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Published / 2025-10-01 20:09:17
भारतीय स्वाभिमान को शिखर तक पहुंचाने का संकेत है भारत माता का चित्र सहित सिक्का


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    भारतीय स्वाभिमान को शिखर तक पहुंचाने का संकेत है भारत माता का चित्र सहित सिक्का।
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    01अक्टूबर, 2025, रांची: विश्व हिंदू परिषद झारखंड-बिहार के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने भारत सरकार के प्रति आभार प्रकट एवं बधाई देते हुए कहा है कि भारत सरकार ने आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में भारत माता के चित्र सहित सिक्का जारी कर भारतीय स्वाभिमान को शिखर तक पहुंचाने का संकेत प्रस्तुत किया है। भारतीय इतिहास में यह पहला ऐसा अवसर होगा जब किसी सिक्का में भारत माता का चित्र अंकित हो, यह देश को गौरवान्वित करने वाला उत्कृष्ट पहल है। 
    ~डॉ बिरेन्द्र साहु, क्षेत्र मंत्री।

Published / 2025-09-26 20:29:46
शारदीय नवरात्र : मातारानी की आराधना में लीन हैं प्रधानमंत्री

  • प्रधानमंत्री ने नवरात्र के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवरात्र के पांचवें दिन देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भक्ति संदेश और एक वीडियो साझा किया, जिसमें सभी भक्तों के लिए शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। प्रधानमंत्री ने एक पोस्ट में कहा, नवरात्र के पांचवें दिन, हम माँ स्कंदमाता की विशेष पूजा करते हैं। 

मैं उनके चरणों में नमन करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि वे सभी भक्तों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करें। उनकी ममता हर जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे। देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित नौ दिवसीय नवरात्र उत्सव पूरे देश में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

Published / 2025-09-26 19:49:54
भारत में बाल विवाह में उल्लेखनीय गिरावट, दुनिया के लिए बना सबक

  • एक रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह की दर में लड़कियों में 69% और लड़कों में 72% की गिरावट
  • 84% की गिरावट के साथ असम शीर्ष पर, इसके बाद महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान और कर्नाटक का स्थान
  • बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने जारी की रिपोर्ट 
  • बाल विवाह के खिलाफ कड़े कदमों के लिए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार से सम्मानित किया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में बाल विवाह की दर में बेतहाशा गिरावट दर्ज की गई है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) की ओर से जारी शोध रिपोर्ट, ‘टिपिंग प्वाइंट टू जीरो : एविडेंस टूवार्ड्स ए चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया’ के अनुसार देश में लड़कियों के बाल विवाह की दर में 69 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि लड़कों में इस दर में 72 प्रतिशत की कमी आई है। 

रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह की रोकथाम के लिए गिरफ्तारियां व एफआईआर जैसे कानूनी उपाय सबसे प्रभावी साबित हुए हैं। रिपोर्ट बताती है कि लड़कियों की बाल विवाह की दर में सबसे ज्यादा 84 प्रतिशत गिरावट असम में दर्ज की गई है। इसके बाद संयुक्त रूप से महाराष्ट्र व बिहार (70 प्रतिशत)  का स्थान है जबकि राजस्थान व कर्नाटक में क्रम से 66 और 55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान केंद्र, राज्य सरकारों और नागरिक समाज संगठनों के समन्वित प्रयासों की बदौलत बाल विवाह की दर में यह अप्रत्याशित गिरावट संभव हुई है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 99 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने मुख्यत: गैरसरकारी संगठनों के जागरूकता अभियानों, स्कूलों व पंचायतों के जरिए भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के बारे में सुना या जाना है।

यह रिपोर्ट न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर एक अलग कार्यक्रम में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने जारी की। इस रिपोर्ट को जेआरसी के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के शोध प्रभाग सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंज बिहैवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने तैयार किया था। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। बाल विवाह के रोकथाम की दिशा में असम की अभूतपूर्व उपलब्धियों को मान्यता देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार से सम्मानित किया।

अगर इस संदर्भ में देखें कि 2019-21 तक देश में हर मिनट तीन बाल विवाह होते थे जबकि रोजाना सिर्फ तीन मामलों की ही शिकायत दर्ज हो पाती थी तो रिपोर्ट के नतीजे देश में ऐतिहासिक बदलावों की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि आज लगभग हर व्यक्ति बाल विवाह से जुड़े कानूनों के बारे में जानता है और कुछ साल पहले तक यह बदलाव अकल्पनीय था। 

रिपोर्ट इस तथ्य को उजागर करती है कि 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए 2024 में शुरू हुए भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को बिहार, असम व महाराष्ट्र में जन-जन तक पहुंचाने में गैरसरकारी संगठनों की सबसे अहम भूमिका रही है। बिहार में 93%, महाराष्ट्र में 89% और असम में 88% लोगों को गैरसरकारी संगठनों के जरिए इस अभियान के बारे में जानकारी मिली। 

राजस्थान व महाराष्ट्र में इस अभियान के बारे में जागरूकता फैलाने में स्कूलों की अहम भूमिका रही जहां क्रम से 87 व 77 प्रतिशत लोगों को स्कूलों से इसके बारे में पता चला। बच्चों के खिलाफ इस अपराध के खात्मे के लिए सभी हितधारकों के बीच सामंजस्य व समन्वय और कानून पर सख्ती से अमल की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, भारत आज बाल विवाह के खात्मे के कगार पर है। 

यह केवल एक सतत विकास लक्ष्य को हासिल करना भर ही नहीं है बल्कि हमने दुनिया के सामने यह साबित किया है कि इसका खात्मा न सिर्फ संभव है बल्कि यह होकर रहेगा। सफलता के सूत्र बिलकुल स्पष्ट हैं - सुरक्षा से पहले रोकथाम, अभियोजन से पहले सुरक्षा और रोकथाम के लिए निवारक उपाय के तौर पर अभियोजन। यह सिर्फ भारत की जीत नहीं हैं बल्कि दुनिया के लिए एक ब्लूप्रिंट है। 

सरकार का दृढ़ संकल्प, मजबूत साझेदारियां, समुदायों की भागीदारी, बच्चों की सहभागिता, सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच और कानून के शासन पर सख्ती से अमल हो तो बाल विवाह मुक्त विश्व हमारी पहुंच में है। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं और ग्राम पंचायतों के साथ करीबी समन्वय में काम करता है। 

रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल सभी राज्यों के 31% गांवों में 6-18 आयुवर्ग की सभी लड़कियां स्कूल जा रही थीं लेकिन इसमें खासी विषमताएं देखने को मिलीं। महाराष्ट्र के 51% गांवों में सभी लड़कियां स्कूल में थीं जबकि बिहार में सिर्फ 9% गांवों में सभी लड़कियां स्कूल में थीं। सर्वे में शामिल लोगों ने गरीबी (88%), बुनियादी ढांचे की कमी (47%), सुरक्षा (42%) और परिवहन के साधनों की कमी (24%) को लड़कियों की शिक्षा में सबसे बड़ी रुकावट बताया। इसी तरह 91% लोगों ने गरीबी और 44% ने सुरक्षा को बाल विवाह के पीछे सबसे बड़ा कारण बताया।

एक ऐसे समाज में जहां बाल विवाह की स्वीकार्यता थी और जिसके बारे में पुलिस को सूचना देना निषिद्ध समझा जाता था, भारत में हालिया वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। सर्वे में शामिल 63% लोगों ने कहा कि अब वे बाल विवाह के बारे में उचित अधिकारियों को सूचित करने में खुद को काफी सहज महसूस करते हैं जबकि 33% ने कहा कि वे कुछ हद तक सहज महसूस करते हैं। 

रिपोर्ट में 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे के लिए बाल विवाह कानूनों पर सख्ती से अमल, सूचना तंत्र को बेहतर बनाने, विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने और बाल विवाह मुक्त भारत के पोर्टल पर ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों की सिफारिश की गई है। साथ ही, बाल विवाह के खिलाफ लोगों को लामबंद करने के उद्देश्य से बाल विवाह मुक्त भारत के लिए एक राष्ट्रीय दिवस भी तय करने की सिफारिश की गई है।

यह रिपोर्ट देश के पांच राज्यों के 757 गांवों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। सर्वे के लिए इन सभी राज्यों व गांवों का इस तरह क्षेत्रवार तरीके से चयन किया गया कि वे देश के विविधता भरे सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों को परिलक्षित कर सकें। बहुचरणीय स्तरीकृत सांयोगिक नमूना (मल्टीस्टेज स्ट्रैटिफाइट रेंडम सेंपलिंग) आधारित इस सर्वे में गांवों के आंकड़े जुटाने के लिए सबसे पहले आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, सहायक नर्सों, दाइयों और पंचायत सदस्यों जैसे अग्रिम पंक्ति के लोगों से संपर्क किया गया।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम क्रिएटिंग ए चाइल्ड मैरेज फ्री वर्ल्ड : बिल्डिंग द केस फॉर प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड प्रासिक्यूशन का आयोजन सिएरा लियोन गणतंत्र की प्रथम महिला व ओएएफएलएडी की अध्यक्ष डॉ. फातिमा मॉडा बियो, संयुक्त राष्ट्र में सिएरा लियोन के स्थायी मिशन और केन्या के साथ संयुक्त रूप से किया जिसमें वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन और जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड की भी सहभागिता थी।

इस कार्यक्रम को बच्चों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिनिधि डॉ. नजात माला एमजिद, नार्वे सरकार के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एसमंड ऑउक्रस्ट, केन्या सरकार के लिंग, संस्कृति एवं बाल सेवाएं विभाग में में बाल सेवाओं के प्रधान सचिव कैरेन अगेंगो, मानवाधिकारों पर फ्रांस के अंबेसडर-एट-लार्ज इसाबेल रोम, अंतर संसदीय यूनियन की सदस्य मिली ओधियाम्बू और राबर्ट एफ. केनेडी ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष कैरी केनेडी ने भी संबोधित किया।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने वर्ष 2023 से अब तक केवल भारत में ही पांच लाख से अधिक बच्चों की मदद की है और हर घंटे 18 बाल विवाह रोक रहा है। अप्रैल 2023 से सितंबर 2025 के बीच इस नेटवर्क ने 3,97,849 बाल विवाह रोके,  ट्रैफिकिंग और बंधुआ मजदूरी के शिकार 1,09,548 बच्चों को मुक्त कराया, ट्रैफिकिंग गिरोहों के खिलाफ 74,375 से भी ज्यादा मामले दर्ज कराए और 32,000 यौन शोषण पीड़ित बच्चों को सहयोग प्रदान किया।

 जेआरसी बच्चों के खिलाफ हिंसा के खात्मे के लिए अंग्रेजी के 3पी यानी प्रासीक्यूशन, प्रीवेंशन और प्रोटेक्शन (अभियोजन, रोकथाम और सुरक्षा) को आगे बढ़ाने वाला नागरिक समाज संगठनों का पहला नेटवर्क बन गया है। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

Published / 2025-09-22 14:51:09
जीएसटी रिफॉर्म से नवरात्रि पर झूम रहे देशवासी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में सोमवार (22 सितंबर) से शारदीय नवरात्रि के साथ ही गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) का नया ढांचा लागू हो गया है। सरकार ने इसे GST 2.0 नाम दिया है। इस बदलाव का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजों को सस्ता कर दिया है, जबकि लग्जरी और हानिकारक सामानों पर टैक्स बढ़ा दिया गया है।

अब कितने स्लैब रह गए हैं? नई टैक्स व्यवस्था में अब सिर्फ तीन मुख्य स्लैब तय किए गए हैं –

  1. 5 प्रतिशत
  2. 18 प्रतिशत
  3. 40 प्रतिशत (सिन गुड्स पर)

पहले की तरह अलग-अलग टैक्स दरें अब नहीं होंगी। छोटे और रोजमर्रा के सामान पर टैक्स घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि लग्जरी और नुकसानदायक सामानों (सिन गुड्स) पर 40 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया है।

कौन सी चीजें सस्ती हुई?

22 सितंबर से कई जरूरी और रोजमर्रा की चीजें अब कम दामों पर मिलेंगी। इनमें शामिल हैं –

  • साबुन और शैम्पू
  • बेबी डायपर
  • टूथपेस्ट और मंजन
  • रेजर और आफ्टर-शेव लोशन
  • कंपनियों ने नई रेट लिस्ट भी जारी कर दी है, ताकि ग्राहक आसानी से पुराने और नए दाम की तुलना कर सकें।

कौन सी चीजें महंगी हुई?

सरकार ने लग्जरी और हानिकारक चीजों पर टैक्स बढ़ा दिया है। पहले इन पर 28 प्रतिशत GST लगता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।

इनमें शामिल हैं –

  • हैवी इंजन वाली गाड़ियां और बाइक्स
  • पेट्रोल कार (1200CC से ऊपर)
  • डीजल कार (1500CC से ऊपर)
  • बाइक (350CC से ऊपर)
  • तंबाकू उत्पाद
  • गुटखा
  • चबाने वाला तंबाकू
  • सिगरेट
  • बड़े और छोटे सिगार
  • ड्रिंक्स
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
  • शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक्स
  • कैफीन वाले एनर्जी ड्रिंक्स
  • इसके अलावा, प्राइवेट एयरक्राफ्ट, स्पोर्ट्स बोट, लग्जरी घड़ियां, आर्टिक जूलरी, कोक और लिग्नाइट पर भी अब ज्यादा GST लगेगा, जिससे ये चीजें महंगी हो गई हैं।

Published / 2025-09-21 11:21:19
देश को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री, शाम पांच बजे होगा राष्ट्र के नाम संबोधन

एबीएन सेंट्रल डेस्क।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश को संबोधित करेंगे। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन शाम पांच बजे होगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के विषय के बारे में मीडिया रिपोर्ट में कयास लगाया जा रहा है कि वे जीएसटी के रिफॉर्म पर बात कर सकते हैं।बता दें कि, देश में कल से जीएसटी 2.0 की नई दरें लागू होंगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश को संबोधित करेंगे।

 जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन शाम पांच बजे होगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के विषय के बारे में मीडिया रिपोर्ट में कयास लगाया जा रहा है कि वे जीएसटी के रिफॉर्म पर बात कर सकते हैं।बता दें कि, देश में कल से जीएसटी 2.0 की नई दरें लागू होंगी।

Published / 2025-09-21 11:03:36
रेल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर से नया नियम लागू

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेलवे में सफर करने वालों के लिए एक अहम अपडेट है। 1 अक्टूबर 2025 से IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन जनरल रिजर्वेशन टिकट बुक करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब बुकिंग विंडो खुलने के पहले 15 मिनट के भीतर टिकट केवल उन्हीं यात्रियों को मिल पाएंगे, जिन्होंने अपने IRCTC अकाउंट को आधार नंबर से वेरीफाई किया है। यह फैसला भारतीय रेलवे द्वारा टिकटों की बुकिंग में धोखाधड़ी और बिचौलियों की भूमिका को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। बुकिंग के शुरुआती मिनटों में अक्सर एजेंट और सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर टिकट ब्लॉक कर लिए जाते हैं, जिससे आम यात्रियों को सीट पाने में मुश्किल होती है।

नया नियम कैसे लागू होगा?
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि कोई यात्री 15 नवंबर की यात्रा के लिए नई दिल्ली से वाराणसी जाने वाली शिव गंगा एक्सप्रेस में टिकट बुक करना चाहता है। इस ट्रेन के लिए बुकिंग विंडो 16 सितंबर की रात 12:20 बजे खुलेगी। अब रात 12:20 से 12:35 बजे तक के समय में केवल वही यात्री टिकट बुक कर पाएंगे जिनका IRCTC अकाउंट आधार प्रमाणीकरण से जुड़ा हुआ है। इस विशेष 15 मिनट के बाद, यानी 12:35 बजे से लेकर रात 11:45 बजे तक सामान्य प्रक्रिया से बिना आधार लिंक वाले यूजर्स भी टिकट बुक कर सकेंगे। लेकिन चूंकि अधिकांश लोकप्रिय ट्रेनों की सीटें पहले ही 10-15 मिनट में भर जाती हैं, ऐसे में आधार लिंक न कराने वाले यात्रियों को सीट मिलने में कठिनाई हो सकती है।

सरकार का मकसद क्या है?
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह कदम ईमानदार यात्रियों को प्राथमिकता देने और बिचौलियों द्वारा टिकट बुकिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। त्योहारों, शादी के सीजन और छुट्टियों में जब ट्रेन टिकटों की मांग सबसे ज़्यादा होती है, तब यह नियम टिकटिंग को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद करेगा।

  • क्या PRS काउंटर और एजेंटों पर भी लागू होगा यह नियम?
    नहीं.. यह नया नियम केवल IRCTC के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म – वेबसाइट और मोबाइल ऐप – पर बुकिंग करने वाले यात्रियों पर लागू होगा। रेलवे के कम्प्यूटरीकृत PRS काउंटरों पर टिकट बुकिंग की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह, अधिकृत एजेंटों पर पहले से ही बुकिंग विंडो खुलने के 10 मिनट बाद तक टिकट बुक करने की अनुमति नहीं है, और इस पाबंदी में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।
  • बुकिंग विंडो कब खुलती है?
    सामान्य आरक्षण बुकिंग यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू हो जाती है। हर दिन बुकिंग विंडो रात 12:20 बजे से रात 11:45 बजे तक खुली रहती है। नए नियम के अनुसार, पहले 15 मिनट (12:20 से 12:35 बजे तक) केवल आधार-वेरीफाइड यूजर्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

Published / 2025-09-19 20:35:16
देश में अगस्त 2027 से चलने लगेंगी बुलेट ट्रेन

अगस्त 2027 से चलने लगेगी देश में बुलेट ट्रेन, पहले फेज में तय करेगी 50 किमी की दूरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई और अहमदाबाद के बीच 2027 में बुलेट ट्रेन चलनी शुरू हो जायेगी। इस दौरान सिर्फ 2 घंटे में ही मुंबई से अहमदाबाद पहुंचा जा सकेगा। शुक्रवार रेल मंत्री ने अश्विनी वैष्णव यह जानकारी साझा की है। बताया जा रहा है कि सूरत के पचास किलोमीटर के सेक्शन पर पहली बुलेट ट्रेन 2027 में चलेगी। 

यह बुलेट ट्रेन का पहला फेज है जो यात्रियों के लिए खोला जायेगा। रेलमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर एक वीडियो भी शेयर की है। निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन का काम बहुत तेजी से हो रहा है। 

माना जा रहा है कि जिस तेजी से प्रोजेक्ट का काम चल रहा है उससे लग रहा है कि 2027 में ट्रैक पर पहली बुलेन ट्रेन दौड़ने लगेगी। इस ट्रेन के चलते से मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी भी सिमटकर रह करीब 2 घंटे रह जायेगी। इस ट्रेन के चलने दोनों शहरों के बीच कारोबार भी आसान हो जायेगा।

Published / 2025-09-19 13:43:07
भाजपा को जल्द मिल जायेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष

  • बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस खत्म? जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लंबे समय से उठ रही अनिश्चितता अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए नए अध्यक्ष के चयन को टाले जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।

वहीं पार्टी और इसके जनक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच इस पद को लेकर सहमति न बनने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। इसी कारण 2017 से भाजपा अध्यक्ष के पद पर जेपी नड्डा का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जा रहा है और फिलहाल इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। हाल ही में इस मसले को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी सवाल पूछा गया था।

जब उनसे पूछा गया कि आखिर भाजपा अध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं हो पा रहा और क्या पार्टी तथा संघ के बीच कोई मतभेद हैं, तो गडकरी ने इस सवाल का जवाब देते हुए मुस्कुराते हुए कहा कि यह सवाल सही व्यक्ति से नहीं पूछा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में सही जवाब भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा ही दे सकते हैं।

इस संदर्भ में गडकरी ने कहा कि सवाल सही है, लेकिन गलत व्यक्ति से किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी और संघ के बीच संबंधों को लेकर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल नड्डा से पूछे जाएं क्योंकि वे ही इस मामले के जिम्मेदार और सही उत्तरदाता हैं।

भाजपा अध्यक्ष पद की बात करें तो 2017 से जेपी नड्डा इस पद पर बने हुए हैं। इससे पहले, 2014 से 2017 तक अमित शाह पार्टी अध्यक्ष रहे, जिन्होंने दो बार यह जिम्मेदारी संभाली। 2010 से 2013 तक नितिन गडकरी इस पद पर थे। 

इसके बाद मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर स्थिरता दिखी, लेकिन अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संघ के बीच एक साझा नाम को लेकर सहमति न बन पाने के कारण चुनाव टलते रहे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह मनमुटाव और असमंजस ही कारण है कि नड्डा का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जा रहा है और इस पद के लिए कोई नया चुनाव आयोजित नहीं किया जा रहा। 

राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और संघ के प्रभाव की जटिलताओं का नतीजा बता रहे हैं। इस बीच, यह भी कहा जा रहा है कि आगामी दिनों में इस विषय पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है और पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मामले पर अपनी ठोस प्रतिक्रिया देगा।

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