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Published / 2025-10-30 13:35:01
कमला नेहरू कॉलेज में हुई संगोष्ठी राष्ट्रवाद और रामचरितमानस एवं दोहा वाचन प्रतियोगिता पुरस्कार कार्यक्रम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कमला नेहरू कॉलेज हिंदी विभाग एवं संस्कृति संज्ञान संस्था द्वारा तुलसी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी राष्ट्रवाद और रामचरितमानस एवं दोहा वाचन प्रतियोगिता पुरस्कार कार्यक्रम का आयोजन कमला नेहरू कॉलेज के सम्मेलन कक्ष में 29 अक्टूबर 2025 को संपन्न हुआ।

कमला नेहरू कॉलेज के सम्मेलन कक्षा में 29 अक्टूबर 2025 को आयोजित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर आदित्य त्रिपाठी प्रोफेसर कॉमर्स श्यामलाल कॉलेज सांध्य, कार्यक्रम के अध्यक्ष अनिल पांडे, वरिष्ठ पत्रकार एवं निदेशक इंडिया फॉर चिल्ड्रन, अति विशिष्ट अतिथि गौरव ललित, वरिष्ठ पत्रकार पीटीआई कमला नेहरू, कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर पवित्रा भारद्वाज, कार्यक्रम के आयोजक डॉ प्रदीप कुमार सिंघल राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कृति संज्ञान एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ साधना अग्रवाल प्रभारी हिंदी विभाग कमला नेहरू कॉलेज, प्रोफेसर पवित्रा भारद्वाज जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि रामचरितमानस आदर्श जीवन जीने का एक माध्यम है हमारी आत्मा और सोच में राम व्याप्त है।

प्रोफेसर आदित्य त्रिपाठी जी ने कहा कि रामचरितमानस और राष्ट्रवाद विषय रामचरितमानस को समझने के लिए हमें सबसे पहले प्रभु श्री राम को समझना होगा। प्रभु श्री राम का जीवन हमें मर्यादित रहना सिखाता है। विश्वामित्र तमाम शक्तियां होने के बावजूद राजा दशरथ से श्री राम और लक्ष्मण को राक्षसों का नाश करने के लिए मांगते हैं। ऐसा वह युवाओं को आगे लाने के लिए करते हैं। हमें अगर जीवन में सफल होना है तो अपने आसपास सकारात्मक और वरिष्ठ जनों से संपर्क स्थापित कर उनका मार्गदर्शन सदैव लेते रहना चाहिए।

डॉ प्रदीप कुमार सिंघल अध्यक्ष संस्कृति संज्ञान संस्थान ने बताया कि संस्था का उद्देश्य रामचरितमानस के द्वारा छात्र-छात्राओं और युवाओं का व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण करना है। अनिल पाण्डेय ने कहा कि रामचरितमानस में एक राष्ट्र की संकल्पना का सुदृढ़ उल्लेख मिलता है। रामचरितमानस के संदर्भ में राष्ट्रवाद हमारे भीतर पहले से ही व्याप्त है। राष्ट्र तभी सुरक्षित होगा जब हम सफल और सक्षम होंगे किंतु इसका यह अभिप्राय बिल्कुल नहीं है कि हम किसी पर आक्रमण कर दें।

रामचरितमानस  को आदर्श जीवन जीने का एक माध्यम बनाएं। 20 सितंबर 2025 को कमला नेहरू कॉलेज में श्री रामचरितमानस दोहा वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 से ज्यादा महाविद्यालयों के 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रत्येक विद्यार्थी ने तीन दोहे या चौपाइयों की प्रस्तुति की। इस प्रतियोगिता के प्रथम 13 स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।

Published / 2025-10-29 20:19:25
निवेश में सुस्ती, कारोबारी जगत का उत्साह बढ़ाना जरूरी

कमजोर मांग ने देश के निजी निवेश को एक दशक से अधिक समय से धीमा बनाए रखा है। इससे वृद्धि को लेकर गंभीर चुनौती उत्पन्न हो रही है। बता रहे हैं जनक राज और आशी गुप्ता... 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में निजी कॉरपोरेट निवेश के तीन चिंताजनक लक्षण रहे हैं। पहला, एक मात्रात्मक परीक्षण बताता है कि वर्ष 2011-12 में एक ढांचागत रुकावट आयी जो अर्थव्यवस्था में निजी निवेश के व्यवहार में बदलाव को रेखांकित करती है। निजी सकल स्थिर पूंजी निर्माण वृद्धि में तेज गिरावट देखी गयी और वर्ष 2003-12 के 25.2 फीसदी तथा 2003-08 के 40.7 फीसदी से कम होकर वर्ष 2012-24 में यह 10.3 फीसदी रह गयी। 

2011-12 वह वर्ष था जब वृहद आर्थिक बुनियाद की कमजोरी के कारण अनिश्चितता सूचकांक अपने उच्चतम स्तर पर था। उस समय मुद्रास्फीति उच्चतम स्तर पर थी, चालू खाते के घाटे में अस्थिरता थी, बड़े पैमाने पर पूंजी बाहर जा रही थी और विनिमय दर दबाव में थी। भारत को वर्ष 2013 में पांच सबसे नाजुक उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा था। 

दूसरा, एक्सिलरेटर प्रभाव (आर्थिक गतिविधियों में इजाफे की प्रतिक्रिया स्वरूप निजी निवेश में इजाफा) 2011-12 के बाद तेजी से कमजोर पड़ा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक फीसदी की बढ़ोतरी निजी पूंजीगत व्यय में करीब 1.5 फीसदी इजाफे के रूप में सामने आती है। इसके पहले वर्ष 2003-12 में यह वृद्धि करीब 3 फीसदी थी। इससे पता चलता है कि जीडीपी वृद्धि अब निवेश को उतना नहीं बढ़ाती जितना 2011-12 के पहले बढ़ाती थी। 

तीसरी बात यह है कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय से निजी निवेश में शायद ही कोई वृद्धि होती है। वर्ष2003-12 के दौरान, सार्वजनिक निवेश और एक वर्ष आगे के निजी निवेश के बीच सहसंबंध 0.54 था, जो 2012-13 के बाद घटकर मात्र 0.13 रह गया है। निजी निवेश में कमी उन क्षेत्रों में सबसे अधिक रही जिनमें सबसे अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका है। 

उदाहरण के लिए भारी निवेश वाले और रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र मसलन विनिर्माण, व्यापार और होटल, निर्माण और बिजली जो कि एक साथ मिलकर सकल स्थिर पूंजी निर्माण का करीब 40 फीसदी तैयार करते हैं। निजी कॉरपोरेट निवेश विशुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की आवक से भी प्रभावित हुआ है। वर्ष 2024-25 में यह जीडीपी का करीब 0.01 फीसदी रहा जो 25 साल का न्यूनतम आंकड़ा है। 

ऐसा तब हुआ जबकि रिकॉर्ड सकल आवक दर्ज की गयी। कमजोर मांग का असर: निजी पूंजीगत व्यय में कमी की वजह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर मांग रही है। यह क्षमताओं के कमजोर इस्तेमाल के रूप में सामने आया जो 70-75 फीसदी रहा। ध्यान रहे कि यह नये निवेश को गति देने के लिए आवश्यक 80 फीसदी की सीमा से काफी कम रहा। खासतौर पर स्टील, सीमेंट और यात्री वाहन क्षेत्र में क्षमता से कम इस्तेमाल देखने को मिला। 

वास्तविक निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) वृद्धि 2012-24 के दौरान 6.1 फीसदी के थोड़े उच्च स्तर पर थी जबकि 2002 से 2012 के बीच यह 6 फीसदी थी। लेकिल नॉमिनल संदर्भ में यह 11.6 फीसदी बनाम 13.5 फीसदी के साथ काफी कमजोर थी। जीडीपी के घटकों के नॉमिनल मूल्यों को वास्तविक रूप में बदलने के लिए इस्तेमाल होने वाले थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की मुद्रास्फीति दरें 2012-13 के बाद काफी कम रही हैं, जिसके कारण पीएफसीई का आंकड़ा ऊपर चला गया। 

इसका अर्थ यह है कि वास्तविक निजी उपभोग उतना मजबूत नहीं रहा है जितना आंकड़ों में दर्शाया गया है, क्योंकि मूल्य सूचकांक के अनुचित उपयोग से आंकड़ों में विकृति आयी है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह उत्पादक मूल्य सूचकांक के उपयोग को शीघ्रता से लागू करे और नॉमिनल मूल्यों को वास्तविक रूप में बदलने के लिए दोहरे अपस्फीतिकारक अर्थात् इनपुट और आउटपुट के लिए अलग-अलग डिफ्लेटर्स का प्रयोग करे, ताकि आर्थिक गतिविधियों और उनके प्रमुख घटकों की सटीक तस्वीर प्राप्त की जा सके। 

देश में कमजोर निजी खपत में कई कारकों का योगदान रहा है मसलन वेतन भत्तों में कमी, अभी हाल तक उच्च वस्तु एवं सेवा कर दरें और परिवारों की बढ़ती वित्तीय जवाबदेहियां। बाहरी मांग में आई मंदी का असर हमारे गैर-तेल निर्यात पर गंभीर रूप से पड़ा है, जो वर्ष 2012-24 के दौरान नाममात्र रूप में औसतन 8.1 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ा, जबकि 2003-12 के दौरान यह वृद्धि दर 19.9 फीसदी थी। कुल पूंजीगत व्यय में आई सुस्ती का संकेत इससे भी मिलता है कि पूंजीगत वस्तुओं का आयात भी धीमा पड़ गया है। 

साफ कहें तो वर्ष 2008 में उत्तर अटलांटिक वित्तीय संकट के बाद सभी उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निजी निवेश कम हुआ था। इसके कारणों में अन्य बातों के अलावा धीमा वैश्विक व्यापार और घटती एफडीआई आवक भी शामिल थे। हालांकि भारत में निजी निवेश में तेज गिरावट तीन वजहों से अधिक चिंताजनक है। पहली बात, भारत अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बाहरी मांग पर उतना निर्भर नहीं करता। दूसरी बात, हालिया लगातार राजकोषीय अनुशासन के बावजूद, आम तौर पर सरकार पूंजीगत व्यय को बढ़ाने में सक्षम रही। 

इसलिए, भारत में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में उतनी गिरावट नहीं आई जितनी अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में देखी गयी। तीसरी बात, देश का व्यावसायिक वातावरण अन्य कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक अनुकूल रहा है। इसका कारण है वित्त तक आसान पहुंच, महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों की शुरुआत और राजनीतिक स्थिरता। 

सुधरता परिदृश्य: अब एक दशक से अधिक समय हो गया है जब निजी निवेश की वृद्धि दर कमजोर बनी हुई है। हालांकि, हाल की कई घटनाएं इसके पुनरुद्धार के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं। चूंकि निजी पूंजीगत व्यय में मंदी का मूल कारण कमजोर मांग रहा है, सरकार ने निजी उपभोग को बढ़ावा देने के लिए सराहनीय कदम उठाए हैं। पहले पिछले केंद्रीय बजट में प्रत्यक्ष कर राहत प्रदान करके, और बाद में जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाकर। 

कंपनियों ने अपने कर्ज का बोझ कम किया है और बैंकों ने अपनी बहीखाते को साफ किया है। ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट आयी है, और बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। प्राथमिक पूंजी बाजार से संसाधनों की जुटान 2019-20 के बाद से काफी बेहतर हुई है। कुल आयात में पूंजीगत वस्तुओं की हिस्सेदारी हाल के वर्षों में बढ़ी है। निवेश के दृष्टिकोण से एकमात्र प्रमुख चिंता का विषय वैश्विक वृहद आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। 

लब्बोलुआब यह है कि निजी पूंजीगत व्यय के चक्र के लिए मांग में सतत वृद्धि और अनुकूल कारोबारी माहौल दोनों आवश्यक हैं। ऐसे में हाल ही में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाना सरकार द्वारा उठाया गया एक अहम कदम है जो निजी उपभोग को बढ़ा सकता है। इसके बाद साझा लाभ को ध्यान में रखते हुए अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन क्षेत्रों को चिह्नित करने की आवश्यकता है जिनमें ढांचागत सुधारों की मदद से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और कारोबारी जगत में उत्साह उत्पन्न किया जा सकता है। (लेखक सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस में वरिष्ठ फेलो और शोध सहायक हैं। यह उनके निजी विचार हैं)

Published / 2025-10-29 12:11:04
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में भरी उड़ान

  • राष्ट्रपति मुर्मू ने राफेल में भरी उड़ान, अंबाला एयरबेस से बुलंद भारत का पैगाम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से देश के अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। यह पहली मौका है जब भारतीय राष्ट्रपति राफेल में सवार हुईं।

इससे पहले, 8 अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति मुर्मू ने तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरकर इतिहास रचा था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मुंबई दौरे पर रहेंगे। शाम 4 बजे वे नेस्को एग्ज़िबिशन सेंटर में आयोजित इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के तहत होने वाले मैरीटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करेंगे। 

प्रधानमंत्री इस दौरान ग्लोबल मैरीटाइम सीईओ फोरम की भी अध्यक्षता करेंगे। इस कार्यक्रम में देश और विदेश की प्रमुख समुद्री कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिसमें भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार का हब बनाने की दिशा में निवेश और साझेदारी पर चर्चा होगी।

उधर, राजधानी दिल्ली में बीती रात गोलियों की गूंज ने एक बार फिर से अपराधियों की बेखौफ मौजूदगी का अहसास करा दिया। एक ओर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के न्यू उस्मानपुर में पुलिस और बदमाशों के बीच एनकाउंटर हुआ, तो वहीं नजफगढ़ में गैंगवार जैसी वारदात से इलाका दहल उठा।

हालांकि दोनों ही घटनाओं में कोई पुलिसकर्मी या आम नागरिक हताहत नहीं हुआ, लेकिन राजधानी में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। दूसरी तरफ महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और विधायक बच्चू कड़ू के नेतृत्व में हजारों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ अमरावती से नागपुर पहुंचे हैं। 

किसान कर्ज माफी और कृषि नीतियों में सुधार की मांग को लेकर नागपुर में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी है और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

Published / 2025-10-26 14:44:16
मन की बात में पीएम मोदी ने की छठ महापर्व की चर्चा

  • छठ महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतिबिंब... मन की बात में PM मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 127वें एपिसोड की शुरुआत छठ की शुभकामनाओं के साथ की। पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि वे अपने आसपास छठ पूजा को देखें, काफी सुखद अनुभव होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 127वें एपिसोड की शुरुआत छठ की शुभकामनाओं के साथ की।

पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि वे अपने आसपास छठ पूजा को देखें, काफी सुखद अनुभव होगा। छठ का महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतिबिंब है। छठ के घाटों पर समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा होता है। ये दृश्य भारत की सामाजिक एकता का सबसे सुंदर उदाहरण है।

PM मोदी के मन की बात की बड़ी बातें 

गुजरात के वन विभाग ने मैनग्रोव (Mangrove) के महत्व को समझते हुए खास मुहिम चलाई हुई है। पांच साल पहले वन विभाग की टीमों ने अहमदाबाद के नजदीक धोलेरा में Mangrove लगाने का काम शुरू किया था, और आज धोलेरा तट पर साढ़े तीन हजार हेक्टेयर में Mangrove फैल चुके हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि करीब पांच वर्ष पहले मैंने इस कार्यक्रम में भारतीय नस्ल के श्वान यानी dogs की चर्चा की थी। मैंने देशवासियों के साथ ही अपने सुरक्षा बलों से आग्रह किया था कि वे भारतीय नस्ल के डॉग्स को अपनाएं, क्योंकि वो हमारे परिवेश और परिस्थितियों के अनुरूप ज्यादा आसानी से ढल जाते हैं। BSF और CRPF ने अपने दस्तों में भारतीय नस्ल के डॉग्स की संख्या बढ़ाई है।

सरदार पटेल आधुनिक काल में राष्ट्र की सबसे महान विभूतियों में से एक रहे हैं। उनके विराट व्यक्तित्व में अनेक गुण एक साथ समाहित थे। मेरा आप सबसे आग्रह है, 31 अक्टूबर को सरदार साहब की जयंती पर देशभर में होने वाली Run For Unity में आप भी जरूर शामिल हों।

वन्देमातरम् इस एक शब्द में कितने ही भाव हैं, कितनी ऊर्जाएं हैं। सहज भाव में ये हमें माँ भारती के वात्सल्य का अनुभव कराता है। यही हमें माँ भारती की संतानों के रूप में अपने दायित्वों का बोध कराता है।

अगर कठिनाई का समय होता है तो वन्देमातरम् का उद्घोष 140 करोड़ भारतीयों को एकता की ऊर्जा से भर देता है। 7 नवंबर को हम वन्देमातरम् 150वें वर्ष के उत्सव में प्रवेश करने वाले हैं। 150 वर्ष पूर्व वन्देमातरम् की रचना हुई थी और 1896 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे गाया था।

छत्तीसगढ़ में चलाये जा रहे अनेखे कैफे

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे, एक अनेखो कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में शहर से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए एक अनोखी पहल की गई है।

अम्बिकापुर में गार्बेज कैफे चलाये जा रहे हैं। ये ऐसे कैफे हैं, जहां प्लास्टिक कचरा लेकर जाने पर भरपेट खाना खिलाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति एक किलो प्लास्टिक लेकर जाए तो उसे दोपहर या रात का खाना मिलता है और कोई आधा किलो प्लास्टिक ले जाए तो नाश्ता मिल जाता है। ये कैफे अम्बिकापुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चलाता है।

Published / 2025-10-25 23:05:02
त्योहारी सीजन में रेलवे ने कराया 1.5 करोड़ लोगों को सफर

  • दिवाली और छठ के त्योहारी सीजन में अब तक 1.5 करोड़ यात्रियों ने किया ट्रेनों से सफर: रेलवे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दीपावली और छठ महापर्व के त्योहारी सीजन में अब तक 1.5 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों ने ट्रेनों से सफर किया है। 

रेलवे की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक रेलवे ने त्योहारी सीज़न में अब तक ट्रेनों के ज़रिए 1.5 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों उनके गंतव्य तक पहुंचाया है।

त्योहारों के अंत तक यह संख्या 2.5 करोड़ से ज़्यादा होने की उम्मीद है। भीड़ प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए, बिहार और उत्तर प्रदेश के आस-पास के देश के 30 प्रमुख स्टेशनों पर बड़े होल्डिंग एरिया बनाये गये हैं।

Published / 2025-10-24 20:40:54
नयी दिल्ली में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल संग सांसद सुखदेव भगत ने की मंत्रणा

सांसद सुखदेव भगत नई दिल्ली में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ की बैठक 

सांसद ने राजसमंद एवं ब्यावर जिला के जिला अध्यक्ष के चयन हेतु नेताओं से की चर्चा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ नयी दिल्ली। राजस्थान कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नये जिला अध्यक्ष की चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में है नामों के चयन के लिए लगाये गये पर्यवेक्षकों ने हर जिले में 6 नाम का पैनल तैयार किया है। 

इस संदर्भ में आज नयी दिल्ली एआईसीसी मुख्यालय पर कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, राजस्थान के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की। इसमें लोहरदगा लोकसभा के सांसद सह राजस्थान एआईसीसी आब्जर्वर सुखदेव भगत भी शामिल हुए। 

सांसद ने दो जिला राजसमंद एवं ब्यावर जिला की रिपोर्ट सौंपी। सांसद ने कहा कि नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात व भावना जानकर पूरे पारदर्शिता तरीके से पैनल तैयार किया गया है। राहुल गांधी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर नयी ऊर्जा देने की कोशिश की जा रही है।

नये जिला अध्यक्ष की नियुक्ति से राज्य में संगठन काफी मजबूत होगा। इस बैठक में राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थित थे।

Published / 2025-10-19 20:07:15
अयोध्या में प्रभु श्रीराम का 29 लाख दीयों का स्वागत

अयोध्या: रामनगरी पहुंचे प्रभु श्रीराम, 29 लाख दीये जलाकर किया गया स्वागत; गिनीज बुक में दर्ज हुआ रिकॉर्ड 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रभु राजा राम अयोध्या पहुंच गए। उनके आगमन पर पूरी अयोध्या रोशनी से नहा उठी। दीपोत्सव पर अयोध्या के नाम दो विश्व कीर्तिमान दर्ज हुए। पहले में राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 26. 11 लाख दीये जलाए गए।  ड्रोन से दीपों की गणना के बाद गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से स्वप्निल दंगारीकर व कंसल्टेंट निश्चल बरोट ने नए कीर्तिमान की घोषणा की। 

लगातार नौवीं बार विश्व रिकॉर्ड बना है। सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित अन्य इस अद्भुत व अविस्मरणीय क्षण के साक्षी बने। वहीं दूसरा रिकॉर्ड सरयू आरती का रहा, जिसमें एक साथ 2100 वेदाचार्यों ने हिस्सा लिया। यह अनूठा रिकॉर्ड योगी सरकार ने दूसरी बार हासिल किया है।  

गिनीज बुक की 75 सदस्यीय गणना टीम ने शनिवार को सरयू के 56 घाटों के दीये की गणना विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक, घाट प्रभारी, समन्वयक व गणना वॉलंटियर की मौजूदगी में की। दीये जलाने से पहले घाट पर तेल न गिरे, इसका विशेष ध्यान रखा गया। दीये में तेल डालने के बाद बाती के आगे वाले भाग पर कपूर का पाउडर लगाया जायेगा। 

इससे स्वयंसेवकों को दीये प्रज्ज्वलित करने में आसानी हुई। हर घाट पर दीयों को प्रज्ज्वलित करने के लिए कैंडल, माचिस, डंडे लगे कैंडल और अन्य सामग्री घाट के अनुसार निर्धारित दीयों की संख्या के अनुपात में एक ही बार में समन्वयकों को बांट दी गयी थी। दीयों को प्रज्ज्वलित करने वाले स्वयंसेवक व समन्वयक सूती कपड़ों में ही घाटों पर मौजूद रहे।

Published / 2025-10-18 22:07:21
कर्मचारियों के 21,000 करोड़ रुपए फंसे!

EPFO के आंकड़े से खुला बड़ा घोटाला

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नौकरीपेशा लोगों की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य निधि (PF) में जाता है लेकिन अब इस पर खतरा मंडरा रहा है। यह पैसा आम आदमी के बुढ़ापे का सहारा होता है, जो रिटायरमेंट के बाद उसे मिलता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देशभर की कंपनियों के पास करीब 21,000 करोड़ रुपए का पीएफ बकाया अटका हुआ है। कई कंपनियां कर्मचारियों के हिस्से का पैसा काट तो लेती हैं लेकिन उसे ईपीएफओ के खाते में जमा नहीं करतीं। 

इनमें से कई कंपनियां दिवालिया कानून (IBC) के तहत लिक्विडेशन की प्रक्रिया में हैं, जिससे कर्मचारियों की रकम अटकी हुई है।
इस स्थिति पर काबू पाने के लिए ईपीएफओ ने एक टास्क फोर्स गठित की है, जो विशेष रूप से उन कंपनियों पर नजर रखेगी जिन पर 1 करोड़ रुपए से अधिक का पीएफ बकाया है।

डिजिटल डैशबोर्ड और रिकवरी पोर्टल

ईपीएफओ ने इन मामलों की निगरानी के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया है। इसमें रोजाना कंपनियों की स्थिति अपडेट की जाती है। साथ ही एक नया डिजिटल रिकवरी पोर्टल भी बनाया जा रहा है। 

जिससे बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया तेज़ होगी। संगठन का लक्ष्य है कि मौजूदा और पिछली बकाया रकम जो लगभग 21 हजार करोड़ रुपए है को जल्द से जल्द कर्मचारियों के खातों में वापस पहुंचाया जाए।

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