एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल के कोट्टायम जिले की तीन अलग-अलग पंचायतों में बर्ड फ्लू फैलने की पुष्टि हुई है। इन क्षेत्रों में 6,000 से अधिक पक्षियों को मार दिया गया है। जिला प्रशासन की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोट्टायम की वेचुर, नीनदूर और अरपुकारा पंचायतों में शनिवार को कुल 6,017 पक्षी मारे गये, जिनमें ज्यादातर बतख शामिल थीं।
विज्ञप्ति के मुताबिक, बर्ड फ्लू फैलने की आशंका के चलते वेचुर में लगभग 133 बतख और 156 मुर्गियों, नींदूर में 2,753 बतख और अर्पुकारा में 2,975 बतख को मार दिया गया। बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा, एक अत्यधिक संक्रामक जूनोटिक (पशु-पक्षियों से फैलने वाला) बीमारी है। इस बीच, लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल में बर्ड फ्लू के कथित प्रकोप के कारण राज्य से फ्रोजन चिकन के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 25 दिसंबर को अपने खास रेडियो प्रोग्राम मन की बात में इस साल का आखिरी संबोधन दिया। पीएम के खास प्रोग्राम का आज 96वां एडिशन था। 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री ने प्रोग्राम को लेकर लोगों से सुझाव भी मांगा था। इससे पहले 27 नवंबर को मन की बात के दौरान, पीएम मोदी ने विक्रम-एस के लॉन्च की सराहना की थी, जो कि प्राइवेट सेक्टर द्वारा फंडेड देश का पहला रॉकेट है – जिसे 18 नवंबर को लॉन्च किया गया था।
प्रधानमंत्री ने मन की बात में जी-20 की अध्यक्षता के संबंध में भी बात की। उन्होंने इस मौके को भारत के लिए एक अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने साल का आखिरी मन की बात ऐसे समय में की है जब पड़ोसी देश चीन में कोरोना से हाहाकार मची है। इसका खतरा भारत पर भी मंडरा रहा है।
1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 में कई उपलब्धियों को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि साल 2022 खास इसलिए भी रहा क्योंकि इस साल भारत ने आजादी के अमृत महोत्सव मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 96वें संस्करण में क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेटी को श्रद्धांजिली भी दी।
2. देश में कोरोना वायरस संक्रमण का एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात में लोगों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने मास्क लगाने और एहतियात बरतने की सलाह दी। मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि हम देख रहे हैं कि दुनिया के कई देशों में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। हमें सावधान रहने, मास्क पहनने और हाथ धोने की जरूरत है।
3. मन की बात के साल के आखिरी एडिशन में पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहाली वाजपेयी को भी याद करते हुए कहा कि भारत रत्न और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि...। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शिक्षा, विदेश नीति और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र सहित हर क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले गये।
4. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साल भारत को जी-20 समूह की अध्यक्षता की जिम्मेदारी भी मिली है। मैंने पिछली बार भी इस पर विस्तार से चर्चा की थी। प्रधीनमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में हमें जी-20 के उत्साह को नई ऊंचाईयों तक ले जाना है।
5. पीएम मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि साक्ष्य-आधारित मेडिसिन के युग में, योग और आयुर्वेद अब आधुनिक युग की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं… टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा किये गये एक गहन शोध से पता चला है कि योग ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों के लिए बहुत प्रभावी हैं। पीएम मोदी ने मन की बात में अपने संबोधन में देश के लोगों से आयुर्वेद को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
6. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस है और मुझे इस अवसर पर दिल्ली में साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी की शहादत को समर्पित कार्यक्रम में हिस्सा लेने का सौभाग्य प्राप्त होगा। देश का बलिदान, साहिबजादे और माता गुजरी हमेशा याद रहेगी।
7. पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, हमने स्वास्थ्य क्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों पर काबू पाया है। हमने भारत से चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों को मिटा दिया है। अब काला अजार रोग भी समाप्त हो जायेगा। यह बीमारी अब केवल बिहार और झारखंड के चार जिलों में है।
8. प्रधानमंत्री ने कहा कि नमामि गंगे मिशन ने जैव विविधता में सुधार करने में भी मदद की है। स्वच्छ भारत मिशन हर भारतीय के दिमाग में मजबूती से स्थापित हो गया है। स्वच्छता की विरासत को अब सभी भारतीय एक साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
9. साल के अपने आखिरी मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2022 अद्भुत रहा। भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किये जबकि अमृत काल शुरू हुआ। भारत ने तेजी से प्रगति की और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।
10. पीएम मोदी ने मन की बात के जरिए इस साल के अपने आखिरी संबोधन को खत्म करते हुए कहा कि अगली बार हम साल 2023 में मिलेंगे। मैं आप सभी को साल 2023 की शुभकामनाएं देता हूं। ये साल भी देश के लिए खास हो। पीएम मोदी ने कहा कि देश नई ऊंचाइयों को छूता रहे, हमें मिलकर एक संकल्प लेना है और उसे साकार करना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में स्थापित अटल जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
इस मौके पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र समेत अन्य लोग मौजूद रहे। लोकभवन सभागार में अटल जी पर लघु फिल्म और कविता पाठ हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के महान सपूत की जयंती पर प्रदेश सरकार और उप्र वासियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मालवीय जी को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपने कर्मों से प्रेरणा दी है। छह दशक का सार्वजनिक जीवन उनका हम सबको प्रेरणा देता है। वह लेखक, कवि, पत्रकार एवं संवेदनशील जनप्रतिनिधि भी थे। उन्होंने दिखाया कि राजनिति में स्थिरता कैसे लाई जा सकती है।
भारत के बुनियादी ढांचा विकसित करने, परमाणु सक्षम बनाने और भारत की राजनीति को स्थिरता देने का काम किया। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अटल जी के प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए भारत को स्थिरता की राजनीति दे रहे हैं। कहा कि आज ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से बड़ी भारत की अर्थव्यवस्था हो गयी है। जी-20 का नेतृत्व पीएम मोदी अगले एक साल तक कर रहे हैं। यह भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए गौरव की बात है।
शासन की व्यवस्था का संवेदनशील होना ही सुशासन है। पहले महामारी आती थी तो लोग मरते रहते थे। कोरोना जैसी महामारी आई तब प्रधानमंत्री मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं।
भारत ने कोविड के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी। दो-दो वैक्सीन, गरीबों को अनाज, इलाज जैसी सारी व्यवस्था दी गयी। अटल जी के बताए रास्ते पर चलने की वजह से यह संभव हो पाया। अटल जी ने दलहित को छोड़कर देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अटल जी का शासन आज भी लोग याद करते हैं। वह कुशल वक्ता थे। उनके भाषण को सुनने के लिए विरोधी दल के कार्यकर्ता भी पहुंच जाते थे। उनके नेतृत्व में भारत ने नई ऊंचाइयों तक पहुंचा। उनके दिखाए रास्ते पर आज केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश और प्रदेश मजबूत हो रहा है।
लोकभवन के सभागार में अटल जी की याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया। अटल जी पर लघु फ़िल्म दिखायी गयी। इसमें अटल जी की कविताओं की प्रस्तुति हुई। दिल्ली से आये गजेंद्र सोलंकी ने कविता पाठ किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को भी सुना गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 227 नये मामले आये, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 3,424 पर पहुंच गयी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रविवार सुबह आठ बजे अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, भारत में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,46,77,106 हो गई है।
वहीं, दो और मरीजों के जान गंवाने से देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 5,30,693 पर पहुंच गई है। इनमें केरल द्वारा पुनर्मिलान किया गया मौत का एक मामला शामिल है। वहीं, पिछले 24 घंटे में महाराष्ट्र में वायरस से एक व्यक्ति की जान गई है।
मंत्रालय के मुताबिक, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.01 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 98.80 फीसदी हो गयी है। बीते 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 27 मामलों की वृद्धि दर्ज की गयी। आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायलस संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,41,42,989 हो गयी है, जबकि कोविड-19 मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं, देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 220.05 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।
गौरतलब है कि भारत में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गयी थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गये थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गये थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के कुल मामले चार करोड़ के पार हो गये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत को विकसित देश का दर्जा पाने के लिए दो दशकों से भी अधिक समय तक लगातार आठ-नौ प्रतिशत का मजबूत ग्रोथ रेट बनाए रखना होगा। यह कहना है भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है लेकिन रंगराजन का कहना है कि भारत अगले 20 साल में यह मुकाम हासिल कर सकता है लेकिन इसके लिए लगातार उच्च विकास दर बनाये रखनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत के पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के बाद भी भारत लोअर मिडल इनकम वाला देश ही माना जायेगा। इसकी वजह यह है कि उस स्थिति में भी देश की प्रति व्यक्ति आय 3,472 डॉलर ही होगी।
रंगराजन में आज यहां आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पांच लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचाना एक निकट अवधि वाला आकांक्षी लक्ष्य है। इसकी वजह यह है कि उस स्थिति में भी देश की प्रति व्यक्ति आय 3,472 डॉलर ही होगी जिससे इसे एक मध्यम आय वाला देश ही माना जायेगा। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के बाद भी भारत को एक उच्च मध्य आय वाला देश बनने में दो साल का वक्त और लगेगा।
कितनी होनी चाहिए प्रति व्यक्ति आय : उन्होंने कहा कि एक विकसित देश बनने के लिए भारत की प्रति व्यक्ति आय कम-से-कम 13,205 डॉलर होनी चाहिए। उस मुकाम तक पहुंचने के लिए देश को दो दशक से भी अधिक समय तक आठ से लेकर नौ प्रतिशत तक की मजबूत वृद्धि दर रखनी होगी। रंगराजन ने कहा कि कुल उत्पादन के हिसाब से देखें तो भारत इस समय दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है जो कि अपने-आप में एक असरदार उपलब्धि है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की रैंकिंग के मुताबिक प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत 197 देशों में से 142वें स्थान पर मौजूद है।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने नीति-निर्माताओं को अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने की उपलब्धि सिर्फ एक निकट अवधि का आकांक्षी लक्ष्य है। हालांकि इस उपलब्धि को भी हासिल करने के लिए कम से कम पांच वर्षों तक नौ प्रतिशत की सतत वृद्धि रखनी होगी। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व प्रमुख रह चुके रंगराजन ने कहा कि यह बहुत साफ है कि हमें एक लंबा सफर तय करना है। इससे यह भी पता चलता है कि हमें तेजी से दौड़ लगानी होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री "भारत रत्न" अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि भारत के लिए उनका योगदान अमिट है। पीएम मोदी ने "सदैव अटल" पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के तमाम नेताओं ने भी "सदैव अटल" पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि दी।
वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट किया, अटल जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि...। भारत के लिए उनका योगदान अमिट है। उनका नेतृत्व और दृष्टिकोण लाखों लोगों को प्रेरित करता है। साल 1924 में आज ही के दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में एक थे। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल 1996 में मात्र 13 दिनों का था। इसके बाद, वह 1998 में फिर प्रधानमंत्री बने और 13 महीने तक इस पद को संभाला।
वर्ष 1999 में वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय नौसेना के लिए पिछले कुछ सप्ताह काफी गतिविधियों वाले रहे हैं। नौसेना ने कुछ दिन पहले ही 7,400 टन वजन वाले आईएनएस मोरमुगाओ को अपने बेड़े में शामिल किया है। तीन महीने पहले प्रधानमंत्री ने 45,000 टन वजन वाले देश में ही निर्मित विमान वाहक युद्धपोत को भी नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। नौसेना दूसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएन अरिघात को भी अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि इसे शामिल करने की आधिकारिक तिथि गुप्त रखी गई है। इस बीच, 5वीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी आईएनएस वागिर नौसेना को सौंप दी गयी है। अगले साल फ्रिगेट की नयी श्रेणी के साथ इसे सेवा में शामिल किया जायेगा।
यह पहली बार है जब नौसेना को इतने कम समय में इतने छोटे-बड़े जहाज एवं पनडुब्बियां मिले हैं। वर्ष 2021 भी नौसेना के लिए काफी हलचल भरा रहा था जब उसके बेड़े में 2 स्कॉर्पीन पनडुब्बियां और एक डिस्ट्रॉयर शामिल किए गए थे। इन गतिविधियों से तो यही लग रहा है कि नौसेना के बेड़े का विस्तार करने की प्रक्रिया अब जोर पकड़ रही है और कुछ मायनों में यह सही भी है। हालांकि हमें दीर्घ अवधि के स्वरूप पर भी विचार करना चाहिए। वर्ष 2021 और 2022 की तुलना में 2019 और 2020 में नौसेना के बेड़े में केवल एक पनडुब्बी और और एक कॉर्वेट शामिल किये गये थे। वर्ष 2018 में बेड़े के विस्तार में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई थी। अगर 2011 से रुझान की बात करें तो सालाना औसतन दो बड़े युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल किये जा रहे हैं।
एक दशक पहले की तुलना में प्रगति जरूर हुई है मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रत्येक युद्धपोत के निर्माण में काफी अधिक समय लग जाता है। एक डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट या कॉर्वेट के निर्माण में सात से नौ वर्षों का समय लग रहा है। चीन की तुलना में भारत में इनके निर्माण में दोगुना समय लग जाता है। हालत यह है कि सेवा में शामिल किए जाने के समय लंबी दूरी तक मार कर सकने वाली एयर-डिफेंस मिसाइल, तारपीडो, ऐंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टर और विमानवाहक पोत के विमान तक तैनात नहीं हो पाते हैं। सोवियत संघ से खरीदे गए विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के साथ यही हुआ जो 2013 में नौसेना में शामिल हुआ।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के किसी भी विमानवाहक पोत पर पिछले दो वर्षों में एक भी विमान नहीं उतरा है। हालांकि इन तमाम खामियों के बावजूद यह कहा जा सकता है कि भारत धीरे-धीरे अपनी नौसेना को धार दे रहा है। आने वाले समय में नौसेना में 6,600 टन के सात फ्रिगेट शामिल किए जायेंगे।
अब नई निर्माण तकनीक के जरिेये युद्धपोतों के निर्माण में दो साल कम लगेंगे। मझगांव डॉक्स डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट का निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी है, मगर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ऐंड इंजीनियर्स, कोचीन शिपयार्ड और गोवा शिपयार्ड सभी बड़े और उच्च तकनीक वाले युद्धपोत बनाने में सक्षम हैं। इसी तरह विशाखापत्तनम में परमाणु पनडुब्बी निर्माण परिसर है। लार्सन ऐंड टुब्रो ने भी चेन्नई के निकट शिप डिजाइन एवं यार्ड सुविधा विकसित की है। हालांकि तब भी युद्धपोत एवं सेना के लिए साजो-सामान बनाने में भारत चीन से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। चीन ने कुछ महीनों पहले तीसरा विमानवाहक युद्धपोत अपनी नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। इस युद्धपोत का आकार भारत के दोनों युद्धपोतों के संयुक्त आकार से भी बड़ा है। इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसकी मदद से कम समय अंतराल पर लड़ाकू विमान अधिक ईंधन और घातक हथियारों के साथ उड़ान भर पायेंगे।
काफी कम समय में सक्षम कई डिस्ट्रॉयर बनाने के बाद चीन समुद्र में खतरनाक ड्रोन और मानव रहित युद्धपोतों के साथ युद्ध की तैयारी में जुट गया है। ये ड्रोन और मानव रहित युद्धपोत सामान्य युद्धपोतों के साथ मिलकर हमले करने की भी खासियत रखते हैं। चीन हिंद महासागर में नौसैनिक अड्डे के साथ कई सुविधाएं तैयार कर रहा है। भारत की नौसेना को जल्द ही हिंद महासागर में चीन से कड़ी चुनौती मिलने वाली है। भारत का रक्षा बजट सीमित है, इसलिए युद्धपोतों आदि के निर्माण के लिए बहुत ऑर्डर नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि छोटे युद्धपोतों के लिए जरूर कई ऑर्डर मिले हैं।
भारत की नौसेना में पनडुब्बियों के बेड़े का आकार छोटा है और इनमें ज्यादातर जहाज 1980 के दशक के हैं। मझगांव डॉक्स छठी और अंतिम स्कॉर्पीन पनडुब्बी तैयार कर रही है और इसके बाद उसके पास फिलहाल कोई ऑर्डर नहीं है। अन्य छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए ऑर्डर में देरी हो रही है क्योंकि संभावित बोलीदाताओं को इनसे जुड़ीं शर्तें स्वीकार नहीं हैं। इस बीच, रक्षा मंत्री ने हाल में यह कहकर सबको चौंका दिया कि भारत ने तीसरे विमान वाहक युद्धपोत का निर्माण शुरू कर दिया है। हालांकि इसके लिए कब ऑर्डर दिया गया इसे लेकर अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारी प्रतिस्पर्द्धा के कारण मलेशिया, ब्राजील और फिलिपींस से आने वाले ऑर्डर पर भी ग्रहण लग गया। इस तरह, भारत की नौसेना के सामने इस वक्त कई चुनौतियां हैं। सीमित बजट, ऑर्डर देने में देरी और इसके बाद धीमी गति से निर्माण, आपूर्ति में देरी और चीन से मिल रही चुनौती भारतीय नौसेना की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इन विषयों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को क्रिसमस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह त्योहार हमें एकदूसरे के प्रति दया और प्रेम की भावना रखने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने एक संदेश में कहा कि क्रिसमस का यह पावन त्योहार सम्पूर्ण मानव जाति के लिए शांति और भाईचारे का प्रतीक है।
मुर्मू ने कहा कि इस दिन हम प्रभु यीशु मसीह के करुणा और बलिदान के संदेश को याद करते हैं। यह त्योहार हमें एकदूसरे के प्रति दया और प्रेम की भावना रखने की प्रेरणा देता है। आइये हम प्रभु यीशु मसीह के पवित्र आदर्शों व शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं सभी देशवासियों, विशेषकर ईसाई भाइयों और बहनों को क्रिसमस के त्योहार की हार्दिक बधाई देती हूं।
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