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Published / 2025-05-06 22:09:27
प्रतिष्ठित वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय अधिवक्ता बने भुवन ऋभु

  • झारखंड में बाल अधिकारों के संरक्षण की मोर्चे से कर रहे अगुआई 
  • प्रख्यात अधिवक्ता व बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी हस्तक्षेपों को बनाया सशक्त औजार  
    भुवन ऋभु ने पिछले दो दशकों में 60 से ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर की जिसके नतीजे में कई ऐतिहासिक फैसले आए, खासतौर से हाल ही में बाल विवाह व चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर   
  • भुवन ऋभु बच्चों की सुरक्षा के लिए वैश्विक विस्तार की ओर अग्रसर नागरिक समाज संगठनों के दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक हैं 
  • वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन जजों, अधिवक्ताओं, विधिवेत्ताओं का दुनिया का सबसे पुराना और प्रभावी नेटवर्क है 
  • झारखंड में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 23 सहयोगी नागरिक संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए राज्य के 24 जिलों में कर रहे काम 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता भुवन ऋभु को वर्ल्ड लॉ कांग्रेस में वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन ने प्रतिष्ठित मेडल आफ आनर पुरस्कार से सम्मानित किया। भुवन ऋभु यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने वाले पहले भारतीय अधिवक्ता हैं। इस वर्ल्ड लॉ कांग्रेस में 70 देशों के 1500 से ज्यादा विधिक क्षेत्र के दिग्गजों व 300 वक्ताओं ने हिस्सा लिया, जहां दुनिया की इस सबसे पुरानी ज्यूरिस्ट एसोसिएशन ने कानूनी हस्तक्षेपों और जमीनी लामबंदियों के जरिए बच्चों और उनके अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में दो दशक से जारी संघर्षों और उपलब्धियों के लिए भुवन ऋभु को सम्मानित किया। यह कांग्रेस डोमिनिकन रिपब्लिक में 4 से 6 मई के बीच संपन्न हुई। 

वर्ष 1963 में स्थापित वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन दुनिया के विधिवेत्ताओं की सबसे पुरानी संस्था है जिसने न्याय के शासन की स्थापना में अपने योगदान के लिए विंस्टन चर्चिल, नेल्सन मंडेला, रूथ बेडर गिन्सबर्ग, स्पेन के राजा फेलिप षष्टम्, रेने कैसिन और कैरी कैनेडी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों को सम्मानित किया है। 

भुवन ऋभु के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में दायर 60 से ज्यादा जनहित याचिकाओं के नतीजे में कई ऐतिहासिक फैसले आए हैं जिसने देश में बाल अधिकार व बच्चों की सुरक्षा का पूरा परिदृश्य बदल दिया है। वे वैश्विक विस्तार की ओर अग्रसर नागरिक समाज संगठनों के दुनिया के सबसे बड़े कानूनी हस्तक्षेप नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक हैं। 

झारखंड में जेआरसी के 23 सहयोगी संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण और 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए राज्य के 24 जिलों में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 5 (2019-21) के अनुसार राज्य में बाल विवाह की स्थिति काफी गंभीर है जहां 32.2 प्रतिशत बच्चियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो जाता है जबकि राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत है।  

पुरस्कार स्वीकार करते हुए भुवन ऋभु ने कहा, न्याय की लड़ाई में बच्चों को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। कानून उनकी ढाल और न्याय उनका अधिकार होना चाहिए। डोमिनिकन रिपब्लिक के श्रम मंत्री एडी ओलिवारेज आॅतेर्गा और वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेवियर क्रेमाडेस ने उन्हें मेडल आफ आनर प्रदान किया। इस अवसर पर डोमिनिकन रिपब्लिक की महिला मंत्री मायरा जिमेनेज भी उपस्थित थीं। 

कानूनी हस्तक्षपों और पैरोकारियों से भुवन ऋभु भारत की बाल संरक्षण व्यवस्था में बदलाव के एक प्रमुख सूत्रधार रहे हैं। उन्होंने बाल विवाह, बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल श्रम और बाल यौन शोषण के विरुद्ध कानूनी मुहिमों और जमीनी कार्रवाइयों का नेतृत्व किया है। उनके सतत प्रयासों के नतीजे में भारत में बाल विवाह के खात्मे की दिशा में प्रणालीगत सुधार देश को 2030 तक देश से इस कुप्रथा के अंत के लिए निर्णायक बिंदु की ओर ले जा रहे हैं। वे 2030 तक दुनिया से बाल विवाह के खात्मे के लिए वैश्विक आंदोलन में भी अग्रणी किरदार हैं।  

भुवन ऋभु के संघर्षों और उपलब्धियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए डब्ल्यूजेए के अध्यक्ष जेवियर क्रेमाडेस ने कहा, भुवन ऋभु का दृढ़ता से मानना है कि न्याय लोकतंत्र का सबसे मजबूत खंभा है और उन्होंने पूरा जीवन देश में व पूरे विश्व में बच्चों और यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए समर्पित कर दिया है। उनके प्रयासों ने लाखों-महिलाओं और बच्चों को बचाने के साथ ही एक ऐसा कानूनी ढांचा निर्मित किया है जिससे आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रहेंगी। यह पुरस्कार कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए बच्चों के लिए एक निरापद और बेहतर दुनिया बनाने के उनके प्रयासों का सम्मान है। 

एक राष्ट्रीय अभियान का वैश्विक असर 

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु की जनहित याचिकाओं और कानूनी हस्तक्षपों का असर ये है कि आज देश में बच्चों के खिलाफ अपराध की रोकथाम और अभियोजन के तरीकों में आमूल बदलाव आया है। ऋभु की सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर 60 से भी अधिक जनहित याचिकाओं पर ऐतिहासिक फैसले आये हैं। वर्ष 2011 में उनकी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिकिंग को संयुक्त राष्ट्र के प्रोटोकाल के अनुरूप परिभाषित किया। इसी तरह 2013 में गुमशुदा बच्चों के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला आया। 

भुवन ऋभु ने आनलाइन और असली जीवन, दोनों में बाल यौन शोषण के विरुद्ध कानूनी और नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसमें एक याचिका पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार संबंधी सामग्री (सी-सीम) को डाउनलोड करने, देखने को अपराध घोषित करने का फैसला भी शामिल है। उन्होंने बाल बलात्कार के मामलों में अपराधियों की सजा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी बदलावों और देश से बाल विवाह की समाप्ति के लिए कानूनी रूपरेखा तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई है। 

भुवन ऋभु की किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में बाल विवाह के खात्मे के लिए पिकेट रणनीति के रूप में एक समग्र खाका पेश किया जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में जारी दिशा-निर्देशों में एक व्यापक मार्गदर्शिका के तौर पर मान्यता दी। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें। 

Published / 2025-05-06 22:07:44
सीमा पर भारतीय सेना की गतिविधियों से सकते में पाकिस्तान

पाकिस्तान सीमा पर भारत ने अचानक जारी किया नोटाम 

राफेल, सुखोई और मिराज जैसे कई लड़ाकू विमान करेंगे युद्धाभ्यास 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की युद्ध तैयारियों के हिस्से के रूप में लड़ाकू जेट, निगरानी विमान और अन्य हवाई अभियानों की तैनाती सहित कई गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना है। भारत ने भारत-पाकिस्तान सीमा के दक्षिणी हिस्से में 7 और 8 मई को होने वाले हवाई अभ्यास के लिए एयरमेन को नोटिस जारी किया है। 

भारतीय वायु सेना राजस्थान में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर युद्धाभ्यास करेगी। यह अभ्यास 7 मई को दोपहर 3:30 बजे शुरू होने वाला है और 8 मई को रात 9:30 बजे तक जारी रहेगा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित रहेगा। यद्यपि अभ्यास का विवरण अभी तक जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस अवधि के दौरान क्षेत्र में हवाई क्षेत्र के उपयोग को प्रतिबंधित करने का संकेत दिया गया है, जो भारतीय वायु सेना को शामिल करते हुए बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास की तैयारी का संकेत देता है। 

हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की युद्ध तैयारियों के हिस्से के रूप में लड़ाकू जेट, निगरानी विमान और अन्य हवाई अभियानों की तैनाती सहित कई गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना है। अभ्यास का समय और स्थान महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में सीमा पार की घटनाओं के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। 

हालांकि भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अभ्यास को वर्तमान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से विशेष रूप से नहीं जोड़ा है, लेकिन यह अभ्यास भारत की सैन्य तत्परता का प्रदर्शन और बढ़ती क्षेत्रीय चिंताओं के बीच सतर्कता का संकेत है। 

भारतीय वायुसेना अधिकारी के एक अधिकारी ने कहा कि एयरफोर्स 7 मई से भारत-पाकिस्तान सीमा पर रेगिस्तानी क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में युद्धाभ्यास करेगी जिसमें राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 सहित सभी अग्रणी फाइटर जेट शामिल होंगे। युद्धाभ्यास का समय और स्थान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र में हाल ही में सीमा पार की घटनाओं के बाद तनाव बढ़ गया है।

Published / 2025-05-06 20:32:56
पीएम मोदी से मिले बीएमसीएचआरसी के उपाध्यक्ष संदीप कोठारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ लोरेंको से भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमसीएचआरसी) के उपाध्यक्ष संदीप कोठारी ने मुलाकात की। बीएमसीएचआरसी के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि श्री मोदी एवं श्री लोरेंको से श्री कोठारी की रविवार को नई दिल्ली में यह भेंट हुई। 

इस दौरान वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों, विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर चर्चा के साथ ही मेडिकल टूरिज्म पर बात की गयी। श्री कोठारी ने बताया कि इस भेंट से भविष्य में गुणवत्तापूर्ण आन्कोलॉजी सेवाओं की सुलभता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नये द्वार खुलने की संभावना प्रबल हुई है। 

उन्होंने बताया कि बीएमसीएचआरसी का सदैव प्रयास रहा है कि वह कैंसर जैसी घातक बीमारियों के विरुद्ध लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाये। उनकी यह भेंट बीएमसीएचआरसी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Published / 2025-05-06 20:22:48
आठ को मनेगा विश्व रेडक्रॉस दिवस, मानवता की सेवा में समर्पित दिन

  • रेड क्रॉस युद्ध के मैदानों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और महामारी तक में सबसे पहले सक्रिय रूप से करती है कार्य : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 8 मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है। यह दिन रेडक्रॉस संस्था के संस्थापक जीन हेनरी ड्युना की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने इस वैश्विक मानवतावादी संगठन की स्थापना की थी। 

रेडक्रॉस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, सेवा, एकता और सार्वभौमिकता जैसे मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। रेडक्रॉस एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो युद्ध, आपदा या किसी भी मानवीय संकट की घड़ी में पीड़ितों की सहायता करता है। इसका उद्देश्य केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि एकजुटता और मानवीय गरिमा की रक्षा करना भी है।

यह संस्था युद्ध के मैदानों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और महामारी तक में सबसे पहले सक्रिय रूप से कार्य करती है। रेडक्रॉस दिवस पर विश्वभर में विभिन्न जागरूकता अभियान, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। भारत में भी भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी इस दिन को बड़े उत्साह के साथ मनाती है और लोगों को स्वैच्छिक सेवा हेतु प्रेरित करती है। 

रेडक्रॉस का लाल क्रॉस का प्रतीक एक वैश्विक संकेत बन चुका है, जो सहायता और उम्मीद का प्रतीक है। यह उन सभी स्वयंसेवकों और कार्यकतार्ओं को सम्मान देने का दिन है जो बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। इस वर्ष रेडक्रॉस दिवस की थीम मानवता को जीवित रखना रखी गयी है, जो यह संदेश देती है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, मानवता को जीवित रखना ही हमारा परम कर्तव्य है। 

आज के समय में जब दुनिया विभिन्न संकटों से गुजर रही है-चाहे वह युद्ध हो, महामारी हो या जलवायु परिवर्तन-रेडक्रॉस की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह संगठन एक उदाहरण है कि जब मानव सेवा को सर्वोपरि रखा जाए, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।आइए इस रेडक्रॉस दिवस पर संकल्प लें कि हम भी अपने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभायें और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहें। यही सच्ची मानवता है।

Published / 2025-05-05 22:00:52
कश्मीर में दिखता है कई राजवंशों और संस्कृतियों का प्रभाव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कश्मीर घाटी का इतिहास काफी प्राचीन है और इसमें कई राजवंशों और संस्कृतियों का प्रभाव देखने को मिलता है। यह क्षेत्र कभी हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म का केंद्र था, और बाद में मुस्लिम शासन के अधीन भी रहा है। कल्हण की राजतरंगिणी कश्मीर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें घाटी के राजाओं और शासकों का विवरण दिया गया है।  

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कश्मीर घाटी में ऋषि कश्यप ने झील को सुखाकर घाटी को वास योग्य बनाया था। महाभारत और नीलम पुराण में भी कश्मीर घाटी का उल्लेख मिलता है। प्राचीन काल में कश्मीर में हिंदू और बौद्ध धर्म का प्रभाव था। मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ था। कुषाण शासक कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर बौद्ध संस्कृति का केंद्र बना था। 7वीं से 14वीं शताब्दी तक कश्मीर में हिंदू राजवंशों का शासन था। 14वीं शताब्दी में कश्मीर में इस्लाम का आगमन हुआ और 1320 में रिंचन शाह कश्मीर का पहला मुस्लिम शासक बना। 

कश्मीर सल्तनत ने 1320 से 1586 तक शासन किया। 1586 में कश्मीर मुगल साम्राज्य के अधीन आ गया। 1846 में जम्मू और कश्मीर रियासत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गयी। 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जम्मू और कश्मीर एक रियासत के रूप में अस्तित्व में आयी। 1947 में भारत के विभाजन के समय, जम्मू और कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय का फैसला लिया, जो भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुआ। 1947 से जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा है। 1957 में जम्मू और कश्मीर का संविधान लागू हुआ। 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया और जम्मू और कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।  

कश्मीर का इतिहास एक जटिल और समृद्ध इतिहास है, जिसमें विभिन्न संस्कृतियों और राजवंशों का प्रभाव देखने को मिलता है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य जितना विश्वविख्यात है, उतना ही उसकी साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत भी मूल्यवान और सर्वविदित है। 

ऊंची-ऊंची पहाड़ियां घाटियों के बीच में भास्वरित होती झीलें, झाड़ियों से भरे जंगल फूलों से घिरी पगडंडियां केसर-पुष्पों से महकते खेत, कल-कल करते झरने, बर्फ से आच्छादित पर्वतमालाएं आदि कश्मीर की अनुपम खूबसूरती को स्वत: ही बयां करते हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ कश्मीर की सांस्कृतिक साहित्यिक धरोहर भी कम अनूठी और गौरवशाली नहीं है। इस धरती को धर्म-दर्शन और विद्या-बुद्धि की पुण्य-स्थली माना जाता है। शारदापीठ भी कहा जाता है और रेश्यवार (ऋषियों की बगीचों) के नाम से भी अभिहित किया जाता है। 

इस भूखण्ड ने भारतीय ज्ञानपरम्परा को बड़े-बड़े मनीषी विद्वान और कालजयी महापुरुष दिये हैं जिनका अवदान सदा स्मरणीय रहेगा। महान रसशास्त्री और शैवाचार्य अभिनव गुप्त, कवि-इतिहासकार (राजतरंगिणीकार) कल्हण काव्यशास्त्री मम्मट आनंदवर्धन, वामन, आचार्य क्षेमेन्द्र आदि के नाम इस सन्दर्भ में बड़े गर्व के साथ लिये जा सकते हैं।

Published / 2025-05-05 21:58:02
2024-25 वित्त वर्ष के खनन में रिकॉर्ड उत्पादन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड उत्पादन स्तर पर पहुंचने के बाद, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में कुछ प्रमुख खनिजों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि देखी गयी। मूल्य के हिसाब से कुल एमसीडीआर खनिज उत्पादन में लौह अयस्क का योगदान 70 प्रतिशत है। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 289 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) लौह अयस्क के उत्पादन ने 4.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2023-24 में हासिल किये गये 277 एमएमटी के उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। 

इसी तरह, मैंगनीज अयस्क का उत्पादन भी वित्त वर्ष 2023-24 में हासिल किये गये 3.4 एमएमटी के उत्पादन रिकॉर्ड को पार कर गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 11.8 प्रतिशत बढ़कर 3.8 एमएमटी हो गया है। बॉक्साइट का उत्पादन भी वित्त वर्ष 2023-24 में 24 एमएमटी से 2.9 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 24.7 एमएमटी हो गया है। इसी अवधि के दौरान, सीसा सांद्रण उत्पादन 3.1 प्रतिशत वृद्धि के साथ 381 हजार टन (टीएचटी) से बढ़कर 393 टीएचटी हो गया। 

गैर लौह धातु क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-25 में प्राथमिक एल्युमीनियम उत्पादन ने वित्त वर्ष 2023-24 के उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्राथमिक एल्युमीनियम उत्पादन 41.6 लाख टन (एलटी) था, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यह बढ़कर 42 एलटी हो गया। रिफाइंड कॉपर उत्पादन में 12.6 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि देखी गयी। वित्त वर्ष 2023-24 में यह 5.09 एलटी था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 5.73 एलटी हो गया। 

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक, रिफाइंड कॉपर में शीर्ष 10 उत्पादकों में से एक और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक है। चालू वित्त वर्ष में लौह अयस्क के उत्पादन में निरंतर वृद्धि उपयोगकर्ता उद्योग यानी स्टील में मजबूत मांग की स्थिति को दर्शाती है। एल्युमीनियम और तांबे में वृद्धि के साथ, ये वृद्धि रुझान ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, निर्माण, आॅटोमोटिव और मशीनरी जैसे उपयोगकर्ता क्षेत्रों में निरंतर मजबूत आर्थिक गतिविधि की ओर इशारा करते हैं।

Published / 2025-05-05 21:00:11
देश की सुरक्षा मसले पर केंद्र के साथ हैं : ममता बनर्जी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोहराया है कि आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मुद्दे पर वह केंद्र सरकार के साथ हैं। 
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह स्थिति का जायजा लेने के लिए मुर्शिदाबाद के दौरे पर हैं।

उन्होंने 11 और 12 अप्रैल को वक्फ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रभावित लोगों से भी बात की। सुश्री बनर्जी बरहामपुर में रुककर एक प्रशासनिक बैठक करेंगी। वह लोगों से मिलने के लिए मंगलवार को धुलियान और सुती भी जायेंगी। 

उन्होंने कहा, हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारी पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार के साथ है। हम यहां फूट डालो और राज करो की नीति नहीं अपना रहे हैं। सुश्री बनर्जी ने कहा, मैं मुर्शिदाबाद पहले भी जा सकती थी, लेकिन अगर वहां शांति और स्थिरता नहीं है, तो हमें वहां जाकर अशांति नहीं फैलानी चाहिए। 

आज मैं वहां जा रही हूं, क्योंकि वहां अब स्थिरता है। मैं बरहामपुर पहुंचकर समीक्षा बैठक करूंगी। कल मैं धुलियान जाऊंगी और जिन लोगों के घर और दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें जरूरी मुआवजा प्रदान करूंगी। 

गौरतलब है कि सड़क मार्ग से मुर्शिदाबाद की सुश्री बनर्जी की यात्रा सीमावर्ती जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के लगभग तीन सप्ताह बाद हुई है। यह विरोध प्रदर्शन 11 अप्रैल को हिंसक हो गया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गये। इस दौरान बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित भी हुए। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि वह सड़क मार्ग से ही आगे की यात्रा करेंगी, क्योंकि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर से यात्रा करना खतरनाक होगा। इधर, दीघा जगन्नाथ मंदिर विवाद पर उन्होंने कहा कि वह पुरी के मंदिर और जगन्नाथ धाम का सम्मान करती हैं। 

उन्होंने कहा, हम पुरी के मंदिर का सम्मान करते हैं और हम जगन्नाथ धाम का भी सम्मान करते हैं। काली मंदिर और गुरुद्वारा पूरे देश में हर जगह हैं। मंदिर वहां और हर जगह हैं। फिर इस मुद्दे पर इतना गुस्सा क्यों है। गौरतलब है कि सुश्री बनर्जी 30 अप्रैल को दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के दौरान मौजूद थीं।

Published / 2025-05-04 19:58:39
128 वर्षीय पद्मश्री बाबा शिवानंद का निधन, शोक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और पद्मश्री सम्मानित बाबा शिवानंद का शनिवार रात स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते निधन हो गया। वे वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में भर्ती थे। बाबा के शिष्यों का दावा है कि उनकी उम्र 128 वर्ष थी। बाबा शिवानंद को 30 अप्रैल को कुछ स्वास्थ्य परेशानियों के चलते बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शनिवार देर रात अंतिम सांस ली। 

उनका पार्थिव शरीर कबीरनगर कॉलोनी स्थित निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। शिष्यों के अनुसार, अंतिम संस्कार आज शाम किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा शिवानंद के निधन पर शोक जताया। अपने एक्स अकाउंट पर पीएम मोदी ने लिखा, योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। 

योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दु:ख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं। 

बचपन में ही माता-पिता को खोया 

बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के सिलहट जिले में हुआ था। जब वे सिर्फ 6 वर्ष के थे, तभी भुखमरी के कारण उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद ओंकारानंद नामक संत ने उन्हें अपनी देखरेख में लिया और उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा और अनुशासन की राह पर चलाया। 

संयमित जीवनशैली ही लंबी उम्र का रहस्य 

बाबा शिवानंद ने अपना जीवन त्याग, संयम और योग साधना में समर्पित कर दिया था। वे हर दिन सुबह 3 बजे उठते थे, कठिन योगाभ्यास करते और अपने सारे कार्य स्वयं करते थे। उनका भोजन बहुत साधारण था—सिर्फ उबला हुआ खाना और वह भी आधा पेट। वे गर्मियों में एसी और सर्दियों में हीटर का प्रयोग नहीं करते थे, बल्कि जमीन पर चटाई बिछाकर लकड़ी के तकिये पर सोते थे। 

कभी नहीं पड़े बीमार 

शिष्यों के अनुसार बाबा शिवानंद ने कभी कोई बीमारी नहीं झेली। वर्ष 2019 में कोलकाता और चेन्नई स्थित अपोलो अस्पतालों में जब उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया, तो उन्हें पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था। 

2022 में मिला था पद्मश्री, पीएम मोदी हुए थे प्रभावित 

21 मार्च 2022 को बाबा शिवानंद को राष्ट्रपति भवनमें आयोजित समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। जब सफेद धोती-कुर्ता पहने हुए, 125 वर्ष के बाबा शिवानंद मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को प्रणाम किया। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था, जब पीएम मोदी भी अपनी कुर्सी से उठकर हाथ जोड़कर उन्हें झुककर प्रणाम किया। राष्ट्रपति कोविंद ने भी उन्हें सम्मानपूर्वक अपने हाथों से उठाया था। 

सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा शिवानंद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, काशी के प्रसिद्ध योगगुरु पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी का निधन अत्यंत दु:खद है। योग क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। आपकी साधना और योगमय जीवन संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणा है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को मोक्ष प्रदान करें और शोकाकुल अनुयायियों को यह दु:ख सहने की शक्ति दें। ओम शांति!

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