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Published / 2022-09-21 17:24:56
ब्रिटेन में हिंदुओं पर हमले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए विहिप ने पीएम लिज ट्रस को लिखी चिट्ठी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद ने बर्मिंघम और लंदन के लेस्टर में हिंदुओं और हिंदू पूजा स्थलों पर हुए हमलों पर गहरी चिंता जताई है। विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लिज ट्रस को पत्र लिख कर कहा है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बड़ी संख्या में हिंदुओं, उनके पूजा स्थलों, उनके सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया है। उपद्रवियों का यह हिंसक, घृणित और चरमपंथी कृत्य पूरी तरह से एकतरफा है। आलोक कुमार ने पत्र में लिखा है कि उपद्रवी झूठे आरोप लगा रहे हैं कि हिंदुओं ने पहले उन्हें नुकसान पहुंचाया। यदि ऐसा होता तो, अस्पतालों में भर्ती होने वाले सारे लोग हिंदू नहीं होते। मुसलमानों के घरों, संपत्तियों या धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचा होता। उन्होंने लिखा है कि हिंदुओं पर सीधा हमला किया गया है। लेस्टर में कई हिंदू पूजा स्थलों का अपमान कर उन्हें अपवित्र किया गया है। बर्मिंघम के स्मेथविक में भी एक प्रमुख हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के पास हिंसक विरोध प्रदर्शन किया गया है। विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष ने लिखा है कि हिंदुओं को उनकी विरासत, परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों को हटाने के लिए आतंकित किया जा रहा है और लेस्टर में कुछ हिंदुओं को ऐसा करने के लिए विवश भी होना पड़ा है। हिंदुओं के कई घरों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। कई हिंदू परिवारों ने कई दिनों से अपने बच्चे स्कूल नहीं भेजे हैं। आलोक कुमार के अनुसार हिंदू, स्वभाव से शांतिपूर्ण और कानून का पालन करने वाले लोग हैं। ब्रिटेन में हिंदुओं की आबादी 1.5 प्रतिशत है। हिंदुओं ने वहां आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बहुत बड़ी संख्या में ब्रिटेन के हिंदू स्वरोजगार करते हैं और दूसरों को रोजगार प्रदान करते हैं। हिंदू समुदाय के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिवंगत प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने ब्रिटेन में हिंदुओं के योगदान को यह कहते हुए स्वीकारा था, आपने हमें इस देश में परिवार के बारे में बहुत कुछ सिखाया है और हमें इसे लगातार ध्यान में रखना चाहिए। आप यूके के लिए बड़ी संपत्ति हैं। उन्होंने दावा किया है कि दुर्भाग्य से, स्थानीय पुलिस और प्रशासन ऐसी हिंसा को दबाने में ढिलाई बरत रहे हैं। लेस्टर में हिंदुओं को 4 सितंबर, 2022 से लगातार हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री लिज ट्रस से अनुरोध किया है कि हिंदुओं के जीवन, गरिमा और संपत्तियों की रक्षा के लिए तत्काल ठोस प्रयास किए जाएं। इस तरह के हिंसक और जघन्य घृणा-अपराधों में शामिल सभी लोगों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ऐसे कड़े कदमों के बिना ब्रिटेन की शांति और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को आगाह किया है कि ब्रिटेन सरकार को हाल के लेस्टर दंगों को पहली बार हुई घटना के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह हिंसा निरंतरता का हिस्सा है और घृणा, आक्रामकता और हिंसा की विचारधारा के कारण हुई है। यह हिंसा इस्लामिक कट्टरपंथ की नवीनतम कड़ी है। इस्लामिक कट्टरपंथ ने पिछले कई दशकों में ब्रिटेन और अन्य देशों को चोट पहुंचाई है। इससे पहले लंदन-मेट्रो बम विस्फोट, 2017 में लंदन ब्रिज हमला और 2019 में लंदन ब्रिज के पास छुरेबाजी की घातक आतंकी वारदात हो चुकी हैं। ये सभी हिंसक घटनाएं चरमपंथी और हिंसक विचारधारा से प्रेरित हैं। आलोक कुमार ने प्रधानमंत्री लिज ट्रस को सुझाव दिया है कि कट्टरपंथी विचारधाराओं के कारण होने वाली हिंसा और आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण का विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि विहिप ने अपनी चिंता से अवगत कराने के लिए भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त से मुलाकात का समय मांगा था, किंतु अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि इसलिए यह पत्र ईमेल द्वारा भेजा जा रहा है।

Published / 2022-09-21 17:21:39
नौकरी के साथ दूसरा काम कर रहे 300 कर्मचारियों को विप्रो ने निकाला

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी ने बुधवार को कहा कि कंपनी ने 300 कर्मचारियों को प्रतिद्वंदी संस्थान के साथ काम करते हुए पाया है और उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें कंपनी से निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि वह मूनलाइटिंग को लेकर अपनी टिप्पणियों पर कायम हैं और यह कंपनी के प्रति निष्ठा का पूरी तरह उल्लंघन है। जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के साथ ही कोई दूसरा काम भी करता है, तो उसे तकनीकी तौर पर मूनलाइटिंग कहा जाता है। प्रेमजी ने अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि वास्तविकता यह है कि आज ऐसे लोग हैं, जो विप्रो के साथ प्रतिद्वंदी कंपनी के लिए भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने वास्तव में पिछले कुछ महीनों में ऐसे 300 कर्मचारियों का पता लगाया है, जो सच में ऐसा कर रहे हैं। कंपनी के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी संस्थान के लिए काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अलग से कहा कि कंपनी की ओर निष्ठा के उल्लंघन को लेकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। प्रेमजी ने कहा कि मूनलाइटिंग की परिभाषा ही है कि गोपनीय तरीके से दूसरा काम करना। पारदर्शिता के तहत व्यक्ति वीकेंड में किसी परियोजना पर काम करने के बारे में साफ और खुली बातचीत कर सकते हैं। प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए गोपनीय तरीके से काम करने वाले कर्मचारियों के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी कोई गुंजाइश नहीं है कि कोई विप्रो के साथ उसके प्रतिस्पर्धी संस्थान के साथ भी काम करे। गौरतलब है कि विप्रो के चेयरमैन की मूनलाइटिंग पर हाल में टिप्पणी के बाद उद्योग में एक नई बहस शुरू हो गई है। यह सीधे और सरल रूप से धोखा : प्रेमजी- प्रेमजी ने इस मुद्दे पर ट्विटर पर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में मूनलाइटिंग करने वाले कर्मचारियों के बारे में बहुत सारी बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सीधे और सरल रूप से धोखा है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इन्फोसिस ने कंपनी में नौकरी के साथ दूसरे काम करने वाले कर्मचारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतवानी दी है। इन्फोसिस ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा है कि दो जगहों पर काम करने या मूनलाइटिंग की इजाजत नहीं है। कंपनी ने कहा कि अनुबंध के किसी भी उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और नौकरी से निकाला भी जा सकता है। वहीं, प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम ने भी मूनलाइटिंग को अनैतिक कहा है। आईबीएम के प्रबंध निदेशक (भारत और दक्षिण एशिया) संदीप पटेल ने पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम में कहा कि कर्मचारी अपने बाकी समय में जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन मूनलाइटिंग करना नैतिक रूप से सही नहीं है।

Published / 2022-09-21 06:07:36
देश में कोरोना : 24 घंटे में मिले 5,000 से भी कम संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 4,510 नए मामले आने से देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,45,47,599 हो गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 47,379 से घटकर 46,216 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार सुबह आठ बजे अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 से 33 और लोगों के दम तोड़ने से देश में मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 5,28,403 हो गई है, जिसमें केरल में संक्रमण से मौत की पुष्टि के बाद दर्ज 19 मामले भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत में उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल मामलों का 0.10 प्रतिशत है, जबकि संक्रमण से ठीक होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.71 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 1,163 की कमी आई है। गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गये थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गये थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के मामले चार करोड़ के पार हो गये थे।

Published / 2022-09-21 05:24:03
दुखद : नहीं रहे काॅमेडियन राजू श्रीवास्तव, 58 की उम्र में ली अंतिम सांस

एबीएन डेस्क। काॅमेडियन राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं रहे। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव बीते करीब डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। एक महीने से अधिक समय पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए लोकप्रिय हास्य-अभिनेता-अभिनेता राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं रहे। श्रीवास्तव को 10 अगस्त को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती करवाया गया था और उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी। 40 दिन हो गए हैं, मगर चिकित्सकों का कहना था कि राजू ठीक होने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमें आप सभी की प्रार्थनाओं की जरूरत है। श्रीवास्तव, 1980 के दशक के अंत से मनोरंजन जगत में सक्रिय रहे हैं। उन्हें 2005 में स्टैंड-अप कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज के पहले सीजन में भाग लेने के बाद काफी लोकप्रियता मिली थी। उन्होंने मैंने प्यार किया, बाजीगर, बॉम्बे टू गोवा (रीमेक) और आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष भी हैं।

Published / 2022-09-21 04:48:24
कांग्रेस में खींचतान... पार्टी अध्यक्ष के लिए राहुल गांधी को मनायेंगे सचिन पायलट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी में इस वक्त उथल पुथल मचा हुआ है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं। इसी दौरान पार्टी मंल अध्यक्ष पद के लिए खींचतान शुरू हो गई है। दरअसल, पार्टी के कई नेता राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष रूप में देखना चाहते हैं। समस्या ये आ रही है कि राहुल गांधी इसके लिए तैयार नहीं है। वो बार-बार अध्यक्ष पद के लिए मना कर रहे हैं। इसी बीच राहुल को मनाने की जिम्मेदारी सचिन पायलट को दी गई है। पायलट को यात्रा में शामिल होने के लिए भेजा गया है। सचिन पायलट ने कोच्चि से यात्रा को जॉइन कर लिया है। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक की थी। राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक में कहा था कि यदि वह पार्टी अध्यक्ष के पद के लिए नामांकन भरेंगे तो विधायकों को दिल्ली पहुंचने का संदेश आयेगा। विधायक दल की बैठक के बाद राजस्थान के एक कैबिनेट मंत्री ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत पहले कोच्चि जायेंगे और राहुल गांधी से पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का आग्रह करेंगे। उनके अनुसार बैठक में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि यदि उन्हें अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने को कहा जाता है तो वह विधायकों को सूचित करेंगे। मंत्री ने बताया कि इसके साथ ही गहलोत ने विधायकों को विधानसभा सत्र के बारे में निर्देश दिये। विधायकों को दिया जायेगा दिल्ली पहुंचने का आदेश : खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरेंगे तो विधायकों को नयी दिल्ली पहुंचने के लिये संदेश आयेगा। उन्होंने कहा कि बैठक में विधानसभा के मौजूदा सत्र व बजट की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मुख्यमंत्री गहलोत बुधवार को दिल्ली जा रहे हैं। इस तरह की अटकलें हैं कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। हालांकि बैठक में इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया। दिल्ली में हैं अशोक गहलोत : खाचरियावास ने संवाददाताओं से कहा, उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) इस संबंध में निर्देश दिये कि विधानसभा में कैसे क्या करना है. मुख्यमंत्री जी दिल्ली जायेंगे और तीन दिन बाद वापस आयेंगे… तो उन्होंने विधानसभा के बारे में पूरे निर्देश दिये। गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरे जाने की अटकलों पर खाचरियावास ने कहा, मुख्यमंत्री जी खुद वरिष्ठ नेता हैं, वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन भरेंगे, नहीं भरेंगे, क्या होगा, ये सब बात गहलोत जी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी व कांग्रेस आलाकमान आपस में बैठकर तय करेगा।

Published / 2022-09-21 03:42:49
राहत... आरबीआई ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को पीसीए फ्रेमवर्क के दायरे से हटाया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एलान किया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क (पीसीएएफ) की की निगरानी सूची से हटा दिया दिया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया देश का इकलौता सरकारी बैंक है, जो पिछले 5 साल से पीसीए के दायरे में था। सेंट्रल बैंक को साल 2017 में पीसीए के दायरे में लाया गया था। बैंक ने रिजर्व बैंक को लिखित में भरोसा दिलाया कि वह सभी नियमों का पालन करेगा। वह मिनिमम रेगुलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लेवरेज रेशियों को दायरे में रखेगा। सेंट्रल बैंक इंडिया पीसीए के दायरे में लाए गए सभी बैंकों में आखिरी बचा हुआ था। बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) काफी बढ़े हुए थे, जबकि रिटर्न ऑन एसेट्स बेहद कम थे। सेंट्रल बैंक को साल 2017 में पीसीए के दायरे में लाया गया था। बैंक ने रिजर्व बैंक को लिखित में भरोसा दिलाया कि वह सभी नियमों का पालन करेगा। वह मिनिमम रेगुलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लेवरेज रेशियों को दायरे में रखेगा। सेंट्रल बैंक इंडिया पीसीए के दायरे में लाए गए सभी बैंकों में आखिरी बचा हुआ था। बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) काफी बढ़े हुए थे, जबकि रिटर्न ऑन एसेट्स बेहद कम थे।

Published / 2022-09-20 17:29:37
कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे राहुल गांधी!

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी का फिर से अध्यक्ष बनाए जाने की मांग जोर-शोर से उठ रही है। इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। न्यूज एजेंसी ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से इस खबर की पुष्टि की है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा कि सांसद राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि वह भारत जोड़ो यात्रा के बीच से दिल्ली नहीं लौटेंगे। राहुल गांधी की यात्रा मौजूदा वक्त में केरल में है और 29 सितंबर को कर्नाटक में प्रवेश करेगी। नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। ऐसे में उन खबरों पर विराम लग गया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राहुल गांधी ही अगले पार्टी के अध्यक्ष होंगे। इससे पहले झारखंड कांग्रेस ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान समेत कई राज्यों की कांग्रेस इकाइ ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने को लेकर प्रस्ताव पहले ही पास कर दिया था। राहुल गांधी को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर अब विराम लग चुका है। ऐसे में अगर अन्य कांग्रेसी नेताओं की बात करे तो शशि थरूर और अशोग गहलोत सहित कई अन्य नेताओं के चुनाव लड़ने की संभावना है। सोमवार को वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी चुनावी मैदान में उतरने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

Published / 2022-09-20 17:22:39
लक्ष्मण रेखा लांघते-लांघते शशि कैसे बने 137 साल पुरानी पार्टी का सर्वश्रेष्ठ चेहरा...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 137 साल पुराने राजनीतिक दल के लिए पढ़े-लिखे शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए बेजोड़ लेकिन बेहद दिलचस्प विकल्प नजर आयेंगे, खासकर ऐसे वक्त, जब पार्टी अस्तित्व संकट के इस मोड़ पर खड़ी है। तिरुवनंतपुरम से तीन बार लोकसभा सदस्य रहे थरूर ने कांग्रेस की विचारधारा के सबसे मुखर नेताओं में से एक के तौर पर अपनी धाक जमाई है। सक्रिय राजनीति में बमुश्किल 13 सालों की अपेक्षाकृत कम अवधि में उन्होंने निश्चित उद्देश्य के साथ अपनी अलग पहचान और कांग्रेस में अपने लिए अलग जगह बनाई, और फिर भी वे गांधी परिवार से अच्छे रिश्ते कायम रखने में कामयाब रहे। अपने पूर्ववर्ती जी-23 समूह के अधिक बागी सहयोगियों के विपरीत, जिसने अगस्त 2020 में मरणासन्न कांग्रेस पार्टी संगठनात्मक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग करते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया, थरूर यह धारणा बनाने में सफल रहे हैं कि उनका सैद्धांतिक रुख वास्तविक दृढ़ विश्वास से पैदा हुआ था न कि पार्टी में किसी भी तरह की उपेक्षा की भावना से। उन्होंने बिना किसी डर के अपने मन की बात कह दी है, लेकिन जब भी आलाकमान ने इन्हें पार्टी की लक्ष्मण रेखा को संभावित रूप से तोड़ने के करीब देखा, तो उन्होंने अपने कदम पीछे ले लिये। उदाहरण के तौर पर, जब उन्हें धर्मनिरपेक्षता पर सीपीएम के सेमिनार में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया, जहां उन्हें आमंत्रित किया गया था, तो उन्होंने चुपचाप पार्टी की इच्छा को स्वीकार कर लिया। इसी तरह, जब उन्होंने एआईसीसी प्रतिनिधियों की मतदाता सूची में कथित अस्पष्टता के बारे में अपनी आपत्ति जताई तो लेखक-राजनेता ने तुरंत स्वीकार किया कि वे कांग्रेस के चुनाव प्रबंधकों से संतुष्ट हैं। यकीनन समकालीन राजनीति के बेहतरीन वक्ता शशि थरूर आम तौर पर अशिक्षित कांग्रेसी नेताओं से अलग हैं। वे महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन अपनी सीमाओं को जानते हैं। अधिकांश कांग्रेस नेताओं के विपरीत संगठन में समर्थन आधार के संदर्भ में थरूर पार्टी में अपना कद बढ़ाने की तलाश में नहीं रहते हैं। वे एक लोकसभा सदस्य के रूप में काफी सहज हैं। गैर-टकराववादी नेता : प्लोमेट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में अपने शुरूआती दिनों में सार्थक संवादों के माध्यम से समझाने की कला सीखी। थरूर टकराव की राजनीति से घृणा करते हैं। हिंदू धर्म के इतिहास और समकालीन राजनीति पर उनकी किताबें भी संवाद के माध्यम से संघर्ष का समाधान करने के मध्य मार्ग का दृढ़ता से समर्थन करती हैं। लेखक के रूप में वे जहां कहीं भी प्रथम व्यक्ति के रूप में पुस्तकों में हस्तक्षेप करते हैं, गैर-टकराव के लिए उनका मजबूत पक्ष कायम रहता है। अध्यक्ष पद चुनाव के लिए उनकी तैयारी में भी यह विशेषता दिखाई देती है। डॉ। थरूर ने अगस्त में मैदान में उतरने की इच्छा व्यक्त की, जब यह स्पष्ट हो गया कि राहुल गांधी ने उन्हें पद स्वीकार करने के लिए मनाने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। कहीं ऐसा न हो कि उनके निर्णय को गांधी परिवार के विरुद्ध विद्रोह समझ लिया जाए, थरूर ने अपनी चुनावी महत्वाकांक्षा के लिए सोनिया गांधी से उचित स्वीकृति मांगी। यह पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष था कि कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष चुनाव दूरी बनाए रखेंगे। फिर भी, दोनों नेताओं के बीच बैठक ने सौहार्दपूर्ण प्रदर्शन के लिए जमीन तैयार की है। 20 साल में कांग्रेस की कमान संभालने वाले पहले गैर-गांधी? कांग्रेस के लिए 20 से अधिक सालों में पहली बार गैर-गांधी अध्यक्ष होना तय है। गांधी परिवार के वफादार अशोक गहलोत के पार्टी अध्यक्ष के लिए शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ने की संभावना है, जो पार्टी में उन लोगों में शामिल हैं जो बड़े आंतरिक सुधार चाहते हैं। नरसिम्हा राव सरकार के सत्ता से बाहर होने के लगभग दो साल बाद, अंतिम गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी रहे, जिनसे सोनिया गांधी ने मार्च 1998 में पदभार संभाला। कांग्रेस की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सोनिया गांधी ने घोषणा की कि वह पार्टी में शामिल होंगी। भले ही थरूर 23 असंतुष्ट कांग्रेसी नेताओं के समूह जी-23 का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वे पार्टी के भीतर सुधार लाने के लिए मुखर रहे हैं। मलयालम दैनिक मातृभूमि के लिए एक लेख में थरूर ने लिखा है कि नये अध्यक्ष का चुनाव उस नये जीवन की शुरूआत होगी जिसकी पार्टी को सख्त जरूरत है। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया तीन दिन में शुरू हो जायेगी। यह चुनाव पिछले वर्ष के दौरान कई प्रमुख नेताओं के पार्टी से बाहर निकलने की पृष्ठभूमि में होगा। आखिरी बार पार्टी छोड़कर जाने वाले नेता वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद थे, जिनके बाहर निकलने का अनुकरण पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के ज्यादातर नेताओं ने किया।

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