रांची। राजधानी के बुंडू में कोरोना विस्फोट हुआ है। बुंडू स्थित इंदिरा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के छात्रावास की 28 छात्राएं एवं एक गार्ड कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। एक ही छात्रावास से कुल 29 के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद छात्रावास को सील कर दिया गया है। उक्त कोरोना विस्फोट के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों में कोरोना को लेकर एक बार फिर खौफ समा गया है। प्रशासन भी हरकत में आ गया है। अनुमंडलीय अस्पताल, बुंडू उपाधीक्षक डॉ विजय प्रसाद ने बताया कि बुंडू एसडीओ द्वारा विभिन्न स्कूलों, छात्रावासों में रैपिड एंटीजेन टेस्ट की गाइडलाइन जारी किए जाने के बाद पहले बुधवार को चार छात्राओं का रैपिड एंटीजेन टेस्ट किया गया जिसमें वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद बुंडू अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक विजय प्रसाद द्वारा गुरुवार को एक जांच टीम पुन: इंदिरा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भेजी गई। गुरुवार को कुल 96 का रैपिड एंटीजेन टेस्ट किया गया। गुरुवार को किए गए टेस्ट में फिर 24 छात्राएं एवं एक गार्ड कुल 25 कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इस प्रकार इंदिरा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास में अब तक कुल 29 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। बुंडू सीओ राजेश डुंगडुंग ने बताया कि सभी 29 कोरोना पॉजिटिव को आइसोलेट कर दिया गया है।
रांची। झारखंड में डायन करार देकर महिलाओं पर अत्याचार और हत्या कर देने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। झारखंड पुलिस के आंकड़े यह बताते हैं कि राज्य में किसी न किसी थाने में हर हफ्ते डायन बिसाही के दो मामले जरूर आते हैं। 2021 में अब तक डायन के नाम पर झारखंड के अलग-अलग जिलों में 16 लोगों की हत्या हो चुकी है। इसमें ज्यादातर महिलाएं थी। डायन बिसाही के ज्यादातर मामले पुलिस तक नहीं पहुंचते। ऐसे में इस भयावह समस्या की असल तस्वीर क्या है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। गुमला के कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु गांव में 22 फरवरी की रात निकोदिन टोपनो के पूरे परिवार की हत्या डायन बिसाही की आशंका के आधार पर कर दी गई थी। हत्या के आरोप में गुमला पुलिस की तरफ से गांव के ही 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। राजधानी रांची में भी डायन के नाम पर तीन हत्या के मामले इस साल सामने आए हैं। 6 साल में 4,556 मामले पिछले छह साल (2015-20) के आंकड़ों पर गौर करें, तो झारखंड में 4,556 मामले दर्ज किए गए। इसमें हत्या से संबंधित 310 मामले दर्ज हैं। डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2015 में 818, 2016 में 688, 2017 में 668, 2018 में 567, 2019 में 978 और 2020 में 837 मामले दर्ज किए गए हैं। 2020 में डायन बिसाही के नाम पर 30 लोगों की हत्या कर दी गई। पिछले साल जमशेदपुर में सबसे अधिक केस : 2020 में डायन बिसाही के सबसे ज्यादा मामले पश्चिमी सिंहभूम में सामने आए। इस साल डायन के आरोप में 5 लोगों की हत्या कर दी गई और 22 लोगों की बेरहमी से पिटाई की गई। डायन के नाम पर पिछले साल खूंटी में तीन, रांची, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह और सरायकेला में दो-दो लोगों की हत्या कर दी गई। 2020 में रांची में डायन के नाम पर 5 महिलाओं के हाथ जला दिए गए थे, इसके अलावा 22 लोगों की पिटाई कर दी गई। लातेहार में 20, साहिबगंज में 19, चतरा में 18 और खूंटी में 12 लोगों की पिटाई का मामला सामने आया। रांची के बेड़ो, नामकुम, लापुंग, दशम, अनगड़ा और तुपुदाना ऐसे इलाके हैं, जहां अक्सर डायन के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित करने की खबरें सामने आती हैं।
रांची। मेयर आशा लकड़ा ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर रांची नगर निगम क्षेत्र के विकास कार्यों में हो रही बाधाओं से संबंधित विषय से अवगत कराया। इसके अलावा मेयर ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। नगर निगम से मुद्दों से राज्यपाल को अवगत कराया है। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने मेयर आशा लकड़ा को आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लेकर इसे देखा जाएगा। मेयर आशा लकड़ा ने बताया कि रांची नगर निगम में विकास के कार्य में बाधा आ रही है। वहीं, उन्होंने पिछले दिनों की बैठक में हुए नगर आयुक्त से हुए विवाद को लेकर भी राज्यपाल को अवगत कराया है। साथ ही कहा कि नगर निगम विकास के कार्य बाधित हो रहे हैं। झारखंड नगर पालिका अधिनियम 2011 का उल्लंघन किया जा रहा है। जिसके कारण जो कार्य विकास में होनी चाहिए वह नजर नहीं आ रही है। मेयर ने लगाया नगर आयुक्त पर आरोप : रांची नगर निगम के नगर आयुक्त मुकेश कुमार और मेयर आशा लकड़ा के बीच उठे विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके कारण मेयर आशा लकड़ा ने नगर आयुक्त मुकेश कुमार पर राज्य सरकार के इशारे पर कार्य करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिस तरीके से नगर आयुक्त की ओर से राजनीतिक की जा रही है। वह अधिकारियों को शोभा नहीं देता है, साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीति करनी है, तो राजनीति करने के लिए अलग मंच है।
रांची। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बाद पिछले साल से लंबित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की दिशा में तेजी देखी जा रही है। फरवरी में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दस जिलों को 22 मार्च तक परिसीमन पूरा करने का आदेश दिया था। आयोग के सूत्रों की मानें तो इसमें अभी और वक्त लगेगा। अप्रैल के पहले सप्ताह तक इन जिलों में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। अब तक तीन जिलों ने परिसीमन की रिपोर्ट भेजी है। जिस पर आयोग की ओर से सुझाव या आपत्ति दिये जाने पर काम जारी है। सात अन्य जिलों की ओर से आने वाले सप्ताह तक प्रक्रिया पूरी हो जाने की संभावना है। किन-किन जिलों में हो रहा परिसीमन : पलामू, लातेहार, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, साहेबगंज, गोड्डा, पश्चिमी सिहंभूम, हजारीबाग, सरायकेला खरसावां जिलों में परिसीमन किया जा रहा है। इस संबध में 19 फरवरी को राज्य निर्वाचन आयोग ने आदेश जारी किया था। जिसके मुताबिक प्रक्रिया 22 मार्च तक हो जानी है। अब इसमें वक्त लगेगा। आयोग की मानें तो जिलों की ओर से परिसीमन प्रारूप तैयार होने के बाद, आयोग की ओर से आपत्ति या सुझाव दी जाती है, जिसके बाद जिलों को इन सुझावों और आपत्तियों का निष्पादन कर अधिसूचना जारी करनी होती है। पंचायतों की संख्या में हो सकती है कमी : साल 2015 में 4402 पंचायतों में चुनाव हुआ था। निर्वाचन आयोग के सूत्रों की मानें तो इस चुनाव के बाद राज्य में छह निकायों का गठन हुआ, जिससे इस बार पंचायतों की संख्या में कमी आ सकती है। हालांकि, यह परिसीमन के बाद ही यह तय होगा। पिछले साल दिसंबर में आयोग की ओर से चुनाव हो जाना था, लेकिन राज्य में निर्वाचन आयुक्त के नहीं होने के कारण इसमें देर हुई। वहीं कोविड 19 के कारण भी काम प्रभावित रहा। इस साल 12 फरवरी को रिटायर्ड आइएएस डीके तिवारी ने निर्वाचन आयुक्त पदभार ग्रहण किया। इसके पहले मई 2020 में पूर्व आयुक्त एनएन पांडेय ने नगर निकाय चुनाव स्थगित करने की अधिसूचना जारी की थी। ऐसे में अब राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने हैं। इसमें 315 वार्डों में निकाय चुनाव होना है।
रांची। राज्य में एक अप्रेल से मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना में आवेदन की प्रक्रिया शुरु हो रही है। ऐसे में इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक दर्जन से ज्यादा कागजों की जरूरत पड़ेगी। बेराजगारी भत्ता यानि कि मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना का आवेदन भरते वक्त आपसे कई प्रकार के कागजों की मांग की जाएगी। इन कागजों की होगी जरूरत : विशेष कोटि का प्रमाण पत्र (विधवा, परित्यक्ता, आदिम जनजाति, दिव्यांग आदि) नियोजनालय का निबंधन संख्या (तीन साल पुराना होने पर रिन्युवल जरूरी) स्थायी पता का प्रमाण पत्र यानी स्थानीयता का प्रमाण पत्र मोबाईल नंबर होना जरूरी आधार कार्ड का होना जरूरी बैंक में खाता का होना जरूरी बैंक का खाता आधार से लिंक होना चाहिए तकनीकी योग्यता का प्रमाण पत्र होना जरूरी शपथ पत्र जिसमें यह लिखा हो कि आप किसी रोजगार से जुड़े नहीं है और ना ही आपका कोई स्वरोजगार है झारखंड के स्थानीय निवासी होने का प्रमाण पत्र होना जरूरी है आपको सभी जानकारी सही देनी होगी। अगर आपने कोई जानकारी गलत दी और भविष्य में यह पाया गया कि आपने गलत जानकारी देकर मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की राशि पायी है, तो सरकार आपके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
रांची। मशहूर फाइनेंसर राजू धानुका की हत्या के बाद दुस्साहस ऐसा बढ़ा कि अरुण शर्मा और अनिल सिंह को बोला, तुझे इधर-उधर नहीं, घर में घुस कर मारेंगे। और ठीक ऐसा ही कर दिखाया। अरुण और अनिल को उनके घर के बाहर ही गोलियों से भून डाला। तब तीन ही नाम उछले थे। पहला लखन सिंह, दूसरा तौकिर आलम उर्फ राज और तीसरा सुधीर कुमार उर्फ टप्पू। फाइनेंसर राजू धानुका की हत्या ने रांची पुलिस की नींद उड़ा कर रख दी थी। इन दोनों वारदातों के बाद लखन और तौकिर उर्फ राज का नाम अपराध जगत में ऐसा उछला कि दोनों शार्प शूटर बन गये। सबसे पहले इन दोनों ने कोयलांचल के कुख्यात सरगना भोला पांडे (अब मृत) के इशारे पर लोगों को टारगेट करना शुरू किया और अपराध के दलदल में धंसते चले गये। आईपीएस प्रवीण कुमार (अब स्वर्गीय) ने जब रांची में पुलिस कप्तान की कमान संभाली, तो मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची अपने टेबल पर मंगवाई। नाम तो उनमें कई थे, पर उनका पहला टारगेट बने शार्प शूटर लखन और उसका भाई अमर सिंह और साथी तौकिर उर्फ राज। पूरी ताकत झोंकी गयी। नतीजतन कोलकाता में बहुत मशक्कत के बाद पकड़ा गया लखन तुपुदाना हाजत से फरार हो गया, फिर आज तक उसका कुछ भी पता नहीं चला। उसके बारे में पुलिस महकमे में ही दो तरह की बातें हैं। कोई कहता है जिंदा है लखन, कोई कहता है-मारा गया। लखन के बाद बारी आयी तौकिर उर्फ राज की। लगातार कई ताबड़तोड़ और दुस्साहसिक अपराधों को अंजाम देकर मोस्ट वांटेड बना राज के ताल्लुकात कुछ तथाकथित पुलिसकर्मियों से भी हो गये। शायद यही वजह थी कि गुजरे 14 साल तक वह बेखौफ वही करता रहा, जो चाहता था। इस बार पुलिस ने उसे अरगोड़ा थाना क्षेत्र में कोलकाता के एक स्वर्ण व्यापारी से 25 लाख रुपये मूल्य का सोना लूटने के मामले में पकड़ा है। तौकिर ने करीब दो दशक पहले पहली बार अरगोड़ा थाना क्षेत्र में ही एक ‘फादर’ से 50 हजार रुपये लूट कर अपराध जगत में कदम रखा था। तब भी खूब हाय तौबा मची थी रांची में, क्योंकि एक फादर को लूटा गया था। मेन रोड में सर्जना चौक के पास पुलिस से खूब उठापटक होने के बाद वह पहली बार 2004 में गिरफ्त में आया था। तब उसने इकबालिया बयान में खुलासा किया था कि वह क्रिकेटर बनना चाहता था। लखन का छोटा भाई अमर सिंह और तौकिर बढ़िया क्रिकेटर माने जाते थे। क्रिकेट टूर्नामेंट करवाता था। इसके लिए पैसे की जरूरत पड़ती थी। इसके बाद ही तौकिर ने अमर और लखन के साथ मिल कर लूटपाट से अपराध की गाथा लिखनी शुरू की। उस समय झारखंड पुलिस फाइल में संगठित गिरोह का सरगना भोला पांडे ने इन तीनों को हायर किया। पहला काम मिला रांची के मशहूर फाइनेंसर राजू धानुका को सलटाने का। कचहरी रोड में पंचवटी टावर से निकलते समय सरेराह राजू धानुका को गोलियां मार रांची पुलिस फाइल में मोस्ट वांटेड बना। यह वारदात मार्च 2009 की है। इसी साल 17 अक्तूबर 2009 को नामकुम के चाय बागान में अरुण शर्मा और अनिल सिंह की हत्या कर सुपारी किलर बन गया। फिर मुड़ कर कभी नहीं देखा और अपराध के दलदल में धंसता चला गया। अपराध जगत में शार्प शूटर तौकिर को लोग राज नाम से ज्यादा जानते हैं।
रांची। झारखंड के 18 हजार गृह रक्षकों का आंदोलन पिछले 22 दिनों से जारी है। झारखंड विधानसभा के सामने अपने-अपने हथियार जमा कर राज्य के सभी जिलों के गृह रक्षक अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले 22 दिनों के दौरान विधानसभा सत्र भी खत्म हो गया, लेकिन आज तक सरकार का कोई भी नुमाइंदा होमगार्ड जवानों से बातचीत करने तक नहीं पहुंचा। वहीं, होमगार्ड जवानों का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। बिहार की तर्ज पर सुविधा देने की मांग होमगार्ड्स की तरफ से यह मांग की गई थी कि उन्हें भी बिहार सरकार में होमगार्ड्स को मिलने वाली सारी सुविधाएं दी जाए। विधानसभा सत्र में भी यह मांग उठी थी, लेकिन इस सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिहार सरकार की तर्ज पर होमगार्ड जवानों को भविष्य निधि योजना, कर्मचारी पेंशन योजना, कर्मचारी निक्षेप सहबद्ध बीमा योजना का लाभ देने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। वहीं, विधानसभा को भेजे गए जवाब में बताया गया है कि होमगार्ड जवानों को पुलिसकर्मियों के समान वेतन देने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया था, लेकिन सरकार इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय गई थी, जहां मामला विचाराधीन है।
देवघर। मधुपुर विधानसभा उप चुनाव को ले नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन मंगलवार को भाजपा प्रत्याशी गंगा नारायण सिंह ने निर्वाचन पदाधिकारी परमेश्वर मुंडा के समक्ष अपना नामांकन दाखिल किया है। भाजपा प्रत्याशी ने दोपहर में मधुपुर विधानसभा के निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष अपना नामांकन दाखिल किया। ज्ञात हो कि पिछले चुनाव में गंगा नारायण आजसू के चुनाव चिह्न से चुनाव लड़े थे। मगर इस बार मधुपुर उप चुनाव के ऐन पहले वो भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें मधुपुर का प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा है। नामांकन दाखिल करने के बाद भाजपा की चुनावी सभा को पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पूर्व मंंत्री सह सारठ के विधायक रंधीर सिंह, पूर्व मंंत्री लुईस मरांडी, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे, दुमका के सांसद सुनील सोरेन, कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी, जिलाध्यक्ष सह विधायक नारायण दास सहित अन्य भाजपा नेता चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं।
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