एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लोहरदगा के लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने मंगलवार को किस्को प्रखंड चौक में स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग, कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि देने के बाद सांसद सुखदेव भगत ने अपने संबोधन में कहा, भगवान बिरसा मुंडा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए हुए सबसे बड़े आंदोलन के प्रतीक हैं। अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान कर उन्होंने हमें सिखाया कि अपने हक के लिए लड़ना कैसे है।
उन्होंने कहा आज भी हमारे समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। बिरसा मुंडा का सपना तब पूरा होगा जब अंतिम गांव के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। उनकी विचारधारा को युवाओं तक ले जाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
सांसद ने उपस्थित लोगों को बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलने, नशा मुक्ति अपनाने और बच्चों को जरूर पढ़ाने का संकल्प दिलाया। सांसद किस्को प्रखंड मुख्यालय में भी भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किए।
मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी किस्को, नेसार अहमद, संदीप गुप्ता, साजिद अहमद चंगू, आलोक कुमार साहू, दयानंद उरांव, अंजू देवी, सुखमणि उरांव, खुदिया अंसारी, मोहम्मद जिलानी, शनिचरवा उरांव सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, आदिवासी समाज के गौरव और जननायक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 9 जून को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनायी जाती है।
वर्ष 1900 में इसी दिन मात्र 25 वर्ष की आयु में उनका निधन तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) के रांची कारागार में हुआ था। उनकी पुण्यतिथि केवल एक महान योद्धा को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और राष्ट्रीय चेतना के उनके संदेश को स्मरण करने का भी दिन है।
भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गांव में एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे तेजस्वी, साहसी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण थे। उस समय अंग्रेजी शासन और जमींदारी व्यवस्था के कारण आदिवासी समाज शोषण, अत्याचार और आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रहा था।
बिरसा मुंडा ने इस अन्याय के विरुद्ध जनजागरण का अभियान चलाया और लोगों को अपने अधिकारों के लिए संगठित किया। उन्होंने आदिवासी समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा, स्वच्छता और नैतिक जीवन को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
इसी कारण आदिवासी समाज उन्हें श्रद्धापूर्वक धरती आबा अर्थात धरती का पिता कहकर संबोधित करता है। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में वर्ष- 1899 में अंग्रेजों और शोषक जमींदारों के विरुद्ध प्रसिद्ध उलगुलान (महाविद्रोह) का सूत्रपात हुआ। इस आंदोलन का उद्देश्य आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना तथा विदेशी शासन से मुक्ति प्राप्त करना था।
उनके संघर्ष ने अंग्रेजी शासन को झकझोर दिया और बाद में आदिवासी भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कानून बनाने की दिशा में प्रेरणा दी। उनकी पुण्यतिथि का मुख्य उद्देश्य नयी पीढ़ी को उनके साहस, त्याग, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक समरसता के आदर्शों से परिचित कराना है। यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि समाज की एकता, अपने अधिकारों की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
आज भगवान बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास के ऐसे अमर नायक हैं, जिनका जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और जनसेवा की अद्वितीय मिसाल है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाये मार्ग पर चलते हुए सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण के मूल्यों को अपने जीवन में अपनायें।
टीम एबीएन, रांची। इलेक्ट्रॉनिक हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था साहित्य संगम संस्थान की झारखंड प्रांतीय इकाई का विधिवत पुनर्गठन किया गया। प्रदेश में साहित्यिक गतिविधियों को नयी गति देने और जमीनी स्तर पर रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई ऊर्जावान कार्यकारिणी की घोषणा की गयी है।
पुनर्गठित प्रदेश इकाई में प्रतिष्ठित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ . निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी को झारखंड इकाई का कार्यकारी अध्यक मनोनीत किया गया है। वहीं, अपनी सक्रियता और सांगठनिक कौशल के लिए जानी जाने वाली पूनम वर्मा अनूप को प्रदेश सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है। सूचना तंत्र और जनसंपर्क को मजबूत करने हेतु ऋतुराज वर्षा को मीडिया प्रभारी के रूप में टीम में शामिल किया गया है।
इसके साथ ही झारखंड इकाई के प्रबुद्ध साहित्यकार और मार्गदर्शक डा प्रशान्त करण को उनके व्यापक अनुभवों को देखते हुए केंद्रीय कार्यकारिणी में केंद्रीय संरक्षक के उच्च पद पर सुशोभित किया गया है। पड़ोसी राज्य बिहार की पटना जिला इकाई में भी संगठन विस्तार करते हुए विभा वर्मा वाची को पंच परमेश्वरी के गरिमामय पद पर मनोनीत किया गया है, जो प्रांतीय समन्वय में सहायक सिद्ध होंगी।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्थान को इन प्रबुद्ध कलमकारों की निष्ठा, समर्पण और साहित्यिक सेवाओं पर पूर्ण विश्वास है। इस पुनर्गठन के बाद झारखंड में इलेक्ट्रॉनिक हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार को एक ऐतिहासिक दिशा मिलेगी और राज्य के नवोदित रचनाकारों को एक सशक्त मंच प्राप्त होगा।
इस पुनर्गठन और नयी घोषणाओं के बाद संपूर्ण देश के साहित्यिक गलियारों सहित साहित्य संगम संस्थान के पटल पर हर्ष का माहौल है। देश भर के प्रतिष्ठित कवियों, लेखकों और भाषाविदों ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की मंगलकामना की है।
टीम एबीएन, रांची। रांची के हटिया स्थित धुर्वा डैम में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। डैम के फाटक के पास पैर फिसलने से 14 वर्षीय बच्ची गहरे पानी में गिर गयी, जिससे उसकी मौत हो गयी। मृतका की पहचान हटिया निवासी श्रेया गाड़ी के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, श्रेया अपने परिवार के साथ धुर्वा डैम घूमने गयी थी। इस दौरान वह डैम के फाटक के निचले हिस्से की ओर चली गयी। बताया जाता है कि अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसलने से वह सीधे गहरे पानी में जा गिरी। घटना के बाद परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह पानी में डूब गयी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों और लोगों की मदद से बच्ची को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया।
इस हादसे के बाद मृतका के परिवार में मातम पसरा है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर धुर्वा डैम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सावधानी बरतने की आवश्यकता को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। जिले में मेदिनीनगर के सदर प्रखंड की एक एचआईवी पॉजिटिव महिला ने पहचान छिपाकर मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव (सिजेरियन) कराने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। महिला और उसके साथ आये पति ने डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों से एचआईवी संक्रमित होने की बात पूरी तरह छिपाये रखी, जबकि दोनों लंबे समय से एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) की दवा ले रहे थे और उनका इस संबंध में ग्रीन कार्ड भी बना हुआ था।
इस खुलासे के बाद अस्पताल के डॉक्टर और सहयोगी स्टाफ के बीच हड़कंप मच गया। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह महिला का आॅपरेशन हुआ। संयोगवश, प्रसव से पहले अस्पताल में की गयी जांच में भी महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आयी थी।
इस संबंध में एआरटी सेंटर के कर्मियों ने बताया कि कभी-कभी लंबे समय तक नियमित रूप से दवा का सेवन करने के कारण (वायरल लोड कम होने से) रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है। मामले का खुलासा शनिवार शाम करीब 5 बजे हुआ, जब एआरटी सेंटर की एक महिला कर्मी को उक्त मरीज के प्रसव की जानकारी मिली।
इसके बाद जब सख्ती से पूछताछ की गयी, तो शाम करीब साढ़े 5 बजे मरीज के अटेंडेंट (पति) ने एचआईवी पीड़ित होने की बात स्वीकार की। बात सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया।
जन्म लेने वाले बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए तत्काल नेब्रापिन दवा दी गयी, जो संक्रमित माताओं से बच्चों मंं वायरस के प्रसार को रोकने के लिए दी जाती है। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। गाइनोकोलॉजिस्ट विभाग के आॅपरेशन थिएटर (ओटी) प्रभारी अनूपा ने बताया कि शनिवार सुबह 10 बजकर 9 मिनट पर इस महिला का सिजेरियन प्रसव कराया गया था।
आॅपरेशन के दौरान महिला या उसके परिजनों ने संक्रमित होने की कोई जानकारी नहीं दी। इस वजह से डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ ने सामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही प्रसव कराया। उन्होंने कहा कि अगर महिला ने यह बात पहले बतायी होती, तो अस्पताल कर्मी विशेष सुरक्षा मानकों (पीपीई किट व अन्य अतिरिक्त सुरक्षा उपकरणों) को बढ़ाकर आॅपरेशन करते, जिससे स्टाफ की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती।
इस घटना के बाद अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे थे, जिस पर प्रबंधन ने स्थिति स्पष्ट की है। मेट्रन शिला कुमारी ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव महिला के सिजेरियन आॅपरेशन में जिन उपकरणों का प्रयोग किया गया था, उन्हें पूरी तरह अलग रखा गया है और उनका किसी दूसरे मरीज पर इस्तेमाल नहीं हुआ है।
अस्पताल के आॅपरेशन थिएटर में प्रत्येक टेबल के साथ उपकरण भी अलग-अलग होते हैं। जिस वक्त इस महिला का आॅपरेशन चल रहा था, उसी दौरान दो अन्य टेबल पर भी दो मरीजों का आॅपरेशन हो रहा था, लेकिन सभी के लिए पूरी तरह अलग और सुरक्षित उपकरणों का उपयोग किया गया था, इसलिए संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एमएमसीएच के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया।
उन्होंने बताया कि जैसे ही इस संवेदनशील मामले की जानकारी मिली, तुरंत गाइनोकोलॉजिस्ट विभागाध्यक्ष, मेट्रन और एआरटी विभाग के काउंसलर को स्थिति पर कड़ी नजर रखने और समस्या का त्वरित व सुरक्षित समाधान करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया। अस्पताल प्रशासन मरीज और बच्चे की सेहत के साथ-साथ स्टाफ की सुरक्षा को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व महासागर दिवस प्रत्येक वर्ष 8 जून को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य महासागरों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा उनके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
महासागर पृथ्वी के लगभग 71 प्रतिशत भाग को आच्छादित करते हैं और मानव जीवन, जैव विविधता तथा वैश्विक जलवायु संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व महासागर दिवस की अवधारणा वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत की गयी थी।
इसके बाद वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक रूप से 8 जून को विश्व महासागर दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। तब से यह दिवस पूरी दुनिया में विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, जागरूकता अभियानों और पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से मनाया जा रहा है।
महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े प्राकृतिक संसाधन हैं। वे मानवता को भोजन, आॅक्सीजन, ऊर्जा, औषधीय संसाधन और रोजगार प्रदान करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में उपलब्ध लगभग 50 प्रतिशत आॅक्सीजन का उत्पादन महासागरों में रहने वाले सूक्ष्म जीवों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा महासागर वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने तथा कार्बन डाइआॅक्साइड को अवशोषित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व महासागर दिवस का प्रमुख उद्देश्य समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे, अत्यधिक मत्स्य दोहन, जलवायु परिवर्तन और समुद्री जैव विविधता के क्षरण जैसी समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिवस सरकारों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों को महासागरों के संरक्षण के लिए एकजुट होने का अवसर प्रदान करता है।
इस दिवस की विशेषता यह है कि यह केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। प्लास्टिक के उपयोग में कमी, जल स्रोतों की स्वच्छता, समुद्री जीवों की सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाकर महासागरों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
आज जब समुद्री प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन वैश्विक चिंता का विषय बने हुए हैं, तब विश्व महासागर दिवस हमें यह संदेश देता है कि महासागरों की रक्षा करना मानवता के भविष्य की रक्षा करना है। स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित महासागर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध और संतुलित पृथ्वी का आधार बन सकते हैं। अत: हमें महासागरों के संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए सतत प्रयास करने चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। सेवा भारती, रांची भाग- 3 का समर कैंप सह नगर वार्षिकोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। मौके पर रांची महानगर के अंतर्गत भाग- 3 के तीन नगरों के बाल संस्कार केंद्र के बच्चे, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की महिलाओं सहित 310 की संख्या रही। यह कार्यक्रम चुटिया के साईं कॉलोनी स्थित श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारत माता के चित्र के समक्ष अतिथियों ने पुष्पार्पण कर किया। इस अवसर पर बच्चों ने सामूहिक ब्रह्मानाद, गायत्री मंत्रोच्चार एवं मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीता श्लोक, भजन-नृत्य के साथ सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की बहनों ने स्वागत गान प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। मौके पर नृत्य मास्टर शुभम कुमार ने बच्चों को भिन्न-भिन्न मुद्रा में नृत्य कला सीखाकर आनंदित कर दिया।
मौके पर श्रीराम नगर में संचालित सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की प्रशिक्षित आठ बहनों को अतिथियों ने प्रमाण पत्र प्रदान किया। मौके पर सेवा भारती के हितचिंतक व समाज सेवी सी ए विनोद बांका ने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवा भारती बच्चों को बाल मन से ही संस्कारित करने का कार्य कर रही है एवं अभावग्रस्त महिलाओं को स्वावलंबन का प्रशिक्षण देकर समाज का नवनिर्माण कर रही हैं।
इस अवसर पर समाजसेवी रोहित प्रसाद ने कहा कि ऐसे सेवा के पवित्र कार्य में समाज को आगे आकर अधिक सहयोग करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में पूर्व अपर आयुक्त, कोयला खान भविष्य निधि के एके सिन्हा एवं जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली, रांची के पूर्व उप प्राचार्य संजय कुमार ने भी अपने महत्वपूर्ण विचारों से बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन किशोरी विकास आयाम की महानगर प्रमुख सपना सिंह ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन रांची भाग-3 के अध्यक्ष परमानंद कुजारा ने किया। कार्यक्रम के दौरान सभी बच्चों को कॉपी-कलम, बिस्किट प्रदान किया गया। इस अवसर पर भाग-3 के उपाध्यक्ष सुमित कुमार सिंह, ओम प्रकाश जलान, रश्मि मिश्रा, महावीर प्रसाद सहित नगर निरीक्षिका, शिक्षिकाओं व स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। गुमला समाहरणालय परिसर में कैनोपी आम बिक्री स्टॉल का उद्घाटन गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो, पुलिस अधीक्षक हरीश बिन जमा, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बिलाल अनवर, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपार समाहर्ता राजीव रंजन, सिविल सर्जन डॉक्टर शंभूनाथ चौधरी की मौजूदगी में लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने किया।
मौके पर सांसद ने कहा कि गुमला जिला में किसानों और महिला स्वयं सहायता समूह को बाजार से सीधे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय उत्पादकों के विपणन को नयी गति देने का प्रयास किया गया है। इस पहल से किसानों को बिचौलियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होगी और अपने उत्पादक को बेहतर मूल्य मिलेगा।
इस स्टॉल का संचालन जेएसएलपीएस द्वारा सुपोषित गुमला रायडीह फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के द्वारा किया जायेगा। मौके पर राजनील तिग्गा, रमेश कुमार चीनी, संतोष गुप्ता गुड्डू, अकील अहमद, आलोक कुमार साहू, शाहिद अहमद बेलू, राजेश रूद्रा, संगीता जायसवाल, मोती चौबे, जाकिर अंसारी, सन्नी सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।
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