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Published / 2022-06-26 03:39:24
असम बाढ़ संकट : अब तक 122 की मौत, 27 जिलों के 25 लाख लोग प्रभावित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। असम में शनिवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही तथा इस प्राकृतिक आपदा में चार और लोगों की मौत हो गयी। राज्य में 25.10 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कछार जिले का सिलचर शहर छठे दिन भी जलमग्न रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में बारपेटा, कछार, दर्रांग और गोलाघाट जिलों के लोग शामिल हैं। इसके साथ ही असम में इस साल बाढ़ तथा भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 122 पर पहुंच गयी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 27 जिलों में बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या अब घटकर 25.10 लाख रह गयी है, जबकि शुक्रवार तक 28 जिलों में यह आंकड़ा 33.03 लाख था। अधिकारियों ने कहा कि कुछ जिलों में स्थिति में मामूली सुधार हुआ है। नदियों का जल स्तर कुछ हद तक कम हुआ है। हालांकि, धुबरी में ब्रह्मपुत्र और नगांव में कोपिली नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उपायुक्त कीर्ति जल्ली ने कहा कि बेटकुंडी में बांध टूटने के कारण पिछले छह दिनों से जलमग्न सिलचर शहर में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास चल रहे हैं और प्रशासन बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने को प्राथमिकता देने के साथ सिलचर में बचाव अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से भोजन के पैकेट, पीने के पानी की बोतलें और अन्य जरूरी चीजें शहर में वितरित की जा रही हैं तथा यह कार्य तब तक जारी रहेगा जब तक कि स्थिति में सुधार नहीं हो जाता। बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए सिलचर में दो ड्रोन भी तैनात किए गए हैं। सिलचर में ईटानगर और भुवनेश्वर से पहुंचे 207 कर्मियों के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के आठ दलों तथा 120 कर्मियों वाली एक सैन्य टुकड़ी को तैनात करने के साथ दीमापुर से लाई गईं नौ नौकाओं को भी उतारा गया है। एएसडीएमए के एक अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ के 10 जवान और एसडीआरएफ के चार कर्मियों को बचाव अभियानों के लिए हवाई मार्ग से कछार लाया गया है। अधिकारियों ने कहा कि सिलचर में लगभग तीन लाख लोग भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं। एएसडीएमए बुलेटिन के मुताबिक, राज्य में सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित जिला बारपेटा है, जहां 8,76,842 लोग प्रभवित हुए हैं। इसके बाद नगांव (5,08,475), कामरूप (4,01,512) और धुबरी में 3,99,945 लोग प्रभावित हुए हैं। इसमें कहा गया है कि बाढ़ से 93 राजस्व मंडल और 3,510 गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि 2,65,788 लोगों ने 717 राहत शिविरों में शरण ली है। शिविरों में शरण नहीं लेने वाले बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 409 राहत केंद्रों से राहत सामग्री वितरित की गई। एएसडीएमए ने कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान 40 मकान पूरी तरह तथा 582 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बुलेटिन में कहा गया है कि बक्सा, विश्वनाथ, बोंगाईगांव, चिरांग, डिब्रूगढ़, दरांग, गोलाघाट, हैलाकांडी और कामरूप सहित कई स्थानों से बड़े पैमाने पर भूस्खलन की सूचना मिली है।

Published / 2022-06-24 17:09:07
25 की रात जर्मनी के लिए रवाना होंगे पीएम मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए जर्मनी के दौरे पर जाने वाले हैं। इस संबंध में विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया कि जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 25 जून देर रात जर्मनी के लिए निकलेंगे। वहां वे G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी द्विपक्षीय बैठक और चर्चा भी करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए अपने दौरे के दौरान एक सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के लोगों के साथ संवाद भी करेंगे। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26-27 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान यूक्रेन-रूस युद्ध, हिन्द प्रशांत क्षेत्र की स्थिति, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु सहित महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होगी। विनय क्वात्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 28 जून को संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे यूएई के पूर्व राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक रहे शेख खलीफा बिन जायेद अल नाह्यान के निधन पर व्यक्तिगत रूप से श्रद्धांजलि देंगे। प्रधानमंत्री इस दौरान यूएई के नए राष्ट्रपति व अबू धाबी का शासक चुने जाने पर शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाह्यान को बधाई भी देंगे। मोदी 28 जून की रात को ही यूएई से देश वापस लौटेंगे। क्वात्रा ने कहा कि यूक्रेन संकट शुरू होने के समय से ही भारत का रूख स्पष्ट है कि जल्द से जल्द युद्ध विराम होना चाहिए और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए। जी-7 समूह दुनिया के सात सबसे अमीर देशों का समूह है जिसकी अध्यक्षता अभी जर्मनी कर रहा है। इस समूह में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ईटली, जापान और अमेरिका शामिल है। इसमें अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को भी आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू सहित कई अन्य शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। क्वात्रा ने कहा कि जर्मनी की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी दो सत्रों को संबोधित कर सकते हैं जिसमें एक सत्र पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु का होगा और दूसरे सत्र में खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता और लोकतंत्र जैसे विषय शामिल हैं। इस शिखर बैठक से इतर प्रधानमंत्री सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले कुछ देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। कच्चे तेल की खरीद पर भारत का रुख विश्व समुदाय ने अच्छी तरह से समझा: विदेश सचिव विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने शुक्रवार को कहा कि कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत की व्यापारिक व्यवस्था देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित होती है और इस बारे में भारत के रुख को विश्व समुदाय अच्छी तरह से समझता है। क्वात्रा से पूछा गया था कि जर्मनी में आसन्न जी7 शिखर सम्मेलन में रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अगर भारत की आलोचना होती है तब नई दिल्ली का क्या रुख होगा।

Published / 2022-06-24 12:53:21
राष्ट्रपति चुनाव : अर्जुन मुंडा ने जनजातीय विधायकों व सांसदों से किया द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का अनुरोध

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति पद की दौड़ में द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी को केवल ‘राजनीतिक चश्मे’ से नहीं देखे जाने पर जोर देते हुए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने सभी आदिवासी विधायकों और दलों से राजनीति से ऊपर उठने और उनका समर्थन करने की अपील की। इस सप्ताह की शुरुआत में, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देश के शीर्ष संवैधानिक पद के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार के रूप में 64 वर्षीय मुर्मू के नाम की घोषणा की थी। झारखंड की राज्यपाल मुर्मू निर्वाचित होने पर भारत की राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी नेता होंगी, उनके चुने जाने की प्रबल संभावना है क्योंकि आंकड़े राजग के पक्ष में हैं। खुद एक आदिवासी नेता मुंडा ने मुर्मू के नामांकन को आदिवासी समुदाय के लिए बेहद खुशी और गर्व की बात करार दिया। मुंडा ने बताया, मुझे लगता है कि यह हमारी आजादी के 75वें वर्ष में देश के पूरे आदिवासी समुदाय के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। मैं सभी आदिवासी विधायकों, सांसदों और आदिवासियों की राजनीति करने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसी दलों से अपील करता हूं कि उनका समर्थन करें। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि उनके समर्थन की घोषणा करने में देरी क्यों हो रही है। शीर्ष संवैधानिक पद के लिए एक आदिवासी महिला को नामित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नड्डा को धन्यवाद देते हुए, मुंडा ने कहा, यह निर्णय उन राजनीतिक दलों को बेनकाब करता है, जिन्होंने आदिवासियों के बारे में बहुत सारी बातें कीं और खुद के आदिवासी कल्याण के ध्वजवाहक होने का दावा किया, लेकिन उनके लिए किया कुछ नहीं। हमारे प्रधानमंत्री उनके बारे में बेहद संवेदनशील हैं। मुर्मू की उम्मीदवारी को राजनीति के चश्मे से नहीं देखने की नेताओं से अपील करते हुए मंत्री ने कहा, उन्हें पहले आदिवासी के रूप में देखा जाना चाहिए, और इसलिए, सभी को आगे आना चाहिए और अपना सम्मान व्यक्त करना चाहिए...। ओडिशा के पिछड़े क्षेत्र मयूरभंज से आने वाली मुर्मू को मृदुभाषी और मिलनसार नेता माना जाता है। मुर्मू ने पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और राज्य में बीजू जनता दल के साथ पार्टी के गठबंधन के दौरान वह मंत्री भी रहीं। संयोग से, उनके नाम पर 2017 में भी शीर्ष संवैधानिक पद के लिए भाजपा की संभावित पसंद के रूप में चर्चा हुई थी लेकिन तब पार्टी ने राम नाथ कोविंद को इस पद के दावेदार के तौर पर चुना था।

Published / 2022-06-24 12:52:30
अग्निपथ का विरोध : हुई हिंसक घटनाओं के बाद जांच के दायरे में कोचिंग सेंटर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश में अग्निपथ के विरोध में हुई हिंसक घटनाओं के बाद सुरक्षाबलों की कोचिंग के लिए खोले गए सेंटर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। अलीगढ़ के बड़े यंग इंडिया कोचिंग सेंटर के मालिक सुधीर शर्मा को हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। अलीगढ़ जिले में 76 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 68 को एहतियातन हिरासत में लिया गया है, जिनमें से कम से कम 11 कोचिंग सेंटरों के संचालक हैं। कोचिंग सेंटर संचालकों की अधिकांश गिरफ्तारी टप्पल क्षेत्र से हुई है। दिल्ली के आसपास के सेंटर भी बंद : अग्निपथ योजना के विरोध में हिंसक रूप लेने के बाद अलीगढ़ में कोचिंग सेंटरों की जांच के साथ अब ऐसे कई केंद्र अब बंद हो गए हैं। जांच के डर से दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर टप्पल और उसके आसपास के सभी केंद्रों के शटर बंद कर दिए गए हैं। यहां तक कि निकटवर्ती गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर में भी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद करीब एक सप्ताह से केंद्र बंद कर दिए गए हैं। यंग इंडिया कोचिंग सेंटर कई परीक्षाओं जैसे सेना सेवाएं, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, यूपी सब-इंस्पेक्टर, यूपी पुलिस कांस्टेबल, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, वायु सेना, और यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा और अन्य के लिए कोचिंग प्रदान करता है। क्षेत्र के छोटे केंद्र पुलिस सेवाओं की तैयारी की पेशकश करते हैं। जांच के लिए एक विशेष समिति गठित : एसपी (ग्रामीण) पलाश बंसल ने मीडिया में दिए एक बयान में कहा है कि अलीगढ़ जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्र में अपंजीकृत कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है और वे जांच के दायरे में हैं। क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवक सशस्त्र बलों की तैयारी में लगे हुए हैं और कई ने अपनी तैयारी के तहत इन केंद्रों का लाभ उठाया है। जानकारी के मुताबिक टप्पल और पड़ोसी शहर जट्टारी के बीच में 11 कोचिंग सेंटर हैं, जो अब बंद हो चुके हैं। इनमें दाखिला लेने वाले ज्यादातर लड़के कंसेरा, जीकरपुर, जहानगढ़ और हेतलपुर जैसे आसपास के गांवों से हैं, जो सेना की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग सेंटर में खर्चा एक लाख के करीब : टप्पल का एक 23 वर्षीय युवक पिछले दो वर्षों से जिले के एक अन्य शहर इगलास के एक आवासीय कोचिंग सेंटर के अंदर और बाहर रहा है। उनका अनुमान है कि वह अब तक कोचिंग पर करीब 1 लाख रुपये खर्च कर चुका है। उसने बताया कि वह 18 साल की उम्र से तैयारी कर रहा है और उसने 2020 में फिजिकल टेस्ट पास कर लिया है। वह कहता है कि जब भी सेना की परीक्षा की तारीख की घोषणा की जाएगी, मैं कोचिंग सेंटर में शामिल हो जाऊंगा, जहां वे दो महीने के लिए लगभग 20,000-25,000 रुपये लेते हैं। केंद्र में 200 अन्य लड़के थे, यह एक बड़ा सेंटर था, जो अब विरोध के बाद बंद हो गया है। युवा अग्निपथ योजना की घोषणा से नाखुश हैं लेकिन फिर भी इसके लिए नामांकन करेंगे। वह कहते हैं कि वे खुश तो नहीं है पर उन्होंने तैयारी में इतना समय और पैसा खर्च किया है, और उन्हें काम करने की जरूरत है।

Published / 2022-06-24 11:00:02
राष्ट्रपति चुनाव : विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को मिली Z श्रेणी की सुरक्षा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केन्द्र सरकार ने राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कमांडो की "जेड" श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा शाखा को सिन्हा (84) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मिलने के बाद दस्ते ने सिन्हा की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। अधिकारियों ने कहा कि सिन्हा जब भी देश में कहीं आएंगे-जाएंगे, आठ से दस सशस्त्र जवान उनकी सुरक्षा करेंगे। गौरतलब है कि राजग की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को भी जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। समझा जाता है कि सिन्हा 27 जून को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे जिसके बाद वह अपने लिए वोट मांगने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 18 जुलाई को होगा तथा मतगणना 21 जुलाई को होगी। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है।

Published / 2022-06-24 06:37:25
कोरोना वैक्सीन से बची 42 लाख से ज्यादा भारतीयों की जान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोरोना टीकों के कारण 42 लाख से अधिक लोगों की जानें बचीं। द लैंसेट इंफेक्शस डिज़ीज पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। अध्ययन के अनुसार, विश्व स्तर पर गणितीय मॉडलिंग अध्ययन में पाया गया कि वैश्विक महामारी के दौरान covid-19 रोधी टीकों के बनने और उनके इस्तेमाल से संक्रमण से कम से कम दो करोड़ लोगों की जान जाने से बची। शोधकर्ताओं ने कहा कि टीकाकरण अभियान शुरू होने के पहले साल में करीब 1.98 करोड़ लोगों की जान टीकों से बची। यह अनुमान 185 देशों एवं क्षेत्रों में मौत के आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययन के अनुसार, अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2021 के अंत तक प्रत्येक देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण (दो या उससे अधिक खुराक देने) करने का लक्ष्य पूरा हो जाता, तो 5,99,300 और लोगों की जानें बच सकती थीं। अध्ययन आठ दिसंबर 2020 से आठ दिसंबर 2021 के बीच टीकों की मदद से बचाए गए लोगों की संख्या पर आधारित है। अध्ययन के प्रमुख लेखक ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के ओलिवर वाटसन ने कहा कि भारत की बात करें तो, इस दौरान करीब 42,10,000 लोगों की जान बचाई गई। यह हमारा एक अनुमान है, इस अनुमान के तहत संख्या 36,65,000-43,70,000 के बीच हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए आंकड़े इस अनुमान पर आधारित हैं कि वैश्विक महामारी के दौरान देश में 51,60,000 (48,24,000-56,29,000) लोगों की मौतें हो सकती थी, यह संख्या अब तक दर्ज किए गए मौत के आधिकारिक आंकड़े 5,24,941 का 10 गुना है। द इकोनॉमिस्ट के अनुमान के अनुसार, मई 2021 की शुरुआत तक भारत में covid-19 से 23 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि आधिकारिक आंकड़े लगभग 2,00,000 थे। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत में संक्रमण से 47 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया था, हालांकि भारत सरकार ने इस आंकड़े को पूरी तरह से खारिज किया है।

Published / 2022-06-23 14:04:54
इंद्रा कुमारी ने द्रौपदी मुर्मू को दी शुभकामनाएं

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व और राज्य की पहली महिला राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एनडीए समर्थित राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार घोषित किए जाने पर दलित सेना की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष (महिला विंग) इंद्रा कुमारी ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक महिला ही महिलाओं की समस्याएं समझ सकती है। साथ ही समाज के पिछड़े और जरूरतमंद आदिवासी परिवार का भला भी उसी समाज के नेतृत्व से संभव हो सकता है। उन्होंने विपक्ष से अपील भी की है कि इनकी विरुद्ध घोषित अपने प्रत्याशियों को वापस लेकर एक नारी का सम्मान करें। साथ ही उन्होंने श्रीमती मुर्मू को जीत की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं दी है।

Published / 2022-06-22 15:36:43
एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू 24 को भरेंगी अपना नामांकन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू 24 जून को अपना नामांकन भरेंगी। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को पार्टी की संसदीय समिति की बैठक में मुर्मू को एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर नामित किया था। 64 वर्षीय मुर्मू झारखंड की पूर्व गवर्नर हैं। अगर वो राष्ट्रपति का चुनाव जीतती हैं, तो वो देश के सर्वच्च पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी समुदाय की महिला होंगी। संख्या बल पर ग़ौर करें तो पता चलता है कि राष्ट्रपति चुनाव भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में ही जाता नज़र आ रहा है। पांच साल पहले दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाए जाने के बाद यह लगातार दूसरी बार है, जब पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नाम का ऐलान कर एक ठोस संदेश देने की कोशिश की है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके नाम का ऐलान करते हुए बताया था कि संसदीय समिति की बैठक में 20 नामों पर चर्चा की गई जिसमें द्रौपदी मुर्मू का नाम सबसे आगे था, जो पूर्वी भारत से आने वाली एक आदिवासी समुदाय की महिला हैं। उनके नाम के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। वहीं ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं द्रौपदी मुर्मू को नवीन पटनायक ने भी बधाई दी। कब है राष्ट्रपति का चुनाव ? चुनाव आयोग के मुताबिक़ राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को होंगे और 20 जुलाई को गिनती होगी। जबकि 25 जुलाई को जीतने वाले उम्मीदवार राष्ट्रपति पद के लिए शपथ लेंगे। वहीं चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आख़िरी तारीख़ 29 जून है। कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव : राष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष रूप से संसद और राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों की विधानसभा के सदस्यों द्वारा इलेक्टोरल कॉलेज के ज़रिए होता है। एक इलेक्टोरल कॉलेज में दस लाख वोट होते हैं। अनुमानित रूप से भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली एनडीए को 48 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है और माना जा रहा है कि क्षेत्रीय दल जिनका किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं है – बीजेपी को अपना समर्थन दे सकते हैं।

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