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Published / 2025-05-03 19:51:38
झारखंड : चुनाव से जुड़े 312 लोग जायेंगे नयी दिल्ली

  • कई जिले से बीएलओ, वालेंटियर और बीएजी के 312 सदस्यीय टीम जायेगी नई दिल्ली, सीईओ ने बैठक कर दी जानकारी 

टीम एबीएन, रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश के सभी राज्यों के निर्वाचन संबंधी पदाधिकारियों को नयी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आइआइआइडीएम) में ट्रेनिंग देने का कार्य किया जा रहा है। 

इसी क्रम में झारखंड के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के 312 सदस्य की टीम अपने एक्सपेरिएंस शेयर के लिए नई दिल्ली स्थित आइआइआइडीएम में 19 एवं 20 मई दो दिवस के लिये जायेंगे। इस हेतु सभी संबंधित जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी अपने जिले के बीएलओ, वालेंटियर एवं बैग के सदस्यों को चयनित करते हुए उनकी सूची सोमवार तक उपलब्ध करा दें, जिससे अग्रेतर कार्रवाई की जा सके।

के रवि कुमार शनिवार को निर्वाचन सदन में आनलाइन माध्यम से सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के झारखंड भ्रमण के दौरान रामगढ़ के वालेंटियर एवं रांची दशम फॉल के बीएलओ से उन्होंने मुलाकात किया था। 

इस दौरान उनके साथ हुए एक्सपेरिएंस शेयर से मुख्य चुनाव आयुक्त अत्यंत प्रभावित हुए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के पहल पर पहली बार देश के अन्य राज्यों के सामने झारखंड के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के सदस्य लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव 2024 के अपने कार्यों एवं अनुभवों को साझा करेंगे। 

बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि झारखंड राज्य के मतदान से जुड़े स्टेक होल्डर को यह अवसर प्राप्त हुआ है। सभी संबंधित जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी अपने जिले के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के सदस्यों को चयनित करते हुए उनके आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। मौके पर उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सह उप सचिव देवदास दत्ता सहित आनलाइन माध्यम से सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Published / 2025-05-03 19:48:28
शताब्दी और वंदे भारत की कमाई जान चौंक जायेंगे आप...

वंदे भारत और शताब्दी ट्रेन से सरकार की कितनी होती है कमाई? आरटीआई में खुलासा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेलवे ने बीते कुछ वर्षों में यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसमें वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम और सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें प्रमुख हैं। इन ट्रेनों की तेज रफ्तार, अत्याधुनिक सुविधाएं और समयबद्धता ने यात्रियों को आकर्षित किया है। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह भी है : क्या इन ट्रेनों से सरकार को अच्छी कमाई हो रही है? 

आरटीआई में हुआ खुलासा : राजस्व का अलग रिकॉर्ड नहीं 

मध्य प्रदेश के निवासी चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर एक सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में रेलवे मंत्रालय ने चौंकाने वाली जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि रेलवे ट्रेन के हिसाब से होने वाली कमाई का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखता। उन्होंने बताया कि विभाग ट्रेन-वार राजस्व नहीं मापता, जिससे वंदे भारत या शताब्दी जैसी किसी विशेष ट्रेन से होने वाली कमाई को स्पष्ट रूप से बताया नहीं जा सकता। 

यात्री संख्या और दूरी का ब्योरा मौजूद, लेकिन कमाई का नहीं 

रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वंदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान में 102 मार्गों पर संचालित हो रही है, जो कि देश के 24 राज्यों और 284 जिलों को जोड़ती है। अब तक इन ट्रेनों से दो करोड़ से अधिक यात्री सफर कर चुके हैं। 2023-24 में वंदे भारत ट्रेनों द्वारा तय की गयी कुल दूरी इतनी थी कि वह पृथ्वी के चारों ओर 310 चक्कर लगाने के बराबर है। हालांकि यात्रियों की संख्या और दूरी की गणना उपलब्ध है, लेकिन इससे हुई कमाई का ब्योरा रेलवे के पास नहीं होना हैरान करने वाला है। 

बढ़ती बुकिंग दर: लोकप्रियता की मिसाल 

रेलवे की एक पुरानी आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया कि वंदे भारत ट्रेनों में औसतन 92% सीटें बुक रहती हैं। यह दर कई अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक है। इसका मतलब है कि इन ट्रेनों की लोड फैक्टर काफी उच्च है, जिससे संभावित राजस्व भी उच्च होना चाहिए। 

रेलवे का कुल यात्री राजस्व कितना है? 

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे ने यात्री राजस्व में 16% वृद्धि का अनुमान जताया है। इससे कुल पैसेंजर रेवेन्यू 92,800 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। इसमें वंदे भारत, शताब्दी, एसी-3 और अन्य प्रीमियम ट्रेनों का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इसमें से वंदे भारत या शताब्दी ट्रेनों से कितनी आय हुई, यह अलग से पता नहीं लगाया जा सकता।

Published / 2025-05-01 19:07:00
प्रयागराज जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा निशुल्क नेत्र प्रशिक्षण शिविर संपन्न

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (जॉर्ज टाउन प्रयागराज। प्रयागराज जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा ASG eye hospital के तत्वाधान में प्रयागराज जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट  मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि आई आईटीएम कॉलेज के परिसर में निशुल्क नेत्र परीक्षण का आयोजन किया गया था, जिसमें अस्पताल के डॉक्टर टेक्नीशियन नर्स स्टाफ ने विभिन्न प्रकार के नेत्र रोगों का परीक्षण किया।

जिसमें निशुल्क चश्मा निशुल्क दवाइयां और निशुल्क परामर्श दिया गया। ट्रस्ट के ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि अस्पताल द्वारा गरीब बच्चों को बिजली विभाग के स्टाफ जस्ट टाउन थाने के कुछ इंप्लाइज और जॉर्ज टाउन क्षेत्र के बहुत सी सारी जनता ने अपने नेत्र रोग का उपचार कराया और मुफ्त में दवाई चश्मा लेकर अत्यधिक उत्साहित रहे।

ट्रस्टी ने बताया कि इस तरीके का आयोजन ट्रस्ट हमेशा करता रहेगा और करता रहा है, जिससे क्षेत्र के गरीब निर्धन रोगी आवश्यकता अनुसार लोगों कि जांच होती रहेगी ताकि हमारे क्षेत्र की जनता खुशहाल और अच्छे व्यतीत करती रहे। आई आईटीएम कॉलेज जॉर्ज टाउन प्रयागराज के डायरेक्टर सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि इस तरीके का आयोजन अगर परिसर में होता रहेगा तो हमारे कॉलेज के स्टूडेंट उसका लाभ उठाते रहेंगे।

ट्रस्ट के सहयोग से यह कार्यक्रम हम सहयोग करते रहेंगे। अगला विजन ट्रस्ट की ओर से गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना, गरीब लड़कियों की शादी विवाह में सहयोग करना, निर्धन व्यक्तियों को सहयोग करना, स्वास्थ्य जांच करते रहना, गंभीर बीमारियों में अस्पतालों में उनका एडमिट करना आदि विभिन्न साफ सफाई का इसी तरीके से कैंप लगते रहेंगे।

मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि 25 और 26 को ग्राम भिटरिया घोड़ेडीह तहसील करछना प्रयागराज में यह ट्रस्ट पुन ह कैंप लगाएगी। इस अवसर पर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी, डॉ नागेंद्र मणि त्रिपाठी, योगेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार, ऋषभ तिवारी, ट्रस्ट के लीगल एडवाइजर दिलीप कुमार ओझा, एडवोकेट आयुष तिवारी, तुषार तिवारी, नैतिक तिवारी एवं डॉक्टर के  पैनलनल में अभिनव अभिषेक, योगेश मिश्रा, वैद्य विकास तिवारी, वैद्य विनोद मिश्रा, केवल जीत आदि मौजूद रहे।

Published / 2025-04-29 21:55:18
नवंबर तक तैयार हो जायेगा गंगा एक्सप्रेस-वे

  • जिसपर फाइटर प्लेन भी कर सकेंगे लैंडिंग 
  • योगी सरकार का यूपी के 3.54 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को मई की गर्मी में बड़ा तोहफा, बिजली बिल हो गया इतना कम 
  • योगी सरकार का बड़ा कदम : यमुना एक्सप्रेसवे पर तय होंगे नये बस रूट, जेवर से नोएडा तक अब नई कनेक्टिविटी 
  • एक्सप्रेस वे के किनारे कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किये जा रहे हैं। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रदेश के अन्य प्रमुख अक्सप्रेस वेज से भी जोड़ा जा रहा है। 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस वे का काम इसी साल नवंबर तक पूरा कर लिया जायेगा। इसी साल के अंत तक गंगा एक्सप्रेस वे को सार्वजनिक यातायात के लिए खोल दिया जायेगा। एक्सप्रेस वे के किनारे कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रदेश के अन्य प्रमुख अक्सप्रेस वेज से भी जोड़ा जा रहा है। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेस-वे परियोजना के कार्यों को निर्धारित समय में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने यूपीडा के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाये। शाहजहांपुर जिले में गंगा एक्सप्रेस-वे के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने के दौरान मुख्यमंत्री  ने साढ़े तीन किलोमीटर लम्बी नवनिर्मित हवाई पट्टी का भी निरीक्षण किया, जहां भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की लैण्डिंग का पहला पूर्वाभ्यास शुक्रवार को होने जा रहा है। इस हवाई पट्टी पर वायुसेना के विमान की नाइट लैंडिंग भी हो सकेगी। 

गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री जी ने स्वयं शाहजहांपुर में इसका शिलान्यास किया था। गंगा एक्सप्रेस-वे को फर्रुखाबाद, आगरा एक्सप्रेस-वे और बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जायेगा। एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण का फैसला  वर्ष 2019 के प्रयागराज कुम्भ में लिया गया था। वर्ष 2020 में मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद तेजी से इस सम्बन्ध में कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 594 किलोमीटर लम्बा तथा सिक्स लेन का यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। अब तक 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इस एक्सप्रेस वे को भविष्य में आठ लेन का किया जा सकेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए 18,000 एकड़ भूमि किसानों से खरीदी गयी। देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे के रूप में उभरे गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण चार पैकेजों में किया जा रहा है। इसका निर्माण नवम्बर, 2025 तक पूरा कर लिया जायेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे पर जनपद शाहजहांपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की हवाई पट्टी तैयार की गयी है, जिसका उपयोग आपातकालीन स्थितियों में एरोप्लेन की लैंडिंग और टेक-आॅफ के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त इस पट्टी का उपयोग एम्बुलेन्स सहित इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ जैसे आयोजनों के मद्देनजर  मेरठ से हरिद्वार, काशी, पूर्वांचल, गाजीपुर, शक्तिनगर एवं सोनभद्र तक भी कनेक्टिविटी परियोजनाएं विकसित की जायेंगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार  को गंगा एक्सप्रेस-वे की हवाई पट्टी पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का ऐतिहासिक लैण्डिंग शो आयोजित किया जायेगा। 

गंगा एक्सप्रेस-वे जनपद मेरठ सेहापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक बनाया जा रहा जो 2 नवंबर, 2025 को पूरा होने पर जनता के लिए लोकार्पित किया जाएगा। इसकी लागत 36,230 करोड़ रुपये है और निर्माण कार्यों की कार्यदायी संस्था द्वारा 30 वर्ष की गारंटी होगी।

Published / 2025-04-29 20:39:12
मेदिनीपुर : कल अक्षय तृतीया से शुरू हो जायेगा भव्य जगन्नाथधाम का दर्शन

65 मीटर ऊंचा... 20 एकड़ भूमि में बना जगन्नाथ मंदिर, कल से कर सकेंगे दर्शन 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में समुद्र तट पर स्थित पर्यटन शहर दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथधाम का बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर उद्घाटन किया जायेगा। यह मंदिर पुरी स्थित 12वीं सदी के मंदिर की प्रतिकृति है। 

एक अधिकारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ का मंदिर इस परियोजना का अभिन्न अंग है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर को 20 एकड़ भूमि पर बनाया गया है और इसके लिए राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से लाये गये लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 65 मीटर ऊंचा यह मंदिर जटिल नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन का मिश्रण है। 

अधिकारी ने बताया कि पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की तरह दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर को भी गर्भगृह विमान, जगमोहन, नट मंदिर (नृत्य कक्ष) और भोग मंडप नामक चार मंडपों में विभाजित किया गया है जो इतिहास और परंपरा से समृद्ध हिंदू आस्था की जीवंत झलक दिखाते हैं। 

दीघा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां प्राचीन पुरी जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों की प्रतिकृतियां हैं और इन्हें पत्थर से तराशा गया है। पुरी मंदिर की तरह दीघा जगन्नाथ मंदिर के ऊपर भी हर शाम ध्वज फहराया जायेगा। मंदिर में पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण यानी सभी चारों दिशाओं से प्रवेश किया जा सकता है। 

अधिकारी ने बताया कि मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद अरुण स्तंभ है, फिर सिंह द्वार और उसके ठीक सामने व्याघ्र द्वार है। मंदिर में हस्ति द्वार और अश्व द्वार भी हैं। मंदिर के गुंबद से लेकर हर दरवाजे को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।

खास तौर पर उद्घाटन के दिन लेजर शो और डायनामिक लाइट शो होगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि यह मंदिर अगले कई हजार वर्षों तक लोगों के समागम स्थल के रूप में काम करेगा। 

बनर्जी ने कहा था कि दीघा अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का एक पर्यटक केंद्र बन जाएगा। यह सद्भाव का स्थान बनेगा। उन्होंने कहा था, समुद्र के कारण दीघा का एक विशेष आकर्षण है। अब अगर यह तीर्थस्थल बन जाता है, तो और अधिक पर्यटक यहां आयेंगे। मुझे लगता है कि मूर्तिकारों ने शानदार काम किया है। दीघा पूर्व मेदिनीपुर जिले में एक लोकप्रिय समुद्री रिसॉर्ट शहर है।

Published / 2025-04-28 13:41:51
झारखंड में छिपे हैं पाकिस्तान के 10 नागरिक, वापस भेजने पर फैसला जल्द

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत सरकार ने देश में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को जल्द भारत छोड़ने का आदेश दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों द्वारा 28 पर्यटकों की हत्या के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। झारखंड में फिलहाल 10 पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं, जिनमें से 3 नाबालिग हैं। तीनों के उम्र 2 से 10 साल के बीच की है। ये लोग रांची, धनबाद, जमशेदपुर और हजारीबाग में निवास कर रहे हैं।  

इन 10 में से 7 पाक नागरिकों के पास लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) है। मिली जानकारी के अनुसार एलटीवी वाले नागरिकों को फिलहाल भारत छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसलिए झारखंड में मौजूद ये 7 लोग यहीं रहेंगे। लेकिन 3 नाबालिग बच्चे हाल ही में कराची से रांची आये हैं। 

चूंकि वे नाबालिग हैं, उनकी मां को भारत छोड़ने का वीजा नहीं मिलेगा और न ही उनके पिता को भारत आने का वीजा मिलेगा, इसलिए इन्हें अकेले पाकिस्तान भेजना बड़ा सवाल बन गया है। झारखंड का गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से निर्देश मांग रहा है। निर्देश के बाद तय होगा कि बच्चों को भारत में ही रखा जाएगा या फिर पाकिस्तान भेजा जायेगा।

बता दें कि रांची की 3 लड़कियों की शादी पाकिस्तान में हुई है। ये महिलाएं लॉन्ग टर्म वीजा पर झारखंड में रह रही हैं। वहीं उनके बच्चे गर्मी की छुट्टियों में पाकिस्तान से झारखंड आये हैं। अब इन्हीं बच्चों के पाकिस्तान लौटने को लेकर केंद्र को फैसला लेना है।

Published / 2025-04-27 22:57:38
मन की बात में भी छाया रहा पहलगाम नरसंहार

  • पहलगाम हमले के दोषियों को बख्शेंगे नहीं, पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा, मन की बात में मोदी
  • पहलगाम हमले के दोषियों को बख्शेंगे नहीं, पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा, मन की बात में मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही थी और लोगों की कमाई बढ़ रही थी, लेकिन देश के दुश्मनों को और जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। 

आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने एक बार फिर से पहलगाम हमले को लेकर दुख जताया और साथ ही पहलगाम के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात दोहरायी।

उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना ने देशवासियों को पीड़ा पहुंचाई है और इसे लेकर देशवासियों के मन में गहरी पीड़ा है। लोग पीड़ित परिजनों के दर्द को महसूस कर सकते हैं। हर भारतीय का खून आतंक की तस्वीरों को देखकर खौल रहा है। ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी और लोकतंत्र मजबूत हो रहा था। 

पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही थी और लोगों की कमाई बढ़ रही थी, लेकिन देश के दुश्मनों को और जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए। इस मुश्किल वक्त में 140 करोड़ देशवासियों की एकता सबसे बड़ा आधार है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने संकल्पों को मजबूत करना है। 

हमें एक दृढ़ राष्ट्र के रूप में अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करना है। भारत के लोगों में जो आक्रोश है, वो पूरी दुनिया में हैं। इस आतंकी हमले के बाद दुनियाभर से लगातार संवेदनाएं आ रही हैं। कई राष्ट्राध्यक्षों ने मुझे भी फोन करके पहलगाम की घटना पर दुख जताया है।

इस जघन्य तरीके से किये गये आतंकी हमले की सभी ने कठोर निंदा की है। पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश के साथ खड़ा है। मैं पीड़ित परिवारों को भरोसा देता हूं उन्हें न्याय मिलेगा... और न्याय मिलकर रहेगा। इस हमले के दोषियों को कठोरतम जवाब दिया जायेगा।

Published / 2025-04-26 21:55:37
...और पाकिस्तान भी तोड़ दे समझौता, तो क्या होगा भारत पर असर?

  • भारत से कौन-कौन से समझौतों को तोड़ने की गीदड़भभकी दे रहा पाकिस्तान, इसका क्या और कितना असर? 
  • भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक कितने द्विपक्षीय समझौते हुए हैं? ये समझौते किस-किस बात को लेकर हुए हैं? इनके मायने क्या हैं? अगर यह समझौते टूटते हैं तो इनका क्या असर हो सकता है? आइये जानते हैं 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को खत्म करने का एलान कर दिया है। इसके अलावा राजनयिक स्तर पर भी कई बड़े एलान हुए हैं। इस बीच पाकिस्तान ने भी दबाव में आते हुए भारत के साथ शिमला, कराची समझौते समेत अलग-अलग द्विपक्षीय समझौतों को तोड़ने की धमकी दी है।  

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक कितने द्विपक्षीय समझौते हुए हैं? ये समझौते किस-किस बात को लेकर हुए हैं? इनके मायने क्या हैं? अगर यह समझौते टूटते हैं तो इनका क्या असर हो सकता है? आइये जानते हैं। 

  1. सिंधु जल समझौता : कब हुआ- 19 सितंबर 1960, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर हुए थे। समझौता सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। विश्व बैंक की तरफ से पहल के बाद समझौते करने के लिए भारत पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तर पर 9 साल तक बात चली थी। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किये थे। सिंधु जल समझौते पर रोक लगाये जाने के बाद पाकिस्तान में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। पाकिस्तान की 80 फीसदी खेती योग्य भूमि सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। पानी रोके जाने के बाद अन्न संकट की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची, लाहौर, मुल्तान निर्भर हैं। 
  2. धार्मिक तीर्थस्थलों के दौरे को लेकर समझौता : कब हुआ : सितंबर 1974, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान में मौजूद अलग-अलग धर्मस्थलों में पर्यटकों को आवाजाही की सहूलियत देने के लिए समझौता हुआ। पाकिस्तान की 15 जगहें और भारत की पांच जगहें 2018 तक इस समझौते के अंतर्गत रहीं।  इनमें भारत से अजमेर शरीफ दरगाह, निजामुद्दीन दरगाह, अमीर खुसरो का मकबरा सबसे ज्यादा पर्यटन वाला स्थल रहा है। वहीं, पाकिस्तान में शादानी दरबार, ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा और पंज साहिब गुरुद्वारा शामिल है। इसके तहत हर साल धार्मिक त्योहारों के दौरान 3000 सिख तीर्थयात्री को पाकिस्तान जाने की इजाजत मिलती है। 
  3. हवाई सीमा के उल्लंघन से जुड़ा समझौता : कब हुआ : 6 अप्रैल 1991, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता नई दिल्ली में हुआ था। इसका लक्ष्य पड़ोसी देशों के बीच गलती या अनैच्छिक तरीके से हवाई सीमा के उल्लंघन की घटनाओं को कम करना है। इसके तहत सैन्य एयरक्राफ्ट्स के दोनों देशों की सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरने पर मनाही है। भारत-पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट एक-दूसरे की जल सीमा में भी बिना इजाजत के उड़ान नहीं भर सकते। हालांकि, इस समझौते का दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा उल्लंघन हुआ है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने भारत की नागरिक उड़ानों के लिए अपनी हवाई सीमा बंद कर ली। 
  4. बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण को लेकर समझौता : कब हुआ : अक्तूबर 2005, किस बारे में : भारत-पाकिस्तान के बीच यह समझौता अक्तूबर 2005 में हुआ था। इसके तहत दोनों देशों को किसी बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण से कम से कम तीन दिन पहले ऐसे टेस्ट की जानकारी देनी होगी। फिर चाहे वह जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हो या समुद्री क्षेत्र से। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की सीमा से 40 किलोमीटर दूर पर लॉन्च साइट नहीं बना सकते। इसके अलावा इनका प्रभावी क्षेत्र भी सीमा से 75 किलोमीटर के दायरे में नहीं होना चाहिए। यह समझौता अब तक कायम रहा है।  
  5. एलओसी पर संघर्षविराम का समझौता : कब हुआ : नवंबर 2003, किस बारे में : पाकिस्तान और भारत ने लाइन आॅफ कंट्रोल (नियंत्रण रेखा) पर संघर्षविराम को लेकर समझौता किया। हालांकि, पाकिस्तान ने समय-समय पर भारत के साथ इस समझौते का उल्लंघन किया है। भारत सरकार ने भी पाकिस्तान की इन नापाक कोशिशों का मुहंतोड़ जवाब दिया है।

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