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Published / 2022-09-18 10:11:43
सात अक्तूबर को लॉन्च होगा हीरो मोटोकॉर्प का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हीरो मोटोकॉर्प अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर लेकर आ रही है। कंपनी इसे 7 अक्तूबर 2022 को लॉन्च करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने डीलरों, निवेशकों और ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूटर को लॉन्च के लिए इंविटेशन भी भेज चुकी है। लॉन्च इवेंट जयपुर में होगा। ये इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी के नए विडा के तहत आयेगा। हीरो का ये इलेक्ट्रिक स्कूटर टीवीएस, बजाज, ओला इलेक्ट्रिक, ऐथर, ओकिनावा और सिंपल एनर्जी जैसी कंपनीज के इलेक्ट्रिक स्कूटर्स को टक्कर देगा। बता दें यह इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्च 2022 में लॉन्च होने वाला था, लेकिन सप्लाई चेन के मुद्दों और कई कंपोनेंट की कमी के कारण इसमें देरी हो गई। हीरो कंपनी का ये नया स्कूटर जयपुर स्थित आरएंडडी हब सेंटर ऑफ इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (सीआईटी) में विकसित किया गया है और इसका उत्पादन आंध्र प्रदेश स्थित कंपनी के प्लांट में होगा। इस स्कूटर को 1 लाख रुपये तक की कीमत पर लॉन्च किया जा सकता है। बता दें हीरो मोटोकॉर्प ने विदा सब-ब्रैंड को 1 जुलाई 2022 को लॉन्च किया था। विदा सब-ब्रैंड के तहत आने वाला ये पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर है। कंपनी आने वाले समय में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में एक से बढ़कर एक प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है। हीरो अपने पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतरीन लुक और फीचर्स के साथ ही अच्छी बैटरी रेंज के साथ पेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ये भी जान लें कंपनी जल्द ही एक्सट्रिम 300 और एक्स पल्स 300 जैसी बाइक्स भी लॉन्च कर सकती है।

Published / 2022-09-18 10:07:38
पश्चिम बंगाल का नॉर्थ 24 परगना : क्लास रुम में पढ़ रहे थे बच्चे और स्कूल में फट बम...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना से एक स्कूल में बम धमाके की खबर सामने आई है, बताया जा रहा है कि नॉर्थ 24 परगना जिले के टीटीगढ़ में एक स्कूल की छत पर धमाका होने से दहशत का माहौल बन गया। जिस समय स्कूल में बम फेंके गये, स्कूल में क्लास चल रही थी। इस दौरान धमाके की आवाज सुनकर शिक्षक और बच्चे क्लास रुम से बाहर आ गये, फिल्हाल पुलिस मामले की जांच कर रही है कि इस स्कूल में बम क्यों फेंके गये थे। इसके पीछे किसकी साजिश हो सकती है, पुलिस इस मामले की इस एंगल से भी जांच कर रही है कि स्कूल में हमला हुआ या पहले से ही छत पर बम रखे गये थे। कब हुए थे बम धमाके : टीटागढ़ के स्कूल में हुए ये बम धमाके स्कूल की छत पर सुबह लगभग 11 बजे हुए थे, स्कूल में हुए धमाके से यहां के छात्र और शिक्षक दहशत में आ गये। इससे स्कूल की छत को भी नुकसान पहुंचा है, बम धमाके के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गयी है। बताया जा रहा है कि स्कूल घनी आबादी वाले इलाके में है, विस्फोट किसने किया इसकी भी जांच की जा रही है। स्कूल के ही एक शिक्षक ने कहा कि बहुत जोर से धमाका हुआ, हम स्टाफ रूम में बैठे हुए थे। पहले तो हमें लगा कि किसी ने बम फेंका है लेकिन जब बाहर निकल कर देखा तो स्कूल की बिल्डिंग से धुआं निकल रहा था, हम जब छत पर पहुंचे तो वहां बम फटने के निशान थे।

Published / 2022-09-18 06:47:29
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी : 60 लड़कियों का नहाते हुए वीडियो वायरल होने पर आत्महत्या की कोशिश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की 60 लड़कियों के नहाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यूनिवर्सिटी की सैकड़ों लड़कियां प्रदर्शन पर उतर आईं और न्याय की मांग कर रही हैं। विरोध करने वाले छात्रों का दावा है कि 8 लड़कियों ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की है। लड़कियों का आरोप है कि नहाते समय लगभग 60 लड़कियों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पोस्ट कर वायरल किया गया है। लड़कियों के नहाने का वीडियो बाथरूम का है। आरोपी लड़की को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में, एक छात्रा ने कथित तौर पर स्नान करते समय लगभग 60 अन्य छात्रों का एक वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में इसे एक एडल्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। लड़कियों को जैसे ही इस बात का पता चला, हंगामा शुरू हो गया है, इसमें से 8 लड़कियों ने आत्महत्या करने की कोशिश की। हालांकि किसी भी लड़की की इसमें जान नहीं गई। प्रबंधन को सूचित करने के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। लीक आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (सीयू) के छात्रों ने कल शनिवार की रात विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस घटना से संबंधित लोगों की जान जाने और घायल होने का आरोप लगाया है। मोहाली एसएसपी विवेक सोनी ने पूरे घटना पर कहा है, यह एक छात्रा द्वारा शूट किये गये और प्रसारित किये जा रहे वीडियो का मामला है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना से संबंधित किसी की मौत की सूचना नहीं है। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, कोई प्रयास (आत्महत्या करने) की सूचना नहीं मिली। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (सीयू) की इस घटना पर पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन मनीषा गुलाटी ने कहा, यह गंभीर मामला है, इसकी जांच की जा रही है। मैं यहां सभी छात्रों के माता-पिता को आश्वस्त करने के लिए हूं कि आरोपी को बख्शा नहीं जायेगा। एसएसपी मोहाली विवेक सोनी ने कहा, फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अभी तक आत्महत्या के प्रयास की कोई सूचना नहीं मिली है। छात्रों के मेडिकल रिकॉर्ड को रिकॉर्ड में ले लिया गया है। लोग किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के कथित लीक आपत्तिजनक वीडियो विवाद पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सोम प्रकाश ने कहा, दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस को गंभीर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और यह भी बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय का प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था, हालांकि, जब कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्रों ने आंदोलन करना शुरू कर दिया और उसी पर कार्रवाई की मांग की।

Published / 2022-09-18 06:21:41
देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ्तार, एक्टिव मरीज 47 हजार के पार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 5,664 नए मामले सामने आये, जिससे देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,45,34,188 हो गई, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 46,848 से बढ़कर 47,922 पर पहुंच गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार सुबह जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 35 और लोगों के दम तोड़ने से मृतक संख्या बढ़कर 5,28,337 हो गई। इनमें संक्रमण से मौत की पुष्टि के बाद केरल में दर्ज किये गये 21 मामले भी शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल मामलों का 0.11 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से ठीक होने वालों की राष्ट्रीय दर बढ़कर 98.71 प्रतिशत हो गई है। पिछले 24 घंटे की अवधि में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 1,074 की वृद्धि दर्ज की गई। गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गये थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गये थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के मामले चार करोड़ के पार हो गये थे।

Published / 2022-09-17 16:34:56
नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी लॉन्च कर बोले पीएम मोदी- भारत के प्रति बदल रहा दुनिया का नजरिया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति की शुरुआत करते हुए कहा कि यह नीति परिवहन क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान देने वाली, अंतिम छोर तक डिलीवरी की गति बढ़ाने और कारोबारों के लिए धन की बचत करने वाली है। इस नीति से कारोबारों की लॉजिस्टिक लागत मौजूदा 13-14 फीसदी से घटकर एकल अंक में आने का अनुमान है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय बंदरगाहों की कुल क्षमता में काफी वृद्धि हुई है और पोतों का औसत टर्न-अराउंड टाइम 44 घंटे से घटकर अब 26 घंटे पर आ गया है। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों और समर्पित माल गलियारों को जोड़ने वाली सागरमाला परियोजना ने लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी तथा अवसंरचना विकास के व्यवस्थित कार्यों में सुधार लाना शुरू कर दिया है। मोदी ने कहा कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और यह विनिर्माण के केंद्र के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को विश्व ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है और सीमाशुल्क में बिना अधिकारी के सामने जाए आकलन की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। वहीं ई-वे बिल तथा फास्ट टैग भी लॉजिस्टिक क्षेत्र में प्रभावशीलता बढ़ा रहे है। विश्वभर के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पैठ बनाने के लिए इसके समर्थन तंत्र को मजबूत करने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति समर्थन प्रणाली को आधुनिक बनाने में मदद देगी। मोदी ने बताया कि वैश्विक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लोकतंत्र की महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है और ये विशेषज्ञ भारत के अभूतपूर्व कुशल परिवेश से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, विशेषज्ञ भारत के दृढ़-निश्चय एवं प्रगति की सराहना कर रहे हैं। ड्रोन नीति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे लॉजिस्टिक क्षेत्र बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि महामारी के दो वर्ष के बाद वृद्धि को गति देने में मदद की खातिर बनाई गई यह नीति नियमों को व्यवस्थित करेगी, आपूर्ति श्रृंखला के अवरोधकों को दूर करेगी और ईंधन लागत तथा लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए रूपरेखा देगी। केंद्र सरकार बीते तीन साल से राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति पर काम कर रही है। वाणिज्य मंत्राल यने मसौदा नीति 2019 में जारी की थी लेकिन कोविड-19 के कारण इसमें विलंब हुआ। बजट 2022-23 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर इस नीति की घोषणा की।

Published / 2022-09-17 16:31:48
धान-दलहनी फसलों के रकबे में मामूली सुधार, 24 लाख हेक्टेयर से अधिक पर सूखे की मार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। खरीफ सीजन की फसलों पर इस बार सूखे की मार पड़ी है। मानसून में कम बारिश होने की वजह से देश के कई राज्यों में इस खरीफ सीजन धान, दलहन और तिलहन की फसलें प्रभावित हुई है। मसलन कम बारिश होने की वजह से कई राज्य सूखे का सामना कर रहे हैं। नतीजतन इस वजह से धान, दलहन और तिलहन फसलों का रकबा घटा था। जिसकी जानकारी बीते सप्ताह केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से दी गई थी। असल में कृषि मंत्रालय प्रत्येक शुक्रवार को खरीफ फसलों के अनुमानित रकबे पर रिपोर्ट जारी करता है। नई रिपोर्ट में पिछले सप्ताह के मुकाबले धान और दलहन के रकबे में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन, इस सुधार के बाद भी पिछले साल के धान और दलहनी फसलों से जुड़े 24 लाख हेक्टेयर से खेत सूखे पड़े हैं। कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी फसल रकबे पर आधारित साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार देश में दलहनी फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना अभी भी 5.56 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि 9 सितंबर की तुलना में दलहनी फसलों के रकबे में 1 लाख हेक्टेयर का सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बीते साल देश के अंदर दलहनी फसलों का कुल रकबा 137.50 लाख हेक्टेयर था, जो मौजूदा समय में 131.92 लाख हेक्टेयर पर दर्ज किया गया है। मानसून की वजह से इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कम बारिश दर्ज की गई है। इस वजह से बने सूखे जैसे हालतों की चलते इन चारों राज्यों में बड़ी संख्या में धान की फसल पर असर पड़ा है, जिसे देखते हुए केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने खरीफ सीजन में चावल के उत्पादन में 10 से 12 मिलियन टन गिरावट होने का अनुमान जारी किया गया है। हालांकि उस दौरान मंत्रालय ने उसे प्रांरभिक अनुमान बताया था। लेकिन, जिस तरीके से धान के रकबे में मामूली बढ़ोतरी हुई है तो कहा जा सकता है कि चावल उत्पादन के अनुमान में कोई व्यापक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

Published / 2022-09-16 18:01:51
जन उद्देश्यों को साकार करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, जो उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत थी। आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले प्रधानमंत्री, श्री मोदी ने पहले 2014 से 2019 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है। उन्होंने अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपना पद संभाला है। 2014 और 2019 के संसदीय चुनावों में श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने दोनों अवसरों पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। आखिरी बार 1984 के चुनावों में किसी राजनीतिक दल ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। सबका साथ, सबका विकास, सबका विकास के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर, श्री मोदी ने शासन व्यवस्था में एक ऐसे बदलाव की शुरुआत की और समावेशी, विकासोन्मुख और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री ने अंत्योदय के उद्देश्य को साकार करने और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सरकार की योजनाओं और पहल का लाभ मिले यह सुनिश्चित करने के लिए स्पीड और स्केल पर काम किया है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने इस बात को माना कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत रिकॉर्ड गति से गरीबी को खत्म कर रहा है। इसका श्रेय केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के हित को ध्यान में रखते हुए लिये गये विभिन्न फैसलों को जाता है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम आयुष्मान भारत का नेतृत्व कर रहा है। 50 करोड़ से अधिक भारतीयों को कवर करते हुए आयुष्मान भारत गरीब और नव-मध्यम वर्ग को उच्च गुणवत्ता और सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रहा है। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य पत्रिकाओं में से एक लांसेट ने आयुष्मान भारत की सराहना करते हुए कहा है कि यह योजना भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े असंतोष को दूर कर रही है। पत्रिका ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने के लिए पीएम मोदी के प्रयासों की भी सराहना की। देश की वित्तीय धारा से दूर गरीबों को वित्तीय धारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय का बैंक खाते खोलना था। अब तक 35 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों ने न केवल गरीबों को बैंक से जोड़ा, बल्कि सशक्तीकरण के अन्य रास्ते भी खोले हैं। जन-धन से एक कदम आगे बढ़ते हुए श्री मोदी ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को बीमा और पेंशन कवर देकर जन सुरक्षा पर जोर दिया। जेएएम ट्रिनिटी (जन धन- आधार- मोबाइल) ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है और प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की है। असंगठित क्षेत्र से जुड़े 42 करोड़ से अधिक लोगों के पास अब प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना के तहत पेंशन कवरेज मिली है। 2019 के चुनाव परिणामों के बाद पहली कैबिनेट बैठक के दौरान व्यापारियों के लिए समान पेंशन योजना की घोषणा की गई है। 2016 में गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी। यह योजना 7 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को धुआं मुक्त रसोई प्रदान करने में एक बड़ा कदम साबित हुई है। इसकी अधिकांश लाभार्थी महिलाएं हैं। आजादी के बाद से 70 वर्षों के बाद भी 18,000 गांव बिना जहां बिजली नहीं थी वहां बिजली पहुंचाई गई है। श्री मोदी का मानना है कि कोई भी भारतीय बेघर नहीं होना चाहिए और इस विजन को साकार करने के लिए 2014 से 2019 के बीच 1.25 करोड़ से अधिक घर बनाए गए है। 2022 तक प्रधानमंत्री के हाउसिंग फॉर ऑल के सपने को पूरा करने के लिए घर के निर्माण की गति में तेजी आई है। कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जो श्री नरेंद्र मोदी के बहुत करीब है। 2019 के अंतरिम बजट के दौरान सरकार ने किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में एक मौद्रिक प्रोत्साहन योजना की घोषणा की। 24 फरवरी 2019 को योजना के शुरू होने के बाद लगभग 3 सप्ताह में नियमित रूप से किश्तों का भुगतान किया गया है। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक के दौरान इस योजना में 5 एकड़ की सीमा को हटाते हुए सभी किसानों को पीएम किसान का लाभ देने का फैसला किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार प्रति वर्ष लगभग 87,000 करोड़ रुपये किसान कल्याण के लिए समर्पित करेगी। श्री मोदी ने सॉयल हेल्थ कार्ड, बेहतर बाजारों के लिए ई-नाम और सिंचाई पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने जैसी किसान कल्याण की दिशा में विभिन्न पहल शुरू की। 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री ने जल संसाधनों से संबंधित सभी पहलुओं की देखरेख करने के लिए एक नया जल शक्ति मंत्रालय बनाकर एक बड़ा वादा पूरा किया। 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया। इस जन आंदोलन का बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक प्रभाव पड़ा है। 2014 में स्वच्छता कवरेज 38% थी जो आज बढ़कर 99% हो गई है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है। स्वच्छ गंगा के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वच्छ भारत मिशन की सराहना की और कहा कि इससे 3 लाख लोगों की जान बच सकती है। श्री मोदी का मानना है कि परिवहन परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन है। इसीलिए भारत सरकार हाई-वे, रेलवे, आई-वे और वॉटर-वे के रूप में अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे को बनाने के लिए काम कर रही है। उड़ान (उड़े देश के आप नागरिक) योजना ने उड्डयन क्षेत्र को लोगों के अधिक अनुकूल बनाया है और कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया है। पीएम मोदी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण पॉवर हाऊस में बदलने के लिए मेक इन इंडिया पहल शुरू की। इस प्रयास से परिवर्तनकारी परिणाम सामने आए हैं। उदाहरण के लिए 2014 में मोबाइल विनिर्माण इकाइयों की संख्या 2 थी जो 2019 में बढ़कर 122 हो गई है। भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में महत्वपूर्ण प्रगति की है, 2014 में भारत की रैंकिंग 142 थी 2019 में यह 77 हो गई है। 2017 में संसद के एक ऐतिहासिक सत्र के दौरान भारत सरकार ने जीएसटी लागू किया, जिसने वन नेशन, वन टैक्स के सपने को साकार किया। उनके कार्यकाल में भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाया गया जो सरदार पटेल को एक सच्ची श्रद्धांजलि है। इस स्टैच्यू को एक विशेष जन आंदोलन के माध्यम से बनाया गया था, जिसमें भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के किसानों के औज़ार और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था, जो एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से गहरा लगाव है। उन्हेंने हमेशा से पाना है कि हमें एक साफ और हरा ग्रह बनाने के लिए काम करना चाहिए। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के अभिनव समाधान तैयार करने के लिए अलग जलवायु परिवर्तन विभाग बनाया। इस भावना को पेरिस में 2015 के सीओपी 21 शिखर सम्मेलन में भी देखा गया था जहां पीएम मोदी ने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जलवायु परिवर्तन से एक कदम आगे बढ़कर पीएम मोदी ने जलवायु न्याय के बारे में बात की है। 2018 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के शुभारंभ के लिए कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आए थे। यह गठबंधन एक बेहतर ग्रह के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का एक अभिनव प्रयास है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके प्रयासों को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राष्ट्र के चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड से सम्मानित किया गया। जलवायु परिवर्तन ने हमारे ग्रह को प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त कर दिया है, इस तथ्य के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील होते हुए श्री मोदी ने प्रौद्योगिकी की शक्ति और मानव संसाधनों की ताकत के उचित इस्तेमाल के रूप में आपदा के लिए एक नया विजन साझा किया है । मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 26 जनवरी 2001 को विनाशकारी भूकंप से तबाह हुए गुजरात को बदल दिया। इसी तरह उन्होंने गुजरात में बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए नई प्रणालियों की शुरुआत की जिनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई। प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से श्री मोदी ने नागरिकों के लिए न्याय को हमेशा प्राथमिकता दी है। गुजरात में लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए उन्होंने शाम की अदालतों की शुरुआत की। केंद्र में उन्होंने प्रगति ((प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) शुरू किया जो विकास में देरी कर रहे लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए एक कदम है। श्री मोदी की विदेश नीति की पहल ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की वास्तविक क्षमता और भूमिका को महसूस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सार्क देशों के सभी प्रमुखों की उपस्थिति में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया और दूसरे की शुरुआत में बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके संबोधन की दुनिया भर में सराहना हुई। पीएम मोदी 17 साल की लंबी अवधि के बाद नेपाल, 28 साल के बाद ऑस्ट्रेलिया, 31 साल के बाद फिजी और 34 साल के बाद सेशेल्स और यूएई के द्विपक्षीय दौरे पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। पदभार संभालने के बाद से श्री मोदी ने यूएन, ब्रिक्स, सार्क और जी-20 समिट में भाग लिया, जहां विभिन्न वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भारत के विचारों को व्यापक रूप से सराहा गया। प्रधानमंत्री को सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक सम्मान किंग अब्दुलअजीज सैश से सम्मानित किया गया। श्री मोदी को रूस के शीर्ष सम्मान द ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टले सम्मान, फिलिस्तीन के ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन सम्मान, अफगानिस्तान के अमीर अमानुल्ला खान अवॉर्ड, यूएई के जायेद मेडल और मालदीव के निशान इज्जुद्दीन सम्मान से सम्मानित किया गया है। 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को शांति और विकास में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित सियोल शांति पुरस्कार दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के नरेंद्र मोदी के आग्रह को संयुक्त राष्ट्र में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। पहले दुनिया भर में कुल 177 राष्ट्रों ने एक साथ मिलकर 21 जून को संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया। श्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे से शहर में हुआ था। वे अति पिछड़ा वर्ग परिवार से आते हैं, जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों में से है। वह बेहद गरीब, लेकिन प्यार देने वाले परिवार में पले बड़े। जीवन की शुरुआती कठिनाइयों ने न केवल कड़ी मेहनत के मूल्य को सिखाया बल्कि उन्हें आम लोगों के कष्टों से भी अवगत कराया। आम जन की गरीबी ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही लोगों और राष्ट्र की सेवा में डूबने के लिए प्रेरित किया। अपने प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया, जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित एक राष्ट्रवादी संगठन है और बाद में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के संगठन में काम करने के लिए खुद को राजनीति में समर्पित किया। श्री मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए पूरा किया है। नरेंद्र मोदी लोगों के नेता हैं और वे आमजन की समस्याओं को हल करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने के लिए समर्पित हैं। लोगों के बीच रहने, उनके साथ खुशियां साझा करने और उनके दुखों को दूर करने से ज्यादा कुछ भी उनके लिए संतोषजनक नहीं है। जमीनी स्तर पर तो उनका लोगों के साथ एक मजबूत व्यक्तिगत जुड़ाव तो है ही साथ ही साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी मजबूत उपस्थिति है। उन्हें भारत के सबसे ज्या टेक्नो सैवी नेता के रूप में भी जाना जाता है। वो लोगों तक पहुंचने और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। वह फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, साउंड क्लाउड, लिंक्डिन, वीबो और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बहुत सक्रिय है। राजनीति से परे नरेंद्र मोदी को लिखना पसंद है। उन्होंने कई कविता और कई किताबें लिखी हैं। वह अपने दिन की शुरुआत योग से करते हैं। योग उसके शरीर और दिमाग को मजबूत बनाता है और तेज गति चलने वाली दिनचर्या में शांति का भाव पैदा करता है।

Published / 2022-09-16 15:23:25
इंजीनियर्स डे पर एम विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री ने किया अनावरण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार ने आज इंजीनियर्स-दिवस के अवसर पर रांची स्थित राष्ट्रीय उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएएमटी) में एम विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का अनावरण किया। अपने दो- दिवसीय रांची दौरे पर सरकार ने संस्थान द्वारा आयोजित अंतररष्ट्रीय कार्यशाला ‘रिमेनुफैक्चरिंग कैपेसिटी बिल्डिंग’ का भी उद्घाटन किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर बात करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशाला से रोजगार को बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही साथ कर्मचारियों के रेट्रेंचमेंट भी कम हो जायेगा। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से नयी वस्तुओं के पुनर्निर्माण पर भी काम किया जा रहा है जो कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा। इस अवसर पर राज्य सभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, हटिया क्षेत्र के विधायक नवीन जायसवाल और रांची की मेयर आशा लकड़ा भी मौजूद रहे।

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