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Published / 2026-02-03 18:04:10
अमेरिका से टैरिफ डील में किसानहित से कोई समझौता नहीं!

किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं हुआ... टैरिफ डील पर सरकार के सूत्रों ने साफ की पूरी बात 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को लेकर संसद के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार के सूत्रों ने साफ किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। 

किसानों से जुड़े कृषि और डेयरी जैसे सभी संवेदनशील सेक्टर पहले की तरह पूरी तरह संरक्षित रहेंगे। सरकारी सूत्रों ने कहा कि विपक्ष का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है और यह समझौता भारत के आर्थिक हितों तथा निर्यात क्षमता को मजबूत करने वाला है। 

  1. भारतीय किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं। 
  2. संवेदनशील डेयरी और कृषि क्षेत्रों की रक्षा की जायेगी। 
  3. भारत ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा, बाजार मूल्य इसका निर्धारण करेंगे। 
  4. भारत प्रतिबंधित संस्थाओं से ऊर्जा खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। 
  5. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर की ओर 5 गुना बढ़ेगा। 
  6. नये व्यापार समझौते से भारी आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। 

कच्चे तेल की खरीद पर भी सरकार ने दी सफाई 

सूत्रों ने बताया कि भारत पहले की तरह ही दुनिया के उन देशों से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां से खरीदने पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। वेनेजुएला पर जब पाबंदी थी, भारत ने वहां से तेल नहीं खरीदा। अब पाबंदी हट चुकी है, इसलिए बाजार भाव (रेट) के आधार पर खरीद जारी रहेगी। 

विपक्ष ने लगाया किसानों के हितों से समझौते का आरोप 

संसद भवन के बाहर विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ टैरिफ डील में किसानों के हितों से समझौता किया गया है। सरकार ने किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल दिया है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार संसद में डील की सभी शर्तों को पेश करे और यह स्पष्ट करे कि इसका कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 

पीयूष गोयल टैरिफ डील के बारे में संसद में समझायेंगे 

इस पर सरकार का कहना है कि कृषि डेयरी सेक्टर को किसी भी तरह का खतरा नहीं। संवेदनशील श्रेणियां पहले जैसी संरक्षित रहेंगी। यह डील भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करेगी।

Published / 2026-02-02 21:16:43
दलाई लामा को पहली बार ग्रैमी अवार्ड

आडियो बुक श्रेणी में धमाका, दलाई लामा ने पहली बार जीता ग्रैमी अवार्ड 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के प्रतिष्ठित संगीत पुरस्कार 68वें ग्रैमी अवॉर्ड समारोह में रविवार को दलाई लामा ने आडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई (स्टोरीटेलिंग) रिकॉर्डिंग श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीता। यह दलाई लामा का पहला ग्रैमी पुरस्कार है। उन्होंने इस श्रेणी में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश केतनजी ब्राउन जैक्सन को पीछे छोड़ा। के-पॉप डेमन हंटर्स फिल्म के गीत गोल्डन ने दृश्य मीडिया के लिए लिखे गये सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार जीता। 

यह पहला मौका है जब किसी के-पॉप कलाकार/समूह ने ग्रैमी जीता। गीतकारों ने पुरस्कार लेते समय अंग्रेजी और कोरियाई दोनों भाषाओं में अपना भाषण दिया। संगीत फिल्म का पुरस्कार म्यूजिक फॉर जॉन विलियम्स को मिला और इसी के साथ निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने अपना पहला ग्रैमी जीता और वह आधिकारिक रूप से ईजीओटी (एमी, ग्रैमी, टोनी और आस्कर जीतने वाले कलाकार) बन गये। मुख्य समारोह से पहले होने वाला प्रारंभिक पुरस्कार समारोह लॉस एंजिलिस शहर के पीकॉक थिएटर में आयोजित किया गया। इस दौरान 86 ग्रैमी पुरस्कार दिये जाने हैं। 

समारोह में कई कलाकारों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की आव्रजन नीति के खिलाफ आवाज उठायी। अमेरिकी गायक शाबूजी ने भावुक होकर कहा कि प्रवासियों ने इस देश को बनाया है। अमेरिकी गायक ग्लोरिया एस्टेफन ने भी मौजूदा राजनीतिक हालात पर चिंता जतायी। मुख्य समारोह की मेजबानी हास्य कलाकार ट्रेवर नोआ करेंगे। 2026 के ग्रैमी नामांकनों में केंड्रिक लैमर नौ नामांकनों के साथ सबसे आगे हैं, जबकि लेडी गागा, जैक एंटोनॉफ और अन्य बड़े नाम भी दौड़ में शामिल हैं।

Published / 2026-02-01 23:12:14
आम बजट 2026 से जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा

  • आम बजट 2026 से जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा
  • देश का 9वां बजट पेश... जानिए क्या सस्ता और क्या हुआ महंगा?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। यह मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर उनका लगातार नौवां बजट रहा। अपने बजट भाषण में उन्होंने कस्टम ड्यूटी से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। कुछ वस्तुएं सस्ती होंगी, जबकि कुछ चीजों की कीमत बढ़ सकती है।

कस्टम ड्यूटी में क्यों किया गया बदलाव

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार का फोकस उन वस्तुओं को बढ़ावा देना है, जिनका निर्माण देश में होता है। इसी उद्देश्य से भारत में बनने वाले उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला लिया गया है। इससे घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लेदर और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर के निर्यात को ड्यूटी फ्री किया जा रहा है। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में भी बेसिक कस्टम ड्यूटी में राहत दी जाएगी, जिससे स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

ये चीजें होंगी सस्ती

बजट घोषणाओं के बाद कई रोजमर्रा और टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं : कपड़े और टेक्सटाइल उत्पाद, लेदर और चमड़े से बने आइटम, सिंथेटिक फुटवियर, कैंसर और डायबिटीज की 17 जरूरी दवाएं (ड्यूटी फ्री), लिथियम-आयन सेल, मोबाइल फोन की बैटरियां, सोलर ग्लास, मिक्स्ड गैस सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, माइक्रोवेव ओवन, विमानों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन, विदेश यात्रा से जुड़ी कुछ लागत, इन वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी घटने से आने वाले समय में इनके दाम कम होने की संभावना है।

इन सेक्टर्स में बढ़ सकती है महंगाई

वहीं कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं, जहां कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे इन चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शराब, स्क्रैप, खनिज और उनसे जुड़े उत्पाद।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

कुल मिलाकर बजट 2026 में सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और हेल्थ सेक्टर को राहत देने की कोशिश की है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में ड्यूटी बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने और आयात को नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर बाजार और आम उपभोक्ताओं पर साफ दिखाई देगा।

Published / 2026-02-01 21:20:14
सीतारमण का ऐलान- मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज पर अब नहीं लगेगा टैक्स

वित्त मंत्री द्वारा बजट 2026 में मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज को इनकम टैक्स और टीडीएस से पूरी तरह फ्री करने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। इसमें एक ऐसा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जो सड़क हादसों के शिकार लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है। अब मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) से मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स बिल्कुल नहीं लगेगा।

साथ ही इस ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जायेगा। वित्त मंत्री ने भाषण में कहा, मैं प्रस्ताव दे रही हूं कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिये गये ब्याज को इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। इस ब्याज पर कोई टीडीएस भी नहीं लगेगा। यह छूट अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी। 

क्यों लिया गया यह फैसला? 

बजट में साफ लिखा है कि मोटर वाहन दुर्घटना में घायल हुए लोग और उनके परिवार पहले से ही बहुत परेशान होते हैं। ऐसे में मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाना उनकी मुश्किलें और बढ़ा देता है। इसलिए अब इस ब्याज को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया जायेगा। चाहे ब्याज की रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अब उस पर कोई टैक्स नहीं कटेगा। 

पुराने नियम क्या थे? 

पहले एमएसीटी से मिलने वाले मुआवजे पर ब्याज को इनकम माना जाता था और उस पर टैक्स लगता था। टीडीएस के मामले में अगर एक साल में ब्याज 50,000 रुपये से कम होता था तो कोई कटौती नहीं होती थी। लेकिन इससे ज्यादा होने पर टीडीएस कट जाता था। अब यह पूरी सीमा खत्म हो गई है। यानी छोटी हो या बड़ी, ब्याज की कोई भी राशि हो, अब टीडीएस नहीं कटेगा। 

कोर्ट में लंबित था मामला 

यह मुद्दा काफी समय से अदालतों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल विचाराधीन है कि क्या एमएसीटी के ब्याज पर टीडीएस लगना चाहिए। 2024 में कोर्ट ने केंद्र और इनकम टैक्स विभाग से इस पर अपनी राय मांगी थी। 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच हो कि कितने लोगों के मुआवजे से टीडीएस काटा गया और वह पैसा रिफंड के रूप में पड़ा है क्योंकि कई लोग टैक्स स्लैब में ही नहीं आते। 

बंबई हाई कोर्ट ने भी एक फैसले में कहा था कि क्लेम दाखिल होने से लेकर अवॉर्ड या अपील तक का ब्याज इनकम नहीं है, इसलिए उस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। इस प्रस्ताव से उन हजारों परिवारों को फायदा होगा जो सालों इंतजार के बाद मुआवजा पाते हैं और उसमें जुड़ा ब्याज भी टैक्स की वजह से कम हो जाता था।

Published / 2026-01-31 21:35:13
देश की सबसे भ्रष्ट सरकार पश्चिम बंगाल में : अमित शाह

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार, घुसपैठ को बढ़ावा देने और सीमा सुरक्षा में बाधा डालने के आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार बीएसएफ को बाड़बंदी के लिए जमीन नहीं दे रही है। शाह ने दावा किया कि 2026 में इस सरकार को जनता उखाड़ कर फेंक देगी। 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार जितनी भ्रष्ट कोई और सरकार देश में नहीं है। सिलीगुड़ी में भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर सीमा सुरक्षा उपायों में बाधा डालने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन उपलब्ध न कराने का भी आरोप लगाया। 

शाह ने कहा, मैंने संसद में कहा था कि बीएसएफ को बाड़ लगाने के लिए जमीन की जरूरत है। मैंने ममता बनर्जी को सात बार पत्र लिखा। मैं खुद भी उनके कार्यालय गया, लेकिन फिर भी जमीन नहीं दी गयी। गृह मंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि टीएमसी सरकार पश्चिम बंगाल में समुदायों के बीच तनाव को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, ममता बनर्जी ने यह सुनिश्चित किया है कि बंगाल में हर समुदाय एक-दूसरे से लड़े, जिससे राज्य की एकता के लिए खतरा पैदा हो रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अमित शाह ने कहा कि भाजपा उत्तर बंगाल की सभी सीट पर जीत हासिल करेगी, क्योंकि लोग टीएमसी के सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्य के अधिकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने में निर्वाचन का सहयोग नहीं कर रहे। 

इससे पहले, उत्तर 24 परगना के बैरकपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बड़ी बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने टीएमसी सरकार पर घुसपैठियों को बचाने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और चुनावी फायदे के लिए जानबूझकर सीमा सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार का गठन अब सिर्फ एक राजनीतिक मकसद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है। उन्होंने यह दावा भी किया कि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाएगी। शाह ने आरोप लगाया, जिस तरह से पश्चिम बंगाल में घुसपैठ हो रही है, वह पूरे देश के लिए सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। अदालत के आदेश के बाद भी तृणमूल सरकार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सीमा पर बाड़बंदी के लिए जमीन नहीं दे रही है, क्योंकि घुसपैठिए उसके वोट बैंक हैं। 

उन्होंने दावा किया कि राज्य में प्रशासन और पुलिस अवैध प्रवासियों को नहीं रोक रही है, जिन्हें जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पूरे देश में भेजा जा रहा है। शाह ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि चाहे ममता बनर्जी उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार 31 मार्च तक भूमि उपलब्ध करायें या नहीं, अप्रैल में भाजपा का मुख्यमंत्री बनते ही 45 दिनों के भीतर सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा कर दिया जायेगा। 

उन्होंने दावा किया कि भाजपा अपने वादों को पूरा करने का रिकॉर्ड रखती है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि वह भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीली तार की बाड़ लगाने के लिए नौ सीमावर्ती जिलों में पहले से अधिग्रहीत भूमि 31 मार्च तक सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दे। अदालत ने यह भी कहा था कि भारत-बांग्लादेश सीमा का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल में है, और 2016 से कई कैबिनेट निर्णयों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सीमा के बड़े हिस्से पर अब तक बाड़ नहीं लगायी जा सकी है। 

असम से तुलना करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद वहां घुसपैठ रुक गयी, जबकि कांग्रेस शासन के दौरान ऐसा नहीं था। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शाह ने कहा, ममता बनर्जी, आप एसआईआर का जितना विरोध करना चाहें करें, लेकिन यह प्रक्रिया घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद यदि कोई अवैध नाम शेष रहेंगे तो उन्हें भी हटा दिया जायेगा। 

शाह ने तृणमूल कांग्रेस पर नागरिकता को लेकर मतुआ और नामशूद्र समुदायों को धमकाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, डरने की कोई जरूरत नहीं है। ममता जी आपके वोटों को छू नहीं सकतीं। उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार में उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। कोलकाता के पास आनंदपुर में मोमो बनाने की फैक्टरी में हाल ही में लगी आग की घटना का जिÞक्र करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि यह कोई हादसा नहीं था, बल्कि ममता बनर्जी सरकार के भ्रष्टाचार का नतीजा था। 

उन्होंने पूछा कि फैक्टरी मालिकों को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और क्या सत्तारूढ़ पार्टी से उनकी नजदीकी इसका कारण है। गृह मंत्री ने पूछा, क्या बंगाल में प्रशासन पूरी तरह से खत्म हो गया है? उन्होंने पूछा कि अगर पीड़ित किसी खास समुदाय के होते, तो तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया अलग होती। यह आरोप लगाते हुए कि राज्य में भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है, उन्होंने बनर्जी को विधानसभा चुनाव में दागी मंत्रियों को टिकट न देकर इस खतरे के प्रति अपनी गंभीरता साबित करने की चुनौती दी। 

शाह ने तृणमूल पर घुसपैठियों को खुश करने के लिए संसद में वंदे मातरम् पर चर्चा का विरोध करने का भी आरोप लगाया और मतदाताओं से तृणमूल कांग्रेस सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने तथा बंगाल में देशभक्तों व राष्ट्रवादियों की सरकार बनाने की अपील की। एक निर्णायक जनादेश मिलने की भविष्यवाणी करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा 2026 के चुनाव में 50 प्रतिशत मत प्रतिशत के आंकड़े को पार कर जायेगी। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में 38 प्रतिशत वोट और 77 सीट हासिल की थीं। उन्होंने जोर देकर कहा, साल 2026 तृणमूल कांग्रेस को टाटा, बाय-बाय कहने का साल है।

Published / 2026-01-30 22:16:05
आम बजट को लेकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

आम बजट 2026

  • 30 कॉलेज के विद्यार्थियों से संवाद करेंगी वित्त मंत्री सीतारमण, जानें क्यों लिया ये फैसला

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को आम बजट 2026-27 पेश करने के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 30 कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगी। सीतारमण एक फरवरी को अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करने जा रही हैं, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। 

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस पहल के तहत छात्र-छात्राओं को लोकसभा दीर्घा से केंद्रीय बजट पेश किए जाने की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा। इससे वे वर्ष की इस सबसे महत्वपूर्ण संसदीय कार्यवाही के साक्षी बन सकेंगे। बयान के अनुसार, ये छात्र भारत के विभिन्न राज्यों से आए हैं और वाणिज्य, अर्थशास्त्र, चिकित्सा शिक्षा तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों जैसे विभिन्न शैक्षणिक विषयों से जुड़े हैं।

ये छात्र कर्तव्य भवन-1 स्थित वित्त मंत्रालय भी जाएंगे और वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करेंगे। इसका उद्देश्य उन्हें मंत्रालय के कामकाज, नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया और राष्ट्र निर्माण में संस्थानों की भूमिका के बारे में व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। शाम को वित्त मंत्री सीतारमण छात्र-छात्राओं के साथ एक मुक्त चर्चा करेंगी।

इस दौरान बजट की मुख्य प्राथमिकताओं, भारत के भविष्य के दृष्टिकोण और युवाओं पर इसके प्रभावों पर चर्चा होगी। छात्र भी इस संवाद के दौरान अपने विचार, आकांक्षाएं और राष्ट्र के प्रति अपना दृष्टिकोण साझा करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच वित्त, अर्थशास्त्र, शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

साथ ही, यह भारत की वित्तीय और संसदीय कार्यवाहियों में युवाओं की रचनात्मक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। बयान में यह भी कहा गया है कि बजट तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न मंचों के माध्यम से युवाओं सहित आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए थे, जिनकी झलक आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में दिखाई देगी।

Published / 2026-01-30 22:11:08
आम बजट में जीडीपी और प्रबंधन पर जोर

  • बजट 2026-27: राजकोषीय घाटे के बजाय ऋण-जीडीपी अनुपात के प्रबंधन पर जोर संभव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आगामी आम बजट में किसी खास राजकोषीय घाटे के आंकड़े को लक्षित करने के बजाय ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर जोर दिया जाएगा, जो इस समय लगभग 56 प्रतिशत है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि देश एफआरबीएम कानून में दिए गए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग के लगभग अंत तक पहुंच गया है। भारत जैसी बढ़ती और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए 3-4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा सहज और उचित माना जाता है, जिसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता के साथ आर्थिक विस्तार को संतुलित करना है। 

संशोधित राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत, 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे रखा गया था। इसलिए, केंद्र सरकार ने ऋण-जीडीपी अनुपात को एक नया मानक घोषित किया है। अगले छह साल का मसौदा एक फरवरी, 2025 को जारी एफआरबीएम वक्तव्य में घोषित किया गया था।

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई, 2024 के अपने बजट भाषण में कहा था, मेरे द्वारा 2021 में घोषित राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग ने हमारी अर्थव्यवस्था की बहुत अच्छी सेवा की है, और हमारा लक्ष्य अगले वर्ष घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाना है। 

सरकार इस पथ पर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा था कि 2026-27 के बाद से हमारा प्रयास प्रत्येक वर्ष राजकोषीय घाटे को इस तरह रखने का होगा कि केंद्र सरकार का ऋण, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटते क्रम पर रहे।

यह कठोर वार्षिक राजकोषीय लक्ष्यों के बजाय अधिक पारदर्शी और परिचालन रूप से लचीले राजकोषीय मानकों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करता है। इसे राजकोषीय प्रदर्शन के अधिक विश्वसनीय माप के रूप में भी मान्यता दी गई है, क्योंकि यह पिछले और वर्तमान वित्तीय निर्णयों के मिले जुले प्रभावों को दर्शाता है।

Published / 2026-01-28 20:45:52
कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस पर हुआ 35 जोड़ों का आदर्श दहेज मुक्त विवाह, 273 यूनिट रक्तदान

संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में हुआ महाविशाल समागम का आयोजन, लाखों लोगों ने किया पापनाशक भंडारा  

कमल सिंह लोधा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, बेतूल। बुधवार को जिला बैतूल के ग्राम उड़दन स्थित सतलोक आश्रम में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में चल रहे महाविशाल समागम का दूसरा दिन था, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आकर पापनाशक भंडारा ग्रहण किया। 

आश्रम के सेवादारों ने बताया कि आज से 508 वर्ष पूर्व पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी नकली पण्डो द्वारा समाज में फैलाये पाखंड (कि काशी में मरने से स्वर्ग मिलता है और मगहर में मरने वाला नरक जायेगा या गधा बनेगा) को खत्म करने के लिए मगहर से लाखों हिंदू-मुस्लिम लोगों के सामने सशरीर सतलोक गए थे जिसकी याद में ये तीन दिवसीय महा विशाल समागम संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सानिध्य में मनाया जा रहा है जिसमे पूरे मानव समाज को आने का खुला निमंत्रण दिया गया है।

इस महाविशाल भंडारे में शुद्ध देशी घी से बने लड्डू, सब्जी, पूड़ी, दाल,चावल, हलवा का भंडारा दिया जा रहा है साथ ही आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज जी द्वारा लिखित अमर ग्रन्थ साहिब की अमरवाणी का अखंड पाठ चल रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन संत रामपाल जी महाराज के समाज सुधार कार्यों के अंतर्गत मात्र 17 मिनिट में  गुरुवाणी द्वारा 35 जोड़ों का दहेज मुक्त विवाह भी संपन्न कराया गया और जिला चिकित्सालय बैतूल से आए स्टाफ की मौजूदगी में अनुयायियों द्वारा 273 यूनिट रक्तदान भी किया गया।

साथ ही 3585 लोगो के देहदान के संकल्प फार्म भरे गए। बिना दान दहेज,बिना फिजूलखर्ची के साथ हुए इस विवाह में किसी प्रकार का आडंबर देखने को नहीं मिला,विवाह के सभी जोड़े सादे सिंपल कपड़ो में बैठे रहे व अपने गुरुदेव जी की अमरवाणी को सुनकर सादगीपूर्ण तरीके से विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। समागम में आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने के लिए 300़900, 90़900 व 60़900 के विशाल पांडाल,भंडारे के लिए 350़200 के पांडाल की व्यवस्था है। 

समागम में आने वाले श्रद्धालुओं में लिए जूता घर, पार्किंग, मोबाइल चार्जिंग, शौचालय आदि की पर्याप्त सुविधा के साथ सृष्टि रचना की आध्यात्मिक प्रदर्शनी व नि:शुल्क नामदीक्षा, नि:शुल्क नेत्र व दंत चिकित्सा के साथ अन्य बीमारियों के उपचार की व्यवस्था भी की गई है। फोरलेन से आश्रम तक की दूरी में बने रोड पर लगी पदर्शनी इतनी सुंदर व मोहक लग रही है कि लोग रुककर आश्रम का भ्रमण करने आ रहे है। 

आश्रम का रात्रि दृश्य भी देखते ही बनता है, समागम के लिए आश्रम को इस प्रकार से सजाया गया है जैसे दीवाली का त्यौहार हो। समागम के दूसरे दिन खबर लिखे जाने तक 2750 लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नामदीक्षा ग्रहण कर अपने जीवन को सफल बनाया। कार्यक्रम में आये प्रशासन के अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इतनी अधिक तादाद में श्रद्धालुओं के आने के बाद भी यातायात सुविधा में किसी प्रकार की अव्यवस्था व संगत में भगदड़ देखने को नही मिली।

यह भी कहा कि कही भी इतने विशाल कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए भारी संख्या में पुलिस के जवान व मिलिट्री बुलानी होती है लेकिन संत रामपाल जी महाराज के कार्यक्रम में सारी व्यवस्था उनके सेवादार भक्त ही कर लेते हैं। अपने गुरुदेव जी के आदेशानुसार आने वाली सर्व संगत शांतिपूर्वक आकर अमर वाणी को श्रवण कर भंडारा प्रसादी लेकर वापस अपने घर जाती रही। 29 जनवरी को इस महासमागम का अंतिम दिन है। जिसके लिए सर्व समाज के लोगों को आने का आत्मीय आमंत्रण दिया गया है।

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