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Published / 2025-04-26 21:46:32
देश में जमीनी स्तर पर शासन

देश की 2,16,000 पंचायतों को गरीबी उन्मूलन और बेहतर आजीविका, स्वास्थ्य, जल की पर्याप्तता, समुचित अधोसंरचना और सुशासन जैसे मानकों पर आंका गया और रैंकिंग प्रदान की गयी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर दिए अपने संबोधन में कहा कि बीते दशक में कई पहल की गयी हैं। इस संबंध में हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) शुरू किया। देश की 2,16,000 पंचायतों को गरीबी उन्मूलन और बेहतर आजीविका, स्वास्थ्य, जल की पर्याप्तता, समुचित अधोसंरचना और सुशासन जैसे मानकों पर आंका गया और रैंकिंग प्रदान की गयी। यह सूचकांक देश के सतत विकास के एजेंडे में ग्रामीण स्थानीय निकायों की अहम भूमिका की साहसी स्वीकारोक्ति है। 

संयुक्त राष्ट्र जहां विभिन्न देशों के स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी करता है और नीति आयोग का एसडीजी इंडिया इंडेक्स राज्य स्तर के प्रदर्शन पर नजर रखता है वहीं हाल के वर्षों में इन लक्ष्यों के स्थानीयकरण पर जोर दिया गया है ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। 

इस संदर्भ में पीएआई एक स्वागतयोग्य कदम है और भविष्य में इसकी कवरेज को सभी 2,69,000 पंचायतों तक बढ़ाया जाना चाहिए। बहरहाल, इसके परिणाम चिंताजनक हैं। एक भी पंचायत ऐसी नहीं रही जिसने अचीवर्स की श्रेणी में जगह बनायी हो। केवल 699 पंचायतों को अग्रणी घोषित किया गया है। इसके अलावा बहुत बड़े पैमाने पर भौगोलिक असमानताएं भी हैं। 699 अग्रणी पंचायतों में से 346  गुजरात की, 270 तेलंगाना की और 42 त्रिपुरा की हैं, जबकि कई राज्य काफी पीछे हैं। 

पंचायतें शासन का वह स्तर हैं जो जनता के सबसे करीब होता है। शीर्ष से नीचे की ओर आने के मॉडल के बजाय पंचायत के नेतृत्व वाला रूख ऐसी रणनीतियां बनाने की इजाजत देता है जो हर गांव की खास सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रख सकें। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में तो यह और भी अहम है जहां अक्सर सबके लिए एक समान नीतियां नाकाम साबित होती हैं। 

बहरहाल, अपर्याप्त वित्तीय संसाधन भी ग्रामीण स्थानीय निकायों के सुचारू कामकाज में एक बड़ी बाधा हैं। देश की अधिकांश पंचायतें फंड के लिए सरकार के ऊपरी स्तरों पर बहुत अधिक निर्भर रहती हैं और उनके पास अपने राजस्व के लिए बहुत सीमित संसाधन होते हैं। संपत्ति, स्थानीय बाजारों या कारोबारों पर या तो समुचित कर नहीं लग पाता या फिर इन पर कर लगाना राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील होता है, खासतौर पर गरीब या छोटे गांवों में ऐसा करना मुश्किल होता है। 

रिजर्व बैंक द्वारा पंचायतों की वित्तीय स्थिति पर कराया गया एक अध्ययन बताता है कि 2022-23 में सभी स्रोतों से प्रति पंचायत औसत राजस्व महज 21.23 लाख रुपये था। इसमें से स्थानीय करों और शुल्क द्वारा उनका निजी राजस्व कुल राजस्व का केवल 1.1 फीसदी ही था। सीमित तकनीकी अधोसंरचना और डिजिटल साक्षरता की कमी भी समस्या को बढ़ाती है। इनकी वजह से निगरानी, आकलन और प्रगति की रिपोर्टिंग पर असर पड़ता है। जमीनी स्तर पर प्रयासों का विभाजित होना भी उतना ही दिक्कतदेह है। 

गांवों में कई सरकारी विभाग बहुत कम तालमेल के साथ एक ही समय पर काम करते हैं। इसका परिणाम काम के दोहराव और संसाधनों की बरबादी के रूप में सामने आता है। विभिन्न विभागों की गतिविधियों और योजनाओं में तालमेल नहीं होने पर अक्सर सतत विकास लक्ष्यों के अधीन परिकल्पित समग्र विकास दूर ही बना रहता है। 

पंचायतों की पूर्ण संभावनाओं का इस्तेमाल करने के लिए यह प्रयास किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्थानिक क्षमता बढ़ाई जा सके। इसमें लक्षित प्रशिक्षण मुहैया कराना, डिजिटल समावेशन को बढ़ाना, निर्णय प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा और फंड का समय पर आवंटन शामिल है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी महत्त्वपूर्ण है।

Published / 2025-04-26 21:44:20
पाकिस्तान को अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने का समय

पाकिस्तान में पानी की किल्लत तय 

सिंधु जल संधि रद्द होने का जल्द दिखेगा असर; भारत का जल भंडारण विस्तार पर जोर 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आने वाले दिनों में जमीनी स्तर पर ऐसी कार्रवाई देखी जा सकती है जिससे 1960 की सिंधु जल संधि पर लगी रोक का प्रभाव दिखने लगेगा। इस संधि के जरिये भारत से पाकिस्तान की सिंधु नदी घाटी में बहने वाली नदियों के पानी के इस्तेमाल पर नियंत्रण किया जाता है। इस मसले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने यह जानकारी दी है। 

सूत्र ने इस तरह की धारणा को भी खारिज कर दिया कि पश्चिम की नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब पर भारत की जल भंडारण क्षमता बढ़ाए बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है जिन पर संधि के मुताबिक पाकिस्तान का अधिकार है।  सूत्र ने बताया कि इन नदियों पर भंडारण क्षमता का विस्तार अब एजेंडे में है जो संधि की उन पाबंदियों के न रहने से अधिक संभव हो गया है जो पानी के एक नदी घाटी से दूसरी नदी घाटी में हस्तांतरण पर लगाया गया था।

मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के एक दिन बाद, भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया और पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया। सरकार ने कहा था कि हमले के सीमा पार संबंध थे और घोषणा की कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह खत्म नहीं करता है तब तक इस जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है। 

विश्व बैंक की मध्यस्थता में इस संधि पर भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किया था। इस संधि के तहत, सिंधु नदी प्रणाली के उपयोग के संबंध में दोनों देशों के अधिकारों और दायित्वों को परिभाषित किया। इस संधि के तहत पश्चिम की नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी को पाकिस्तान और पूर्व की नदियों, रावी, व्यास और सतलुज के पानी को भारत को आवंटित किया गया था। 

भारत के सिंधु जल संधि मामले के प्रबंधन से पहली बार जुड़े सूत्र ने कहा, पाकिस्तान के लिए न केवल पानी की मात्रा बल्कि प्रवाह का अनुमान लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इन चीजों को भारत पहले से ही प्रभावित कर सकता है। सूत्र ने बताया, आने वाले समय में पानी के प्रवाह की भविष्यवाणी पर असर दिखने की संभावना है क्योंकि भारत उन अधिकारों को पूरी तरह से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो उसे संधि के तहत मिले थे और अब उस संधि की कुछ पाबंदियां अब लागू नहीं हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान की 80 प्रतिशत से अधिक सिंचाई सिंधु नदी घाटी के पानी पर निर्भर करती है। 

सूत्र ने बताया कि इस समझौते के तहत, भारत ने पश्चिमी नदियों का उपयोग गैर-उपभोग वाले उद्देश्यों के लिए करने का अधिकार बरकरार रखा था जिसमें सीमित सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन शामिल है। हालांकि, उनके प्रवाह को इस तरह से संग्रहित करने या बदलने पर बाधाएं थीं जिससे पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता था। संधि के तहत भारत को पहले से जो अधिकार मिले हुए थे उसका अधिकतम इस्तेमाल करते हुए भारत पश्चिमी नदियों से संभवत: 20,000 मेगावॉट जलविद्युत क्षमता की संभावनाएं तैयार कर सकता है क्योंकि 2016 में करीब 3,000 मेगावॉट का उत्पादन ही हो पाया था।

Published / 2025-04-26 20:58:07
मार्च में 1.45 करोड़ यात्रियों ने किया हवाई सफर

हवाई यात्रा में जबरदस्त उछाल 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में घरेलू एयरलाइन कंपनियों से मार्च में 1.45 करोड़ लोगों ने यात्रा की। यह एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 8.79 प्रतिशत अधिक है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। भारतीय एयरलाइन कंपनियों के जरिये पिछले साल मार्च में कुल 1.33 करोड़ लोगों ने यात्रा की थी।  

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अपनी मासिक घरेलू यात्री परिवहन रिपोर्ट में कहा कि मार्च, 2025 के दौरान घरेलू एयरलाइन से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 145.42 लाख थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह संख्या 133.68 लाख थी। बीते महीने में इंडिगो से कुल 93.1 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही। 

वहीं एयर इंडिया समूह (पूर्ण सेवा प्रदाता एयर इंडिया और किफायती विमान सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस) से 38.8 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत रही। दो अन्य प्रमुख एयरलाइन कंपनियों- अकासा एयर और स्पाइसजेट से इस साल मार्च में क्रमश: 7.2 लाख और 4.8 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे इन दोनों कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी क्रमश: पांच प्रतिशत और 3.3 प्रतिशत हो गयी। 

समय पर उड़ाने भरने या गंतव्य पर पहुंचने के मामले में इंडिगो का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। कंपनी का इस मामले में प्रदर्शन 88.1 प्रतिशत पर रहा। उसके बाद अकासा एयर का स्थान रहा जिसने 86.9 प्रतिशत जबकि एयर इंडिया समूह और स्पाइसजेट की क्रमश: 82 प्रतिशत और 72.1 प्रतिशत उड़ानें समय पर रहीं। समय पर उड़ान भरने या गंतव्य पर पहुंचने की गणना प्रमुख हवाई अड्डों - बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई के लिए की गयी है।

Published / 2025-04-26 16:33:02
पहलगाम नरसंहार में भारत ने सौंपे पाकिस्तानी हमले के पुख्ता सबूत

  • पहलगाम हमले में पाकिस्तान का सीधा हाथ, भारत ने पेश किए पक्के सबूत ! पूरा विश्व खड़ा साथ
  • LOC पर जवाबी कार्रवाई: पाकिस्तान की गोलीबारी का भारतीय सेना ने दिया तीखा जवाब 

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। भारत ने विदेशी सरकारों के सामने तकनीकी खुफिया और मानव स्रोतों के जरिए जुटाए गए ठोस सबूत पेश किए हैं, जिनसे साफ होता है कि इस हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की सीधी भूमिका है।

पाकिस्तानी कनेक्शन की पुष्टि
भारतीय एजेंसियों ने इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों की पहचान कर ली है। जांच में यह सामने आया है कि हमले में शामिल आतंकियों का सीधा संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से है, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में इन आतंकियों के सिग्नल पाकिस्तान के दो ठिकानों से जुड़े पाए गए हैं।

PM मोदी की 13 राष्ट्राध्यक्षों से बात 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो दिनों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इजराइल, इटली, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, नेपाल, मॉरीशस, डच और ऑस्ट्रेलिया जैसे 13 देशों के प्रमुखों से बातचीत की। सभी नेताओं ने हमले की निंदा करते हुए भारत के साथ एकजुटता जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कई देशों के विदेश मंत्रियों व राजदूतों से संवाद कर भारत की स्थिति स्पष्ट की।

भारत की ताबड़तोड़ कार्रवाई

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:

  • सिंधु जल संधि निलंबित: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि अब पाकिस्तान को एक बूंद पानी नहीं मिलेगा।
  • कूटनीतिक संबंध सीमित: पाकिस्तान के साथ राजनयिक स्तर पर संपर्क और दूतावास की गतिविधियों को सीमित किया गया।
  • वीजा सेवाएं रोक दी गईं: पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीज़ा तत्काल प्रभाव से निलंबित, पाक हिंदुओं के लिए छूट बनी रहेगी।

Published / 2025-04-25 20:23:54
डॉ. के. कस्तूरीरंगन : इसरो के दिग्गज से शिक्षाविद् तक

  • अंतरिक्ष मिशन और शिक्षा सुधारों में जीवित रहेगी कस्तूरीरंगन की विरासत

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शिक्षाविद् डॉ. के. कस्तूरीरंगन का आज सुबह 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बंगलूरू में मौजूद अपने आवास पर सुबह 10:43 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वर्ष 2023 में श्रीलंका यात्रा के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद वे बहुत कम ही बाहर निकलते या देखे जाते थे। 

के. कस्तूरीरंगन सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम और शिक्षा प्रणाली के दो स्तंभों में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्ति थे। उन्हें लोग ज्ञानकोश (इनसाइक्लोपीडिया) के नाम से भी याद करते हैं, क्योंकि उनके पास विज्ञान और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में गहरा ज्ञान था।

डॉ. कस्तूरीरंगन ने लगभग 35 वर्षों तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में सेवाएं दीं। वे 1994 से 2003 तक इसरो के अध्यक्ष, अंतरिक्ष कमीशन के प्रमुख और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के सचिव रहे। 27 अगस्त 2003 को उन्होंने यह जिम्मेदारी छोड़ी। 

उनकी अगुवाई में भारत के कई अहम अंतरिक्ष मिशनों ने सफलता प्राप्त की। वे भारत के पहले दो एक्सपेरिमेंटल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स - भास्कर प्रथम और द्वितीय के परियोजना निदेशक रहे। उन्होंने आईआरएस-1ए, भारत के पहले ऑपरेशनल रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट, का भी नेतृत्व किया।

भारत के सबसे सफल रॉकेट पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) को लॉन्च और ऑपरेशनल बनाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उन्होंने जीएसएलवी (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) की पहली सफल उड़ान का परीक्षण कराया। 

उनके कार्यकाल मंल भारत की पहली स्पेस-बेस्ड हाई-एनर्जी एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी की नींव भी रखी गई। उन्हें अंतरिक्ष में कॉस्मिक एक्स-रे और गामा रे स्रोतों पर किए गए शोध के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि इन किरणों का हमारे वायुमंडल पर क्या प्रभाव पड़ता है।

शिक्षा सुधारों में अग्रणी भूमिका
इसरो से सेवानिवृत्त होने के बाद, डॉ. कस्तूरीरंगन ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई। वे 2003 से 2009 तक राज्यसभा सांसद रहे और इस दौरान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (एनआईएएस) के निदेशक भी रहे। वर्ष 2008 में वे कर्नाटक नॉलेज कमीशन के प्रमुख बने। 

2009 से 2014 तक वे योजना आयोग के सदस्य रहे। वर्तमान सरकार ने 2017 में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने वाली 9 सदस्यीय समिति का अध्यक्ष बनाया। डॉ. कस्तूरीरंगन की समिति की तरफ से तैयार एनईपी 2020 आज भारत में नई शिक्षा नीति के रूप में लागू की गई है। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

शैक्षणिक संस्थानों से भी गहरा नाता
वे आईआईटी रुड़की, आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बंगलूरू जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रहे। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, वे हर क्षेत्र की गहराई से समझ रखने वाले व्यक्ति थे, इसलिए उन्हें चलता-फिरता ज्ञानकोश कहा जाता था।

शिक्षा और विज्ञान में सर्वोच्च सम्मान
डॉ. कस्तूरीरंगन को उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने देश के तीन बड़े नागरिक सम्मान दिए:

  1. पद्मश्री (1982) 
  2. पद्म भूषण (1992)
  3. पद्म विभूषण (2000)

Published / 2025-04-25 20:17:27
पहलगाम कांड के बाद घाटी में बढ़ी सैन्य गतिविधियां

  • पहलगाम का बदला तय: पाकिस्तान की उलटी गिनती शुरू
  •  भारतीय वायुसेना ने शुरू किया आक्रमण युद्धाभ्यास

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है, और इसके मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने एक विशेष युद्धाभ्यास आक्रमण की शुरुआत की है। इस एक्सरसाइज का उद्देश्य वायुसेना की आक्रमकता और तत्परता को परखना है, खासकर ऐसे समय में जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना ने पहाड़ी और जमीनी ठिकानों पर हमला करने की तैयारी की है। इस एक्सरसाइज के तहत, वायुसेना के पायलट्स रियल वॉर सिचुएशन में दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से बमबारी कर रहे हैं। पूर्वी सेक्टर से वायुसेना के कई उपकरणों को सेंट्रल सेक्टर में भेजा गया है, ताकि रणनीतिक रूप से पूरे इलाके में मारक क्षमता का परीक्षण किया जा सके।

इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं, जो ग्राउंड अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्ट्राइक मिशन की तैयारियों में जुटे हैं। इसमें वायुसेना के टॉप पायलट्स की टीम हिस्सा ले रही है, जो युद्ध की स्थिति में तेज़ी से निर्णय लेने के लिए अपनी क्षमताओं का परीक्षण कर रहे हैं।

यह अभ्यास विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह ऐसे वक्त में हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ चुका है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें सीमा पर तैनाती और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर पैनी नज़र रखना शामिल है।

आक्रमण एक्सरसाइज भारतीय वायुसेना की आक्रामक रणनीति और अपनी तत्परता को उजागर करती है। यह युद्धाभ्यास केवल रक्षा क्षमता को परखने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश भी है कि भारत अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

Published / 2025-04-24 21:04:46
अब मिट्टी में मिलेंगे आतंकी : पीएम मोदी

आतंकियों को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है, बिहार की धरती से पीएम मोदी का कड़ा संदेश

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मधुबनी/ पटना। बिहार के मधुबनी जिले में पंचायती राज दिवस समारोह के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया। अपने संबोधन की शुरूआत में ही उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे जहां हैं, वहीं बैठकर दो मिनट का मौन रखें और 22 अप्रैल को शहीद हुए नागरिकों को श्रद्धांजलि दें। 

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया। उन आतंकियों को।। साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी कड़ी मिलेगी।

Published / 2025-04-22 21:29:49
जम्मू-कश्मीर : नाम पूछ आतंकियों ने 30 से ज्यादा टूरिस्टों को मार दी गोली

30 से अधिक लोगों की मौत की आशंका, कई अन्य घायल, एनआइए की टीम करेगी जांच 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने टूरिस्टों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। ये हमला दोपहर करीब 3 बजे बैसरन घाटी में हुआ, जिसे अक्सर मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। हमले के दौरान 2-3 आतंकी पुलिस की वर्दी में आये और टूरिस्टों के ग्रुप पर 50 से ज्यादा राउंड फायरिंग की। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में 26 से लोगों की मौत की आशंका है, जबकि कई लोग घायल हैं। 

आतंकियों ने अचानक गोलियां बरसायी 

बताया जा रहा है कि आतंकी पहाड़ से उतरकर सीधे टूरिस्टों के बीच पहुंचे और गोलियां चलाने लगे। हमले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग खून से लथपथ जमीन पर पड़े हैं, और कई महिलाएं अपने परिजनों को रोते हुए खोज रही हैं। 

गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंचे 

हमले की खबर मिलते ही गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की और इमरजेंसी बैठक बुलाई। अब अमित शाह श्रीनगर पहुंच चुके हैं और वहां सभी सुरक्षा एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं। एनआईए की टीम भी 23 अप्रैल को पहलगाम पहुंच सकती है। 

पीएम मोदी का सख्त संदेश 

प्रधानमंत्री मोदी, जो इस समय सऊदी अरब दौरे पर हैं, उन्होंने  (ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि इस हमले के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें किसी हाल में छोड़ा नहीं जायेगा। उनका नापाक मंसूबा कभी सफल नहीं होगा। 

उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया 

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि ये हमला हाल के सालों में सबसे बड़ा हमला है और आम नागरिकों को सीधे निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मृतकों की सही संख्या की पुष्टि की जा रही है।

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