एबीएन सेंट्रल डेस्क। ये दिन और तारीख पश्चिम बंगाल के लिए यादगार बन गयी। आजादी के बाद ये पहला मौका है जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। राजधानी कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। नयी सरकार बनने के साथ ही राज्य में शुभेंदु युग की शुरुआत हो गयी। इस यादगार पल की गवाह बंगाल की जनता बनी। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई नेताओं ने शिरकत की।
कार्यक्रम में एनडीए शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। यूपी के सीएम योगी, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी समेत कई सीएम कार्यक्रम में पहुंचे। इसके साथ ही कई सांसद और विधायक भी शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल को अपना नया सीएम मिल गया है। BJP की बैठक शुभेंदु अधिकारी के नाम पर फाइनल मुहर लग गई।
यानि की शुभेंदु बंगाल के नए सीएम होंगे। कल सुबह 11 बजे शुभेंदु इस पद के लिए शपथ ग्रहण के लिए ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहुंचेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि अमित शाह और मोहन चरण माझी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई है।
नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह, पीएम मोदी सहित कई राज्यों के बड़े नेता पहुंचेंगे। कल यानि की 9 मई का दिन काफी खास रहने वाला है क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है।
इसी के साथ ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शपथ ग्रहण में दो नए डिप्टी सीएम की घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
एबीएन सोशल डेस्क। बच्चों से बंधुआ मजदूरी और ट्रैफिकिंग के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करते हुए कबीरधाम (पूर्व का नाम कवर्धा) जिले के सुदूर घने जंगलों में बंधुआ मजदूरी कर रहे संरक्षित बैगा जनजाति के 13 बच्चों को मुक्त कराया गया। आठ से 15 साल की उम्र के इन बच्चों से मवेशियों की देखभाल का काम लिया जाता था। पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई को पुलिस, चाइल्डलाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।
इस बाबत एवीए की सूचना पर जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए पूरे अभियान का नेतृत्व किया। एवीए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है।
एवीए लगभग दो हफ्ते से इस ट्रैफिकिंग गिरोह की गतिविधियों पर नजर रख रहा था और पुष्टि हो जाने के बाद उसने जिला पुलिस से सूचना साझा की।
कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने कहा, सूचना मिलते ही हमने कार्रवाई शुरू कर दी। इन बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी और ये बेहद अमानवीय स्थिति में रह रहे थे।
एफआईआर दर्ज कर ली गई है और इस नेटवर्क में शामिल सभी तत्वों की गिरफ्तारी के लिए खोजबीन जारी है। हम सुनिश्चित करेंगे कि अपराधियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाए। ट्रैफिकर परिजनों को पैसे व बेहतर सुविधाओं का लालच देकर इन बच्चों को लगभग 7-8 महीने पहले यहां लाए थे, जहां एक पशुपालन फार्म में इनसे रोजाना दस घंटे काम कराया जाता था। एफआईआर के अनुसार इन्हें महीने में महज एक या दो हजार रुपए दिये जाते थे।
छापे की कार्रवाई में शामिल टीम बच्चों की दयनीय हालत देखकर भौंचक्की रह गयी। शुरू में मवेशी पालन फार्म से चार बच्चे मुक्त कराए गये। इसके बाद ये बच्चे अधिकारियों को उस जगह ले गये जहां और बच्चे बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। पूरे दिन चले इस अभियान में जिले के विभिन्न स्थानों से कुल 13 बच्चे मुक्त कराये गये।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, यह बचाव अभियान इस तथ्य को उजागर करता है कि हाशिये पर पड़े जनजातीय समुदायों के बच्चे किस तरह मानव दुर्व्यापार गिरोहों के बढ़ते निशाने पर हैं। ये गिरोह ऐसे समुदायों की लाचारी व असुरक्षा का फायदा उठाते हैं और परिवारों को थोड़े से पैसों का लालच व झूठे वादे कर अपने जाल में फंसाते हैं।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि आठ साल के बच्चों को भी खतरनाक और अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए धकेला जा रहा है। वहीं, इस कार्रवाई में शामिल टीमों और पुलिस की तत्परता सराहनीय है और व्यवस्था के प्रति हमारे भरोसे को मजबूत करती है। अब हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि बचाये गये सभी 13 बच्चों के समुचित पुनर्वास, मुआवजा और शिक्षा के इंतजाम सुनिश्चित किये जाएं ताकि उनका खोया हुआ बचपन उन्हें लौटाया जा सके।
देर रात तक चले इस अभियान में मुक्त कराए गए सभी बच्चों को बाल संरक्षण संस्थानों में भेज दिया गया और देखभाल व पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने के लिए इन्हें बाल संरक्षण समिति के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार दुव्यार्पारियों के खिलाफ ट्रैफिकिंग, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी और किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप समझ रहे हैं कि सुवेन्दु अधिकारी के PA की हत्या हुई है तो आपको भी बदला नहीं बदलाव वाले कीड़े ने काट लिया है और आप भी बंगाल के निस्तेज निकम्मे डीजीपी की तरह भोले हैं जो बता रहा है कि मारने वाले की गाड़ी के नम्बर प्लेट नकली थे।
क्या आपको पता है कि यही PA वो शख्स है जिसने भवानीपुर काउंटिंग हाल में ममता बनर्जी के बिना id घुसने पर आपत्ति की थी और बाहर रोक दिया था। तभी से ये हिट लिस्ट में था।
ये सीधे सीधे भावी मुख्यमंत्री पर हमला था।अजय पाल शर्मा को बुलाओ। अभिषेक बनर्जी और जहांगीर खान को उठाओ। नहीं तो जनता में अपना इक़बाल खो दोगे। सत्ता सिर्फ जय श्री राम बोलने के लिए नहीं मिली है। (सेवानिवृत्त अधिकारी निरंतर नारायण के फेसबुक वाल से साभार)
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती 25 बैसाख (नौ मई) को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नयी सरकार का शपथग्रहण समारोह हो सकता है।
गौरतलब है कि श्री टैगोर की जयंती हर साल बंगाली महीना 25 गते बैसाख को मनाया जाता है। यह दिन बंगाल के लोगों के लिए काफी अहमियत रखता है। राज्य के लोग नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर की जयंती को काफी धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन राज्यभर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस दिन राज्य में भाजपा की नयी सरकार के गठन के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजित हो सकता है। इससे पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आठ मई को कोलकाता में पार्टी विधायक दल की बैठक हो सकती है, जिसमें राज्य के नये मुख्यमंत्री का चयन किया जायेगा।
सूत्रों ने बताया कि आठ मई को ही राज्य में पार्टी के नेता के नाम की घोषणा हो सकती है और नौ मई को गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती के मौके पर शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है।
भाजपा ने राज्य में विधायक दल की बैठक के लिए श्री शाह को केंद्रीय पर्यवेक्षक और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी नौ मई को नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का संकेत दिया है।
राज्य में भाजपा ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार सरकार बनाने जा रही है।
इसके लिए भाजपा कोलकाता में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है। भाजपा की नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित राज्यों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इसके लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी चौकस हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। यह जीत केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन आंसुओं की है जिन्होंने सत्ता के अहंकार को मिट्टी में मिला दिया। संदेशखाली की पीड़ित रेखा पात्रा, आरजी कर मेडिकल कॉलेज की मृतका की मां रत्ना देबनाथ और घरों में चौका-बर्तन करने वाली कलिता मांझी की जीत ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है। इन तीनों महिलाओं ने अपनी निजी क्षमता से बेहतर प्रदर्शन किया है।
कहते हैं कि इतिहास सदैव स्याही से नहीं, कभी-कभी उन आंसुओं से भी लिखा जाता है। जो सूखने से पहले ज्वालामुखी बन जाते हैं। बंगाल की तपती माटी ने इस बार एक ऐसी ही महागाथा रची है। यह केवल सत्ता परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि उस ह्यमौनह्ण के मुखर होने की हुंकार है, जिसे व्यवस्था ने कुचलने की पुरजोर कोशिश की थी।
वैसे भारतीय समाज में कहा भी जाता है कि जब सत्ता का दंभ सातवें आसमान पर पहुंच जाए और न्याय की गुहार लगाने वालों पर लाठियां भांजी जाने लगें, तब नियति स्वयं न्याय करती है। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने आज इसी शाश्वत सत्य पर अपनी मुहर लगा दी है। वास्तव में, यह चुनाव किसी दल या विचारधारा की विजय मात्र नहीं, बल्कि बंगाल की उन माताओं और बेटियों की जीत है, जिन्होंने अपने मताधिकार की शक्ति से खौफ के तथाकथित साम्राज्य को मटियामेट कर दिया है।
इस बंगाल चुनाव में ऐतिहासिक मोड़ की सबसे बड़ी नायिकाएं हैं रत्ना देबनाथ, रेखा पात्रा और कलिता मांझी बनकर उभरी हैं। इन तीन चेहरों ने वह कर दिखाया, जिसे बड़े-बड़े दिग्गज राजनीतिक सूरमा भी नहीं कर पाये थे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ममता बनर्जी की पराजय की पटकथा उसी क्षण लिख दी गई थी, जब इन महिलाओं ने अपनी अस्मत और अपनों के रक्त का हिसाब मांगने का संकल्प लिया था।
इन चुनावी नतीजों ने देश में यह संदेश दे दिया है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें आज भी गहरी हैं। यहां कोई राजा सर्वोपरि नहीं, बल्कि जनता की अदालत ही सर्वोच्च है। अपने-अपने हिस्से का असहनीय दर्द सहने के बाद, अब ये तीनों वीरांगनाएं विधायक के रूप में सदन में न्याय की नई लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। तो आइए इन नायिकाओं की कहानी समझते हैं।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा आरजी कर अस्पताल कांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ की हो रही है। रत्ना ने पानीहाटी सीट से टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार को 28,000 से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी है। मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, जब टीएमसी सरकार के मंत्री और पुलिस प्रशासन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तब रत्ना ने सड़क पर उतरने का फैसला किया था।
उनकी यह जीत उस व्यवस्था को करारा तमाचा है, जिसने एक बेटी के इंसाफ को दबाने की कोशिश की थी। जनता ने रत्ना के आंसुओं को व्यर्थ नहीं जाने दिया और उनके पक्ष में एकतरफा मतदान कर ममता सरकार की विदाई तय कर दी।
संदेशखाली की सड़कों पर जब महिलाएं अपनी इज्जत की सुरक्षा के लिए रो रही थीं, तब सत्ता के गलियारों में सन्नाटा था। लेकिन वहां की पीड़ित रेखा पात्रा ने हिंजलगंज सीट से चुनावी मैदान में उतरकर यह साबित कर दिया कि पीड़ित महिला कमजोर नहीं होती।
रेखा ने टीएमसी प्रत्याशी को 5000 से अधिक वोटों से हराकर विधानसभा का रास्ता तय किया है। यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज है जिनके साथ सालों तक ज्यादती हुई। रेखा की इस जीत ने टीएमसी के गुंडागर्दी वाले मॉडल की कमर तोड़कर रख दी है।
लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर औसग्राम सीट से सामने आयी है, जहां चार घरों में झाड़ू-पोछा करने वाली कलिता मांझी ने टीएमसी के दिग्गज को 12,000 वोटों से पटखनी दे दी। कलिता को बीजेपी का समर्थन करने के कारण टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बार-बार प्रताड़ित किया और अपमानित किया था।
लेकिन एक गरीब मां की हिम्मत नहीं टूटी। कलिता की जीत यह बताती है कि बंगाल के गरीब तबके ने अब डरना छोड़ दिया है। एक मेड से लेकर विधायक बनने तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा कि मेहनत और सच्चाई के आगे सत्ता भी झुकती है।
बीजेपी के लिए ये तीनों महिलाएं ब्रह्मास्त्र साबित हुईं। राजनीति के पंडितों का मानना है कि पार्टी ने इन चेहरों को आगे करके सीधे जनता के दिलों को छुआ। इस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, चुनावी प्रचार के दौरान जब भी ये महिलाएं मंच पर आती थीं, तो जनता की आंखों में गुस्सा और सहानुभूति साफ देखी जा सकती थी।
रत्ना देबनाथ के एक-एक शब्द ने ममता बनर्जी के महिला कार्ड को फेल कर दिया। बीजेपी ने यह साबित कर दिया कि बंगाल की राजनीति अब केवल हिंसा से नहीं, बल्कि संवेदनाओं और न्याय के आधार पर चलेगी।
आज जो लोग भारत में लोकतंत्र के खत्म होने का रोना रोते हैं, उन्हें बंगाल के इन नतीजों को करीब से देखना चाहिए। चुनाव के मैदान में जब एक आम नागरिक सत्ता के शिखर पर बैठे व्यक्ति को धूल चटा देता है, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र फल-फूल रहा है।
जो लोग आज भी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे, वे शायद उन चाटुकारों की श्रेणी में हैं जो जनता की नब्ज नहीं पहचान पाए। बंगाल ने बता दिया है कि चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अगर वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है, तो उसे कुर्सी छोड़नी ही होगी।
टीएमसी की इस हार का सबसे बड़ा कारण उनका वह कैडर रहा, जिसने गांव-गांव में लोगों को डराना अपना पेशा बना लिया था। कलिता मांझी जैसी महिला को परेशान करना टीएमसी को भारी पड़ गया। जब जनता ने देखा कि उन्हीं के बीच की एक महिला को बीजेपी के झंडे के कारण सताया जा रहा है, तो लोगों ने चुपचाप ईवीएम पर चोट की।
संदेशखाली से शुरू हुई वह आग देखते ही देखते पूरे बंगाल में फैल गई और ममता बनर्जी के शासन को जलाकर राख कर दिया। यह चुनाव शांतिपूर्ण नहीं था, लेकिन जनता का इरादा पत्थर की तरह मजबूत था।
ममता बनर्जी की हार और भाजा की इस बंपर जीत के बाद अब जिम्मेदारी काफी बढ़ गयी है। रत्ना, रेखा और कलिता जैसे चेहरों ने जिस भरोसे के साथ लोगों का वोट लिया है, उसे पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।
बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार और हिंसा के खिलाफ जनादेश दिया है। अब देखना यह है कि नई सरकार इन महिलाओं के सम्मान और प्रदेश की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाती है। फिलहाल, बंगाल की हवाओं में न्याय की खुशबू है और यह जीत उन करोड़ों लोगों की है जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना नहीं छोड़ा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद आज सीएम ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेस की। इस दौरान ममता ने EC पर तीखा प्रहार करते हुए चुनाव परिणामों को जनादेश की लूट करार देते हुए जीत की नैतिकता पर सवाल उठाए।
इसी के साथ ममता ने इसे एक सोची- समझी साजिश बताते हुए कहा कि मतदाताओं की सूची से करीब 90 लाख वोट हटाए गए। साथ ही यह भी दावा किया कि BJP ने लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि 100 से अधिक सीटों की लूट करके यह जीत हासिल की है।
इसी के साथ ममता ने पीएम मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय मशीनरी और हर संभव हथकंडे अपनाकर उन्हें हराया गया है।ममता ने कहा है कि वे इस लड़ाई में अकेली नहीं हैं। विपक्ष उनके साथ एकजुट है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होती हुई नजर आ रही है। ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि बीजेपी के सत्ता संभालते ही राज्य में केंद्र सरकार की कई रुकी हुई योजनाएं होंगी। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र (संकल्प पत्र) में वादा किया था कि अगर राज्य में उनकी सरकार बनती है तो वे ममता सरकार द्वारा रोकी गई जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर घर-घर पहुंचायेंगे। आइये जानते हैं कि अगर बीजेपी राज्य की सत्ता संभालती है तो कौन सी योजनाएं लागू होंगी-
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