एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघर्ष, युद्ध, आतंकवाद और उससे उत्पन्न होने वाली विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया संकट की स्थिति में है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अस्थिरता की यह स्थिति कब तक रहेगी।
प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों, कोविड-19 वैश्विक महामारी के आर्थिक प्रभावों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं पर भी चिंता व्यक्त की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जोशीमठ में जमीन धंसने की वजह से कई लोग बेघर हो गए हैं, कुछ लोग परिवारों के साथ राहत शिविर में दिन गुजार रहे हैं। वहीं लगातार नए मकानों में भी दरार आने की खबरें सामने आ रही हैं। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए शासन-प्रशासन लगातार लोगों से संपर्क बनाए हुए हैं और उन्हें हर संभव मदद देने की कोशिश भी कर रहे हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्रभावित लोगों से बात भी की है और गुरुवार सुबह राहत पैकेज राशि की घोषणा भी की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध के 120 से अधिक देशों का पहला शिखर सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ, जिसकी मेजबानी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका आह्वान किया कि वे अपने विकास के मुद्दों पर एक आवाज बनें तभी वैश्विक एजेंडा एवं व्यवस्था में उनके हितों को जगह मिल पायेगी।
मानव केंद्रित विकास के लिए प्रथम वॉयस आफ ग्लोबल साउथ समिट के वर्चुअल आयोजन में श्री मोदी ने 10 देशों के शिखर नेताओं के साथ आरंभिक सत्र में शिरकत की। इस सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के बाद कुल आठ सत्र होंगे। प्रधानमंत्री ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा कि विश्व को पुन: ऊर्जा प्रदान करने के लिए हमें एकजुटता से रिस्पॉन्ड, रिकॉग्नाइज, रिस्पेक्ट एवं रिफार्म के वैश्विक एजेंडा बनाने की आवाज उठानी चाहिए।
श्री मोदी ने सत्र में समापन टिप्पणी में कहा कि वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व की आवाज से स्पष्ट हो गया है कि मानव केंद्रित विकास विकासशील देशों की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। इसने हमारी समान चुनौतियों को भी रेखांकित किया है, जिनमें हमारी विकास जरूरतों के लिए संसाधनों की कमी, प्राकृतिक जलवायु और भूराजनीतिक परिदृश्य में बढ़ती अस्थिरता शामिल हैं। इसके बावजूद विकासशील देश सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि 20 वीं शताब्दी में विकसित देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया। आज अधिकतर विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं मंद पड़ रही हैं। ऐसे समय में यदि हम एकजुटता से काम करें तो हम वैश्विक एजेंडा तय कर सकते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि वैश्विक दक्षिण के लिए कार्य बिन्दु योजना तैयार हो और हमारी एक सशक्त आवाज हो ताकि हम सब मिलकर बाहरी परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय तंत्रों पर निर्भरता के दुष्चक्रों से बाहर निकल सकें।
इससे पहले सत्र की प्रारंभिक टिप्पणी में श्री मोदी ने कहा कि हमने एक कठिन वर्ष को देखा जिसमें युद्ध, टकराव, आतंकवाद एवं भूराजनीतिक तनाव व्याप्त रहा। भोज्य पदार्थों, उर्वरकों एवं ईंधन के मूल्यों में वृद्धि हुई। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं आयीं तथा कोविड महामारी का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव पड़ा। इससे स्पष्ट है कि विश्व संकट में है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह अस्थिरता कब तक चलेगी।
उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों का भविष्य सबसे ज्यादा दांव पर लगा है क्योंकि दुनिया की तीन चौथाई आबादी हमारे देशों में रहती है। इसलिए हमारी आवाज भी बराबरी से सुनी जानी चाहिए। चूंकि आठ दशक पुराने वैश्विक शासन का मॉडल बदल रहा है तो हमें एक नयी व्यवस्था को आकार देने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अधिकतर वैश्विक चुनौतियां दक्षिणी देशों ने नहीं पैदा की हैं, लेकिन उनका प्रभाव हम पर पड़ रहा है। हमने कोविड महामारी, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और यूक्रेन युद्ध के असर को झेला है। इन चुनौतियों के समाधान की खोज में ना तो हमारी कोई भूमिका है और न ही हमारी आवाज को कोई स्थान मिला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक दक्षिण के हमारे बंधुओं के साथ अपने विकास के अनुभवों को साझा किया है। हमारी विकास साझीदारी सभी भूभागों और विभिन्न क्षेत्रों में होगी। हमने 100 से अधिक देशों को महामारी के दौरान दवाएं एवं टीकों की आपूर्ति की। भारत हमारा साझा भविष्य तय करने के लिए विकासशील देशों की ज्यादा बड़ी भूमिका की खातिर हमेशा खड़ा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में भीषण आग की खबर है। जानकारी के मुताबिक, आग से कई दुकानें जलकर खाक हो गई हैं। रात से आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, 12 दमकल गाड़ियां मौके पर हैं। हादसे में एक व्यक्ति के घायल होने की भी सूचना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली के एयरपोर्ट पर चोरी की घटनाओं में इजाफा होता जा रहा है। एयरपोर्ट से गत वर्ष जहां 57 बैगों से सामान चोरी किया गया। वहीं लगभग 80 मोबाइल बड़ी सफाई से चोरों ने लोगों की जेब से गायब कर दिये। इसके अलावा 100 से अधिक चोरी की घटनाएं आईजीआई एयरपोर्ट पर हुईं।
चोरी की अधिकांश घटनाओं में बैगों से नकदी, गहने और कीमती सामान चोरी किया गया। इन घटनाओं को लेकर दिल्ली एयरपोर्ट के थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं पर लगभग 12000 सीसीटीवी कैमरों से लैस दिल्ली एयरपोर्ट में इन घटनाओं को लेकर कोई सुराग नहीं मिला है। एयरपोर्ट पर चोरी करने वाले कई बार बैग को जोर से पटकते हैं जिससे या तो उसकी चेन खुल जाती है या वह फट जाता है। इसके बाद वे सामान निकाल लेते हैं। चेन पर पैन का नुकीला हिस्सा मारकर भी खोल लेते हैं।
सामान निकालने के बाद वे चेन बंद करने का भी हुनर जानते हैं। गत दिसम्बर महीने में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एयरपोर्ट के भीतर जाकर चोरी की घटनाओं की छानबीन की थी। अधिकारियों ने पाया कि ट्रॉली में सामान लेकर लोडर उसे विमान तक ले जाते हैं। यह दूरी कभी 100 मीटर तो कभी एक किलोमीटर तक भी रहती है। लोडर इस दौरान सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में नहीं रहते हैं।
पुलिस का मानना है कि इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर बैग के भीतर रखी नकदी और कीमती सामान चोरी हो जाता है। छानबीन के आधार पर पुलिस और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने विभिन्न विमान कंपनियों के साथ एक बैठक की है। इसमें चोरी रोकने के उपाय बताये गये हैं। चोरी की घटनाओं पर नजर रखने के लिए पुलिस ने अब एंटी थैफ्ट टीम का गठन किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने नौजवान, जवान और किसान सबकी चिंता की। लेकिन दुर्भाग्य है कि अपने प्रधानमंत्रित्व काल में पाकिस्तान के हुक्मरान से बात करते हुए तब के सोवियत संघ (रूस) और आज के उजबेकिस्तान के ताशकंद में उनकी रहस्यमयी मौत हो गई। यह बातें कायस्थ संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा पार्षद पवन श्रीवास्तव ने सिविल लाइन स्थित एक होटल में शास्त्री की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा।
उन्होंने आगे कहा कि उस वक्त कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी, उनकी मौत की गुत्थी आज तक सुलझ नहीं पायी है। उनकी निडरता और देश के प्रति बेपनाह मुहब्बत का ही प्रमाण है कि उन्होंने आजादी के जंग में नारा दिया था-मरो नहीं, मारो। उनकी साफ सुथरी छवि के कारण ही उन्हें 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया।
पवन श्रीवास्तव ने आगे कहा कि उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रिया-कलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णतः व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया।
सेना के तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछाः सर! क्या हुक्म है? शास्त्री ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया : आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है? शास्त्री ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी। उन्होंने उनकी मृत्यु को रहस्यमयी मृत्यु बताया।
श्रद्धाजंलि सभा में शैलेन्द्र श्रीवास्तव, आलोक, कुशाग्र श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, शुभेन्दु श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव आदि शामिल थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दियों के मौसम में भारत के विभिन्न इलाकों में धुंध होना आम बात है लेकिन यह धुंध हजारों लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। दरअसल, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में ही देश में धुंध के चलते हुए सड़क हादसों में 13,372 लोगों की जान गई थी। इतना ही नहीं इन हादसों में 25,360 लोग घायल भी हुए। इनमें से आधे गंभीर रूप से घायल हुए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, धुंध के चलते हुए सड़क हादसों में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में उत्तर प्रदेश में कोहरे के चलते हुए सड़क हादसों में 3782 लोगों की जान गयी। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार (1800), मध्य प्रदेश (1233) में सबसे ज्यादा लोगों की जान गई। उल्लेखनीय है कि गोवा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में धुंध के चलते एक भी सड़क हादसा रिपोर्ट नहीं किया गया।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने "रोड एक्सीडेंट इन इंडिया" नाम से ताजा रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में 10 लाख से ज्यादा निवासियों वाले शहरों में सभी टॉप 6 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। इनमें सबसे आगे कानपुर (173), आगरा (108), प्रयागराज (97), गाजियाबाद (91) और लखनऊ (67), वाराणसी (56) का नाम आता है। बिहार की राजधानी पटना में भी कोहरे के चलते हुए सड़क हादसों में साल 2021 के दौरान 56 लोगों की मौत हुई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों में ऐसे हादसों को लेकर जागरुकता लाने की जरूरत है। देश में जैसे जैसे हाइवे और रोड नेटवर्क का जाल बिछ रहा है, ऐसे में कुछ ऐसे उपाय करने की जरूरत है जिससे लोगों को सड़क दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में अलर्ट किया जाये। गौरतलब है कि देश में हर साल करीब साढ़े चार लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है। इन मौतों में से करीब 9 फीसदी धुंध के चलते हुए हादसों की वजह से होती है। धुंध के अलावा बारिश के मौसम में भी देश में सड़क हादसों की संख्या में इजाफा देखा जाता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कश्मीर के माछल सेक्टर में आज एक बड़े हादसे की खबर समने आयी है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास गश्त के दौरान गहरी खाई में गिरने से एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) सहित तीन सैनिकों की मौत हो गयी। सेना ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि जेसीओ और दो अन्य जवान माछिल सेक्टर में नियमित गश्त पर थे, तभी तीनों फिसलकर खाई में गिर गये। दरअसल, ट्रैक पर अचानक से बर्फ गिर आयी जिससे सेना के तीनों जवान फिसलकर गहरी खाई में गिर गये। तीनों के शव को बरामद कर लिया गया है। ये तीनों जवान भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स के सैनिक थे। इनमें 1 जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) और 2 ओआर (अन्य रैंक) का एक दल रेगुलर ऑपरेशन के लिए निकला था।
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