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Published / 2022-12-24 13:06:52
पांच वर्षों में हुईं विमानों से जुड़ीं 2,613 घटनाओं में इंडिगो शीर्ष और स्पाइसजेट दूसरे स्थान पर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले पांच वर्षों में घरेलू एयरलाइनों से जुड़ी कुल 2,613 घटनाएं हुई हैं। इनमें इंडिगो शीर्ष पर रही है। उड्डयन राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

इस समय देश में 12 एयरलाइन कंपनियां इस कारोबार में हैं। इंडिगो में 2018 से 2022 तक के पांच वर्षों में 885 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 215 घटनाएं इसी साल की हैं। बता दें कि इंडिगो 270 विमानों के साथ भारतीय बाजार में सबसे बड़ी ऑपरेटर है। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य एंटो एंटोनी ने नागर विमानन मंत्रालय से पूछा था कि क्या पुराने विमानों का इस्तेमाल तकनीकी खराबी का मुख्य कारण है, तो जनरल वीके सिंह ने कहा, तकनीकी खराबी का एकमात्र कारण पुराना विमान नहीं है। 

उन्होंने कहा, विमान को उड़ने योग्य माना जाता है, बशर्ते रखरखाव निर्माता द्वारा निर्धारित तय कार्यक्रम के अनुसार हो। सिंह ने कहा कि स्पाइसजेट दूसरी एयरलाइन है, जिसने पिछले पांच वर्षों में 691 तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी दी है। विस्तारा ने इसी दौरान ऐसी 444 घटनाओं की जानकारी दी है। टाटा के मालिकाना हक वाली एअर इंडिया ने 2018 से 2022 के दौरान 361 तकनीकी गड़बड़ियों की सूचना दी, जबकि एयर एशिया के साथ 79 और एलायंस एयर के साथ 13 घटनाएं हुईं थीं।

Published / 2022-12-23 22:58:10
गुरुग्राम में खुले में नमाज पढ़ने पर फिर विवाद

  • विवाद के बाद मौके पर तैनात की गई पुलिस फोर्स

एबीएन सेंट्रल डेस्क। खुले में नमाज को लेकर विवाद एक बार फिर से गहरा गया। नमाज पढ़ रहे लोगों का विरोध करने हिंदु संगठनों के लोग पहुंच गए। विवाद बढ़ता देखकर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। जिस स्थान पर शुक्रवार को नमाज पढ़ी जा रही थी, उस स्थान की अनुमति नहीं है।

यहां सेक्टर-69 स्थित सेक्टर-69 में खुले में नमाज पढ़ी जा रही थी। नमाज पढ़ने से रोकने के लिए हिंदू संगठनों के लोग पहुंचे और नमाज बंद कराने के प्रयास किए। इसी तरफ दोनों गुटों में विवाद हो गया। दोनों गुटों के बीच विवाद के देखते हुए पुलिस ने नमाज पढ़े जाने के अनुमति पत्र मांगा। नमाज पढ़ने वाला गुट पत्र नहीं दिखा सका। ऐसे में विवाद और पुलिस की मौजूदगी के चलते स्थल पर नमाज नहीं पढ़ी जा सकी। बताया जा रहा है कि जिले के बाहर के लोग भी इस स्थल पर नमाज पढ़ रहे थे, जिसे लेकर विवाद हुआ था। जिले में 6 जगहों पर ही पढ़ी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम में खुले में नमाज को लेकर अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है। पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से इसका हल निकालने के खूब प्रयास हुए हैं। फिर भी खुले में नमाज पर विवाद हो रहे हैं। गुरुग्राम में 30 स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति थी। विवादों के बाद यह घटकर 6 स्थान रह गयी।

Published / 2022-12-23 22:38:01
प्रयागराज : बैलगाड़ी पर झूमते-गाते आयी थी महामना की बारात

महामना मालवीयजी के जन्मदिन पर विशेष

  • श्रीमद्भागवत कथा के बड़े श्रोता थे महामना, सात दिनों तक रुकी थी मालवीयजी की बारात

एबीएन सेंट्रल डेस्क। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की बारात प्रयागराज से मीरजापुर बैलगाड़ी से झूमते हुए आयी थी। प्रयागराज से बारात को सात दिन आने और सात दिन जाने में लगे थे। 1878 में नगर के बसनही बाजार स्थित इमली महादेव मोहल्ला उस पल का साक्षी रहा, जब पंडित मदन मोहन मालवीय यहां की बेटी कुंदन देवी संग वैवाहिक बंधन में बंधे थे। वे जीवन भर उनकी छाया बनी रहीं और हर पथ पर उनका साथ दिया। पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे कर्मयोगी की ससुराल मीरजापुर में होने से जनपदवासियों को गर्व है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद जन्मस्थली और वाराणसी उनकी कर्मस्थली रही है, लेकिन मीरजापुर भी महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के सानिध्य से दूर नहीं रहा। महामना की ससुराल नगर के बसनही बाजार स्थित बड़ी माता मंदिर के इमली महादेव पर है। मालवीय जी की शादी 1878 ई में नंदराम की इकलौती बेटी कुंदन देवी के साथ हुई थी।

प्रयागराज से चली बारात सात दिन बाद मीरजापुर पहुंची थी। विवाह के बाद सात दिनों तक बड़हार रहा। पूरी बारात सात दिनों तक आवभगत का लुत्फ उठाती रही और वैवाहिक रीतियां चलती रहीं। उस समय एक दिन, दो दिन, तीन दिन, सात दिनों का बड़हार का चलन था। दूर से आने वाले बाराती कुछ दिन रुककर ही वापस जाते।

इतिहासकार बताते हैं कि बैलगाड़ी से बारात आयी थी और तब 90 किलोमीटर की दूरी तय करने में सात दिन लगे थे। इसके बाद बारात जब वापस गयी तब भी पूरे सात दिन लगे। इस तरह से पंडित मालवीय की शादी की रस्में 21 दिनों में पूरी हुईं। सास-ससुर के निधन के बाद उनकी ससुराल में कोई नहीं है। ससुराल होने के चलते महामना का आना-जाना मीरजापुर में होता था। इमली महादेव स्थित लगभग 20 बाई 50 फीट का यह मकान आज भी मीरजापुर के लोगों को इतराने और महामना से जुड़े रहने का मौका देता है। भारत रत्न मिलने पर मना था जश्न : 24 दिसंबर 2014 को भारत सरकार ने पंडित महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा की जिसके बाद बसनही बाजार के इमली महादेव मोहल्ले में जश्न मनाया गया।

मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी महामना के ससुराल की सुध : महामना के ससुराल के मकान की सुध 1998 में मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी। उन्होंने मकान पर शिलापट्ट लगवाया था। जिस पर लिखवाया कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी का विवाह स्थल पंडित नंदरामजी के इस मकान नंबर 559 मोहल्ला इमली महादेव में 1878 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी की बारात इलाहाबाद से आई और इसी घर में उनका शुभ विवाह पंडित नंदराम की सुपुत्री कुंदन देवी के साथ 1878 ई. को संपन्न हुआ।

Published / 2022-12-23 18:40:10
भूख की पीड़ा समझे बिना भुखमरी मिटाना असंभव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यही तो हमारा संस्कार, हमारी संस्कृति, परंपरा रही है कि समाज का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहने पाए। उसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि पूर्वकाल में जब तकनीक का विकास नहीं हुआ था, उस समय राजा-महाराजाओ या बादशाहों का देश पर शासन होता था तो प्राय: रात में भेष बदलकर अपने राज्य में वे घूमते थे कि कहीं कोई भूखा तो नहीं सो रहा है, भूख से कोई बच्चा रो तो नहीं रहा है? और यदि कोई भूखा सो रहा है या कोई बच्चा भूख से रो रहा है, तो उसकी समस्या या परेशानी का संज्ञान लेकर उसका निदान भी किया जाता था। 

देश में ऐसे कई परिवार हैं, जिनके पास न तो घर है और न ही खाने के लिए राशन। ये जहां कुछ मिलने की उम्मीद होती है वहीं पहुंच जाते हैं। भारत में कोई व्यक्ति यदि रात में भूखा सोता है तो माना जा सकता है कि देश का सौभाग्य सो गया,लेकिन जब भूख से तड़पकर असमय कोई काल का ग्रास बन जाता है, तो कहा जा सकता है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी हम अपने दुर्भाग्य से पीछा नहीं छुड़ा पाये हैं। यही तो हुआ कोरोना काल में, जब हजारों भूखे मजदूर सैकड़ों मील अपने बाल-बच्चों को कंधे और गोदी पर टांगकर या फिर अपने बैग को बच्चों के लिए ट्राली के रूप में इस्तेमाल करके पलायन करने के लिए मजबूर हो गए थे। 

गांधी-बुद्ध ने यातना सहकर ही किया था दर्द का अनुभव 
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि युगोस्लाविया के एक प्रोफेसर ने (जो सारी दुनिया में शरणार्थियों की समस्या पर शोध कर रहे थे) उनके एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि हमारे देश में महात्मा गांधी को भी गरीबी के दर्द का अनुभव तब हुआ, जब दक्षिण अफ्रीका में उन्हें तरह-तरह की यातनाएं भुगतनी पड़ीं। उसी यातना से प्रेरणा लेकर वे गरीबों की जिंदगी से सीधे जुड़ गये। महात्मा बुद्ध को असली ज्ञान तब हुआ, जब उन्हें सुजाता की खीर खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। भूख की पीड़ा को समझे बिना कोई भूख मिटा नहीं सकता। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी भूखा न सोने पाये 
पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोकर की ओर से वकील प्रशांत भूषण बहस कर रहे थे। उस पर जस्टिस एमआर शाह व हिमा कोहली ने केंद्र सरकार से कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी को भूखा नहीं सोना चाहिए। 

झारखंड में भुखमरी : बोकारो के कर्मा शंकरडीह निवासी भुक्खल घासी की मार्च 2020 और बेटी-बेटा की सितंबर में तथा दुमका के महुआडानर गांव के कालेश्वर सोरेन की नवंबर 2018 में कथित तौर पर भूख से मौत हो गयी।  पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्यान्न अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। न्यायालय कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की कठिनाइयों से संबंधित जनहित मामले पर सुनवाई कर रहा था। 

उपनिषद की एक पौराणिक कथा के अनुसार एक ब्रह्मचारी किसी ऋषि के पास गया। उसने कहा कि गुरुवर मुझे ब्रह्मज्ञान दें। गुरु ने उसे ध्यान लगाने के लिए कहा। जब पर्याप्त समय हो गया तो उसने न केवल आंखें खोल दीं बल्कि उठकर खड़ा भी हो गया। गुरुदेव ने कठोर स्वर में कहा कि बैठ जाओ, पर वह बैठा नहीं और गुरु की अवज्ञा करते हुए उच्च स्वर में चिल्लाकर बोला- मैं बैठ नहीं सकता। भूख से मेरे प्राण निकल रहे हैं। मुझे अन्न चाहिए। गुरुदेव ने मुस्कुराकर कहा, तो पहला पाठ सीखो कि अन्न ही ब्रह्म है और अन्न के बिना कुछ नहीं हो सकता। इसी प्रकार तैत्तरियोपनिषद में कहा गया है कि अन्न ब्रह्म है, क्योंकि अन्न से ही सारे प्राणी उत्पन्न होते हैं, उत्पन्न होकर अन्न से ही जीवित रहते हैं, अंत में संसार से प्रयाण करते हुए फिर अन्न में प्रविष्ट हो जाते हैं। 

वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर तीन में से दो व्यक्ति गरीब थे 
वर्ष 1867-68 में सबसे पहले दादा भाई नौरोजी ने गरीबी खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया था। सुभाष चंद्र बोस ने भी वर्ष 1938 में इसकी पहल की थी। वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर तीन में से दो व्यक्ति गरीब थे। आज कहा जाता है कि हर तीन में से एक व्यक्ति गरीब है। फिर आजादी के बाद ह्यगरीबी हटाओ, देश बचाओ का नारा वर्ष 1974 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी ने दिया था। बाद में उनके बेटे राजीव गांधी ने भी इस नारे का उपयोग किया। इस नारे का प्रयोग पांचवीं पंचवर्षीय योजना में भी किया गया था। आज भी भूख से मौत के मामले सामने आते रहते हैं और सरकारें इन मामलों को गंभीरता से लेने के बजाय खुद को बचाने के लिए लीपा-पोती में लग जाती हैं। यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। 

भोजन मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। इस मुद्दे को सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकलिन रूजवेल्ट ने अपने एक व्याख्यान में उठाया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे को अपने हाथ में ले लिया और वर्ष 1948 में आर्टिकल-25 के तहत भोजन के अधिकार के रूप में इसे मंजूर किया। 

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सरकार के दावे पर उठाये सवाल 
यह सुखद बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने अब जनहित के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया है। उसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या के साथ ताजा रिपोर्ट दें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है। केंद्र सरकार ने कोरोना काल में लोगों तक अनाज पहुंचाया है। हमें यह भी देखना होगा कि यह व्यवस्था जारी रहे। प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में लोगों की प्रतिव्यक्ति आय बढ़ी है, जबकि भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक में तेजी से नीचे आया है। 

बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 2022 की रिपोर्ट में भारत की स्थिति को बेहद खराब बताया गया है। 121 देशों की रैंकिंग में भारत 107वें नंबर पर है। भारत से बेहतर स्थिति में तो हमारे पड़ोसी देश- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका हैं। ग्लोबल हंगर एसोसिएशन का उद्देश्य विश्व के क्षेत्रीय और देश के स्तर पर भूख को ट्रैक करना है। इसके स्कोर चार घटकों की संभावनाओं के मूल्यों पर आधारित होते हैं। अब देखने की बात यह होगी इस जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को आखिरकार क्या आदेश दिया जाता है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं ।) 
 

Published / 2022-12-23 18:18:24
हेल्थकेयर में 5जी : एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, एडब्ल्यूएस ने भारत का पहला 5जी संचालित, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निर्देशित कोलोनोस्कोपी परीक्षण किया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के अग्रणी टेलेकम्युनिकेशन्स सर्विस प्रोवाइडर भारती एयरटेल और एशिया में सबसे प्रतिष्ठित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा संगठन, अपोलो हॉस्पिटल्स ने आज 5जी और एआई द्वारा संचालित होने वाले भारत के पहले कोलोनोस्कोपी परीक्षण को पूरा करने की घोषणा की। 

इस परीक्षण में कोलन कैंसर का अधिक तेजी से और सटीक रूप से पता चला, जिसका श्रेय एयरटेल की 5जी तकनीक पर एआई के परीक्षण के उपयोग को जाता है, जिसमें बेहद लो लेटेंसी और हाई प्रोसेसिंग पॉवर होती है।  इन परीक्षणों पर एक साथ काम करने के लिए हेल्थनेट ग्लोबल, एडब्लूएस और अवेशा कंपनियां भी शामिल थीं। 

एआई-निर्देशित कोलोनोस्कोपी के कारण, इमेज प्रोसेसिंग वास्तविक समय में और बिना किसी देरी के हुई, तब भी जबकि डॉक्टर ने कोलन के माध्यम से स्कोप को उपयुक्त कॉलोनिक क्षेत्र के ऊपर उपरिशायी करने के लिए स्थानांतरित किया। इस तकनीक के आने से, डॉक्टरों के पास अब आंखों की अतिरिक्त जोड़ी है और पूर्वंगकों का पता लगाने की दर में वृद्धि हुई है, जिससे जीवन को बचाया जा सकेगा और रोगी की बेहतर देखभाल होगी।

Published / 2022-12-23 10:43:44
खुद अभाव की जिंदगी जीता है देश को संपन्न बनाने की क्षमता रखने वाला किसान

  • 23 दिसंबर :  भारतीय राष्ट्रीय किसान दिवस पर विशेष

एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसान दिवस हर साल आज के दिन 23 दिसंबर को मनाया जाता  है।भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारी संपन्नता हमारे कृषि उत्पादन पर निर्भर करती है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारतीय कृषक की एक बड़ी भूमिका है। वास्तव में भारत कृषकों की भूमि है। हमारी 75% जनता गांव में रहती है। भारतीय किसान का सर्वत्र सम्मान होता है। वह ही संपूर्ण भारत वासियों के लिए अन्न और सब्जियां उत्पन्न करता है। 

पूरा वर्ष भारतीय कृषक खेत जोतने, बीज बोने और फसल उगाने में व्यस्त रहता है। वास्तव में उसका जीवन अत्यंत व्यस्त होता है। वह प्रातः उठता है और खेतों में चला जाता है। खेतों में वह दिन भर काम करता है। मेहनत करता है और देर रात तक घर आता है। वह दिनभर खेतों में काम करता है। उनके भोजन बहुत ही साधारण होते हैं। कठिन परिश्रम के बाद ही अनाज का उपज होता है। इतना परिश्रम करने के बाद भी उसे बहुत कम लाभ होता है। वह अपनी उपज को बहुत कम दामों पर बाजार में बैचता है। 

कृषक बहुत ही सादा जीवन जीता है। उसका पहनावा बहुत ही साधारण होता है। वे फुस झोपड़ियों में रहते हैं। अभी तो बहुत किसानों के पक्के मकान भी बन गये है। उनकी संपत्ति कुछ बैल,  हल और कुछ एकड़ धरती ही होती है। वह अधिकतर अभाव का जीवन जीता है। एक कृषक राष्ट्र की आत्मा होती है। हमारा देवगन राष्ट्रपति लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया था जय किसान जय जवान उन्होंने कहा था कि किसान राष्ट्र के अन्नदाता है। उसी पर कृषि उत्पादन निर्भर करता है। उन्हें कृषि के सभी आधुनिकतम यंत्र और उपयोगी रसायन उपलब्ध कराने चाहिए ताकि वह अधिक उत्पादन कर सके। किसान दिवस आज के दिन चौधरी चरण सिंह जयंती पर आज मनाया जा रहा है।

Published / 2022-12-22 18:51:29
केंद्रशासित प्रदेश सामाजिक प्रगति में सबसे आगे

शिवा राजोरा 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) के पहले संस्करण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 10 राज्यों में शीर्ष पर 4 केंद्रशासित प्रदेश हैं। इसमें पुदुच्चेरी पहले स्थान पर है, जबकि उसके बाद लक्षद्वीप, गोवा, सिक्किम और मिजोरम का स्थान है। वहीं 10 राज्यों में शामिल अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ और जम्मू कश्मीर भी हैं। मंगलवार को जारी सूचकांक राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और जिलों के लिए तैयार किया गया है। इसे प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की पहल पर इंस्टीट्यूट फॉर कंपटेटिवनेस ऐंड सोशल प्रोग्रेस इंपरेटिव ने तैयार किया है। 

इस सूचकांक को तैयार करने में सामाजिक प्रगति के 3 अहम क्षेत्रों- मानव की बुनियादी जरूरतों (जैसे पोषण और बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल, जल और स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा व आश्रय), बेहतरी के मूल सिद्धांत (बुनियादी ज्ञान तक पहुंच, सूचना और संचार तक पहुंच, स्वास्थ्य एवं बेहतरी और पर्यावरण की गुणवत्ता) और अवसर (व्यक्तिगत अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और चयन, समावेशन और उच्च शिक्षा तक पहुंच) का इस्तेमाल किया गया है। यानी 3 अहम क्षेत्रों को 12 उपक्षेत्रों में विभाजित करके आकलन किया गया है और उसके मुताबिक सूची तैयार की गई है। 

पुदुच्चेरी का देश में सबसे ज्यादा 65.99 एसपीआई अंक है। उसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद, आवास, जल एवं स्वच्छता की स्थिति बेहतर रहने की अहम भूमिका है। उसके बाद लक्षद्वीप और गोवा का स्थान है, जिन्हें क्रमश: 65.89 और 65.53 अंक मिले हैं। प्रमुख राज्यों में, तमिलनाडु और केरल शीर्ष 10 में शामिल हैं। दूसरी ओर असम, बिहार और झारखंड तालिका में सबसे नीचे हैं। जबकि जिलों में, आइजोल 72.9 अंक के साथ तालिका में शीर्ष पर है। एसपीआई अंक के आधार पर, राज्यों और जिलों को सामाजिक प्रगति के छह स्तरों के तहत स्थान दिया गया है।

Published / 2022-12-22 18:46:37
भारत को भी लपेटे में लेने की तैयारी में सरपट दौड़ती महंगाई?

  • महंगाई पर नजर रख रही है सरकार : सीतारमण 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूरा साल भारत में जबरदस्त महंगाई का साल था। लेकिन अब दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों को सरपट दौड़ती महंगाई या स्टैगफ्लेशन का डर सता रहा है। यह है क्या, जिसके दुष्चक्र में फंसने पर अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह तबाह हो जाती हैं? दूध के दाम इस साल चार बार बढ़ चुके हैं। गैस सिलेंडर हों या सब्जियां सबके दामों में आग लगी हुई है। महंगाई का सिर्फ भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में यही हाल है। जाहिर है, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी इससे परेशान हैं। क्योंकि ज्यादातर देशों में महंगाई को नियंत्रण में रखने की जिम्मेदारी उनके केंद्रीय बैंक पर ही होती है। वैसे अलग-अलग देशों में महंगाई का सहनीय स्तर भी अलग-अलग होता है। जैसे भारत में रिजर्व बैंक ने महंगाई का सहनीय स्तर 6 फीसदी रखा हुआ है, वहीं अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इसे 2 फीसदी रखा है। यानी महंगाई इस स्तर से ज्यादा होगी, तभी वो इसे कम करने का प्रयास करेंगे। 

कमाई की ग्रोथ से जुड़ी है महंगाई की ग्रोथ 
केंद्रीय बैंक इस सहनीय स्तर को देश की जीडीपी में होने वाली ग्रोथ और लोगों की कमाई में होने वाली बढ़ोतरी के हिसाब से तय करते हैं। माने जिस देश में लोगों की कमाई में हर साल औसतन जितनी बढ़ोतरी हो रही होती है, उसके हिसाब से तय किया जाता है कि वहां के लोग अगले साल कितनी महंगी चीजें खरीद पायेंगे। अर्थशास्त्रियों के इस समझदारी भरे रवैये के बावजूद वर्तमान महंगाई ने उन्हें मुश्किल में डाल रखा है। उन्हें डर सता रहा है क्योंकि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही। कभी थोड़ी कम हो भी रही है, तो कुछ ही दिनों में फिर पलटी मार जा रही है। 

जिद्दी महंगाई का डर बढ़ता जा रहा 
महंगाई का इस रवैये के चलते अर्थशास्त्रियों को स्टैगफ्लेशन का डर सता रहा है। स्टैगफ्लेशन जिद्दी महंगाई होती है, जिसे अर्थशास्त्र की किताबों में सरपट दौड़ती महंगाई के नाम से भी जाना जाता है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में अर्थशास्र की प्रोफेसर मनीषा मेहरोत्रा कहती हैं कि स्टैगफ्लेशन में महंगाई तो एक चुनौती होती है लेकिन बेरोजगारी भी इसकी एक प्रमुख चुनौती होती है। इसमें महंगाई का एक ऐसा दुष्चक्र चलने लगता है, जिसमें बैंकों का ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास हमेशा सफल नहीं होता। 

सामान के साथ महंगाई का भी आयात 
डॉ मेहरोत्रा के मुताबिक वर्तमान में पूरी दुनिया में महंगाई एक साथ बढ़ी हुई है और ऐसे में आयातित महंगाई भी महंगाई बढ़ा रही है। यानी चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक आइटम हों, कतर से आने वाली सीएनजी या सऊदी अरब से आने वाला कच्चा तेल, सभी भारत में पहले से बढ़ी महंगाई की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। इलाहाबाद में ऐड कंपनी चलाने वाले व्यवसायी अजय कुमार ने हाल ही में कुछ कैमरे खरीदे, वे कहते हैं कि यह कैमरे दो साल पहले की कीमत के मुकाबले बहुत महंगे हैं। महंगाई ने हमारी लागत बहुत बढ़ा दी है। जाहिर है हमें अब ग्राहकों के लिए भी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। 

सेंट्रल बैंक ऐसे घटाता है महंगाई 
दुनिया पर मंडराते इस स्टैगफ्लेशन के खतरे के बीच दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई नियंत्रित करने का काम कर रहे हैं। दरअसल ब्याज दरों और महंगाई में छत्तीस का आंकड़ा होता है। जब ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं तो लोन लेना भी महंगा हो जाता है। इससे लोग कम लोन लेते हैं और मार्केट में कम पैसा पहुंचता है। जिससे लोग कम सामान खरीदते हैं तो डिमांड घट जाती है और इससे महंगाई भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। लेकिन जब महंगाई जरूरत से ज्यादा बढ़ी हो और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हों तो ब्याज दरें घटाने का भी कोई असर नहीं होता। हाल ही में भारत में भी ऐसा देखा गया। जब रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई नियंत्रित करने का प्रयास किया लेकिन विफल रहा। इसके बाद सरकार ने उससे जवाब मांग लिया कि ऐसा क्यों हुआ। हालांकि सरकार ने विपक्ष की मांग के बावजूद रिजर्व बैंक की ओर से जवाब में भेजी गई रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। ऐसे में भारत में भी स्टैगफ्लेशन का डर लोगों को सता रहा है। हालांकि पिछले महीने महंगाई में कुछ कमी आई है लेकिन अभी भी जानकारों को इसके फिर बढ़ जाने का डर है। वैसे इस बीच जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पूछा गया कि क्या भारत में स्टैगफ्लेशन आ सकता है? तो उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया।

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