एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। झारखंड में चल रहे नक्सल अभियान में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता हासिल हुई है। हजारीबाग पुलिस और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियान में एक करोड़ के इनामी सहित तीन नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया है।
पुलिस मुख्यालय सूत्रों के द्वारा तीनों नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की गयी है। हजारीबाग के गोरहर थाना क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई है। सर्च अभियान में तीनों नक्सलियों के शव बरामद कर लिये गये हैं। साथ ही मौके से तीन एके-47 भी बरामद किये गये हैं।
केंद्रीय कमेटी मेंबर और एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश।
झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का मेंबर रघुनाथ हेंब्रम, जिस पर 25 लाख इनाम रखा गया था। कमेटी मेंबर और 10 लाख का इनामी वीर सेन गंझू।
टीम एबीएन, रांची। रांची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर दौरे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने कड़ा प्रहार किया है। रविवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जब मणिपुर जल रहा था और वहां निर्दोष लोग हिंसा की भेंट चढ़ रहे थे, उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने चुप्पी साधे रखी और मणिपुर नहीं गए। लेकिन जैसे ही विधानसभा चुनाव करीब आया, अचानक प्रधानमंत्री को मणिपुर की याद आ गई और वे वहां पहुंचकर घोषणाओं की झड़ी लगाने लगे।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि मणिपुर की जातीय हिंसा ने देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हिंसा में 960 लोगों की मौत हुई, हजारों लोग घायल हुए और दस हजार से अधिक घर आग के हवाले कर दिए गए। आज भी पचास हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
इसके बावजूद प्रधानमंत्री को मणिपुर जाने में 870 दिन यानी 29 महीने लग गए। इस दौरान उन्होंने 44 देशों की यात्रा कर ली, लेकिन मणिपुर की जनता तक नहीं पहुंचे।
झामुमो नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अब चुनावी मंच से सात हजार पक्के मकान बनाने की घोषणा की है। यह पैसा मोदी का नहीं बल्कि देश की जनता का है।
उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में हालात इतने बिगड़े कि वहां के मुख्यमंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा, लेकिन उस समय भी प्रधानमंत्री ने एक शब्द नहीं कहा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया।
भट्टाचार्य ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जहां-जहां चुनाव होते हैं, वहां प्रधानमंत्री मोदी जरूर पहुंचते हैं। मणिपुर का यह दौरा भी उसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री बिहार भी आने वाले हैं, क्योंकि वहां भी चुनाव है।
झामुमो प्रवक्ता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री बांटने की राजनीति करते हैं। कभी धर्म के आधार पर, तो कभी जाति के आधार पर। जबकि झारखंड की जनता भाजपा के इन हथकंडों को भलीभांति समझ चुकी है और इनके बहकावे में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार सभी समुदायों को साथ लेकर चल रही है और यही इसकी असली ताकत है।
टीम एबीएन, रांची। हजारीबाग जिले में रविवार सुबह एक सड़क दुर्घटना में करीब 12 लोग घायल हो गये, जिनमें से 2 की हालत गंभीर है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
एक अधिकारी ने बताया कि हजारीबाग शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर यह हादसा सुबह करीब छह बजे राष्ट्रीय राजमार्ग-522 पर बिष्णुगढ़ और बगोदर के बीच हुआ, जब एक पिकअप वैन अनियंत्रित होकर पलट गई।
बिष्णुगढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) बीएन प्रसाद ने बताया कि वाहन हजारीबाग की महाराष्ट्रियन कॉलोनी से यात्रियों को लेकर बगोदर जा रहा था, जो हजारीबाग और गिरिडीह जिले की सीमा पर स्थित है।
इस हादसे में कम से कम 12 लोग घायल हो गये हैं। पुलिस ने बताया कि गंभीर रूप से घायल 2 मरीजों को रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर किया गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। जिले में रविवार अहले सुबह पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान पांच लाख का इनामी नक्सली मुखदेव यादव मारा गया। जानकारी के मुताबिक मुठभेड़ मनातू जंगल में हुई, जहां झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से कांबिंग आपरेशन चलाया। मारे गये नक्सली मुखदेव यादव का संबंध टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति समिति) संगठन से था और वह लंबे समय से पलामू इलाके में सक्रिय था।
राज्य सरकार ने उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सुरक्षाबलों को मुखदेव के ठिकानों की कई बार गुप्त सूचना मिली थी, लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। इस बार विशेष अभियान में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। इस आपरेशन में कोबरा, झारखंड जगुआर और अन्य बलों के जवान शामिल थे। अभियान का मुख्य लक्ष्य 10 लाख का इनामी नक्सली कमांडर शशिकांत था।
पुलिस टीम जैसे ही मनातू जंगल में आगे बढ़ी, टीपीसी के उग्रवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुखदेव मारा गया। गौरतलब है कि तीन सितंबर को पलामू में हुई एक मुठभेड़ में दो पुलिस जवान शहीद हो गये थे। उस घटना में भी मुखदेव शामिल था।
पुलिस अब उस क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सलियों की तलाश में जुट गयी है। पलामू के मनातू, तरहसी और चतरा के सीमावर्ती इलाके टीपीसी के गढ़ माने जाते हैं। शशिकांत का दस्ता 8 से 10 सदस्यों का बताया जाता है, जिनमें मुखदेव यादव और नगीना भी शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। रिम्स में शनिवार 13 सितंबर 2025 को गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमरेश्वर सहाय की आब्जर्वर के रूप उपस्थिति में हुई शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने की।
रिम्स शासी परिषद की बैठक में हाईकोर्ट द्वारा दिये गये 16 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद सहमति बनी। जिसमें अस्पताल के लिए तत्काल वेंटिलेटर खरीदने का प्रस्ताव पास किया गया। वहीं रिम्स प्रबंधन को जल्द से जल्द वेंटिलेटर की खरीदारी करने का भी निर्देश दिया गया।
इसके अलावा परचेसिंग से जुड़े कई प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। रिम्स में दवाओं की खरीद और टफक मशीन की जल्द खरीदारी के प्रस्ताव पर भी जीबी ने अपनी सहमति प्रदान की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने बताया कि हाइकोर्ट ने हमसे जवाब मांगा था। हमने अपना पक्ष रखते हुए जवाब दिया है।
बैठक में रिम्स के डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला भी उठाया गया था। जिसपर यह निर्णय लिया गया कि सभी डॉक्टर के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि रिम्स के तमाम डॉक्टर्स को सभी तरह के भत्ते दिए जाते हैं, वे लोग प्राइवेट प्रैक्टिस ना करें। अगर कोई डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता है तो उसे चेतावनी दी जायेगी। इसके बाद वार्ता कर समस्या का समाधान किया जायेगा।
इससे पहले उन्होंने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों की जानकारी प्रबंधन को नहीं है, ऐसे प्रस्ताव को जीबी की बैठक में क्यों लाया गया? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बैठक में यह बात भी सामने आई कि अस्पताल में मशीनों की खरीदारी नहीं हो रही है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस बार 30 करोड़ रुपये ही प्रबंधन ने खर्च किए हैं। वहीं 200 करोड़ रुपये प्रबंधन के पास खर्च करने के लिए बचे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यहां लोग खर्च करने से डरते हैं, यह ठीक नहीं है। रिम्स प्रबंधन को इस राशि को जल्द खर्च करने को कहा गया है। मशीनों की खरीदारी से मरीजों को राहत मिलेगी और हम मरीजों की बेहतर सेवा कर सकेंगे।
टीम एबीएन, रांची। संपूर्ण झारखंड में रैयत विस्थापितों के हक अधिकार के प्रति आंदोलन जोरों पर है। झारखंड लोहरदगा जिला किस्को थाना अन्तर्गत पाखर हिंडाल्को बॉक्साइड माइंस में रैयत विस्थापित के अधिकार को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया।
शाम तक कंपनी के अधिकारी वार्ता नहीं करने पर ग्रामीण आक्रोशित कंपनी के कार्यालय के अंदर घुस कर विरोध में नारेबाजी करने लगे तथा कंपनी के एचआर या मैनेजर से मुलाकाती के लिए अड़ गये। आंदोलन का नेतृत्व केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने किया। तेज आंदोलन के दबाव से देर शाम कंपनी के अधिकारीयों और ग्रामीण के बीच वार्ता हुई।
मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि झारखंड में कंपनी और बाहरी ताकत झारखंडी आदिवासी मूलवासी का शोषण कर रहे हैं। झारखंड के कुड़मी, आदिवासी, सदान, मूलवासी एकजुट होकर ही बाहरी शोषण से मुक्ति संभव है।
लोहरदगा जिला किस्को थाना अन्तर्गत हिंडाल्को बॉक्साइड पाखर माइंस में प्रतिदिन लगभग 400 ट्रक चलती है जिससे सरकार को टेक्स लगभग प्रतिदिन 24 लाख महीना में लगभग 72 करोड़ एवं प्रतिवर्ष लगभग 86 करोड़ 40 लाख रुपये टैक्स जाता है। पिछले लगभग 78 सालों से सरकार को राजस्व मिल रहा है लेकिन दुर्भाग्य 78 साल बाद भी कंपनी के सीएसआर और डीएमफटी फंड का बंदरबांट किया जा रहा है।
विस्थापित गांवों के लिए सड़क सुविधा तक नहीं है, शिक्षा व्यवस्था नहीं है, स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। ज्ञापन के माध्यम से पाखर से धुर्वा मोड़ किस्को तक तत्काल सड़क निर्माण किया है, सीएम एक्सलेंस स्कूल के तर्ज पर शिक्षा व्यवस्था किया जाये, सुविधा युक्त हॉस्पिटल व्यवस्था किया जाय एवं कार्यरत मजदूर न्यूनतम मजदूरी और मानक के अनुरूप सभी सुविधा प्रदान किया जाये।
साथ ही उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर निरंतर आंदोलन जारी रखने का चेतावनी दिया। कंपनी के अधिकारी सभी मांगो को जायज मानते हुए अतिशीघ्र पूरा करने का साकारात्मक आश्वासन दिया गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष चैतु उरांव, वरीय उपाध्यक्ष कृष्ण बड़ाइक, सचिव किशोर उरांव, महासचिव पंचम एक्का, गुणा भगत, हजारी उरांव, के अलावा अन्य सड़कों आदिवासी रैयत मौजूद थे।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 13 सितंबर को राष्ट्रीय आह्वान के तहत फोरम आफ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन झारखंड का 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल माननीय रक्षा राज्य मंत्री, संजय सेठ (सांसद) से उनके अरगोड़ा स्थित कार्यालय में भेंटकर 2 सूत्री मांगों पर आधारित ज्ञापन सौंपा।
जिसमें पेंशन अधिनियम में ड्राकोनियन संशोधन एवं 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन में अप्रत्याशित विलंब को लेकर एसोसिएशन के द्वारा चिंता व्यक्त की गई तथा इस अधिनियम को सांसद के माध्यम से निरस्त कराये जाने का अनुरोध किया गया।
इस अधिनियम के कारण 33 लाख से अधिक सिविल पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग के लाभ से वंचित कर दिया जायेगा। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद महोदय से केंद्र सरकार को ज्ञापन समर्पित करने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल में पोस्टल के एम जेड खान, के डी राय व्यथित, रामचंद्र प्रसाद, देव चरण साहू, धनेश्वर गोस्वामी, रेलवे के जगजीत सिंह बहल, चंचल कुमार सिंह, बीएस एन एल पेंशन वेलफेया एसोसिएशन के नरेश लाल और एआईबीडीपीए के विनोद कुमार शामिल थे।
आंदोलन का यह तीसरा चरण था। पहले चरण में 24 जुलाई को शहीद चौक पर सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन झारखंड के द्वारा मानव श्रृंखला बनायी गयी थी और दूसरे चरण में 25 अगस्त को राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया गया था और राज्यपाल को 2 सितंबर को एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा था।
आंदोलन के चौथे चरण में इन मुद्दों को लेकर 28 सितंबर को एसोसिएशन की प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी और आंदोलन के अंतिम चरण (5वें चरण) में दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्तूबर को धरना दिया जायेगा जिसमें देश भर के हजारों सिविल पेंशनर्स भाग लेंगे। झारखंड से भी एक दर्जन से अधिक सिविल पेंशनर्स इस धरना में शामिल होंगे। उक्त जानकारी फोरम आॅफ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन झारखंड, रांची के संयोजक एम जेड खान (6201143329) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रांची (रिम्स), में आज रिम्स शासी परिषद की एकक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने की।
बैठक में जस्टिस अमरेश्वर सहाय, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, स्थानीय विधायक सुरेश कुमार बैठा, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, रिम्स निदेशक, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति, रिमपास निदेशक, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में झारखंड उच्च न्यायालय के गाइडलाइन्स के आलोक में 16 प्रमुख एजेंडों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसमें परचेजिंग में देरी और उससे उत्पन्न समस्याएं, ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं व खामियां, रखरखाव व्यवस्था और खराब वेंटीलेटरों की स्थिति, आवश्यक मशीनों की खरीद और उपयोग, इलाज की वर्तमान स्थिति और सुधार की रूपरेखा शामिल था।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse