टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 19/11/2025 को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के अध्यक्ष डॉ नटवा हांसदा के नाम ज्ञापन जैक के सचिव जयंत कुमार मिश्रा से वार्ता कर अपनी बात रखी और ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में 10वीं और 12वीं की परीक्षा फीस में की गयी बढ़ोतरी को कम करने के लिए ज्ञापन सौंपा। आजसू ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि जैक की आफिशियल वेबसाइट एवं विभिन्न अखबारों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि वर्ष 2025-26 में आयोजित होने वाली मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा शुल्क में परिषद द्वारा वृद्धि की गयी है।
झारखंड राज्य में पहले से ही लाखों विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित हैं। ऐसी परिस्थिति में परीक्षा शुल्क में की गयी यह बढ़ोतरी छात्रों एवं उनके अभिभावकों के ऊपर एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में पड़ेगी।
आजसू छात्र संघ की ओर से आपका ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए विनम्र आग्रह किया जाता है कि वर्ष 2025-26 की मैट्रिक और इंटर परीक्षा शुल्क में की गयी बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाये तथा शुल्क को पूर्ववत रखा जाये।
यदि शुल्क वृद्धि को वापस नहीं लिया गया, तो आजसू छात्र संघ विद्यार्थियों के हित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। तत्पश्चात जैक के सचिव जयंत कुमार मिश्रा ने सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और छात्र हित में कदम उठाते हुए परिषद की बैठक में आजसू मांग को रखने की बात कही।
मौके पर प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, अमन साहू, रवि रोशन, योगेश महतो, नितेश शर्मा, प्रियांशु तिवारी, मुकेश महतो इत्यादि उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। एनयूजे (आई) झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ साथी बलदेव प्रसाद शर्मा की माता जी मुन्नी देवी का 17 नवंबर 2025 की रात्रि लगभग आठ बजे 93 साल की अधिक अवस्था में निधन हो गया। मुन्नी देवी ने संघर्षों से अपने जीवन को नारायण भक्ति और गौ सेवा में समर्पित कर रखा था।
मृत्युभाषी, मिलनसार और धर्म परायणता की वह प्रतिमूर्ति थीं। संस्कृत से संस्कृति को शिखर तक पहुंच कर अपने बेटे- बेटियों से लेकर पोता-पोतियों और नातियों को जो संस्कार दिया है, वह वट वृक्ष की तरह शिक्षा और राष्ट्र सेवा को समर्पित है।
मुन्नी देवी 93 सालों की अधिक अवस्था में भी गौ भक्ति में लीन रहती थीं। यह इस बात का घोतक है, कि हमारी संस्कृति और परंपरा कि वह ध्वजवाहिका थी। इसकी झलक बलदेव प्रसाद शर्मा के जीवन दर्पण में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
एनयूजे- आई परिवार माता जी को अपनी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करती है, कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। इस दारुण दुख की घड़ी में हम सभी बलदेव प्रसाद शर्मा के शोक संतप्त परिवार के साथ पूरी दृढता के साथ खड़े हैं। ईश्वर उन्हें इस कठिन घड़ी में दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 21 नवंबर को पलामू दौरे पर रहेंगे। इस दौरान सीएम आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम पलामू के नीलांबर पीतांबरपूर (लेस्लीगंज) प्रखंड के महावीर मोड़ पर आयोजित होना है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पलामू जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
जिस जगह पर कार्यक्रम आयोजित होना है वह नीलांबर पीतांबरपूर और मेदिनीनगर सदर प्रखंड का सीमावर्ती इलाका है। 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद पलामू के इलाके में मुख्यमंत्री का यह पहला सरकारी दौरा है।
पलामू दौरे के दौरान सीएम हेमंत सोरेन कई बड़ी योजनाओं के आधारशिला रखेंगे और उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू दौरे के दौरान करोड़ों रुपये की परिसंपत्ति का भी वितरण करेंगे। इस दौरान झारखंड सरकार के कई मंत्री, स्थानीय सांसद और विधायक को भी आमंत्रित किया जाएगा।
टीम एबीएन, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों और पदोन्नति में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए प्रारंभिक जांच शुरू करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कड़े शब्दों में पूछा कि केंद्रीय एजेंसी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए मशीनरी का इस्तेमाल क्यों कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 14 नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट के 23 सितंबर 2024 के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीआई को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के स्थान पर अब मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ सीबीआई की अंतरिम याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सीबीआई से कहा कि आप अपनी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए मशीनरी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? हमने आपको कई बार बताया है।
इसके साथ ही अदालत ने एजेंसी की याचिका खारिज कर दी। झारखंड विधानसभा सचिवालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि जब भी कोई मामला आता है, सीबीआई उससे पहले ही अदालत में मौजूद रहती है।
सीबीआई की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने इसका खंडन करते हुए कहा कि इस मामले में ऐसा नहीं है। लेकिन सिब्बल ने दलील दी कि ऐसा कई मामलों में, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, देखा गया है। राजू ने कहा कि सीबीआई तभी उपस्थित होती है जब किसी अपराध की आशंका होती है।
इससे पहले भी जस्टिस गवई की पीठ ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई थी, जिसमें नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं की जांच का निर्देश दिया गया था। झारखंड विधानसभा सचिवालय और अन्य पक्षों ने हाईकोर्ट के 23 सितंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। 14 नवंबर 2024 के बाद इस मामले में कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई थी।
अधिवक्ता तुलिका मुखर्जी के माध्यम से दायर एक याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने बिना किसी आपराधिक मामले या संज्ञेय अपराध के सीबीआई को जांच का आदेश दे दिया, जबकि यह पूरा मामला सिविल प्रकृति का है और इसमें सेवा संबंधी जटिल प्रश्न शामिल हैं। याचिका के अनुसार, इस मामले में न कोई FIR है और न ही कोई संज्ञेय अपराध बनता है। इसमें कहा गया कि पैसे के लेन-देन का कोई सबूत नहीं, धोखाधड़ी का कोई प्रमाण नहीं, कोई आपराधिकता स्थापित नहीं होती।
याचिका में बताया गया कि झारखंड विधानसभा सचिवालय (भर्ती एवं सेवा शर्त नियम, 2003) 10 मार्च 2003 को अस्तित्व में आया, जिसके बाद सचिवालय और विभिन्न समितियों के कामकाज को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। विज्ञापन, एडमिट कार्ड और परीक्षा/साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2003-2007 के बीच नियुक्तियां और पदोन्नतियां की गईं।
इसके बाद कुछ लोगों की कथित बातचीत की अनवेरिफाइड ऑडियो रिकॉर्डिंग एक सीडी में बदलकर स्पीकर को सौंपी गई। अक्टूबर 2007 में पांच सदस्यीय समिति बनाकर मामले की जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट अगस्त 2008 में स्पीकर के सामने पेश हुई, लेकिन समिति के दो सदस्यों ने इसका विरोध किया।
जुलाई 2014 में कैबिनेट सचिवालय एवं सतर्कता विभाग ने झारखंड हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश को इस पूरी भर्ती-पदोन्नति प्रक्रिया की जांच के लिए नियुक्त किया। इस आयोग ने 12 जुलाई 2018 को राज्यपाल को 30 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।
याचिका में कहा गया कि आयोग की रिपोर्ट आयोग जांच अधिनियम, 1952 के अनुसार राज्य सरकार को कभी भेजी ही नहीं गई। 10 सितंबर 2018 को राज्यपाल ने स्पीकर को रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा, जिसके बाद 26 अगस्त 2019 को दो अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की मंजूरी दी गई।
अगस्त 2022 में कानूनी व्याख्या और तथ्यों की जटिलता को देखते हुए एक और आयोग गठित करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह नहीं देखा कि विधानसभा सचिवालय इस रिपोर्ट और ATR के आधार पर कार्रवाई कर रहा था। यह याचिका सार्वजनिक रोजगार में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले पर दायर की गई थी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा / रांची। सेन्हा प्रखंड के बंसरी गुड़िया टोली के ग्रामीणों की शिकायत एवं आग्रह पर लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत बंसरी गुड़िया टोली पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने सांसद को पारंपरिक ढंग से स्वागत करते हुए अखड़ा तक लाया। जहां पूरे ग्रामीणों के साथ एक बैठक हुई। जिसमें ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि लोहरदगा में बाईपास सड़क का जो निर्माण होना है।
उसमें इस गांव में लगभग 14 एकड़ जमीन 42 परिवारों का जा रहा है लेकिन उन्हें समुचित दर से मुआवजा नहीं मिल रहा है। इस गांव में सरकार 6526 की दर से प्रति डिसमिल जमीन का मुआवजा दे रही है जबकि इसी गांव से सटा हुआ गांव नवदी कोयनार टोली में सरकार 22385 रुपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा दे रही है। उनके साथ भेदभाव किया गया है।
बाईपास सड़क में 17 मौजा का जमीन जा रहा है उसमें सबसे कम सरकार इसी गांव के लोगों को मुआवजा दे रही है। ग्रामीणों ने बताया कि कुंडी, बगान मसना जैसे गांवों का महत्वपूर्ण जमीन भी चला जा रहा है। ग्रामीणों ने सांसद से कहा कि हमलोग विकास का विरोध नहीं कर रहे हैं हम लोग जमीन देने के लिए तैयार है लेकिन सरकार समुचित मुआवजा दे अन्यथा हम लोग जमीन नहीं देंगे। ग्रामीणों ने सांसद से उचित मुआवजा दिलाने की मांग किये।
मौके पर सांसद ने कहा कि वह ग्रामीणों के साथ है। ग्रामीणों को न्याय दिलाने एवं उन्हें समुचित मुआवजा दिलाने का प्रयास करेंगे। सांसद ने कहा कि इस गांव में शत-प्रतिशत आदिवासियों की जमीन जा रही है। आदिवासियों का जमीन ही सब कुछ है। इसी जमीन से वे अपने परिवारों का भरण पोषण करते हैं, बावजूद वे विकास के लिए जमीन देने के लिए तैयार है पर उन्हें कम दर से जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है जो दुर्भाग्य है।
सांसद ने कहा कि वे जांच करवाएंगे कि जब जमीन अधिग्रहण करने के समय सभी गांवों में जमीन का दर तय किया जा रहा था तो इस गांव में सबसे कम दर से जमीन का वैल्यू कौन तय किया, क्या मापदंड था क्यों यहां के ग्रामीणों के साथ भेदभाव किया गया। सांसद ने ग्रामीणों का आश्वासन दिया कि वे आपके साथ हैं। आपको समुचित मुआवजा मिले उसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी वार्ता करेंगे।
सांसद में ग्रामीणों के साथ उसे जमीन का मुआयना भी किये जो बाईपास सड़क में जा रहा है। मौके पर आलोक कुमार साहू, सांसद प्रतिनिधि नंदू शुक्ला, पाहन मंगलदास मुंडा, गंगा उरांव, जीतराम उरांव, धनबाज उरांव, मनोज उरांव सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। साइबर अपराधी नए-नए हथकंडा अपना कर लोगों की गाढ़ी कमाई उनके खातों से ही उड़ा ले रहे हैं। हजारीबाग पुलिस ने चार ऐसे ही साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो म्यूल खाता के जरिए साइबर अपराध करते थे। पुलिस ने उनके पास से छह सिम कार्ड, 19 अलग-अलग बैंक के एटीएम और डेबिट कार्ड, दो-चार पहिया गाड़ी और 150000 रुपये बरामद किये हैं।
साइबर अपराध का दायरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कई लोग साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई से हाथ धो दे रहे हैं। इन दिनों साइबर अपराधी अनवांटेड लिंक के जरिये अपराध कर रहे हैं। जो बिना खाता धारक की जानकारी के उनके अकाउंट का एक्सेस प्राप्त कर ले रहे हैं। उस अकाउंट में ठगी का पैसा भेजा जाता है और फिर एटीएम के जरिए उसे निकाल लिया जाता है।
हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति हजारीबाग के डूमर के ग्रामीण से खाता और एटीएम कार्ड ले रहे हैं। जिसमें साइबर क्राइम का पैसा आता है। इस सूचना के आलोक पर छापेमारी टीम ने दो युवक को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ग्राम डूमर सरौनी जंगल से हिरासत में ले लिया। इन दोनों व्यक्तियों का नाम राजू और शिवा कुमार बताया गया है।
एसपी ने बताया कि तलाशी के क्रम में भारी मात्रा में एटीएम कार्ड और डेढ़ लाख रुपये बरामद किये गये। जब उनसे पूछताछ की गयी तो बताया कि बरामद एटीएम कार्ड अलग-अलग व्यक्तियों से झांसा और कुछ पैसे देकर साइबर अपराधी द्वारा भेजे गये पैसों को निकाल कर दूसरे अपराधियों तक पहुंचाना था।
गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर मोहम्मद जाकिर अंसारी और तस्लीम अंसारी को गिरफ्तार किया गया। दोनों पेशेवर साइबर अपराधी हैं। गिरफ्तार आरोपियों में एक गिरिडीह-हजारीबाग और दूसरा देवघर का रहने वाला है।
टीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मंगलवार को बिना पूर्व सूचना रिम्स अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अपनी गंभीरता स्पष्ट कर दी। निरीक्षण के दौरान वे सीधे मेडिसिन विभाग के ओपीडी पहुंचे और वहां बैठकर कई मरीजों की जांच की।
मरीजों का हाल जानने के साथ उन्होंने उन्हें उचित दवाइयों व उपचार संबंधी सलाह भी दी। अचानक मंत्री को अपने बीच पाकर मरीजों और उनके परिजनों में उत्साह देखा गया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अस्पताल में मौजूद कई खामियों को बारीकी से परखा।
दवाओं की कमी, कफ सिरप की अनुपलब्धता, व्हीलचेयर की कमी, डॉक्टरों की संख्या घटने, स्वच्छता व्यवस्था में ढिलाई सहित कई विषयों पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार भी उनके साथ मौजूद थे। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इन सभी कमियों को जल्द से जल्द ठीक किया जाये और मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री ने एलान किया कि अब वे न केवल रांची बल्कि झारखंड के हर जिले के सरकारी अस्पतालों में नियमित रूप से ओपीडी में बैठेंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों से प्रत्यक्ष रूप से मिलकर उनकी समस्याओं को समझना और अस्पतालों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना ही उनका उद्देश्य है। इसी दौरान वे खुद अस्पतालों के लिए नया रोस्टर तैयार करेंगे ताकि चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
डॉ. अंसारी ने रिम्स में मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी पर चिंता जतायी और निदेशक को इस पर फटकार लगायी। उन्होंने कहा कि गरीब मरीजों को दवाओं के लिए बाहर भटकना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं है। कई मरीजों ने मंत्री को बताया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्हें परेशान होना पड़ता है, जिस पर मंत्री ने सख्त कार्रवाई का संकेत दिया।
सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर भी मंत्री का रुख बेहद स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर सरकारी सेवा में रहते हुए निजी क्लिनिक चलाने में अधिक रुचि रखते हैं, ऐसे डॉक्टरों की रिम्स और सरकारी अस्पतालों को कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में रहकर पूर्ण समर्पण के साथ जनता की सेवा करना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता के खिलाफ डोरंडा थाने में गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज करायी गयी है। झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने लिखित शिकायत दे कर इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
करोड़ों की अवैध उगाही का आरोप
अधिवक्ता ने पूर्व डीजीपी पर संगठित अपराध और भ्रष्टाचार में शामिल होने के सनसनीखेज आरोप लगाये हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि अनुराग गुप्ता ने डीजीपी रहते हुए कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा एवं अन्य के साथ मिलकर कोयलांचल शांति समिति नामक एक आपराधिक संगठन का गठन किया था।
आरोप है कि उस संगठन के माध्यम से राज्यभर में कोयला व्यवसायियों, ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों, डॉक्टरों और बिजनेसमैन से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की गयी। शिकायतकर्ता ने कहा है कि गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इस संगठन का संचालन किया।
अधिवक्ता राजीव कुमार ने अपनी शिकायत में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के पुराने प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी हवाला दिया है। मरांडी ने आरोप लगाया था कि कोयलांचल शांति समिति को पाकिस्तान से हथियार उपलब्ध कराये गये थे।
उनका दावा था कि पूर्व डीजीपी ने एक अपराधी के इशारे पर जेल में बंद अपराधी अमन साहू की फर्जी मुठभेड़ करवायी थी। अधिवक्ता ने इस मामले को न केवल झारखंड बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक बताया है।
राजीव कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि एसीबी और सीआईडी के प्रमुख रहते हुए अनुराग गुप्ता ने अपने विश्वस्त अधिकारियों-डीएसपी मोहम्मद परवेज आलम, मोहम्मद नेहाल और अनिमेष नाथानी की मदद से विरोधियों के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज कराए। उन्होंने कुछ सरकारी अफसरों और इंजीनियरों को भी काल्पनिक शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी कर उनसे उगाही की।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि गुप्ता की मदद करने वालों में एसीबी व सीआईडी के कई अन्य अधिकारी और जवान शामिल थे। अधिवक्ता राजीव कुमार ने मांग की है कि पूर्व डीजीपी और उनके सहयोगियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर इस पूरे प्रकरण की गहन जांच करायी जाये, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse