एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। जिले में जंगली हाथियों ने देर रात रनिया प्रखंड के डिग्री डाहटोली गांव में हाथियों के झुंड ने 60 वर्षीय महिला मरियम कोंगाड़ी पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत हो गयी। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गयी।
जानकारी के अनुसार, देर रात हाथियों का झुंड गांव में बने खलिहानों में रखा धान खाने पहुंचा था। इसी दौरान आवाज सुनकर जब मरियम कोंगाड़ी बाहर निकलीं, तो झुंड में शामिल एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। मृतका क्षेत्र के पड़हा राजा पुजार कोंगाड़ी की पत्नी थीं।
सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक हाथी आसपास के खेतों में रखे धान को रौंदते हुए जंगल की ओर लौट चुके थे। हाथियों ने खेतों में खड़ी फसलों और खलिहानों में रखे अनाज को काफी नुकसान पहुंचाया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को तत्काल राहत के तौर पर 30 हजार रुपये की सहायता राशि सौंपी।
वनपाल अविनाश लुगुन ने बताया कि हाथियों के हमले में एक महिला की दुखद मौत हुई है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे देर रात खेत-खलिहानों में जाने से बचें और हाथियों की किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। इधर, करर प्रखंड के बकसपुर पंचायत के लापा गांव में भी हाथियों के झुंड ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
हाथियों ने सरकारी स्कूल की चारदीवारी तोड़ दी और अंदर रखे मध्यान्ह भोजन के लिए चावल और आलू खा गए। इसके अलावा स्कूल का एक बड़ा हिस्सा और अनाज भी बर्बाद कर दिया। स्थानीय मुखिया पूनम बरला ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगभग 14 हाथियों का झुंड इस पूरे इलाके में डेरा डाले हुए है।
यह झुंड लगातार कोई खेतों, खलिहानों और अब सार्वजनिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। मुखिया ने वन विभाग से हाथियों को जल्द से जल्द उनके प्राकृतिक कॉरिडोर की ओर भेजने की मांग की है, ताकि जनहानि और नुकसान को रोका जा सके। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की अपील करते हुए कहा है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करेंगे।
टीम एबीएन, रांची। रांची रेल मंडल में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत आरपीएफ हटिया और फ्लाइंग टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आज बड़ी सफलता हासिल की है।
मिली जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान आरपीएफ ने करीब 11.50 लाख रुपये कीमत का 23 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। साथ ही दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। रांची आरपीएफ के कमांडेंट पवन कुमार के निर्देश पर हटिया रेलवे स्टेशन परिसर में विशेष जांच अभियान चलाया गया।
इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर बैठे दो संदिग्ध व्यक्तियों पर उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह और फ्लाइंग टीम की नजर पड़ी। तलाशी लेने पर दोनों के पास मौजूद चार बैगों में गांजे से भरे चार पैकेट मिले। बरामद गांजे की पुष्टि आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त अशोक कुमार सिंह की उपस्थिति में डीडी किट से की गई, जिसमें यह गांजा (मैरिजुआना) पॉजिटिव पाया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद फिरोज (32) और राम बिलास चौधरी (27) के रूप में हुई है, दोनों पश्चिम चंपारण (बिहार) के निवासी हैं। जांच के अनुसार, मोहम्मद फिरोज के नीले रंग के पिट्ठू बैग और भूरे ट्रॉली बैग से गांजा मिला, जबकि राम बिलास के हरे पिट्ठू बैग और ग्रे हैंड बैग से भी पैकेट बरामद हुए।
पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे यह गांजा राउरकेला (ओडिशा) से खरीदकर धनबाद ले जा रहे थे, जहां इसे आगे किसी अज्ञात व्यक्ति को सौंपना था। वे कोई वैध दस्तावेज या परमिट प्रस्तुत नहीं कर सके। आरपीएफ ने सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब्त किए गए मादक पदार्थ और दोनों तस्करों को आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी हटिया को सौंप दिया
एबीएन सोशल डेस्क। वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को नई गति और शक्ति देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने एलान किया कि वह बाल विवाह की ऊंची दर वाले जिलों में गहन अभियान के जरिए अगले एक साल में एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाएगा। ये गांव उन जिलों में हैं जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे- 5 (2019-21) में उन जिलों के रूप में चिन्हित किए गए थे जहां बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
झारखंड में बाल विवाह की ऊंची दर वाले 24 जिलों में बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की पहचान कर वहां लक्षित जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। यह एलान भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत के साल भर पूरा होने के मौके पर हुए एक कार्यक्रम में किया गया जिसमें सरकार ने बाल विवाह के खात्मे के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की शुरूआत की।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) देश भर के 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क है जिसके 22 सहयोगी संगठन राज्य में जमीन पर काम कर रहे हैं। पिछले एक साल में ही इस नेटवर्क ने झारखंड में 16,348 बाल विवाह रुकवाए हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। अपने सहयोगी संगठनों के साथ करीबी तालमेल व समन्वय से काम करते हुए इस नेटवर्क ने पिछले एक साल में ही देश में एक लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे- 5 के अनुसार झारखंड में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से खासी ज्यादा है। लेकिन राज्य के अलग-अलग इलाकों में बाल विवाह की दर में खासी असमानताएं देखने को मिली हैं। राज्य के जामताड़ा, देवघर, गोड्डा, गिरिडीह, पाकुड़, दुमका और कोडरमा जिलों में बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत से ज्यादा है। इसके अलावा साहिबगंज, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, चतरा और गढ़वा जिलों में यह दर 30 से 39.9 प्रतिशत के बीच है। इसके अलावा चार और ऐसे जिले हैं जहां बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
भारत सरकार के अभियान को पूर्ण समर्थन देते हुए और अगले साल का रोडमैप साझा करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सामुदायिक समूहों, धार्मिक नेताओं, पंचायतों व नागरिकों की सबसे मुख्य भूमिका है। सरकार का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुका है। यह बच्चों के खिलाफ इस अपराध के खात्मे के हमारे सामूहिक प्रयासों व सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
पिछले साल एक लाख से भी ज्यादा बाल विवाह रोके और रुकवाए गए जो यह दिखाता है कि जब समाज एकजुट होता है तो बदलाव अपरिहार्य है। हमने वादा किया है कि अगले एक साल में हम एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त गांव बनाएंगे ताकि हर बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर व एक सुरक्षित भविष्य मिले। विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति में इन प्रयासों की गति काफी अहमियत रखती है। हम अगले तीन वर्षों में देश से बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और हमें विश्वास है कि यह संभव है।
प्रिवेंशन, प्रोटेक्शन, प्रासिक्यूशन के 3पी माडल यानी सुरक्षा से पहले रोकथाम, अभियोजन से पहले सुरक्षा और रोकथाम के लिए निवारक उपाय के तौर पर अभियोजन, पर अमल करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने 1 अप्रैल 2023 से 14 नवंबर 2025 तक देश में 4,35,205 बाल विवाह रोके हैं। स्कूलों, धार्मिक नेताओं, विवाह में सेवाएं प्रदान करने वालों व जनसमुदाय में बाल विवाह से जुड़े कानूनों के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता के प्रसार से बाल विवाह के बारे में आम लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को आगे बढ़ाने वाले बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शानदार सफलताओं के साल भर पूरे होने पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह के खात्मे के लिए 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान शुरू किया। इस 100 दिवसीय कार्य योजना का समापन 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा। राज्य, जिला और गांव स्तर पर इस अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है। इसके पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता के प्रसार पर जोर रहेगा।
वहीं, दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंक्वेट हाल, बैंड बाजा वाले, कैटरर, डेकोरेटर इत्यादि पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरे और आखिरी चरण में बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों व समुदाय स्तरीय भागीदारी और जिम्मेदारी को मजबूत किया जाएगा।
अधिसूचना के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने के निर्देश दिए हैं ताकि लक्षित उद्देश्यों को हासिल किया जा सके। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। कड़ाके की ठंड से परेशान, बेघर और फुटपाथ पर रात गुजारने वाले लोगों को राहत देने के लिए रांची नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। प्रशासक सुशांत गौरव के निर्देश पर अलबर्ट एक्का चौक स्थित पार्किंग परिसर के पास 50 बेड का अस्थायी आश्रय गृह तैयार कर दिया गया है।
इस आश्रय गृह में 30 बेड पुरुषों के लिए और 20 बेड महिलाओं के लिए बनाये गये हैं। ठंड से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे परिसर में मोटे पर्दे लगाये गये हैं, जबकि कंबल, गद्दे, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और हीटर की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग दरवाजे बनाये गये हैं।
नगर निगम की ओर से इस ठंड में बेघर और सहायता विहीन लोगों की मदद के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। टीम शहर के विभिन्न हिस्सों, मुख्य सड़कों, बाजारों, बस स्टैंड क्षेत्रों और फुटपाथों में घूम घूमकर ऐसे लोगों को चिन्हित कर रही है, जिन्हें तुरंत आश्रय की आवश्यकता है।
इन चिन्हित लोगों को निकटतम आश्रय गृहों में सुरक्षित स्थान प्रदान कराया जा रहा है। निगम ने अपील की है कि कोई भी व्यक्ति सड़क किनारे या किसी खुले स्थान पर ठंड में असहाय दिखे, तो तुरंत नगर निगम हेल्पलाइन 1800-570-1235 पर सूचना दें, ताकि समय रहते उसकी मदद की जा सके।
इधर, जिला प्रशासन भी शहर में बढ़ती ठंड को देखते हुए सक्रिय हो गया है। राजधानी रांची के सभी चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अलाव की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासनिक टीम लगातार अलाव स्थलों पर लकड़ी उपलब्ध करा रही है, ताकि जरूरतमंद लोग रात के समय ठंड से राहत पा सकें।
फुटपाथ पर रहने और सोने वाले लोगों के लिए निगरानी भी बढ़ायी गयी है, ताकि कोई भी व्यक्ति ठंड के कारण किसी प्रकार की परेशानी या जोखिम में न आये। प्रशासन की पहल सिर्फ अलाव तक सीमित नहीं है।
शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित अस्थायी आश्रय गृहों में हीटर, पर्याप्त रोशनी, गद्दे-कंबल, शौचालय और पेयजल जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं दी गई हैं। इन आश्रय गृहों में सुरक्षा व्यवस्था के तहत सीसीटीवी कैमरे भी लगाये गये हैं, जिससे निगरानी और प्रबंधन और अधिक प्रभावी तथा सुरक्षित हो सके।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। भूमिगत कोयला खदानों से जहरीली गैस के रिसाव को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध के बीच रांची से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम रविवार को स्थिति का आकलन करने धनबाद पहुंची।
टीम ने केंदुआडीह थाना क्षेत्र के अंतर्गत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की पुटकी-बालिहारी कोलियरी इलाके में स्थित राजपूत बस्ती का दौरा किया, जो जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर है। सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद एनडीआरएफ कर्मियों ने वहां मौजूद पत्रकारों के साथ किसी तरह की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
केंदुआडीह के थाना प्रभारी प्रबोध पांडे ने कहा कि टीम गैस रिसाव के स्तर, उत्सर्जित होने वाली गैस के प्रकार और इसे कम करने के तरीकों का आकलन कर रही है। बता दें कि राजपूत बस्ती, मस्जिद मोहल्ला, नया धौड़ा, आफिसर कॉलोनी और पांच नंबर बस्ती में गैस का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा ने प्रशासनिक टीम के साथ निरीक्षण के बाद कहा कि राजपूत बस्ती का क्षेत्र बेहद खतरनाक घोषित किया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। हर दिन पारा नीचे गिर रहा है और सुबह-शाम की बर्फीली हवाएं लोगों को कंपकंपी महसूस करा रही हैं। सुबह का कोहरा और देर शाम की शीतलहर जैसी स्थिति ने जनजीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है।
मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने बताया कि राज्य में इस समय कोई प्रमुख मौसमी प्रणाली सक्रिय नहीं है, जिसके कारण मौसम पूरी तरह शुष्क और स्थिर बना हुआ है। हालांकि उत्तर भारत के ऊपरी हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ टर्फ के रूप में मौजूद जरूर है, लेकिन इसका झारखंड के मौसम पर किसी प्रकार का प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
दिन में हल्की धूप जरूर निकल रही है, लेकिन सुबह और रात के समय ठंड सामान्य से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही बर्फीली हवाएं पारा तेजी से गिरा रही हैं। कई जिलों में शीतलहर जैसे हालात बन गये हैं। गुमला जिला सबसे ज्यादा ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
ठंडी हवाओं के प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने रांची सहित 11 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है। राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे सुबह और देर रात ठंड काफी सख्त महसूस हुई।
कांके में पारा और भी नीचे जाकर 4.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं जमशेदपुर का न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री, खूंटी 5 डिग्री, बोकारो 8.2 डिग्री और डालटनगंज में 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई इलाकों में इतनी गलन है कि लोग अलाव का सहारा लेने पर मजबूर हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। हालांकि अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की हल्की बढ़ोतरी संभव है, लेकिन इससे ठंड से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
वहीं कई जिलों में हल्के बादल छा सकते हैं। विभाग ने यह भी अनुमान जताया है कि 13 दिसंबर तक सुबह के समय कोहरा और धुंध बनी रह सकती है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही आम लोगों को गर्म कपड़ों का उपयोग करने, सुबह जल्दी और देर रात बाहर निकलने से बचने और आवश्यकतानुसार ही यात्रा करने की अपील की है।
टीम एबीएन, रांची। आज कांटा टोली सुलतान कॉलोनी स्थित मुजीब कुरैशी के आवास पर एक विशेष कैंप का आयोजन किया गया। और जनता दरबार लगाया गया। जिसमें 550 के करीब लोगों ने समाजसेवी सदाम कुरैशी को जिसमें राशन, वृद्धा पेंशन को लेकर अपनी समस्या बतायी। लोगों को आश्वस्त किया गया की उनकी समस्यायों का निवारण जिस तरह से बीते कई सालों से होता आ रहा है।
भविष्य में उसी प्रकार होगा। कैंप में मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य कार्ड बनाया गया। जिसके तहत लोगों को 15 लाख तक का मुफ्त उपचार झारखंड सरकार की योजना के तहत किया जायेगा। मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लगभग 170 के करीब लोग अपना स्वास्थ कार्ड बनाने आए और अपना रजिस्ट्रेशन कराये।
साथ ही श्रेष्ठ नेत्र चिकित्सालय के द्वारा नि:शुल्क आई कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें 70 के करीब लोगों का आंखों की जांच की गयी। जिसमें मोतियाबिंद के 12 मरीज पाये गये। मरीजों का नि:शुल्क आपरेशन कराया जायेगा। इसपर झारखंड आंदोलनकारी मुजीब कुरैशी ने कहा कि हमें इस तरह जमीनी स्तर पर समाज के काम आने की जरूरत है। ताकि समाज को आगे ले जाया जा सके।
मौके पर पूर्व पार्षद अभय सिंह, पार्षद रंजू सिंह, समाजसेवी सदाम कुरैशी, माशूक, डॉ सईदा नाज, कामिल, शबनम मुजीब सहित समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। आई कैंप में श्यामल चटर्जी, नर्स मजुला लकड़ा, ऋतिक कुमार, स्वास्थ कार्ड में सलीम उपस्थित थे। उक्त जानकारी रांची के समाजसेवी सह वार्ड 11 के पार्षद प्रतिनिधि सदाम कुरैशी ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्वभर में हर वर्ष 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाने की याद में मनाया जाता है।
वर्ष 1948 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस ऐतिहासिक दस्तावेज को अंगीकार किया था, जिसने मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय को विश्व की साझा आधारशिला के रूप में स्थापित किया। मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य केवल इन अधिकारों का स्मरण भर नहीं है, बल्कि नागरिकों को यह समझाना भी है कि जीवन, स्वतंत्रता, विचार, अभिव्यक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, समान अवसर और भेदभाव से मुक्ति ये सभी अधिकार जन्मसिद्ध हैं और किसी भी सरकार या समाज द्वारा छीने नहीं जा सकते।
इस दिवस पर दुनियाभर में अनेक कार्यक्रम, संगोष्ठियां, विचार-चर्चाएं, रैलियां और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनके माध्यम से मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ायी जाती है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका ने मानवता को असहिष्णुता और हिंसा की सबसे भयावह कीमत चुकायी है।
इसी पृष्ठभूमि में मानवाधिकारों के लिए एक वैश्विक मानक तैयार करने की आवश्यकता महसूस हुई। इस घोषणा-पत्र ने पहली बार दुनिया के हर व्यक्ति को समान रूप से अधिकार प्रदान किये, चाहे वह किसी भी देश, जाति, धर्म, भाषा, लिंग या सामाजिक वर्ग से संबंध रखता हो। यही कारण है कि यह दिन मानव इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन 1993 में हुआ था और यह हर वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। भारत भी मानवाधिकारों के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार जैसे समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार-मानवाधिकारों की मूल भावना के अनुरूप हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य मानवाधिकार आयोग समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने और मानवाधिकार हनन के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व मानवाधिकार दिवस का वास्तविक महत्व तभी उजागर होता है जब हम यह महसूस करें कि आधुनिक युग में भी मानवाधिकार हनन की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
बाल मजदूरी, मानव तस्करी, घरेलू हिंसा, नस्लभेद, लैंगिक असमानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसी चुनौतियां आज भी कई देशों में मौजूद हैं। ऐसे समय में यह दिवस हमें याद दिलाता है कि मानवाधिकार केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी हैं एक ऐसी जिम्मेदारी जो हर नागरिक, सरकार, संस्था और समाज को मिलकर निभानी होती है।
इस वर्ष भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार दिवस विशेष थीम के साथ मनाया जायेगा, जिसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और यह संदेश फैलाना है कि लोकतंत्र और मानवाधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं। अंतत: विश्व मानवाधिकार दिवस मानवता की उस आदर्श भावना को समर्पित है जो विश्व को शांति, न्याय, करुणा और समानता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह दिन हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि हम एकजुट होकर प्रयास करें, तो एक ऐसा समाज अवश्य बना सकते हैं जहां हर व्यक्ति सम्मान और अधिकारों के साथ जीवन जी सके।
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