एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक व्हीकल की बढ़ती स्वीकार्यता और लोकप्रियता के बीच देश में ईवी चार्जिंग स्टेशनों का इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकास कर रहा है। देश के नौ बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों की संख्या पिछले चार महीनों में ही ढाई गुना तक बढ़ चुकी है। ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता समेत नौ प्रमुख शहरों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बीते चार महीनों में तेजी से बढ़ी है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के तहत बड़े शहरों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की कोशिश जारी है। इस बयान के मुताबिक, अक्टूबर 2021 से लेकर जनवरी 2022 के बीच इन नौ शहरों में 678 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इस तरह इन शहरों में मौजूद सार्वजनिक ईवी स्टेशनों की संख्या बढ़कर 940 हो गई है। देश भर में अब इनकी संख्या करीब 1,640 हो चुकी है। सरकार ने शुरूआती दौर में 40 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्रोत्साहन देने की नीति अपनाई हुई है। इसी क्रम में बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ढांचागत आधार तैयार करने के लिए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। ऊर्जा मंत्रालय ने गत 14 जनवरी को ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना से जुड़े दिशानिर्देश एवं संशोधित मानक जारी किए थे। इससे ईवी ढांचा खड़ा करने से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। ये कंपनियां इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कर रही हैं काम : सरकार ने ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रयास में ब्यूरो आॅफ एनर्जी एफिशिएंसी, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉपोर्रेशन लिमिटेड और एनटीपीसी जैसी सार्वजनिक इकाइयों के अलावा निजी कंपनियों को भी अपने साथ जोड़ा है। इससे अधिक बड़े इलाके में ईवी ढांचागत आधार तैयार करने में मदद मिलेगी और वाहन उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजस्थान के जैसलमेर में विश्वविख्यात मरु महोत्सव के इतिहास में इस बार पहला मौका रहा जब इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में मरु महोत्सव-2022 में एक साथ दो रिकॉर्ड कायम हुए। आधिकारिक सूत्रों ने आज बताया कि मरु महोत्सव में इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में दर्ज हुए दोनों ही नवाचार अपने आप में अनूठे एवं महोत्सव के मूल उद्देश्य से भरे होने के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैलानियों एवं विदेशी मेहमानों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र रहे। इसमें पहला रिकार्ड रहा रेगिस्तान के जहाज पर सुरों के सरताज के नाम। इसमें रेतीले धोरों पर 50 श्रृंगारित ऊंटों पर परम्परागत लोकवाद्यों की स्वर लहरियां बिखरेते हुए लोक कलाकारों ने सामूहिक रूप से लोक लहरियों का ऐसा मंजर दिखाया कि हर कोई मंत्र मुग्ध होकर सुनता, देखता और वाह-वाह करता रहा। इसी प्रकार दूसरा रिकार्ड रेत के समंदर पर रफ्तार का रोमांच नाम से हुए आयोजन ने बनाया। इसमें आजादी के अमृत महोत्सव (75वें वर्ष) के उपलक्ष्य में सम के रेतीले धोरों पर 75 ऊंटों की ऐतिहासिक दौड़ करवायी गई। यह भी अपने आप में अनूठा एवं अपूर्व आयोजन रहा। जिला कलक्टर डॉ प्रतिभा सिंह की पहल और विशेष प्रयासों से हुए ये दोनों ही आयोजन इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में दर्ज किए गए हैं। यह जैसलमेर जिले और अबकि बार सम्पन्न चार दिवसीय मरु महोत्सव के लिए यादगार एवं ऐतिहासिक उपलब्धि है। डॉ सिंह ने इस अपूर्व उपलब्धि को अविस्मरणीय बताते हुए इसमें सहभागिता निभाने वाली सभी संस्थाओं, कलाकारों, उष्ट्रपालकों, आयोजन को आशातीत सफलता देने में जी जान से जुटे रहे सभी अधिकारियों, कार्मिकों एवं सभी व्यक्तियों के प्रति आभार जताया है और कहा है कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से जैसलमेर के पर्यटन विकास को खासा संबल प्राप्त हुआ है और मरु महोत्सव नई पहचान के साथ उभरने लगा है।
टीम एबीएन, कोडरमा। यात्रियों से जुड़ी जरूरी खबर। शनिवार की रात कोडरमा समेत देश के कई राज्यों में रेलवे टिकट बुक नहीं होंगे। कोलकाता पीआरएस डाटा सेंटर के शटडाउन की वजह से 19 फरवरी के देर रात 11ः45 से रविवार अलसुबह 3ः15 तक रेलवे के आरक्षित टिकट, ई-टिकट, रेलवे की आनलाइन पूछताछ सेवा, रिटायरिंग रूम की आनलाइन बुकिग समेत अन्य तमाम आनलाइन सेवाएं बंद रहेंगी। कोलकाता पीआरएस डाटा सेंटर से छह रेलवे जोन जुड़े हैं। उन रेलवे जोन के दायरे में आने वाले एक दर्जन से अधिक राज्यों के शहरों में रेलवे की सेवाएं बंद रहेंगी। इन रेलवे जोनों में बंद रहेंगी सेवाएं : पूर्व रेलवे, पूर्व मध्य रेल, दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, पूर्व तटीय रेलवे और नार्थ फ्रंटियर रेलवे शामिल है। जबकि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के कुछ हिस्से, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्कीम, मणिपुर, मिजोरम व मेघालय में सेवाएं प्रभावित रहेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख रवीश तिवारी का निधन हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिवारी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा, रवीश तिवारी के लिए पत्रकारिता एक जुनून था। उन्होंने इसे आकर्षक व्यवसायों पर चुना। उनके पास रिपोर्टिंग और तीक्ष्ण कमेंट्री के लिए एक गहरी आदत थी। उनका अचानक और चौंकाने वाला निधन मीडिया में एक अलग आवाज को दबा दिया। उनके परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों के प्रति मेरी संवेदनाएं। प्रधानमंत्री ने उन्हें "अंतर्ज्ञानी" और "विनम्र" बताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, नियति ने रवीश तिवारी को बहुत जल्द हमसे छीन लिया है। मीडिया जगत में एक उज्ज्वल करियर समाप्त हो गया है। उनकी रिपोर्ट पढ़ने और समय-समय पर उनके साथ हुई बातचीत मजेदार होती थी। वह व्यावहारिक और विनम्र थे। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। ओम शांति!
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के नोडल अधिकारी डॉ सिद्धार्थ विश्वास ने कहा कि रासायनिक खाद और हाइब्रिड बीज से उत्पादित फसलें शरीर के लिए काफी नुकसानदायक हैं। डॉ विश्वास ने शुक्रवार को गव्य विकास निदेशालय द्वारा प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र, धुर्वा में आयोजित कामधेनु अमृत कृषि कार्यशाला में कहा कि वहीं, जैविक खेती से उत्पादित फसलों में पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता रहती है, जो कुपोषण दूर कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। फसलों की गुणवत्ता बनी रहे, इस हेतु जैविक कृषि, प्राकृतिक कृषि की तकनीक अपनाने की जरूरत है। डॉ विश्वास ने कहा कि रासायनिक खादों के इस्तेमाल से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इसलिए हाइब्रिड बीज के बदले देसी बीज का उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद हैं। गोबर और गोमूत्र द्वारा तैयार किए गए खाद और कीटनाशक की चर्चा करते हुए डॉ.विश्वास ने कहा कि गोबर का वर्मी कंपोस्ट तैयार करने और गोमूत्र का उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है। गोमूत्र मिट्टी में मिलने से कीड़े-मकोड़े समाप्त हो जाते हैं। इसलिए जैविक कृषि में गोबर और गोमूत्र का उपयोग करने से फसलों की पौष्टिकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र की ब्रांडिंग हो, तो जैविक कृषि को इससे बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकार को भी इस दिशा में ठोस पहल करने की सलाह दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 100 शहरों के लिए किसान ड्रोन को हरी झंडी दी। अपने वर्चुअली कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह एक ऐसी योजना है, जो खेती-किसानी में एक नई क्रांति ला देगी। कीटनाशकों के छिड़काव से लेकर दूसरी अन्य सुविधाएं इससे मिलेंगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह 21 वीं सदी की आधुनिक कृषि सुविधाओं की दिशा में एक नया अध्याय है। मुझे विश्वास है कि यह शुरुआत न केवल ड्रोन सेक्टर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी बल्कि असीमित संभावनाओं के लिए भी आकाश खोल देगी। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022-23 की घोषणा के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़े प्रोत्साहन की घोषणा की। बजट सत्र में सीतारमण ने कहा कि केंद्र वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान देश भर में किसानों को डिजिटल और उच्च तकनीक सेवाओं के वितरण के लिए किसान ड्रोन, रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि फसल मूल्यांकन, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन को देश में बढ़ावा दिया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जनवरी में कृषि श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमश: 5.49 फीसदी और 5.74 फीसदी हो गई। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार इस में इजाफा कुछ निश्चित खाद्य पदार्थों की महंगी कीमतों की वजह से रहा है। इससे पहले दिसंबर 2021 में कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) के आधार पर महंगाई की दर 4.78 फीसदी और ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आरएल) के आधार पर की दर 5.03 फीसदी रही थी। श्रम मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार जनवरी 2021 में सीपीआई-एएल पर आधारिक महंगाई की दर 2.17 फीसदी और सीपीआई-आरएल 2.35 फीसदी रही थी। कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति जनवरी 2022 में 4.15 फीसदी और ग्रामीण मजदूरों के लिए 4.33 फीसदी रही, जो पिछले महीने में क्रमशः 2.99 फीसदी और 3.17 फीसदी थी। एक साल पहले समान अवधि में कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति 1.02 फीसदी और ग्रामीण मजदूरों के लिए 1.22 फीसदी थी। दिसंबर 2021 के मुकाबले जनवरी 2022 में पूरे देश में सीपीआई-एएल में दो अंकों की और सीपीआई-आरएल में एक अंक की कमी आई है। ये दोनों जनवरी 2021 में क्रमश: 1095 और 1105 पर रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक उपभोक्ता सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत से अधिक घर खरीदारों ने वर्ष 2022 में आवास कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और संपत्ति सलाहकार एनारॉक के इस सर्वेक्षण में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि को देख खरीदारों ने यह संभावना जताई है। यह सर्वे जुलाई, 2021 और दिसंबर, 2021 के बीच किया गया। इसमें पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 5,210 प्रतिभागियों ने विभिन्न डिजिटल मंचों के जरिए अपनी राय व्यक्त की है। एनारॉक ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, सर्वेक्षण में 56 प्रतिशत प्रतिभागियों ने निर्माण के कच्चे माल में वृद्धि और डेवलपर्स के लिए कुल परिचालन लागत में बढ़ोतरी के कारण 2022 में आवास कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है। इसमें कहा गया है कि घरों की कीमतों में 10 प्रतिशत से कम की वृद्धि का प्रभाव ज्यादा नहीं होगा लेकिन 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का खरीदार की भावना पर अधिक गहरा असर होगा।
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