एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने गुजरात के अहमदाबाद के कर्णावती में आज से अपनी तीन दिवसीय वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि बैठक की शुरुआत कर दी है। यह संघ की एक सालाना बैठक है। इसमें संघ की शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारियों, 2025 में शताब्दी वर्ष मनाने तक संघ की शाखा दोगुनी करने जैसे तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होगी। इसमें संघ के अधिकारी चिंतन मनन करेंगे। संघ की कर्णावती बैठक में शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड से उपजे विवाद और पीएफआई द्वारा संघ के कार्यकर्ताओं पर हमला जैसे तात्कालिक ज्वलंत मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। कोरोना के कारण 2 वर्ष बाद इस साल अप्रैल से संघ शिक्षा वर्ग के सामान्य ढंग से सुचारू चलाने पर फैसला होगा। आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय वर्ष पिछले 2 वर्षों से कोरोना महामारी के चलते आयोजित नहीं हो पा रहा था, उसे भी अब पूरा किए जाने पर फैसला होगा। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे तमाम कार्यक्रम जैसे कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण रक्षा जागरण, धर्म जागरण कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट पर मंथन भी होगा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी होंगे शामिल : आरएसएस के शताब्दी वर्ष 2025 से पहले 1 लाख तक संघ की शाखाओं के विस्तार की योजना है। फिलहाल इनकी संख्या 55 हजार के करीब है। संघ की शाखाओं के भौगौलिक विस्तार पर संघ विस्तृत योजना बनाएगा। प्रतिनिधि सभा में संघ आगामी 1 वर्ष के लिए संघ योजना बनाकर लक्ष्य तय करता है। संघ और उसके विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के महत्वपूर्ण लोगों को इस बैठक में शामिल होना अपेक्षित होता है। बीजेपी की ओर से संघ की बैठक में संगठन महामंत्री बीएल संतोष और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज अहमदाबाद में 2 दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। बैठक आरएसएस के निर्णय लेने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यह बैठक आरएसएस के निर्णय लेने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बैठक में आगामी वर्षों के लिए विभिन्न योजनाओं और निर्णयों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें आरएसएस के सभी पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में पिछले साल की गतिविधियों की रिपोर्ट, संघ की आगामी वर्ष की कार्य विस्तार योजना, संघ शिक्षा वर्ग और प्रासंगिक वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा की जानी है। कुछ मुद्दों पर समाधान की भी उम्मीद है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार का जोर देखते हुए भारतीय रेलवे विकास और खरीद पर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने की योजना बना रहा है। भारतीय रेल अगले तीन वित्त वर्ष में 90,000 डिब्बे खरीदेगी, जिसके लिए निविदा जारी करने की प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू की जाएगी। डिब्बों की खरीद में 31,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हर साल हम कमोबेश 30,000 डिब्बों की खरीद करते हैं और तीन साल में यह संख्या करीब 90,000 होगी। इनमें 32,300 खुले डिब्बे, सीमेंट परिवहन में इस्तेमाल होने वाले 39,000 डिब्बे, स्टील पाइप की ढुलाई करने वाले 7,500 डिब्बे और कोयला ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले 3,000 तथा लौह अयस्क ढुलाई में प्रयोग होने वाले 8,000 डिब्बे खरीदने की योजना है। डिब्बों के मासिक विनिर्माण के आंकड़ों से पता चलता है कि रेल विभाग चालू वित्त वर्ष में जनवरी तक 7,000 से ज्यादा डिब्बों की खरीद कर चुका है। अधिकारी ने कहा कि ज्यादा संख्या में डिब्बों की खरीद इसलिए की जा रही है क्योंकि रेलवे को आगे माल ढुलाई की मांग बढ़ने की उम्मीद है। 2022-23 के बजट में रेल मंत्रालय को 1.40 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के बजट अनुमान से 27.5 फीसदी और संशोधित बजट अनुमान से 16.5 फीसदी अधिक है। अगले वित्त वर्ष में रेलवे ने 2.46 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय का अनुमान लगाया है। 2022-23 में अर्थव्यवस्था के विकास के लिए सरकार की योजना में रेलवे के बुनियादी ढांचा को बढ़ावा देना प्रमुख है। रेल मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, हम 200 वंदे भारत रेल गाड़ियां खरीदने में भी 25,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। रेलवे ने अब तक 44 वंदे भारत रेल गाड़ियों का ठेका दिया है और 58 के लिए बोली की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार का मकसद अगले वित्त वर्ष में नई पीढ़ी की कम लागत वाली 400 ट्रेन शुरू करने का है। रेलवे देश भर में 75 स्टेशनों के विकास पर भी करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके अलावा मंत्रालय ने स्वदेशी कचव सुरक्षा तंत्र लगाने पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में इस सुरक्षा प्रणाली का परीक्षण किया था। इसमें इंजन, सिग्नल प्रणाली और पटरियों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन उपकरण (आरएफआईडी) का उपयोग किया जाता है, जिससे रेलगाड़ियों को आपस में टकराने की आशंका को दूर करने में मदद मिलती है। रेल मंत्रालय का लक्ष्य 2,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर इस प्रणाली को लगाने का है। अधिकारी ने कहा कि इस पर अप्रैल से ही पूंजीगत व्यय शुरू हो जाएगा। मंत्रालय अगले वित्त वर्ष में माल ढुलाई की मांग बढ़ने की उम्मीद कर रहा है। स्वयं डिब्बे बनाने के साथ ही मंत्रालय ने 15 फरवरी को निजी रेल डिब्बा विनिमार्ताओं को क्षमता का अधिक उपयोग करने को कहा था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल सही साबित होते दिख रहे हैं। आम आदमी को ऐतिहासिक जीत मिलने की संभावना है। शुरुआती तीन घंटों की मतगणना में आप को 89 सीटों पर बढ़त है। अकाली दल और कांग्रेस नतीजों में काफी पीछे हैं। इस चुनाव की खासियत यह रही कि 2017 में आम आदमी पार्टी ने सत्ता की दावेदारी की थी। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान को जीत मिली है।चुनाव से ठीक पहले पार्टी में कलह से जूझ रहे कांग्रेस ने सीएम बदल दिया था और दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव लगाया था। मगर खुद सीएम चरणजीत सिंह चन्नी अपनी दोनों सीट चमकौर साहिब और खरड़ से पीछे चल रहे हैं। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस भी 14 सीटों पर सिमट गई। अमृतसर ईस्ट सीट से नवजोत सिंह सिद्धू भी हार के करीब पहुंच गए। कांग्रेस की हार से राहुल गांधी के फैसले से कठघरे में खड़े होंगे। इस बार अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल के सामने पार्टी को एकजुट रखने और विद्रोह से बचाने की दोहरी चुनौती थी। लांबी से छठी बार चुनाव मैदान में उतरे प्रकाश सिंह बादल और चौथी बार जलालाबाद से उतरे उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल भी आप की आंधी में हार की ओर बढ़ रहे हैं। इन दो दिग्गज नेताओं की स्थिति ने यह तय कर दिया है कि आने वाले दौर में अकाली दल में भी भगदड़ हो सकती है। इसके अलावा सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर पार्टी के भीतर सवाल उठना तया है। अभी तक रुझानों के अनुसार अकाली दल 9 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी ने इस बार पूरे पंजाब में मालवा, माझा और दोआबा में बाजी मार ली है। पंजाब में कांग्रेस का दलित कार्ड भी फेल हो गया। इसके अलावा डेरों की ओर से जारी होने वाले फरमान भी बेअसर साबित हो गए हैं। बता दें कि वोटिंग से ठीक पहले डेरा सच्चा सौदा समेत कई डेरों ने शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी गठबंधन के पक्ष में वोट करने की अपील की थी
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के चुनाव के लिए मतगणना जारी है। UP में 260 सीटों पर भाजपा आगे है, सपा को 120 पर बढ़त मिली है। करहल से सपा प्रत्याशी अखिलेश यादव कई हजार वोट से आगे चल रहे हैं। वहीं, गोरखपुर शहर सीट से सीएम योगी ने भी अच्छी बढ़त बनाई हुई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पीछे चल रहे हैं। कैराना सीट पर सपा के नाहिद हसन ने बनाई बढ़त : कैराना से भाजपा की मृगांका सिंह सपा के नाहिद हसन से 986 वोट से पीछे चल रही हैं। छपरौली में तीसरे राउंड में रालोद के अजय कुमार 4 हज़ार से आगे चल रहे हैं। चांदपुर विधानसभा सीट पर तीसरे राउंड में भाजपा प्रत्याशी कमलेश सैनी को 9866 जबकि गठबंधन प्रत्याशी स्वामी ओम व्यास को 10558 और बसपा को 6861 वोट मिले हैं। बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में पहले दो राउंड के बाद भाजपा के उमेश मलिक 654 वोट से आगे हैं। बलिया में कड़ा मुकाबला, सपा 4 तो भाजपा 3 सीटों पर आगे बलिया जिले की सात विधानसभा सीटों पर मतगणना का कार्य कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 8 बजे शुरू हुआ। शुरुआती रुझानों में सपा-सुभाषसपा गठबंधन बढ़त बनाए हुए हैं वहीं तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। सपा प्रत्याशी बैरिया, सिकंदरपुर, फेफना तथा सुभासपा के प्रत्याशी रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में आगे चल रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी बांसडीह, बेल्थरारोड और बलिया नगर विधानसभा क्षेत्र में आगे चल रहे हैं। भाजपा के राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी और आनंद स्वरूप शुक्ला पीछे चल रहे हैं। सपा के नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी पीछे चल रहे हैं। महराजगंज में भाजपा को बढ़त महराजगंज जनपद की सभी 5 विधानसभा सीटों पर तीन राउंड की मतगणना में बीजेपी आगे चल रही है। बस्ती में कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में तीसरे चरण में सपा आगे हो गई है। सपा के कवींद्र चौधरी को 10230, भाजपा के चंद्र प्रकाश शुक्ल को 5532 और बसपा के जहीर अहमद को 2774 वोट मिले हैं।
एबीएन डेस्क। अनुमान, दावों और अटकलों का दौर खत्म, अब अंजाम की बारी। सियासी दृष्टि से बेहद अहम और अगले लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल मुकाबला माने जा रहे उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित हो जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाताओं ने किसे जनादेश का गुलाल लगाया और किसे आत्मनिरीक्षण करने का सबक सिखाया। चुनाव का परिणाम ब्रांड मोदी की मजबूती, मोदी सरकार के गरीब कल्याण एजेंडे के असर और कोरोना महामारी काल में सरकार के कामकाज पर लोगों की राय सामने लाएगा। इसके अलावा चुनाव नतीजे अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रीय दलों का भविष्य भी तय करेंगे। कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बाद यह पहला चुनाव है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में मतों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगी। दस बजे के आसपास ठोस रुझान आने शुरू हो जाएंगे। दोपहर तक अलग-अलग राज्यों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। भाजपा के लिए परीक्षा की घड़ी, यूपी में प्रदर्शन दोहराने की चुनौती पंजाब को छोड़ कर सभी चुनाव वाले अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में भाजपा की सरकारें हैं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती सियासी दृष्टि से अहम सूबे यूपी में सरकार बचाने की है। बेहतर प्रदर्शन न होने की स्थिति में भाजपा के सबसे मजबूत ब्रांड मोदी के कमजोर पड़ने और पार्टी के अजेय होने की छवि को गहरा धक्का लगेगा। किस राज्य में क्या है माहौल? • यूपी : बीते चुनाव में तीन-चौथाई बहुमत लाने वाली भाजपा ने पहली बार सीएम योगी को चेहरा बनाया है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तो लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ मैदान में उतरने वाली सपा इस बार रालोद, सुभासपा सहित कई छोटे दलों के साथ मैदान में है। भाजपा ने योगी-मोदी की जोड़ी को भुनाने की कोशिश की है। बसपा-कांग्रेस अपने दम पर मैदान में है। • उत्तराखंड : बीते चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाली भाजपा फिर मोदी के भरोसे है। भरोसे पर खरा न उतरने के कारण बीते पांच साल में राज्य में तीन मुख्यमंत्री बनाए गए। कांग्रेस बिना किसी को चेहरा बनाए मैदान में है। भाजपा को मोदी के करिश्मे तो कांग्रेस को हर पांच साल बाद बदलाव के राज्य के सियासी चरित्र पर भरोसा है। • पंजाब : किसान आंदोलन के बीच यहां सियासत ने तेज करवट ली है। दशकों बाद अकाली दल और भाजपा अलग-अलग चुनाव मैदान मेंं हैं। अकाली दल ने बसपा तो भाजपा ने पंजाब लोक कांग्रेस, अकाली दल लोकतांत्रिक से गठबंधन किया है। आप ने भगवंत मान पर भरोसा जताया है। जबकि, कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर दलित चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। • गोवा : बीते चुनाव में कांग्रेस जीत की दहलीज पर पहुंचकर लुढ़क गई थी। भाजपा ने बहुमत से चार सीट दूर खड़ी कांग्रेस को करारा झटका दिया था। इस बार आप, तृणमूल कांग्रेस सहित तीन नए क्षेत्रीय दलों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। इस बार भी त्रिशंकु जनादेश के आसार हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच है। • मणिपुर : बीते चुनाव में यहां गोवा की कहानी दुहराई गई। सरकार बनाने के लिए कांग्रेस 3 अतिरिक्त विधायक नहीं तलाश पाई। जबकि, भाजपा ने एनपीएफ, एनपीपी को साध कर बहुमत के लिए जरूरी दस विधायकों का इंतजाम कर लिया। इस बार ये दोनों दल अलग-अलग मैदान में हैं और भाजपा भी अपने दम पर चुनाव लड़ी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब में 20 फरवरी को हुई विधान सभा मतदान के नतीजों का आज ऐलान कर दिया जाएगा। पंजाब को आज नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। ईवीएम में बंद आज 1304 उम्मीदवारों की किस्मत खुलेगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार पंजाब की सत्ता किस पार्टी के हाथों में जाएगी। वोटों की संख्या 8 बजे से शुरू होगी और 2-3 घंटों में रुझान आने शुरू हो जाएंगे। 14 राऊंडों में वोटों की संख्या शुरू होगी। राज्य भर के वोटरों को 20 फरवरी को हुई वोटों के बाद 10 मार्च का बेसब्री से इंतजार था। वहीं ही चयन कमीशन की तरफ से गिनती से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां को नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं जिनमें सबसे स्पष्ट और खास नियम री-काउंटिग को लेकर है। इस बार री-काउंटिंग राउंड के अनुसार होने वाली है। काउंटिंग सेंटरों के अंदर तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं और कोरोना काल के चलते कोरोना नियमों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मास्क और सेनीटाईजर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इतना ही नहीं मशीनों को खोलने और री-पैक करने से पहले सेनेटाईज किया जाएगा। राउंड बीच ही उम्मीदवार करें ऑब्जेक्शन : चयन कमीशन ने वोटों की संख्या के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं। इस बार उम्मीदवार सिर्फ राउंड के बीच ही री-काउंटिंग की अपील कर सकता है। उनके कहने पर सिर्फ 2 बार री-काउंटिंग हो सकती है। इतना ही नहीं अपील भी राउंड में ही करनी होगी। चयन कमीशन की तरफ से सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि अगले राउंड की काउंटिंग शुरू हो जाती है तो कोई भी उम्मीदवार पिछले राउंड की री-काउंटिंग की अपील नहीं कर सकता।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेहरू युवा केंद्र मुंबई संघटना युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत कथक डांस और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में कार्यक्रम को संबोधित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक यशवंत मान खेड़कर महाराष्ट्र राज्य उपसंचालक और महाराष्ट्र और गोवा के संचालक प्रकाश मनोरे कार्यक्रम में उपस्थित रहे। योग गुरु राधेश्याम जयसवार ने विलंब से पहुंचने के लिए माफी भी मांगी। अपने गुरु श्री यशवंत मान खेड़कर और प्रकाश मनोरे ने पूरे कार्यक्रम में युवाओं को आगे बढ़ाया। महिलाओं के दिन को संबोधित किया गया। कत्थक डांस के सभी प्रतिभागी बच्चों को उनके तय कार्यक्रम के तहत प्रस्तुति करायी गयी। कार्यक्रम में राधा दल्वी, मनीषा टेमकर, योगा टीचर लावण्या प्रमोद, फोटोग्राफर मदन संजय, जाधव ज्योति, फोटोग्राफर प्रमोद, मधुरा तावड़े उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संचालक रवि कई लोग मौजूद रहे। बताते चलें कि कार्यक्रम बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। योग गुरु राधेश्याम ने कुछ बच्चों के साथ फोटो खिंचवा कर दिया। बच्चों और महिलाओं के साथ भी योग गुरु राधेश्याम महिलाओं और बहनों के साथ भी फोटो उन्हें आगे बढ़ने काम को भी बताया। बहुत सारे एनजीओ ने भाग लिया जिसमें द ह्यूमन योगा फाउंडेशन मनीषा आर्ट एंड क्राफ्ट डिजाइनर बहुत एनजीओ ने काम किया। कथक डांस एनजीओ भी ने भी बहुत अच्छा काम किया। उनके कोरिया ग्राफर ने दिए बहुत अच्छा काम जिसकी जो जिम्मेदारी जी की थी। अच्छी तरीके से सभी लोगों ने निभाया और यह थोड़ा सा कार्यक्रम का आंस था जितना योग गुरु जानते थे उतना ही बताएं और बहुत सारे लोग आए थे। कई एनजीओ थी कई लोगों को पुरस्कार दिया गया। पूरी रिपोर्ट इस न्यूज में नहीं है। जानकारी योग गुरु राधे श्याम ने भाई उतना ही बताया आगे कार्यक्रम में जल्दी पहुंचने की कोशिश करेंगे योग गुरु राधे श्याम की तरफ से सभी युवाओं को आॅल द बेस्ट सभी गुरुओं को प्रणाम चरण स्पर्श जय हिंद जय भारत...
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को यूक्रेन संकट के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई और संकेत दिया कि केंद्र सरकार वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र में सीतारमण से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और यूक्रेन-रूस संघर्ष के प्रभाव के बारे में पूछा गया था। वित्त मंत्री ने कहा, निश्चित रूप से इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर होगा। उन्होंने आगे कहा, हम इसे एक चुनौती के रूप में लेने और इसके असर को कम करने के लिए कितना तैयार होंगे, यह कुछ ऐसा है, जो हम आगे देखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत कच्चे तेल की कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात से पूरा करता है और जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह चिंता का विषय है। वित्त मंत्री ने कहा कि हमें देखना होगा कि यह आगे किस दिशा में जाता है। उन्होंने बताया कि तेल विपणन कंपनियां 15 दिन के औसत के आधार पर खुदरा कीमतें तय करती हैं, लेकिन अब हम जिन आंकड़ों की बात कर रहे हैं, वे औसत से परे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कच्चा तेल पाने के लिए किसी वैकल्पिक स्रोत की तलाश कर रही है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि वैश्विक बाजार के सभी स्रोत समान रूप से अकल्पनीय हैं। सीतारमण ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर पड़ेगा, और बजट में कुछ प्रावधान किए गए हैं, लेकिन वे केवल सामान्य उतार-चढ़ाव पर आधारित है, लेकिन अब हालात उससे परे हैं। उन्होंने कहा, इसलिए, हमें देखना होगा कि हम इसका समाधान कैसे कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड मंगलवार को करीब 127 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था। पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, यह पहले से ही (जीएसटी परिषद के समक्ष) है। पेट्रोल और डीजल पहले से ही जीएसटी परिषद में हैं।
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