एबीएन सेंट्रल डेस्क, विदिशा (ग्यारसपुर)। जिला विदिशा की ग्यारसपुर तहसील के ग्राम ओलिंजा में संत रामपाल जी महाराज का सत्संग एलसीडी के माध्यम से सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और शास्त्र आधारित आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने विभिन्न पवित्र शास्त्रों के प्रमाणों के माध्यम से सत भक्ति का महत्व स्पष्ट किया।
उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 श्लोक 16 का उल्लेख करते हुए बताया कि ब्रह्मलोक सहित सभी लोक नाशवान हैं। संत रामपाल जी महाराज ने तत्वदर्शी संत की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल तत्वदर्शी संत ही शास्त्र सम्मत भक्ति विधि बताते हैं, जिससे जीव का वास्तविक कल्याण और मोक्ष संभव होता है।
सत्संग में ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 86 मंत्र 26, अथर्ववेद कांड 4 अनुवाक 1 मंत्र 7 तथा यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 के आधार पर कबीर साहेब को अविनाशी, सतपुरुष और मोक्षदाता परमात्मा बताया गया। कार्यक्रम के समापन पर अनेक श्रद्धालुओं ने शास्त्रों में दिए गए प्रमाण स्वयं देखकर सत्य को समझा और कई लोगो ने नामदीक्षा ग्रहण कर भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। कालीरामण फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक समारोह में, संत रामपाल जी महाराज को भारत गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें भारत सरकार के केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री, भागीरथ चौधरी के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया।
इस अवसर पर, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने संत रामपाल जी महाराज के समाज और राष्ट्र के प्रति किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। यह अवॉर्ड संत रामपाल जी के मानवतावादी और सामाजिक उत्थान के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण पहचान देता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत रत्न एवं लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और आत्मनिर्भर भारत के लिए उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।
श्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि देशवासियों में उन्होंने (सरदार पटेल) जो राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत की, वह विकसित भारत के लिए ऊर्जा का स्रोत है। राष्ट्र निर्माण में उनकी अतुलनीय भूमिका एक सशक्त और सक्षम भारत के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।
प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को लौहपुरुष के रूप में याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र अविभाजित और सशक्त भारतवर्ष के निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को कभी नहीं भूल सकता।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रविवार को संगठनात्मक स्तर पर अहम फैसला लेते हुए बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष) नियुक्त किया है। इस फैसले की घोषणा पार्टी की पार्लियामेंट्री कमिटी ने की।
नितिन नबीन की नियुक्ति को संगठन में युवा नेतृत्व को मजबूती देने और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति को धार देने के तौर पर देखा जा रहा है। नितिन नबीन की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में नितिन नबीन को एक युवा, मेहनती और समर्पित कार्यकर्ता बताया।
उन्होंने लिखा कि नितिन नबीन के पास संगठनात्मक कार्यों का अच्छा अनुभव है और बिहार में विधायक तथा कई कार्यकाल तक मंत्री रहने के दौरान उनका रिकॉर्ड सराहनीय रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि नितिन नबीन ने हमेशा लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी लगन से काम किया है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नितिन नबीन अपने विनम्र स्वभाव और जमीनी स्तर पर काम करने की शैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी ऊर्जा और समर्पण आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी को और अधिक मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने उन्हें नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट बनने पर शुभकामनाएं दीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 3 बड़े फैसले लिए गए हैं। इसमें जनगणना-2027 के लिए 11 हजार 718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है. इस तरह सरकार ने देशव्यापी जनगणना की तैयारियों के लिए बड़ा वित्तीय आवंटन किया है।
दूसरा फैसला कोयला लिंकिंग नीति में बड़ा सुधार को लेकर है, इसके लिए CoalSETU को मंजूरी दी गई है। ये कोयला आपूर्ति और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई नीति लागू करने का फैसला है। वहीं, तीसरे फैसले में कोपरा-2026 (Copra) सीजन के लिए MSP पर नीतिगत अनुमति, जो कि नारियल किसानों के हित में अहम फैसला है।
कोलसेतु के बारे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, कोई भी घरेलू खरीदार लिंकेज ऑक्शन में हिस्सा ले सकता है। कोल लिंकेज होल्डर 50 फीसदी तक एक्सपोर्ट कर सकते हैं। मार्केट में गड़बड़ी रोकने के लिए ट्रेडर्स को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं होगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने सेंसस 2027 के लिए 11 हजार 718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, सेंसस 2027 पहली डिजिटल सेंसस होगी। सेंसस का डिजिटल डिजाइन डेटा प्रोटेक्शन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह दो फेज में किया जाएगा। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक होगा, जिसमें हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस होगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में आबादी की गिनती होगी।
उन्होंने बताया कि कोशिश यही होगी कि आने वाले जनगणना डेटा को पूरे देश में कम से कम समय में उपलब्ध कराया जाए। ज्यादा से ज्यादा विजुअलाइजेशन टूल के साथ जनगणना परिणामों को जारी करने की कोशिश रहेगी। सबसे निचली प्रशासनिक इकाई यानी गांव/वार्ड स्तर तक सभी के साथ डेटा शेयर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 के सफल संचालन के लिए विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर लगभग 550 दिनों के लिए लगभग 18,600 तकनीकी जनशक्ति को लगाया जाएगा। दूसरे शब्दों में करीब 1.02 करोड़ मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होंगे। इसके अलावा चार्ज/जिला राज्य स्तर पर तकनीकी जनशक्ति के प्रावधान से क्षमता निर्माण भी होगा क्योंकि नौकरी की प्रकृति डिजिटल डेटा हैंडलिंग, निगरानी और समन्वय से संबंधित होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (फरर) के शताब्दी वर्ष समारोह में सोमवार को चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम सवालों पर अपनी राय रखी। मौके पर उनसे जब पूछा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सत्ता की बागडोर किसे सौंपी जायेगी, तो भागवत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर अंतिम निर्णय भाजपा और मोदी जी आपस में चर्चा कर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पार्टी की रणनीति और अनुशासन के तहत होगी।
भागवत ने तमिलनाडु में फरर की सीमित उपस्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में 100% राष्ट्रवादी भावना मौजूद है, लेकिन कुछ कृत्रिम बाधाओं के कारण इस भावना का पूर्ण रूप से अभिव्यक्ति नहीं हो पा रही है।
भागवत ने आश्वस्त किया कि ये अवरोध लंबे समय तक टिकेंगे नहीं और इसे दूर करने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता अपने संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित रही है और इन मूल्यों को और मजबूत करना आवश्यक है।
संघ प्रमुख ने तमिलनाडु के लोगों से अपनी मातृभाषा में बातचीत करने और अपनी पारंपरिक जीवन शैली को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोग तमिल में हस्ताक्षर करने में क्यों हिचकते हैं। भागवत ने सभी भारतीय भाषाओं को समान महत्व देते हुए कहा कि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरव का हिस्सा हैं।
उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों की संस्कृति की सराहना करते हुए खासकर पारंपरिक पोशाक वेष्टि को लोगों के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बताया। भागवत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति की इस विविधता को संजोना और बढ़ावा देना समाज और राष्ट्र दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में वर्ष 2023 और 2024 के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार वितरित किये। मौके पर उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प की ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक अहमियत पर गहन प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति ने कहा कि कला और हस्तशिल्प केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान नहीं हैं, बल्कि यह आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी कारीगरों की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
कारीगरों ने अपनी कला को बदलते समय के अनुरूप ढाला, लेकिन मूल भावनाओं और मिट्टी की खुशबू को जीवित रखा। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र देश में 32 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है, जिसमें बड़ी संख्या ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में निवास करती है।
हस्तशिल्प के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह पारंपरिक रूप से कमजोर वर्गों और महिलाओं के सशक्तिकरण में भी योगदान देता है। कार्यबल में 68 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो इस क्षेत्र को सामाजिक समावेशन और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए एक प्रमुख मंच बनाती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने हस्तशिल्प उद्योग की स्थायित्व की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि यह प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों पर आधारित होने के कारण पर्यावरण के अनुकूल और कम कार्बन उत्सर्जन वाला क्षेत्र है। राष्ट्रपति ने जीआई टैग की अहमियत पर भी प्रकाश डाला।
उनका कहना था कि जीआई टैग भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान और विश्वसनीयता प्रदान करता है। उन्होंने सभी हितधारकों से अपने उत्पादों के लिए जीआई टैग हासिल करने का आग्रह किया और एक जिला, एक उत्पाद पहल को इस दिशा में एक प्रभावी कदम बताया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी कहा कि भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। युवा उद्यमियों और डिजाइनरों के लिए यह क्षेत्र नये व्यवसाय स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने का सुनहरा अवसर प्रस्तुत करता है। इस कार्यक्रम ने न केवल कारीगरों को सम्मानित किया बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका को भी व्यापक मंच पर उजागर किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख किया और 1975 में लगाये गये आपातकाल का हवाला देते हुए कहा कि जब राष्ट्रीय गीत के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और संविधान का गला घोंट दिया गया था। उन्होंने सदन में, राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर आयोजित विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया था, हर भारतीय का संकल्प बन गया था।
मोदी ने कहा कि जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है।
हमारे लिए यह गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और हम सभी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए थे, तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था।
जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और जब वंदे मातरम् का अत्यंत उत्तम पर्व होना चाहिए था, तब भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि जिस वंदे मातरम् गीत ने देश को आजादी की ऊर्जा दी थी, उसके 100 वर्ष पूरे होने पर हमारे इतिहास का एक काला कालखंड दुर्भाग्य से उजागर हो गया।
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