झारखंड

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Published / 2026-01-24 22:10:52
रांची में हुआ जनजाति संवाद कार्यक्रम

हिंदू किसी पूजा पद्धति का नाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति : मोहन भागवत 

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के डीबडीह स्थित कार्यक्रम स्थल पर शनिवार को जनजातीय संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन मधुकरराव भागवत द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। 

कार्यक्रम का औपचारिक परिचय तुका उरांव द्वारा कराया गया। इसके पश्चात कैलाश द्वारा प्रस्तुत गीत जनजातियों का धर्म नहीं है, इससे बढ़कर झूठ नहीं है के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। इस अवसर पर राज्य के 32 जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एवं समाज से जुड़े हुए लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम को दो सत्रों में विभाजित किया गया। 

प्रथम सत्र का संचालन मोहन कच्छप ने किया। इस सत्र में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का संदेश पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें अबुआ दिसुम, अबुआ राज की अवधारणा पर प्रकाश डाला गया। पहले सत्र में जनजातीय समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें समाज के प्रबुद्धजनों ने खुलकर अपनी बात रखी। 

प्रश्न सत्र के दौरान मुख्य रूप से सीएनटी/एसपीटी कानून का उल्लंघन कर जनजातीय भूमि की खरीद-फरोख्त, ईसाई एवं मुस्लिम समुदाय द्वारा किए जा रहे कथित धर्मांतरण, पेसा कानून के सही तरीके से लागू न होने, ग्रामसभा की शक्तियों को कमजोर किए जाने तथा जनजातीय महिलाओं एवं युवतियों के सामाजिक-सांस्कृतिक शोषण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि धर्मांतरित जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाये, जनजातीय महिलाओं के जाति प्रमाण पत्र का निर्धारण उनकी मूल पहचान के आधार पर किया जाये तथा संथाल परगना क्षेत्र में जनजातीय जमीन की सुरक्षा हेतु परंपरागत व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाये। 

दूसरे सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जिज्ञासा समाधान के अंतर्गत विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज और हिंदू समाज अलग नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू किसी पूजा पद्धति का नाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जिसमें विविधताओं के बावजूद एकता का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता जंगल, खेती और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ी है और वेदों एवं उपनिषदों का मूल भी इसी जीवन पद्धति से जुड़ा हुआ है। 

मोहन भागवत ने कहा कि पृथ्वी माता सभी भाषाओं, संस्कृतियों और समुदायों का पालन करने वाली है, इसलिए विविधता का सम्मान करना हमारी परंपरा है। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल अर्थ सत्य, सेवा, परोपकार और संयम है। समाज जब भोग और स्वार्थ में उलझ गया, तब आपसी मतभेद बढ़े और बाहरी आक्रांताओं ने इसका लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व में एक ही धर्म है, मानव धर्म, और वही हिंदू धर्म का मूल स्वरूप है। 

उन्होंने जनजातीय समाज को चेताते हुए कहा कि यदि समाज बंटेगा तो कमजोर होगा और यदि एकजुट रहेगा तो कोई शक्ति उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने सरना को पूजा पद्धति बताते हुए कहा कि इसे अलग धर्म के रूप में देखना समाज को तोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज को जोड़ने का है, न कि विभाजित करने का। 

मोहन भागवत ने जनजातीय समाज की शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों को प्रारंभिक आयु से ही अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरव की शिक्षा दी जानी चाहिए। इससे वे कभी भटकेंगे नहीं और यदि भटके भी तो अपनी जड़ों की ओर वापस लौट आयेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे महापुरुष पूरे समाज की धरोहर हैं और उनके विचारों से सभी को परिचित होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जनजातीय भूमि की रक्षा, श्रम करने वालों की प्रतिष्ठा, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और सामाजिक समरसता समय की आवश्यकता है। धर्मांतरण, जमीन हड़पने, सामाजिक शोषण और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना संगठित होकर ही किया जा सकता है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आत्मनिर्भर बनते हुए अपने स्वाभिमान को जागृत करें और किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति छोड़ें। 

कार्यक्रम में राज्य भर से आए आदिवासी बहनों और भाइयों समेत कुल 36 वक्ताओं ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन, क्षेत्र कार्यवाह- डा॰ मोहन सिंह, क्षेत्र प्रचारक राम नवमी जी, अर्जुन मुंडा, चंपई सोरेन, विकास भारती से  पद्मश्री अशोक भगत, प्रांत संघचालक सच्चिदानंद अग्रवाल, प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत कार्यवाह संजय कुमार,  प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू, संघ के क्षेत्र एवं प्रांत के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।

Published / 2026-01-24 16:27:11
बोकारो : असामाजित तत्वों ने तीन स्कूली बस और एक वैन फूंका

बोकारो में शरारती तत्वों ने स्कूल की 3 बसों और एक वैन को किया आग के हवाले, जांच में जुटी पुलिस 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। जिले में शरारती तत्वों ने एक निजी स्कूल के परिसर में खड़ी तीन बसों और एक वैन में आग लगा दी। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की जानकारी दी। चास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रवीण कुमार ने बताया कि पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के काशीझरिया स्थित गुरुकुल पब्लिक स्कूल में अज्ञात लोगों ने चार बसों और एक वैन में आग लगा दी। हालांकि, स्कूल कर्मचारियों की सतर्कता से एक बस को बचा लिया गया।

पुलिस ने बताया कि घटना को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिये थे, ताकि उनकी गतिविधियां कैमरे में कैद न हो सकें। स्कूल के निदेशक कृष्ण गोपाल पांडेय ने बताया कि इस घटना में स्कूल को करीब 1.8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को रोज की तरह स्कूल की छुट्टी के बाद ड्राइवर बच्चों को घर छोड़कर सभी बसों को गैरेज में खड़ा कर चले गये थे। 

निदेशक के अनुसार, गुरुवार देर रात स्कूल के सुरक्षा गार्ड देवी लाल महतो गैरेज के पास बने एक कमरे में सो रहे थे। तभी उन्हें गैरेज से कुछ आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो पाया कि दरवाजा बाहर से बंद था। इसके बाद उन्होंने खिड़की से देखा कि गैरेज में खड़ी बसों में आग लगी हुई है। इसके बाद गार्ड ने तुरंत स्कूल निदेशक को फोन कर घटना की सूचना दी। 

निदेशक ने बताया कि मैं भी मौके पर जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरा दरवाजा भी बाहर से बंद था। इसके बाद मैंने हॉस्टल के एक छात्र को बुलाकर दरवाजा खुलवाया और फिर गार्ड के कमरे का दरवाजा खोलकर पुलिस को सूचना दी। इस मामले में स्कूल निदेशक ने पिंड्राजोरा थाना में शिकायत दर्ज करायी है। पुलिस घटना की जांच में जुटी हुई है।

Published / 2026-01-24 16:25:26
रांची : डोरंडा के मनिटोला में पति ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या

टीम एबीएन, रांची। डोरंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत मनिटोला में शनिवार को एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गयी है।  

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही थी। शनिवार को विवाद इतना बढ़ गया कि पति ने अपना आपा खो दिया और हथियार निकालकर पत्नी पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गयी। 

गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हो गये, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गयी। घटना की सूचना पर डोरंडा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी है।

Published / 2026-01-24 16:16:03
सारंडा मुठभेड़ : अब तक 17 नक्सली किये गये ढेर

सारंडा जंगल मुठभेड़: अब तक 17 नक्सली मारे गये... 45 अब भी घिरे, मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त झारखंड लक्ष्य 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर/ चाईबासा। झारखंड के माओवादी गढ़ माने जाने वाले सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। दो दिनों तक चले विशेष अभियान आपरेशन मेगाबुरू में सुरक्षा बलों ने 17 हार्डकोर माओवादियों को मार गिराया है। इस कार्रवाई से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है और उनके संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। 

संयुक्त अभियान में बड़ी कामयाबी 

सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने सर्च आॅपरेशन के दौरान मारे गये माओवादियों के शव बरामद किए हैं। इनमें एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी नेता अनल भी शामिल है। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल काफी ऊंचा है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने मार्च 2026 तक राज्य से माओवादियों के पूरी तरह सफाए का लक्ष्य तय किया है। इस अभियान की निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह, झारखंड पुलिस के आईजी अभियान डॉ. माइकल राज एस, झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे और डीआईजी इंद्रजीत महथा कर रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार बचे हुए माओवादी पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटा नागरा और किरीबुरू थाना क्षेत्र की सीमा पर घिरे हुए हैं। इनकी संख्या करीब 45 बताई जा रही है। इनका नेतृत्व एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर/सुनिर्मल/सागर कर रहा है, जो गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का रहने वाला है। 

45 माओवादी अभी भी घिरे 

सूत्रों के मुताबिक माओवादियों ने सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए चारों ओर आईईडी (बारूदी सुरंग) बिछा रखी हैं। उनके पास एके-47, इंसास, एसएलआर और 303 राइफल जैसे हथियार हैं, लेकिन गोला-बारूद सीमित हो चुका है। बाहर से सप्लाई पूरी तरह बंद है। यह भी सूचना मिली है कि बचे हुए माओवादियों में से कई आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहे हैं, हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो और गोइलकेरा थाना क्षेत्र अब पूरी तरह माओवादियों से खाली हो चुके हैं। ये इलाके लंबे समय तक माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने रहे थे। सुरक्षा बलों ने माओवादियों की घेराबंदी के लिए प्रभावित इलाकों में आठ अस्थायी कैंप बनाए हैं। इन कैंपों से झारखंड और ओडिशा दोनों ओर से दबाव बनाया जा रहा है, ताकि माओवादियों के बचने का कोई रास्ता न बचे।

Published / 2026-01-23 23:21:26
लोहरदगा : गुरुकुल परिवार एक दिन कोटारी के ग्रामीणों के साथ बिताया

  • गुरुकुल परिवार एक दिन कोटारी के ग्रामीणों के साथ बिताया
  • गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता कर आत्मीय भाव प्रबल होता है: आचार्य शरच्चंद्र
  • लोहरदगा के अंतिम घर और व्यक्ति की सहायता के लिए गुरुकुल शांति आश्रम परिवार अंतिम गांव कोटारी पहुंचा
  • ग्रामीणों को कंबल और बच्चों को शैक्षणिक सामग्री मिला

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा और गुमला जिला सीमा पर स्थित लोहरदगा पेशरार प्रखंड के रोरद पंचायत अंतर्गत कोटारी गांव में निवास करने वाले समाज के अंतिम घर और व्यक्ति से आत्मीय जुड़ाव के उद्देश्य को लेकर गुरुकुल शांति आश्रम लोहरदगा के आचार्य शरच्चंद्र आर्य के नेतृत्व में आश्रम आठ सदस्य टीम रविवार को पूरा दिन गांव के गरीबों और जरूरतमंदों के बीच अपना समय बिताया। इस अवसर पर समरसता यज्ञ का आयोजन किया गया। आश्रम के आचार्य शरच्चंद्र आर्य के आचार्यत्व में यज्ञ में तमाम ग्रामीणों ने आहुतियां दी। आश्रम की ओर से ग्रामीणों की सेवा की गई । यह आश्रम के परोपकार और मानवीय मूल्यों को दर्शाता है।

गुरुकुल शांति आश्रम और आर्य समाज संस्था ने ग्रामीणों के बीच कंबल का वितरण किया। सामूहिक भोजन में तमाम ग्रामीण शामिल हुए। गांव के तमाम बच्चों को शैक्षणिक सामग्रियां दी गई। बच्चों के लिए खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ रहे प्रतिभागी बच्चों को सम्मानित किया गया।

मौके पर शरच्चंद्र आर्य ने कहा कि यज्ञ सनातन संस्कृति के साथ प्रकृति से जुड़ा हुआ कार्यक्रम है। आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है। यज्ञ- हवन विशुद्ध रूप से प्रकृति की पूजा है। हवन सामग्री जड़ी बूटियां से युक्त होता है। जल और गोरस से प्राप्त घी का हम उपयोग कर वातावरण को शुद्ध बनाते हैं। यज्ञ से हमारी संस्कृति सशक्त होती है। लोग निरोग बनते हैं। बच्चों में संस्कार आता है। इससे सनातन संस्कृति को और बल मिलता है। सदियों से यह परंपरा गुरुकुलों के माध्यम से चल रहा है।

मौनी अमावस्या का दिन गरीबों और जरूरतमंदों के बीच दान पूर्ण करने का अवसर आज कोटारी गांव में मिला है। लोहरदगा से 55 किलोमीटर दूर पुतरार- कोटारी गांव में आकर ग्रामीण का प्रेम और कार्यक्रम में सहभागिता करना निश्चित रूप से संबल प्रदान करने वाला है। इस गांव में लगभग 40 घर है। और इसकी आबादी तकरीबन  325 है। यहां तीन आंगनबाड़ी केंद्र है। प्राइमरी स्कूल है। 

नल जल योजना एक यूनिट लम्बे समय से खराब पड़ा हुआ है। गांव के दो चापाकल भी खराब पड़े हैं। सड़क नाम का कोई चीज ही नहीं है। अच्छी बात यह है की लोहरदगा से इतनी दूर पर स्थित इस गांव में एक रेलवे, एक आर्मी, और एक सहायक पुलिस के पद पर कार्यरत है। अभी भी गांव में शिक्षा का आभाव है। ऐसे गांव में गुरुकुल परिवार का पहुंचना, उनके बीच एक दिन बिताना, निश्चित रूप से ग्रामीणों को मनोबल को बढ़ाता है।

आश्रम के भूषण प्रसाद ने कहा कि हम चाहते हैं की इस सुदूरवर्ती गांव में शिक्षा-स्वास्थ्य सहायता मिले। आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण देना जैसे कार्य हो, इससे जरूरतमंदों को तत्काल राहत मिलती है। इससे ग्रामीण सशक्त बनते हैं। इसे ही सेवा या धर्म का सार कहा जाता है। इस कार्यक्रम में ठंड से पीड़ित लगभग 75 जरूरतमंदों के बीच कंबल दिया गया।

गुरुकुल शांति आश्रम की शिक्षिका ज्योति कुमारी ने शिक्षा और कौशल विकास ,बच्चों को शिक्षा देना, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण देने पर बोल दिया।नीरज कुमार ने कहा कि आजीविका सहायता छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने पर कई स्तर पर लाभ मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुकुल शांति आश्रम का सामाजिक जुड़ाव के तहत गरीबों के साथ समय बिताना, उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें भावनात्मक समर्थन देना। मानवीय कर्तव्य जरूरतमंदों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है, यह धार्मिक और नैतिक कर्तव्य माना जाता है। ग्रामीणों का सशक्तिकरण, सिर्फ दान नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना है जैसा आश्रम के द्वारा किया जा रहा है।

सामाजिक समरसता यज्ञ के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को जोड़ना और उनमें एकता लाना यह गुरुकुल का उद्देश्य है। 
गुरुकुल का समाज के कमजोर वर्गों के प्रति निभाए जाने वाले उत्तरदायित्वों को दर्शाता है, जो उन्हें गरीबी और कठिनाइयों से उबारने में मदद करता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सुखनाथ नगेसिया, चांदमुनी  उरांव, बिपता उरांव, बालमती उरांव, चमन खेरवार जिरमनिया देवी, सीतामुनि उरांव, लक्ष्मण उरांव, धनलाल उरांव मनराम उरांव , सुकरा उरांव, बिहार उरांव, विनोद उरांव, फूलदेव उरांव, पर्वतीया उरांव, विरसो उरांव, जमुना उरांव, देवनाथ, उरांव कंदरा उरांव, बिनेश्वर उरांव आदि ने महत्वपूर्ण योगदान किया।

Published / 2026-01-23 21:08:30
राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवा कमांड ने मनायी नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी की जयंती

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय सैनिक संस्था रांची महानगर के तत्वावधान में आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी की जयंती रांची देवी मंडप रोड हेसल सरोवर नगर रांची में मनायी गयी। मौके पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवा कमांड झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार उर्फ पुटू ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया। 

वहां उपस्थित सभी लोगों ने नेताजी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। पुट्टू ने बताया कि आजादी हमें खैराती में नहीं मिली है। इसके लिए कितने लोगों ने अपनी जान गवां दी और वतन के लिए मर मिटे। हमें उनकी शहादत को नहीं भूलना चाहिए। 

उनमें से एक क्रांतिकारी नेताजी भी थे जिन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की और इसकी मदद से अंग्रेजों के खिलाफ जोरदार संघर्ष किया। नेता जी का व्यक्तित्व एवं उनके विचार हम सब के लिए अनुकरणीय है। देश की आजादी में उनके द्वारा दिये गये योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। जय हिंद का नारा उन्होंने दिया था यह नारा हमेशा हमें नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है। 

खास करके युवाओं से कहा कि वह अपने विचार, व्यवहार, कार्य के प्रति अच्छी सोच रखें। समाज एवं देश को कोई एक व्यक्ति नहीं बदल सकता है। इसके लिए हम सभी को अपनी-अपनी जिम्मेवारी निभानी चाहिए। पढ़ाई करके नौकरी पाना ही जीवन का सार नहीं है।समाज,राष्ट्र के प्रति भी हमें अपनी जिम्मेवारी को निभाना है। 

उन्होंने सभी के माता-पिता से विशेषकर आग्रह किया कि अपने बच्चों में बचपन से ही देश भक्ति के साथ-साथ संस्कार देने का कार्य करें। ताकि आप भी अपने बेटे बेटियों पर गर्व कर सके और देश और समाज को भी उनपर नाज हो क्योंकि ये बच्चे ही कल का भविष्य है।आज की युवा शक्ति ही कल की राष्ट्र शक्ति है। 

इस अवसर पर देश भक्ति गीत गाये। इस अवसर पर छोटे छोटे बच्चे एवं युवा उपस्थित थे। इस अवसर पर छोटे छोटे बच्चे युवा भारत माता की जय, जय हिंद, नेता जी सुभाषचन्द्र बोस अमर रहे, आज का युवा कैसा हो सुभाषचंद्र बोस जैसा हो, हम सब भारतीय एक है नारा के साथ सरोवरनगर से बैंक कॉलोनी प्रभात फेरी निकाला गया। इस अवसर पर सभी लोग सामूहिक रूप से देश भक्ति गीत गाये। 

इस अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवा कमांड झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार पुटू, मुन्ना कुमार, कृष कुमार, हर्षराज, आमोद सिंह, अमृतेश पाठक, अमित कुमार पाठक, आयुष कुमार, ऋषभ कुमार, प्रवीण कुमार, राष्ट्रीय सैनिक संस्था महिला विंग प्रेरणा कुमारी, अनुषा कुमारी, सिंप्पी कुमारी, अर्चना पाठक एवं छोटे बच्चे उपस्थित थे। उक्त जानकारी राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवा कमांड के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार पुटू ने दी।

Published / 2026-01-23 21:02:41
झारखंड : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने वसंत पंचमी पर संभाला पदभार

बसंत पंचमी पर आदित्य साहू ने संभाला प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद, संगठन को मजबूत करने का किया आह्वान 

टीम एबीएन, रांची। रांची में बसंत पंचमी के अवसर पर झारखंड भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में विधिवत रूप से अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया। पदभार संभालने से पूर्व उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन-पूजन किया और संगठन की मजबूती तथा राज्य के कल्याण की कामना की। 

प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचने पर आदित्य साहू का भव्य स्वागत किया गया। कार्यालय परिसर भाजपा के झंडों और नारों से गूंज उठा। उन्हें बधाई देने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक मौजूद रहे। इस दौरान सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। 

पदभार ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में भाजपा संगठन को जमीनी स्तर तक और अधिक सशक्त व धारदार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता भाजपा की असली ताकत है और सभी को साथ लेकर राज्य की जनविरोधी सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जायेगी।

Published / 2026-01-23 20:32:46
रांची : तिरुपति अपार्टमेंट कांके रोड में बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया

टीम एबीएन, रांची। रांची के कांके रोड स्थित तिरुपति अपार्टमेंट में बसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा का पावन पर्व हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण के साथ मनाया गया। ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना हेतु प्रात: काल विधिवत रूप से उनकी प्रतिमा की स्थापना की गयी। प्रतिमा को सुंदर पुष्पों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर बसंती रंग और आध्यात्मिक आभा से सुशोभित हो उठा। 

पूजा-अनुष्ठान की शुरूआत पंडित जी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना से हुई। तत्पश्चात सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से भाग लिया। पूजा के दौरान मां सरस्वती को प्रसाद स्वरूप बुंदिया, फल एवं अन्य पूजन सामग्री का भोग अर्पित किया गया। भोग अर्पण के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं प्रसन्नता के साथ ग्रहण किया। 

इस पावन अवसर पर तिरुपति सोसाइटी की अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर पूजा-अर्चना में सहभागिता निभायी, जिससे सामाजिक समरसता और सामूहिक भक्ति का सुंदर दृश्य देखने को मिला। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला, वहीं महिलाओं ने पूजा व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभायी। 

इस अवसर पर तिरुपति सोसाइटी के पूर्व सचिव संजय सर्राफ ने उपस्थित सभी सदस्यों एवं श्रद्धालुओं को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विवेक और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। मां सरस्वती की कृपा से जीवन में शिक्षा, संस्कार और सद्बुद्धि का विकास होता है। 

उन्होंने सभी से इस पर्व के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।समूचा आयोजन शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। बसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर तिरुपति अपार्टमेंट में आयोजित सरस्वती पूजा ने सभी के मन में आध्यात्मिक उल्लास, सौहार्द और आनंद का संचार किया।

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