देश

View All
Published / 2022-04-22 16:27:20
इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग की घटनाओं पर नितिन गडकरी ने दी कंपनियों को कड़ी चेतावनी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में आग लगने की बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार लापरवाही करने वाली कंपनियों के खिलाफ आवश्यक आदेश जारी करेगी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जांच को लेकर एक एक्सपर्ट कमेटी के गठन का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जल्द ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियों की क्वालिटी को लेकर एक नई गाइडलाइन जारी की जाएगी और लापरवाही करने वाली कंपनियों पर भारी जुमार्ना लगाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर जांच में किसी कंपनी की ओर से लापरवाही पाई गई तो उस पर भारी जुमार्ना लगाया जाएगा। साथ ही बाजार से सभी खराब व्हीकल्स को वापस बुलाने का आदेश दिया जाएगा। गडकरी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट्स आने तक कंपनियां खुद से बाजार में गए सभी खराब व्हीकल्स को वापस बुलाने की कार्रवाई कर सकती हैं। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी : नितिन गडकरी ने ट्वीट कर कहा, पिछले दो महीनों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं में कुछ लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा, हमने इन घटनाओं की जांच करने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। साथ ही यह कमेटी भविष्य में ऐसी घटनाएं होने से रोकने के उपाय भी बताएगी। कमेटी के रिपोर्ट्स के आधार पर हम गड़बड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मार्च से शुरू हुई आग लगने की घटना : इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने का पहला मामला 26 मार्च को सामने आया था, जब पुणे में एक ओला ए1 प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसी 26 मार्च की शाम तमिलनाडु के वेल्लोर में ओकिनावा इलेक्ट्रिक स्कूटर में आगने की घटना सामने आई। इसके दो दिन बाद 30 मार्च को चेन्नई में प्योर ईवी के एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई थी। नासिक में 11 अप्रैल को ट्रक में भरे स्कूटरों में आग लग गई थी।

Published / 2022-04-22 16:25:27
तेजी से बदल रही विश्व व्यवस्था में भारत के पास खुद को मजबूत बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं : राजनाथ सिंह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत के पास अपनी रक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खुद को मजबूत बनाने के अलावा कोई और दूसरा आॅप्शन नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया की व्यवस्था तेजी से बदल रही है। सिंह ने यह बात यूक्रेन-रूस युद्ध के संदर्भ में कही। सिंह ने डेफकनेक्ट 2.0 के उद्घाटन पर कहा कि दुनिया में बहुत सी चीजें हो रही हैं जो भारत को प्रभावित कर रही हैं। डेफकनेक्ट 2.0 रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप, बड़ी कंपनियों और सशस्त्र बलों के कर्मियों को एक साथ लाने के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम है। सिंह ने कहा, जब हम एयरो इंडिया 2021 (21 फरवरी) में मिले थे, तब से अब तक दुनिया इतनी बदल गई है कि इसका हिसाब या आकलन नहीं किया जा सकता है। हर नया खतरा पिछले की तुलना में अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण लग रहा है। उन्होंने कहा, हम कोविड-19 के चलते पैदा हुए संकट से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि दुनिया अब यूक्रेन के संघर्ष के मुद्दे का सामना कर रही है। सिंह ने कहा, समय के साथ जिस तरह से विश्व व्यवस्था बदल रही है। हमारे पास खुद को मजबूत बनाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। मंत्री ने कहा कि इससे पहले भी, दुनिया ने पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अस्थिरता देखी है। उन्होंने कहा, इसके अलावा, दुनिया में बहुत सी चीजें हो रही हैं जो निश्चित रूप से भारत को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी रक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत बनें। उन्होंने कहा, हमें खुद को मजबूत करने के लिए अपने कई क्षेत्रों को विकसित करने की जरूरत है। इस संबंध में डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सिंह ने रक्षा प्रौद्योगिकी मामले की उपयोगिता और विशिष्टता को समान रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, रक्षा तकनीक हमारे लिए कितनी उपयोगी है, यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी जरूरी है कि रक्षा तकनीक हमारे पास ही हो। डेफकनेक्ट 2.0 नवोन्मेषकों को अपनी क्षमताओं, उत्पादों और अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन उद्योगपतियों के समक्ष करने का अवसर प्रदान करता है। स्टार्ट-अप के लिए यह अवसर होता है कि वे निवेश हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।

Published / 2022-04-22 16:23:47
लद्दाख में हिली धरती, करगिल में 4.2 तीव्रता की भूकंप के झटके

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के करगिल में सोमवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक लगभग 6 बजकर 50 मिनट पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। फिलहाल, भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। इससे पहले इसी महीने 18 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भूकंप आया था। अधिकारियों ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजकर 9 मिनट पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र किश्तवाड़ में था। ओडिशा में नयागढ़ जिले के दासपल्ला कस्बे में 14 अप्रैल को मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि 3.5 की तीव्रता वाले भूकंप का केंद्र गंजम जिले में 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप के झटके पूर्वाह्न 11 बजकर 19 मिनट पर महसूस किए गए। जिले के एक अधिकारी ने बताया कि भूकंप से जानमाल को नुकसान होने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है। ओडिशा के कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों में भी पिछले महीने 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं 10 अप्रैल को गुजरात के कच्छ जिले में 3.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि इस दौरान जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने कहा कि भूकंप के झटके रात 12.49 बजे महसूस किए गए और इसका केंद्र कच्छ में रापड़ से एक किलोमीटर दूर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में 12.2 किलोमीटर की गहराई में था। आईएसआर के आंकड़ों के अनुसार ये पिछले एक महीने में जिले में आया 3.0 या उससे अधिक तीव्रता का पांचवा भूकंप है। इससे पहले आए भूकंपों का केंद्र जिले के रापर, दुधाई और लखपत शहरों के समीप था। इसके अलावा 8 अप्रैल को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के करगिल जिले में 3.6 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इसमें किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। एनसीएस ने कहा कि भूकंप शाम 5.12 बजे आया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र करगिल से 82 किलोमीटर उत्तरपश्चिम में स्थित था।

Published / 2022-04-22 08:55:01
पृथ्वी दिवस पर बोले पीएम मोदी- धरती मां की रक्षा हर पीढ़ी का दायित्व

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पृथ्वी दिवस "धरती माता" के प्रति कृतज्ञता जताने के साथ ही हमारे ग्रह की देखभाल के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने तथा दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल के दिन पृथ्वी दिवस यानि अर्थ डे मनाने की शुरुआत की गई थी। वर्ष 1970 में शुरू की गई इस परंपरा को दुनिया ने खुले दिल से अपनाया और आज लगभग पूरी दुनिया में प्रति वर्ष पृथ्वी दिवस के मौके पर धरा की धानी चूनर को बनाए रखने और हर तरह के जीव-जंतुओं को पृथ्वी पर उनके हिस्से का स्थान और अधिकार देने का संकल्प लिया जाता है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, पृथ्वी दिवस धरती माता को उसकी दया के लिए उसके प्रति कृतज्ञता जताने और हमारे ग्रह की देखभाल के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। इस ट्वीट के साथ प्रधानमंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया। इसमें पर्यावरण को संरक्षित करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता के बारे में उनके पूर्व के भाषणों के अंश शामिल हैं। इस वीडियो में उन्होंने कहा है कि पर्यावरण का संरक्षण हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

Published / 2022-04-22 08:25:01
जॉनसन-मोदी की बैठक में रक्षा-व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत दौरे पर आए अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन से रक्षा, व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को ओर विस्तार देने के लिए विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक ट्वीट में कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन ने नई दिल्ली में वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के रास्तों के बारे में चर्चा की। वार्ता से पहले ब्रिटेन ने कहा कि वह भारत को सर्वश्रेष्ठ ब्रिटिश उन्नत युद्धक विमान के निर्माण से संबंधित जानकारी देगा और हिंद महासागर में चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की प्रौद्योगिकी जरूरतों का समर्थन देगा। ब्रिटिश उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि आने वाले दशकों में भारत के साथ वृहद रक्षा और सुरक्षा भागीदारी के समर्थन में ब्रिटेन, भारत को ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) जारी करेगा जिससे नौकरशाही कम होगी और रक्षा खरीद के लिए आपूर्ति का समय कम होगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में दो दिवसीय यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचे। उच्चायोग ने जॉनसन के हवाले से कहा कि दुनिया निरंकुश देशों से बढ़ते खतरों का सामना कर रही है, जो लोकतंत्र को कमतर, मुक्त व्यापार को खत्म करने और सम्प्रभुत्ता को कुचलना चाहते हैं। भारत के साथ ब्रिटेन की भागीदारी इन तूफानी सागरों में प्रकाशपुंज है। उच्चायोग ने कहा कि ब्रिटेन और भारत किफायती हरित हाइड्रोजन पर काम तेज करने के लिए वर्चुअल हाइड्रोजन विज्ञान एवं नवोन्मेष हब शुरू कर रहे हैं। उसने कहा कि जॉनसन स्वच्छ एवं नवीनीकरण ऊर्जा पर नए सहयोग पर भी चर्चा करेंगे, जिसका मकसद आयातित तेल से नई दिल्ली के ऊर्जा बदलाव को समर्थन देना और सुरक्षित तथा टिकाऊ ऊर्जा के जरिए इसके लचीलेपन को बढ़ाना तथा ब्रिटेन और भारत दोनों देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटना है।

Published / 2022-04-22 01:38:16
दिल्ली के अधिकांश नमूनों में मिला ओमीक्रोन का उप-स्वरूप

लएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली में अप्रैल के पहले पखवाड़े में जिन नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया उनमें से अधिकतर में ओमीक्रोन का उप-स्वरूप बीए.2.12 सामने आया है और शहर में कोविड-19 के मामलों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे यह एक वजह हो सकता है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। हालांकि भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इनसाकॉग) के एक सूत्र ने दावा किया कि ओमीक्रोन के स्वरूप से व्युत्पन्न बीए.2.12.1 भी दिल्ली के कुछ नमूनों में पाया गया है जिसे अमेरिका में मामलों में हालिया वृद्धि की वजह बताया जा रहा है। लेकिन अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि दिल्ली के कुछ नमूनों में यह पाया गया है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, नये उप-स्वरूप बीए.2.12 (52 प्रतिशत नमूनों में) और बीए.2.10 (11 प्रतिशत नमूनों में) उच्च संक्रमण दिखा रहे हैं और दिल्ली में हाल में लिये गये कुल नमूनों में से 60 प्रतिशत से अधिक में ये पाये गये हैं। दिल्ली में इस महीने पहले पखवाड़े में 300 से अधिक नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया। अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी जिलों में भी जिन नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया है, उनमें भी वायरस के लगभग ये ही उप-स्वरूप मिले हैं। दिल्ली में बुधवार को कोविड-19 के 1,009 मामले सामने आये जो एक दिन पहले आए मामलों से 60 प्रतिशत अधिक हैं।

Published / 2022-04-22 01:30:56
"ग्लोबल मेक इन इंडिया" रूट के पक्ष में इंडियन एयर फोर्स, 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 114 लड़ाकू जेट का हुआ सौदा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 114 मल्टी रोल वाले लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के टेंडर के लिए भारतीय वायु सेना देश के अंदर विमानों के उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी नीति मॉडल पर बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट अपनाना पसंद करेगी। बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया विदेशी हथियार सिस्टम के अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तहत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में प्रदान की गई खरीद प्रक्रिया की एक कैटेगरी है और देश के अंदर उनका उत्पादन रक्षा कार्यक्रम में मेक इन इंडिया के तहत होता है। स्वदेशी एलसीए तेजस और 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट के साथ 114 एमआरएफए प्रोजेक्ट को भी भारतीय वायु सेना को उत्तरी और पश्चिमी दोनों विरोधियों पर बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता होगी। वहीं सरकारी सूत्रों ने बताया कि हम बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए जाना पसंद करेंगे, जिसे वेंडर भी पसंद करते हैं और जिनके कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है। तीन अमेरिकी विमान समेत F-18, F-15 और F-21, रूसी मिग -35, Su-35, फ्रेंच राफेल, स्वीडिश साब ग्रिपेन और यूरोफाइटर टाइफून विमान के कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। सूत्र ने आगे कहा कि भारतीय वायु सेना ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर इन कंपनियों के विचार भी मांगे थे, जिन्हें वे कार्यक्रम में चुनना चाहेंगे और उनमें से ज्यादातर ने सिर्फ ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए प्रायोरिटी दिखाई है। साथ ही सूत्रों ने कहा कि बल ने परियोजना पर सरकार से निर्देश मांगा है कि वो आगे की कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी के लिए प्रोजेक्ट को कब आगे बढ़ा सकता है। सूत्रों ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान के दो स्क्वाड्रन 35 विमानों के साथ पूरी तरह काम करते है, जो पहले ही फ्रांस से आ चुके हैं। वहीं अब डिलीवरी के लिए सिर्फ एक विमान बचा है। सूत्रों ने आगे कहा कि इंडियन एयरफोर्स को निश्चित रूप से अधिक विमानों की आवश्यकता होगी, क्योंकि दोनों स्क्वाड्रन केवल बल की आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

Published / 2022-04-21 10:46:26
आयुर्वेद और योग को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना वक्त की जरूरत : मांडविया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने आयुर्वेद और योग जैसी स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बृहस्पतिवार को जोर दिया दिया ताकि लोगों को समग्र स्वास्थ्य देखभाल समाधान दिया जा सकें। यहां चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के 62वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि औषधि की पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रणालियों के अपने-अपने फायदे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियां एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल में प्रभावी हैं जबकि आधुनिक औषधियों की बीमारियों के निदान और इलाज में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, हमारी अपनी स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों जैसे कि आयुर्वेद और योग को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना वक्त की जरूरत है। महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई पर मांडविया ने कहा कि भारत के कोविड-19 प्रबंधन और टीकाकरण अभियान से दुनिया हैरान है। महामारी के दौरान भारत की स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में प्रगति पर मंत्री ने कहा, हमने न केवल कोविड टीके बनाए बल्कि बेहद कम वक्त में उनका निर्माण और निर्यात भी किया। भारत की कोविड प्रबंधन रणनीति पर निराशाजनक अनुमान लगाए गए थे। लेकिन हम न केवल महामारी से अच्छे तरह से निपट पाए बल्कि दुनियाभर में हमारी सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणाली भी साझा की। मांडविया ने कहा, इस देश में कभी मानवश्रम या मस्तिष्क शक्ति की कमी नहीं थी। हमारे में केवल आत्मविश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष किसी भी देश को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, आज गुजरात के धोलावीरा जाते हैं, लोथल जाते हैं। धोलावीरा की 5,000 साल पुरानी सभ्यता है। यह दिखाता है कि हम कितने सभ्य थे, उस समय हमारा विज्ञान कितना विकसित था। मांडविया ने प्रतिष्ठान और अनुसंधानकर्ताओं को शोध और नवोन्मेष के लिए निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया।

Page 241 of 330

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse