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Published / 2022-02-16 02:38:37
मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी का निधन

प्रसिद्ध भारतीय गायक और संगीतकार बप्पी लहरी का निधन हो गया है। आज मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। बप्पी दा के नाम से मशहूर आलोकेश लाहिड़ी महज 69 उम्र के थे। उन्होंने भारतीय सिनेमा में संश्लेषित डिस्को संगीत के उपयोग को लोकप्रिय बनाया था।

Published / 2022-02-15 18:22:20
22,842 करोड़ के बैंक घोटाले में आरोपियों के खिलाफ लुक आउट नोटिस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के सबसे बड़े ABG बैंक घोटाले में सीबीआई ने मंगलवार को आरोपियों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। 22842 करोड़ रुपये के इस घोटाले से जुड़े आरोपी अब देश छोड़कर नहीं जा सकते। सीबीआई का आधिकारिक तौर पर कहना है कि उसे इस मामले की जांच के दौरान पता चला है कि यह घोटाला साल 2005 से शुरू हो गया था और साल 2012 तक यह घोटाला लगातार चलता रहा। सीबीआई ने कहा है कि बैंकों ने साल 2013 में इस खाते का NPA होने के बाद फॉरेंसिक ऑडिट कराया था, जो कई सालों तक चला और उसके बाद सीबीआई को बैंक द्वारा शिकायत दी गई। इस मामले की एफआईआर में पांचों आरोपियों को शामिल किया गया है, जिनके खिलाफ एजेंसी ने लुक आउट सर्कुलर जारी कराया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी शिकायत में गुजरात की एबीजी शिपयार्ड कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों को आरोपी बताया है।

Published / 2022-02-15 18:01:21
कोलकाता : सुप्रसिद्ध बंगाली गायिका संध्या मुखर्जी का निधन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रसिद्ध बंगाली गायिका संध्या मुखर्जी का कोलकाता, पश्चिम बंगाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यहां अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 27 जनवरी को संध्या मुखर्जी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। उन्होंने सांस फूलने की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें कोलकाता ट्रैफिक पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दक्षिण कोलकाता स्थित आवास से सरकारी एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, बाथरूम में फिसलने के बाद गायिका संध्या मुखर्जी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। उनके दोनों फेफड़ों में संक्रमण पाया गया था। बाथरूम में फिसलने के बाद उन्हें बुखार भी आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। "बंगा विभूषण" से सम्मानित और सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाली संध्या मुखर्जी ने हाल ही में पद्मश्री पुरस्कार के प्रस्ताव से इनकार कर दिया था। बताया गया कि जब केंद्र सरकार के अधिकारियों ने उनकी सहमति के लिए टेलीफोन पर उनसे संपर्क किया था, तो गायिका ने यह सम्मान लेने से मना कर दिया था। एक शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय गायिका मुखर्जी ने कई बंगाली फिल्मों और कई हिंदी फिल्मों अपनी आवाज दी थी। उन्होंने एसडी बर्मन, मदन मोहन, नौशाद, अनिल विश्वास और सलिल चौधरी सहित प्रमुख संगीत निर्देशकों के साथ भी काम किया था।

Published / 2022-02-15 15:09:10
रूस-यूक्रेन जंग से तेल की कीमतों में लगेगी आग, चरम पर होगी महंगाई...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। दोनों देशों में संघर्ष की संभावनाओं के मद्देनजर कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खतरे को देखते हुए कीमतों में पिछले सात वर्षो में उच्च बढ़ोतरी देखी गई है जिससे महंगाई दरों में इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ब्लूमबर्ग में प्रकाशित एक रिपोर्ट की माने, तो यूक्रेन से जंग या फिर अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध की सूरत में गैस, धातु, खाद्य पदार्थों सहित कई चीजों की कीमतें आसमान छू सकती हैं और नतीजतन यूरोप के साथ पूरी दुनिया को एक बड़े संकट से गुजरना पड़ेगा। भारत में बढ़ सकती है महंगाई : कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी ने महंगाई की चिंता को भी बढ़ा दिया है। यह रुख भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अपनी कच्चे तेल संबंधी आवश्यकताओं पर विदेशी आयात पर अधिक निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में इजाफा होने से देश में घरेलू बाजार में तेल कीमतों में बढ़ोतरी होने से इसका महंगाई पर सीधा असर पड़ेगा। तेल की आसमान छूती कीमत : रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने से यह लगभग 95 डालर प्रति बैरल तक हो गई है जिससे अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ब्रिटेन में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है और दोनों मुल्कों में जंग हुई, तो यह कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। इसके साथ युद्ध की स्थिति में दूसरे देशों को अपने व्यापार मार्ग में बदलाव करना होगा, जिससे महंगाई में और इजाफा होने की गुंजाइश है। गैस पर भी मंडराया संकट : रूस और यूक्रेन के बीच संभावित युद्ध का असर गैस बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। यूरोप के गैस बाजार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कीमतों में बढ़ोतरी का आलम यह है कि पिछले करीब 1 साल में गैस के दाम में पांच गुना तक इजाफा हुआ है। अगर युद्ध होता है, तो यूरोपीय देशों को भेजे जाने वाली गैस आपूर्ति में रुकावट पैदा हो सकती है और ऐसा इसलिए क्योंकि इसका करीब एक-तिहाई हिस्सा यूक्रेन के रास्ते ही पहुंचाया जाता है। युद्ध की हालत में लागू प्रतिबंधों की वजह से व्यापार रुक सकता है और ऐसे में गैस कि किल्लत लाजिमी है। क्यों है यूक्रेन और रूस में तनाव, क्या है इसकी वजह : 1960 के कोल्ड वॉर के बाद ये पहली बार है जब परमाणु शक्तियों से लैस रूस और अमेरिका युद्ध के कगार पर खड़े हैं। पूरी दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका गहरा रही है। बता दें कि यूक्रेन एक जमाने में रूसी साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था। फिर सोवियत संघ (वररफ) बना, तब भी वह उसमें शामिल रहा, लेकिन वररफ के विघटन के बाद यूक्रेन ने 1991 में खुद को आजाद देश घोषित कर दिया। इसके बाद उसने रूस के बजाय अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से रिश्ते मजबूत किए।

Published / 2022-02-15 12:48:47
हैकिंग : संसद टीवी के यूट्यूब चैनल नाम हुआ एथेरियम क्रिप्टोकरेंसी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूट्यूब पर संसद टीवी के खाते को कथित तौर पर यूट्यूब के सामुदायिक दिशा-निर्देशों के उल्लंघन करने के चलते बंद कर दिया गया है। यूट्यूब के इस चैनल पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें चल रही हैं कि खाते को हैक कर उसका नाम बदलकर एथेरियम रख दिया गया था, जो एक क्रिप्टो मुद्रा है। इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गूगल के सामने इस मुद्दे को उठाया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि हैकिंग जैसा कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि गूगल से शिकायत की गई है और वे उसे देख रहे हैं। संसद टीवी के यूट्यूब खाते के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा किये जा रहे हैं जिस पर लिखा कि इस खाते को यूट्यूब के सामुदायिक दिशा निदेर्शों के उल्लंघन के चलते बंद कर दिया गया है।

Published / 2022-02-15 11:59:11
रूस-यूक्रेन तनातनी का भारत पर असर...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब नए वैश्विक जगत में सोवियत संघ बिखर चुका है और उसी के दो पुराने साथी आमने-सामने है। सोवियत संघ की जगह अब चीन एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा है, जो अमेरिका को चुनौती दे रहा है। अगर रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी बढ़ती है, तो उसका असर पूरी दुनिया में होगा और दुनिया एक बार फिर खेमेबाजी में बंट जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 93.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके है। रूस और यूक्रेन में तनातनी का भारत पर क्या असर पड़ रहा है? सरल शब्दों में समझिए क्या है यह विवाद और क्या है इसकी जड़? क्या है नाटो और क्या करता है यह? अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के साथ है और चीन रूस के साथ जा सकता है तो भारत किसके साथ रहेगा? रूस और यूक्रेन युद्ध के मुहाने पर हैं। कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है। रूस, यूक्रेन से 28 गुना बड़ा है, जिसका क्षेत्रफल 1 करोड़ 70 लाख वर्ग किलोमीटर है। यानी रूस भारत से करीब 5 गुना बड़ा है। यूक्रेन, रूस की तुलना में छोटा है और भारत यूक्रेन से तीन गुना बड़ा कहा जा सकता है। आम बोलचाल में लोग सोवियत संघ को रूस कहा करते थे, लेकिन 1991 में सोवियत संघ के 15 खण्डों में बंट जाने के बाद रूस और यूक्रेन अब एक अलग देश है। यूक्रेन में करीब 20 हज़ार भारतीय हैं। अमेरिका अपने नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकाल चुका है, लेकिन भारत ने अपने नागरिकों के लिए अभी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है। रूसी सेना ने यूक्रेन को 9 ठिकानों पर घेर रखा है। यूक्रेन की राजधानी कीव तक रूसी सेना पहुंच सकती है। इसलिए अमेरिका यूक्रेन की मदद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सेना अब तक कुल 10 विमान हथियारों की खेप यूक्रेन पहुंचा चुका है। लगभग 400 टन गोला बारूद इन हथियारों में शामिल है। अभी लगभग 5 गुना अमेरिकी मदद और पहुंचनी है। 26 दिसम्बर, 1991 को सोवियत संघ का विघटन हो गया। सोवियत संघ के टूटने से जो 15 देश बने थे, उनमें रूस और यूक्रेन पड़ोसी देश थे। विघटन के 23 साल बाद रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया पर हमला किया और उसे अपने देश में मिला लिया। तभी से यूक्रेन और रूस में तनातनी जारी है। रूस की आबादी करीब 15 करोड़ है और यूक्रेन करीब 4.5 करोड़ का देश। दोनों ही देश तेल और गैस के मामले में बहुत समृद्ध है। रूस के गैस भंडार के 70 प्रतिशत हिस्से पर वहां की सरकार का कब्जा है और रूस उसमें से बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस सप्लाई करता है। अप्रैल 2021 में रूस ने तेल और गैस की सप्लाई में कटौती कर दी। जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया, तब यूक्रेन को लगने लगा कि कहीं ऐसा न हो कि रूस पूरे यूक्रेन को ही अपने देश में मिला लें। इसके जवाब में यूक्रेन ने नाटो से हाथ मिला लिया। नाटो यानी नार्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन, जो एक सैन्य गठबंधन है। इस संगठन का एक ही लक्ष्य है रूस और उसके समर्थकों को बाहर रखो। अमेरिका और उसके सहयोगियों को अंदर रखो। जर्मनी और उसके मित्रों को जमीन के नीचे रखो। अभी इस संगठन में दुनिया के 30 देश है और यह संगठन पुराने सोवियत संघ और साम्यवादी व्यवस्था के खिलाफ बना था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब जापान आत्मसमर्पण करने को तैयार था, लेकिन फिर भी अमेरिका ने जापान पर दो बार परमाणु बम बरसाए, इससे सोवियत संघ खासा खफा हुआ, क्योंकि अमेरिका ने यह बात दुनिया को बताई नहीं थी कि उसके पास जो परमाणु बम है, उसका उपयोग वह विश्व युद्ध में कर सकता है। उसके बाद ही सोवियत संघ और अमेरिका की राहें न केवल अलग-अलग हुईं, बल्कि उनमें प्रतिस्पर्धा भी हो गई। मामला चाहे अंतरिक्ष में जाने का हो या ओलंपिक में पदक लाने का। दोनों ही देशों की प्रतिस्पर्धा पूरी दुनिया में चल रही थी। दुनिया भी उस वक्त सोवियत संघ और अमेरिका के खेमे में बंटी हुई थी। अब नए वैश्विक जगत में सोवियत संघ बिखर चुका है और उसी के दो पुराने साथी आमने-सामने है। सोवियत संघ की जगह अब चीन एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा है, जो अमेरिका को चुनौती दे रहा है। अगर रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी बढ़ती है, तो उसका असर पूरी दुनिया में होगा और दुनिया एक बार फिर खेमेबाजी में बंट जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 93.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुके हैं, जो कुछ समय पहले तक इसके आधे ही थे। युद्ध हुआ, तो कच्चे तेल के दाम और बढ़ सकते हैं और दुनिया इससे प्रभावित हो सकती है। भारत फिलहाल दोनों ही देशों से दोस्ताना संबंध बनाए हुए हैं। अगर इन दोनों देशों में टकराव हुआ, तो भारत को किसी एक के पाले में जाना पड़ेगा। भारतीय कूटनीति इसकी इजाजत नहीं देती। भारत के लिए निष्पक्ष रहना सबसे अच्छी स्थिति हो सकती है, लेकिन भारत की निष्पक्षता ने अमेरिका की त्यौरियां चढ़ा दी है। भारत के लिए मुश्किल यह भी है कि वह अपनी सैन्य जरूरतों का 55 प्रतिशत सामान रूस से आयात करता है। एस 400 मिसाइल सिस्टम देने के लिए भारत रूस से संपर्क साधे हुए है और अमेरिका इस कोशिश में है कि भारत इस प्रस्तावित सोवियत खरीदारी से दूर रहे। भारत के लिए एक और मुश्किल यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के भी मित्र हैं और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भी। अमेरिका के लिए मुश्किल यह है कि अगर वह रूस पर दबाव बनाएगा, तो चीन रूस के करीब पहुंच सकता है और रूस तथा चीन जैसी महाशक्तियां कोई नया बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं। भारत अगर अमेरिका का समर्थन करता है, तो उसका असर रूस से उसके रिश्ते पर पड़ेगा। भारत और चीन में लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है और रूस अभी तक निष्पक्ष है। अगर भारत अमेरिका का पक्ष लेता है, तो हो सकता है कि रूस चीन का पक्ष लेने लगे। सीधे-सीधे शब्दों में यह कहें कि अगर भारत को चीन का सामना करना है, तो वह अमेरिका की अनदेखी नहीं कर सकता। फिलहाल भारत "रुको और देखो" की नीति का पालन कर रहा है। भारत चाहता है कि रूस आक्रामक रवैया नहीं अपनाए। जब रूस ने 2014 के शुरू में क्रीमिया पर कब्जा किया था, तब भारत में यूपीए की सरकार थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उस वक्त इसका विरोध किया था। 2020 में यूक्रेन ने क्रीमिया में मानव अधिकारों के उल्लंघन का मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया, तब भारत ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया था। अब कहा जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति कभी भी यूक्रेन पर हमले का आदेश दे सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो दुनिया के कई देश रूस पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगा देंगे। अमेरिका इस तरह के प्रतिबंधों को लगाने की अगुवाई करेगा। अगर अमेरिकी समर्थक देश रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो रूस उन प्रतिबंधों के खिलाफ चीन की मदद लेगा और चीन से अपना कारोबार बढ़ा लेगा। भारत न तो रूस के खिलाफ जा सकता है और न ही अमेरिका के। अभी तक भारत का रूख यही है कि वह दोनों देशों के बीच टकराव से दूर रहेगा। भारत को यह भी देखना है कि अगर क्रीमिया में कथित मानव अधिकारों की बात होती है, तो कुछ देश भारत के कुछ हिस्सों में भी मानव अधिकारों के मुद्दे को लेकर बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं। चीन में हो रहे विंटर ओलंपिक में भारत ने हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन खेलों के बहाने ही सही, चीन की यात्रा पर चले गए। उन्होंने वहां चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात की। पाकिस्तान ने भी इस मौके का फायदा उठाया और प्रधानमंत्री इमरान खान अपने 7 मंत्रियों को लेकर इस खेल आयोजन में पहुंच गए। सबसे मजेदार बात यह रही कि पाकिस्तान की तरफ से केवल 1 ही खिलाड़ी चीन में हुए विंटर ओलंपिक्स में शामिल हुआ था और इमरान खान सहित 8 मंत्री चीन पहुंच चुके थे। जाहिर है यह सभी वहां अपनी रणनीति के तहत गए थे। पाकिस्तान का उद्देश्य चीन से नजदीकी पाना रहा होगा। जो भी हो भारत चाहे या न चाहे रूस और यूक्रेन के बीच अगर युद्ध होता है, तो इससे हमारी परेशानी बढ़ेगी ही।

Published / 2022-02-15 07:06:02
कोरोना : देशभर में 30 हजार से कम लोग नए संक्रमित, 347 की मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में बीते एक सप्ताह से कोरोना महामारी बेदम होती दिख रही है। संक्रमितों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी मंगलवार के आंकड़े के अनुसार बीते 24 घंटों में कोरोना के 27,409 मामले सामने आए हैं जो कि शनिवार के आंकड़ों से लगभग 25 फीसदी कम हैं। इस दौरान 347 लोगों की मौत भी हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार देश में अब 4.23 (4,23,127) सक्रिय मामले बचे हैं। वहीं अब तक स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 4.17 करोड़ हो गई है। अब तक कुल 75.30 करोड़ से अधिक सैंपल टेस्ट किए जा चुके भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत में कल कोरोना वायरस के लिए 12 लाख 29 हजार 536 सैंपल टेस्ट किए गए। वहीं देश में महामारी के शुरुआत से लेकर अब तक कुल 75,30,33,302 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। कोरोना वैक्सीनेशन का आंकड़ा 173 करोड़ के पार : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देशभर में अब तक कुल 173 करोड़, 42 लाख 62 हजार 440 कोरोना वैक्सीन के डोज दी जा चुकी हैं।

Published / 2022-02-15 02:41:08
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बतायी हमले की तारीख, अपने नागरिकों से अमेरिका की अपील- तुरंत देश छोड़ें

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यूक्रेन से लगती सीमा पर रूस ने एक लाख नहीं बल्कि 1.30 लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं। अमेरिका ने यह चेतावनी भी दी कि रूस इसी सप्ताह यूक्रेन पर हमला कर सकता है। इसे देखते हुए कुछ विमानन कंपनियों ने यूक्रेन की राजधानी कीव के लिए अपनी उड़ानें भी रद्द कर दी हैं। वहीं नाटो देशों ने हथियारों की नई खेप भी रूस से मुकाबले को भेजी है। रूस द्वारा यूक्रेन के तीन तरफ से युद्धाभ्यास के दौरान बड़े बम गिराने की तैयारी की खबरों के बीच अमेरिका ने अपने चार बी-52 बॉम्बर लड़ाकू विमानों को ब्रिटेन में तैनात कर दिया है। इन विमानों ने परमाणु बम से लैस होकर भूमध्य सागर में यूक्रेन सीमा के आसपास उड़ान भी भरी है। द ड्राइव की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बमवर्षक नॉर्थ डकोटा से ब्रिटेन पहुंचे हैं और आगामी 3 सप्ताह तक यहीं बने रहेंगे। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से करीब एक घंटे तक बातचीत की। बाद में उनके सहयोगियों ने बताया कि जेलेंस्की ने बाइडन से कहा कि यूक्रेन के लोग रूसी सेना की ओर से संभावित हमले के मद्दे नजर भरोसेमंद संरक्षण में हैं। व्हाइट हाउस ने कहा है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि रूस के हमले को रोकने के लिए कूटनीति और निवारण, दोनों उपाय किए जाएं। अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा : इस गहराते तनाव के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि यूक्रेन सीमा पर नाटकीय रूप से रूसी सेना की तैनाती को देखते हुए हमने कीव से अपने दूतावास को अस्थायी रूप से ल्वीव से संचालित करने का फैसला लिया है। इसकी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि हम सभी अमेरिकी नागरिकों से तुरंत यूक्रेन छोड़ने की अपील करते हैं। हालांकि पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका अब भी नहीं मानता कि पुतिन ने आक्रमण करने का फैसला किया है, लेकिन संभव है कि वह बिना किसी चेतावनी के ऐसा करें। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बताई हमले की तारीख : इधर, इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट से तनाव के बादलों को और हवा दे दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा- 16 फरवरी रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले का दिन होगा। जेलेंस्की ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि वह बातचीत के माध्यम से हर तरह के विवाद को सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें बताया गया है कि 16 फरवरी हमले का दिन होगा। उन्होंने आगे कहा कि हम इसे एकता दिवस बनाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे जुड़े आदेश पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। आज दोपहर हम राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, नीले-पीले रंग के फीते लगाएंगे और दुनिया को अपनी एकता दिखाएंगे।

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