एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप गुरुवार यानी 12 फरवरी 2026 को किसी जरूरी काम से बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बैंक ग्राहकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि क्या उस दिन बैंक खुले रहेंगे या बंद? देश की प्रमुख बैंक यूनियनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
हालांकि, तकनीकी रूप से यह कोई सरकारी छुट्टी नहीं है, लेकिन इसका असर आपकी बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और हो सकती है।
सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को भेजे गए एक नोट में साफ किया है कि हड़ताल के कारण उनकी शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सीएम ममता बनर्जी ने अपनी कमर कस ली है। ममता बनर्जी ने बंगाल के लोगों के लिए बड़ा ऐलान किया है। ममता ने कहा है कि बंगाल में 10वीं पास बेरोजगार युवकों को 1500 रुपये और किसानों को 4000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार अब सीधे बैंक खातों में पैसा भेजेगी। ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि अब 1 कट्ठा जमीन रखने वाले छोटे किसानों को भी प्रति वर्ष 4000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी।
इसके साथ ही, खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली को पूरी तरह मुफ्त करने का निर्णय लिया गया है। दूसरी ओर युवाओं के लिए युवा साथी योजना के तहत 10वीं पास बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये का भत्ता दिया जायेगा। खास बात यह है कि यह लाभ अगस्त के बजाय अप्रैल महीने से ही लागू कर दिया जायेगा।
इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार 15 से 26 फरवरी तक पूरे बंगाल में विशेष कैंप आयोजित करेगी। कृषि, सिंचाई, बिजली और युवा कल्याण विभाग के ये कैंप सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेंगे, ताकि पात्र लोग अपना पंजीकरण करा सकें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही ट्रेड डील पर आखिरकार पिछले हफ्ते मुहर लग गयी। इस समझौते की जानकारी सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर साझा की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी पुष्टि की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि भारत पर लगने वाला टैरिफ अब 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद से ही यह सवाल उठने लगे कि यह डील किन शर्तों पर हुई और भारत ने बदले में क्या रियायतें दी हैं।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह एक ऐतिहासिक ट्रेड डील है, जिसमें भारत ने केवल चुनिंदा क्षेत्रों में ही अमेरिकी उत्पादों को अपने बाजार में प्रवेश दिया है। गोयल ने कहा कि कुछ अमेरिकी वस्तुओं को ड्यूटी-फ्री एक्सेस दिया गया है, लेकिन इस दौरान घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। उनके मुताबिक, यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा और 140 करोड़ लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इस डील के तहत कुछ अमेरिकी प्रोडक्ट्स को ड्यूटी-फ्री एक्सेस वाइन और स्पिरिट्स को सीमित एडजस्टमेंट के साथ राहत, कॉस्मेटिक्स सेक्टर को आंशिक रूप से खोला गया। कंप्यूटर और आईटी से जुड़े कुछ उत्पादों के आयात पर रियायत
मेडिकल उपकरणों जैसे फाइबरस्कोप और लैपरोस्कोप को प्राथमिकता शामिल है।
कृषि क्षेत्र पर भारत की सख्ती बरकरार
यानी शुरूआती आशंकाओं के विपरीत, भारत ने पूरे कृषि क्षेत्र को नहीं खोला है। अमेरिका से आने वाले किसी भी जेनेटिकली मोडिफाइड कृषि उत्पाद को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी है। इसके अलावा जिन फसलों का देश में भरपूर उत्पादन होता है, उन्हें टैरिफ छूट से बाहर रखा गया है।
इनमें शामिल हैं: मक्का, चावल, गेहूं मोटे अनाज, रागी केला, खट्टे फल काबुली चना, चीनी सोयाबीन और अन्य अनाज संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित भारत ने मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, एथनॉल और तंबाकू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भी इस समझौते से बाहर रखा है। इससे साफ है कि सरकार ने व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू किसानों और स्थानीय उद्योगों के संरक्षण को प्राथमिकता दी है।
इस ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में बड़े अवसर खुलेंगे। कई कृषि और बागवानी उत्पादों को जीरो टैरिफ के साथ अमेरिका में प्रवेश मिलेगा।
इनमें शामिल हैं: चाय, कॉफी, मसाले नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स सुपारी, चेस्टनट एवोकाडो, अमरूद, आम, कीवी पपीता, अनानास, मशरूम सब्जियों की जड़ें, जौ बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद तिल और खसखस निष्कर्ष जीरो टैरिफ सुविधा से भारतीय किसानों, बागवानी उत्पादकों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। साथ ही अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा या जारी रहेगा, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ही बात करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पोस्ट कर दावा किया था कि अमेरिका से डील के साथ ही भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस पर भारत की ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया गया है।
हालांकि सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत अपने फैसले देश के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगा। इसमें कहा गया था कि उन गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं का मार्केट से तेल खरीदना जारी रखा जाएगा, जो सबसे अच्छा सौदा दे रहे हैं। मार्केट के अनुसार कीमतों को तय किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अमेरिकी अर्थव्यस्था से कम टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जो अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक डील भारतीय किसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
अमेरिका हमारे पड़ोसी देशों वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत और चीन पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई ऐसी चीजें हैं, जो हमारे एक्सपोर्टर्स बिना किसी टैरिफ के अमेरिका भेज सकते हैं। इस दौरान उन्होंने स्मार्टफोन का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है, उन्हें इस डील के दायरे से बाहर रखा गया है। जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें, मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरंथ जैसे मोटे अनाज को कम टैरिफ पर भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फलों जैसे फलों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। ग्रीन टी, काबुली चना, मूंग, तिलहन, मूंगफली, माल्ट और माल्ट-आधारित उत्पादों, गैर-अल्कोहल पेय, स्टार्च, इथेनॉल, तंबाकू पर डील में कोई रियायत नहीं दी गई है। इस प्रकार भारतीय किसानों की रक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कृषि उत्पादों ऐसे भी हैं, जिन्हें अमेरिका निर्यात करेगा तो शून्य टैरिफ लगेगा। इसमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल का तेल, काजू और कई फल-सब्जियां हैं।
साथ ही उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसान विरोधी हैं। किसानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। ये लोग हैरान हैं कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के तहत कृषि उत्पादों पर रियायत नहीं दी गई है।
इसके अलावा उन्होंने डील पर सदन में चर्चा को लेकर कहा कि संसद में क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं, यह स्पीकर और चैयरमेन तय करेंगे। संसद में हर बात नहीं पढ़ी जा सकती। कुछ मामलों को सीधे देश के लोगों तक पहुंचाना होता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि व्यापारिक समझौते के कारण देश में खुशी की लहर है। देश के हर क्षेत्र में उत्साह है। ये डील हर सेक्टर्स के लिए फायदेमंद रहेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) की अगली यानी 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। पीएम किसान योजना की किस्तें आमतौर पर हर चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। इसके अनुसार तो फरवरी महीने में 22वीं किस्त जारी होने की संभावना है।
इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम डीबीटी के जरिए तीन समान किस्तों 2,000-2,000 में दी जाती है। सरकार फरवरी महीने में ही किसानों के खाते में 22वीं किस्त के 2,000 रुपये ट्रांसफर कर सकती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना 24 फरवरी 2019 से लागू है। इसमें हर पंजीकृत किसान परिवार को सालाना 6,000 दिए जाते हैं। यह राशि चार-चार महीने के अंतराल पर 2,000 की तीन किस्तों में भेजी जाती है।
वहीं कई मामलों में नाम की स्पेलिंग, खाता नंबर, जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटि जैसी छोटी गलतियों के कारण भी भुगतान रोक दिया जाता है। किसान पीएम-किसान पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस आनलाइन चेक कर सकते हैं, जिससे पता चल जाता है कि किस्त क्यों रुकी है।
इस योजना के तहत अब तक 21 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। पीएम किसान की 19वीं किस्त 24 फरवरी 2025 को और 20वीं किस्त 2 अगस्त 2025 को जारी की गई थी। वहीं 21वीं 19 नवंबर 2025 किस्त जारी की गई है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित कार्यक्रम से ढट इस किस्त को डिजिटल तरीके से जारी की। सरकार ने करीब 18,000 करोड़ रुपये देशभर के 9 करोड़ पात्र किसानों के खाते में भेजे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने गुरुवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं।
ये सभी माओवादी संगठन के साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े थे। इन्होंने बस्तर पुलिस की पूना मर्जेम (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
इनमें सोमडू मड़काम (42) डिविजनल कमेटी मेंबर और कटेकल्याण एरिया कमेटी प्रभारी, हुंगी कुंजाम (19) और पायकी कुंजाम (22) शामिल हैं, जो अलग अलग यूनिट के पार्टी मेंबर थे। इन तीनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा तीन अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, एक पर दो लाख रुपये और पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने एक एके 47 रायफल, दो सेल्फ लोडिंग रायफल (एसएलआर), 250 जिलेटिन स्टिक, 400 डेटोनेटर, बारूद से भरा एक प्लास्टिक ड्रम और कॉर्डेक्स वायर का एक बंडल भी पुलिस को सौंपा। अधिकारी ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल 5- 50 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी और सरकार की नीति के तहत उनका पुनर्वास किया जायेगा।
पुलिस के अनुसार, बीजापुर जिले में एक जनवरी 2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है, जबकि 1,163 गिरफ्तार हुए और अलग अलग मुठभेड़ों में 231 मारे गये। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि माओवादी संगठन तेजी से अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित होने, सड़क संपर्क बेहतर होने, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच से संगठन का आधार क्षेत्र लगातार सिमट रहा है।
उन्होंने शेष नक्सली कैडरों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता केवल विनाश, पीड़ा और अंधकार की ओर ले जाता है, जबकि पूना मर्जेम अभियान शांति, सम्मानजनक जीवन और सकारात्मक भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। सुरक्षित भविष्य और नये जीवन के निर्माण की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है।
इस आत्मसमर्पण के साथ ही इस वर्ष अब तक राज्य में 220 से अधिक नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। 15 जनवरी को बीजापुर जिले में ही 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि पिछले वर्ष राज्य में 1,500 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया था। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र म्यांमार में बताया जा रहा है। रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 आंकी गई है।
अभी तक किसी की मौत या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। म्यांमार में भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 10 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है।
नेशनल सेंटर ऑफ़ सीस्मोलॉजी (NCS) के एक बयान के अनुसार, यह घटना सोमवार को सुबह करीब 3.30 बजे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 4.6 तीव्रता के भूकंप के एक दिन बाद हुई है। NCS के बयान के अनुसार भूकंप का अक्षांश 9.03 उत्तर और देशांतर 92.78 पूर्व बताया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि ज्यादातर भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ रेट में कटौती रत्न, आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए पॉजिटिव है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय सामानों पर जवाबी टैरिफ को मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी पर लायेगा।
मूडीज ने एक बयान में कहा कि यह व्यापार समझौता अमेरिका को होने वाले भारत के वस्तु निर्यात की वृद्धि को फिर से एक्टिव करेगा। भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा वस्तु निर्यात बाजार बना हुआ है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, कम टैरिफ रत्न, आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए पॉजिटिव होगी, जो टॉप निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं।
हालांकि, दवा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, जो अन्य दो प्रमुख निर्यात क्षेत्र हैं, उन्हें अमेरिका द्वारा लगाये गये 50 फीसदी के हाई टैरिफ से पहले ही छूट दी गयी थी और इसलिए शुल्क में इस कटौती से उनके प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
मूडीज ने यह भी कहा कि भले ही भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी है, लेकिन इसकी संभावना कम है कि वह तुरंत खरीद पूरी तरह बंद कर देगा, क्योंकि ऐसा करना भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बाधक हो सकता है। मूडीज ने कहा, पूरी तरह से गैर-रूसी तेल की ओर स्थानांतरित होने से अन्य जगहों पर सप्लाई कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse