एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एक बार फिर से अपने बयानों के कारण चर्चा में हैं। नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने वहां मौजूद उद्यमियों को कई सीख दी। गडकरी ने अपने संबोधन में रिचर्ड निक्सन का हवाला देते हुए कहा कि एक व्यक्ति का अंत तब नहीं होता जब वह हार जाता है, लेकिन जब वह छोड़ देता है तो वह समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी व्यवसाय, सामाजिक कार्य या राजनीति में है, उसके लिए मानवीय संबंध सबसे बड़ी ताकत है। किसी का इस्तेमाल कर फेंकना नहीं चाहिए : नितिन गडकरी- हाल ही में खबरों में रहे भाजपा नेता ने कहा कि किसी को कभी भी इस्तेमाल कर फेंकना नहीं चाहिए। अच्छे दिन हों या बुरे दिन, एक बार किसी का हाथ थाम लें तो उसे नहीं छोड़ें। सिर्फ उगते सूरज की पूजा न करें डूबते सूरज की भी पूजा होनी चाहिए। जब उन्हें उनकी पार्टी के संसदीय बोर्ड से हटा दिया गया था। मैं कुएं में कूदकर मर जाऊंगा, लेकिन कांग्रेस में शामिल नहीं होऊंगा : गडकरी ने याद करते हुए बताया कि जब वह एक छात्र नेता थे, तब कांग्रेस नेता श्रीकांत जिचकर ने उन्हें बेहतर भविष्य के लिए कांग्रेस में शामिल होने के लिए कहा था। तब मैंने श्रीकांत से कहा कि मैं कुएं में कूदकर मर जाऊंगा, लेकिन कांग्रेस में शामिल नहीं होऊंगा, क्योंकि मुझे कांग्रेस पार्टी की विचारधारा पसंद नहीं है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोरोना के मामले तेजी से कम हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी रविवार (28 अगस्त) के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटों में कोरोना के 9,436 नए मामले सामने आए हैं और 41 लोगों की मौत हो गई। वहीं देश में सक्रिय मरीजों की संख्या 86,591 हो गई है। महामारी की शुरुआत से अब तक 4,37,93,787 लोग स्वस्थ हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सक्रिय मामले कुल संक्रमण का 0.22 फीसदी है, जबकि रिकवरी दर 98.59 फीसदी है। जबकि दैनिक संक्रमण दर 4.15 फीसदी और साप्ताहिक संक्रमण दर 3.59 फीसदी दर्ज की गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नोएडा सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर आज दोपहर 2:30 बजे धराशायी हो जाएंगे। 32 मंजिला एपेक्स (100 मीटर) और 29 मंजिला सियान (97 मीटर) टावर में 3500 किलोग्राम विस्फोटक लगाकर गिराया जाएगा। 9 से 12 सेकेंड के अंदर ट्विन टावर जमींदोज हो जाएंगे। एहतियातन आसपास की सड़कों को दिनभर बंद रखा जाएगा। पूरे इलाके को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। नोएडा में सेक्टर 93ए के सुपरटेक ट्विन टावर्स को आज दोपहर 2:30 बजे ध्वस्त कर दिया जाएगा। राजेश एस, डीसीपी, सेंट्रल नोएडा ने बताया कि लगभग 560 पुलिस कर्मी, रिजर्व फोर्स के 100 लोग, 4 क्विक रिस्पांस टीम और एनडीआरएफ की टीम तैनात है। ट्रैफिक डायवर्जन प्वाइंट सक्रिय हैं। विस्फोट से ठीक पहले दोपहर करीब 2.15 बजे एक्सप्रेस-वे को बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्लास्ट के आधे घंटे बाद और धूल जमने के बाद इसे खोल दिया जाएगा। इंस्टेंट कमांड सेंटर में 7 सीसीटीवी कैमरे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अहमदाबाद के साबरमती तट पर खादी उत्सव को संबोधित कर अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे की शुरुआत की। खादी उत्सव भारत के स्वतंत्रता संग्राम में खादी के महत्व को दर्शाने के लिए केंद्र के आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित किया जा रहा एक अनूठा आयोजन है। कार्यक्रम में पहुंचे पीएम मोदी खुद भी थोड़े समय के लिए चरखे पर सूत कातते नजर आए। शनिवार शाम साबरमती तट पर आयोजित किये जा रहे इस उत्सव में गुजरात के विभिन्न जिलों की 7,500 महिला खादी कारीगरों ने एक ही समय पर चरखा चलाया. खादी उत्सव में चरखा चलाने को भावुक पल करार देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज मुझे बचपन की याद आ गई, मेरे घर में यह सारी चीजें रहती थीं। उन्होंने कहा, आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 7,500 बहनों- बेटियों ने एक साथ चरखे पर सूत कातकर नया इतिहास रच दिया है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी कुछ पल चरखे पर सूत कातने का मिला। पीएम मोदी ने आगे कहा, इतिहास साक्षी है कि खादी का एक धागा आजादी के आंदोलन की ताकत बन गया, उसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया। खादी का वही धागा विकसित भारत के प्रण को पूरा करने का आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का प्रेरणा-स्रोत बन सकता है। खादी उत्सव को लेकर महिला कारीगरों में काफी उत्साह दिखाई दिया। एक महिला कारीगर ने कहा, पीएम मोदी ने हमें यह काम दिया है। हम बहुत खुश हैं। हमें रोजी मिल रही है। उन्होंने हमें कमाने का जरिया दिया। उन्होंने कहा, हम मोदी जी से कहेंगे कि ऐसा उत्सव होते रहना चाहिए, ताकि लोगों को पता चले खादी क्या है, लोग इसे भूल न जाएं। डॉक्टर भी त्वचा की हिफाजत के लिए खादी पहनने की सलाह देते हैं। एक अन्य लाभार्थी ने कहा, खादी ऐसा कपड़ा है जिसे एक बार पहनने के बाद छोड़ने की इच्छा नहीं होती है। खादी पहले फैशन से बाहर हो गई थी, इस कार्यक्रम से इसे बढ़ावा मिलेगा। खादी उत्सव का कार्यक्रम महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर लाभान्वित करने के साथ-साथ लोगों के बीच खादी के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के अहमदाबाद में ‘खादी उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती नदी पर पैदल यात्रियों के लिए अटल पुल का उद्घाटन किया। अटल ब्रिज के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि अटल ब्रिज साबरमती नदी के दो किनारों को ही आपस में नहीं जोड़ रहा बल्कि ये डिजाइन और इनोवेशन में भी अभूतपूर्व है। इसकी डिजाइन में गुजरात के मशहूर पतंग महोत्सव का भी ध्यान रखा गया है। पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि खादी का एक-एक धागा, आजादी के आंदोलन की ताकत बन गया। उसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया। खादी का वही धागा, विकसित भारत के प्रण को पूरा करने का, आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का प्रेरणा-स्रोत बन सकता है। इस उत्सव में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने चरखा चला कर सूत भी काता। अहमदाबाद में पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी को गांधी जी ने देश के स्वाभिमान का प्रतीक बनाया था। लेकिन आजादी के बाद उसी खादी को हीन भावना से देखा गया। ऐसी सोच के कारण खादी से जुड़े खादी और ग्रामीण उद्योग बर्बाद हो गए। आजादी के 75 साल पूरे होने पर 7,500 बहनों-बेटियों ने चरखे पर सूत कातकर इतिहास रच दिया। चरखा चरखा मुझे मेरे बचपन के दिनों में ले गया। दो दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में खादी उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उनके साथ सीएम भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लुधियाना में ‘स्क्रैप’ आधारित इस्पात संयंत्र की स्थापना करने के लिए टाटा समूह को भूमि आवंटन पत्र शुक्रवार को सौंपा। मान ने कहा, औद्योगिक क्षेत्र के मामले में हम पंजाब को अग्रणी बनाना चाहते हैं और टाटा समूह द्वारा राज्य में यह पहला निवेश इसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक टाटा स्टील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मान से उनके कार्यालय में मुलाकात की। मान ने कहा कि यह राज्य के इतिहास में अहम दिन है क्योंकि इस दिन इस वैश्विक कंपनी ने राज्य में पहला निवेश किया है। नरेंद्रन ने कहा कि बाजार और स्क्रैप देने वाले वाहन केंद्र से नजदीकी के कारण कंपनी की इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के लिए पंजाब एक आदर्श जगह है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सही समय पर न होने से चालू खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 5.99 प्रतिशत घटकर 367.55 लाख हेक्टेयर रह गया है। कृषि मंत्रालय के शुक्रवार को जारी आंकड़ों में धान की बुवाई के रकबे में बड़ी गिरावट का जिक्र किया गया है। एक साल पहले की समान अवधि में 390.99 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई थी। धान खरीफ सत्र की मुख्य फसल है। इसकी बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून आने के साथ ही शुरू हो जाती है और अक्टूबर से इस फसल की कटाई शुरू हो जाती है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक झारखंड में धान के रकबे में 10.51 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में 4.62 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 3.45 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 2.63 लाख हेक्टेयर, बिहार में 2.40 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 2.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की कम बुआई हुई है। इनके अलावा असम (0.49 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (0.46 लाख हेक्टेयर), हरियाणा (0.44 लाख हेक्टेयर), त्रिपुरा (0.22 लाख हेक्टेयर), नागालैंड (0.21 लाख हेक्टेयर), मेघालय (0.18 लाख हेक्टेयर) में भी धान का रकबा घटा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, देश में 24 अगस्त तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से नौ प्रतिशत अधिक हुई है। लेकिन देश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में इसी दौरान बारिश 19 प्रतिशत कम हुई है। इसकी वजह से धान के रकबे पर असर पड़ा है। धान के अलावा खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक कुल दलहन क्षेत्र भी 4.95 प्रतिशत गिरकर 127.71 लाख हेक्टेयर हो गया है। एक साल पहले की समान अवधि में दलहन फसलों का रकबा 134.37 लाख हेक्टेयर था। अरहर का रकबा 44.07 लाख हेक्टेयर है जो एक साल पहले की समान अवधि में 44.07 लाख हेक्टेयर था। इसी अवधि में उड़द का रकबा 36.15 लाख हेक्टेयर है जो एक साल पहले 37.91 लाख हेक्टेयर था। तिलहन फसलों की बुवाई के मामले में भी स्थिति पिछड़ती हुई नजर आ रही है। मौजूदा खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक तिलहनों का रकबा 186.48 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले की अवधि में 188.62 लाख हेक्टेयर था। हालांकि मोटे अनाज के मामले में बुवाई एक साल पहले के 169.39 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक 176.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। नकदी फसलों के मामले में कपास का रकबा 124.55 लाख हेक्टेयर रहा और गन्ने का रकबा भी हल्की बढ़त के साथ 55.59 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 26 अगस्त तक जूट का रकबा 6.94 लाख हेक्टेयर के साथ स्थिर रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय नौकरी बाजार पर मुद्रास्फीति का कोई असर नहीं पड़ा है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नियुक्ति गतिविधियों में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वैश्विक नौकरी ऑनलाइन मंच "इनडीड" की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति की आशंका के बावजूद ज्यादातर नौकरी चाहने वालों की आजीविका खर्चों पर महंगाई का अधिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 में से छह नौकरी चाहने वालों का कहना है कि वे मंहगाई से ज्यादा प्रभावित नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि साक्षात्कार में 89 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कहा कि मुद्रास्फीति का प्रभाव कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को काम पर रखने और भुगतान करने के तरीके को नहीं बदलेगा। इनडीड का पहली तिमाही के लिए नियुक्ति सूचकांक अप्रैल-जून, 2022 के दौरान 1,229 नियोक्ताओं और 1,508 कर्मचारियों के सर्वेक्षण के आधारित है। अप्रैल-जून में नियोक्ताओं की नियुक्ति गतिविधियों में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पिछली तिमाही में नियुक्ति गतिविधियां 20 प्रतिशत बढ़ी थीं।
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