एबीएन सेंट्रल डेस्क। नॉर्थ ब्लॉक में यूनियन बजट 2026-27 की तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। इस मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परंपरागत हलवा सेरेमनी के जरिए बजट टीम के समर्पण और कड़ी मेहनत का सम्मान किया।
यह रस्म बजट प्रक्रिया में बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि इसके साथ ही लॉक-इन पीरियड की औपचारिक शुरूआत हो जाती है। इसके तहत बजट से जुड़े सभी अधिकारी अगले कुछ दिनों तक पूरी तरह गोपनीय माहौल में नॉर्थ ब्लॉक में ही रहकर काम करेंगे और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क सीमित रहेगा।
इस बार का बजट डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित होने की उम्मीद है। 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाने वाला यह बजट यूनियन बजट मोबाइल ऐप के माध्यम से आम लोगों तक तुरंत पहुंचेगा, जहां इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में देखा जा सकेगा।
कुल मिलाकर, यह बजट सिर्फ आंकड़ों और नीतियों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि सरकारी कामकाज में गोपनीयता, अनुशासन और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का भी प्रतीक बनेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 11 जनवरी तक भारत सरकार ने डायरेक्ट टैक्स से 18.38 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध कलेक्शन किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 8.82 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है। आयकर विभाग ने सोमवार को यह जानकारी दी।
इस कलेक्शन में कॉर्पोरेट टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप के टैरिफ के बीच यह बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से पहले यह आंकड़ा काफी अहम है। यह सरकार के लिए वित्तीय रूप से काफी गुंजाइश छोड़ेगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल, 2025 से 11 जनवरी, 2026 तक कॉर्पोरेट टैक्स से 8.63 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन हुआ। वहीं, व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों जैसे गैर-कॉर्पोरेट स्रोतों से 9.30 लाख करोड़ रुपये का कलेक्शन किया गया। इसके अतिरिक्त, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) से इस अवधि में 44,867 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस दौरान टैक्स रिफंड में 17 फीसदी की कमी आयी है, जो पिछले साल की तुलना में घटकर 3.12 लाख करोड़ रुपये रह गया है। कुल मिलाकर, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 11 जनवरी तक 4.14 फीसदी बढ़कर लगभग 21.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 25.20 लाख करोड़ रुपये तय किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 12.7 फीसदी ज्यादा है। सरकार का अनुमान है कि वह एसटीटी से 78,000 करोड़ रुपये जुटायेगी। यह आंकड़े देश की आर्थिक गतिविधियों और टैक्स अनुपालन में सुधार का संकेत देते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता के नजीराबाद इलाके में एक ड्राई फूड गोदाम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा कर दिया। इस दर्दनाक घटना में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। गोदाम के अंदर से दो शव बरामद किए गए हैं और परिजनों का दावा है कि आग लगने के बाद से करीब 20 लोग लापता हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
पुलिस और दमकल विभाग के अनुसार, यह हादसा सोमवार तड़के करीब तीन बजे हुआ। आग की सूचना मिलते ही दमकल की करीब 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग पर आंशिक रूप से काबू पाने के बाद फायर फाइटर्स गैस कटर की मदद से बिल्डिंग के अंदर दाखिल हुए।
आनंदपुर थाना क्षेत्र के नजीराबाद स्थित इस गोदाम में मुख्य रूप से सूखा पैकेट वाला खाना और सॉफ्ट ड्रिंक्स की बोतलें रखी गई थीं। दमकल विभाग का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि पास के दो अन्य गोदाम भी इसकी चपेट में आ गए। देखते ही देखते लगभग पूरा इलाका जलकर खाक हो गया।
दमकल कर्मियों को आग बुझाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गोदाम एक संकरी गली में स्थित था, जिससे फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर ले जाने और पानी की सप्लाई पहुंचाने में दिक्कत आई। लंबी पाइपों की कमी के कारण आग पर काबू पाने में देरी हुई। कुछ हिस्सों में अब भी आग सुलग रही है और उसे बुझाने का प्रयास जारी है।
घटना की जानकारी मिलने पर राज्य के ऊर्जा मंत्री अरूप बिस्वास मौके पर पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बचाव अभियान की समीक्षा की और लापता लोगों के परिवारों से भी बातचीत की।
मंत्री ने कहा कि पुलिस और फायर सर्विस मिलकर काम कर रही है और आग काफी हद तक काबू में आ चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है, बल्कि राहत और बचाव कार्यों को पूरा करने का समय है।
टीम एबीएन, रांची। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जवानों के पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात रांची लाए गये। एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। शुक्रवार देर रात जैसे ही शहीद जवानों के पार्थिव शरीर रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचे, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गयीं। सेना, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम सलामी दी।
मौके पर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किये। उनके साथ सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन और पुलिस के वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। वित्त मंत्री ने कहा कि देश की रक्षा में शहीद जवानों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। राज्य सरकार शहीदों के परिवारों के साथ है और उन्हें हर संभव मदद दी जायेगी।
गौरतलब है कि 22 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया था। इस हादसे में 10 जवान शहीद हो गये थे, जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हो गये थे। सभी जवान आपरेशनल ड्यूटी पर तैनाती स्थल की ओर जा रहे थे।
इस हादसे में शहीद जवानों में रांची के तिरिल निवासी अजय लकड़ा और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के झालदा थाना क्षेत्र के पुंडा गांव निवासी 24 वर्षीय प्रद्युम्न लोहारा भी शामिल हैं। खराब मौसम के कारण विमान सेवा में देरी हुई, जिससे पार्थिव शरीर देर रात रांची पहुंच सके।
प्रशासन के अनुसार, शनिवार सुबह शहीद प्रद्युम्न लोहारा के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव झालदा, पुरुलिया ले जाया जायेगा। वहीं, शहीद अजय लकड़ा का अंतिम संस्कार रांची में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जायेगा। इस दौरान रांची एयरपोर्ट परिसर भारत माता की जय और शहीद अमर रहें के नारों से गूंज उठा। पूरे राज्य में वीर जवानों के बलिदान पर गर्व और गहरे शोक का माहौल देखा गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात तट के पास समुद्र की सतह से बुलबुले उठने और पानी के उबाल मारने जैसी रहस्यमयी घटना से हड़कंप मच गया है। मछुआरों ने घटना का वीडियो बनाया है जो वायरल हो रहा है। इसमें समुद्र की लहरों में असामान्य हलचल साफ देखी जा सकती है। इसको लेकर प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है।
अंदेशा है कि यह समुद्र तल से गैस रिसाव या किसी भूगर्भीय गतिविधि का संकेत हो सकता है। सरकार ने जांच के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं। सुरक्षा के लिहाज से मछुआरों को उस इलाके से दूर रहने और जहाजों को रास्ता बदलने की सलाह दी गयी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अरब सागर में पानी की हलचल और बुलबुले उठने की खबरों ने प्रशासन और मछुआरों की चिंता बढ़ा दी है। पालघर जिले के एक अधिकारी ने बताया कि मछुआरों के वीडियो में समुद्र के एक बड़े हिस्से में पानी उबलता हुआ और बुलबुले निकलता दिखाई दे रहा है। नजारा ऐसा लग रहा है जैसे पानी उबल रहा हो। समुद्र में इस तरह की असामान्य हलचल से पूरे इलाके में दहशत और आशंका का माहौल है।
पालघर जिला आपदा प्रबंधन सेल के प्रमुख विवेकानंद कदम ने जानकारी दी कि यह जगह जहाजों के रास्ते और मछली पकड़ने के प्रमुख इलाकों के बहुत पास है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह हलचल समुद्र के नीचे से गैस रिसाव, किसी भूगर्भीय गतिविधि या वहां बिछी पाइपलाइनों में खराबी के कारण हो सकती है। घटना बेहद असामान्य है। ऐसे में इस पर समुद्री और औद्योगिक एजेंसियों को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
पालघर जिला आपदा प्रबंधन सेल के प्रमुख विवेकानंद कदम ने बताया कि प्रशासन समुद्री विभागों के साथ मिलकर इस बात की जांच कर रहा है कि यह हलचल किसी प्राकृतिक बदलाव के कारण है या किसी औद्योगिक हादसे की वजह से यह घटना देखी जा रही है। अधिकारी ने जानकारी दी कि सावधानी के तौर पर उस इलाके से गुजरने वाले सभी जहाजों और मछुआरों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज की एक टीम को मौके पर तैनात किया गया है। जांच में ध्यान दिया जा रहा है कि क्या यह समुद्र के नीचे से होने वाला प्राकृतिक मीथेन गैस का रिसाव है या फिर मुंबई हाई क्षेत्र में तेल और गैस पाइपलाइन फटने जैसी कोई मानवीय चूक। आशंका जताई जा रही है कि यह भूकंपीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस के रिसाव के कारण भी हो सकता है। हालांकि जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए सड़क हादसे में सेना के दस जवानों की जान चली गई जबकि 11 घायल हो गये। हादसा भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास हुआ।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सेना की टीम बृहस्पतिवार सुबह एक आपरेशनल ड्यूटी के लिए रवाना हुई थी। इसी दौरान खन्नीटॉप के पास दुर्गम और तीव्र मोड़ पर वाहन अनियंत्रित होकर करीब 400 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया गया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मौके पर ही 10 जवानों की जान चली गर्यी 11 जवान घायल अवस्था में मिले। घायलों को पहले उप जिला अस्पताल भद्रवाह ले जाया गया। जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर उधमपुर स्थित सेना के कमांड अस्पताल भेजा गया है।
हादसे पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि डोडा में हुए दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे में हमारे 10 वीर जवानों की जान चली गयी।
इससे वह बेहद दुखी हैं। हम उनके उत्कृष्ट सेवा भाव और सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेंगे। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। उपराज्यपाल ने आगे कहा कि इस गहरे दुख की घड़ी में पूरा देश शोकाकुल परिवारों के साथ एकजुटता और समर्थन में खड़ा है।
जोबन जीत, सुधेर नरवाल, मोनू, मोहित, एचआर कंवर, सिमरन, पी लोरा, सुलिंदर, अजय लोफरा और स्वर्ण नाग पाल।
साहिल, जेपी सिंह, नीरज, अनूप, नागिस, अमन, शंकर, संदीप, जोबनप्रीत, राकेश और अभिमन्यु के रूप में हुई है। सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकार ने योजना के अंतर्गत प्रचार, विकासात्मक गतिविधियों और गैप फंडिंग के लिए वित्तीय सहायता को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना के विस्तार को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि इस फैसले से असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे में रेगुलर इनकम की सुरक्षा मिलती रहेगी और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी रहेगी और इसके लिए सरकार अलग-अलग क्षेत्रों में सहायता देगी। इनमें प्रचार और विकासात्मक गतिविधियों को बढ़ाया जायेगा। इसमें असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान, बैंक, डाकघर और अन्य संस्थानों के जरिये कैपेसिटी बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी गरीब तबके तक पेंशन योजना की जानकारी पहुंचायी जायेगी। इसके अलावा सरकार इस स्कीम में गैप फंडिंग करेगी। यह फंडिंग योजना की फाइनैंशयल फिजिबिलिटी बनाये रखने, पेंशन भुगतान और योगदान के बीच के अंतर को पूरा करने, योजना की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए होगी।
सरकार के मुताबिक, इस फैसले से कई अहम फायदे होंगे। जैसेकि, कम आय वाले और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में आय की सुरक्षा मिलेगी। देश में पेंशन आधारित समाज का विस्तार होगा। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को सामाजिक सुरक्षा के जरिए मजबूती और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सामाजिक असमानता में कमी लायी जा सकेगी।
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गयी थी। इसका मकसद असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 60 वर्ष की उम्र के बाद निश्चित मासिक पेंशन उपलब्ध कराना है। इस स्कीम में 60 साल की उम्र के बाद 1,000 से 5,000 तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है। पेंशन की राशि योगदान और उम्र पर निर्भर करती है। 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं।
सरकार ने कहा कि योजना को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए लगातार जागरूकता फैलाना जरूरी है। इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र में पेंशन के प्रति भरोसा बढ़ाना और वित्तीय संतुलन बनाये रखने के लिए गैप फंडिंग जरूरी है। इसी को देखते हुए सरकार ने अढ को 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जंग, महंगाई और सुस्त ग्रोथ से जूझ रही हैं, ऐसे समय में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
एक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एफवाई 26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ करीब 7.4% रहने का अनुमान है। इस रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी ताकत है सरकार का कैपेक्स यानी पूंजीगत खर्च, सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन और धीरे-धीरे सुधरता निजी निवेश। लेकिन सवाल यही है- क्या यह रफ्तार आगे भी बनी रह पायेगी?
बजट 2026-27 में सरकार का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 12 से 13 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स रख सकती है, जो पिछले साल से 10-15% ज्यादा हो सकता है। सड़कें, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, शहरी विकास, हाउसिंग, पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी- इन सभी सेक्टर्स में खर्च बढ़ने की संभावना है। सरकार का मकसद साफ है- नौकरियां पैदा करना, निवेश खींचना और लंबी अवधि की ग्रोथ सुनिश्चित करना।
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। रिपोर्ट बताती है कि शहरी खपत में सुस्ती बनी हुई है और ग्रामीण मांग अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है- कैपेक्स और कंजम्पशन के बीच सही संतुलन बनाना। बजट में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, रोजगार योजनाओं, स्किलिंग प्रोग्राम और टार्गेटेड वेलफेयर स्कीम्स के जरिये मांग को सहारा देने की कोशिश की जा सकती है।
बाजार सरकार से फिस्कल अनुशासन की उम्मीद लगाए बैठा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एफवाई 27 में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.2-4.4% के दायरे में रखने का लक्ष्य हो सकता है। इसका सीधा असर बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों और महंगाई पर पड़ेगा। सरकार अगर इस लक्ष्य पर खरी उतरती है, तो घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती है- नॉन-टैक्स रेवेन्यू जुटाना। रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से जुटाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि बीते सालों में इस मोर्चे पर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाये हैं। ऐसे में बाजार सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप की उम्मीद कर रहा है।
बड़े टैक्स कट की उम्मीद फिलहाल कम है। रिपोर्ट कहती है कि सरकार टैक्स दरें घटाने की बजाय टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, मुकदमेबाजी कम करने और रिफंड तेजी से देने पर फोकस कर सकती है। मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन को टागेर्टेड टैक्स इंसेंटिव मिल सकते हैं
बजट के गणित में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड अहम भूमिका निभा सकता है। एफवाई 26 में रिकॉर्ड सरप्लस मिलने के बाद एफवाई 27 में भी सरकार को आरबीआई से मजबूत डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। इससे सरकार को उधारी कम करने और ग्रोथ खर्च बनायेरखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट साफ कहती है कि बाजार सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सुधारों के संकेत भी देखेगा। ईज आॅफ डूइंग बिजनेस, लेबर रिफॉर्म्स, लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कानूनी और रेगुलेटरी सरलीकरण। ये वो फैक्टर हैं जो लंबे समय में भारत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए और आकर्षक बना सकते हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, सीमेंट, पावर, डिफेंस, हेल्थकेयर, फार्मा, टेलीकॉम, एश्, रिन्यूएबल एनर्जी और मेटल्स सेक्टर को फायदा मिल सकता है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में नीतिगत समर्थन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
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