टीम एबीएन, लोहरदगा। लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को अपना सीएम चेहरा घोषित किया है, लेकिन अभी तक एनडीए के द्वारा नीतीश कुमार को मुख्य मंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया गया है।
इससे यही स्पष्ट होता है कि भाजपा टीम नीतीश कुमार को धोखा दे रही है। जिस प्रकार भाजपा ने महाराष्ट्र में जो किया वहीं बिहार में करेगी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया और भाजपा अपना मुख्यमंत्री देवेंद्र फर्नांडिस को बना दिया, उसी प्रकार भाजपा बिहार में करने जा रही है।
भाजपा बोल रही है कि वह नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं अगर नीतीश चुनाव जीतते है तो भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनायेगी। यही कारण है कि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री कैंडिडेट घोषणा करने से बच रही है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद,पलामू। गुरुवार को छठ महापर्व को देखते हुए अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी आईपीएस एस मोहम्मद याकूब और निवर्तमान नगर अध्यक्ष शशि कुमार ने शहर के सभी छठ घाटों जैसे भगवान भाष्कर छठ तालाब, जमुहरी माई, पञ्च सरोवर गैता पोखरा आदि स्थानों पर निरीक्षण किया।
इस दौरान एसडीपीओ ने तालाब में अधिक पानी से सुरक्षा व मेला में विभिन्न स्थानों पर पुलिस की विशेष सुरक्षा स्थानों को चिन्हित किया तथा पुलिस अधिकारियों को सभी स्थानों को चिन्हित करने व नगर पंचायत कर्मियों को पानी मे रस्सी का बैरिकेटिंग लगाने का निर्देश दिया।
वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष शशि कुमार ने सभी सफाई जमफर एवं सफाई कर्मचारियों को सभी छठ घाटों को साफ़ सफाई अच्छे तरीक़े से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने रेल ओवरब्रिज पर लाईट व सभी चिन्हित स्थानों पर विशेष सफाई करने का भी निर्देश दिया।
मौके पर पूर्व पार्षद अजय प्रसाद गुप्ता, सुपरवाइजर संजीत कुमार और अवधेश कुमार, सफाई कर्मी माला देवी, रीता कुंवर, अर्जुन राम, गीता देवी, विशाल कुमार, रोशन कुमार, रामधनी राम, शिवनाथ राम आदि लोग मौजूद थे।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 23/10/ 2025 दिन गुरुवार को ओरमांझी प्रखंड अंतर्गत चूटूपाली पंचायत अंतर्गत कुरुम तेतर टोली में भव्य रूप से सोहराई जतरा का आयोजन संपन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा सोहराई झारखंड का प्रसिद्ध लोकपर्व है जो जीवन, उर्वरता और प्रकृति के चक्र का प्रतीक है जो कृषि केंद्रित जीवनशैली है।
यह पर्व विशेष रूप से बैल, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे मवेशियों के प्रति कृतज्ञता और स्नेह व्यक्त करने के लिए होता है जिनकी मेहनत से कृषि संभव होती है। यह प्रेम वापसी भाईचारा का प्रतीक भी माना जाता है, इस पर्व के अवसर पर सभी गांव के लोग सोहराई गीत, ढोल नगाड़ा बजाते हुए नाचते हुए घर घर जाहली करने का प्रथा अति प्राचीन है जो एकजुटता का प्रतीक है।
इस अवसर पर गोहाईल पूजा, बर्दखूंटा पशु और मनुष्य के वापसी प्रेम को दर्शाता है, इस अवसर पर बहन का ससुराल भाई गुड़ रोटी ले जाते हैं जो भाई बहन के अटूट प्रेम को दशार्ता है। मौके पर मुख्य अतिथि सांसद संजय सेठ, पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, सांसद प्रत्याशी देवेंद्र नाथ महतो, जिला परिषद सरिता देवी, मुखिया बीरेंद्र मुंडा जी कार्यक्रम में उपस्थित हुए।
आजोजन समिति के अध्यक्ष सुनील महतो, सचिव रामकिशोर महतो, कोषाध्यक्ष रवींद्र महतो, उपाध्यक्ष रमेश महतो, रोहित महतो, खिलेश्वर महतो, उप कोषाध्यक्ष दिनेश महतो, जयनाथ महतो, कैलाश महतो, संरक्षक चंद्र मोहन महतो, प्रमेश्वर, बिनोद, जयमंगल, कुशूनलाल, अर्जन, ऋतु, कृष्ण, शंकर, चुनितलाल, राजेश, मदन, लालमोहन, राजू, राजन, कुलदीप कार्यकारिणी सदस्य प्रीत, नंदकिशोर, उमाशंकर, भीम, पंकज, अमित, गंगेश्वर, बालचंद, अजय, प्रेम चंद, डेगलाल, रूपचंद, कलेश्वर, जगेश्वर, रामू, सोनू, उत्तम, जलेश्वर, दीपक, टिकेंद्र, मुकेश का कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम योगदान दिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित होकर सोहराई जतरा का आनंद लिया।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 21/10/2025 को तिरुलडीह गोलीकांड में शहीद हुए धनंजय और अजीत महतो को शहादत स्थल पहुंचकर जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो सैकड़ों समर्थकों के साथ माल्यार्पण किया।
मौके पर देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि आज से ठीक 43 साल पहले 21 आक्टूबर 1982 को जब झारखण्ड अलग राज्य आंदोलन और कोल्हान में जंगल बचाओ आंदोलन चरम पर था तब झारखंड अलग राज्य मांग के अलावा चांडिल, नीमडीह और ईचागढ़ प्रखंड को अकालग्रस्त घोषित करने एवं अन्य मांगों को लेकर इचागढ़ के तिरुलडीह अंचल के समक्ष शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर बिना चेतावनी के पुलिस द्वारा फायरिंग की गई जिसमें चांडिल कॉलेज के दो छात्र धनंजय महतो और अजीत महतो आंदोलन स्थल में पुलिस के गोली से शहीद हो गये।
छात्र और ग्रामीण पुलिस का अवैध वसूली को बंद करा दिया था जिसके वजह से पुलिस आतंक फैलाना चाहती थी, आतंक इतना अधिक था कि फायरिंग के बाद भी 41 लोगों को गिरफ्तार कर 36 घंटे तक बिना खाना पीना के हिरासत में रखा था। हंगामा के बाद उन्हें छोड़ा गया, इस घटना के बाद पुलिस का आतंक इतना था कि पोस्टमार्डम के बाद जमशेदपुर से दोनों छात्रों का शव तक गांव लाने तक कोई तैयार नहीं था बाद निर्मल महतो खुद ट्रक से लाकर खुद मुखाग्नि दिया था।
धनंजय महतो और अजीत महतो की शहादत ने पूरे झारखंड क्षेत्र को उद्वेलित कर दिया था। धनंजय के कुछ ही माह का एक बेटा उपेंद्र था तथा अजीत अविवाहित था। शहादत का लंबा समय बीत चुका, अलग झारखंड राज्य का गठन भी हुआ। तिरुलडीह गोलीकांड पर राजनीति भी खूब हुई। गोलीकांड के बाद कर्पूरी ठाकुर, जार्ज फर्नाडिस, रामविलास पासवान, शिबू सोरेन जैसे नेताओं ने तिरूलडीह का दौरा किया था।
गोलीकांड के खिलाफ आंदोलन भी हुआ था, घटना के बाद ग्रामीणों में इतना अधिक गुस्सा था कि उन्होंने कोई भी सरकारी सहायता लेने से इनकार कर दिया था, पुण्यतिथि पर प्रत्येक साल कार्यक्रम भी होता है लेकिन आज तक इन दोनों को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा नहीं मिलना सभी को खलता है क्योंकि तिरुलडीह गोलीकांड अलग झारखंड आंदोलन का हिस्सा था। मौके पर देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार से मांग किया कि झारखंड सरकार धनंजय महतो और अजीत महतो को झारखंड आंदोलनकारी का दर्जा दे।
टीम एबीएन, रांची। सूर्य उपासना का महापर्व छठ को लेकर झारखंड में भी काफी उत्साह रहता है। यहां के घाटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इतना ही नहीं जमशेदपुर के डोमुहानी घाट में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम स्थल डोमुहानी पर छठ की विशेष रौनक देखने को मिलती है।
नदी के किनारों पर की गई सजावट लोगों का मन मोह लेती है। राजधानी रांची में भी भक्त उत्साह से भरे रहते हैं। इस बार यह पर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। 27 को संध्या अर्घ्य और 28 अक्टूबर को प्रातः: अर्घ्य दिया जाएगा।
रांची में छठ के लिए तैयारी जोरों पर है। रांची में एक जगह सूर्य कुंड है। कहा जाता है कि सूर्य भगवान की उपासना भगवान राम ने की थी। इसलिए छठ के समय दूर-दूर से लोग इस घाट में खासतौर पर छठ का अर्घ्य देने के लिए आते हैं।
बता दें कि रांची के सूर्य मंदिर के ठीक पीछे बड़ा सा एक तालाब है जिसे सूर्य कुंड कहा जाता है। मान्यता ये भी है कि यहां डुबकी लगाने से कई सारी बीमारी ठीक हो जाती है। सूर्य कुंड पर संतान की प्राप्ति के लिए लोग मन्नत भी मांगते हैं।
वहीं, रांची की नगरी गांव में एक कुआं है। कहा जाता है कि यह वही गांव है जहां पर महाभारत काल में पांडव घूमते हुए आए थे और कुछ समय व्यतीत किया था। यहां मौजूद कुआं अर्जुन ने बाण मारकर प्रकट किया था और इसके बाद इसी कुएं के पानी से द्रौपदी सूर्य भगवान को अर्घ्य देती थी।
आज भी लोग इस कुआं को देवी समान मानते हैं। मान्यता है कि यहां पर देवी के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि कुआ में एक देवी भी रहती है। इसीलिए लोग इसकी पूजा करते हैं। छठ के समय इसी के पानी से अर्घ्य देना और पानी से घर की साफ सफाई होती है।
टीम एबीएन, रांची।।दीपावली के शुभ अवसर पर Dr. Ojha & Sons Homeopathic Clinic ने अपना आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च किया। इस वेबसाइट का उद्घाटन क्लिनिक के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) डॉ. त्रिप्त संभव ओझा द्वारा किया गया।
डॉ. ओझा ने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अब मरीज घर बैठे ही ऑनलाइन कंसल्टेशन, दवाइयों की जानकारी, और अपॉइंटमेंट बुकिंग जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
यह पहल Dr. Ojha & Sons की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसके तहत संस्था पिछले कई दशकों से होम्योपैथी के क्षेत्र में विश्वसनीयता और आधुनिकता को साथ लेकर चल रही है। होमियोपैथ रोग के जड़ में पहुँचकर उसका सफाया करता है। यह एलोपैथ से बिल्कुल ही भिन्न है।
एक ड्राप होमियोपैथ की गंभीर बिमारियों को नष्ट कर सकता है। स्वामी मुक्तरथ जी ने अपनी शुभकामना संदेश में कहा कि होमियोपैथी आज के समय की माँग है। हमारा लक्ष्य है प्राकृतिक चिकित्सा को आधुनिक युग की तकनीक से जोड़कर हर घर तक स्वास्थ्य पहुँचाना। (उक्त जानकारी डॉ. तृप्त संभव ओझा ने दी।)
टीम एबीएन, रांची। छठ पूजा का पर्व नजदीक आने के साथ ही रांची से बिहार जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में टिकट मिलना बेहद कठिन हो गया है। हटिया-पटना, वंदे भारत, जनशताब्दी सहित कई ट्रेनों में कंफर्म टिकट उपलब्ध नहीं हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट बनी हुई है। रेलवे प्रशासन ने छठ के लिए कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई हैं, लेकिन इनसे यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है।
26 अक्टूबर को रांची रेल डिविजन से पटना के लिए लगभग आधा दर्जन ट्रेनें संचालित होंगी लेकिन इनमें भी टिकट की भारी कमी है। हटिया-पटना ट्रेन में स्लीपर क्लास में 99 वेटिंग टिकट हैं।
थर्ड एसी क्लास में 63 और टू एसी में 26। वहीं रांची-पटना वंदे भारत ट्रेन के चेयरकार में 58 और एग्जीक्यूटिव क्लास में 13 टिकट वेटिंग में हैं। जनशताब्दी ट्रेन में टू एस क्लास के 200 और चेयरकार के 37 यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रही है।
रांची-पाटलीपुत्र एक्सप्रेस में भी स्लीपर क्लास में 71, थर्ड एसी में 30 और टूएसी में 15 टिकट वेटिंग में हैं। रांची-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस में स्लीपर 57, थर्ड एसी 43, और टूएसी 10 टिकट वेटिंग में हैं। रांची-आरा ट्रेन में स्लीपर क्लास में 118 टिकट वेटिंग में हैं जबकि थर्ड एसी और टूएसी में टिकट नहीं मिल रहे हैं।
राउरकेला-जयनगर ट्रेन में स्लीपर क्लास में 142 और थर्ड एसी में 87 टिकट वेटिंग में हैं। 25 अक्टूबर को चलने वाली स्पेशल ट्रेन में भी स्लीपर क्लास के लिए 47 और थर्ड एसी के लिए 11 वेटिंग टिकट बची हैं। टिकट न मिलने की वजह से कई यात्री अब बस या निजी वाहन से यात्रा करने पर मजबूर हो रहे हैं।
इसके अलावा, रांची-पटना के बीच उड़ने वाली फ्लाइट के किराये भी सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने हो गए हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। छठ पूजा के समय यात्रा की ये कठिनाइयां यात्रियों के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
टीम एबीएन, रांची। रांची के निर्दिष्ट शांत क्षेत्र पुराने उच्च न्यायालय में दिवाली पर शोर का स्तर 78 डेसिबल के स्तर को छू गया, जो लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि है। एक अधिकारी ने बीते मंगलवार को यह जानकारी दी।
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार डोरंडा इलाके में पुराने उच्च न्यायालय क्षेत्र में सोमवार को सुबह छह बजे से रात 10 बजे के बीच औसत ध्वनि स्तर 78 डेसिबल दर्ज किया गया।
जेएसपीसीबी ने बताया कि सोमवार रात 10 बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक यह 72 डेसिबल पर बना रहा। अधिकारी ने बताया कि शांत क्षेत्रों के लिए स्वीकार्य सीमा दिन के समय (सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक) 50 डेसिबल और रात के समय (रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक) 40 डेसिबल है।
जेएसपीसीबी चार स्थानों पर ध्वनि के स्तर को मापता है - पुराना उच्च न्यायालय (शांति क्षेत्र), अल्बर्ट एक्का चौक (वाणिज्यिक क्षेत्र), अशोक नगर (आवासीय क्षेत्र) और तुपुदाना (औद्योगिक क्षेत्र)। दिवाली के दिन अल्बर्ट एक्का चौक पर ध्वनि का स्तर औसत स्वीकार्य सीमा से 16.92 प्रतिशत बढ़ गया।
आंकड़ों के अनुसार इस इलाके में दिन में 76 डेसिबल और रात में 69 डेसिबल ध्वनि दर्ज की गई। इसके विपरीत, तुपुदाना में दिन के दौरान ध्वनि का स्तर 65 डेसिबल और रात में 51 डेसिबल दर्ज किया गया, जो क्रमशः 75 डेसिबल और 70 डेसिबल की औसत स्वीकार्य सीमा से कम है।
जेएसपीसीबी ने इस दिवाली पटाखे फोड़ने के लिए रात आठ बजे से 10 बजे तक दो घंटे का समय दिया था, जबकि झारखंड में 125 डेसिबल से अधिक शोर करने वाले पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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