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Published / 2025-05-17 23:19:03
संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से सकते में भारत विरोधी तत्व

  • भारत किसी से दुश्मनी नहीं करता, लेकिन... ऑपरेशन सिंदूर पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पूरी दुनिया को मानवीय धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है, क्योंकि भारत हमेशा मानव आधारित धर्म का पालन करता रहा है, लेकिन इसके लिए शक्ति की जरूरत है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी से शत्रुता नहीं करता, लेकिन फिर भी अगर कोई दुस्साहस करता है तो भारत उसे जवाब देने में भी पीछे नहीं रहता है।

उन्होंने कहा, ड़ोसी देशों के लिए भारत ने हमेशा एक बड़े भाई की भूमिका निभाई है, हमेशा पड़ोसी देशों की मदद की है। इसके बावजूद भारत कभी बड़े भाई होने का घमंड नहीं करता और बड़े भाई होने का फर्ज निभाते हुए छोटों को नसीहत देता है।

जयपुर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बोले सरसंघचालक

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह बातें शनिवार (17 मई,2025) को जयपुर में कहीं। वह जयपुर के सीकर रोड पर स्थित संत रवि राम आश्रम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में अपना संबोधन देने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं। इसके बाद भारत की बात सुनाते हुए उन्होंने अपना संबोधन दिया।

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा, समूचे विश्व को मानवीय धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है, क्योंकि भारत हमेशा मानव आधारित धर्म का पालन करता रहा है। लेकिन इसके लिए शक्ति की आवश्यकता जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता, लेकिन विश्व प्रेम और मंगल की भाषा भी तब ही सुनता है, जब आपके पास शक्ति होती है।

दुनिया हमारी ताकत देख रही है और प्रभावित हो रही है : मोहन भागवत

उन्होंने कहा, दुनिया तभी आपकी बात सुनती है जब उसे लगता है कि आप ताकतवर हैं। यह दुनिया का स्वभाव है और इस स्वभाव को बदला नहीं जा सकता है। इसलिए विश्व कल्याण के लिए हमें शक्ति संपन्न होने की आवश्यकता है और समय-समय पर दुनिया हमारी ताकत देख रही है और हमसे प्रभावित भी हो रही है।

बिना नाम लिए विपरीत धाराओं वाले पड़ोसी देशों पर बोले संघ प्रमुख

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, कई पड़ोसी समय-समय पर विपरीत धाराओं में बहते हैं। हम फिर भी मदद करते हैं क्योंकि हमारे मन में हमेशा सहयोग का भाव रहता है, लेकिन कई बार शक्ति का प्रदर्शन भी जरूरी हो जाता है और इस प्रदर्शन को पूरी दुनिया देखती है।

Published / 2025-05-17 15:53:59
भारत जल्द बनेगा चिप हब

  • फॉक्सकॉन लगायेगी 3,700 करोड़ का प्लांट, Apple भारत में दोगुना करेगा मैन्युफैक्चरिंग

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत सरकार ने ताइवानी टेक कंपनी फॉक्सकॉन को उत्तर प्रदेश में 3,700 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। यह प्लांट नोएडा के पास बन रहे जेवर एयरपोर्ट के नजदीक स्थापित किया जायेगा। 

यह प्रोजेक्ट भारत की मशहूर आईटी कंपनी एचसीएल ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम (JV) है। यह संयंत्र साल 2027 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा। यह यूनिट एक OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Testing) सुविधा होगी। इसका मतलब है कि यहां बड़े पैमाने पर चिप्स की टेस्टिंग और पैकेजिंग की जायेगी। 

इन चिप्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, पीसी, ऑटोमोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइसेज़ में होने वाले डिस्प्ले ड्राइवर्स को पावर देने में होगा। जब यह यूनिट पूरी तरह से चालू हो जायेगी, तो यह हर महीने लगभग 20,000 वेफ़र्स का उत्पादन कर पाएगी। इससे तैयार होने वाली चिप यूनिट्स की अनुमानित संख्या 36 मिलियन प्रति माह होगी।

भारत सरकार ने इस योजना को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत हरी झंडी दी है। यह मिशन कुल 76,000 करोड़ रुपये का है, जिसका मकसद भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाना है। इस योजना के तहत फॉक्सकॉन को कुल लागत का 50% तक सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिल सकती है। हालांकि अभी प्रोत्साहन राशि के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आयी है।

Published / 2025-05-13 21:28:05
अब हर 23 सितंबर को मनेगा आयुर्वेद दिवस

आयुर्वेद दिवस हर वर्ष 23 सितंबर को मनाया जायेगा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक दृश्यता और पालन में निरंतरता को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय में 23 सितंबर को प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाने के लिए निर्धारित किया है। 23 मार्च 2025  को जारी राजपत्र अधिसूचना के जरीए यह बदलाव लागू किया गया है, जो पहले  धनतेरस के दिन आयुर्वेद दिवस मनाने  प्रथा से एक महत्वपूर्ण बदलाव को दशार्ता है, जो चंद्र कैलेंडर के आधार पर परिवर्तनशील था। 

आयुर्वेद दिवस को हर साल आयुर्वेद को एक वैज्ञानिक साक्ष्य-आधारित और समग्र चिकित्सा प्रणाली के रूप में बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता रहा है, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अब तक, आयुर्वेद दिवस धनतेरस के साथ मनाया जाता था, जो हिंदू मास कार्तिक (आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर) में पड़ता है। हालांकि, धनतेरस की तारीख हर साल बदलती रहती थी, जिसके कारण आयुर्वेद दिवस की तारिख निश्चित नहीं थी। 

आयुष मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि अगले दशक में धनतेरस की तारिख 15 अक्टूबर से 12 नवंबर के बीचर व्यापक रूप से बदलती रहेगी, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजनों को करने में तार्किक चुनौतियां उत्पन्न होंगी। इस असंगति को दूर करने और राष्ट्रीय व वैश्विक उत्सवों के लिए एक स्थिर संदर्भ बिंदु स्थापित करने के लिए आयुष मंत्रालय ने उपयुक्त विकल्पों की जांच के लिए एक समिति गठन किया। 

विशेषज्ञ पैनल ने चार संभावित तारिखों का प्रस्ताव रखा, जिसमें 23 सितंबर की तारीख सर्वश्रेष्ठ विकल्प के रूप में सामने आयी। यह निर्णय व्यावहारिक और प्रतीकात्मक दोनों विचारों पर आधारित था। चुनी गयी तारीख 23 सितंबर, शरद विषुव के साथ मेल खाती है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं।

यह खगोलीय घटना प्रकृति में संतुलन का प्रतीक है, जो आयुर्वेद दर्शन के साथ पूर्ण रूप से मेल खाती है, जो मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन पर जोर देता है। विषुव, ब्रह्मांडीय सामंजस्य का प्रतिनिधित्व करता है, आयुर्वेद के सार को रेखांकित करता है- प्रकृति के साथ संतुलन में जीना। 

आयुष मंत्रालय व्यक्तियों, स्वास्थ्य पेशेवरों, शैक्षणिक निकायों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से आग्रह करता है कि वे नवनिर्धारित तारीख को अपनाएं और प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस समारोह में सक्रिय रूप से भाग लें। मंत्रालय इस बदलाव को आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य नैरेटिव में और अधिक समाहित करने तथा इसके निवारक और स्थायी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में कालातीत मूल्य को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में देखता है।

Published / 2025-05-13 20:42:22
आपरेशन सिंदूर ने देश को दी ताकत : मोदी

सैनिकों की सराहना से पाकिस्तान को चुनौती तक : प्रधानमंत्री

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को पंजाब में आदमपुर एयरबेस पहुंचे। यहां उन्होंने सेना के जवानों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने देश के सैनिकों का हौलसा बढ़ाया। इस दौरान पीएम मोदी ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि आप सभी ने कोटि-कोटि भारतीयों का सीना चौड़ा कर दिया। हर भारतीय का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया। आपने इतिहास रच दिया है। 

आपरेशन सिंदूर ने देश को एक अलग ताकत दी है। पीएम मोदी ने कहा कि, आज से अनेक दशक बाद भी जब भारत के पराक्रम की चर्चा होगी तो उसके सबसे प्रमुख अध्याय आप और आपके साथी होंगे। आप सभी वर्तमान के साथ ही देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए भी नई प्रेरणा बन गये हैं। मैं वीरों की इस धरती से वायुसेना, थलसेना, नौसेना के सभी जांबाजों और देश के शूरवीरों को सैल्यूट करता हूं। 

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आपरेशन सिंदूर कोई सामान्य सैन्य अभियान नहीं है। यह भारत की नीति, नीयत और निर्णायक क्षमता की त्रिवेणी है। भारत बुद्ध की धरती है और गुरु गोबिंद सिंह जी की भी धरती है। सवा लाख से एक लड़ाऊं। अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए शस्त्र उठाना हमारी परंपरा है। जब हमारी बहन-बेटियों का सिंदूर छिना गया, तब हमने आतंकियों के फन को उनके घर में घुसकर कुचल दिया।

Published / 2025-05-11 22:01:16
हमने 100 से ज्यादा आतंकी मारे : भारतीय सेना

9 आतंकी ठिकानों पर 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गये : आपरेशन सिंदूर पर सेना का आया बयान 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत द्वारा हाल ही में किये गये आपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के साथ तनाव को लेकर एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत शिवतांडव की धुन से हुई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय थल सेना के महानिदेशक सैन्य अभियान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, भारतीय वायु सेना के महानिदेशक वायु अभियान एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती और भारतीय नौसेना के महानिदेशक नौसेना अभियान वाइस एडमिरल एएन प्रमोद शामिल हैं।  

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय थल सेना के महानिदेशक सैन्य अभियान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि आॅपरेशन सिंदूर का उद्देश्य केवल आतंकियों का खात्मा था। उन्होंने बताया कि इस अभियान में 100 आतंकवादी मारे गए और उनके ठिकानों को नष्ट करने के प्रमाण भी प्रस्तुत किए गये। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने यह भी बताया कि मुदस्सर खार, हाफिज जमील और यूसुफ अजहर जैसे तीन प्रमुख आतंकियों को इस कार्रवाई में ढेर किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय थल सेना के महानिदेशक सैन्य अभियान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि आॅपरेशन सिंदूर की योजना पहलगाम में भारतीय नागरिकों पर हुए हमले के बाद बनायी गयी। इस आॅपरेशन का स्पष्ट सैन्य उद्देश्य आतंकवादियों और उनके ठिकानों को तबाह करना था। उन्होंने बताया कि भारतीय एजेंसियों ने सीमा पार आतंकी कैंपों की गहराई से पहचान की, जिनमें से कई ठिकाने पहले ही खाली कर दिए गए थे। 

हालांकि, नौ ऐसे ठिकाने मिले जिन्हें सक्रिय माना गया। इनमें से कुछ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और कुछ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित थे, जैसे मुरीदके, जो कसाब और डेविड हेडली जैसे आतंकियों से जुड़ा रहा है। जनरल घई ने बताया कि इस आॅपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे हाई वैल्यू टारगेट शामिल हैं। ये आतंकी कउ 814 हाइजैक और पुलवामा हमले से जुड़े थे। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय वायु सेना के महानिदेशक वायु अभियान एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि हालात कठिन हैं, हम यह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करना चाहते थे, लेकिन यह जरूरी हो गया था। भारतीय वायुसेना ने मुरीदके और बहावलपुर जैसे आतंकी ठिकानों पर हमला किया। ये दोनों स्थान अंतरराष्ट्रीय सीमा से काफी अंदर थे, इसलिए इन्हें चुनना रणनीतिक रूप से अहम था। कअऋ ने सटीक हमलों के लिए सैटेलाइट और इंटेलिजेंस आधारित टार्गेटिंग और प्रिसिशन म्यूनिशन का इस्तेमाल किया। 

भारतीय वायुसेना के डायरेक्टर जनरल एयर आपरेशंस एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बताया कि वायुसेना ने बेहद सतर्कता के साथ केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि पूरी योजना इस तरह तैयार की गई थी कि हमले केवल आतंकी कैंपों पर सटीक रूप से केंद्रित रहें। 

वहीं, डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि पाकिस्तान ने हाल ही में भारतीय सैन्य अड्डों पर हमले की कई कोशिशें कीं, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकतर खतरों को समय रहते नाकाम कर दिया। इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। 

एयर मार्शल एके भारती ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के मुरिदके में स्थित आतंकी शिविर को मिसाइल हमले में पूरी तरह तबाह कर दिया। यह वही क्षेत्र है जिसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद का गढ़ माना जाता है।

Published / 2025-05-11 21:59:50
भारत-पाक तनाव के बीच की गयी विशेष प्रार्थना सभा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 11 मई रविवार को रोम स्थित संत पेत्रुस कॉलेज में अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय आभास के सदस्यों ने भारत-पाकिस्तान के बीच शांति और नव-निर्वाचित संत पापा लियो चौदहवें के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की। पवित्र मिस्सा से पूर्व ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी के सम्माननीय प्रोफेसर, श्रेण्य फादर प्रेम खलखो, येसु समाजी ने उपस्थित आदिवासी भाई-बहनों का हृदय से स्वागत किया और इस मिलन समारोह के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए इसकी आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया। 

पवित्र मिस्सा बलिदान का संचालन श्रेण्य फादर ख्रिस्ती, येसु समाजी ने किया। अपने प्रेरणादायक प्रवचन में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हम तभी येसु के सच्चे और अच्छे शिष्य बनते हैं जब हम उनके वचनों को न केवल सुनते हैं, बल्कि हृदय से स्वीकार कर उनके अनुसार जीवन जीते हैं। 

इस अवसर पर आभास परिवार ने नव-अभिषिक्त उपयाजकों—समीर, नवीन और विनय—को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह के अंत में आभास के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। 

आभास का आशय है अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय—जो भारत के विविध क्षेत्रों से उच्च शिक्षा या धर्म सेवा हेतु इटली आये हुए आदिवासी भाई-बहनों का एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समूह है। इस समारोह में 60 अधिक सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। 

पोप लियो चौदहवें का पहला रविवार संदेश 

पोप लियो चौदहवें ने रेजिना चैली प्रार्थना के उपरांत दुनिया के नेताओं से युद्ध समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहता को स्मरण करते हुए कहा, अब कभी युद्ध नहीं। उन्होंने विशेषकर यूक्रेन के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की मांग की, जहाँ निर्दोष लोग, विशेष रूप से बच्चे, युद्ध की भेंट चढ़ रहे हैं। 

उन्होंने आग्रह किया कि सभी बंदी रिहा हों और बच्चे अपने परिवारों में लौट सकें। गाजा पट्टी में हाल ही में हुए हमलों पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए उन्होंने तत्काल संघर्ष विराम और मानवीय सहायता की अपील की तथा सभी बंधकों की रिहाई की मांग की। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल की झड़पों को देखते हुए उन्होंने स्थायी समझौते की उम्मीद जतायी।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में अनेक स्थानों पर संघर्ष जारी हैं और इन सभी के लिए उन्होंने शांति की प्रार्थना की। अंत में उन्होंने मदर्स डे पर सभी माताओं को शुभकामनाएं दीं— जीवित और दिवंगत दोनों के लिए प्रार्थना करते हुए। पोप ने अपने पूरे संदेश में शांति, करुणा और मानवता की गूंजती पुकार दोहरायी।

Published / 2025-05-11 21:58:04
रावलपिंडी तक आपरेशन सिंदूर का असर : राजनाथ सिंह

  • रक्षा मंत्री बोले- अब हर साल बनेंगी 100 ब्रह्मोस मिसाइलें 
  • रक्षा मंत्री ने ब्रह्मोस यूनिट के उद्घाटन को भी भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह दिन लखनऊ, उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। 
उन्होंने कहा, आज का दिन उस शक्ति की पूजा का दिन है जो हमारे सैनिकों को ताकत देती है और दुश्मनों के लिए कहर बन जाती है। भले ही मैं आज आपके बीच मौजूद नहीं हूं, लेकिन आपके उत्साह के जरिए आप मुझ तक पहुंच चुके हैं। यह खुद में एक संदेश है कि देश किसी भी स्थिति में रुकेगा नहीं, काम थमेगा नहीं और संवाद कभी टूटेगा नहीं। 

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ और इस परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह फैसिलिटी देशभर के युवाओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है। राजनाथ सिंह ने कहा, आप सबने दिन-रात मेहनत करके इस इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी की नींव रखी है। मैं आपकी मेहनत और समर्पण को सलाम करता हूं। 

ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी के उद्घाटन समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि आज का दिन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के तौर पर बेहद अहम है। उन्होंने 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का ऐतिहासिक प्रदर्शन था। 

राजनाथ सिंह ने कहा, आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस है। 1998 में इसी दिन भारत ने अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत दिखायी थी। यह परीक्षण हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, रक्षा कर्मियों और कई अन्य हितधारकों के वर्षों के प्रयास का नतीजा था। 

रक्षा मंत्री ने ब्रह्मोस यूनिट के उद्घाटन को भी भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। इस यूनिट से ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण, परीक्षण और एकीकरण से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। 

आपरेशन सिंदूर में दिखी ब्रह्मोस की ताकत : यूपी सीएम 

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधन दिया। उन्होंने कहा, आपने आपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत की झलक जरूर देखी होगी। अगर नहीं देखी, तो पाकिस्तान से पूछ लीजिए कि ब्रह्मोस की शक्ति क्या होती है। 

सीएम योगी ने बताया कि आपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने उन आतंकवादी संगठनों और भारत-विरोधी ताकतों को करारा जवाब दिया है जिन्होंने भारत मां के माथे पर हमला कर कई परिवारों की सिंदूर की रेखा मिटा दी थी। इस अभियान में ब्रह्मोस मिसाइल का अहम योगदान रहा। 

इसी बीच भारतीय वायुसेना ने आपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया है। वायुसेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि इस मिशन को पूरी सटीकता और प्रोफेशनलिज्म के साथ अंजाम दिया गया। वायुसेना ने कहा कि, यह अभियान राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप, सुनियोजित और गोपनीय तरीके से संचालित किया गया है। आपरेशन अब भी जारी है, और इस पर विस्तृत जानकारी उचित समय पर दी जायेगी। जब तक आधिकारिक जानकारी न आए, तब तक किसी भी अटकल या अपुष्ट जानकारी के प्रसार से बचें। 

इस घटनाक्रम के बीच, भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम उल्लंघन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, भारतीय वायुसेना और नौसेना प्रमुख शामिल हुए। गौरतलब है कि शनिवार को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर कई जगहों पर घुसपैठ कर इस समझौते का उल्लंघन किया। 

इससे पहले बुधवार को भारत ने पहलगाम हमले (जिसमें 26 लोगों की जान गई थी) के जवाब में आपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसमें 25 मिनट के भीतर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर 24 मिसाइलें दागी गयी। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक पाकिस्तान ने भारत के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में 15 सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले की कोशिश की, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।

Published / 2025-05-11 21:11:44
भारत ने कभी हमला किया ही नहीं, जवाबी कार्रवाई की है...

उमेश चतुर्वेदी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने काफी सावधानी से इन स्थलों को चुना और मिसाइल एवं ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। भारत की कोशिश यह रही कि उसकी कार्रवाई की जद में सामान्य नागरिक ना आयें। लेकिन पाकिस्तान ने इसे खुद पर हमला माना। चाहे दुश्मन की हों, या अपनी, सेनाएं हमेशा चौकस रहती हैं। ऐसे में छह और सात मई की दरमियानी रात भारतीय सेनाएं जिस तरह पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर की नौ जगहों पर सफल निशाना साधने में कामयाब रहीं, उससे पाकिस्तान की सेना, उसकी चौकसी और चीन से खरीदे उसके चौकसी वाले तंत्र पर सवाल उठता है। 

भारत ने यह कार्रवाई पहलगाम में 22 अप्रैल को बहे बेगुनाह खूनों के जवाब में किया। भारत के खबरिया टीवी चैनल अक्सर ही जल्दबाजी में रहते हैं। उनके यहां सोच-विचार की प्रक्रिया की गुंजाइश कम है। शायद यही वजह है कि भारतीय कार्रवाई को उन्होंने पाकिस्तान पर हमला बताने में देर नहीं लगायी। लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि हमला एक तरह से युद्ध की शुरुआत होता। इस लिहाज से देखें तो भारत ने जवाबी कार्रवाई की है, हमला नहीं। क्योंकि भारत ने अपनी तरफ से शुरूआत नहीं की है। 

इसमें दो राय नहीं कि पहलगाम में बहाये गये बेगुनाह खूनों के चलते देश में गुस्से की लहर थी। पहलगाम में आतंकियों ने जिन 26 बेगुनाह लोगों का खून बहाया, उनमें एक नेपाली नागरिक भी था। हैरत की बात यह है कि इन बेगुनाहों खून बहाते वक्त आतंकियों ने बाकायदा उनसे नाम पूछा, उन्हें कुरान की आयत और कलमा पढ़ने को बोला। यहां तक कि उनके वस्त्र उतारकर उनके अंदरूनी अंगों को देखा और हिंदू होने की तसल्ली होते ही बिना वजह गोलियों से उड़ा दिया। 

उसमें दो ऐसी महिलाएं विधवा हुईं, जिनके माथे पर कुछ ही दिनों पहले सिंदूर का तेज शामिल हुआ था। आतंकियों ने धर्म के नाम पर इन महिलाओं का सुहाग उजाड़कर सिर्फ इन महिलाओं और उनके परिवारों को सूना ही नहीं किया, बल्कि भारतीय सहनशक्ति को चुनौती दे दी। भारत में गुस्से की लहर उड़ना स्वाभाविक था। बिहार के मधुबनी में एक सभा में प्रधानमंत्री मोदी का कहना कि सुहाग उजाड़ने वाले आतंकियों का पीछा करके उन्हें खोजकर मिट्टी में मिला दिया जाएगा, उस गुस्से की ही अभिव्यक्ति थी। 

उसी अभिव्यक्ति को भारतीय सेनाओं ने बीती छह और सात मई की आधी रात को एक बजकर पांच मिनट से डेढ़ बजे के बीच जमीनी हकीकत बना दिया। इस हमले में पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित मौलाना मसूद अजहर का केंद्र भी रहा, जिसने थोक के भाव से आतंकियों को पैदा किया और भारत निर्यात किया है। जिसमें 26 नवंबर 2008 को मुंबई को खून से लाल कर देने वाले अजमल कसाब और उसका षडयंत्र रचने वाले रिचर्ड हेडली भी शामिल थे।  

भारत ने काफी सावधानी से इन स्थलों को चुना और मिसाइल एवं ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। भारत की कोशिश यह रही कि उसकी कार्रवाई की जद में सामान्य नागरिक ना आयें। लेकिन पाकिस्तान ने इसे खुद पर हमला माना। दिलचस्प यह है कि उसने आतंकी ठिकानों को नागरिक ठिकाने बताना शुरू किया। इसके साथ ही उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह भी बताना तेज कर दिया कि भारत ने मासूमों को निशाना बनाया है। फिर उसने आतंकवादी कार्रवाई पर साझा जांच का प्रस्ताव रखा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे स्वीकार नहीं किया है।  

पाकिस्तान एक तरफ जहां खुद को प्रताड़ित बता रहा है, वहीं वह सात-आठ मई की रात से लगातार भारतीय क्षेत्रों में हमला कर रहा है। दुखद बात यह है कि वह खुद भारतीय क्षेत्र में नागरिक ठिकानों और घरों को निशाना बना रहा है। कश्मीर सीमा पर पुंछ में उसने एक गुरूद्वारे पर हमला किया, जिसमें रागी समेत चार लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तान लगातार भारत के सैनिक ठिकानों पर हमला कर रहा है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक वह तकरीबन पूरी पश्चिमी सीमा पर मिसाइल, मोर्टार, ड्रोन और हवाई हमले कर चुका है। 

उसने चंडीगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर, उरी, अखनूर, पहलगाम, जम्मू, लेह, सर क्रीक, भुज समेत तमाम सैनिक ठिकानों पर निशाना साधने की कोशिश कर चुका है। यह बात और है कि भारत की जवाबी कार्रवाई में उसके तकरीबन सभी प्रयास नाकाम कर दिये गये। दिलचस्प यह है कि पाकिस्तान के इन हमलों को निष्फल करने वाली आकाश मिसाइल को भारत की अपनी स्वदेशी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने बनाया है। भारत ने उनके तीन सैनिक ठिकाने जहां तबाह किये हैं, वहीं उसको लगातार जवाब दिया जा रहा है।   

भारत को अपने षडयंत्र का निशाना बनाने वाले भारतीय मूल के आसिफ मुनीर लगातार हालात को बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं। सुनने में भले ही अजूबा लगे, भारत के खिलाफ आतंकी युद्ध के पीछे भारत से पाकिस्तान गए लोगों का ही हाथ रहा... ठीक 26 साल पहले पाकिस्तान ने सियाचिन इलाके में घुसपैठ के जरिए हम पर करगिल का युद्ध थोप दिया था... उस युद्ध के पीछे जनरल परवेज मुशर्रफ का हाथ था... पाकिस्तान जाने से पहले परवेज का परिवार दिल्ली के चांदनी चौक में रहता था... पहलगाम की नृशंस आतंकी कार्रवाई का षडयंत्र किस्तान के जनरल आसिफ मुनीर ने रचा। यहां जानना जरूरी है कि आसिफ का परिवार भी भारत से पाकिस्तान गया था... बंटवारे से पहले आसिफ का परिवार जालंधर में रहता था...। 

भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान लगातार मुंह की खा रहा है। इसके बावजूद वह दुष्प्रचार के जरिए अपनी डींगे हांक रहा है। पाकिस्तान अपने लोगों को लगातार बता रहा है कि उसकी सेनाओं ने भारत की सेना या वायुसेना को इतना नुकसान पहुंचाया। जबकि उसके ये दावे कोरे झूठ हैं। इस लिहाज से देखें तो भारत दो मोर्चों पर जूझ रहा है..पहला मोर्चा जहां सैनिक है, वहीं दूसरा मोर्चा सूचनाओं का है..अरब क्रांति के दौरान देवता के रूप में उभरा सोशल मीडिया अब देवता और दैत्य-दोनों ही भूमिकाओं में है..पाकिस्तान इन दिनों सोशल मीडिया की दैत्य वाली भूमिका का खूब उपयोग करते हुए भारत के बारे में लगातार गलत सूचनाएं दे रहा है..अपनी सेनाओं की झूठी कामयाबियों को इसी के जरिए वह फैला रहा है। 

भारत पर आरोप लगा रहा है कि भारतीय सेनाएं रिहायशी इलाकों और धार्मिक स्थानों पर हमला कर रही हैं.लेकिन यह गलत है और भारत का सार्वजनिक सूचना तंत्र और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय लगातार इन भ्रामक सूचनाओं को तथ्यों के साथ खारिज कर रहे हैं और पाकिस्तान के झूठ को बेपर्दा कर रहे हैं। वैसे यह दुनिया का जाना-पहचाना तथ्य है कि सीधी लड़ाई में नाकाम रहने वाले ही फर्जी खबरों का सहारा लेते हैं। सीधा युद्ध जो नहीं कर सकता, वही शेखी भी बघारता है। पाकिस्तान के दुष्प्रचार को इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।   

सच्चाई तो यह है कि भारत ने ज्यादातर पाकिस्तानी आतंकी उत्पाद केंद्रों और रक्षा केंद्रों को निशाना बनाया है। एक तरह से देखें तो भारत इस बार आतंक की फैक्ट्रियों के खात्मे को लेकर दृढ़ संकल्प नजर आ रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर रहा है और फिर उससे इनकार भी कर रहा है। इससे उसका डर भी जाहिर हो रहा है। भारत में यह मानने वालों की संख्या कम नहीं है कि पाकिस्तान का यह डर और बढ़ाया जाना चाहिए। पता नहीं यही वजह है या नहीं, लेकिन भारत की जवाबी कार्रवाई एक तरह से उसके डर को ही बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 

जिन देशों की आर्थिक स्थिति खराब होती है, वे युद्ध जैसी विभीषिका से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन पाकिस्तान की स्थिति दूसरी है। दरअसल वहां सरकार दुनिया को दिखाने का एक चेहरा भर है। शाहबाज शरीफ भले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हों, लेकिन असल ताकत वहां सेना प्रमुख आसिफ मुनीर के हाथ है। पाकिस्तान में कह सकते हैं कि सरकार में सेना घुसी हुई है। इसे दुनिया भी स्वीकार कर रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो का आसिफ मुनीर को फोन करना और युद्ध रोकने की बात करना सरकार में सेना के घुसी होने का ही सबूत है। 

पाकिस्तान की सेना एक तरह से सेना प्रमुख की लिमिटेड कंपनी होती है। सेना का रोजगार युद्ध और आतंक की सप्लाई से चलता है, इसीलिए पाकिस्तान की तरफ से आसिफ मुनीर इस युद्ध को जारी रखे हुए है। लेकिन उन्हें याद रखना होगा कि जिस तरह 1948, 1965, 1971 और 1999 में भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाया, 1971 में बांग्लादेश को अलग कराया, अगर वह नहीं सुधरा तो इस बार भारत बड़ा सबक सिखाएगा।

कुछ पश्चिमी राजनीतिक जानकार तो कहने भी लगे हैं कि पाकिस्तान दरअसल प्रसव पीड़ा से गुजर रहा है और हो सकता है कि इस बार उसकी कोख से बलूचिस्तान का जन्म हो जाए। इसलिए पाकिस्तान को चेतना होगा। अगर वह नहीं चेतेगा तो भारतीय सेनाएं इस बार उसे ऐसा सबक सिखाएंगी कि वह लंबे समय तो उसे भूल नहीं पाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिली 1.4 अरब डालर की रकम हिचकोले खाती उसकी अर्थव्यवस्था को हल्का सा सहारा ही दे सकती है, लंबे समय तक उसे ढो नहीं सकती। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक हैं)।

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