एबीएन सेंट्रल डेस्क। आज दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 11वां संस्करण मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भाग लिया और करीब 5 लाख लोगों के साथ एक साथ योग किया। कार्यक्रम सुबह 6:30 बजे से 7:45 बजे तक चला, जहां प्रधानमंत्री ‘कॉमन योगा प्रोटोकॉल’ के तहत योगासन करेंगे और लोगों को योग अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।पीएम के साथ मंच पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी योग करते नजर आए।
· इस साल दुनिया के 180 से अधिक देशों में योग दिवस के तहत कार्यक्रम हो रहे हैं।
· विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास और सांस्कृतिक केंद्रों में भी विशेष योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
· योग को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने में भारत की भूमिका अहम रही है।
· 2025 के योग दिवस की थीम है: एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग इसका उद्देश्य है कि लोग यह समझें कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन के बीच गहरा संबंध है।
· वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस का प्रस्ताव रखा था।
· सिर्फ 90 दिनों के भीतर 177 देशों ने इस प्रस्ताव को समर्थन देकर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया।
· पहला योग दिवस 21 जून 2015 को दुनिया भर में मनाया गया।
· भारत में करीब 1 लाख से अधिक स्थलों पर एक साथ योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
· स्कूली बच्चे, सरकारी कर्मचारी, पुलिस, आर्मी और आम नागरिक बड़ी संख्या में इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।
· इस बार के मुख्य कार्यक्रम का नाम रखा गया है: योग संगम, जो समुद्र किनारे स्थित विशाखापट्टनम के ओपन ग्राउंड में आयोजित हो रहा है।
· मंच पर मोदी के साथ योग गुरुओं, खिलाड़ियों, सेना के जवानों, स्कूली बच्चों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रहेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बजट उपयोग की लैंगिक समीक्षा का आह्वान करते हुए कहा है कि इसके लिए राष्ट्रीय लक्ष्य, राज्य की प्राथमिकता और स्थानीय आवश्यकता के बीच परस्पर ताल-मेल होना चाहिए और पारदर्शिता एवं विश्लेषण में जवाबदेही होनी चाहिए।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने गुरुवार को यहां लैंगिक बजट पर एक परामर्श कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों एवं विभागों के सहयोगियों को योजनाओं की समीक्षा लैंगिक दृष्टिकोण से करनी चाहिए।
योजनाओं का लाभ महिलाओं तक अधिक प्रभावी रूप से पहुंचाने के तौर तरीकों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं में स्पष्ट लैंगिक परिणाम संकेतक शामिल किये जाने चाहिए और लैंगिक बजट को अपनी दीर्घकालीन नियोजन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तराखंड के केदारनाथ यात्रा मार्ग से एक दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आयी है। पवित्र यात्रा पर निकले श्रद्धालु उस वक्त हादसे का शिकार हो गये जब गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच स्थित जंगल चट्टी में अचानक संतुलन बिगड़ने से कुछ यात्री गहरी खाई में गिर गये। यह घटना बुधवार, 18 जून की सुबह करीब 12 बजे हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
पोल नंबर 153 के पास जंगल चट्टी के इलाके में यात्रियों का एक समूह हादसे की चपेट में आ गया। जानकारी मिलते ही राहत और बचाव कार्य में जुटी डीडीआरएफ की टीम और पुलिस फौरन मौके पर पहुंची और रेस्क्यू आॅपरेशन शुरू किया गया।
रेस्क्यू टीम खाई में उतरकर बेहद कठिन और जोखिम भरे हालात में खोजबीन कर रही है। एक घायल को कंडी (पर्वतीय इलाकों में प्रयोग होने वाला स्ट्रेचर) के जरिए बाहर निकाला गया है। फिलहाल इलाके में मौसम सामान्य है, जिससे रेस्क्यू में थोड़ी राहत मिली है।
इस घटना के बाद यात्रा मार्ग पर सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन की ओर से यात्रियों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी गयी है, खासकर संकरे और फिसलन भरे रास्तों पर।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हिन्दू लड़कियों को योजना से फंसाकर उनके साथ लव जिहाद कर उन्हें कन्वर्जन करने के सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आ रहे हैं। लग रहा है जैसे देश के मिनी मुंबई पर जिहादियों ने पूरी नजर गड़ा रखी है। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की स्थिति इस वक्त इतनी खराब हो गयी है कि हर रोज यहां धर्मपरिवर्तन का खेल खेला जा रहा है, जहां बात प्यार से न बने, वहां लालच दो और जहां रुपये या अन्य महंगी वस्तुओं से काम न चले, वहां डर दिखाकर कन्वर्जन कराओ लेकिन गैरमुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा इस्लाम में लाना जैसे यहां इस्लामवादियों का सबसे बड़ा मकसद नजर आ रहा है। यहां तक कि इस्लाम से जुड़े जनप्रतिनिधि भी इस मामले में सक्रिय नजर आये हैं।
अब सामने आये प्रकरण में दो पीड़िताओं की शिकायत पर दो युवकों के खिलाफ रेप और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर की गयी है। इंदौर की बाणगंगा पुलिस की तहकीकात में सामने आया है कि लव जिहाद की घटना को अंजाम देने के लिए फंडिंग की गयी, जिसमें पुलिस ने कांग्रेस पार्षद को भी 120बी के तहत आरोपित बनाया है।
जांच के दौरान सामने आये वीडियो में दोनों आरोपियों साहिल शेख और मोहम्मद अल्ताफ ने कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया, जिसने लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने और निकाह के लिए उन्हें मोटी रकम दी थी। उसने युवकों को एक लड़की को फंसाने के लिए एक लाख रुपये और निकाह कराने पर दो लाख रुपये देने की बात कही थी। साथ ही अधिकतम हिन्दू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर बाद में वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेलना भी सामने आया है।
पकड़े गये दोनों युवकों ने बताया कि पार्षद पहले फोटो देखकर आश्वस्त होता है कि लड़की हिन्दू है कि नहीं, फिर उसके बाद फंडिंग की जाती। प्रत्येक युवती को अपने जाल में फंसाने के लिए एक से दो लाख रुपये दिये जाते थे। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने बताया कि अनवर से सामाजिक कार्यक्रम के दौरान मुलाकात हुई थी। उसने दो लाख रुपये दिये थे। यह भी कहा कि इस काम को आगे बढ़ाओ। दूसरी ओर, आरोपित साहिल खान को लेकर 18 वर्षीय पीड़िता ने अपनी आपबीती में बताया कि करीब पांच महीने पूर्व उससे हिंदू नाम से इंस्टाग्राम पर दोस्ती की गयी थी।
12 मई को वह बातचीत के लिए युवती को दोस्त के रूम पर ले गया, जहां पूरी तरह भरोसे में लेकर शादी का झांसा देते हुए शारीरिक संबंध बनाये, इसके बाद साहिल उसे 30 मई को स्कीम-54 में एक कैफे पर मिलने बुलाता है जहां कई बार मना करने एवं विरोध के बाद उसके साथ जबरदस्ती की गयी। बाद में उसकी असली पहचान मुस्लिम होना उजागर हुआ। उसने बताया कि वह मुसलमान है और अब तुम भी अपना धर्म बदल लो। उसने कहा कि तू जितना पैसा मांगेगी मैं दूंगा। फिर युवती को जबरदस्ती बुरका पहनाने की कोशिश की गयी।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया का पूरे मामले को लेकर कहना है कि यह कार्रवाई वायरल वीडियो के आधार पर की गयी, अभी दो पीड़िताएं इस प्रकरण में सामने आयी हैं, इसलिए अलग-अलग दो एफआईआर दर्ज की गयी और साहिल-अल्ताफ दोनों को आरोपित बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इन दोनों पीड़तिाओं के बयानों के आधार पर धाराएं बढ़ायी गयी हैं। इसमें पार्षद अनवर कादरी को भी आरोपी बनाया जा रहा है। सभी आरोपितों से सघन पूछताछ जारी है।
वहीं, थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर ने जानकारी दी कि आरोपी साहिल शेख और अल्ताफ खान ने सोशल मीडिया पर फर्जी हिंदू नामों से आईडी बना रखी थी, इन्हीं नामों से वे युवतियों को फंसाते थे। इसके लिए इन्होंने अपने नाम अर्जुन और राज रखे हुए थे। शिकायत करने सामने आयी दोनों युवतियों से भी ये हिन्दू नाम से बात करते और उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाया गया। इनकी मोबाइल जांच में सामने आया है कि एक बार किसी युवती के इसके झांसे में आने के बाद वे इन लड़कियों पर शादी करने एवं धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्षद ऐसे युवकों को फंडिंग करते, यह भी सामने आया है। आरोपित अल्ताफ ने अनवर से एक लाख रुपये लेना स्वीकारा है। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही है। कादरी के अलावा भी अन्य लोगों की जांच की जा रही है। देररात पुलिस ने उसके घर छापा मारा लेकिन वह फरार हो गया। दोनों आरोपित सोमवार तक पुलिस रिमांड पर रहे। पुलिस इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।
दरअसल, इंदौर में लगातार लव जिहाद के केस सामने आ रहे हैं। ड्रीम ओलंपिक शूटिंग एकेडमी के कोच मोहसिन खान पर अब तक सात एफआरआर दर्ज हो चुकी हैं। उसने खुद एवं अन्य मुस्लिम दोस्तों व परिवार सदस्यों के साथ मिलकर कई हिन्दू लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया और रेप किया। बजरंग दल ने दावा किया है कि मोहसिन ने 150 से अधिक हिंदू युवतियों को अपने जाल में फंसाया। ऐसे ही पुलिस ने एक अन्य प्रकरण में फरहान और हन्नेन खान को पकड़ा तो इन दोनों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किये।
आरोपित हन्नेन खान ने हिंदू युवती को अपना नाम आयुष पटेल बताकर झांसे में लेना बताया। पुलिस ने हन्नेन के फोन की जांच की तो कई हिंदू युवतियों की चैटिंग मिली। इसी तरह, आरोपित फरहान ने भी युवती को हिंदू नाम बताकर झांसे में लिया था। जब युवती को उसके मुस्लिम होने की सच्चाई का पता चला तो विजय नगर थाने में मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (लव जिहाद) की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंची। इस प्रकरण में पीड़िता के अनुसार, फरहान के कृत्य में उसकी मां अफसाना भी शामिल है।
इसी तरह के लव जिहाद के एक मामले में खजराना निवासी तोहिद रजा का खुलासा हुआ। मामले में पीड़िता ने पुलिस को बताया कि महिला मित्र की जन्मदिन की पार्टी पर तोहिद पुत्र तोफिक रजा से दोस्ती हुई थी। उसने पीड़िता से मोबाइल नंबर ले लिए और दोनों की बातचीत होने लगी। आरोपित ने युवती से कहा था कि उसका नाम राहुल है।
उसने शादी का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिये। कुछ समय बाद पता चला कि आरोपित का असली नाम तोहिद है और लव जिहादी है। उक्त प्रकरण में टीआइ सहर्ष यादव का कहना है कि तोहिद ने पीड़िता का वीडियो बना लिया था, जिसके बाद उसने ब्लैकमेल करना शुरू किया। इंटरनेट पर वीडियो डालने की वह पीड़िता को धमकी भी देता था। उसके विरुद्ध लूट-चोरी के गंभीर मामले दर्ज हैं। वह एमडी ड्रग्स का नशा भी करता है।
यहां पत्नी-पत्नी और वो की एक और झकझोर देने वाली कहानी भी हाल ही में सामने आ चुकी है। एक पति ने पहले पांच पन्नों में अपनी दर्दभरी कहानी लिखी, फिर वीडियो बनाकर रोते हुए बताया कि कैसे उसकी पत्नी जिम में जाने के बाद एक लव जिहादी की चंगुल में फंसी। तंग आकर उसने जहर खा लिया।
उल्लेखनीय है कि इंदौर पुलिस की जांच में सामने आया कि शहर के कुछ कॉल सेंटर, जिम और शिक्षा केंद्रों को आरोपियों ने लव जिहाद की गतिविधियों का अड्डा बना रखा है। यहां मुस्लिम युवक हिंदू नाम से युवतियों से संपर्क करते हैं, फिर उन्हें दुष्कर्म का शिकार बनाते हैं। चौंकाने वाली बात यह सामने आयी है कि इन मुस्लिम युवकों को इस काम में उनके परिवार की महिलाएं भी सहयोग करती नजर आ रही हैं।
विश्व हिन्दू परिषद, हिन्दू जागरण मंच एवं अन्य सनातन धर्म से जुड़े हिन्दू संगठनों का कहना है कि इंदौर में लव जिहाद का बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। हिन्दू नाम रखने से इन इस्लामवादियों की मूल पहचान छिपी रहती है और हिन्दू लड़कियां उनके झांसे में आ जाती हैं। यह सीधे हिन्दू संस्कृति पर भी हमला है। पुलिस इस मामले में सघन जांच अभियान चलाये और अन्य जितने भी इस तरह के रैकेट चल रहे हैं, उनका पर्दाफाश करे। वहीं, इन संगठनों को लगता है कि इस प्रकरण में भी जिस तरह से आरोपियों के मोबाइल से कई आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी बरामद हुए हैं। उसे देखते हुए यह मामला भी एक संगठित गिरोह की साजिश हो सकती है।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं कि लगातार इस प्रकार के मामलों का सामने आना यह दर्शा रहा है कि ये इस्लामिक जिहादी किसी भी कानून से नहीं डरते, इनमें कानून का भय नहीं। यह जानकर घोर आश्चर्य होता है कि लव जिहाद जैसे अपराध को रोकने के लिए मप्र में कठोर कानून धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 लागू है, जो गलत तरीके से मतांतरण को रोकता है। इस कानून के तहत धोखाधड़ी, जबरदस्ती, प्रलोभन या दबाव के जरिए धार्मिक पहचान बदलवाने वालों को सजा और जुमार्ने का प्रावधान है।
फिर भी इस तरह के अपराधों में कमी नहीं आ रही। उनका कहना है कि विश्व हिन्दू परिषद मध्य प्रदेश की सरकार से यह मांग करती हैं जैसा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते दिनों महिला दिवस के अवसर पर बोला भी था कि धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत हम यह प्रावधान कर रहे हैं कि जो लोग मतांतरण करवायेंगे, उनके लिए हमारी सरकार फांसी की सजा का प्रबंध करेगी। मतांतरण और दुराचार जैसी किसी भी व्यवस्था के खिलाफ हमारा संकल्प है कि समाज में ऐसी कुरीतियों को बढ़ावा नहीं दिया जायेगा।
मासूम बेटियों के साथ दुराचार करने वालों के खिलाफ सरकार बहुत सख्त है। इसके लिए पहले से ही फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है, और अब मतांतरण के मामलों में भी यही सजा लागू होगी। तो वे अपनी इस मंशा को जल्द राज्य में लागू करें। हो सकता है फांसी का डर इन जिहादियों के काले कारनामों पर कुछ अंकुश लगा पाये।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का इस मामले में साफ कहना है कि उनकी सरकार जोर-जबरदस्ती या बहला-फुसलाकर दुराचार और मतांतरण करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा, हमारी सरकार ऐसे लोगों को छोड़ने वाली नहीं है। हम किसी भी हालत में इन्हें जिंदगी जीने का अधिकार नहीं देना चाहते। फिलहाल इस प्रकरण में पार्षद अनवर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है, जिसे पुलिस जल्द पकड़ने के लिए कार्रवाई कर रही है, उसके बाद इस सबंध में अन्य राज सामने आ सकेंगे। पुलिस अब ये भी पता लगा रही है कि इस संगठित विरोध के जरिये कितनी हिन्दू युवतियों को देह व्यापार में धकेल दिया गया और इन्होंने कितनी युवतियों का लव जिहाद में फंसाकर अब तक कन्वर्जन करा दिया है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (श्रीगंगानगर)। राजस्थान में शुक्रवार को भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहा और सीमावर्ती शहर गंगानगर में अधिकतम तापमान 49.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने उम्मीद जताई कि शनिवार से राज्य के कई इलाकों में मानसून पूर्व मौसमी गतिविधियां शुरू होने से लोगों को प्रचंड गर्मी से राहत मिलेगी। जयपुर स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, शुक्रवार को गंगानगर में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.9 डिग्री अधिक 49.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम में सबसे अधिक है।
शहर में 14 जून 1934 को अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के मुताबिक, चुरू में अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री, जैसलमेर में 46.9 डिग्री, बीकानेर में 46.4 डिग्री, जोधपुर में 46.3 डिग्री, फलोदी व बाड़मेर में 46.2 डिग्री, पिलानी में 45.4 डिग्री, लूणकरणसर में 45.2 डिग्री, पाली व फतेहपुर में यह 45 डिग्री, चित्तौड़गढ़ में 44.9 डिग्री, संगरिया में 44.6 डिग्री, झुंझुनू में 44.5 डिग्री, नागौर में 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
राजधानी जयपुर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस रहा. मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को उदयपुर, कोटा, जयपुर व भरतपुर संभाग के कुछ भागों में मानसून पूर्व मौसमी गतिविधियों में बढ़ोतरी होने और तापमान में दो से तीन डिग्री गिरावट होने का अनुमान है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न सिर्फ अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करेंगे, बल्कि अगले आम चुनाव में भी सफलता के साथ सरकार का नेतृत्व करेंगे।
श्री नड्डा केंद्र में श्री मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि श्री मोदी के कार्यकाल को लेकर विपक्षी दलों की ओर से बेबुनियाद बातें की जाती हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने बुधवार को घोषणा की है कि अगली जनगणना दो चरणों में पूरी की जायेगी। पहले चरण में देश के पहाड़ी इलाकों मसलन जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की जनगणना का काम 1 अक्टूबर, 2026 तक पूरा किया जायेगा। दूसरा चरण जिसे 1 मार्च, 2027 तक पूरा किया जाना है उसमें देश के बाकी हिस्सों की जनगणना की जायेगी।
जनगणना का काम मूलतया 2021 में होना था। शुरुआत में इसे कोविड-19 महामारी के कारण टाला गया लेकिन हालात सामान्य होने के बाद भी इसमें देरी क्यों होती रही यह स्पष्ट नहीं है। बहरहाल इस बात का स्वागत किया जाना चाहिए कि सरकार ने जनगणना के लिए एक समयसीमा की घोषणा कर दी है। यह जनगणना 16 वर्षों के अंतराल पर होने जा रही है और इसमें स्वतंत्रता के पश्चात पहली बार विस्तृत जाति जनगणना के आंकड़े भी शामिल किये जायेंंगे। इससे पहले अंतिम जाति जनगणना 1931 में की गयी थी।
भारत जैसे तेजी से विकसित होते देश में दशकीय जनगणना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। लंबे अंतराल को देखते हुए 2027 की जनगणना के आंकड़ों की उत्सुकता से प्रतीक्षा होगी। पिछली जनगणना के बाद से देश काफी बदल चुका है। उदाहरण के लिए देश का सकल घरेलू उत्पाद जो 2011 की जनगणना में करीब 1.8 लाख करोड़ डॉलर था उसके 2027 तक 5 लाख करोड़ डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। देश में शहरीकरण की गति भी तेज हुई है।
नीतिगत उद्देश्यों की बात करें तो ताजातरीन आंकड़ों की सख्त आवश्यकता है। जैसा कि सरकार के एक पूर्व सांख्यिकीविद ने इस समाचार पत्र को बताया, कई सर्वेक्षण जिनका इस्तेमाल करके अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन किया जाता है और नीतियां बनायी जाती हैं, वे अब उतने विश्वसनीय नहीं रहे क्योंकि वे यह काम 2011 की जनगणना के आधार पर कर रहे हैं।
कारोबार की बात करें तो जिस बिक्री को ग्रामीण माना जा रहा है और उस मद में डाला जा रहा है उसका कुछ हिस्सा शहरी हो सकता है। ऐसे में जनगणना स्पष्टता लाने में मदद करेगी। इसके अलावा यह जानना भी महत्त्वपूर्ण है कि आबादी का वास्तविक आकार क्या है। इसके बारे में अनुमान है कि यह चीन से अधिक हो चुकी है और हमारा देश दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला मुल्क है।
यह भी संभव है कि जन्मदर घटी हो और वह सर्वेक्षणों में दिए गए संकेतों से काफी कम हो चुकी हो। ऐसे में जनगणना कई अहम सवालों के जवाब देगी और बेहतर जानकारीपरक नीति बनाने में मददगार होगी। आम सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के अलावा 2027 की जनगणना के राजनीतिक असर भी होंगे। जैसा कि हमने ऊपर कहा इसमें जाति के आंकड़े जुटाये जायेंगे।
यह ध्यान देना जरूरी है कि जाति जनगणना 2024 के चुनावों में भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा थी। वास्तविक जनगणना के आंकड़ों के साथ राजनीति में जाति की प्रासंगिकता और बढ़ेगी। इस मामले से राजनीतिक परिपक्वता के साथ निपटना होगा। जाति के आंकड़े आरक्षण बढ़ाने की मांग को मजबूत करेंगे। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल होने की होड़ बढ़ सकती है। इससे उपवर्ग तैयार करने की मांग पैदा बढ़ सकती है। इससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है जिसका प्रबंधन करना होगा।
जनगणना की घोषणा ने परिसीमन की बहस को भी दोबारा जन्म दे दिया है। संविधान में कहा गया है कि लोक सभा क्षेत्रों का पुनसंर्योजन 2026 के बाद पहली जनगणना के आधार पर होना चाहिए। विधायिका में एक तिहाई महिलाओं का आरक्षण भी अगले परिसीमन पर निर्भर है। यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम जनगणना रिपोर्ट कितनी जल्दी उपलब्ध होगी और क्या 2029 के लोक सभा चुनाव के पहले परिसीमन की कवायद पूरा करने के लिए पर्याप्त समय होगा।
अगर 2029 के पहले ऐसा नहीं होता है तो भी राजनीतिक विवाद का एक और मोर्चा खुल सकता है। दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनका प्रतिनिधित्व कम होगा क्योंकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच आबादी में अंतर बढ़ा है। ऐसे में जनगणना जहां बेहतर नीति निर्माण में मदद करेगी वहीं इसके राजनीतिक प्रभावों का भी प्रबंधन करना होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस साल की शुरुआत में महाकुंभ प्रयागराज में था। वहां छोटे से छोटा रेहड़ी वाला भी यूपीआई पेमेंट ले रहा था। एक बार एक रेहड़ी वाले से बातचीत में पता चला कि उसके अकाउंट में एक लाख से ऊपर रुपये की बचत हो गयी है, क्योंकि यूपीआई से आये पेमेंट के अधिकांश हिस्से को वह बचत के रूप में सुरक्षित कर लेता है।
कैश से ही कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। पहले शायद उसके लिए यह संभव नहीं था। यह चमत्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-धन योजना और डिजिटल पेमेंट की क्रांति के कारण संभव हो पाया है। यदि जन-धन योजना में गरीब रेहड़ी वाले का बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस पर न खुलता तो शायद वह कभी बैंक खाता खोलने का सपना नहीं देख पाता।
मोदी सरकार का यह तीसरा कार्यकाल चल रहा है। 9 जून को सरकार के 11 साल पूरे हो गये हैं। यह जनता का विश्वास है, जो लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी सत्ता में बने हुए हैं। पिछले 11 सालों में दुनिया ने भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति को देखा है, लेकिन गरीब कल्याण को लेकर नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसी योजनाएं शुरू की, जो युग परिवर्तनकारी हैं।
अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री बनने के चंद महीने बाद नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना की शुरुआत की। इसमें जीरो बैलेंस में बैंक खाता खोला गया। शुरुआत में विपक्ष ने इस योजना को लेकर मोदी सरकार का उपहास उड़ाया, लेकिन योजना के तहत 55 करोड़ से ऊपर खाते खुले, जिनमें ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्र के लगभग 36.63 करोड़ खाते हैं। इन खातों में 2.30 लाख करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। अच्छी बात है कि 55.6% यानी 29.37 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
यह भी सच है कि दिसंबर 2023 में 20% खाता निष्क्रिय थे। हालांकि, निष्क्रिय खातों में भी 12,779 करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जब क्रांति आई तो सबसे बड़ा गेम चेंजर यूपीआई पेमेंट बना। यूपीआई से रुपये सीधे बैंक खाते में जाता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में बैंक खाते न खोले गए होते तो शायद यूपीआई पेमेंट को भी सफल नहीं किया जा सकता था।
मुझे याद है, जब मैं किशोर था और उत्तर प्रदेश में अपने गांव जाता था, तब गांवों के अधिकांश लोग खुले में शौच के लिए जाया करते थे। महिलाओं के लिए तो शौच जाने का एक निश्चित समय निर्धारित था। या वो अलसुबह अंधेरे में या शाम को सूरज छिपने के बाद शौच के लिए खेतों में जा सकती थीं। इससे ज्यादा पीड़ादायक उनके जीवन में कुछ नहीं था।
ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार पहली बार स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजना लेकर आई, लेकिन ईमानदारी से किसी ने इस मिशन को पूरा किया तो वह यही सरकार है। 2 अक्टूबर 2014 को नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। आज 9.63 करोड़ से अधिक शौचालय बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। यह एक ऐसा कदम है, जिसने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत के सिर से एक कलंक भी मिट गया।
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