बनने पर रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए विशाल पाड़िया को बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने विशाल पाड़िया को बधाई देते हुए कहा है कि आपके कुशल नेतृत्व में न केवल मारवाड़ी युवा मंच झारखंड प्रांत मे बल्कि पूरा समाज प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा। आपका दूरदर्शी मार्गदर्शन संगठन को सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक समृद्धि और युवा सशक्तिकरण की दिशा में नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। हम सबों को पूर्ण विश्वास है कि आपके नेतृत्व में मंच संगठित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान देगा और नई प्रेरणाएँ स्थापित करेगा।

बधाई देने वालों में-रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के निवर्तमान अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, महामंत्री विनोद कुमार जैन, ओम प्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र केडिया, पवन पोद्दार, पवन शर्मा, किशन साबू, प्रमोद अग्रवाल, मनोज चौधरी, कमलेश संचेती, कौशल राजगढ़िया, अनिल अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, बबलू हरित, प्रमोद सारस्वत, अंजय सरावगी, रमण वोडा, विकास अग्रवाल, आदि शामिल है। उक्त जानकारी रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2025-03-23 18:07:07
आदर्श सामूहिक विवाह समारोह में 41 दिव्यांग दृष्टिबाधित, निर्धन जोड़े एक दूजे के बंधन में बांधे

टीम एबीएन, रांची। लायन्स क्लब ऑफ रांची द्वारा विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग के सहयोग से  राणी सती मंदिर रातू रोड़ रांची के प्रांगण स्थित हनुमान बक्श पोद्दार सत्संग भवन में 41 जोड़ियों का पाणिग्रहण संस्कार हेतु आदर्श सामूहिक विवाह समारोह संपन्न हुआ।

लायंस क्लब के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह एवं विवाह समारोह के संयोजक राजेश कुमार चौधरी के देखरेख मे सभी कन्याओं का विवाह सनातन वैदिक रीति से पंडित श्याम सुन्दर भारद्वाज द्वारा सम्पन्न कराया गया। जिसमें 11 पंडितों की टीम ने सहयोग प्रदान किया। सुबह 10 बजे बारात निकाली गई एवं वरमाला का कार्यक्रम हुआ। शाम 5 बजे विदाई हुई। सभी कन्याओं को घरेलू आवश्यक सामग्री जैसे बर्तन, कंबल, कपड़े, बर्तन  एवं अन्य आवश्यक सामान प्रदान किया गया। 

विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल एवं प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस आदर्श सामूहिक विवाह समारोह में पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज, दुमका, रांची और खूंटी जिले के 17 दिव्यांग जोड़ियों का विवाह 24 अन्य जोड़ियों के साथ कराया गया, जिसमे नौ जोड़ियां दृष्टिबाधित हैं और आठ जोड़ियां शारीरिक दिव्यांगों की हैं।

दृष्टिबाधितों और दिव्यांगों को विवाह में बहुत सी सामाजिक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिकांश स्थितियों में परिवार जन भी ध्यान नहीं देते हैं जबकि इनकी भी जैविक और नैसर्गिक आवश्यकताऐं रहती हैं। अतः इस वर्ष हमारा प्रयास यहा कि मानवीयता के नाते इन्हें भी समाज की मुख्य धारा से जोड़कर गृहस्थी बसाने और सुखी दाम्पत्य जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाये। 

विवाह समारोह के संयोजक राजेश कुमार चौधरी एवं लायंस क्लब के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित वर्ग को मुख्य धारा से जोड़ना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है विवाह एक पवित्र संस्कार है और हर कन्या का सपना होता है कि उसका विवाह बड़े धूमधाम से हो लेकिन गरीब और विशेष रूप से दिव्यांग या दृष्टिहीन कन्याओं के लिए सपना कई बार सिर्फ एक ख्वाब बनकर रह जाता है।

ऐसे में इस सामूहिक विवाह समारोह में इन कन्याओं को सम्मान खुशी और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान किया, विवाह के उपरांत सभी 41 जोड़े वर- कन्याएं बहुत ही खुश दिखे, समारोह मे किन्नर समुदाय ने सभी नव दंपतियों को आशीर्वाद एवं बधाई दी। पूरा माहौल खुशनुमा एवं आनंदित मे सराबोर रहा। संस्थान परगना से आने वाले 150 से अधिक दृष्टिबाधित एवं दिव्यांग दूल्हा- दुल्हन और बारातियों की आवासीय एवं भोजन की व्यवस्था एक दिन पूर्व से की गई थी। 

सामूहिक विवाह समारोह में 1 हजार से अधिक लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। उपस्थित सभी लोगों ने नव- दंपतियों को आशीर्वाद दिया एवं इस पुनीत कार्य के लिए लायंस क्लब एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग को साधुवाद दिया। यह कदम समाज मे एकजुटता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है और यह कदम निःसंदेह मानवता की सच्ची सेवा है।

कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने मे लायंस क्लब के पूर्व जिलापाल माधव लखोटिया, मीडिया प्रभारी प्रो. हरबीन्दर बीर सिंह, सिद्धार्थ मजूमदार, विनोद कुमार गढयान, अशोक कुमार अग्रवाल, संजय सर्राफ, डा. देवेन्द्र सिंह, शांतनु तिवारी अजय सखूजा, राजेश मोर, निर्मल मानपुरिया, दिलीप बंका, मनीष गाड़ोदिया, बीना बंका, सुनीता चौधरी, शुभ्रा मजूमदार, निशि अग्रवाल, मीरा अग्रवाल, डा. प्रदीप कुमार, विहिप रांची महानगर के अध्यक्ष कैलाश कुमार केशरी, मुरारी अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, रतन केसरी, अनिल तिवारी, मनोज मुंडा, जितेन्द्र महतो, मनीष चौधरी, विजय परशुराम पुरिया, सुबोध वर्मा, रजनी सिंह, अनिल गोयल, गुंजन गुप्ता, सुजाता गाड़ोदिया, सुजीत कुमार, गणेश सिंह आदि ने अपना पूर्ण सहयोग दिया।

Published / 2025-03-23 16:50:54
एसआर डीएवी पुंदाग में मनाया गया शहीद दिवस

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल ,पुंदाग में शहीद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु तथा सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 

प्राचार्य एसके मिश्र ने देश के अमर सपूतों को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की गाथाओं से युवाओं को परिचित करवाया जाना चाहिए, जो देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते - हंसते फांसी के फंदों पर झूल गए।जिनके लिए राष्ट्र हित ही सर्वोपरि रहा।

जेल की चारदीवारी में भी वे अध्ययनरत रहे तथा अपने बारे में कुछ न सोच कर समाज सुधार और मातृभूमि की स्वतंत्रता के बारे में ही सोचते रहे। देश की तरक्की के बारे में सोचते रहे। देश की उन्नति में अपना योगदान देकर,देश सेवा करके ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

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