देश

View All
Published / 2025-12-20 23:00:54
आज रूठियाई में होगा संत रामपाल जी महाराज का किसान रत्न सम्मान समारोह का लाइव प्रसारण

  • राधौगढ विधायक जयवर्धन भी हो सकते हैं कार्यक्रम में शामिल

कमल सिंह लोधा

एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। जिले के तहसील राघोगढ़ के रूठियाई में आज दिनांक 21 दिसंबर 2025 को संत रामपाल जी महाराज को किसान रत्न सम्मान समारोह का लाइव प्रसारण एलइडी टीवी के माध्यम से सुबह 10 बजे से किया जाएगा आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस लाइव में शामिल होंगे सूत्रों की माने तो इस कार्यक्रम में राधौगढ विधायक जयवर्धन सिंह भी शामिल हो सकते हैं।

आपको बता दें हरियाणा में पिछले दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण जब किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं और गरीब परिवारों के मकान ढह गए थे, तब संत रामपाल जी महाराज ने जेल में होते हुए भी मानवता की अद्भुत सेवा की। उनके मार्गदर्शन में उनकी टीम ने प्रभावित गांवों में हजारों पाइप, मोटरें, दवाइयां और आर्थिक सहायता पहुँचाई।

 यह ऐतिहासिक कार्यक्रम रविवार सुबह 10 बजे गांव ढाया के राजकीय स्कूल परिसर में आयोजित किया जाएगा। इसमें हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में किसान संगठन और आम जनता भाग लेगी। कार्यक्रम में सत्संग, भजन-कीर्तन और किसान मसीहाओं के विचारों का आदान-प्रदान होगा।

Published / 2025-12-20 21:16:40
सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत बनाना जी राम जी विधेयक का लक्ष्य : पीएम

जी राम जी विधेयक का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं बल्कि इसे नये रूप में मजबूत बनाना है : मोदी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विकसित भारत जी राम जी विधेयक को लेकर विपक्ष के कड़े विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस विधेयक का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं है बल्कि इसे नये सिरे से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि विधेयक का लक्ष्य रोजगार गारंटी बढाना, स्थानीय योजना को शामिल करना, मजदूरों की सुरक्षा और खेती की उत्पादकता के बीच संतुलन बनाना और ग्रामीण आजीविका व्यवस्था को बदलना है। 

श्री मोदी ने इस विधेयक के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को शनिवार को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए एक पोस्ट में यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री सिंह ने लेख में विधेयक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने लोगों से इस लेख को पढ़ने की अपील की है। 

पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस जरूर पढ़े जाने वाले लेख में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि विकसित भारत जी राम जी बिल का लक्ष्य रोजगार गारंटी को बढ़ाकर, स्थानीय योजनाओं को शामिल करके, मजदूरों की सुरक्षा और खेती की उत्पादकता के बीच संतुलन बनाकर, योजनाओं को मिलाकर, फ्रंटलाइन क्षमता को मजबूत करके और शासन को आधुनिक बनाकर ग्रामीण आजीविका को बदलना है। वह इस बात पर जोर देते हैं कि यह बिल सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं है- यह इसका नवीनीकरण है।

Published / 2025-12-20 20:27:04
बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई की अनुमति से बढ़ावा की उम्मीद

बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई से निवेश, प्रतिस्पर्धा और सुशासन को मिलेगा बढ़ावा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बीमा कानून संशोधन विधेयक के जरिये बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गयी है जिससे निवेश, प्रतिस्पर्धा और नियामकीय लचीलापन बढ़ाये जाने की उम्मीद है। 

संसद ने इस सप्ताह सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी और इसके साथ ही बीमा कंपनियों के विदेशी निवेश की सीमा 74 फीसदी से बढ़कर 100 फीसदी हो गयी तथा उनके पूर्ण विदेशी स्वामित्व का मार्ग प्रशस्त हो गया। यह वर्ष 2000 में आरंभ हुई उदारीकरण की प्रक्रिया का शीर्ष है। उसी साल इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया था और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की सीमा 26 फीसदी तय की गई थी। 

वर्ष 2014 में इसे बढ़ाकर 49 फीसदी और 2021 में 74 फीसदी कर दिया गया था। मार्च 2021 तक कुल 41 बीमा कंपनियों में एफडीआई था और सितंबर 2024 तक इस उद्योग ने वर्ष 2000 में सुधारों की शुरुआत के बाद से लगभग 82,847 करोड़ रुपये का एफडीआई आकर्षित किया, जो निवेशकों की रुचि को रेखांकित करता है। 

आशा है कि अधिक एफडीआई से ज्यादा वैश्विक बीमा कंपनियां देश में आयेंगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में सुशासन मानकों को मजबूती हासिल होगी। जीवन बीमा और गैर जीवन बीमा क्षेत्रों में करीब 73 बीमा कंपनियों की मौजूदगी के बावजूद भारत में बीमा प्रसार सकल घरेलू उत्पाद का केवल 3.7 फीसदी है जो वैश्विक औसत का करीब आधा ही है। 

विधेयक ने तीन कानूनों को संशोधित किया है- बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999। विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को क्षेत्र-विशिष्ट लाइसेंस जारी करने का अधिकार देता है, जिससे बीमा कंपनियां साइबर, संपत्ति या समुद्री बीमा जैसी एकल या विशिष्ट व्यावसायिक क्षेत्रों में काम कर सकेंगी। 

अधिक व्यापक तौर पर देखें तो वैधानिक प्रावधानों से हटकर विधेयक एक विनियमन-आधारित ढांचे की ओर बदलाव को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत कई परिचालन मानदंड संसद द्वारा अनुमोदित कानून के बजाय आईआरडीएआई द्वारा विनियमों के माध्यम से तय किए जायेंगे। इसमें एजेंटों और मध्यस्थों के लिए कमीशन और पारिश्रमिक की सीमा शामिल है, जिससे नियामक को बाजार की परिस्थितियों और उपभोक्ता संरक्षण उद्देश्यों के अनुरूप इन सीमाओं को समायोजित करने के लिए अधिक लचीलापन मिलेगा। 

विधेयक यह भी प्रस्तावित करता है कि न्यूनतम पूंजी आवश्यकताएं, सॉल्वेंसी मार्जिन और निवेश मानदंड जैसे प्रमुख पैरामीटर को कानून से हटाकर विनियमन में स्थानांतरित किया जाये, जिससे आईआरडीएआई की पर्यवेक्षण की भूमिका में उल्लेखनीय विस्तार होगा। इस क्षेत्र में आगामी सुधार संभवत: समग्र लाइसेंसों पर केंद्रित हो सकता है, जो एक ही इकाई को जीवन और गैर-जीवन बीमा दोनों संचालित करने की अनुमति देगा, जैसा कि विकसित देशों सहित कई स्थानों पर प्रचलित है। 

जैसे-जैसे बीमा क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धा और विदेशी निवेश के लिए खुल रहा है, लंबे समय से चली आ रही चुनौतियां अब भी इसकी पहुंच और विश्वसनीयता को सीमित करती हैं। बीमा कवरेज में असमानता है। विशेषकर ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों में, जहां जागरूकता, वहन करने की क्षमता और वितरण की खामियां बनी रहती हैं। दावों के निपटान में देरी और भुगतान को लेकर विवादों ने सार्वजनिक विश्वास को और कमजोर किया है, जिससे व्यापक स्तर पर अपनाने की प्रवृत्ति हतोत्साहित हुई है। 

इन समस्याओं से निपटने के लिए आईआरडीएआई ने बीमा सुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे सुधार लागू किये हैं, जिसका उद्देश्य बीमा पॉलिसियों की खरीद, सेवा और निपटान के लिए एकीकृत बाजार तैयार करना है। सामान्य केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) मानदंड और सुव्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र तनाव को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और बीमा को अधिक सुलभ बनाने के लिए बनाये गये हैं। 

अंतत:, बीमा सुधारों की सफलता केवल स्वामित्व उदारीकरण पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस पर भी कि नियामकीय लचीलापन, उपभोक्ता संरक्षण और अंतिम स्तर तक पहुंच को कितनी अच्छी तरह संतुलित किया जाता है, ताकि सुधार वास्तविक वित्तीय सुरक्षा में परिवर्तित हो सके। फिर चाहे वह परिवारों के लिए हो या व्यवसायों के लिए।

Published / 2025-12-19 22:08:15
राष्ट्रीय देहदान दिवस पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का सम्मान

  • मानवता की मिसाल: राष्ट्रीय देहदान दिवस पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का सम्मान

कमल सिंह लोधा

एबीएन सेंट्रल डेस्क (भोपाल)। आज राष्ट्रीय देहदान दिवस के गरिमामयी अवसर पर भोपाल स्थित पीपुल्स हॉस्पिटल के मानव रचना विभाग में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के उन अनुयायियों के परिवारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मानवता की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करते हुए देहदान जैसा महान संकल्प पूर्ण किया है।

सम्मान और सुविधाएं

अस्पताल प्रबंधन द्वारा देहदान करने वाले पुण्यात्माओं के परिवारों को सर्व सम्मान प्रमाण पत्र भेंट किए गए। इसके साथ ही, पीपुल्स हॉस्पिटल प्रशासन ने एक सराहनीय निर्णय लेते हुए इन परिवारों को अस्पताल में भविष्य में इलाज हेतु विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की घोषणा भी की है।

इन पुण्यात्माओं ने किया देहदान

संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर समाज कल्याण के लिए अपनी देह समर्पित करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं: 

  • स्वर्गीय रजनी दासी 
  • स्वर्गीय फूलचंद दास
  • मनमोहन दास
  • कृष्ण मोहन सक्सेना जी
  • व अन्य सेवाभावी अनुयायी।

समाज के लिए प्रेरणा

समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अंगदान और देहदान सबसे बड़ा दान है, जो मृत्यु के पश्चात भी कई लोगों को नया जीवन या चिकित्सा शिक्षा में शोध का अवसर प्रदान करता है। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी जिस प्रकार सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और मानवतावादी कार्यों में अग्रणी रहते हैं, वह काबिले तारीफ है।
हम सभी इन देहदान कर्ताओं के परिवारों के सुखद और उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करते हैं। उनके इस त्याग को समाज सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।

Published / 2025-12-19 21:45:38
राजस्थान ने सुलझाये पॉक्सो एक्ट के 170 मामले

  • राजस्थान की अदालतों ने दिखाई सक्रियता, 170 प्रतिशत पॉक्सो मामलों का किया निपटारा
  • भारत में पॉक्सो मामलों की निपटान दर अब 109 प्रतिशत, जबकि राजस्थान में 170 प्रतिशत रही
  • राजस्थान की अदालतों ने लंबित मामलों को कम करने में पाई बड़ी सफलता, एक साल में दर्ज हुए मामलों से भी अधिक केस निपटाए
  • एक शोध के अनुसार 4 वर्षों में सभी लंबित मामलों को खत्म करने के लिए देशभर में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की जरूरत
  • यह अध्ययन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन ने किया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने पॉक्सो मामलों में बच्चों को न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। पहली बार एक वर्ष में दर्ज होने वाले पॉक्सो मामलों से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इस दिशा में राजस्थान ने राष्ट्रीय निपटान दर 109 प्रतिशत को पीछे छोड़ते हुए 170 प्रतिशत की दर हासिल की है। साल 2025 में जहां राजस्थान में पॉक्सो कानून के तहत 692 मामले दर्ज हुए, वहीं अदालतों ने 1173 मामलों का निपटारा किया, जिसमें पिछले कई वर्षों से लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा शामिल है। 

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज (सी-लैब) फॉर चिल्ड्रन की रिपोर्ट पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग पॉइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज के अनुसार वर्ष 2025 में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 80,320 मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 मामलों का अदालती सुनवाई के बाद निपटारा किया गया। इससे निपटाने की दर 109 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि 24 राज्यों में पॉक्सो मामलों की निपटान दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है। रिपोर्ट में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) के तहत सभी लंबित मामलों को चार वर्षों के भीतर खत्म करने के लिए 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना करने की सिफारिश की गई है।

मुकदमों को लेकर अक्सर तारीख पर तारीख की छवि से बदनाम भारत में 2023 तक पॉक्सो के 2,62,089 मामले लंबित थे। लेकिन अब एक अहम बदलाव देखने को मिला है क्योंकि निपटाए गए मामलों की संख्या दर्ज किए गए मामलों से ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां न्यायिक व्यवस्था अब सिर्फ लंबित मामलों को संभालने के बजाय उन्हें सक्रिय रूप से कम करना शुरू कर रही है। साथ ही रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि लंबित पॉक्सो मामलों को पूरी तरह खत्म करने के लिए चार साल की अवधि में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित की जाएं। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिसमें निर्भया फंड का भी उपयोग किया जा सकता है।

रिपोर्ट कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाती है। जैसे कि राज्यों के बीच मामलों के निपटान की दर में अंतर, दोष सिद्धि की दर में निरंतरता की कमी और लगभग 50 फीसदी मामलों का दो साल तक लंबित रहना। उदाहरण के तौर पर, राजस्थान में लंबित मामलों में 7 प्रतिशत मामले 6–10 साल से, 4 प्रतिशत 5 साल से, 12 प्रतिशत 4 साल से, 31 प्रतिशत 3 साल से और शेष 46 प्रतिशत मामले 2 साल से लंबित हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कई मामले वर्षों से लंबित हैं। ये आंकड़े उन मामलों को दिखाते हैं जो कई साल पहले न्याय प्रणाली में दर्ज हुए थे, लेकिन अब तक उनमें कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। रिपोर्ट बताती है, किसी मामले की प्रक्रिया के शुरुआती दौर से ही लंबित रहने की समस्या शुरू हो जाती है और व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर मामलों को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

न्यायिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में इन आंकड़ों के दूरगामी असर पर बात करते हुए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक (शोध) पुरुजीत प्रहराज ने कहा, भारत आज बाल यौन शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जब न्यायिक व्यवस्था दर्ज किए जाने वाले मामलों से अधिक पॉक्सो मामलों का निपटारा करने लगती है, तब यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी होती है, जो बच्चों ने व्यवस्था पर खो दिया था। हमारा शोध बार-बार यह दिखाता है कि न्याय में हर दिन की देरी, बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है। इसलिए इस गति को बनाए रखना केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है। ताकि हर बच्चे के लिए समय पर संवेदनशील और बाल-केंद्रित न्याय अपवाद नहीं, बल्कि हक़ीक़त बन सके। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी है। जेआरसी 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों के लिए काम कर रहा है।

राज्यों में देखें, तो सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो के मामलों के निपटान की दर 150 प्रतिशत से अधिक रही है। वहीं, अन्य सात राज्यों में यह निपटारे की दर 121 से 150 प्रतिशत के बीच रही, जबकि 10 राज्यों ने 100 से 120 प्रतिशत तक की निपटान दर हासिल की। इन 24 राज्यों ने न सिर्फ 2025 में दर्ज हुए मामलों का निपटारा किया, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों को भी काफी हद तक समाप्त करने में सफलता पाई।

रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि पॉक्सो के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के मकसद से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हर साल मामलों के निपटान की दर 100 प्रतिशत से अधिक बनाए रखें। इसके साथ ही जो राज्य न्यायिक प्रक्रिया में पीछे हैं, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाए। साथ ही दोषसिद्धि और बरी होने की दरों की नियमित और बारीकी से निगरानी की जाए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मामलों के बेहतर विश्लेषण और दस्तावेजों की त्वरित उपलब्धता के लिए एआई आधारित कानूनी शोध उपकरणों और दस्तावेज प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही अधिक तेज व प्रभावी हो सके।
यह रिपोर्ट 2 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जिन्हें नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और लोकसभा में पूछे गए सवालों और उनके जवाबों से लिया गया है।

और जानकारी के लिए संपर्क करें
जितेंद्र परमार
8595950825

Published / 2025-12-18 23:19:41
21 को संत रामपाल जी महाराज को किसान रत्न से नवाजेगी भारतीय किसान यूनियन

कमल सिंह लोधा

एबीएन सेंट्रल डेस्क (हरियाणा)। हिसार जिले का ऐतिहासिक गांव ढाया आगामी 21 दिसंबर 2025, रविवार को एक अभूतपूर्व सम्मान समारोह का गवाह बनने जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) ने भारी आपदा के समय किसानों और मजदूरों के लिए संकटमोचक बने संत रामपाल जी महाराज को प्रतिष्ठित किसान रत्न उपाधि से सम्मानित करने का विधिवत निर्णय लिया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दिलबाग हुड्डा ने बताया कि पिछले दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण जब किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं और गरीब परिवारों के मकान ढह गए थे, तब संत रामपाल जी महाराज ने जेल में होते हुए भी मानवता की अद्भुत सेवा की। उनके मार्गदर्शन में उनकी टीम ने प्रभावित गांवों में हजारों पाइप, मोटरें, दवाइयां और आर्थिक सहायता पहुँचाई। किसानों का कहना है कि जब सरकार और प्रशासन मदद करने में विफल रहे, तब संत जी ने ईश्वरीय दूत के रूप में उनकी सुध ली।

यह ऐतिहासिक कार्यक्रम रविवार सुबह 10:00 बजे गांव ढाया के राजकीय स्कूल परिसर में आयोजित किया जाएगा। इसमें हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में किसान संगठन और आम जनता भाग लेगी। कार्यक्रम में सत्संग, भजन-कीर्तन और किसान मसीहाओं के विचारों का आदान-प्रदान होगा। 

यूनियन के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि संत रामपाल जी महाराज स्वयं एक किसान परिवार से संबंधित हैं, इसलिए वे धरातल की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं। उनके द्वारा किए गए परोपकारी कार्यों, जैसे गरीबों के मकान बनवाना और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना, के कारण उन्हें समाज में भगवान जैसा दर्जा दिया जा रहा है।

इस सम्मान समारोह के माध्यम से किसान समाज उस निस्वार्थ सेवा का आभार प्रकट कर रहा है, जो संत रामपाल जी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में प्रदान की। गांव ढाया अब इस महाकुंभ के लिए पूरी तरह तैयार है, जहाँ एक संत के प्रति अटूट श्रद्धा और कृतज्ञता का संगम देखने को मिलेगा।

Published / 2025-12-18 20:59:29
भारतीय रेल ने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.2% हिस्सा किया पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड

भारतीय रेल ने रचा इतिहास! रेलवे ने वो कर दिखाया जो ब्रिटेन-रूस-चीन भी नहीं कर सके 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक रेलवे सेक्टर में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देश की लाइफलाइन कही जाने वाली भारतीय रेल ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.2 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड कर लिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब देश की अधिकांश ट्रेनें डीजल के बजाय बिजली से संचालित होंगी, जिससे न केवल ईंधन की भारी बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। 

इस उपलब्धि के साथ भारत ने रेलवे विद्युतीकरण के मामले में ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां ब्रिटेन का केवल 39 प्रतिशत, रूस का 52 प्रतिशत और चीन का करीब 82 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क ही विद्युतीकृत है, वहीं भारत लगभग 100 प्रतिशत लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। यह सफलता भारतीय रेल के तेज आधुनिकीकरण और हरित परिवहन की दिशा में मजबूत कदम को दर्शाती है। 

एक दशक में रिकॉर्ड तोड़ विद्युतीकरण 

रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2025 के बीच देश में 46,900 रूट किलोमीटर रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है। यह आंकड़ा पिछले 60 वर्षों में हुए कुल विद्युतीकरण से भी दोगुना से अधिक है। बीते एक दशक में जिस गति से यह काम हुआ है, उसने भारतीय रेल को दुनिया के सबसे तेजी से इलेक्ट्रिफाइड रेलवे नेटवर्क में शामिल कर दिया है। 

14 रेलवे जोन पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड 

फिलहाल, देश के 14 रेलवे जोन पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुके हैं, जिनमें सेंट्रल, ईस्टर्न, नॉर्दर्न और वेस्टर्न रेलवे जैसे प्रमुख जोन शामिल हैं। इसके अलावा 25 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर चुके हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में भी पूरा नेटवर्क इलेक्ट्रिक हो चुका है, जबकि असम में 92 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और वह अंतिम चरण में है। 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम 

भारतीय रेल की यह उपलब्धि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहद अहम है। आंकड़े बताते हैं कि रेल परिवहन, सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 89 प्रतिशत कम कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन करता है। सड़क मार्ग से एक टन माल को एक किलोमीटर ले जाने पर जहां करीब 101 ग्राम कार्बन डाइ आक्साइड उत्सर्जित होता है, वहीं रेल से यही आंकड़ा केवल 11.5 ग्राम रहता है। यही कारण है कि भारतीय रेल को देश के हरित परिवहन ढांचे की रीढ़ माना जा रहा है। 

सोलर एनर्जी और नेट-जीरो का लक्ष्य 

भारतीय रेल सिर्फ इलेक्ट्रिफिकेशन तक सीमित नहीं है। देशभर के 2,626 रेलवे स्टेशनों पर 898 मेगावाट सोलर पावर की व्यवस्था की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारतीय रेल को नेट-जीरो कार्बन एमिटर बनाया जाये। यह पहल भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Published / 2025-12-16 20:32:10
पहली बार डॉलर की कीमत 91 रुपये के पार

डॉलर के सामने रुपये ने बनाया नया निचला स्तर, पहली बार 91 के पार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कोई सफलता न मिलने और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से रुपया मंगलवार को कारोबार के दौरान 36 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 91 के स्तर को पार कर गया। रुपया पिछले 10 कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले 90 से गिरकर 91 पर आ गया। यह पिछले पांच सत्र में ही डॉलर के मुकाबले एक प्रतिशत लुढ़का है। 

रुपया पूर्वाह्न पौने 12 बजे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.14 पर कारोबार कर रहा था जो पिछले बंद भाव से 36 पैसे की गिरावट दर्शाता है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.87 पर खुला और सत्र बढ़ने के साथ-साथ इसमें गिरावट जारी रही। 

रुपया सोमवार को 29 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.78 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.27 पर रहा। घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 363.92 अंक टूटकर 84,849.44 अंक पर जबकि निफ्टी 106.65 अंक फिसलकर 25,920.65 अंक पर रहा।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60.19 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,468.32 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

Page 12 of 330

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse