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Published / 2026-03-29 22:06:04
असम का चाय बागान समुदाय, राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़, लेकिन बुनियादी अधिकारों से वंचित : हेमंत सोरेन

  • मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने डिब्रूगढ़ जिले के तिंगखोंग और सोनारी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी महावीर बासके एवं बलदेव तेली के पक्ष में जनसभा को संबोधित किया 

...और क्या बोले मुख्यमंत्री 

  • अब समय परिवर्तन का है, आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेगा 
  • आदिवासी कमजोर नहीं हैं, सत्ता बनाना और सत्ता को बदलना भी जानते हैं 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, असम/ डिब्रूगढ़/ तिंगखोंग/ सोनारी/ रांची। असम चुनाव प्रचार के दूसरे दिन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सह झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष ने डिब्रूगढ़ जिले के तिंगखोंग एवं सोनारी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी महावीर बासके और बलदेव तेली के पक्ष में विशाल जनसभा को सम्बोधित किया।  

उठायी पारिश्रमिक और अधिकारों की बात 

अपने संबोधन में हेमन्त सोरेन ने कहा कि असम का चाय बागान समुदाय जो लगभग 200 वर्षों से असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, आज भी अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित है। असम में चाय बागान श्रमिकों को मात्र 250 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है, जबकि अन्य राज्यों जैसे कर्नाटक में यह लगभग 600 रुपये प्रतिदिन है। उन्होंने आगे कहा कि चाय बागान श्रमिकों को आज भी भूमि अधिकार, सम्मानजनक आवास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इस समुदाय का केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग किया गया है, परंतु उनके जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। 

आदिवासी समाज का वोट बैंक के रूप में हो रहा इस्तेमाल 

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय के साथ हो रहे लगातार शोषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार हर बार आदिवासियों का केवल उपयोग करती है और काम निकल जाने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है। आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जाता है। अब समय परिवर्तन का है और आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेगा। जिस प्रकार झारखण्ड में हमारे पूर्वजों ने संघर्ष के बल पर राज्य हासिल किया, उसी प्रकार अब असम में भी अपने हक और सम्मान के लिए संघर्ष किया जाएगा। 

सत्ता बदलना भी जानते हैं आदिवासी 

आदिवासी समाज की शक्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी कमजोर नहीं हैं, बल्कि वे सत्ता बनाना भी जानते हैं और जरूरत पड़ने पर सत्ता को बदलना भी जानते हैं। आदिवासी समाज अपने अधिकार लेकर रहेगा और इसके लिए निरंतर संघर्ष करेगा। अपने संबोधन में उन्होंने झारखण्ड के वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्वजों ने तीर-धनुष के बल पर अपने अधिकारों की रक्षा की उसी मार्ग पर चलते हुए इस चुनाव में भी आदिवासी समाज अपनी ताकत का परिचय देगा। उन्होंने चाय बागान एवं आदिवासी समुदाय से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया तथा आगामी विधानसभा चुनाव में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की। 

असम के सोनारी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी बलदेव तेली के पक्ष में जनसभा को संबोधित करते हुए हेमन्त सोरेन ने कहा झारखण्ड की तरह यहाँ भी युवाओं को अवसर, मेहनतकशों को सम्मान और आदिवासी-स्थानीय समाज को उनका अधिकार मिलना चाहिए। विकास का मतलब केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हर घर तक पहुंचती खुशहाली है। असम के सोनारी विधानसभा में असम की महान जनता को अब बदलाव चाहिए - ऐसा बदलाव जो सिर्फ़ वादों में नहीं, जमीनी हकीकत में दिखे। इस अवसर पर झारखण्ड सरकार के कई कैबिनेट मंत्री एवं पार्टी के वरिष्ठ विधायक भी उपस्थित रहे। जनसभा में हजारों की संख्या में चाय बागान श्रमिक, आदिवासी समुदाय के सदस्य एवं स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

Published / 2026-03-28 18:00:49
असम में वोटरों को गोलबंद करने में जुटे सीएम हेमंत सोरेन

  • CM हेमंत सोरेन का असम दौरा टला, सामने आई ये वजह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज यानी 28 मार्च को असम में विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए जाने वाले थे, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका दौरा टल गया। अब वे जल्द ही नया कार्यक्रम बनाकर असम जाएंगे और वहां पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे।

मौसम बदलने के कारण यात्रा टली

दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का असम दौरा मौसम खराब होने की वजह से स्थगित कर दिया गया है। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे असम रवाना होना था, लेकिन अचानक मौसम बदलने के कारण उन्होंने यात्रा टाल दी। 

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन भी चुनाव प्रचार के लिए असम जा सकती हैं। मुख्यमंत्री वहां कुछ दिनों तक रुककर पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे।

JMM ने असम विधानसभा चुनाव में 21 उम्मीदवार उतारे

गौरतलब है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में 21 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से तीन के नामांकन रद्द होने की खबर है। अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उन सभी क्षेत्रों में जनसभाएं और प्रचार करेंगे, जहां पार्टी के प्रत्याशी मैदान में हैं।

Published / 2026-03-28 11:16:04
आज नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी

  • प्रधानमंत्री मोदी नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 

प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर यहां भारी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे और एक रैली को भी संबोधित करेंगे। 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ बहु-मॉडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। बयान के अनुसार हवाई अड्डे में एक बहु-मॉडल कार्गो हब भी शामिल है, जिसे प्रतिवर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल ढुलाई के लिए तैयार किया गया है। 

बयान के अनुसार इस क्षमता को लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है। बयान के अनुसार हवाई अड्डे की प्रारंभिक यात्री संचालन क्षमता 1.2 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष होगी, जिसे सात करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। मोदी टर्मिनल का निरीक्षण भी कर सकते हैं।

Published / 2026-03-27 20:56:30
पीएम मोदी ने सभी सीएम के साथ की तैयारियों की समीक्षा

पीएम मोदी की राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आॅनलाइन बैठक शुरू, तैयारियों की हो रही समीक्षा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं। यह बैठक डिजिटल माध्यम से हो रही है। बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। आदर्श आचार संहिता के कारण चुनावी राज्य इस बैठक में शामिल नहीं हैं। चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक होगी, जो कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से की जायेगी।  

भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार 

इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।  

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

Published / 2026-03-25 22:05:02
बाल संरक्षण से जुड़े पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय व सी-लैब में करार

  • बाल संरक्षण से जुड़े पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय व सी-लैब में करार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बाल संरक्षण और बाल अधिकारों को अकादमिक ढांचे में संस्थागत स्वरूप देने के लिए गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयूएसटी) ने सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) से हाथ मिलाया है। दोनों के बीच हुए समझौते के तहत बाल अधिकार व बाल संरक्षण से जुड़े विषय अब विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे और स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के साथ ही दोनों संयुक्त रूप से इन विषयों पर शोध भी करेंगे।

 सी-लैब की स्थापना इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन ने की है जो बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। इस समझौते के तहत सी-लैब अलग-अलग कोर्स के लिए शैक्षणिक सामग्री, अवधि और पात्रता शर्तें तय करने के साथ ही विश्वविद्यालय को बाल अधिकारों व बाल संरक्षण के बाबत अपनी विशेषज्ञता व तकनीकी मदद भी मुहैया करायेगा। 

वहीं, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अपने सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड आॅनलाइन एजुकेशन (सीडीओई) के जरिए इन पाठ्यक्रमों को शुरू करने के लिए जरूरी नीतिगत फैसले लेगा। साथ ही, विश्वविद्यालय अपने कैंपस में इन पाठ्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध करायेगा। विश्वविद्यालय और सी-लैब ने इन पाठ्यक्रमों के लिए न्यूनतम फीस रखने का फैसला किया ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इसमें दाखिला ले सकें और आगे चलकर देश में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूती दे सकें।

हरियाणा के शीर्ष सरकारी विश्वविद्यालयों में शुमार गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो। नरसी राम बिश्नोई ने कहा, हमारा प्रयास है कि हम ऐसे ऊर्जावान और जानकार मानव संसाधन तैयार करें जो देश के विकास और समाज के कल्याण में सार्थक योगदान देने के साथ ही हमें बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करें। 

उन्होंने कहा, सी-लैब के साथ यह समझौता भविष्य के हमारे उस खाके को और मजबूत करता है जिसके तहत हम जागरूक और संवेदनशील युवाओं की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो नीति-निर्माण, पैरोकारी, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, मीडिया और सामुदायिक स्तर के हस्तक्षेपों में प्रभावी योगदान देने के साथ बाल संरक्षण तंत्र को और सुदृढ़ बना सके।

जमीनी अनुभवों व विशेषज्ञता के साथ अकादमिक क्षमता निर्माण की इस साझेदारी की अहमियत के बाबत इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की एसोसिएट डाइरेक्टर संगीता गौड़ ने कहा, यह साझेदारी जमीनी वास्तविकताओं और अकादमिक विमर्श के बीच के फासले को भरने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों के भावी पेशेवर बाल संरक्षण को अधिकार-आधारित नजरिए से देखें और समझें। 

हमारा मुख्य ध्यान बाल विवाह, बाल मजदूरी, बच्चों की ट्रैफिकिंग, आनलाइन सुरक्षा और बाल अधिकारों के लिए कानूनी ढांचे जैसे अहम मुद्दों पर है जिसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कानून भी शामिल हैं। इस समझौते पर गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो। नरसी राम बिश्नोई और इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के ट्रस्टी रजत कुमार ने दस्तखत किये। इस दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ विजय कुमार और अंतरराष्ट्रीय मामले विभाग के डीन प्रो ओ पी सांगवान भी मौजूद थे। 

हिसार शहर में 372 एकड़ में फैले 30 साल पुराने इस विश्वविद्यालय में 52,000 छात्र हैं। राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने इसे ए+ विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दे रखी है। देश में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग तय करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) ने 2025 में इस विश्वविद्यालय को राज्यों के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में जगह दी और इसे हरियाणा का शीर्ष सरकारी विश्वविद्यालय घोषित किया। विश्वविद्यालय मौजूदा समय में अपने परिसर, दूरस्थ शिक्षा और आॅनलाइन दूरस्थ शिक्षा माध्यमों के जरिए 100 से भी अधिक स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रम संचालित कर रहा है।

इस बीच, सी-लैब ने बाल यौन शोषण के मामलों में सपोर्ट पर्सन्स के लिए अपनी तरह का पहला सर्टिफिकेट कोर्स पहले ही शुरू कर दिया है। वर्ष 2023 में बाल यौन शोषण मामलों में सपोर्ट पर्सन की अनिवार्य रूप से नियुक्ति के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इनकी मांग में खासी बढ़ोतरी हुई है।

फोटो संकेत : बाल अधिकारों से जुड़े पाठ्यक्रमों की शुरूआत के लिए समझौते पर दस्तखत करते गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नरसी राम बिश्नोई व इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के ट्रस्टी रजत कुमार। मौके पर इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की एसोसिएट डाइरेक्टर डॉ संगीता गौड़, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ विजय कुमार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग के डीन प्रो ओपी सांगवान भी मौजूद थे। और जानकारी के लिए संपर्क करें : जितेंद्र परमार (8595950825)

Published / 2026-03-25 21:10:54
हरीश राणा के 13 साल की दर्द भरी जंग खत्म...

  • हरीश राणा के 13 साल की दर्द भरी जंग खत्म...
  • नम आंखों से हरीश राणा को दी गई अंतिम विदाई, ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इच्छा मृत्यु के बाद बुधवार को हरीश राणा को अंतिम विदाई दी गयी। दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद उनका एम्स में निधन हुआ था। 

अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश का अंतिम संस्कार सुबह 9 बजे हुआ। सोसायटीवासी भी दुख की इस घड़ी में हमेशा राणा परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।

हरीश के दुनिया को अलविदा कहने की सूचना मिलते ही सोसायटी में सन्नाटा पसर गया। हर कोई हरीश राणा और उनके परिवार की बहादुरी की चर्चा करते दिखाई दिया। बुधवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोसायटी से काफी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे। परिवार ने पूरे सम्मान के साथ हरीश का अंतिम संस्कार कर दिया है।

Published / 2026-03-23 23:19:26
भारत में हाई स्पीड की असली चुनौतियां

  • भारत में हाई स्पीड की असली चुनौतियां
  • भारत में 350 किमी प्रति घंटे की स्पीड का सपना, लेकिन क्या हैं असली चुनौतियां
  • जब दिल्ली से लखनऊ और हैदराबाद से बेंगुलरु का ट्रेन से सफर तय होगा महज दो घंटे में, क्या होगी स्पीड

एबीएन सेंट्रल डेस्क। क्या जल्दी ही वह समय आने वाला है जब दिल्ली से लखनऊ तक का ट्रेन का सफर महज दो घंटे में तय होगा? या फिर दिल्ली से बेंगलुरु में भी इतना समय लगेगा। कुछ महानगरों के बीच की अभी चार-पांच घंटे की दूरी क्या महज 45 मिनट में तय हो जायेगी। सैद्धांतिक तौर पर इन सवालों का जवाब है हां, ऐसा हो सकता है और इस पर काम भी चल रहा है। लेकिन इस हां से पहले अनेक किंतु-परंतु हैं।

लंबी दूरी को ट्रेन के सफर से महज कुछ घंटों में तय करने को लेकर बहुत पहले से तैयारियां चल रही हैं। खासतौर पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में जापान दौरे पर गये थे। तब कहा गया था कि भारत में भी बुलेट ट्रेन चलेंगी। जापान में बुलेट ट्रेन तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी चलती हैं। उसके बाद यहां कई रूटों को इसके लिए चिन्हित भी किया और तब से इस परियोजना पर काम चल रहा है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक मेड-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए 2024 में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को 2027 तक 250 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली दो बुलेट ट्रेन को विकसित करने का ठेका दिया था। हाल ही में मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया कि भारत में निर्मित पहली दो बुलेट ट्रेनें 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले रेल कॉरिडोर पर चलेंगी। इनका नाम बी28 है।
रेल कॉरिडोर का पहला चरण सूरत से वापी तक 97 किलोमीटर का खंड अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। 

जापान इंटरनेशनल को-आॅपरेशन एजेंसी की वित्तीय सहायता से इस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें जापानी सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जापान में निर्मित 320 किमी/घंटा की गति वाली बुलेट ट्रेनें चलायी जायेंगी। अगर इस परियोजना को रफ्तार मिलेगी तो एक समय ऐसा भी आयेगा जब चंडीगढ़ से दिल्ली तक का सफर महज एक घंटे में पूरा कर लेंगे। हालांकि ऐसा होना अभी दूर की कौड़ी है।

अभी क्या चर्चा है

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान रेलवे से जुड़े विभिन्न सवालों का जवाब दिया। इसी में उन्होंने बुलेट ट्रेन की प्रगति के बारे में भी बताया। बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति के बारे में वैष्णव ने कहा कि हमने इसके पहले सेक्शन को 2027 तक कमीशन करने का लक्ष्य रखा है।

कहां-कहां हैं शुरूआती परियोजनाएं

बुलेट ट्रेन परियोजना पर विस्तार से जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अहमदाबाद से मुंबई प्रोजेक्ट की बहुत अच्छी प्रगति है। रेल मंत्री ने ने रेल लाइन बिछाए जाने से लेकर गार्डर और नदियों पर बने ब्रिज तक के आंकड़े बताये। रेल मंत्री ने साथ ही यह भी बताया कि कोलकाता मेट्रो की अंडर वाटर टनल की तर्ज पर पहली अंडर सी टनल बनायी जा रही है।

यहां गौर हो कि जल परिवहन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी अनेक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अब बुलेट ट्रेन का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि पहली परियोजना पर काम चल रहा है। सब कुछ सामान्य रहा तो ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।
यहां गौर करने योग्य है कि इस बजट में सात नयी बुलेट ट्रेन का भी ऐलान किया गया। 

रेल मंत्री के मुताबिक इन ट्रेन परियोजनाओं के पूरे होने पर बुलेट ट्रेन नेटवर्क करीब चार हजार किलोमीटर का हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ट्रेन के चलने से दिल्ली से वाराणसी साढ़े तीन घंटे, दिल्ली से लखनऊ दो घंटे में, वाराणसी से पटना एक घंटे से भी कम समय में पहुंच जायेंगे। यही नहीं, मुंबई से पुणे मात्र पौन घंटे में पहुंच जायेंगे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुणे से हैदराबाद दो घंटे की यात्रा रहेगी। हैदराबाद से बेंगलुरु दो घंटे, बेंगलुरु से चन्नई भी सवा घंटे की यात्रा रह जायेगी।

लेकिन विशेषज्ञों को क्यों है आपत्ति

इस बीच, बुलेट ट्रेन को लेकर विशेषज्ञों ने रेल मंत्रालय को आगाह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रोटोटाइप परीक्षण बहुत जरूरी है। बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले कॉरिडोर पर काम के समापन की सराहना करते हुए भी उत्पादन बढ़ाने के निर्णय पर आपत्ति जतायी है। एजेंसी की खबर के मुताबिक रेलवे बोर्ड के पूर्व इंजीनियरिंग सदस्य सुबोध जैन ने कहा, ह्यअगर आप भारत में लोकोमोटिव निर्माण के इतिहास पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि हमने पहले लोकोमोटिव आयात किये, फिर तकनीक को यहां स्थानांतरित कराया और अपना उत्पादन शुरू किया। 

अब तक, हमने स्वदेशी रूप से 180 किमी प्रति घंटे की चलने की क्षमता वाले लोकोमोटिव विकसित किए हैं। इसलिए, 250 किमी प्रति घंटे की ट्रेन के लिए प्रोटोटाइप का व्यवहार्यता परीक्षण अनिवार्य है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का उत्पादन शुरू करने से पहले हमें 250 किमी प्रति घंटे या 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन का प्रूफ-आॅफ-कॉन्सेप्ट परीक्षण करना होगा। अब देखना होगा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कब और क्या रंग लाती है।

पहले चरण में स्वदेशी धीरे-धीरे बढ़ेगी स्पीड

केंद्रीय रेल मंत्रालय ने पिछले दिनों संसदीय समिति के समक्ष कहा कि जापान निर्मित ट्रेनों को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों के कारण मंत्रालय ने पहले चरण में 250 किमी/घंटा की गति क्षमता वाली स्वदेशी ट्रेनों को विकसित करने का निर्णय लिया, जिसे बाद में 320 या 350 किमी/घंटा तक उन्नत किया जायेगा। अधिकारियों ने चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जापान ने अपने पहले के प्रस्ताव बी 5 शिंकानसेन ट्रेन के बजाय अधिक उन्नत बी 10 शिंकानसेन ट्रेन का प्रस्ताव रखा। बी5 का उत्पादन वर्तमान में जापान में बंद हो चुका है।

Published / 2026-03-22 21:45:49
भारत में ही विश्व की शांति का लीडर बनने की क्षमता : सुखदेव भगत

  • भारत बनेगा शांति का लीडर? सुखदेव भगत का बड़ा वैश्विक संदेश, कहा
  • युद्ध से सिर्फ तबाही! कूटनीति ही आखिरी रास्ता, भारत को आगे आना होगा

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। वैश्विक मंच पर बढ़ते तनाव और मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच भारत की भूमिका को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि अब दुनिया को सिर्फ मूकदर्शक बने रहने की बजाय सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जहां कहीं भी मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कड़ी निगरानी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सभी प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जी7 देशों से लेकर यूनाइटेड नेशन (यूएन) तक, सभी को जिम्मेदारी के साथ स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। 

सुखदेव भगत ने युद्ध की नीति पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उनके अनुसार, युद्ध केवल विनाश, अस्थिरता और मानवीय संकट को जन्म देता है, जबकि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता हैं।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक समस्याओं का हल बातचीत और आपसी समझ से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का ईरान से लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहा है। सबसे बड़ी चीज की तकरीबन 80 प्रतिशत इंधन उक्त इलाकों से प्राप्त की जाती है। बड़ी संख्या में भारतीय लोग वहां से जीवन यापन करते हैं। 

श्री भगत ने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश हमेशा से शांति का दूत रहा है और आज के समय में उसे आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापना की पहल करनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत के पास वह नैतिक शक्ति और कूटनीतिक क्षमता है, जिसके जरिए वह दुनिया को संघर्ष से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सुखदेव भगत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में उनका यह संदेश न सिर्फ भारत की विदेश नीति बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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