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Published / 2022-12-01 22:48:45
भारत में लड़किया की अपेक्षा लड़कों में ज्यादा कैंसर पीड़ित

  • लैंसेट रिपोर्ट का दावा : भारत में इलाज में भी लैंगिक भेदभाव, क्योंकि लड़कों की जांच ज्यादा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कैंसर जैसी घातक बीमारी की जांच में भी लैंगिक भेदभाव हो रहा है, यह दावा नई लैंसेट आॅन्कोलॉजी रिपोर्ट में किया गया है। इसके अनुसार लड़कों में कैंसर के ज्यादा मामले मिल रहे हैं क्योंकि उनकी जांच लड़कियों से ज्यादा हो रही है। अध्ययन में साल 2005 से 2019 तक 0 से 19 वर्ष उम्र के बच्चों में प्रमुख अस्पतालों व जनगणना आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) में मिले कैंसर के मामलों का विश्लेषण किया गया।
रिपोर्ट में दिल्ली एम्स व चेन्नई के कैंसर इंस्टीट्यूट के अध्ययनकर्ताओं ने कैंसर रोगियों के लैंगिक अनुपात व अन्य तथ्यों की गणना की। एम्स दिल्ली के मेडिकल आॅन्कोलॉजी विभाग के प्रो. समीर बख्शी ने बताया कि पीबीसीआर में दर्ज कैंसर के 11,000 मरीजों में लड़कों की संख्या अधिक मिली। अस्पतालों में इलाज ले रहे 22 हजार कैंसर रोगियों में भी लड़के ज्यादा थे।
यह दिखाता है कि कैंसर के लक्षण मिलने पर जांच के लिए लड़कियों को कम लाया जा रहा है। खासतौर से उत्तर भारत में, जहां समाज ज्यादा पितृसत्तात्मक है। रिपोर्ट के अनुसार हमें कैंसर की जांच व इलाज में लैंगिक भेदभाव हो रहा है, यह मानना होगा। इसे दूर करने के लिए लोगों को बताना होगा कि समय रहते कैंसर का पता चलने पर रोग का बेहतर इलाज होता है। इलाज का खर्च भी घटाना होगा। लड़कियों के इलाज के लिए विशेष योजनाएं लाई जा सकती हैं। उन्हें निशुल्क इलाज मिले, तो भेदभाव घटाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण इलाकों में कम जांच
 

  • उत्तर भारत में कैंसर का इलाज करा रही लड़कियों की संख्या दक्षिण भारत के मुकाबले कम।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों में शहरों के मुकाबले लैंगिक भेदभाव ज्यादा।
  • अस्पताल 100 किमी से ज्यादा दूर है, तब भी इलाज लेने वाली लड़कियों की संख्या घट जाती है।
  • इलाज प्राइवेट व महंगे संस्थानों से करवाना हो, तब भी लड़कियों की संख्या कम हो जाती है।

इलाज में खत्म होता है भेद
 

प्रो बख्शी के अनुसार कैंसर का पता चलने के बाद यह लैंगिक भेदभाव मिट जाता है। यह बताता है कि भेदभाव केवल सामाजिक वजहों से है, चिकित्सा संस्थानों या नीतिगत वजहों से नहीं।

Published / 2022-12-01 18:07:11
19 को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली करेगा किसान संघ

  • लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर होगा प्रदर्शन 
  • देश के कोने कोने से दिल्ली आयेंगे लाखों किसान

 

टीम एबीएन, रांची। देश में खाद्यान्न की सुरक्षा के साथ किसानों की सुरक्षा भी अति आवश्यक है। किसानों ने भरपूर उत्पादन कर देश की खाद्यान सुरक्षा सुनिश्चित की है। किंतु अभी तक किसान की हालत जस की तस है। उक्त विचार भारतीय किसान संघ के द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में रखते भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय किसान संघ का नारा रहा है कि देश के हम भंडार भरेंगे लेकिन कीमत पूरी लेंगे। 
आज देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन चुका है, हम विदेशों में खाद्यान्न निर्यात कर रहे हैं। लेकिन किसान जो फसल उगाता है, कड़ी मेहनत के बावजूद उसको अपनी उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य अभी तक नहीं मिल रहा है। इसलिए किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ 19 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली आयोजित कर रहा है। देशभर में भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता सभी प्रांतों में ग्राम संपर्क, धरना, सभा पदयात्रा जैसे कार्यक्रमों से जनजागरण को करते हुए दिनांक 19 दिसंबर 2022 को दिल्ली में लाखों की संख्या में किसान गर्जना रैली में शामिल होंगे। 
 

प्रमुख मागें : 
 

  1. लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाये।   
  2. कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त किया जाये। 
  3. किसान सम्मान निधि की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी की जाये। 
  4. जीएम.सरसों को अनुमति न दी जाए।

Published / 2022-11-30 23:22:56
नक्सलियों को सामग्री व अवैध वसूली करने वाला गिरफ्तार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नक्सलियों के लिए दैनिक सामग्री पहुंचाना, अवैध वसूली करना, बैनर पोस्टर लगाकर क्षेत्र में दहशत फैलाना और मोबाइल टॉवर में आगजनी की घटना में शामिल आरोपित सुरेश कुमार साहू को कोयलीबेड़ा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। नक्सली संगठन के साथ मिलकर आरोपित घटना को लगातार अंजाम भी दे रहा था। आरोपित को बुधवार को न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कोयलीबेड़ा पुलिस व डीआरजी बल ने 28 नवंबर को मरकानार जंगल के पास एक व्यक्ति को देखकर संदेहास्पद स्थिति में घेराबंदी कर पकड़ा। पूछताछ में उसने अपना नाम सुरेश कुमार साहू पिता स्व बाबूलाल साहू उम्र 34 वर्ष निवासी चिलपरस थाना कोयलीबेड़ा का रहने वाला बताया। जिसकी तलाश लेने पर उसके पास से नक्सली सामान बरामद किया गया। क्षेत्र में चलने वाले प्रत्येक ट्रेक्टर से सालाना छह हजार रुपये की दर से अवैध वसूली कर बड़े लीडर को देने का कार्य करता है। आज न्यायालय में पेशकर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

Published / 2022-11-30 23:07:05
छह माह में वितरण कंपनियों का बकाया 24,689 करोड़ रुपये घटा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिजली मंत्रालय ने बयान में कहा कि बिजली (विलम्ब भुगतान अधिभार एवं संबद्ध मामले) नियम, 2022 के क्रियान्वयन के साथ डिस्कॉम के आपूर्तिकर्ताओं (बिजली उत्पादक, पारेषण कंपनियों और व्यापारियों) के बकाया में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
 

बयान में कहा गया है कि डिस्कॉम पर कुल बकाया तीन जून, 2022 को 1,37,949 करोड़ रुपये था। चार मासिक किस्तों (ईएमआई) के समय पर भुगतान से यह 24,680 करोड़ रुपये घटकर 1,13,269 करोड़ रुपये रह गया है। पांच राज्यों ने 24,680 करोड़ रुपये की ईएमआई के भुगतान के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लि. से 16,812 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है जबकि आठ अन्य राज्यों ने इसके लिए अपनी खुद व्यवस्था की है।
वितरण कंपनियां भी अपने मौजूदा बकाया का समय पर भुगतान कर रही हैं, जिसने वे नियमन के तहत नहीं आयें। वितरण कंपनियों ने पिछले पांच माह में मौजूदा बकाया के करीब 1,68,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अभी सिर्फ एक कंपनी जेबीवीएनएल ने मौजूदा बकाया का भुगतान नहीं करने की वजह से नियमन के तहत आयी है।
बयान के अनुसार अबतक जो परिणाम आये हैं, उसको देखते हुए यह उम्मीद है कि विलम्ब भुगतान अधिभार नियम के कड़ाई से क्रियान्वयन से बिजली क्षेत्र को वित्तीय रूप से व्यवहारिक बनाने में मदद मिलेगी। इससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये निवेशक निवेश के लिये आकर्षित होंगे।

Published / 2022-11-30 22:58:40
हिमाचल प्रदेश में गेहूं की दो अधिक उपज देने वाली किस्में पेश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग ने राज्य में खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गेहूं की दो अधिक उपज देने वाली किस्में डीबीडब्ल्यू 222 और डीबीडब्ल्यू 187 पेश की हैं। अधिक उपज देने वाली गेहूं की किस्में डीबीडब्ल्यू 222 और डीबीडब्ल्यू 187, मौजूदा किस्मों के 35-37 प्रति क्विंटल की तुलना में 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देती हैं। 

हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग के संबंधित मामले के विशेषज्ञ राजीव मिन्हास ने कहा कि इन दो किस्मों के लगभग 23,000 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को दिये गये हैं। मिन्हास ने कहा कि डीबीडब्ल्यू 222 (करण नरेंद्र) में उच्च जंग प्रतिरोध और सहनशीलता है और बुवाई के समय अनुकूलन के अलावा बेहतर कृषि संबंधी विशेषताएं हैं, जबकि डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना) प्रोटीन और आयरन से भरपूर है।
 

कृषि निदेशक बी आर ताखी ने कहा कि कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और सिरमौर जिलों की निचली पहाड़ियों में नई किस्मों को समय पर (15 अक्टूबर से 15 नवंबर) बोया गया है क्योंकि बारिश ने मिट्टी में आवश्यक नमी पैदा की और वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी गेहूं की समय पर बुआई का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रदेश में 3.30 लाख हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन हो रहा है और उत्पादन का लक्ष्य 6.17 लाख टन का है। गेहूं, धान, मक्का, जौ और तिलहन मुख्य खाद्यान्न हैं। खाद्यान्नों के अलावा आलू, सब्जियां और अदरक राज्य की मुख्य व्यावसायिक फसलें हैं और सब्जियों के तहत 82,000 हेक्टेयर क्षेत्र, आलू के तहत 15.10 हजार हेक्टेयर और अदरक (हरा) के तहत तीन हजार हेक्टेयर का खेत रकबा प्रस्तावित है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसान अधिक लाभ प्राप्ति और सब्जियों की अधिक उपज और विदेशी किस्मों को उगाने के लिए वाणिज्यिक फसलों में विविधता ला रहे हैं। सेब उत्पादन के लिए जाना जाने वाला हिमाचल अब एक सब्जी के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। वर्ष 2022-23 में सब्जी, आलू एवं अदरक (हरा) का उत्पादन लक्ष्य क्रमश: 1,759 हजार टन, 195 हजार टन एवं 34 हजार टन निर्धारित किया गया है। राज्य में सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और इसका उत्पादन पहले ही राज्य में खाद्यान्न उत्पादन को पार कर चुका है।

Published / 2022-11-30 22:53:16
गुड न्यूज : देश में मातृत्व मृत्यु दर में भारी कमी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर) में भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-16 मातृत्व मृत्यु दर प्रति प्रति लाख में 130 थी जो वर्ष 2019-20 में घटकर 97 रह गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में एमएमआर का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आठ राज्यों ने सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप एमएमआर प्राप्त कर ली है।
 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण मातृत्व और प्रसव देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य नीतियों और पहल ने एमएमआर को नीचे लाने में जबरदस्त तरीके से सहायता की है।
भारतीय महापंजीयक के एमएमआर पर जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, भारत में मातृत्व मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में छह अंकों का सुधार हुआ है और अब यह प्रति लाख 97 जीवित प्रसव पर है।
 

श्री मांडविया ने कहा कि एमएमआर दर में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गयी है। एमएमआर के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) लक्ष्य को हासिल कर लिया है और 2030 तक 70 प्रति लाख जीवित प्रसव से कम एमएमआर के एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही रास्ते पर है।
 

आंकड़ों के अनुसार मातृत्व मृत्यु दर में केरल (19) महाराष्ट्र (33), तेलंगाना (43), आंध्र प्रदेश (45), तमिलनाडु (54), झारखंड (56), गुजरात (57) और कर्नाटक (69) है।

Published / 2022-11-29 15:11:39
जानें कौन हैं फिल्म कश्मीर फाइल्स को अश्लील और प्रोपेगेंडा कहने वाले नदाव लपिड

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (आईएफएफआई) में जूरी चेयरमैन इजराइली फिल्म मेकर नदाव लपिड ने फिल्म "द कश्मीर फाइल्स" को लेकर कहा है कि ये प्रोपेगैंडा और अश्लील फिल्म है। 53वें इंटरनेशन फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में अपने भाषण में जूरी प्रमुख नदाव लपिड ने कहा कि "द कश्मीर फाइल्स" एक प्रोपेगैंडा और अश्लील फिल्म है। इस फिल्म समारोह में फिल्म की स्क्रीनिंग देखकर मैं परेशान और स्तब्ध हूं। ये फिल्म फेस्टिवल के कलात्मक कंपटीशन के अयोग्य थी। 

हालांकि भारत में इजराइल के राजदूत नौर गिलॉन ने फिल्म मेकर नदाव लपिड के बयानों की निंदा की है। आइये जानें कौन हैं नदाव लपिड? नदाव लपिड एक इजराइली फिल्म मेकर और स्क्रीन राइटर हैं। नादव लापिड को सिनोनिम्स (2019), द किंडरगार्टन टीचर (2014) और पुलिसमैन (2011) जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। इसमें से किंडरगार्टन टीचर और पुलिसमैन के लिए नदाव लपिड को गोल्डन बीयर और कान जूरी प्राइज भी मिल चुका है। नदाव लपिड 2015 के लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन लेपर्ड जूरी के सदस्य थे। 2016 के कान फिल्म फेस्टिवल में इंटरनेशनल क्रिटिक्स वीक जूरी के सदस्य भी रह चुके हैं। वहीं 71वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म में आधिकारिक प्रतियोगिता जूरी के सदस्य रहे थे। इजराइल के शहर तेल अवीव में 1975 में जन्में नदाव लपिड ने तेल अवीव यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी (दर्शनशास्त्र) में डिग्री ली है। नदाव लपिड कुछ वक्त तक सैन्य सेवा में भी थे। उसके बाद वह पेरिस चले गए थे। पेरिस से आने के बाद लपिड ने इजराइल आने के बाद यरूशलम के फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल से डिग्री ली। 47 वर्षीय नदाव लपिड हमेशा अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। लैपिड ने अपने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्म सिनोनिम्स के बारे में बात करते हुए कहा था कि इजराइल के ज्यादातर लोगों ने अपनी आत्मा को बेच दिया है, वो सिक सोल हो गये हैं। नदाव लपिड 250 इजराइली फिल्म मेकर के उस ग्रुप का भी हिस्सा थे, जिन्होंने शोमरॉन (सामरिया/वेस्ट बैंक) फिल्म फंड के लॉन्च के विरोध में एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किया था।

Published / 2022-11-29 14:27:31
ज्वालामुखी में विस्फोट, लावा के खतरे की जद में 20 लाख लोग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हवाई के मौनालाओ में स्थित ज्वालामुखी में तेज विस्फोट हुआ है। इस विस्फोट से राख और मलबा आसपास के इलाकों में गिर रहा है। यह ज्वालामुखी 27 नवंबर को देररात बिग द्वीप पर फटा। इससे ज्वालामुखी के शिखर काल्डेरा में तेज धमाका हुआ। 38 साल में पहली बार ज्वालामुखी में इतना तेज विस्फोट हुआ है। अधिकारियों ने हवाई के बिग द्वीप पर रहने वाले लोगों को सबसे खराब स्थिति में तैयार रहने की चेतावनी दी है।

ज्वालामुखी के शिखर पर हाल में बार-बार भूकंप आने के बाद से विस्फोट शुरू हुआ है। इससे पहले वर्ष 1984 में ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने 28 नवंबर को कहा था कि लावा शिखर तक ही सीमित है और इससे आसपास रहने वाले लोगों को कोई खतरा नहीं है। मगर विस्फोट के बाद से बिग आईलैंड पर लगभग 20 लाख लोगों को चेतावनी दी गई है कि विस्फोट होने से ज्वालामुखी बहुत गतिशील हो सकता है और लावा प्रवाह का स्थान तेज गति से बदल सकता है। अधिकारियों ने आईलैंड में रह रहे लोगों को चेताया है कि अगर लावा का प्रवाह आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगे तो वो जल्द अपने घरों को खाली करने के लिए तैयार रहें। 

लावा से पैदा होने वाले खतरों को देख निवासियों को ज्वालामुखी के आसपास के इलाकों से बिल्कुल दूर रहने की सलाह दी गयी है। अधिकारियों के मुताबिक हवाई के मौनालाओ में स्थित ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद से सल्फर डाईऑक्साइड गैस निकल रही है। यह लोगों के लिए बहुत ही हानिकारक है।

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