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Published / 2022-11-05 22:42:47
गुजरात हादसे की सच्चाई बाहर लाना जरूरी : गहलोत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को एक बार दोबारा गुजरात के मोरबी पुल हादसे की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा किए बिना इस काम में हुए सरकारी भ्रष्टाचार की सच्चाई बाहर आना संभव नहीं हैं। सीएम ने ट्वीट कर अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित एक समाचार का हवाला देते हुए लिखा कि मोरबी पुल हादसे की शुरुआती जांच से पता चला है कि 2 करोड़ रुपये में से सिर्फ 12 लाख रुपये यानी सिर्फ 6 प्रतिशत राशि ही पुल के रख रखाव पर खर्च हुई। यह गुजरात की बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसी भ्रष्ट सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। गहलोत ने लिखा कि-कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं पूरी पार्टी की मांग है कि जब तक हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस घटना की न्यायिक जांच नहीं होगी तो इतने बड़े स्तर के सरकारी भ्रष्टाचार की सच्चाई बाहर आना संभव नहीं है। श्याम सरन नेगी के निधन पर संवेदना प्रकट : मुख्यमंत्री गहलोत ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के एक अन्य ट्वीट को री-ट्वीट कर आजाद भारत के पहले मतदाता श्याम सरन नेगी के निधन पर संवेदना प्रकट की। उन्होंने लिखा कि-आजाद भारत के पहले मतदाता श्याम सरन नेगी का निधन एक दु:खद समाचार है। उन्होंने देश को स्वतंत्र आसमान में पहली सांस लेते देखा था और अपनी आखिरी सांस तक लोकतंत्र की डोर को थामे रखा। नेगी हमें सदा देश के प्रति हमारे दायित्व की याद दिलायेंगे।

Published / 2022-11-05 22:41:47
पाकिस्तान : सिख यात्रियों को ननकाना साहब ले जा रही विशेष ट्रेन पटरी से उतरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शनिवार को बड़ा हादसा होने से बचा। सिख तीर्थयात्रियों को ननकाना साहब ले जा रही विशेष ट्रेन के नौ डिब्बे पटरी से उतर गये। हादसे में किसी के हताहत न होने की खबर से प्रशासन ने राहत की सांस ली। पाकिस्तान सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं। पूरी दुनिया में 08 नवंबर को सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक साहब की जयंती मनाई जानी है। गुरुनानक साहब का जन्म मौजूदा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित जिस शहर में हुआ था, उसे अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। वहां स्थित गुरुद्वारा ननकाना साहिब में पूरी दुनिया से सिख तीर्थयात्री पहुंचते हैं। 08 नवंबर को ननकाना साहिब में गुरुनानक जयंती मनाने के लिए सिख श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो चुके हैं। इसी समारोह में शामिल होने के लिए सिख तीर्थयात्री एक विशेष ट्रेन से ननकाना साहब जा रहे थे। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इस विशेष ट्रेन के नौ डिब्बे पटरी से उतर गये। अभी तक हादसे में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। पाकिस्तान रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार यह विशेष ट्रेन कराची से ननकाना साहिब जा रही थी। इसी दौरान पंजाब प्रांत के शोरकोट और पीर महल रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन के नौ डिब्बे पटरी से उतर गए। उन्होंने कहा कि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। बचाव दल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया गया। हादसे के बाद यात्रियों को ननकाना साहिब रवाना करने के इंतजाम किये जा रहे हैं। अभी यह भी पता नहीं चला है कि पटरी से उतरी ट्रेन में भारतीय सिख तीर्थयात्री मौजूद थे या नहीं। पाकिस्तान सरकार के मंत्री ख्वाजा साद रफीक ने बताया कि घटना की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गयी है।

Published / 2022-11-05 18:56:16
हिंद महासागर में चीन का जासूसी जहाज देख इंडियन नेवी अलर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन की सैटेलाइट और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रेकिंग शिप युआन वांग 6 हिंद महासागर में बिना अनुमति के प्रवेश कर गई है। भारतीय नौसेना चीन की इस हरकत को लगातार ट्रैक कर रही है। भारतीय सेना ने बताया कि इस शिप का श्रीलंका के पास किसी भी बंदरगाह में प्रवेश करना निर्धारित नहीं है। इसके बावजूद 4 नवंबर को लोम्बोक स्ट्रेट्स के जरिए हिंदी महासागर में प्रवेश किया। जहां पर चीन का यह शिप है वह जगह पोर्ट ब्लेयर से करीब 3500 किलोमीटर दूरी पर है। जबकि ट्विटर फीड के आधार पर मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया कि शिप इस महीने एपीजे कलाम द्वीप के तट से निर्धारित बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण की निगरानी के लिए निकला था। राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकार अनावश्यक रूप से चिंतित नहीं हैं क्योंकि चीन के पास उपग्रह के माध्यम से भारतीय मिसाइल प्रक्षेपण की निगरानी करने की क्षमता है। साउथ ब्लॉक के अधिकारियों के अनुसार, स्ट्रेटेजिक सपोर्ट शिप वास्तव में 12 नवंबर और महीने के अंत में होने वाली चीनी सैटेलाइट के लॉन्च की निगरानी के लिए हिंद महासागर में था। अगस्त में श्रीलंका में हंबनटोटा के चीनी पट्टे वाले बंदरगाह पर डॉक किए गए अपनी अन्य साथी जहाज युआन वांग 5 के उलट, युआन वांग 6 किसी भी श्रीलंकाई बंदरगाह में प्रवेश करने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन लोम्बोक स्ट्रेट्स के दक्षिण में वह खुले समुद्री रास्ते में मौजूद है। मामला यह है कि चीनी का स्ट्रेटेजिक जहाज लगातार ही हिंद महासागर की मैपिंग कर रहा है। वह मलाक्का स्ट्रेट्स के अन्य रास्ते खोजने में लगा हुआ है। दरअसल चीनी जहाज केवल हिंद महासागर के रास्ते ही मैलाक्का रीजन पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा सुंदा, लोमबोक, ओमबाई और वेटर स्ट्रेट्स के लिए भी यही रास्ता है। इनमें से ज्यादातर इंडोनेशिया कंट्रोल करता है। बीजिंग न केवल भारत से दूर अफ्रीका के पूर्वी तट पर जिबूती में चीनी बेस तक पहुंचने के लिए हिंद महासागर में समुद्री मार्गों की खोज कर रहा है। बल्कि आर्कटिक सर्कल के माध्यम से हैम्बर्ग जैसे यूरोपीय बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए भी है, जहां चीनी कंपनी उडरउड ने 24 प्रतिशत इक्विटी से अधिक में खरीदा है।

Published / 2022-11-05 18:54:26
सेब के बंपर उत्पादन के बावजूद कश्मीर के किसान बेहाल, 30% गिरे दाम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कश्मीर में चालू सत्र के दौरान सेब का बंपर उत्पादन उत्पादकों को खुश करने में विफल रहा है और उनकी उपज में पिछले साल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारी नुकसान का सामना कर रहे सेब किसानों ने अब सरकार से समर्थन की मांग की है। कश्मीरी सेब सितंबर में तब सुर्खियों में आया था, जब एशिया के सबसे बड़े थोक बाजार आजादपुर मंडी समेत घाटी के बागानों से केंद्र शासित प्रदेश के बाहर के बाजारों तक इसके परिवहन में बार-बार व्यवधान आने पर हंगामा हुआ था। कश्मीर देश में कुल सेब की फसल का लगभग 75 प्रतिशत उत्पादन करता है और इसे अपनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानता है। यह क्षेत्र जम्मू और कश्मीर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 8.2 प्रतिशत का योगदान देता है। चैंबर आॅफ आजादपुर फल एवं सब्जी व्यापारी अध्यक्ष मेथा राम कृपलानी ने बताया, इस सत्र में कश्मीर से आने वाले सेब की दरें वर्ष 2021 की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है। सरकारी समर्थन के बिना नुकसान को दूर करना उनके लिए बहुत मुश्किल है। कृपलानी दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड के सदस्य और कश्मीर एप्पल मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कीमतों में कमी के कई कारण बताए। उन्होंने कहा, चालू सत्र में अच्छी गुणवत्ता वाली बंपर फसल हुई थी लेकिन पिछले साल की तुलना में पैकेजिंग और परिवहन शुल्क जैसे खर्च लगभग दोगुने हो गए हैं। दरें सीधे आपूर्ति और मांग से जुड़ी हुई हैं और आपूर्ति अधिक है, इसलिए उत्पाद की दर लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई है। कश्मीर की आधी से ज्यादा आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बागवानी उद्योग से जुड़ी हुई है। इसकी खेती 1.45 लाख हेक्टेयर भूमि में की जाती है। कश्मीर घाटी फल उत्पादकों और डीलर्स यूनियन के बडगाम जिला अध्यक्ष बाबा ने कहा, ह्यह्यसरकार को आगे आना होगा और हमें बचाना होगा, अन्यथा मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारी नुकसान से उबरना बहुत मुश्किल है।

Published / 2022-11-05 18:53:58
कर्नाटक : आटो-ट्रक की टक्कर में 11 लोग गंभीर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक के बीदर में चिट्टागुप्पा तालुक के एक गांव में शुक्रवार देर रात एक आॅटो रिक्शा और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर में सात महिलाओं की मौत हो गयी और 11 अन्य घायल हो गये। ये महिलाएं मजदूर थीं और काम के बाद आॅटो रिक्शा से घर लौट रही थीं। आॅटो रिक्शा की बरमालखेडा सरकारी स्कूल के समीप ट्रक से टक्कर हो गयी। पुलिस ने बताया कि घायल हुए 11 लोगों में दोनों वाहनों के चालक भी शामिल हैं। घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान पार्वती (40), प्रभावती (36), गुंडम्मा (60), यदम्मा (40), जगम्मा (34), ईश्वरम्मा (55) और रुक्मणि बाई (60) के तौर पर हुई है। पुलिस ने बताया कि हादसे में घायल हुए 11 लोगों में दोनों वाहन के चालक भी शामिल हैं। घायलों में से दो की हालत गंभीर है। मामला दर्ज कर लिया गया है।

Published / 2022-11-04 20:57:45
अगर गुजरात में भी दौड़ा भाजपा का विजय रथ, तो आगे भी दौड़ता ही रहेगा...

एबीएन सेंट्रल डेस्क (पवन)। गुजरात में दो चरणों में होने जा रहे चुनाव में एक खास बात यह है कि 3,24,422 मतदाता इस बार पहली बार मतदान करेंगे। नये वोटरों का रुझान सभी पार्टियों के लिए काफी मायने रखता है इसलिए देखना होगा कि राजनीतिक दल अपने अपने चुनावी घोषणापत्रों में किन वादों का ऐलान करते हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है जिसके साथ ही अब गुजरात में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गयी है। पिछले कुछ समय से गुजरात में जिस तरह तमाम घोषणाओं और राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का जो सिलसिला चल रहा था वह अब थम जायेगा। गुजरात में अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि क्या वहां लगातार 7वीं बार भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिलता है? साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या मुफ्त सौगातों के वादे पर ही जनता रीझती है? इस साल की शुरूआत में हुए पांच राज्यों के चुनावों में से चार में जीत हासिल करने के बाद यदि भाजपा गुजरात को भी जीतने में सफल रहती है तो 2023 के चुनावों में विपक्ष के लिए भाजपा के विजय रथ को रोकना मुश्किल हो जायेगा। गुजरात चूंकि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य भी है इसलिए यह दोनों नेता चुनाव जीतने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे लेकिन अंतत: परिणाम वही होगा जोकि जनता चाहती है। गुजरात में दो चरणों में होने जा रहे चुनाव में एक खास बात यह है कि 3,24,422 मतदाता इस बार पहली बार मतदान करेंगे। नये वोटरों का रुझान सभी पार्टियों के लिए काफी मायने रखता है इसलिए देखना होगा कि राजनीतिक दल अपने अपने चुनावी घोषणापत्रों में किन वादों का ऐलान करते हैं। भाजपा की ओर से यहां विकास को बड़ा मुद्दा बनाये जाने की संभावना है साथ ही वह अपनी हिंदुत्ववादी वाली छवि भी चुनाव प्रचार के दौरान और उभार सकती है। गुजरात राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो गुजरात में पिछले 27 सालों से भाजपा का राज है। भाजपा ने गुजरात में पिछले छह विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करके रिकॉर्ड बनाया है इसलिए इस बात पर सभी की निगाह है कि क्या सातवीं बार भी जनता भाजपा को मौका देगी। गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा ने राज्य में विकास की बदौलत अपनी जड़ें बहुत मजबूत कीं लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद कोई अन्य मुख्यमंत्री यहां खुद ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सका। यही कारण रहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात में भाजपा ने पहले आनंदीबेन पटेल, फिर विजय रूपाणी और उसके बाद भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया। देखना होगा कि क्या भाजपा भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ती है या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही पूरा चुनाव लड़ा जाता है। गुजरात के चुनावी मुकाबले की बात करें तो वैसे तो यहां चुनावी जंग भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होती रही है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी यहां तीसरी शक्ति के रूप में उभरी है जिसके चलते चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। गुजरात में चुनावों के ऐलान के साथ ही आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर ऐलान भी कर दिया है कि इस बार हम ही चुनाव जीतेंगे। दिल्ली के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज करने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब तक दर्जनों बार वहां का दौरा कर चुके हैं। केजरीवाल के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी गुजरात में कई रोड शो कर चुके हैं। कांग्रेस की ओर से अब तक कोई बड़ा नेता यहां प्रचार के लिए नहीं पहुँचा है। पार्टी अध्यक्ष चुनाव के समय जरूर मल्लिकार्जुन खडगे यहां के संक्षिप्त दौरे पर आये थे। राहुल गांधी फिलहाल भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं तो दूसरी ओर प्रियंका गांधी हिमाचल प्रदेश चुनावों में व्यस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पिछले कुछ समय से गुजरात और हिमाचल प्रदेश का दौरा करते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने गुजरात में सैंकड़ों करोड़ रुपयों की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है हालांकि मोरबी में पुल गिरने की घटना में बड़ी संख्या में लोगों की मौत ने भाजपा के प्रति नाराजगी भी पैदा की है। लेकिन भाजपा को उम्मीद है कि चुनावों के दौरान उसे अपने कामों के आधार पर वोट मिलेगा। तारीखों के ऐलान के साथ ही भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा भारी बहुमत से गुजरात में पुन: डबल इंजन की सरकार बनाएगी और आगामी 5 वर्षों के लिए जन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कटिबद्ध भाव से काम करेगी। बता दें कि 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 18 फरवरी को समाप्त हो रहा है। गुजरात में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 99 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो उस चुनाव में भाजपा को 49.05 प्रतिशत मत मिले थे जबकि कांग्रेस को 42.97 प्रतिशत मत मिले थे। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इस वजह से विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या बढ़कर 111 हो गई जबकि कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 62 पर पहुंच गयी।

Published / 2022-11-04 17:54:46
गुजरात चुनाव : इसुदान गढ़वी को ही सीएम बनायेगी आप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आम आदमी पार्टी (आप) ने इसुदान गढ़वी को गुजरात में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुद इसका एलान किया। इसुदान गुजरात के गढ़वी समाज से आते हैं। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया को सीएम का फेस बनाया जा सकता है। आप ने पंजाब की तरह यहां भी सीएम पद के उम्मीदवार के लिए सर्वे कराया था। सर्वे में गढ़वी को 73 फीसदी लोगों का वोट मिला। इसुदान के नाम का एलान होते ही हर कोई उनके बारे में जानने की कोशिश करने लगा है। सवाल यह है कि आखिर इसुदान गढ़वी को ही क्यों आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है? गढ़वी की उम्मीदवारी से आप को क्या फायदा हो सकता है? भाजपा और कांग्रेस पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं... पहले इसुदान गढ़वी के बारे में जानें : इसुदान गढ़वी ने पत्रकारिता से राजनीति में कदम रखा है। गढ़वी का जन्म गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के पिपलिया में हुआ। उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई जाम खंभालिया में पूरी की। कॉमर्स से स्नातक करने के बाद 2005 में गढ़वी ने गुजरात विद्यापीठ से पत्रकारिता की पढ़ाई की। इसके बाद दूरदर्शन से जुड़ गए और वहां पर एक शो करने लगे। इसुदान ने पोरबंदर की एक स्थानीय चैनल में बतौर रिपोर्टर काम किया। 2015 में इसुदान अहमदाबाद आए और यहां वह एक गुजराती चैनल के एडिटर बन गए। उस वक्त इसुदान की उम्र महज 32 साल थी। इसुदान ने इस दौरान ‘महामंथन’ नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की। इसकी वह एंकरिंग करते थे। गुजराती भाषा में होने वाले इस कार्यक्रम ने इसुदान को काफी पहचान दिलाई। खासतौर पर किसानों के बीच इसुदान काफी लोकप्रिय हो गये। अपने इस कार्यक्रम में गढ़वी किसानों के मुद्दों को उठाते थे। सौराष्ट्र में इस कार्यक्रम को सबसे ज्यादा देखा जाता था। इसुदान खुद किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता खेराजभाई गढ़वी अभी भी खेती करते हैं। इसुदान ने पत्रकार रहते हुए वापी, पोरबंदर, जामनगर, अहमदाबाद और गांधीनगर में काम किया। पिछले साल जब आदमी पार्टी ने गुजरात में संगठन विस्तार की कवायद शुरू की तो इसुदान पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में आ गए। इसुदान गढ़वी ने जून 2021 की शुरुआत में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वे पत्रकारिता छोड़कर जनता के लिए काम करेंगे। जून में जब अरविंद केजरीवाल गुजरात पहुंचे तो इसुदान आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। गढ़वी को ही क्यों : इसे समझने के लिए हमने गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार वीरांग भट्ट से बात की। उन्होंने कहा, इसुदान ओबीसी वर्ग से आते हैं। गुजरात में करीब 48 प्रतिशत से ज्यादा ओबीसी वोटर हैं। इसुदान की जाति गढ़वी है। गुजरात के राजकोट, जामनगर, कच्छ, बनासकांठा, जूनागढ़ समेत कुछ अन्य जिलों में गढ़वी समाज की अच्छी संख्या है। वीरांग आगे कहते हैं, टीवी कार्यक्रम के जरिए गढ़वी ने किसानों के बीच अच्छी लोकप्रियता हासिल की है। वह किसानों के मुद्दों को लेकर आक्रामक रहे हैं। हाल ही में पशुपालकों ने सरकार के कुछ नियमों के खिलाफ हड़ताल की थी, इसकी पूरी रूपरेखा गढ़वी ने ही तैयार की थी। ऐसे में गढ़वी के जरिए आम आदमी पार्टी को किसानों का साथ मिल सकता है। वीरांग के अनुसार, इसुदान सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। मुखर होकर वह आम लोगों के मुद्दों को उठाते रहे हैं। ऐसे में सरकार विरोधियों के बीच भी उनकी अच्छी लोकप्रियता है। गढ़वी समाज का वोट परंपरागत तौर से कांग्रेस को मिलता है। गढ़वी को चेहरा बनाकर आप कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी। गोपाल क्यों नहीं : वीरांग के अनुसार, गोपाल इटालिया कुछ वक्त पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां पर किए आपत्तिजनक बयानों की वजह से चर्चा में आये थे। ऐसे में अगर इटालिया मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाते तो भाजपा इस मुद्दे पर आप के घोर सकती थी। 2017 में कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर के बयान का नुकसान उनकी पार्टी को उठाना पड़ा था। इस वजह से भी आप जोखिम नहीं लेने से बच गई। वहीं, गोपाल इटालिया पाटिदार नेता हैं। पाटिदार वोटर्स भाजपा के साथ माना जाता है। 2017 पाटीदार आंदोलन के बाद भी पाटिदार समाज का काफी वोट भाजपा मिला था। ऐसे में इटालिया को चेहरा बनाने का आप को शायद कम फायदा होता। गढ़वी समाज का इतिहास : गढ़वी समाज के लोग मुख्यरूप से खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े हुए हैं। जब राजशाही के दौर में इस समाज के लोग गायन में काफी सक्रिय थे। अभी भी गुजरात में गढ़वी समाज के काफी गायक हैं जो डायरो (कवि सम्मेलन) करते हैं। इसमें स्थानीय भाषा में प्रस्तुति दी जाती है। इसमें गायन के साथ जोक्स और हास्य के कार्यक्रम होते हैं। कीर्तिदान गढ़वी गुजरात के बड़े गायक हैं। वहीं, राजनीतिक तौर पर गढ़वी समाज की भागीदारी काफी कम रही है। बीजेपी से पूर्व में पुष्पदान गढ़वी और वीके गढ़वी मंत्री, विधायक और सांसद बने हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब गढ़वी समाज के किसी व्यक्ति को किसी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है।

Published / 2022-11-04 17:39:29
देश में कोरोना : 24 घंटे में मिले 1216 नये संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,216 नए मामले सामने आने से देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,46,58,365 हो गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 15,705 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, भारत में संक्रमण से 18 और मरीजों की मौत होने से मृतक संख्या बढ़कर 5,30,479 हो गई है। इन 18 मरीजों में वे 15 लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम संक्रमण से मौत के आंकड़ों का पुन:मिलान करते हुए केरल ने वैश्विक महामारी से जान गंवाने वाले मरीजों की सूची में जोड़े हैं। अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के उपचाराधीन मरीजों की संख्या 16,098 से घटकर 15,705 रह गई है, जो कुल मामलों का 0.04 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 393 की कमी दर्ज की गई है। वहीं, मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 98.78 प्रतिशत हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी तक कुल 4,41,12,181 मरीज संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोविड-19 से मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 219.69 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं। गौरतलब है कि भारत में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गये थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गये थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के कुल मामले चार करोड़ के पार हो गए थे। मंत्रालय के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण से मौत के जो तीन मामले सामने आए हैं, उनमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल के एक-एक मरीज शामिल हैं।

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