हैदराबाद। तेलंगाना के कोट्टागुडम और छत्तीसगढ़ सीमा के सुकमा जिले में सोमवार सुबह मुठभेड़ हुई। इसमें छह माओवादी मारे गये। तेलंगाना ग्रेहाउंड्स और छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाया था। तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाके में स्थित किस्ताराम पीएस सीमा के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में छह नक्सली मारे गये। भद्राद्री कोठागुडेम जिला के एसपी सुनील दत्त के अनुसार यह तेलंगाना पुलिस, छत्तीसगढ़ पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त अभियान है। पुलिस के अनुसार चारला जोन से 25 किलोमीटर दूर कुर्नवल्ली-पेसरलापाडु वन क्षेत्र में मुठभेड़ हुई। तेलंगाना पुलिस ने पुष्टि की कि छह माओवादी मारे गए हैं। मारे गये माओवादियों में 4 महिलाएं थीं, जिसमें चारला क्षेत्र की खूंखार कमांडर मधु भी थी। पुलिस ने माओवादियों के छह शव बरामद किए हैं। पुलिस का तलाशी अभियान अभी जारी है। पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में 26 दिसंबर को अलग-अलग स्थानों से दो आईईडी बरामद किए थे। जानकारी के मुताबिक उग्रवादियों ने जिले में नक्सलरोधी अभियानों में शामिल सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के लिए आईईडी लगाया था बारुदी सुरंगों को हटाने के अभियान के दौरान धनोरा पुलिस थाने के तहत आने वाले अलग-अलग स्थानों से विस्फोटक बरामद किए गए। नक्सलियों के गढ़ अबूझमाड़ के साथ ही पूरे बस्तर क्षेत्र में विकासात्मक कार्य चलने के कारण उग्रवादी स्थानीय लोगों का समर्थन गंवाने से हताश होकर सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने के लिए आईईडी लगा रहे हैं।
एबीएन डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किराये की कोख या सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने इसे शनिवार को मंजूरी दी और गजट प्रकाशन के साथ ही यह कानून लागू हो गया है। इस कानून में सरोगेसी को वैधानिक मान्यता देने और इसके व्यवसायीकरण को गैरकानूनी बनाने का प्रावधान है। इस कानून से सरोगेसी के वाणिज्यिक पैमाने पर दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा। इसके जरिये केवल मातृत्व प्राप्त करने के लिए सरोगेसी की अनुमति मिलेगी, जिसमें सरोगेट मां को गर्भ की अवधि के दौरान चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज के अलावा कोई और वित्तीय मुआवजा नहीं मिलेगा। दरअसल व्यावसायिक स्तर पर सरोगेसी का आर्थिक लाभ अथवा कोई अन्य लाभ के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था। सरोगेसी की अनुमति तब दी जाती है जब संतान का इच्छुक जोड़ा चिकित्सा के आधार पर प्रमाणित बांझपन से प्रभावित हो। इस कानून के जरिये बच्चे पैदा करके उसे बेचने, वेश्यावृति कराने और किसी अन्य प्रकार के शोषण पर रोक लगेगी। क्या है सरोगसी : सरोगेसी एक ऐसी विधि है, जिसमें कोई महिला संतान के इच्छुक किसी जोड़े के बच्चे को अपने गर्भ में पालती है और जन्म के बाद इस बच्चे को जोड़े को सौंप देती है। इससे पहले उस जोड़े के शुक्राणु और अंडाणु को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है और जब यह एक भ्रूण के रूप में आ जाता है, तो इसे उस महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। कानून के प्रावधान के मुताबिक 23 से 50 साल उम्र की महिलाएं सरोगेसी का रास्ता चुन सकती हैं। सरोगेट मां बनने के लिए महिला को विवाहित होना चाहिए। संसद से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी : सरोगेसी विधेयक 2019 को 17 दिसंबर को राज्यसभा से पारित करा लिया गया था। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही सदन ने इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। लोकसभा में यह पहले ही पारित हो चुका था। लेकिन राज्यसभा में आने के बाद इसे प्रवर समिति को भेजा गया था।
एबीएन डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग सतर्क हो गया है। इसे देखते हुए 27 दिसंबर को स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेगा। पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के साथ चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक होगी। बैठक में पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मौजूदा COVID-19 स्थिति पर चर्चा होगी। अगले वर्ष यानी वर्ष 2022 में पांच राज्यों (उत्तर प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा, गोवा और मणिपुर) में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनावों से पहले वैश्विक महामारी कोरोना वायरस और उसके नये वेरिएंट ओमीक्रोन ने सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग की भी चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि चुनावों की तारीखों के ऐलान से पहले चुनाव आयोग पूरी तरह आश्वस्त हो जाना चाहता है। इसलिए चुनाव आयोग ने 27 दिसंबर 2021 (सोमवार) को स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक बुलायी है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को भी बुलाया गया है।
एबीएन डेस्क। दिल्ली में कोरोना वायरस के सामान्य और ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सोमवार 27 दिसंबर से रात्रि कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। इसके तहत रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक गैर जरूरी कार्यों से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लग जाएगा। इस दौरान सिर्फ आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत लोग ही बाहर जा सकेंगे। दिल्ली में नाइट कर्फ्यू अगले आदेश तक जारी रहेगा। दिल्ली में रविवार को कोरोना के रिकॉर्ड 290 मामले मिले हैं। इस दौरान एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो गई। दिल्ली में रविवार शाम आए आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटों में कोरोना के 120 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना के एक्टिव केस 1,103 हो गए हैं। इससे पहले शनिवार को दिल्ली में 279 कोरोना मरीज मिले थे और एक व्यक्ति की मौत हुई थी। इस माह में कोरोना संक्रमण से यह सातवीं मौत है। बीते गुरुवार को राजधानी में 125 लोग संक्रमित मिले थे लेकिन शुक्रवार को यह संख्या बढ़कर 180 तक पहुंच गई थी।
एबीएन डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कहा कि यदि भारत के आंकड़ों की दुनिया के अन्य देशों से तुलना की जाए, तो हमारे देश ने "अभूतपूर्व उपलब्धि" हासिल की है। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा, इस समय आप 2021 की विदाई और 2022 के स्वागत की तैयारी में जुटे ही होंगे। नए साल पर हर व्यक्ति, हर संस्था, आने वाले साल में कुछ और बेहतर करने, बेहतर बनने के संकल्प लेते हैं। उन्होंने कोरोना महामारी पर भारत के साहसिक रूख को लेकर कहा, ये जनशक्ति की ही ताकत है। सबका प्रयास है कि भारत 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ सका। उन्होंने कहा कि हम हर मुश्किल समय में एक दूसरे के साथ, एक परिवार की तरह खड़े रहे। उन्होंने कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत लगाई गई 140 करोड़ वैक्सीन को लेकर कहा, टीकाकरण में 140 करोड़ डोज के पड़ाव को पार करना, प्रत्येक भारतवासी की अपनी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ये जो नया Omicron variant आया है, उसका अध्ययन हमारे वैज्ञानिक लगातार कर रहे हैं। हर रोज उन्हें नई जानकारी मिल रही है, उनके सुझावों पर काम हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि स्वयं की सजगता, स्वयं का अनुशासन, कोरोना के ओमीक्रोन वेरिएंट के खिलाफ देश की बहुत बड़ी शक्ति है। छात्रों से मुखातिब होते हुए पीएम मोदी ने कहा, हर साल मैं ऐसे ही विषयों पर विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पर चर्चा करता हूं। इस साल भी परीक्षाओं से पहले वे छात्र-छात्राओं के साथ चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए दो दिन बाद 28 दिसंबर से http://MyGov.in पर पंजीकरण भी शुरू होने जा रहा है। मन की बात में पीएम मोदी ने कुछ लोगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, मैं लखनऊ के रहने वाले निलेश जी की एक post की भी चर्चा करना चाहूंगा। ये ड्रोन शो लखनऊ के रेसिडेंसी क्षेत्र में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि ड्रोन शो में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अलग-अलग पहलुओं को जीवंत बनाया गया। उन्होंने कहा कि हमारा भारत कई अनेक असाधारण प्रतिभाओं से संपन्न है। उन्होंने कहा, विट्ठलाचार्य जी इसकी मिसाल है कि जब बात अपने सपने पूरे करने की हो, तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। शिक्षा के प्रति विट्ठलाचार्य के समर्पण का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अपने जीवनभर की कमाई लगाकर विट्ठलाचार्य ने पुस्तकालय की शुरुआत की। इस लाइब्रेरी में करीब 2 लाख पुस्तकें हैं। उन्होंने कहा कि किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि व्यक्तित्व भी संवारती हैं, जीवन को भी गढ़ती हैं। पीएम मोदी ने मन की बात के श्रोताओं से आह्वान किया और कहा, आप इस वर्ष की अपनी उन 5 किताबों के बारे में बताएं, जो आपकी पसंदीदा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह से आप दूसरे पाठकों को अच्छी किताबें चुनने में भी मदद कर सकेंगे। बकौल पीएम मोदी, आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के लोग ना सिर्फ हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं, बल्कि उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश का जिक्र कर पीएम मोदी ने कहा कि इस राज्य के लोगों का एक अनूठा अभियान चला रखा है। इस अभियान में लोग स्वेच्छा से अपनी एयरगन सरेंडर कर रहे हैं, ताकि पक्षियों का अंधाधुंध शिकार रुक सके। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पहाड़ से मैदानी इलाकों तक लोगों ने इसे खुले दिल से अपनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी दफ्तरों में पुरानी फाइलों का कितना ढेर रहता था। आज से सरकार ने पुराने तौर-तरीकों को बदलना शुरू किया है। हमारे सरकारी विभाग भी स्वच्छता जैसे विषय पर इतने इनोवेटिव हो सकते हैं। कुछ साल पहले तक किसी को इसका भरोसा भी नहीं होता था।
एबीएन डेस्क, पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया, जहां बेला औद्योगिक क्षेत्र में नूडल्स फैक्ट्री में बॉयलर फटने से अब तक सात मजदूरों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस जोरदार धमाके से इलाके में मची अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि काम के दौरान अचानक जोरदार आवाज के साथ फैक्टरी का बॉयलर फट गया और वहां काम कर रहे कई लोग इसकी चपेट में आकर झुलस गए। इस घटना में फैक्टरी ढह गई और आसपास की भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। बेला औद्योगिक इलाके के निवासी सुबह करीब नौ बजकर 30 मिनट पर तेज धमाके की आवाज से सहम गए जब विस्फोट के कारण फैक्टरी ढह गई और आसपास की कई इमारतों की छतें धराशाई हो गईं। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू का काम शुरू कर दिया गया। वहीं, इस घटना में घायल हुए लोगों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
एबीएन डेस्क। कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी और तीसरी खुराक जिसे एहतियाती खुराक कहा जा रहा है, के बीच का अंतराल संभवत: नौ से 12 माह हो सकता है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में वर्तमान में उपयोग किए जा रहे टीकों - कोविशील्ड और कोवैक्सिन के लिए अंतराल की बारीकियों पर काम किया जा रहा है और इस पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। तीन से लगेगी बच्चो को वैक्सीन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात राष्ट्र के नाम एक संबोधन में घोषणा की कि 15-18 वर्ष के किशोरों के लिए कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण तीन जनवरी से शुरू होगा, जबकि स्वास्थ्य देखभाल और अग्रिम मोर्चे के कर्मियों के लिए एहतियाती खुराक 10 जनवरी से दी जाएगी। यह फैसला कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप से जुड़े कोविड मामले बढ़ने के बीच आया है। 10 जनवरी से एहतियाती खुराक : मोदी ने कहा कि एहतियाती खुराक अगले साल 10 जनवरी से 60 वर्ष से अधिक उम्र के और अन्य गंभीर बीमारी वाले नागरिकों को उनके डॉक्टर की सलाह पर दी जाएगी। एहतियाती खुराक पूरी तरह से टीकाकरण के लिए टीके की तीसरी खुराक को दर्शाती है, लेकिन मोदी ने "बूस्टर खुराक" शब्द का उपयोग करने से परहेज किया, जैसा कि आमतौर पर कहा जाता है। नौ से 12 महीने का अंतर : एक सूत्र ने कहा टीकाकरण विभाग और टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह द्वारा इन विषयों पर चर्चा करने के साथ कोविड टीके की दूसरी और एहतियाती खुराक के बीच का अंतर नौ से 12 महीने होने की संभावना है।
एबीएन डेस्क। एम्स के वरिष्ठ महामारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संजय के. राय ने बच्चों को कोविड रोधी टीका लगाने के केंद्र सरकार के निर्णय को अवैज्ञानिक करार देते हुए कहा है कि इससे कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा। एम्स में वयस्कों और बच्चों पर कोवैक्सीन टीके के परीक्षणों के प्रधान जांचकर्ता और इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष राय ने कहा कि इस निर्णय पर अमल करने से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू कर चुके देशों के आंकड़ों का भी विश्लेषण करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात राष्ट्र के नाम संबोधन में घोषणा की थी कि 15 से 18 साल की आयु तक के बच्चों का कोविड-19 रोधी टीकाकरण तीन जनवरी से शुरू किया जाएगा। इस कदम से स्कूल तथा कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंताएं कम होने तथा महामारी से लड़ने में मजबूती मिलने और विद्यालयों में पढ़ाई को पटरी पर लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। राय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए ट्वीट किया, मैं राष्ट्र की नि:स्वार्थ सेवा और सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा प्रशंसक हूं। लेकिन मैं बच्चों के टीकाकरण के उनके अवैज्ञानिक निर्णय से पूरी तरह निराश हूं। उन्होंने अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी निर्णय का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। राय ने कहा कि टीकाकरण का उद्देश्य या तो कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम है या गंभीरता अथवा मृत्यु को रोकना है। राय ने कहा, लेकिन टीकों के बारे में हमारे पास जो भी जानकारी है, उसके अनुसार वे संक्रमण के मामलों में महत्वपूर्ण कमी लाने में असमर्थ हैं। कुछ देशों में, लोग बूस्टर खुराक लेने के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं। इसके अलावा, ब्रिटेन में टीका लगवाने के बाद भी संक्रमित होने के रोजाना 50,000 मामले सामने आ रहे हैं। इसलिए यह साबित होता है कि टीकाकरण कोरोना वायरस संक्रमण को नहीं रोक रहा है, लेकिन टीके संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु को रोकने में प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि अतिसंवेदनशील आबादी के बीच कोविड-19 के कारण मृत्यु दर लगभग 1.5 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 15,000 लोगों की मौत। राय ने कहा, टीकाकरण के माध्यम से, हम इनमें से 80-90 प्रतिशत मौतों को रोक सकते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रति दस लाख में 13,000 से 14,000 मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के मामले प्रति दस लाख आबादी पर 10 से 15 के बीच होते हैं। राय ने कहा, इसलिए, यदि आप वयस्कों के बीच इनके जोखिम और लाभ का विश्लेषण करते हैं, तो यह एक बड़ा लाभ है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मामले में संक्रमण की गंभीरता बहुत कम होती है और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रति 10 लाख जनसंख्या पर केवल दो मौतों की सूचना मिली है। राय ने कहा, इस खंड (बच्चों) में, 15,000 (लोग) नहीं मर रहे हैं और प्रतिकूल प्रभावों को भी ध्यान में रखते हुए, यदि आप जोखिम और लाभ का विश्लेषण करते हैं, तो उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लाभ से अधिक जोखिम की बात सामने आती है। उन्होंने कहा, बच्चों का टीकाकरण शुरू करने से दोनों उद्देश्य पूरे नहीं हो रहे हैं। राय ने कहा कि अमेरिका समेत कुछ देशों ने चार-पांच महीने पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था और बच्चों का कोविड टीकाकरण शुरू करने से पहले इन देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाना चाहिए।
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