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Published / 2025-07-08 21:19:48
भूकंप के झटके से हिली उत्तराखंड की धरती

भारत के इस राज्य में भूकंप के झटकों से दहशत, धरती कांपी, लोग घरों से बाहर निकले 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिÞले में मंगलवार, 8 जुलाई को भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। दोपहर 1 बजकर 7 मिनट पर आए इस भूकंप की पुष्टि राज्य के आपदा कंट्रोल रूम और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र दोनों ने की है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गयी और इसका केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे था। 

अचानक हिले धरती के कदम, लोग घबराकर घरों से बाहर निकले 

भूकंप के झटके कुछ ही क्षणों के लिए महसूस हुए, लेकिन इतने थे कि कई लोग डर के मारे घरों और इमारतों से बाहर निकल आये। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस होने की पुष्टि की और कई जगहों से छोटे स्तर की कंपन की रिपोर्ट मिली। राहत की बात यह है कि समाचार लिखे जाने तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं आयी है।

Published / 2025-07-05 20:18:15
दलाई लामा से रिजिजू ने लिया आशीर्वाद

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बती धार्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया। 

रिजिजू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा कि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के मैकलियोड गंज स्थित मुख्य मंदिर (त्सुकग्लागखांग) में परम पावन चौदहवें दलाई लामा के दीर्घायु प्रार्थना समारोह में शामिल हुआ। इस पवित्र अवसर पर उनका आशीर्वाद पाकर अभिभूत हूं। 

उन्होंने कहा कि परम पावन दलाई लामा ने अपनी 90वीं जयंती से पहले धर्मशाला में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह में आशीर्वाद दिया। परम पावन ने अवलोकितेश्वर के आशीर्वाद को महसूस करने का उल्लेख किया और अगले 30-40 वर्षों तक लोगों की सेवा करते रहने की अपनी मंशा व्यक्त की।

Published / 2025-07-04 13:09:29
अंतरिक्ष में अब अपनी धाक जमा रहा भारत : मोदी

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारत अपनी स्पेस सफलताओं को विश्व के साथ साझा कर रहा है

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रशंसा की। उन्होंने चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर सफल लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति बिंदु रखे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, इस समय एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद है और हम गगनयान नाम के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहे हैं। जल्द ही एक भारतीय चंद्रमा पर कदम रखेगा और भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन भी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अपनी अंतरिक्ष सफलताओं को विश्व के साथ साझा कर रहा है।

मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में बसे भारतीय समुदाय की भूमिका की भी सराहना की और उन्हें राष्ट्रदूत बताया। उन्होंने कहा, हम अपने प्रवासी भारतीयों की ताकत और समर्थन को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। दुनिया भर में 3.5 करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीय भारत की संस्कृति, मूल्यों और विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रधानमंत्री ने पिछले प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसमें त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने बताया कि भारत गिरमिटिया समुदाय के इतिहास और विरासत को संरक्षित करने के लिए विभिन्न पहलों पर काम कर रहा है।

मोदी ने कहा, हम गिरमिटिया समुदाय के गांवों और शहरों का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं जहां से उनके पूर्वज भारत से गए थे। इसके साथ ही, हम विश्व गिरमिटिया सम्मेलन आयोजित करने की योजना भी बना रहे हैं, जिससे हमारे ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्ते और मजबूत होंगे।

Published / 2025-07-02 18:36:09
पद्म पुरस्कारों के लिए 31 तक होगा रजिस्ट्रेशन

  • पद्म पुरस्कार के लिए 31 जुलाई तक होंगे नामांकन

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। अगले वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्‍कार-2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है।

सरकार की ओर से आज जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार पद्म पुरस्‍कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्‍ट और असाधारण उपलब्धियों/ सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। 

जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्‍सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्‍य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्‍कारों के पात्र नहीं हैं।

Published / 2025-06-28 21:04:04
पीएम मोदी ने की शुभांशु से बात, दोनों हुए गदगद

पीएम ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गये शुभांशु से की बात

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की, जो इन दिनों नासा के एक्सिओम 4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) की यात्रा पर हैं। शुभांशु शुक्ला बुधवार को ऐतिहासिक यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हुए, जो 41 साल के अंतराल के बाद भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान में वापसी का प्रतीक है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु से कहा, आप आज मातृभूमि से, भारत भूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतवासियों के दिलों के सबसे करीब हैं। आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यात्रा नये युग का शुभ आरंभ भी है। इस समय बात हम दोनों कर रहे हैं, लेकिन मेरे साथ 140 भारतवासियों की भावनाएं भी हैं। मेरी आवाज में सभी भारतीयों का उत्साह और उमंग शामिल है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मैं ज्यादा समय नहीं ले रहा हूं, सबसे पहले तो ये बताइये कि वहां सब कुशल मंगल है, आपकी तबीयत ठीक है? 

जवाब में ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने कहा, जी प्रधानमंत्री जी, आपका और 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं, सुरक्षित हूं, आप सबके आशीर्वाद और प्यार की वजह से। बहुत अच्छा लग रहा है। यह बहुत नया अनुभव है। कहीं न कहीं बहुत सारी चीजें ऐसी हो रही हैं, जो दर्शाती हैं कि मैं और मेरे जैसे लोग देश में इस दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ये जो मेरी यात्रा है, ये पृथ्वी से आर्बिट की 400 किलोमीटर की छोटी सी यात्रा है, ये सिर्फ मेरी नहीं है, बल्कि मेरे देश की भी यात्रा है। 

ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने आगे कहा, मैं जब छोटा था। मैं कभी सोच नहीं पाया कि मैं अंतरिक्ष यात्री बन पाऊंगा। लेकिन मुझे लगता है कि आपके नेतृत्व में आज का भारत ये मौका देता है और उन सपनों को भी साकार करने का मौका देता है। ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं बहुत गर्व महसूस कर रहा हूं कि मैं यहां अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पा रहा हूं। 

इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा, शुभ, आप दूर अंतरिक्ष में हैं, जहां गुरुत्वाकर्षण बल न के बराबर है। पर हर भारतीय देख रहा है कि आप कितने डाउन टू अर्थ हैं। आप जो गाजर का हलवा ले गये, क्या उसे अपने साथियों को खिलाया? 

ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने जवाब में कहा, जी प्रधानमंत्री जी, ये कुछ चीजें मैं अपने देश की खाने की लेकर आया था, जैसे गाजर का हलवा, मूंगदाल का हलवा और आमरस। मैं चाहता था कि ये बाकी देशों से मेरे साथी हैं, वो भी इसका स्वाद लें। वो भी भारत की समृद्ध विरासत का अनुभव करें। हम सभी ने बैठकर साथ में इसका स्वाद लिया। सबको बहुत पसंद आया। 

प्रधानमंत्री ने पूछा, परिक्रमा करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है। आपको तो धरती माता की परिक्रमा करने का सौभाग्य मिला है। अभी आप धरती के ऊपर किस भाग से गुजर रहे होंगे? ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने जवाब में कहा, इस समय इसकी जानकारी मेरे पास उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन थोड़ी देर पहले मैं खिड़की से बाहर देख रहा था तो हम लोग हवाई के ऊपर से गुजर रहे थे और हम दिन में 16 बार परिक्रम करते हैं। 

16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त हम देखते हैं। यह बहुत ही अचंभित कर देने वाली प्रक्रिया है। इस समय 28 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रहे हैं आपसे बात करते हुए। ये गति पता नहीं चलती क्योंकि हम अंदर हैं। लेकिन ये गति दिखाती है कि हमारा देश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने आगे पूछा, अंतरिक्ष की विशालता देखकर आपको सबसे पहले क्या विचार आया? 

इस पर शुभांशु ने कहा, सच बोलूं तो जब पहली बार हम अंतरिक्ष में पहुंचे तो पहला नजारा पृथ्वी का था और पृथ्वी को देखकर पहला ख्याल जो मन में आया वो ये था कि पृथ्वी एक दिखती है, मतलब बाहर से कोई सीमा रेखा नहीं दिखाई देती। दूसरी चीज ये थी जब भारत को देखा तो मानचित्र के बारे में जो हम पढ़ते हैं, जो आकार होता है, वह सही नहीं होता है। भारत सच में बहुत भव्य दिखता है। बहुत बड़ा दिखता है। जितना हम मानचित्र पर देखते हैं, उससे काफी बड़ा।

Published / 2025-06-28 18:24:35
भारत की विश्वदृष्टि हजारों वर्षों से अमर : पीएम

भारत के विचार, दार्शनिक सोच और विश्वदृष्टि हजारों वर्षों से अमर है: मोदी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यता बताते हुए कहा है कि यह देश हजारों वर्षों से अमर है क्योंकि इसके विचार, दार्शनिक सोच और विश्वदृष्टि शाश्वत हैं। 

श्री मोदी ने शनिवार को यहां जाने-माने जैन संत आचार्य विद्यानंद महाराज के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, हमारा भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवंत सभ्यता है। हम हजारों वर्षों से अमर हैं, क्योंकि हमारे विचार अमर हैं, हमारा चिंतन अमर है, हमारा दर्शन अमर है। और इस दर्शन के स्रोत हैं- हमारे ऋषि, मुनि, महर्षि, संत और आचार्य! आचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज भारत की इसी पुरातन परंपरा के आधुनिक प्रकाश स्तम्भ रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज राष्ट्र अपनी आध्यात्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण अवसर देख रहा है। उन्होंने कहा कि आज का दिन एक अन्य कारण से भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि 28 जून 1987 को श्री विद्यानंद मुनिराज को औपचारिक रूप से आचार्य की उपाधि प्रदान की गयी थी। उन्होंने कहा कि यह महज एक उपाधि नहीं बल्कि एक पवित्र धारा की शुरुआत थी जिसने जैन परंपरा को विचार, अनुशासन और करुणा से जोड़ा है। 

श्री मोदी ने आचार्य को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह शताब्दी समारोह कोई साधारण आयोजन नहीं है, यह एक युग और एक महान तपस्वी के जीवन की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए विशेष स्मारक सिक्के और डाक टिकट जारी किए गये हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज उन्हें धर्म चक्रवर्ती की उपाधि प्रदान की गई है और वह इसे विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर मां भारती के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं विशेष रूप से आचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी का अभिनंदन करता हूं, उन्हें प्रणाम करता हूं। आपके मार्गदर्शन में आज करोड़ों अनुयायी पूज्य गुरुदेव के बताये रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। 

आज इस अवसर पर आपने मुझे धर्म चक्रवर्ती की उपाधि देने का जो निर्णय लिया है, मैं खुद को इसके योग्य नहीं समझता, लेकिन हमारा संस्कार है कि हमें संतों से जो कुछ मिलता है, उसे प्रसाद समझकर स्वीकार किया जाता हैं। और इसीलिए, मैं आपके इस प्रसाद को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं और मां भारती के चरणों में समर्पित करता हूं। 

श्री मोदी ने कहा कि आचार्य ने अपने साहित्य के जरिए और भजनों के माध्यम से प्राचीन प्राकृत भाषा का पुनरोद्धार किया। यह भगवान महावीर के उपदेशों की भाषा है। इसी भाषा में पूरा मूल जैन आगम रचा गया। लेकिन संस्कृति की उपेक्षा करने वालों के कारण यह भाषा सामान्य प्रयोग से बाहर होने लगी थी।

इसे देखते हुए सरकार ने आचार्य श्री जैसे संतों के प्रयासों को देश का प्रयास बनाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर में सरकार ने प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए सरकार प्राचीन पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण का अभियान भी चला रही है। इसमें बहुत बड़ी संख्या में जैन धर्मग्रन्थों और आचार्यों से जुड़ी पांडुलिपियां शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा में भी मातृभाषा को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि वह लालकिले से राष्ट्र के नाम संबोधन में कह चुके हैं, हमें देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्ति दिलानी है। हमें विकास और विरासत को एक साथ लेकर आगे बढ़ना है। इसी संकल्प को केंद्र में रखकर, हम भारत के सांस्कृतिक स्थलों का, तीर्थस्थानों का भी विकास कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार ने भगवान महावीर के दो हजार पांच सौ 50वें निर्वाण महोत्सव का व्यापक स्तर पर आयोजन किया था। सांस्कृतिक धरोहर और उसे अधिक समृद्ध बनाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं। इनके पीछे मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास है।

Published / 2025-06-26 22:02:42
केन्या प्रवास के दौरान प्रवासी भारतीयों के साथ पीएम मोदी ने किया आत्मीय संवाद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केन्या प्रवास के दौरान नैरोबी में प्रवासी भारतीयों के साथ आत्मीय संवाद का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दुनिया भर में रह रहे भारतवंशियों के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को इनके साथ भी साझा किया। आतंकवाद को लेकर भारत के जीरो टॉलरेंस की स्पष्ट नीति और अटूट प्रतिबद्धता से इन्हें अवगत कराया। 

प्रधानमंत्री के नये भारत के लक्ष्य और दृष्टिकोण को रेखांकित किया और भारत की परिवर्तनकारी विकास यात्रा और उपलब्धियों से इन्हें अवगत कराया। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और इसके उभरते वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डाला। #विकसितभारत2047 सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि दुनियाभर में रह रहे हर भारतीय का संकल्प है। इस संकल्प को साकार करने के लिए इनसे भी सहयोग का आग्रह किया।   

कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से यह स्पष्ट दिखा कि भारत से इनका जुड़ाव और जड़ें, दोनों ही भावनात्मक रूप से मजबूत हैं।  
इस संवाद कार्यक्रम ने केन्या में भारतीय समुदाय के भारत के साथ स्थायी सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों को भी जीवंतता प्रदान की। मौके पर केन्या में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सुशील प्रसाद, उच्चायोग के अधिकारी, केन्या में प्रतिष्ठित भारतीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Published / 2025-06-25 20:36:50
देश के उपराष्ट्रपति धनखड़ की तबीयत बिगड़ी

डॉ महेंद्र सिंह पाल को गले लगाकर फूट-फूटकर रोये 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बुधवार को उत्तराखंड दौरे के दौरान भावनात्मक क्षणों में स्वास्थ्य बिगड़ गया। हल्द्वानी के आर्मी हेलीपैड पर स्वागत के बाद वह कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने 1989 में संसद में साथ रहे डॉ महेंद्र सिंह पाल का नाम बार-बार लिया। 

जैसे ही मंच से उतरे, उन्होंने डॉ पाल को गले लगा लिया। दोनों के बीच पुरानी यादें साझा हुईं और इसी भावुक क्षण में दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे। भावनाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा कि डॉ पाल के गले लगते ही उपराष्ट्रपति खुद भी रोने लगे। यह दृश्य उपस्थित जनसमूह के लिए भी भावनात्मक क्षण बन गया। हालांकि, इसी दौरान उपराष्ट्रपति की तबीयत अचानक बिगड़ गयी। 

वहां मौजूद चिकित्सकीय दल ने तुरंत उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद धनखड़ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह के साथ राजभवन के लिए रवाना हुए। उपराष्ट्रपति का स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और चिकित्सकों की निगरानी में है। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाएं और भी सख्त कर दी गयी हैं। 

मुख्य बिंदु 

  • कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ महेंद्र पाल से मिलते ही भावुक हुए धनखड़ 
  • मंच से उतरकर पांच मिनट तक बातचीत की, फिर दोनों रो पड़े 
  • भावनात्मक क्षण के बाद उपराष्ट्रपति की तबीयत बिगड़ी 
  • डॉक्टरों ने मौके पर उपचार किया, फिर राजभवन रवाना हुए 

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है? 

इस घटना ने यह दिखाया कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी भावनाओं से अछूते नहीं होते। राजनीति के कठिन रास्ते पर पुराने साथियों की मुलाकात ने मानवीय संवेदनाओं को उजागर कर दिया।

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