कथनी करनी था एक समान
मां भारती के चरणों में
सर्वस्व समर्पण ध्येय अरमान ,
हम रहें या न रहें
तेरा वैभव अमर रहे मां
थी यही उनकी पहचान
अटल जी कहा करते थे
हे प्रभु इतनी ऊंचाई
न देना मुझे कि गैरों को
गले लगा न सकूं ,
जमीन पर रहने वालों से
आंखें अपनी मिला न सकूं
सरकारें एक जैसी होती है
सत्ता का चरित्र समान होता है
सत्ताधारी का अपना
विशेष अरमान होता है ,
यह अलग बात है कि
चरित्र बदलने का
हम प्रयास कर रहे हैं
राजनीति तो माध्यम है
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हो
ऐसा अभ्यास कर रहे हैं
दूसरों पर हंसना और बात है
खुद पर हंसना बड़ी बात है
हास्य-रस शक्ति देता है
जूझने का बल देता है ,
कभी-कभी वीर रस
जो काम नहीं कर पाता
चुटकी भर हास्य से
जीवन बादल जाता है
नव चेतना निकल आता है
हम आज के वर्तमान हैं
अटल जी का विशाल व्यक्तित्व
कार्यकर्ताओं के सम्मान हैं
वह हैं हमारे प्रेरणा स्रोत ,
हमारा हर एक कार्य
अटलजी के आदर्श से
है समर्पित ओत-प्रोत..
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुशासन के शाश्वत आदर्श, सहज, सहृद, चेतना/भावना/संवेदना के प्रतिमूर्ति, सहज उपलब्ध, हमारे प्रेरणा व्यक्तित्व, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन।
मित्रों को सुशासन दिवस की हृदयतल से बधाई..! सामान्य कार्यकर्ता, स्वयंसेवक, जननेता, राजनेता से राष्ट्रनेता तक की उनकी गरिमा मयी यात्रा अभिनंदनीय है।
भारत माता के सेवा के यज्ञ में उन्होंने अपना सर्वस्व आहुति स्वरूप समर्पित किया। आपका संपूर्ण जीवन यात्रा वंदनीय एवं प्रेरणा का स्रोत है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रेमानंद महाराज आम जन से लेकर बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी तक के लोकप्रिय संत माने जाते हैं। उनसे मिलने के लिए कई भक्त आश्रम पहुंचते हैं तो कई लोगों को उनकी रात में होने वाली पदयात्रा का इंतजार बेसब्री से होता है।
अब प्रेमानंद महाराज की झलक पाने के लिए भक्तों को रात का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, उनकी पदयात्रा का समय अब बदल गया है। अगर आप भी प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए उनकी पदयात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो नया समय यहां जान लें।
प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अब रात को 2 बजे नहीं बल्कि शाम 5 बजे निकलेगी। ऐसे में इस बदले हुए समय से श्रद्धालुओं को आसानी होगी। प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा वृंदावन स्थित श्रीकृष्ण शरणम् फ्लैट से शुरू होकर श्री राधा केलिकुंज आश्रम तक निकलती है। यह पदयात्रा करीब दो किलोमीटर की होती है। इस दौरान असंख्य भक्त उनकी एक झलक पाने के लिए लंबी कतार लगाए खड़े रहते हैं।
संत प्रेमानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। प्रेमानंद जी के परिवार में भक्तिभाव का माहौल था और इसी का प्रभाव उनके जीवन पर भी पड़ा। प्रेमानंद जी महाराज संन्यासी बनने के लिए घर का त्याग कर वाराणसी आ गये और यहीं अपना जीवन बिताने लगे।
प्रेमानंद जी महाराज ने दस वर्षों से भी अधिक समय तक अपने गुरु सद्गुरु देव की सेवा की। अपने गुरु देव और श्री वृंदावन धाम के दिव्य आशीर्वाद से वे शीघ्र ही पूर्णत: सहचरी भाव में खो गये और श्री राधा के चरण कमलों में उनकी अटूट भक्ति विकसित हो गयी और वह श्री राधा रानी की दिव्य शक्ति के अंश बन गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्च को एक बार फिर से आर्थिक विकास के इंजन के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि इसका गुणक प्रभाव बहुत अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो बुनियादी ढांचे में लगाया गया प्रत्येक एक रुपया अर्थव्यवस्था में लगभग 3 रुपये की वृद्धि करता है। यह आंकड़ा अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि बुनियादी ढांचे के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है।
पिछले बजट में बुनियादी ढांचे के खर्च को थोड़ा कमतर आंकने का जो रुझान दिखा अब उसे बदलने की सख्त जरूरत है। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि मौजूदा माहौल में निजी निवेशक अब भी नये-नये बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हाथ डालने से हिचकिचा रहे हैं। बुनियादी ढांचे पर कितना खर्च करना है, इसका एक स्थापित वृहद अर्थव्यवस्था से जुड़ा ढांचा है।
हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य यह है कि बुनियादी ढांचे में सकल पूंजी निर्माण (जीसीएफआई) वास्तव में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 7 फीसदी होना चाहिए। इस 7 फीसदी में से सामान्यत: लगभग 3.5 फीसदी केंद्रीय बजट से आता है, जबकि बाकी 3.5 फीसदी राज्य, निजी पूंजी और ईबीआर (अतिरिक्त बजटीय संसाधन जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी शामिल हैं) से आता है। इस ढांचे का इस्तेमाल करते हुए देखें तो आगामी बजट में बुनियादी ढांचे का कुल खर्च 14 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए।
विकास के अगले चरण के लिए निजी भागीदारी को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) तंत्र को फिर से आक्रामक रूप से सक्रिय बनाना होगा। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) के तहत पीपीपी इकाई को अब केवल कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर बेहद आवश्यक सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़े जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाने होंगे।
उन्हें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन, आवास, स्वच्छता, जल, कौशल विकास, डिजिटल परियोजनाएं और कृषि-बुनियादी ढांचे जैसे जरूरी सामाजिक क्षेत्र के लिए सक्षम ढांचा तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। सरकार की भूमिका क्षेत्र विशेष के मॉडल रियायती समझौते तैयार करने और व्यवहार्यता फंडिंग अंतर (वीजीएफ) जैसे जोखिम कम करने वाले तंत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
राज्यों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन्हें पिछले बजट में घोषित इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड (आईआईपीडीएफ) से सहयोग लेना चाहिए। निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर नीति में भी सुधार की आवश्यकता है। मध्यम आकार की निजी बुनियादी ढांचा कंपनियों के पास 20-30 विशेष उद्देश्य वाली इकाइयां (एसपीवी) होती हैं जबकि बड़े खिलाड़ियों के पास 50 से अधिक हो सकते हैं।
एक समूह कराधान व्यवस्था बने जो फर्मों को समूह के स्वामित्व वाले एसपीवी में लाभ और हानि को मिलाने की अनुमति दे तो इससे नकद प्रवाह स्थिर होगा, ऋण प्रोफाइल मजबूत होगी और उधार लेने की लागत कम होगी। यह लंबे समय से चली आ रही एक तर्कसंगत मांग है। आने वाले वर्षों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पहलू शहर-स्तर के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना है।
इसमें गतिशीलता के लिए सड़कें आदि, जल और जल-निकासी तंत्र, जलवायु के अनुकूल बुनियादी ढांचा और किफायती आवास शामिल हैं। पिछले केंद्रीय बजट में घोषित अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एक बेहतरीन कदम है और अब इसे जमीन पर कार्रवाई दिखानी चाहिए। इसके अलावा, शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम को देख केंद्र सरकार को तब तक किसी भी शहरी परिवहन परियोजना की फंडिंग बंद कर देनी चाहिए जब तक कि संबंधित शहर अनिवार्य एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) को पूरी तरह से लागू नहीं कर देता।
जब सरकार के निवेश से किसी जगह जमीन की कीमत बढ़ती है तब उस बढ़े हुए मुनाफे का कुछ हिस्सा सरकार को वापस मिलना चाहिए यानी लैंड वैल्यू कैप्चर (एलवीसी) को फंडिंग का एक नियमित साधन बनाया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि बुनियादी ढांचे की फंडिंग का कुछ हिस्सा सुधार शुल्क, विकास अधिकार या कॉरिडोर वैल्यू कैप्चर जैसे साधनों से आये।
बहुत लंबे समय से, सार्वजनिक खर्च से बढ़ती जमीन की कीमतों का लाभ सिर्फ कुछ चुनिंदा दलालों, अफसरशाहों और राजनेताओं के हाथ में जाने दिया गया है जिसे रोकना होगा। हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) के लिए रेलवे से अलग बजट होना आवश्यक है। यह बुनियादी ढांचे का एक नया वर्ग है जिसे पारंपरिक रेलवे ढांचे के भीतर प्रबंधित नहीं किया जा सकता।
एचएसआर को अपनी तकनीक, मार्ग योजना और भूमि अधिग्रहण के लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता है, साथ ही लंबी अवधि की वित्तीय प्रतिबद्धता भी चाहिए। यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को तेज कर सकता है और मझोले तथा छोटे शहरों को प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जोड़ सकता है, और विकास के नए गलियारों को खोल सकता है।
अब एचएसआर को पारंपरिक सड़कों और राजमार्गों के क्षेत्र की जगह सबसे अधिक सार्वजनिक फंडिंग प्राप्त करने वाला क्षेत्र बनना चाहिए। इसे पारंपरिक रेलवे खर्च से अलग आवंटन मिलना चाहिए, साथ ही पारंपरिक रेलवे बोर्ड से अलग एक आधुनिक संस्थागत प्रणाली को बढ़ावा देना चाहिए। बुनियादी ढांचे की उपयुक्त परिभाषा को भी अद्यतन करना महत्त्वपूर्ण है। कई क्षेत्र बुनियादी ढांचा घोषित होने की होड़ में हैं।
बुनियादी ढांचे का वर्गीकरण वाहक को स्वीकारता है न कि सामग्री को। उदाहरण के तौर पर एक बंदरगाह बुनियादी ढांचा माना जाता है, जबकि जहाज नहीं (और निश्चित रूप से जहाज निर्माण भी नहीं जिसे हाल ही में बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है)।
डीईए के पास अनुमोदित बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की सूची का संशोधन लंबे समय से लंबित है और इसे तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। नये, पेशेवर रूप से सही क्षेत्रों को जोड़ने से निश्चित रूप से विकास को बढ़ावा मिलेगा। वर्ष 2026-27 के बजट को एक बार फिर यह संकेत देना चाहिए कि बुनियादी ढांचा भारतीय विकास मॉडल की सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जबलपुर में रविवार को संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य में एलईडी टीवी के माध्यम से एक दिवसीय भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हरियाणा के हिसार जिले के गांव डाया में आयोजित किसान रत्न सम्मान समारोह का लाइव प्रसारण श्रद्धालुओं को दिखाया गया।
21 दिसंबर 2025 को भारतीय किसान यूनियन की ओर से संत रामपाल जी महाराज को भव्य किसान रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व भी उन्हें किसान मसीहा, किसान रक्षक, धनाना रत्न सहित समाज सेवा से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। संत जी के मार्गदर्शन में अब तक 400 से अधिक बाढ़-प्रभावित गांवों में जल निकासी के लिए मोटर, पाइप सहित हर आवश्यक वस्तु पहुंचाई जा चुकी है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिला है।
सत्संग के दौरान बताया गया कि संत रामपाल जी महाराज का विश्व कल्याण मिशन समानता, भाईचारे और सच्ची भक्ति का संदेश देता है। वे दहेज प्रथा, नशा, मांसाहार और अन्य सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (ग्वालियर)। 21 दिसंबर 2025 को हिसार जिले के डाया गांव में भारतीय किसान यूनियन द्वारा किसानों के मसीहा कहे जाने वाले संत रामपाल जी महाराज जी को किसान रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस सम्मान समारोह का लाइव प्रसारण ग्वालियर जिले की भीतरवार तहसील स्थित कृष्णा मैरिज गार्डन में आयोजित एक दिवसीय विशाल जिला स्तरीय सत्संग में प्रोजेक्टर के माध्यम से किया गया। यह कार्यक्रम संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुँचकर आयोजन की शोभा बढ़ाई।
सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज जी ने आए हुए श्रद्धालुओं को शास्त्रानुकूल भक्ति का ज्ञान कराया और यह भी बताया कि भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिल सकता। जितना जिसकी किस्मत में लिखा है, उतना ही मिलेगा। भले ही इंसान बुराइयों का सहारा लेकर रिश्वत ले और अपने कर्म खराब करे, सब व्यर्थ ही रहेगा। संत रामपाल जी महाराज जी ने सत्संग में कबीर साहेब जी की वाणी का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया -
अर्थात व्यक्ति के भाग्य में जो लिखा है, उसे कोई घटा या बढ़ा नहीं सकता। लेकिन पूर्ण सतगुरु की शरण में आकर साधक जब पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की भक्ति करता है, तो परमात्मा अपने साधक के भाग्य में आने वाले दुखों को नष्ट कर देते हैं। सत्संग समापन के पश्चात भारतीय किसान यूनियन सहित 100 गांवों और 22 खाप पंचायतों द्वारा संत रामपाल जी महाराज जी को किसान रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी दिलबार सिंह हुड्डा सहित कई महान हस्तियों ने संत रामपाल जी महाराज जी के जनकल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए गीतों, कविताओं और अपने शब्दों के माध्यम से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का अनुशासन विशेष रूप से सराहनीय रहा।
सभी श्रद्धालु सुव्यवस्थित ढंग से एक क्रम में बैठकर शांतिपूर्वक सत्संग श्रवण करते नजर आए। आयोजन स्थल पर स्वच्छता की उचित व्यवस्था रही और किसी भी प्रकार की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। कई लोगों ने संत जी के ज्ञान से प्रभावित होकर नाम दीक्षा ग्रहण की और अपने जीवन को नई दिशा प्रदान की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत का खाड़ी देशों के साथ जुड़ाव, पिछले दशक में बहुत बदल गया है और इस बदलाव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। 2014 के बाद से नई दिल्ली ने जो पश्चिम एशिया में उपलब्धि हासिल की है, वह भारत–खाड़ी संबंधों के इतिहास में अभूतपूर्व है।
यह साझेदारी हाइड्रोकार्बन और भारतीय कार्यबल पर अपनी शुरुआती निर्भरता से कहीं आगे बढ़ चुकी है और अब यह एक अधिक निश्चित, संस्थागत और राजनीतिक रूप से आत्मविश्वासी संबंध में बदल गई है। पीएम मोदी के खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के 15 दौरे, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्राओं में सबसे अधिक हैं, ने एक ऐसा गर्मजोशीपूर्ण और परिचित होने का स्तर पैदा किया है, जो पहले की सरकारें कभी भी नहीं कर पाईं।
स्वयं जीसीसी, जिसमें छह अरब देश शामिल हैं और जो सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय गठबंधनों में से एक है, पश्चिम एशिया के आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देता है।
इस नई आत्मविश्वास की एक उल्लेखनीय अभिव्यक्ति क्षेत्र के शीर्ष नागरिक सम्मान के रूप में सामने आई है। छह में से पांच खाड़ी देशों ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किए हैं और ओमान पिछले सप्ताह आर्डर ऑफ ओमान देकर इस सूची में शामिल हो गया है।
यह सम्मान 2019 में यूएई के आर्डर ऑफ ज़ायद, 2016 में सऊदी अरब के किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश, 2019 में बहरीन के किंग हमाद आर्डर ऑफ़ द रिनेसेन्स (फर्स्ट क्लास), और 2024 में कुवैत के ऑर्डर ऑफ़ मुबारक अल-कबीर के बाद प्रदान किया गया है।
सिर्फ़ औपचारिक प्रतीक नहीं महत्वपूर्ण रूप से, ये सम्मान केवल औपचारिक प्रतीक नहीं हैं। एक ऐसे क्षेत्र में, जहां ये सम्मान केवल उन राजनेताओं को दिए जाते हैं जिन्हें भरोसेमंद, विश्वसनीय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ये सम्मान अत्यधिक विश्वास का संकेत देते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पांच जीसीसी देशों से शीर्ष सम्मान प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक राजनेता हैं, यह एक राजनीतिक संदेश है, जो प्रतीकात्मकता से आगे जाता है और खाड़ी क्षेत्र का उनके नेतृत्व और भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा पर दीर्घकालिक विश्वास को प्रतिबिंबित करता है।
2014 से पहले मौजूद अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, यह क्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कई विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय आंतरिक प्रतिद्वंद्विताओं और क्षेत्र के राजनीतिक माहौल की जटिलताओं का हवाला देते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया पीएम मोदी के लिए एक कठिन क्षेत्र बन सकता है।
इसके बजाय, उन्होंने हर खाड़ी देश के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए, ऐसी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जो पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने हासिल नहीं की थी।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनका संबंध अक्सर असाधारण रूप से गर्मजोशी भरा और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित बताया जाता है। सऊदी के सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज़ के साथ उनकी बातचीत ने रणनीतिक सामंजस्य के एक चरण को सुगम बनाया।
बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा, कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह, ओमान के सुलतान हैथम बिन तारिक और कतर के अमीर शेख तमिम बिन हमद अल थानी, सभी ने ऐसे स्तर की खुली स्वीकृति और पहचान के साथ प्रतिक्रिया दी है, जो विदेश के किसी भी नेता को शायद ही दी गई हो। प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक सफलता इस प्रकार दर्ज की गई कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में, इसका समग्र प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है: प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान केवल उस परिवर्तन को औपचारिक रूप देते हैं, जो पहले से ही क्षेत्र के कूटनीतिक परिदृश्य में दिखाई दे रहा है। भारत को खाड़ी में लंबी अवधि की रणनीतिक व्यवस्था में एक स्थिर, भरोसेमंद और अनिवार्य साझेदार के रूप में देखा जाता है, विशेष रूप से जब क्षेत्र आर्थिक विविधीकरण, डिजिटल एकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक संतुलन के नए प्रारूपों की तलाश में है।
यह सद्भावना का कोई अस्थायी क्षण नहीं है बल्कि एक संरचनात्मक पुनर्निर्माण है। अब खाड़ी की पूर्व की ओर दृष्टि, भारत को हाशिये में नहीं, बल्कि अपनी दीर्घकालिक सोच के केंद्र में पाती है। मोदी के नेतृत्व में, भारत एक लेन-देन से जुड़े साझेदार की बजाय रणनीतिक भविष्य को आकार देने वाली शक्ति बन गया है, यह बदलाव वास्तव में भारत के पश्चिम एशिया के साथ संबंधों में अप्रत्याशित है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। जिले के तहसील राघोगढ़ के रूठियाई में आज दिनांक 21 दिसंबर 2025 को संत रामपाल जी महाराज को किसान रत्न सम्मान समारोह का लाइव प्रसारण एलइडी टीवी के माध्यम से सुबह 10 बजे से किया जाएगा आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस लाइव में शामिल होंगे सूत्रों की माने तो इस कार्यक्रम में राधौगढ विधायक जयवर्धन सिंह भी शामिल हो सकते हैं।
आपको बता दें हरियाणा में पिछले दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण जब किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं और गरीब परिवारों के मकान ढह गए थे, तब संत रामपाल जी महाराज ने जेल में होते हुए भी मानवता की अद्भुत सेवा की। उनके मार्गदर्शन में उनकी टीम ने प्रभावित गांवों में हजारों पाइप, मोटरें, दवाइयां और आर्थिक सहायता पहुँचाई।
यह ऐतिहासिक कार्यक्रम रविवार सुबह 10 बजे गांव ढाया के राजकीय स्कूल परिसर में आयोजित किया जाएगा। इसमें हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में किसान संगठन और आम जनता भाग लेगी। कार्यक्रम में सत्संग, भजन-कीर्तन और किसान मसीहाओं के विचारों का आदान-प्रदान होगा।
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