टीम एबीएन, रांची/पुणे। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत झारखंड ने पूरे देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के चिंतन शिविर में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राज्य को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान झारखंड को गुणवत्ता पूर्ण दावों के सफल निष्पादन, पारदर्शिता और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए प्रदान किया गया, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक बदलाव का स्पष्ट प्रमाण है। इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि यह सफलता निरंतर मेहनत, प्रतिबद्धता और टीमवर्क का परिणाम है।
उन्होंने कहा, जब मेहनत रंग लाती है तो मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। हमने जो वादा किया था, उसे निभाकर दिखाया है और आगे भी जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्री ने विशेष रूप से सदर अस्पताल रांची की सराहना करते हुए कहा कि यह अस्पताल आज देशभर में आयुष्मान भारत योजना के तहत नंबर वन बनकर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा है।
उन्होंने इसे पूरे झारखंड के स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक सफलता बताया। उन्होंने आगे कहा, मैंने पहले ही कहा था कि मुझे थोड़ा समय दीजिए, मैं व्यवस्था बदलकर दिखाऊंगा। आज मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उसी संकल्प और ठोस कार्यों का परिणाम है।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम (17-18 अप्रैल) में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए जसास (झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी) की टीम छवि रंजन, सीमा सिंह, वैभव राय, डॉ अखिलेश झा एवं आशीष रंजन ने सक्रिय भागीदारी निभायी। इस दौरान रांची सदर अस्पताल के उत्कृष्ट कार्यों को देशभर के प्रतिनिधियों के समक्ष रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
राज्य को मिला यह सम्मान न केवल झारखंड का गौरव बढ़ाने वाला है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के मनोबल को भी नयी ऊर्जा प्रदान करेगा। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि झारखंड स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के नये मानक स्थापित कर रहा है।
अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने पूरी टीम को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि झारखंड आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करता रहेगा और देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।
स्वास्थ्य विभाग, झारखंड के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि राज्य की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पारदर्शिता एवं टीमवर्क का परिणाम है।
मैं जसास की पूरी टीम, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई देता हूं। हमें विश्वास है कि झारखंड आगे भी स्वास्थ्य सेवाओं में नये कीर्तिमान स्थापित करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल विधान सभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है। चुनावी प्रचार प्रसार तेज हो रहा है। सभी पार्टी अपना अपना दम लगाये हुए हैं। झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष टाइगर जयराम महतो, केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो समेत कई दिग्गज नेता बंगाल में दस्तक दे दिये हैं।
आज पुरुलिया जिला जयपुर विधानसभा के झलदा टाली सेंटर मैदान में चुनावी सभा आयोजित की गयी। मौके पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। सभा को संबोधित करते हुए जेएलकेएम सुप्रीमो टाईगर जयराम महतो ने कहा कि जयपुर विधान सभा और बाघमुंडी विधान सभा क्षेत्र जेएलकेएम पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ रही हैं।
जयराम महतो ने जयपुर और बाघमुंडी के जनता से अपील किया कि इस बार वोट बंगाल के बेहतर शिक्षा के लिए, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए करें। लोकतंत्र में सबसे मजबूत और शक्तिशाली ताकत आपका वोट का अधिकार है, आप अपना बहुमूल्य वोट का सद्पयोग कर जयपुर के सेवक दिव्यज्योति सिंह देव और बाघमुंडी के सेवक मनोज कुमार महतो को भारी वोट से विजयी बनायें।
मौके पर केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि बंगाल के जयपुर और बाघमुंडी विधान सभा के जनता इस बार ममता के जंगल राज और भाजपा के डर राज को जड़ से उखाड़ फेंकेगी। जनता के आशीर्वाद से जेएलकेएम समर्थित उम्मीदवार जयपुर से दिव्यज्योति सिंह देव और बाघमुंडी से मनोज कुमार महतो चुनाव जीतते ही क्षेत्र के मूलभूत सुविधा शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।
रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जायेगा। इसके अलावा सभा को जयपुर प्रत्याशी दिवज्योति सिंह देव, बाघमुंडी प्रत्याशी मनोज महतो, रामदास मुर्मू, बेबी के अलावा अन्य नेता संबोधन किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि चुनाव से ठीक पहले तक अपीलीय ट्रिब्यूनल से मंजूरी पाने वाले लोगों को मतदान का अधिकार दिया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा चुनाव से दो दिन पहले तक मंजूर किये जायेंगे, उन्हें आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति होगी। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि 21 अप्रैल या 27 अप्रैल 2026 तक अपीलीय आदेशों को लागू करते हुए एक पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी की जाये, ताकि योग्य नागरिकों को मतदान से वंचित न होना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों की अपील लंबित है, उन्हें केवल इसी आधार पर मतदान का अधिकार वापस नहीं दिया जायेगा। यानी अपील प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई यह पूरी जांच प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण रही है, जिसे कम समय में पूरा करना एक वास्तविक रूप से कठिन कार्य था। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अपीलीय स्तर पर आपत्तियों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को दोबारा खोलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया बाधित न हो।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी लोगों को अपने अधिकारों की पुन: प्राप्ति के लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पहले चरण के लिए एक पूरक मतदाता सूची 21 अप्रैल को जारी की जायेगी। इसी आधार पर उनके कार्यकर्ता रात तक फॉर्म भरकर यह सुनिश्चित करेंगे कि योग्य लोग मतदान से वंचित न रहें।
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि दूसरे चरण के चुनाव के लिए 27 अप्रैल को एक और पूरक सूची जारी की जायेगी, जिसके आधार पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस फैसले से बेहद संतुष्ट और गौरवान्वित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं इस मामले में लड़ाई लड़ी और आज आये फैसले से वह बेहद खुश हैं। उनके अनुसार, आज वह सबसे अधिक प्रसन्न हैं क्योंकि यह निर्णय लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूत करता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अप्रैल महीने की हवाई यात्रा पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में व्यवधान देखने को मिला। जबकि वैश्विक व्यापार भी इससे प्रभावित हुआ है, जिससे कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
ओएजी के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल महीने में देश की कुल विमानन क्षमता जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय में हल्की गिरावट दर्ज की गयी है। यह कमी करीब 0.2 प्रतिशत रही। इस गिरावट की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता में आयी तेज कमी है, जो लगभग 7.9 प्रतिशत तक पहुंच गयी।
इसके पीछे पश्चिम एशिया में कमजोर मांग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि घरेलू उड़ानों की क्षमता में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई कमी की भरपाई नहीं कर पायी। लेकिन इसी दौरान एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में इजाफा होने से घरेलू हवाई किराये भी बढ़ गये हैं।
किराये में इस तेजी का असर यात्रियों की मांग पर पड़ सकता है। भविष्य में में यात्रा की संख्या प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है। अप्रैल महीने में एयरलाइंस की कुल सीट क्षमता में गिरावट दर्ज की गयी है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को मिलाकर इस दौरान कुल 73.6 लाख सीटें उपलब्ध रहीं। जो पिछले साल अप्रैल में 79 लाख सीटों के मुकाबले कम हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, इस बार कुल सीट क्षमता में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की हिस्सेदारी घटकर 30 प्रतिशत रह गयी है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह हिस्सा 32 प्रतिशत था। जिससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय सेगमेंट में कमी का असर कुल क्षमता पर पड़ा है।
अप्रैल में एयरलाइंस की कुल सीट क्षमता घटकर 73.6 लाख रह गई, जो पिछले साल इसी महीने के 79 लाख से कम है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की हिस्सेदारी भी घटकर 30फीसदी रह गयी, जबकि पिछले साल यह 32 फीसदी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को एक भीषण हादसा हो गया। प्लांट में लगे बॉयलर के अचानक फटने से जोरदार धमाका हुआ, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गयी। इस दर्दनाक घटना में अब तक छह मजदूरों की मौत हो गयी है और 18 लोग घायल हुए हैं।
घायलों को तत्काल रायगढ़ के जिंदल अस्पताल ले जाया गया है। वहां अभी तक 18 लोगों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है। गंभीर रूप से झुलसे लोगों में से अब छह की मौत रायगढ़ के निजी अस्पताल में हो गयी है। शुरुआती जानकारी में 7 से 10 लोगों के मरने की आशंका थी और 30 से 40 मजदूरों के झुलसने की खबर मिली थी।
विस्फोट इतना तेज था कि इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनायी दी। इससे आसपास के ग्रामीण भी दहशत में आ गये। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंच गये। घायलों को एंबुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उनका इलाज लगातार जारी है और कुछ घायलों की हालत नाजुक बतायी जा रही है।
हादसे के बाद प्लांट प्रबंधन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाये हुए हैं। प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य तेजी से जारी है, साथ ही घटना के कारणों की जांच के निर्देश भी दे दिये गये हैं। फिलहाल, मृतकों और घायलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संशोधित बिल के अनुसार 2029 के आम चुनाव में ही महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी है। इसके अलावा सीटों का परिसीमन 2011 की जनगणना के अनुसार किया जायेगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार सीटों का अनुपात लगभग समान ही रहेगा, लेकिन दक्षिणी राज्यों की ओर से मांग उठ रही है कि इसकी गारंटी सरकार की ओर से दी जाये।
महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा के सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 850 हो जायेगी। अब तक आयी जानकारी के अनुसार यह संख्या 816 तक रहने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 850 होने की चर्चा है। इसके तहत 815 सीटें राज्यों में होंगी। वहीं 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से आयेंगी, जिनमें से अकेले 11 सीट राजधानी दिल्ली में होंगी।
वहीं महिलाओं के लिए कम से कम 273 सीटें यानी रिजर्व रखी जायेंगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा सभी विधानसभाओं में भी ऐसा होगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग की सीटें 84 से बढ़कर 136 हो जायेंगी। वहीं एसटी सीटों की संख्या 47 से बढ़कर 70 हो सकती है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महिला आरक्षण के संशोधन बिल के ड्राफ्ट में 850 सीटों का प्रस्ताव रखा गया है। यह बिल आज ही सांसदों को दिया जायेगा ताकि वे रिव्यू कर सकें। इस बीच गुरुवार से संसद का विशेष सत्र भी शुरू हो रहा है, जो तीन दिनों तक चलेगा। इस सत्र में महिला आरक्षण में संशोधन बिल रखा जायेगा।
इसके तहत 2029 के आम चुनाव में ही महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी है। इसके अलावा सीटों का परिसीमन 2011 की जनगणना के अनुसार किया जायेगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार सीटों का अनुपात लगभग समान ही रहेगा, लेकिन दक्षिणी राज्यों की ओर से मांग उठ रही है कि इसकी गारंटी सरकार की ओर से दी जाये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं। भारतीय जनता पार्टी इस बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरी है और विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
खासतौर पर आदिवासी वोट बैंक को लेकर पार्टी ने विशेष ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि झारखंड से सटे जिलों में इन मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने झारखंड के प्रमुख आदिवासी नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारने का फैसला लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी समेत एक दर्जन से अधिक नेताओं को सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है। ये नेता जनसभाओं, पदयात्राओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए आदिवासी मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास करेंगे। जानकारी के अनुसार, चंपई सोरेन जल्द ही बंगाल रवाना होंगे, जबकि अन्य नेताओं के दौरे भी लगातार जारी रहेंगे।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन 15 अप्रैल को पश्चिम बंगाल पहुंचकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। इससे आदिवासी मतदाताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र हो गयी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है। पिछले चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार माइक्रो-लेवल रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के सहारे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में झारखंड के नेताओं की सक्रियता को अहम माना जा रहा है।
झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के इलाकों में आदिवासी मतदाताओं की संख्या और प्रभाव को देखते हुए सभी दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। चुनावी समीकरणों में इन मतदाताओं की भूमिका परिणामों को प्रभावित करने वाली मानी जा रही है, जिससे यह मुकाबला और दिलचस्प बन गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का आज अंत हो गया। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा भोसले की अंतिम यात्रा आज मुंबई में निकाली जा रही है। तिरंगे में लिपटी उनकी देह और सफेद फूलों से सजी उनकी अंतिम विदाई की तस्वीरें हर भारतीय की आंखों को नम कर रही हैं।
आशा जी के निवास स्थान पर सुबह से ही उनके अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। खेल जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर, जो आशा जी को अपनी मां समान मानते थे श्रद्धांजलि देते समय अपने आंसू नहीं रोक पाये। उनके अलावा अभिनेत्री तबू और आशा पारेख समेत फिल्म जगत की तमाम बड़ी हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचीं।
आशा भोसले का जाना केवल संगीत जगत की क्षति नहीं है बल्कि करोड़ों लोगों के लिए एक व्यक्तिगत दुख है। उन्होंने हर दौर के साथ खुद को ढाला। क्लासिकल गानों से लेकर फुट-टैपिंग पॉप और कैबरे तक उन्होंने हर विधा में महारत हासिल की। उनका करियर हमें सिखाता है कि समय के साथ खुद को बदलना ही असली सफलता है। उन्होंने नये दौर के संगीतकारों के साथ भी उतनी ही सहजता से काम किया जितना पुराने दिग्गजों के साथ।
कुछ ही देर में मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जायेगा। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें गार्ड आफ आनर दिया जायेगा। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि उनके हजारों प्रशंसक अपनी प्रिय गायिका को आखिरी विदाई दे सकें।
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