एबीएन डेस्क। आज हम समस्त देशवासी भारत की आजादी की 75 वीं वर्षगांठ बहुत ही धूमधाम के साथ मना रहे हैं। इस आजादी को लाने में हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने अपना संपूर्ण जीवन उत्सर्ग कर दिया था। लंबे संघर्ष और कुर्बानी के बाद यह आजादी हम सबों को मिली थी। ब्रिटिश हुकूमत ने लगभग दो सौ वर्षों से भी अधिक समय तक भारत को गुलाम बना कर रखा था। वे स्वाधीनता सेनानियों को जितनी यातनाएं दे सकते, दिए थे। ब्रिटिश हुकूमत ने गुलाम भारत की एक ऐसी तस्वीर विश्व पटल पर रखी थी, जिससे भारत के गौरवशाली इतिहास पर ही प्रश्न चिह्न लग गया था। ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की एक ऐसी तस्वीर प्रस्तुत की, जिससे यह देश अज्ञानियों, गरीबों और सपेरों के देश के रूप में जाना जाता रहा था। समय के साथ आये बदलाव और देशवासियों के बीच स्वराज्य की कामना ने ब्रिटिश हुकूमत के झूठे छल तंत्र को तोड़कर ही रख दिया था। देश के स्वाधीनता सेनानियों ने अब स्वतंत्र भारत का सपना देखना शुरू कर दिया था। लंबे संघर्ष के बाद यह आजादी देशवासियों को नसीब हो पायी थी। 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी। आज भारत की आजादी के 74 वर्ष पूरे होने को है। बीते 74 वर्षों में भारत की एक नई पहचान संपूर्ण विश्व में निर्मित हो पाई है। भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सैनिक क्षमता आदि विभिन्न क्षेत्रों में एक नई ऊंचाई को प्राप्त किया है। देश की आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने थे। जवाहरलाल नेहरू एक स्वाधीनता सेनानी के साथ कुशल राजनीतिज्ञ भी थे । इनकी एक अंतरराष्ट्रीय छवि भी थी । जिस कालखंड में भारत की सत्ता जवाहरलाल नेहरू को सौंपी गई थी । देश की स्थिति बेहद क्रिटिकल थी। ब्रिटिश हुकूमत जितना लूट सकती थी, भारत को लूटी थी । ब्रिटिश हुकूमत यहां की बेशकीमती संपतिया ब्रिटेन ले गई थी। सिर्फ एक खाली खजाने के साथ सत्ता सौंपी गई थी। आजादी मिलते के साथ ही ना चाहते हुए भी देश दो टुकड़ों में बंट गया था। पाकिस्तान नामक एक नए देश के निर्माण के साथ भारत को एक बड़ी रकम इस देश को देना पड़ा था। आजाद भारत एक ऐसे मुकाम पर खड़ा था, जहां गुलामी के दंश के अलावा कुछ भी न था। आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान से युद्ध झेलना पड़ा था। भारत के लिए यह बहुत ही कठिनाइयों का दौर रहा था। भारत 565 रियासतों में बंटा एक देश था । ऊपर से ब्रिटिश हुक्मरानों की कूटनीतिक चालें भी चली जा रही थी। वे भारत को कई टुकड़ों में बटा देखना चाहते थे। इस विषम परिस्थिति को अनुकूल बनाने में हमारे राजनेताओं ने बेमिसाल धैर्य और साहस का परिचय दिया था। कई रियासतों में बंटे भारत को अखंड भारत का स्वरूप प्रदान करने में देश के प्रथम गृह मंत्री, लोह पुरुष बल्लभ भाई पटेल ने बहुत ही महती भूमिका निभाई थी। उनके इस दूरदर्शी कदम की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। उनके कुशल नेतृत्व में अखंड भारत का सपना साकार हो पाया था। इस कालखंड में कुछ राजनीतिक भूलें भी हुई थी। जम्मू कश्मीर का मसला हल नहीं हो पाया था। फलस्वरूप जम्मू कश्मीर जैसे एक प्रांत में दो विधान की परंपरा कायम रह गई थी। इस परंपरा को दो वर्ष पूर्व दुरुस्त किया गया। भारत एक समय न्याय पाने के संयुक्त राष्ट्र संघ गया था। 74 वर्षों बाद आज उसी संयुक्त राष्ट्र संघ की अध्यक्षता देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कर रहें हैं। जवाहरलाल नेहरू ने भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत देश के रूप में स्थापित करने के लिए कई विदेश यात्राएं की थी। उन्होंने राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय मंचों से कई महत्वपूर्ण भाषण दिया। फलस्वरूप भारत की पहचान एक मजबूत राष्ट्र के रूप में हो पाई। इसी दौरान पड़ोसी देश चीन ने हिंदी चीनी भाई भाई कह कर भारत पर आक्रमण कर दिया था। हमारी तैयारी उस स्तर की ना होने के कारण भारत को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। हमारी हजारों मिल जमीने चीन के कब्जे में चली गई। भारत इस पराजय से सबक लिया और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आजादी मिलने के साथ ही देश में औद्योगिकी करण की मजबूत नींव रखी थी। उन्होंने संपूर्ण देश में उद्योगों का जाल बिछा दिया था। कई बड़ी नामचीन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। देश में विद्यमान खनिज संपदा आधारित बड़े बड़े उद्योगों का देश की भूमि पर शिलान्यास किया गया था। देश में बड़े-बड़े बांध बनाए गए। बड़े बड़े पुलों का निर्माण होना शुरू हो गया था। भारत अपने गौरव को प्राप्त करने के लिए खून पसीना एक कर दिया था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एवं द्वितीय लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में गुलजारी लाल नन्दा ने मोर्चा संभाला था। वे सहज, सरल और गांधीवादी नेता थे। राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि अगर गुलजारी लाल नंदा को बतौर प्रधानमंत्री के रूप में पूर्ण कालीन कार्य करने का अवसर मिलता तो वे देश के लिए बहुत कुछ कर सकते थे। देश के चहुंमुखी विकास के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री कुछ किया, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। इनके कार्यकाल में जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35 ए समाप्त कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर भी देश के अन्य प्रांतों की तरह एक प्रांत के रूप में जाना जाने लगा। एक प्रांत में दो विधान की जो पहचान जम्मू-कश्मीर की थी, वह सदा के लिए मिट गई । इनके कार्यकाल में राम मंदिर जैसे अति संवेदनशील मामले का पटाक्षेप हो गया। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो रहा है तो दूसरी ओर एक मस्जिद का भी निर्माण हो रहा है। तीन तलाक के खिलाफ संसद में बिल पारित हो जाने से तीन तलाक जैसी कुरीति से सदा सदा के लिए मुक्ति मिल गई। जनसंख्या बील पारित करने पर भी विचार किया जा रहा है। 1962 के युद्ध में चीन द्वारा छीनी गई एक बड़े भूखंड पर भारत का पुन: कब्जा हो गया है। देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है। विश्व के कई देशों से भारत में सैन्य उपकरण बनाने पर समझौता हुआ है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी के क्षेत्र में भी कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कई बड़े निर्णय लिए हैं। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहा है। टोक्यो ओलंपिक में मिली सफलता इसकी बानगी है। पहली बार ओलंपिक विजयी खिलाड़ियों को स्वाधीनता दिवस पर विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इन तमाम उपलब्धियों के बीच भारत की आजादी के 74 वर्ष बीतने को है । 75 वें वर्ष की ओर हमारे कदम बढ़ गए हैं। इसी वर्ष भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ की अध्यक्षता करने की जवाबदेही दी गई । यह भारत के लिए गौरव की बात है। आजादी की 75 वें वर्षगांठ पर हम समस्त देशवासियों को एक नया भारत निर्माण का संकल्प लेने की जरूरत है।
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में एक बार फिर से आतंकियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। खासकर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के दो वर्ष पूरी होने बाद से अपनी नापाक हरकतें बढ़ा दी हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस और सुरक्षा बलों ने भी इन पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी तेज कर दी है। सुरक्षा बलों को अपने अभियान में कामयाबी भी मिल रही है। पाकिस्तान के प्रमुख आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़े 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इस बात की पुष्टि जम्मू कश्मीर के आईजी ने भी की है।
एबीएन डेस्क। शनिवार को आजादी का अमृत मोहत्सव मनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्राल की ओर से जागरुकता अभियान के तहत पेडल फॉर हेल्थ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, मनसुख मांडविया और किरन रिजिजू ने शिरकत की। इस मौके पर इन तीनों मंत्रियों ने नई दिल्ली में मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से लेकर अकबर रोड तक साइकिल चलाई। पेडल फॉर हेल्थ कार्यक्रम का मकसद स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरुक करना है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि पेडल फॉर हेल्थ के तहत आपका स्वास्थ्य बेहतर बनता है, जब नागरिक का स्वास्थ्य अच्छा बनता है तो राष्ट्र का स्वास्थ्य भी अच्छा होता है, हम आजादी के 75 साल मनाने जा रहे हैं इस मौके पर 75 शहरों में साइकलिंग की शुरुआत की गई है। पेडल फॉर हेल्थ में हिस्सा लेने आए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए कुछ और संस्थाओं के साथ इस जागरुकता अभियान को शुरू किया है। उन्होंने आगे कहा, स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत हो सकता है।
बस्ती। गुरुवार सुबह भीषण हादसे में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर एनएच-28 पर एक होटल के पास खड़े कंटेनर में पीछे से जा घुसी। रफ्तार इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची सुरक्षित बची है। चालक की हालत गंभीर है। उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। घायलों का ठीक तरह से इलाज और प्रभावितों को हरसंभव मदद और राहत देने के निर्देश दिए हैं। गैस कटर से काटकर कार में फंसे सभी के शव को बाहर निकाला गया। कार में चालक सहित 7 लोग सवार थे, जिसमें एक ही परिवार के 6 लोग थे। इसमें अनम (13) सुरक्षित बच गई है। मरनेवालों में अब्दुल अजीज (50) पुत्र जहूर, नरगिस तवस्सुम (48) पत्नी अब्दुल अजीज, एनम (18) पुत्री अब्दुल अजीज, तिउरा (10) पुत्री अब्दुल अजीज, सुबा (6) पुत्री अब्दुल अजीज। मूलरूप से बिहार राज्य के भागलपुर के निवासी 50 वर्षीय अब्दुल अजीज लखनऊ के शारदा नगर में पत्नी और 4 बेटियों के साथ रहते थे। यहां प्रापर्टी डीलिंग का काम करते थे। अब्दुल का ससुराल झारखंड में है। सास की मौत की खबर मिली तो परिवार के साथ भोर में ही निकल पड़े। शारदानगर का ही रहने वाला अभिषेक गाड़ी चला रहा था। सुरक्षित बची अनम (13) ने बताया हम सो रहे थे। अचानक तेज आवाज के साथ टक्कर हो गई। अम्मी, अब्बू और हम सब फंस गए थे। चारो तरफ खून ही खून था। कोई बोल नहीं पा रहा था। हमें निकाला गया।
बिहार। बिहार में अररिया जिले के रामपुर कोदरकट्टी में रविवार को एक हाई स्पीड ट्रक ने ऑटो को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में ऑटो सवार दो बच्चों समेत 5 यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हैं। इनमें 3 की हालत गंभीर है। घायलों को अररिया सदर अस्पताल, पूर्णिया और भागलपुर भेजा गया है। हादसा रामपुर कोदरकट्टी गांव के पास हुआ।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मृतकों में महावती देवी, नुनूलाल ऋषि (50), सुशीला देवी (55), मीनाक्षी कुमारी (5 साल) और गौरव कुमार (3 साल) शामिल हैं। सुमन देवी, राजकुमारी, दीपक कुमार ऋषि, फूल कुमारी, सुशील ऋषिदेव, रानीगंज और मिथुन ऋषिदेव घायल हैं।सभी घायल और मृतक आपस में रिश्तेदार हैं।ऑटो पर ड्राइवर सहित 11 लोग बैइे थे। सभी पूर्णिया में एक रिश्तेदार के घर गए थे।ऑटो पूर्णिया से अररिया की ओर आ रहा था। ट्रक ऑटो को पीछे से टक्कर मारते हुए भाग गया। हादसे की सूचना मिलते ही सदर एसडीएम शैलेष चंद्र दिवाकर, एसडीपीओ पुष्कर कुमार सहित अन्य अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीओ शैलेषचंद्र दिवाकर ने अररिया के दो मृतकों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही। पूर्णिया के दो मृतकों के लिए भी मुआवजे की राशि को लेकर पूर्णिया जिला प्रशासन से बात की।
केंद्र सरकार ने खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है। अब इसे मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि उन्होंने कहा कि मुझे पूरे भारत के नागरिकों से खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। बता दें कि पहले यह राजीव गांधी के नाम पर था। भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न की जगह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले का खेल जगत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की कि नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीमों के शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया। इस फैसले का भारतीय खेल जगत ने स्वागत किया है। केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ध्यानचंद खेलों में भारत के सबसे बड़े नायक रहे है। उन्होंने ट्वीट किया कि मेजर ध्यानचंद जी ने अपने असाधारण खेल से विश्व पटल पर भारत को एक नई पहचान दी व अनगिनत खिलाड़ियों के प्रेरणास्रोत बने। जनभावना को देखते हुए खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद।
भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के इमादपुर थाना क्षेत्र के सहियारा बाजार में बुधवार की सुबह एक ट्रक ने सड़क किनारे खड़े 5 लोगों को रौंद दिया। इनमें 3 बुजुर्ग थे। हादसे में एक शख्स की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। चार लोग जख्मी हो गए। मृतक की पहचान 62 साल के आनंद कहार के रूप में हुई है। हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। जख्मियों में दो को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद एक को पटना रेफर कर दिया गया। दो अन्य घायलों का इलाज पीएचसी में चल रहा है। घटना की सूचना पाकर इमादपुर थाना इंचार्ज अवधेश कुमार पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटना के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने बुझाने में जुट गए। उन्होंने बताया कि जख्मियों में हरे कृष्णा साह (60), अयोध्या साह (50) समेत दो अन्य शामिल हैं,जिनकी पहचान नहीं हो सकी है।
कोरोना संक्रमण कम होने के साथ ही बिहार सरकार Unlock- 5 में ढील देकर लोगों को राहत दी है। बुधवार को आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में बच्चों के स्कूल को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही राज्य में सिनेमा हाल, शापिंग माल भी खोलने की इजाजत दे दी है। -7 अगस्त से 25 अगस्त तक लागू रहेगा अनलॉक 5 – 7 अगस्त से नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों के खुलेंगे स्कूल, 50 फीसदी उपस्थिति के साथ स्कूल में होगी पढ़ाई। कोरोना का वैक्सीन लेने वाले शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा सकेंगे। – सभी कॉलेज, कोचिंग संस्थान एवं अन्य संस्थान में भी 7 अगस्त से होगी पढ़ाई। इन जगह पर भी टीकाकरण करा चुके शिक्षक ही पढ़ा सकते हैं बच्चों को। – दसवीं क्लास से ऊपर के बच्चों को कोचिंग देने वाले संस्था भी 50 फीसदी उपस्थिति के साथ खोली जा सकती है। यहां भी पढ़ाने वाले शिक्षकों को टीकाकरण कराना आवश्यक होगा। इसके अलावा अपने संस्थान की पूरी जानकारी स्थानीय थाना को भी उपलब्ध कराएंगे। – 16 अगस्त से खुलेंगे पहली से आठवीं क्लास तक के बच्चों के स्कूल। स्कूल प्रबंधन को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल में सैनिटाइजर, हैंड वाश की व्यवस्था और मास्क की उपलब्धता जरूरी होगी। साथ ही स्कूल के शिक्षक जो टीकाकरण करा चुके हैं, वही बच्चों को पढ़ा सकते है और टीका ले चुके स्कूल के कर्मचारी को ही स्कूल के अंदर प्रवेश करने की इजाजत होगी। – सिनेमा हॉल को 50 फीसदी क्षमता के साथ शाम 7 बजे तक ही खोलने की दी गई है इजाजत। – सुबह के शॉपिंग मॉल को भी एक दिन बीच कर खोलने की दी गई छूट। यानी शॉपिंग मॉल को अल्टरनेट डे ही खोलने की दी गई है छूट। – राज्य की अब सभी दुकाने शाम 7 बजे तक खोले जा सकेंगे। लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि प्रतिष्ठान में उसके मालिक और कर्मचारी दोनों कोरोना का टीका ले चुके हो। प्रतिष्ठान को साप्ताहिक बंदी के अलावा प्रतिदिन खोलने की छूट दी गई है। – सार्वजनिक वाहन को अब 100 फीसदी क्षमता के साथ चलाने की अनुमति क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा दे दी गई है। – कोविड-19 से जुड़े कार्यक्रम और सरकारी कार्यक्रम को छोड़कर निजी कार्यक्रमों पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। – धार्मिक स्थानों पर भी पहले की तरह रोक जारी रखने का फैसला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा लिया गया है। यानी 25 अगस्त तक धार्मिक स्थानों पर पूजा पाठ या किसी अन्य प्रकार के आयोजन पर रोक लगी रहेगी। – इसके अलावा सभी जिले के डीएम को यह अधिकार होगा कि इसके अलावा भी अगर कोई पाबंदी की जरूरत हो तो वह अपने जिले के लिए फैसला ले सकते हैं। लेकिन क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप ने जो निर्णय लिया है उसे किसी भी प्रकार से शिथिल नहीं किया जाएगा।
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