एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 33,660 करोड़ रुपये की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) को मंजूरी प्रदान कर दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसके तहत देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का निर्माण किया जायेगा जिससे विनिर्माण को गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि हर औद्योगिक पार्क 100 एकड़ से 1,000 एकड़ के क्षेत्रफल में होगा। पूर्वोत्तर राज्यों और पर्वतीय इलाकों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ की सीमा रखी गयी है। केंद्र सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देगी जिससे पार्कों के अंदर सड़कें, भूमिगत यूटिलिटी सुविधाएं, नाली, साझा ट्रीटमेंट संयंत्र और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा प्रशासनिक तंत्र तैयार किये जायेंगे।
साथ ही निवेशकों के लिए फैक्ट्री शेड, जांच प्रयोगशालाएं और वेयरहाउस भी पहले से तैयार होंगे। श्रमिकों के रहने के लिए घर और अन्य सहायक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, परियोजना लागत के 25 प्रतिशत तक की केंद्रीय मदद बाह्य बुनियादी ढांचों के लिए दी जायेगी।
श्री वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीतियों में स्थिरता, प्रतिभा भंडार और डिजाइनिंग की क्षमता के दम पर भारत विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन कर उभरा है। प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों से आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया को समर्थन मिलेगा और विशेषकर युवा वर्ग को काफी लाभ होगा। उन्हें विनिर्माण सेक्टर में रोजगार के अवसर मिलेंगे और आने वाले समय में देश को बहुत फायदा होगा।
उन्होंने बताया कि यह छह साल का कार्यक्रम होगा। राज्य सरकारों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और निजी डेवलपरों के साथ मिलकर कुल 34,000 एकड़ में निवेश के लिए तैयार क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य है। औद्योगिक पार्क के विकास के लिए शहरों का चयन चैलेंज के आधार पर किया जायेगा।
योजना से विनिर्माण कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को लाभ की उम्मीद है। विनिर्माण गतिविधियां बढ़ने से कामगार, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता, सेवा क्षेत्र की कंपनियां और स्थानीय लोग भी लाभान्वित होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बड़ा विजन तैयार किया गया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधान परिषद में कहा कि आने वाले वर्षों में राज्य परिवहन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होने की दिशा में बढ़ेगा।
इस योजना के तहत एमएसआरटीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम) के मौजूदा बस बेड़े को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जायेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के बेड़े की सभी बसें 2037 तक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में तब्दील हो जायेंगी।
सरनाइक ने कहा कि ऐसा लक्ष्य रखा जा रहा है जिसके तहत महाराष्ट्र में चलने वाले सभी वाहन 2047 तक ईवी कर दिये जायेंगे। इस दिशा में एक कदम के रूप में एमएसआरटीसी की योजना 2037 तक अपने बेड़े में सभी इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की है।
सरनाइक ने बताया कि एमएसआरटीसी के बेड़े में वर्तमान में 22,000 बसें हैं। इसमें 800 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं और 2037 तक एमएसआरटीसी के बेड़े की सभी बसें इलेक्ट्रिक हो जायेंगी। यह चरणबद्ध तरीके से किया जायेगा।
एमएसआरटीसी राज्य का पहला परिवहन निगम होगा जो अपने पूरे बेड़े को इलेक्ट्रिक रूप में परिवर्तित करेगा। सरकार सिर्फ बसों तक सीमित नहीं है। प्लान के अनुसार 2047 तक महाराष्ट्र के सभी वाहन इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें निजी और कमर्शियल दोनों वाहनों को ईवी में शिफ्ट करने पर जोर दिया जायेगा।
ये पहले भारत में ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार रेंज की चिंता को दूर करने के लिए राज्य के हर राजमार्ग पर प्रति 25 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना बना रही है। साथ ही हाइवे और शरहों में तेजी से नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है।
सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 के अनुसार, अटल सेतु, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग का उपयोग करने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल शुल्क से 100 प्रतिशत की छूट दी जाती है। ईवी खरीदने वाले नागरिकों को सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी दी जा रही है ताकि शुरुआती लागत को कम किया जा सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के कई डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कमी के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण खासतौर पर छोटी और मध्यम स्तर की डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना मुश्किल होता जा रहा है।
डेयरी उद्योग के सामने एक और बड़ी समस्या दूध के पैकेट और कार्टन की कमी बनकर सामने आयी है। दूध के पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है।
गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के अनुसार फिलहाल उनके पास पैकेजिंग सामग्री का स्टॉक सिर्फ करीब 10 दिनों के लिए बचा है। अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो दूध की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। चेंबूर स्थित सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी कहा कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो डेयरी उद्योग बड़े संकट में फंस सकता है।
गैस की कमी का असर दूध की मांग पर भी पड़ रहा है। होटल और रेस्टोरेंट खुद एलपीजी संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्होंने दूध के आॅर्डर कम कर दिये हैं। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के मुताबिक हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े आॅर्डर रद्द हो गये। छोटे डेयरी संचालकों के पास स्टोरेज की सुविधा सीमित है, इसलिए वे दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं।
राहत की बात यह है कि बड़ी डेयरी कंपनियों पर फिलहाल इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। अमूल के एमडी जयेन मेहता के अनुसार उनकी करीब 80% गैस जरूरतें पूरी हो रही हैं, जबकि बाकी जरूरतें डीजल और अन्य ईंधनों से पूरी की जा रही हैं। इसी तरह मदर डेयरी भी अपने प्रोसेसिंग सेंटर्स पर पीएनजी और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे फिलहाल उनकी दूध सप्लाई सामान्य बनी हुई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 8 मार्च उत्तराखंड वाली रैली अब खुलेआम बीजेपी के चेहरे पर तमाचा मार चुकी है। अमित शाह स्टेज पर खड़े होकर बड़े जोश में भारत माता की जय का नारा लगवाने की कोशिश कर रहे थे, जैसे हर बार की तरह भीड़ ताली बजाकर जय चिल्ला देगी। भीड़ ने भारत माता की जय तो बोला लेकिन क्या हुआ? पूरी भीड़ ने एक साथ गरज कर जवाब दिया – UGC एक्ट वापस लो! UGC वापस लो!
शाह बार-बार कोशिश करते रहे – अरे भाई, उत्तराखंड वालों की आवाज़ क्या हो गई? हल्की-सी धमकी-भरी टोन में चुप करवाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने साफ मना कर दिया। नारे नहीं रुके, बल्कि और तेज़ हो गए। मिला UGC रोल बैक का गुस्सा भरा जवाब।
यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है – यह सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) का पहला बड़ा, खुला विद्रोह है बीजेपी के खिलाफ। सालों से वोट बैंक समझकर आरक्षण, कोटा, अब UGC के नए नियमों (2026) में इक्विटी कमेटी बनवाकर OBC/SC/ST को पावर देने की कोशिश की, तो जनरल कैटेगरी के लोग अब चुप नहीं बैठे। वे कह रहे हैं – मेरिट मारो मत, हमें बांटो मत, फाल्स केस से बचाओ!
देशभर में आग लग चुकी है – UP में सिर मुंडवाए जा रहे हैं, ब्लड से चिट्ठी लिखी जा रही है PM को, BJP के ही लोकल लीडर इस्तीफे दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया, लेकिन गुस्सा थम नहीं रहा। उत्तराखंड में अमित शाह के सामने जनता ने साफ बोल दिया – तुम्हारी सबका साथ वाली बात अब नहीं चलेगी, UGC काला कानून है, वापस लो!
टीम एबीएन, रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। रविवार शाम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। तारीखों के ऐलान के साथ ही पांचों राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में होगा, जहां 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग कराई जाएगी। इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
आयोग ने बताया कि इन पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई महीने में समाप्त हो रहा है, इसलिए अप्रैल और मई के बीच पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत सरकारी योजनाओं की नई घोषणाओं, बड़े फैसलों और चुनाव को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा।
गौरतलब है कि 2021 में भी इन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। उस समय चुनाव कार्यक्रम का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछले चुनाव में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि इस बार वहां सिर्फ दो चरणों में वोटिंग होगी। पिछले चुनाव के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, तमिलनाडु का 10 मई, असम का 20 मई और केरल का कार्यकाल 23 मई तक है। वहीं पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल सबसे बाद में 15 जून को समाप्त होगा।
इन चुनावों को लेकर सभी राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और रैलियों का दौर तेज होने की संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। असम से लेकर बंगाल तक चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम चुनाव आयोग ने घोषित कर दिया है। इन चुनावों में करीब 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाये गये हैं, जहां करीब 25 लाख मतदान अधिकारी तैनात रहेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि आयोग ने सभी चुनावी राज्यों का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मतदान कब-कहां होगा और नतीजों किस दिन घोषित किये जायेंगे।
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव एक ही चरण में होंगे। राज्य में नौ अप्रैल को मतदान कराया जायेगा। मतदान के बाद चार मई को मतगणना होगी। इस चुनाव में राज्य के लाखों मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और नई सरकार चुनेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के मामले में भारत को सबसे प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव देशों में से एक बताया गया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है।रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेज कूटनीतिक प्रयास, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सैन्य लॉजिस्टिक्स के जरिए कई सफल आपरेशन चलाये।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की, जिससे भारत की मानवीय छवि मजबूत हुई। जब मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा, तब भारतीय सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और निकासी के लिए तैयारियां तेज कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने Russia–Ukraine War में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए Operation Ganga शुरू किया। इस अभियान में 23,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी मदद मिली। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडिल ईस्ट में युद्ध ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा है, लेकिन इस युद्ध का असर सभी देशों पर देखने को मिल रहा है। भारत में तो LPG गैस सिलेंडर के लिए लोग लंबी-लंबी लाइनों में लग रहे हैं, फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर उड़ी अफवाह का असर ऐसा है कि अब तो लोग पेट्रोल-डीजल भी स्टॉक करके रखने लगे हैं। ऐसे में कई जगह आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। झारखंड के गढ़वा में तो एक युवक की इसी तरह के हादसे में जान चली गई। आग में झुलसे युवक की पहचान थाना क्षेत्र के ही ओबरा गांव निवासी शंभू प्रसाद गुप्ता के रूप में हुई।
आनन-फानन में पुलिस ने शंभू को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालात ज्यादा गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसे रांची रेफर कर दिया। हालांकि रास्ते में ही शंभू की मौत हो गई। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि युवक का शरीर 80 प्रतिशत तक झुलस चुका था। बचने की उम्मीद कम थी।
पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि शंभू ने लोटो गांव में पेट्रोल पंप पर प्लास्टिक के गैलन में पेट्रोल भराया। उसे मोपेड पर रखकर जैसे ही सड़क पर आया, तभी एक तेज रफ्तार कार ने मोपेड में टक्कर मार दिया। इससे गैलन फट गया और आग लग गई। शंभू भी आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद वह इधर-उधर दौड़ने लगा। घटनास्थल पर मौजूद लोग जब तक आग बुझाते, तब तक शंभू गंभीर रूप से झुलस चुका था। रांची ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
शंभू के परिजनों ने बताया कि युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल न मिलने का डर था। पेट्रोल खत्म न हो जाए, इसके लिए शंभू पेट्रोल लेकर घर आ रहा था। रास्ते में हादसे में उसकी मौत हो गई। गांव के मुखिया ने बताया कि शभूं पेट्रोल स्टॉक कर रहा था। उस डर था कि कहीं गैस सिलेंडर की तरह पेट्रोल की भी दिक्कत न हो जाए। यही स्टॉक करना उसके लिए भारी पड़ गया।
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