देश

View All
Published / 2022-03-30 03:40:48
श्रीनगर : रैनावारी इलाके में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को किया ढेर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के रैनावारी इलाके में मंगलवार देर रात सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। जानकारी के मुताबिक, मारे गए दोनों आतंकी लश्कर ए तैयबा और टीआरएफ आतंकी संगठन के बताए जा रहे हैं। हालांकि उनकी पहचान अभी उजागर नहीं की गई है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ ने इस एनकाउंटर में आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभाला हुआ है। पुलिस ने बताया है कि मारे गए दोनों आतंकी घाटी के ही रहने वाले थे और घाटी में कई नागरिकों की हत्या की घटनाओं में उनका हाथ था। पुलिस को आतंकियों के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद हुआ है। सुरक्षाबलों को अभी और भी आतंकियों के छिपे होने का शक है। सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

Published / 2022-03-29 17:34:44
स्टेल्थ ओमिक्रॉन से चीन-ब्रिटेन में बढ़ रहे कोरोना के मामले, जानें यह क्या है...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोरोना के मामले लगातार कम हो रहे हैं। कोरोना की शुरुआत के बाद ऐसा पहली बार है जब नए मामलों की संख्या इतनी कम हो गई है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 1259 नए मामले आए हैं और 35 लोगों की मौत हुई है। जहां एक तरफ भारत में कोरोना का दायरा सिकुड़ रहा है, वहीं, चीन और ब्रिटेन में इस वायरस की वजह से केस तेजी से बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए चीन के शंघाई शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया है। ब्रिटेन में भी पिछले दो सप्ताह से नए मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन दोनों देशों में कोरोना के बढ़ने का कारण स्टेल्थ ओमिक्रॉन वेरिएंट है। आइए जानते हैं कि क्या है ये वेरिएंट और इससे क्यों बढ़ रहा है कोरोना : सफदरजंग हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर बताते हैं कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के सब वेरिएंट BA.2 को स्टेल्थ ओमिक्रॉन कहा जाता है। यह वेरिएंट सामान्य ओमिक्रॉन वेरिएंट की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है। भारत में संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान ओमिक्रॉन के साथ स्टेल्थ ओमिक्रॉन भी फैला था, लेकिन तब चीन या ब्रिटेन में यह वेरिएंट नहीं पहुंथा था। अब ये सब वेरिएंट इन देशों में तेजी से फैल रहा है, जिसकी वजह से वहां संक्रमण के नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि ये वेरिएंट फैल भले ही तेजी से रहा हो, लेकिन इससे हॉस्पिटलाइजेशन या मौत के मामलों में अधिक इजाफा नहीं हो रहा है। स्टेल्थ ओमिक्रॉन भी अपने मूल वेरिएंट की तरह ही है। ये संक्रामक ज्यादा है, लेकिन घातक नहीं। भारत में अगले चार से छह महीने तक नहीं है खतरा : कोविड एक्सपर्ट डॉ युद्धवीर सिंह का कहना है कि भारत में अगले चार से छह महीने तक कोरोना की किसी नई लहर के आने की आशंका काफी कम है। इसका कारण यह है कि यहां तीसरी लहर के दौरान एक बड़ी आबादी ओमिक्रॉन से संक्रमित हो चुकी है। इसके साथ ही वैक्सीनेशन भी चल रहा है। नेचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन से इम्यूनिटी बनी हुई है, जो अगले चार से छह महीने तक रह सकती है। ऐसे में पैनिक होने की जरूरत नहीं है।

Published / 2022-03-29 17:22:21
दिल्ली विधानसभा में 75,800 करोड़ रुपये का बजट पारित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली सरकार के वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 75,800 करोड़ रुपये का बजट पारित किया है। बजट सत्र के समापन के बाद अध्यक्ष ने विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। बजट सत्र 23 मार्च को शुरू हुआ था। बजट में खुदरा क्षेत्र को बढ़ावा, बिना मंजूरी वाले क्षेत्रों के प्रसिद्ध बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्विकास, स्टार्टअप, पर्यटन और रात के समय की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के जरिये अगले पांच वर्षों में 20 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। बजट पर बहस में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कट्टर देशभक्ति, कट्टर ईमानदारी और मानवता आम आदमी पार्टी की विचारधारा के तीन स्तंभ हैं और दिल्ली के 2022-23 के बजट में ये प्रदर्शित होते हैं। केजरीवाल ने सदन में कहा, विधानसभा में प्रस्तुत बजट कोई साधारण दस्तावेज नहीं है, यह ऐतिहासिक है। स्वतंत्र भारत में पहली बार रोजगार बजट पेश किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, बजट सभी के लिए खुशहाली लाने को तैयार किया गया है। हम अपनी विचारधारा के कारण ह्यरोजगार बजट लाए हैं। कट्टर देशभक्ति, ईमानदारी और मानवता हमारी विचारधारा के तीन स्तंभ हैं। वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह बजट दिल्लीवासियों से प्राप्त 6,500 सुझावों के आधार पर तैयार किया गया था। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था पर हमारी टीम द्वारा विभिन्न संघों और नियामक निकायों के साथ 150 से अधिक बैठकें आयोजित की गई। इसके बाद बजट में प्रतिष्ठित बाजारों का पुनर्विकास, आईटी पार्क, स्टार्टअप नीति, ई-कॉमर्स को बढ़ावा, नयी नौकरियों का सृजन जैसे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं।

Published / 2022-03-29 15:19:51
परसा : एकजुट ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा ज्ञापन, खदान शीघ्र शुरू कराने की मांग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। परसा खदान को जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में परसा कोयला परियोजना के पक्ष में आस-पास के छ: गांवों के निवासी बड़ी संख्यामें आज अंबिकापुर में इकठ्ठा हुए और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। साथ ही राजधानी रायपुर स्थित तथाकथित एनजीओ के नाम पर स्थानिको को गुमराह करने वाले बाहरी तत्वों को ग्राम प्रवेश पर आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन से उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। कलेक्टर संजीव कुमार झा ने मामले की जांच कराकर तुंरत ही कार्यवाही करने का आश्वासन परसा और आसपासके गाँव वालो को दिया है। परसा खदान शुरू होने से सिर्फ स्थानिको को रोजगार के अवसर ही नहीं परन्तु राज्य सरकार को बड़ा राजस्व और देश को किफायती दामों पर बिजली भी मिलेगी। परसा और आसपास के गाँव घाटबर्रा, फत्तेपुर, जनार्दनपुर, साल्हि, इत्यादि के 1200 से 1500 लोगो ने जिला प्रशासन से फर्जी एनजीओ वालों को उनके ग्राम में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरगुजा कलेक्टर श्री संजीव कुमार झा को अनुरोध किया है। परसा गांव के उप सरपंच शिव कुमार यादव ने कहा कि हम यहां परसा खदान परियोजना के समर्थन करते है और अलोक शुक्ला जो की स्थानिको को बाहरी लोगो को लाकर भड़काता है उसका विरोध करते है। हम कलेक्टर को निवेदन करते है की अगर परसा खदान शुरू नहीं होती है तो सरकार को अनुरोध करने के लिए हम यहां से राजधानी रायपुर भी जायेंगे। यह आदिवासी विस्तार है और उनको रोजगार की जरुरत है। जब कोरोना का संकट का समय था तब हमारे साथ खदान की कंपनियां खड़ी थी, न की वह बाहरी लोग जो खदान और क्षेत्र के विकास का विरोध करते है। सब्र खो चुके इन ग्रामीणों ने अब मांगे पूरी नहीं होने पर जिला प्रशासन को उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दे डाली है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में परसा कोयला परियोजना के लिए इस उम्मीद में अपनी जमीन दी थी कि उन्हें जमीन की अच्छी कीमत के साथ-साथ रोजगार भी उपलब्ध होगा। किन्तु आज तक जमीन देने के बावजूद खदान शुरू ना होने के कारण उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे है। इस वजह से उन्हें गुजर-बसर करने के लिए जमीन मुआवजे से मिले पैसे ही निर्वाह के लिए खर्च करने पड़ रहे हैं। मुआवजे की राशि जो स्थानिको के भविष्य का एक मात्र सहारा है उसको खर्च करने पर मजबूर है। उन्होने बताया की इस सबका जिम्मेदार तथाकथित बाहरी एनजीओ के सरगना अलोक शुक्ला और उसके साथीदार है जो की परसा योजना को ही निशाना बना रहे है जबकि छत्तीसगसढ़ देश का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है। पड़ोस के गांव में संचालित पीईकेबी खदान के ग्रामीण, गावों के चौतरफा विकास होने से काफी समृद्ध हो रहे हैं। पीईकेबी खदान के सभी गांवों में ग्रामीणों को नौकरी देने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और ग्रामीण विकास से संबंधित कई अन्य योजनायें संचालित है, लेकिन हम परसा परियोजना के लाभार्थी ब्लॉक शुरू नहीं होने से इन सभी सुविधाओं से आज तक वंचित हैं, साल्हि गांव की वेदमती उइके ने बताया। गौरतलब है कि सरगुजा जिले में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) की ताप विद्युत परियोजनाओं के लिए तीन कोल ब्लॉक परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी), परसा और केते एक्सटेंशन केंद्र सरकार द्वारा कई साल पहले आवंटित किया गए थे। अभी पीईकेबी में खनन का कार्य चल रहा है लेकिन शेष दो ब्लॉकों के लिए अनुमति लेने का कार्य छत्तीसगढ़ शासन के पास अटका पड़ा है। ग्रामीणों ने जिस कोल ब्लॉक के समर्थन के लिए जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया है, उसके जमीन का मुआवजा भूमि अधिग्रहण नीति के तहत ग्रामीणों को मिल चुका है जबकि ब्लॉक शुरू होने पर सभी लाभार्थियों को पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन नीति के तहत नौकरी दिया जाना शेष है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य के कोयला खदानों से देश के गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्य के कई बिजली संयंत्रों में कोयले के आपूर्ति होती है जिससे बिजली का उत्पादन संभव हो पाता है और वहां की सरकार नागरिकों को सस्ते दरों पर बिजली उपलब्ध करा पाती हैं।

Published / 2022-03-29 13:10:56
उत्तर प्रदेश : सतीश महाना निर्विरोध बने विधानसभा अध्यक्ष

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक सतीश महाना निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किये गये। विधानसभा में कार्यवाहक अध्यक्ष रमापति शास्त्री ने मंगलवार को सतीश महाना के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। उन्होंने सदन को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ सतीश महाना का नामांकन पत्र पात्र हुआ और उसके वैध होने पर उनके निर्वाचन की घोषणा करता हूं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए 29 मार्च की तिथि तय की थी। 28 मार्च, सोमवार दो बजे तक विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होनी थी और अकेले सतीश महाना ने ही पर्चा भरा था। नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने अध्यक्ष पद के लिए महाना के नाम का प्रस्ताव रखा था जिसका सुरेश खन्ना ने समर्थन किया था। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने भी महाना के नाम का प्रस्ताव और सपा के ही अवधेश प्रसाद ने समर्थन किया था। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के रघुराज प्रताप सिंह तथा कांग्रेस की आराधना मिश्रा के अलावा सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्षी दलों ने भी महाना के नाम का प्रस्ताव और अपना समर्थन दिया। विधानसभा में मंगलवार को उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गई। महाना कानपुर जिले की महाराजपुर विधानसभा सीट से आठवीं बार निर्वाचित हुए हैं। महाना 1991 में पहली बार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए और इसके बाद उन्होंने विधानसभा में लगातार अपनी उपस्थिति बनाये रखी। वह बसपा-भाजपा गठबंधन की मायावती के नेतृत्व की सरकार में नगर विकास राज्य मंत्री के अलावा कयाण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के नेतृत्व की सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं। पिछली विधानसभा में योगी आदित्यनाथ नीत सरकार में वह औद्योगिक विकास मंत्री थे। विधानसभा की वेबसाइट के अनुसार, कानपुर में 14 अक्टूबर 1960 को राम अवतार महाना के घर जन्मे सतीश महाना मूल रूप से पंजाब के खत्री हैं और हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। कृषि, बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के कारोबार से जुड़े महाना ने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। जनसेवा, पठन-पाठन, पर्यटन और संगीत में गहरी रुचि रखने वाले महाना ने अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, सिंगापुर, मलेशिया, स्वीडन, नार्वे, न्यूजीलैंड, कनाडा, जर्मनी, आॅस्ट्रिया, चीन, जापान, स्विट्जरलैंड, और आॅस्ट्रेलिया समेत लगभग 35 देशों का भ्रमण कर चुके हैं। महाना विधानसभा में प्राक्कलन समिति, नियम समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं। महाना जनांदोलनों में जेल भी जा चुके हैं। वह वर्ष 1990, 1992 और 1994 में आंदोलन में जेल गये हैं।

Published / 2022-03-28 17:49:08
यूपी : मंत्रियों में बंटे विभाग, योगी के पास गृह समेत 25 विभाग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा हो गया है। सभी कैबिनेट मंत्रियों को उनका कार्यभार सौंप दिया गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी मंत्रियों को जिम्मेदारी बांट दी हैं। अब ये साफ हो गया है कि योगी सरकार के सभी मंत्री किन विभागों का कामकाज संभालेंगे।

Published / 2022-03-28 17:16:30
कल "मतुआ धर्म" महा मेला को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मतुआ समाज के धर्मगुरु हरिचंद ठाकुर की 211वीं जयंती पर मंगलवार को अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की ओर से आयोजित किए जाने वाले मतुआ धर्म महा मेला को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी दी। पीएमओ ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 मार्च को शाम 4.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पश्चिम बंगाल के ठाकुरबाड़ी के श्रीधाम ठाकुरनगर में आयोजित मतुआ धर्म महा मेला-2022 को संबोधित करेंगे। हरिचंद ठाकुर ने देश की आजादी से पहले के दौर में अविभाजित बंगाल में उत्पीड़ित, समाज के दबे-कुचले और बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। पीएमओ ने कहा, उन्होंने सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलन वर्ष 1860 में ओरकांडी (अब बांग्लादेश में) से शुरू किया था और फिर इसकी परिणति "मतुआ धर्म" की स्थापना के रूप में हुई थी। मतुआ धर्म महा मेला 2022 का आयोजन अखिल भारतीय मतुआ महासंघ 29 मार्च से 5 अप्रैल, 2022 तक करेगा।

Published / 2022-03-28 15:33:04
देश के विकास में डीवीसी की अहम भूमिका : चेयरमैन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के चेयरमैन रामनरेश सिंह ने रविवार को कहा कि देश और समाज के विकास में डीवीसी की अहम भूमिका है। सिंह ने रविवार को झारखंड के बोकारो में औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित डीवीसी के सब स्टेशन में 11 केवी का सब स्टेशन विस्तारीकरण का उद्घाटन किया और कहा कि डीवीसी अब 11000 वोल्टेज विद्युत आपूर्ति उपभोगताओं को सीधा करेगा। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए यह व्यवस्था अत्यंत जरूरी थी। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में डीवीसी ने कुमार धुब्बी में शुरूआत की थी और आज बोकारो में यह दूसरा पेज का शुरूआत किया जा रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में 18 नए उपभोक्ताओं को इसका लाभ तत्काल मिलेगा। इन्हें बहुत जल्द ही विद्युत आपूर्ति की जाएगी। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि डीवीसी में कोयला की आपूर्ति की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय ऊर्जा और कोयला मंत्रालय ने डीवीसी को भरपूर सहयोग किया है। इसी कारण से कोयला आपूर्ति में आ रही बाधा फिलहाल समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार और बंगाल सरकार को बिजली आपूर्ति कर हम इन सरकारों से अपनी मजदूरी की मांग करते हैं। सरकारें हमारी बात मानकर हमें मजदूरी भी दे रही है। झारखंड सरकार हमें एक सौ करोड़ रुपए प्रति माह विद्युत आपूर्ति के बदले भुगतान कर रही है। बाकी बचे राशि पर भी सरकार ने अविलम्ब फैसला लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि झारखंड के दो मंत्रियों और कई उच्च अधिकारियों के साथ हुए वार्ता में पहले का बकाया राशि पर भी लगभग सहमति हो चुकी है। संभवत बहुत जल्द ही उन राशियों का भी भुगतान होना शुरू हो जाएगा। झारखंड सरकार के साथ काफी हद तक सकारात्मक पहल हुई है। इसमें सरकार ने डीवीसी को काफी मदद किया है। इस अवसर पर डीवसी के मेंबर टेक्निकल एम रघुराम, कार्यपालक निदेशक सुबोध दत्ता, असीम नंदी, एम सी रक्षित, मुख्य अभियंता एवं परियोजना प्रधान चंद्रपुरा अजय कुमार दत्ता, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार, दीपक कुमार, बोकारो थर्मल के मुख्य अभियंता एवं परियोजना प्रधान, सुशांतो सनीग्राही, प्रोटोकोल आॅफीसर अभय भयंकर, पूर्णचंद्र वारिक, मदन सेन, सुजीत कुमार, रामसनेही शर्मा, अभिजीत चक्रवर्ती, सुनील कुमार सिंह, संजीव श्रीवास्तव, रोशन कुमार, मिरणाल भट्टाचार्य, अक्षय कुमार आदि उपस्थित थे।

Page 250 of 330

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse