एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद/पलामू। हुसैनाबाद, पलामू। शारदीय नवरात्र को लेकर सरकारी महकमा हाई अलर्ट में है एक तरफ जँहा जिला प्रशासन उपायुक्त महोदया ने लगातार सभी क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर बनाई है। वही उनके निर्देश पर हुसैनाबाद अनुमण्डल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मूड में है अनुमण्डल पदाधिकारी आईएएस ओमप्रकाश गुप्ता, एलआरडीसी गौरांग महतो, अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी आईपीएस एस मोहम्मद याकूब,अंचलाधिकारी पंकज कुमार, बीडीओ सुनील वर्मा,पुलिस निरीक्षक सोनू कुमार चौधरी आदि कई पदाधिकार ने अनुमण्डल क्षेत्र समेत हुसैनाबाद प्रखण्ड के दंगवार, देवरी कला, देवरी खुर्द, पोलडीह, पतरा कला, लँगरकोट, ऊपरी कला हुसैनाबाद शहरी क्षेत्र में महावीर जी भवन, कुरमी टोला, स्टेशन रोड, दुर्गा बाड़ी, मोहम्दाबाद, चार धाम नहर मोड़ आदि कई स्थानों पर दौरा किया एवं लोगो से अपील की है कि माँ भगवती का पूजा है आप सब शांति व सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाए अनुमण्डल प्रशासन आपकी सेवा में तत्पर है। एसडीओ ने कहा कि विधि व्यवस्था भंग करने वालो के खिलाफ प्रशासन सख़्ती से निपटेगी,वहीं एलआरडीसी ने कहा कि यहां के लोग बहुत ही मिलनसार व भक्तिभाव से पूजा करते है आपसी सौहार्द नही बिगड़ने देंगे,एसडीपीओ ने कहा कि शोशल मीडिया या किसी भी पूजा पांडाल के पास पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है सभी पूजा समिति के लोग किसी भी सरारती तत्वों के गतिविधियों को देखते ही पुलिस सूचना दे,मौके पर पुअनि सोनू गुप्ता,बबलू कुमार,मुकेश कुमार,सौरभ चौबे,समेत लगभग दर्जनो पुलिस अधिकारी व शास्त्र बल के जवान आदि लोग शामिल थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।
इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है।
ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।
1. अणिमा 2. लघिमा 3. प्राप्ति 4. प्राकाम्य 5. महिमा 6. ईशित्व,वाशित्व 7. सर्वकामावसायिता 8. सर्वज्ञत्व 9. दूरश्रवण 10. परकायप्रवेशन 11. वाक्सिद्धि 12. कल्पवृक्षत्व 13. सृष्टि 14. संहारकरणसामर्थ्य 15. अमरत्व 16. सर्वन्यायकत्व 17. भावना 18. सिद्धि
देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं।
इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। इन सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे।
वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है।
अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे मां, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। शारदीय नवरात्र के अष्टमी को लोकसभा सांसद सुखदेव भगत श्री मनोकामना दुर्गा पूजा समिति पतरा टोली लोहरदगा पहुंचकर आरती में शामिल हुए और भव्य भंडारा का शुभारंभ किया।
मौके पर सांसद ने वहां पर उपस्थित सभी लोगों को दुर्गा पूजा का बधाई देते हुए कहा कि मां की शक्ति हमारे अंदर के आसुरी शक्ति को संहार करें।
दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और हमें अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को हराने के लिए प्रेरित करती है। मां दुर्गा सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें जिससे हमारे क्षेत्र पूरे देश में खुशहाली समृद्धि और शांति बनी रहे।
15 अक्तूबर को माओवादी करेंगे झारखंड-बिहार और बंगाल बंद,
सार
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झारखण्ड
Jharkhand: पूर्वी रीजनल ब्यूरो ने घोषणा की है कि 8 अक्तूबर से 14 अक्तूबर तक पूरे बिहार-झारखंड सहित उत्तरी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में प्रतिरोध सप्ताह मनाया जाएगा। इसके बाद 15 अक्तूबर को इन राज्यों में पूर्ण बंद रहेगा।
Jharkhand News: Maoists will close Jharkhand, Bihar and Bengal on October 15, announced by issuing a letter.
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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नक्सलियों के खिलाफ अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई आवर फर्जी मुठभेड़ करार देते हुए भाकपा माओवादियों ने बहुत एलान किया है। माओवादियों ने पत्र जारी कर आने वाले 15 अक्तूबर को झारखंड-बिहार और बंगाल में बंद करने का ऐलान किया है। वहीं ऑपरेशन कगार के तहत संगठन ने 8-14 अक्तूबर तक प्रतिरोध सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है।
पत्र जारी कर माओवादियों ने कहा है कि पुलिस ने एक प्लानिंग के तहत उनके बड़े बड़े नेताओं को मुठभेड़ में मार डाला है। माओवादियों ने केन्द्रीय पुलिस के कोबरा बटालियन पर अधिक तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि 15 सितंबर 2025 को हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पांतीतेरी जंगल में पुलिस और कोबरा बल ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर पार्टी के शीर्ष नेताओं सहदेव सोरेन उर्फ अनुज, रघुनाथ हेम्ब्रम उर्फ चंचल और रामखेलावन गंझू उर्फ वीरसेन की हत्या कर दी। संगठन का कहना है कि इन नेताओं को साजिश के तहत पकड़ा गया और बाद में मार गिराया गया।
7 सितंबर को रांची में रेडियो प्रसारण केंद्र से प्रसारित खबर में जोनल कमांडर अमित हांसदा उर्फ अपटन की मुठभेड़ में मौत की सूचना दी गई, जबकि संगठन का कहना है कि पुलिस ने उन्हें 4 सितंबर को ही गिरफ्तार कर तीन दिन तक यातनाएं दीं और बाद में गोली मार दी। 13 अगस्त को नीलेश उर्फ अरुण को भी घायल अवस्था में पकड़कर हत्या कर दी गई। वहीं, जयकांत, गुरु चरण और बासमती समेत कई अन्य कार्यकर्ताओं को गुप्त रूप से हिरासत में रखे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
माओवादी संगठन ने आरोप लगाया कि हाल की सभी घटनाओं में मारे गए अधिकांश लोग आदिवासी या मूलवासी समुदाय से हैं। संगठन ने इसे सरकार की दमनकारी नीति बताते हुए कहा कि माओवादी आंदोलन को खत्म करने के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों तक को निशाना बनाया जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हो रही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अलका तिवारी को विदाई दी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि निवर्तमान मुख्य सचिव अलका तिवारी ने अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके मार्गदर्शन से राज्य सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने में मदद मिली है। सीएम ने कहा कि उनके सेवा काल की सराहना करते हुए कहा कि श्रीमती तिवारी ने सदैव ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य किया।
उन्होंने राज्य प्रशासन को एक नई दिशा दी और प्रशासनिक परंपराओं को मजबूती दी। मुख्यमंत्री ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए आशा व्यक्त की कि आगे भी वे अपने अनुभव और मार्गदर्शन से समाज को लाभान्वित करती रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अविनाश कुमार की कार्यकुशलता, दूरदर्शिता एवं प्रशासनिक अनुभव से राज्य प्रशासन को और अधिक मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार की विकास की योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आएगी। इस अवसर पर राज्य के नए विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव, सचिव सहित वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा 2 अक्टूबर, गुरुवार को विजयादशमी के पावन अवसर पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में भव्य देवी शक्ति सामूहिक शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
इस पावन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 2 अक्टूबर विजयादशमी के दिन अपराह्न- 2 बजे मंदिर परिसर में विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पूजन-अर्चना के साथ शक्ति स्वरूपा देवी मां के विविध अस्त्र-शस्त्रों की आराधना की जाएगी। सामूहिक शस्त्र पूजन के उपरांत हनुमान चालीसा व सुंदरकांड पाठ एवं महाआरती का आयोजन किया गया है।
पूजन उपरांत श्रद्धालुओं को प्रतीकात्मक रूप से 151 तलवारों का वितरण किया जाएगा, जो धर्म, साहस और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देगा। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर खिचड़ी भोग महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का अनुरोध किया है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतवर्ष विविधता में एकता का देश है, जहां हर पर्व एक गहरी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होता है। इन्हीं पर्वों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है विजयादशमी, जिसे आमजन दशहरा के नाम से भी जानते हैं। यह पर्व अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष विजयदशमी पर्व 2 अक्टूबर दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है।
यह नवरात्रि के समापन के साथ जुड़ा हुआ है। विजयादशमी के पर्व के पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं, जो इसे अत्यंत महत्व प्रदान करती हैं।रामायण की कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन अधर्म, अन्याय और अहंकार के प्रतीक रावण का वध कर सत्य, धर्म और मर्यादा की विजय सुनिश्चित की थी।
यह घटना अयोध्या लौटने से पहले की है और इसी कारण इसे विजय की दशमी कहा जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध कर शक्ति की विजय को स्थापित किया था। नवरात्रि के नौ दिनों तक साधना और उपासना के बाद दशमी के दिन शक्ति की पूर्णता का उत्सव मनाया जाता है।
विजयादशमी का पर्व पूरे भारत में भिन्न-भिन्न तरीकों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला का मंचन किया जाता है, जिसमें राम, रावण, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के चरित्रों को जीवंत किया जाता है। दशहरे के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।
पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड असम और उड़ीसा में यह दिन दुर्गा पूजा का अंतिम दिन होता है, जिसे विजया दशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है और नारी शक्ति को प्रणाम किया जाता है। महाराष्ट्र में यह दिन शस्त्र पूजन और विजया अभिवादन का अवसर होता है।
दक्षिण भारत में इसे आयुध पूजन और सरस्वती पूजन के रूप में मनाया जाता है, जहां ज्ञान, कला और शस्त्रों की पूजा की जाती है। विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है। यह पर्व हमें सिखाता है कि कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अधर्म और अन्याय का अंत सुनिश्चित है। यह आत्मबल, साहस, संयम और सत्कर्मों की प्रेरणा देता है।
यह दिन यह भी याद दिलाता है कि हर व्यक्ति के भीतर रावण रूपी अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या को नष्ट करना ही असली विजय है। विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति के मूल्यों-धर्म, सत्य, शक्ति और नैतिकता-का प्रतीक है। यह पर्व हर वर्ष हमें अपने भीतर की बुराइयों को पहचानने और उन्हें समाप्त करने की प्रेरणा देता है।
यह पर्व न केवल पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि आज के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में भी इसकी प्रासंगिकता अत्यंत गहन है। इसलिए विजयादशमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का संदेश है, एक ऐसा पर्व जो हर वर्ष हमें याद दिलाता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।
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