एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम के पांचवें संस्करण का आयोजन यहां तालकटोरा स्टेडियम में एक अप्रैल को किया जाएगा। संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षा के तनाव को दूर करने के गुर बताएंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ट्वीट किया, इंतजार अब खत्म हो गया है! परीक्षा पे चर्चा का 5 वां संस्करण 1 अप्रैल, 2022 को तालकटोरा स्टेडियम, नयी दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के साथ बातचीत करेंगे और परीक्षा के तनाव का सामना करने को लेकर अपने विचार साझा करेंगे। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ प्रधानमंत्री के इस संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण यहां तालकटोरा स्टेडियम में 16 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि 12-14 साल के आयु समूह को कोविड रोधी टीके की 72 लाख से ज्यादा खुराकें लगाई जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 1,82,23,30,356 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं। बुधवार शाम सात बजे तक 28 लाख 17 हजार 612 से ज्यादा खुराकें लगाई गई थी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 12-14 साल आयु वर्ग को टीकों की 69,99,528 खुराकें लगाई जा चुकी हैं। उसने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को 2.21 करोड़ से ज्यादा ऐहतियाती खुराक लगाई जा चुकी हैं। सफलता की ओर बढ़ता टीकाकरण अभियान : मनसुख मंडाविया ने ट्वीट किया कि देश को अपने युवा योद्धाओं पर बेहद गर्व है। देश में 16 मार्च से कोविड-19 के खिलाफ 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण कार्बेवैक्स वैक्सीन के साथ शुरू हुआ था। इसके अलावा, सरकार ने प्रिकाशन डोज हासिल करने के लिए 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कामरेडिटी की शर्त को माफ करने का भी फैसला किया था। 28 दिनों के अंतराल में दी जाएगी दूसरी डोज : सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 12 से 14 साल के आयु वर्ग के बच्चों को बायोलाजिकल ई के इंट्रामस्क्युलर वैक्सीन कार्बेवैक्स की दो खुराक 28 दिनों के अंतराल में दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा 181.89 करोड़ (1,81,89,15,234) के पार पहुंच गया है। कोरोना महामारी की मार झेलने के बाद देश में कोविड के खिलाफ टीकाकरण 16 जनवरी, 2021 को शुरू हुआ, जिसके बाद सभी के लिए टीकाकरण के नए चरण की शुरूआत 21 जून, 2021 से हुई। देश में टीकाकरण अभियान को गति वक्त पर टीकों की उपलब्धता के कारण मिली है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोरोना के टीके उपलब्ध करा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रचंड बहुमत के बाद 25 मार्च को लगातार दूसरी बार योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रिमंडल में पूर्वांचल का भी रसूख बढ़ने की उम्मीद है। पूर्वांचल के कई नेताओं को मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके लिए कयासों के साथ ही प्रयासों का भी दौर शुरू है। विधानसभा चुनाव में गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ जैसे जिलों में अहम भूमिका निभाने वाले एमएलसी व प्रदेश उपाध्यक्ष एके शर्मा की भी ताजपोशी हो सकती है। इसके साथ ही वाराणसी सहित आसपास के जिलों से चुने गए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्वांचल के जरिए जातीय समीकरण साधने की कोशिश : योगी-2 सरकार के गठन से पहले बृहस्पतिवार को गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मंत्रिमंडल की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। पूर्वांचल में बलिया से लेकर प्रयागराज तक एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के मंत्री बनने की संभावना है। दरअसल, पूर्वांचल के जरिए ही जातीय समीकरण भी साधने की पूरी कवायद होगी। यही कारण है कि ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, पिछड़ी जाति के राजभर, पटेल, बिंद सहित अनुसूचित जाति के विधायक अपनी बारी की उम्मीद में है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो वाराणसी के अनिल राजभर को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा पिछली बार मंत्रिमंडल में रहे रविंद्र जायसवाल और डॉ नीलकंठ तिवारी पर विचार किया जा रहा है। पटेल नेताओं में मिर्जापुर के रमाशंकर पटेल व अनुराग पटेल के साथ ही रोहनिया विधायक डॉ सुनील पटेल और सेवापुरी विधायक नीलरतन पटेल भी दौड़ में है। राजपूत विधायकों में बलिया के दयाशंकर सिंह, सैयदराजा के सुशील सिंह भी शामिल हैं। मऊ के मधुबन विधायक राम विलास चौहान, मझवा के डॉ विनोद बिंद भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति को साधने में वाराणसी के अजगरा सीट से विधायक टी राम, मिर्जापुर के राहुल कोल, सोनभद्र के दुद्दी के रामदुलार व ओबरा के संजीव कुमार में से किसी को मौका मिल सकता है। फिलहाल बृहस्पतिवार की अहम बैठक पर विधायकों की निगाह टिकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की चिंता इस वक्त जरूर बढ़ रही होगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में कुछ महीने पहले (अक्टूबर 2021 में) मंडी संसदीय सीट, अर्की, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने आंतरिक जांच के लिए एक टीम नियुक्त की जिसका निष्कर्ष यह था कि पार्टी (मुख्यमंत्री) मंडी के मिजाज को पढऩे और छह बार के राज्य के मुख्यमंत्री और दिवंगत कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के लिए जनता के समर्थन को समझने में विफल रही। उपचुनाव के नतीजे निश्चित रूप से चौंकाने वाले थे क्योंकि ठाकुर न केवल मंडी जिले से ताल्लुक रखते हैं बल्कि मंडी संसदीय क्षेत्र से भी भाजपा के पहले मुख्यमंत्री थे, जहां मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और भरमौर (चंबा) जिलों में 17 विधानसभा सीट हैं। अर्की और फतेहपुर पर कांग्रेस का कब्जा था जबकि भाजपा के पास जुब्बल-कोटखाई और लोकसभा सीट थी। जुब्बल कोटखाई में पड़े मतों में से केवल चार प्रतिशत वोट से ही भाजपा उम्मीदवार को जीत मिली। हार की कोई जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए ठाकुर ने महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी को इस झटके के लिए जिम्मेदार ठहराया। एक तरह से यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सीधी आलोचना थी, जो नरेंद्र तोमर के साथ-साथ पर्यवेक्षक की भूमिका में भी रहीं और उन्होंने इस पद के लिए ठाकुर के नाम की सिफारिश भी की थी। पेचीदा मामला यह है कि ठाकुर मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद नहीं थे। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2017 के चुनावों से ठीक नौ दिन पहले पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पी के धूमल के नाम की घोषणा की थी। लेकिन धूमल चुनाव हार गए और इसका फायदा ठाकुर को मिला जिनके बारे में कई लोगों की निजी राय यह है कि उन्हें अपनी योग्यता से ज्यादा मिल गया। 1990 के बाद से ही इस राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच द्विध्रुवीय मुकाबला देखने को मिलता रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) ने भी घोषणा की है कि वह इस बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा की सभी 68 सीट पर चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक और राज्य के पूर्व डीजीपी आई डी भंडारी ने कहा, भाजपा और कांग्रेस को लेकर लोगों में कोई उत्साह नहीं दिखता है और यही कारण है कि जनता हर पांच साल में सरकार बदलती है। लेकिन हम अपनी सदस्यता बढ़ाने के लिए दोनों दलों की ओर देख रहे हैं। उपचुनाव के नतीजों के बाद हिमाचल में कांग्रेस उत्साहित है लेकिन इसमें आंतरिक गुटबाजी ज्यादा है। सुखविंदर सिंह सुक्खू कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिनके निधन के बाद मंडी उपचुनाव हुए उनके साथ उनकी नहीं बनती थी। शिमला के एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, राज्य में कांग्रेस की मुख्य समस्या हमेशा से गुटबाजी रही है। पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव में किसी भी नेता को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए पेश करना मुश्किल होगा। सुक्खू एक बड़े नेता हैं लेकिन पार्टी में आशा कुमारी और कुलदीप राठौर जैसे अन्य बड़े नेता भी हैं। ऐसे में सामूहिक नेतृत्व ही पार्टी के लिए सुरक्षित तरीका है। हालांकि इसके खत्म होने की संभावना नहीं है। गुजरात का मामला भी अलग है। 2017 के बाद इस राज्य में कांग्रेस की संभावनाएं तेजी से कम हो गई हैं। 2017 में पार्टी का प्रदर्शन उतना बुरा नहीं था जितना कि डर था। भाजपा ने विधानसभा की 182 सीट में से 99 जीतीं। कांग्रेस को 77 सीट पर जीत मिली। लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई। बाद में कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी हाल ही में हुए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में बुरी तरह हार गई थी। पार्टी को बेहतर स्थिति में लाने के लिए कांग्रेस ने तेजतर्रार पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। पटेल ने जुलाई 2015 में पाटीदारों के आरक्षण के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन के दौरान 14 पाटीदार युवाओं की मौत हो गई थी और उससे जुड़ी हिंसा में इस समुदाय के नेताओं के खिलाफ 438 मामले दर्ज किए गए थे। हार्दिक पटेल ने राज्य सरकार को मामलों को वापस लेने या फिर आंदोलन का सामना करने के लिए 23 मार्च तक का समय दिया है। उनका तर्क यह है कि राज्य सरकार और केंद्र ने गरीबों और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने और आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण जातियों के लिए 10 प्रतिशत कोटा देने के लिए सहमति जताई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की स्थिति असहज हो गई है क्योंकि अगर वह मामलों को वापस ले लेते हैं तो इसका मतलब यह हिंसा को स्वीकार करने के समान है और अगर वह इससे इनकार करते हैं तो एक और आंदोलन देखा जा सकता है। भाजपा ने कुछ महीने पहले ही विजय रूपाणी की जगह लगभग कम मशहूर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया। पटेल पूर्व मुख्यमंत्री और पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आनंदीबेन पटेल के दबाव के कारण शीर्ष पद पर बने हुए हैं। लेकिन एक और चुनौती है आप। हालांकि गुजरात के कांग्रेस प्रभारी रघु शर्मा आप को चुनौती के रूप में नहीं देखते हैं। लेकिन वह मानते हैं कि कांग्रेस की एक समस्या है। उन्होंने कहा, हमने बूथ पर संगठन को कभी मजबूत नहीं किया। हमने एक माहौल बनाया। ऐसा लगने लगा जैसे सरकार बदल जाएगी। लेकिन भाजपा ने हमसे ज्यादा बूथ पर ध्यान केंद्रित किया, यह इसकी जीत की एक प्रमुख वजह थी। पंजाब में कई दशकों में पहली बार इस चुनाव में कई दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला। लंबे समय बाद गुजरात में भी गंभीर रूप से बहु-आयामी मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि अब आप भी मैदान में उतर चुकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। तमिलनाडु में नौसेना हवाई अड्डे आईएनएस परुंदु में बुधवार को दो उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर शामिल किए गए जिससे इसकी निगरानी अभियान क्षमता में इज़ाफा हुआ है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि रामनाथपुरम में नौसेना हवाई स्टेशन में स्वदेशी तौर पर विकसित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर्स (एएलएच) का पानी की बौछारों के साथ पारंपरिक स्वागत किया गया। इन हेलीकॉप्टरों को हिन्दुस्तान एयरोनॉक्टिस लिमिटेड ने बनाया है। हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल सशस्त्र गश्ती मिशन, हताहतों को निकालने, खोज एवं बचाव अभियानों में किया जा सकता है। आईएनएस परूंदु फिलहाल हेरोन आरपीए और चेतक हेलीकॉप्टरों का संचालन करता है। विज्ञप्ति के मुताबिक, एएलएच अत्याधुनिक समुद्री गश्ती रडार और अन्य उपकरणों से लैस हैं जो निगरानी की क्षमता में बढ़ोतरी करते हैं। उसमें बताया गया है कि इन होलीकॉप्टरों के शामिल करने के बाद मन्नार की खाड़ी, पाल्क खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र में समुद्री निगरानी में इजाफा होगा और इनसे दिन एवं रात में भी खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा सकेगा। हेलीकॉप्टरों को शामिल करने के समारोह में पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल बिश्वजीत दासगुप्ता मुख्य अतिथि थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सूबे का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स सवालों के घेरे में आ गया है। यहां के मेडिकल बोर्ड ने 22 मार्च को लालू यादव की खराब सेहत का हवाला देकर दिल्ली स्थित एम्स के लिए रेफर कर दिया था। इसके बाद लालू यादव के परिजन चार्टर्ड विमान से उन्हें दिल्ली लेकर गए थे। लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने जांच के बाद स्पष्ट कर दिया कि लालू यादव को यहां इलाज कराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में लालू यादव को चार्टर्ड विमान से रांची लाने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश राजद नेता अभय सिंह ने बताया कि लालू यादव के दोपहर दो से चार बजे के बीच रांची पहुंचने की संभावना है। मंगलवार रात लालू यादव किडनी की स्थिति बिगड़ने के बाद एयर एम्बुलेंस से दिल्ली गए थे। रात भर इमरजेंसी में उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। लालू प्रसाद का क्रिएटिनिन लेवल 4.1 से बढ़कर 4.6 हो गया है। चारा घोटाले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सेहत में लगातार गिरावट की वजह से उन्हें रांची स्थित रिम्स से एम्स नई दिल्ली शिफ्ट किया गया था। मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ विद्यापति ने बताया था कि लालू प्रसाद यादव की किडनी के फंक्शन में लगातार गिरावट आ रही है। मंगलवार को हुई जांच में उनकी क्रिएटनिन लेवल 4.6 पाया गया है। यह एक खतरनाक संकेत है, इसलिए उन्हें तत्काल हायर मेडिकल सेंटर ले जाये जाने की जरूरत है। डॉक्टरों के मुताबिक लालू की किडनी 80 प्रतिशत काम नहीं कर रही है। लगभग 10 दिन पहले उनका क्रिएटनिन लेवल 4.1 था, जो अब बढ़कर 4.6 हो गया है। रिम्स के डॉक्टरों ने उनकी गिरती सेहत को देखते हुए बीपी और शुगर सहित अन्य बीमारियों के लिए दी जानेवाली दवाइयों का डोज लगातार बढ़ाया था, लेकिन इसके बाद भी उनकी सेहत लगातार खराब हो रही है। बता दें कि 21 फरवरी को सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में पांच साल जेल की सजा सुनाने के साथ 60 लाख रुपये जुर्माना भरने को कहा था। स्वास्थ्य खराब होने के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें रांची रिम्स में भर्ती कराया था। लालू प्रसाद यादव इसके पहले भी चारा घोटाले के दूसरे मामलों मे सजा सुनाये जाने के बाद रिम्स में न्यायिक हिरासत में कई महीनों तक इलाजरत रहे थे। पिछले साल नवंबर में बुखार और कमजोरी की शिकायत पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय विद्युत नियामक प्राधिकरण की सतर्कता से चीन के एक साइबर ग्रुप द्वारा किए गए हमले के दौरान पंजाब सहित आठ राज्यों में गंभीर बिजली संकट टल गया है। केंद्रीय प्राधिकरण ने पहले ही इन राज्यों को हमले के प्रति सचेत कर दिया था जिसके चलते इस हमले का कोई असर नहीं हुआ। इस साईबर ग्रुप द्वारा इन राज्यों के स्टेट लोड डिस्पैच केन्द्रों पर हमला किया था। यदि साइबर हमलावर सफल हो जाते तो बिजली आपूर्ति ठप्प हो जाती। जिन राज्यों को निशाना बनाया गया उनमें पंजाब के अलावा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा शामिल हैं। साइबर हमलावरों ने अत्याधुनिक साइबर घुसपैठ उपकरण और सॉफ्टवेयर का उपयोग कर इन स्टेट लोड डिस्पैच केन्द्रों पर हमला किया था। अगर हमला सफल होता, तो इन साइबर हमलावरों की भारत के सबसे बड़ी बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन ढांचे तक पहुंच हो जाती। इस संबंध में जानकारी देते हुए विद्युत क्षेत्र में विशेषज्ञ विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि कंप्यूटर इमरजेंसी रिसोर्स टीम ऑफ इंडिया (सीईआर टी-एंड) ने इन चीनी हैकर्स का पता लगाया था और इन राज्यों के पावर एटिक्स को तुरंत अलर्ट कर दिया था तथा आगे अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों के कारण ट्रांसमिशन सिस्टम का ब्रेक डाउन बच गया। पंजाब एसएलडीसी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एससीएडीए और आईएसपी फायर फॉल में एसआईपीज को ब्लॉक कर दिया। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने राज्यों के एसएलडी को कहा कि वह सूचना प्रौद्योगिकी और ओटी सिस्टम का प्रत्येक 6 महीने के बाद साइबर सुरक्षा ऑडिट करें ताकि भविष्य में ऐसे हमलों से बचा जा सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,778 नए मामले आए हैं। 2,542 लोग डिस्चार्ज हुए और 62 लोगों की कोरोना से मौत हुई। जिसके बाद से देश में कोरोना के कुल 4,30,12,749 मामले हो गए हैं। वहीं 23,087 एक्टिव केस हैं। रिकवरी की अगर बात की जाए तो कोरोना से कुल 4,24,73,057 लोग रिकवर हुए हैं। वहीं 62 मौत के बाद देश में कुल मौतें 5,16,605 हो गई हैं। 1,81,89,15,234 लोगों को वैक्सीनेशन हुआ है। वहीं कल कोरोना के 1,581 नए मामले सामने आए थे। इसके साथ ही कुल मामलों की संख्या 4,30,10,971 हो गई थी, जबकि इलाज करा रहे मरीजों की संख्या कम होकर 23,913 रह गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि 33 और मरीजों के कोविड-19 से जान गंवाने के बाद इस महामारी से मरने वाले लोगों की संख्या 5,16,543 पर पहुंच गई थी। चौथी लहर से अलर्ट रहने की जरूरत : वहीं कोरोना वायरसका खतरा अभी टलता नहीं दिख रहा है। तीसरी लहर के शांत होने के कुछ महीनों बाद ही कोरोना ने एक बार फिर तबाही मचानी शुरू कर दी है। इस बार ओमिक्रॉन का सबवेरिएंट बीए.2 और ओमिक्रॉन व डेल्टा के जुड़ने से तैयार हुआ डेल्टाक्रॉन प्रकोप मचा रहा है। आशंका है कि जिस तरह से नए मामलों की संख्या बढ़ रही है, चौथी लहर कभी भी आ सकती है। ब्रिटेन में डेल्टाक्रॉन ने तबाही मचा रखी है। यह वेरिएंट डेल्टा और ओमीक्रोन से जुड़ने से तैयार हुआ है। यह इसका ऑफिसियल नाम नहीं है। इसमें स्पाइक्स होते हैं जो ओमीक्रोन वेरिएंट की तरह दिखते हैं। इस हाइब्रिड वेरिएंट की खोज जनवरी, 2022 में की गई थी। इसके दुनियाभर में अब तक कुछ ही मामले सामने आए हैं।
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