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Published / 2022-05-18 09:57:09
हार्दिक पटेल का कांग्रेस से इस्तीफा, अब किस पार्टी में जायेंगे?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। हार्दिक पटेल ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दो दिन पहले कांग्रेस के चिंतन शिविर से वह नदारद रहे थे। वह पिछले कई दिनों से पार्टी के कुछ नेताओं, खासकर राज्य से जुड़े नेताओं पर आरोप लगा रहे थे। आखिरकार उनके इस्तीफे की खबर आ गई। आज मैं हिम्मत करके कांग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूं कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊंगा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे गए त्यागपत्र को ट्विटर पर साझा कर यह जानकारी दी कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हार्दिक ने कांग्रेस पर गुजरात विरोधी सोच होने का आरोप लगाया और दावा किया कि कांग्रेस सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है और खुद को एक विकल्प के तौर पर पेश करने में विफल रही है। उन्होंने कहा, आज मैं हिम्मत करके पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। हार्दिक ने यह भी कहा, मैं मानता हूं कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊंगा। उधर, गुजरात में कृषि मंत्री राघव पटेल ने कहा कि हार्दिक भाजपा में आना चाहें तो उनका स्वागत है। हार्दिक पटेल ने 2015 में पटेल आरक्षण का मुद्दा छेड़ा था। उनके आंदोलन की लोकप्रियता की बदौलत ही उन्हें कांग्रेस में एंट्री मिली थी। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका फायदा भी मिला। पिछले साल पार्टी ने उन्हें गुजरात कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किया था। हालांकि, उसके बाद से वह राज्य स्तर पर पार्टी नेतृत्व से सहज नहीं थे। उन्होंने कई मौकों पर राज्य नेतृत्व की शिकायत की। यहां तक कि उनसे दूरी भी बना ली। हाल ही में यह भी चर्चा थी कि कांग्रेस पार्टी नरेश पटेल नाम के एक दूसरे पटेल नेता के संपर्क में है। हो सकता है पार्टी उन्हें शामिल कर ले। 10 मई को राहुल की दाहोद रैली में उम्मीद की जा रही थी कि राहुल गांधी उनसे बात कर नेतृत्व का मुद्दा सुलझा सकते हैं। लेकिन सूत्रों ने बताया कि राहुल के व्यस्त कार्यक्रम की वजह से ऐसा संभव नहीं हो सका। हार्दिक पटेल के भाजपा ज्वाइन करने की भी खबरें उड़ रहीं हैं।

Published / 2022-05-18 09:41:44
भारत ने 2000 मीट्रिक टन गेहूं भेजी अफगानिस्तान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार से मानवीय सहायता के रूप में 2,000 मीट्रिक टन गेहूं की एक और खेप सोमवार को अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से अफगानिस्तान के लिए भेजी। सीमा शुल्क आयुक्त, राहुल नांगरे ने खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। गेहूं से लदे ट्रकों पर भारत के लोगों से अफगानिस्तान के लोगों को उपहार संदेश लिखा हुआ था। आयुक्त राहुल नांगरे ने कहा, भारत सरकार ने अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिसमें हम पहले ही 10,000 मीट्रिक टन गेहूं भेज चुके हैं। शेष 40,000 मीट्रिक टन में से आज हम 2,000 मीट्रिक टन गेहूं की पहली खेप भेज रहे हैं। इससे पहले, भारत ने घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजेगा। भारत से 2,500 टन गेहूं की मानवीय सहायता की पहली खेप 26 फरवरी को पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान के जलालाबाद पहुंची थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि 2,000 मीट्रिक टन गेहूं लेकर भारत की मानवीय सहायता का दूसरा काफिला 3 मार्च को अटारी, अमृतसर से जलालाबाद, अफगानिस्तान के लिए रवाना हुआ था। इसके अलावा, भारत ने 8 मार्च को अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से 40 ट्रकों में 2,000 मीट्रिक टन गेहूं की तीसरी खेप अफगानिस्तान भेजी। 15 मार्च को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अफगानिस्तान के लिए 2,000 मीट्रिक टन गेहूं की चौथी खेप भेजी गई थी। नवंबर 2021 में पाकिस्तान सरकार ने अफगान लोगों के लिए एक विशेष संकेत के रूप में, मानवीय उद्देश्यों के लिए असाधारण आधार पर वाघा सीमा के माध्यम से भारत से अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के रूप में 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और जीवन रक्षक दवाओं के परिवहन को मंजूरी दी थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार मानवीय सहायता के परिवहन के लिए दी गई समयावधि 21 मार्च 2022 को समाप्त हो गई थी। लेकिन भारत सरकार की परिवहन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय अवधि में विस्तार का अनुरोध करने के बाद गेहूं परिवहन के लिए दो महीने का विस्तार कर दिया गया है।

Published / 2022-05-18 09:31:02
गुजरात : नमक फैक्ट्री की दीवार गिरने से 12 मजदूरों की मौत, कई मलबे में दबे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के मोरबी में फैक्ट्री की एक दीवार गिरने से 12 मजदूरों की मौत हो गई। इस घटना में कई और लोगों के घायल होने की भी खबर है। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। कहा जा रहा है कि कम से कम 30 मजदूर मलबे में अभी दबे हैं। घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है। घटना आज सुबह की है। जिले के हलवाड़ जीआईडीसी में सागर सॉल्ट फैक्ट्री में ये हादसा हुआ। फंसे हुए लोगों को जेसीबी की मदद से निकाला जा रहा है। अब तक 9 शव निकाले जा चुके हैं। स्थानीय विधायक ब्रजेश मेरजा ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए 12 मजदूरों के मरने की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में दबे हुए लोगों को निकालने का काम लगातार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, मोरबी में दीवार गिरने से हुई त्रासदी हृदय विदारक है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। उम्मीद करता हूं कि घायल लोग जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे स्थानीय अधिकारी प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।

Published / 2022-05-17 17:54:53
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की दो स्वदेशी युद्धपोतों की लॉन्चिंग, और भी ताकतवर हुई भारतीय नौसेना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आज मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में दो स्वदेशी युद्धपोत लॉन्च किए गए। इसी के साथ अब भारतीय नौसेना पहले से और अधिक ताकतवर हो गई है। भारतीय वायुसेना युद्धपोत आईएनएस सूरत (यार्ड 12707) और आईएनएस उदयगिरी (यार्ड 12652) के जरिए पूरी दुनिया को अपनी समुद्री ताकत दिखाई गई। दोनों ही युद्धपोतों की डिजाइन नौसेना के नेवल डिजाइन निदेशालय ने तैयार किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुंबई में भारतीय युद्धपोतों के शुभारंभ के दौरान कहा कि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस सूरत के सफल प्रक्षेपण के बाद, इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी जहाज निर्माण करेंगे। हम न केवल मेक इन इंडिया बल्कि मेक-फॉर-वर्ल्ड के लिए भी लक्ष्य रखेंगे। सिंह ने कहा कि कोविड-19 और रूस और यूक्रेन के बीच चल रही उथल-पुथल के बीच इन विध्वंसकों का शुभारंभ करना हमारी समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 50 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां बन रही हैं, और भारतीय नौसेना में लगभग 150 जहाज और पनडुब्बियां पहले से ही शामिल हैं। बता दें कि प्रोजेक्ट 15बी श्रेणी के जहाज भारतीय नौसेना की अगली पीढ़ी के स्टेल्थ (रडार को चकमा देने में सक्षम) निर्देशित मिसाइल विध्वंसक हैं जिन्हें मुंबई में मझगांव डॉक्स लिमिटेड (एमडीएल) में बनाया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि सूरत प्रोजेक्ट 15बी विध्वंसक का चौथा जहाज है, जो पी15ए (कोलकाता श्रेणी) विध्वंसक के एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत करता है। अधिकारी ने कहा कि सूरत जहाज को ब्लॉक निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है जिसमें दो अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर ढांचों का निर्माण शामिल है और इसे एमडीएल में एक साथ जोड़ा गया है। युद्धपोत उदयगिरी (फ्रिगेट), जिसका नाम आंध्र प्रदेश में पर्वत श्रृंखलाओं के नाम पर रखा गया है, प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट्स के तहत तीसरा जहाज है। यह उन्नत हथियारों, सेंसर और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है।

Published / 2022-05-16 17:41:11
असम : बाढ़ के पानी में अटकी सिलचर-गुवाहाटी एक्सप्रेस, IAF ने 119 यात्रियों को बचाया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारी बारिश की वजह से इस वक्त असम बाढ़ की चपेट में है। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर हुए भूस्खलन ने राज्य में भयंकर तबाही मचा दी है, लैंडस्लाइड के कारण कई स्थानों पर सड़क और रेल का संपर्क टूट गया है, जिसकी वजह से कल सिलचर-गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन कछार इलाके में अटक गई, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आई लेकिन भारतीय वायुसेना के जवानों ने अपनी सूझबूझ और दिलेरी से 119 यात्रियों की जान बचा ली। दरअसल, रविवार को सिलचर-गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन कछार इलाके में फंस गई थी। रेल की पटरी उखड़ जाने से ट्रेन एक प्लेस पर अटक गई थी। ऐसे में जिला प्रशासन को जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली उसने इंडियन एयर फोर्स की मदद ली और फिर तुरंत मौके पर पहुंचकर सेना के जवानों ने सभी यात्रियों को एयरलिफ्ट कराकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। आपको बता दें कि असम में बाढ़ के चलते हालात काफी बिगड़े हुए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा है कि न्यू कुंजंग, फियांगपुई, मौलहोई, नामजुरंग, दक्षिण बगेतार, महादेव टिल्ला, कालीबाड़ी, उत्तरी बगेतार, सिय्योन और लोदी पंगमौल गांवों से भूस्खलन की सूचना मिली है, जहां करीब 80 घर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं तो वहीं असम के छह जिलों में 25,000 लोग प्रभावित हुए हैं । यही नहीं शनिवार को दीमा हसाओ जिले लैंडस्लाइड के कारण एक महिला सहित तीन लोगों की मौत भी हो गई है।

Published / 2022-05-16 17:21:20
बुद्ध पूर्णिमा : भगवान बुद्ध की जन्मभूमि लुंबिनी पहुंच पीएम मोदी ने की मायादेवी मंदिर में की पूजा-अर्चना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की जन्मभूमि लुंबिनी पहुंचे जहां नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी लुंबिनी में बनाए गए विशेष हैलीपेड पर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से पहुंचे। हेलीपैड पर नेपाली प्रधानमंत्री श्री देऊबा एवं उनकी पत्नी मौजूद थीं। वैशाख बुद्ध पूर्णिमा पर पीली पोशाक पहने पीएम मोदी हेलीपैड से नेपाली प्रधानमंत्री के साथ सीधे मायादेवी के मंदिर में दर्शन पूजन के लिए रवाना हो गए। यह मंदिर भगवान बुद्ध का जन्मस्थान है। प्रधानमंत्री वहां भगवान बुद्ध की 2566वीं जयंती पर आयोजित एक विशेष पूजा में भाग लेंगे। पीएम मोदी अपने विशेष विमान से भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण स्थल कुशीनगर के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। एयरपोर्ट से वह भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल स्थित लुंबनी के लिये भारतीय वायुसेना हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना हुए। पीएम मोदी के विमान के लुंबिनी के समीप भैरवा में चीन द्वारा निर्मित अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर नहीं उतरने और उनके हैलीकॉप्टर से सीधे लुम्बिनी जाने को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं थीं लेकिन भारत सरकार ने इसे सुरक्षा संबंधी मामला बताकर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

Published / 2022-05-16 12:17:59
गुजरात ; आसमान से गिर रहीं रहस्यमयी गेंदें देख वैज्ञानिक भी हैरान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के कई गांवों में दावा किया जा रहा है कि आसमान से रहस्यमयी गेंद गिरी है। अब तक पांच जिलों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें गेंद या गेंद जैसे आकार वाला मलबा गिरने की बात कही गई है। अंतरिक्ष से गिरी इन गेंदों को देखकर हर कोई हैरान है। अब भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक इन गेंदों की जांच करेंगे। जानकारी के मुताबिक, सबसे पहला मामला 12 मई को सामने आया था। आनंद के भालेज, खंभोलज और रामपुरा गांव से खबर आई कि अंतरिक्ष से मलबा गिरा है। यह मलबा गेंद जैसे आकार का था। इसके बाद 14 मई को खेड़ा जिले के चकलासी गांव से भी धातु की गेंदों की तरह दिखने वाला मलबा गिरने की बात सामने आई। फिर वडोदरा से भी ऐसी ही खबर सामने आई। पुलिस ने बताया कि किसी भी जगह से इस तरह के मलबे से किसी के हलातत होने की खबर नहीं मिली है। फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय की टीम करेगी दौरा : वडोदरा ग्रामीण के एसपी रोहन आनंद ने बताया कि आगे की जांच के लिए सभी गेंदों को फोरेसिंग विज्ञान निदेशालय को भेजा जाएगा, जिससे इसकी सच्चाई का पता चल सके। वहीं एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी गेंदें उच्च घनत्व वाली धातु से बनी हुई लगती हैं, जिनका उपयोग रॉकेट छोड़ने के लिए किया जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गेंदे काले रंग की धातु की हैं, जिनका वजन पांच किलोग्राम है। चीन के प्रक्षेपण वाहन का हो सकता है मलबा : हार्वर्ड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के खगोलशास्त्री जोनाथन मैकडॉवेल ने ट्वीट कर बताया है कि यह चीन के प्रक्षेपण वाहन चांग झेंग 3 बी सीरियल Y86 का मलबा हो सकता है।

Published / 2022-05-16 05:32:36
घरेलू कोयले की उपलब्धता में कई मुश्किलें, 800 मिलियन टन हो रहा उत्पादन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोल मंत्रालय ने कहा है कि देश घरेलू कोयले की उपलब्धता में कई मुश्किलों का सामना कर रहा है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि कोयला ब्लॉक धारकों कैप्टिव और व्यावसायिक दोनों को कोयले की कमी को कम करने में एक प्रमुख भूमिका निभानी है। ऊर्जा क्षेत्र के कोल लिंकेज के लिए आंतरिक मंत्रालय पैनल के चेयरमैन और अतिरिक्त सचिव ने कहा कि घरेलू कोयला उत्पादन इस समय लगभग 800 मिलियन टन है। कोयले की उपलब्धता में बाधाओं को देखते हुए देश में बाकी मांग को अन्य देशों से आयात के माध्यम से पूरा किया जाना है। कोयले के कम भंडारण के लिए कई कारक जिम्मेदार : कोयला सचिव एके जैन ने बिजली संयंत्रों में कम कोयले के भंडार के लिए कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया था। इसमें अर्थव्यवस्था में उछाल के कारण बिजली की मांग में वृद्धि, कोरोना महामारी, गर्मी का जल्दी आना, गैस की कीमत में वृद्धि और आयातित कोयला और कोस्टल थर्मल पावर संयंत्रों द्वारा बिजली उत्पादन में तेज गिरावट है। पहले से कई उपाय चल रहे हैं : उन्होंने कहा कि देश में बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए पहले से ही कई उपाय चल रहे हैं। देश में गैस आधारित बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिसने संकट को और बढ़ा दिया है। आयातित कोयले की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण कोस्टल थर्मल पावर प्लांट अब अपनी क्षमता का लगभग आधा उत्पादन कर रहे हैं। इससे बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर पैदा हो गया है। दक्षिण और पश्चिमी के राज्य आयातित कोयले पर निर्भर : जैन ने कहा कि दक्षिण और पश्चिम के राज्य आयातित कोयले पर निर्भर हैं। जब इन राज्यों में कोयला संयंत्रों को वैगन या रेक के माध्यम से कोयला भेजा जाता है तो रेक का समय 10 दिनों से अधिक हो जाता है, जिससे दूसरे संयंत्रों के लिए रेक का संकट खड़ा हो जाता है।

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