टीम एबीएन, रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। रविवार शाम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। तारीखों के ऐलान के साथ ही पांचों राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में होगा, जहां 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग कराई जाएगी। इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
आयोग ने बताया कि इन पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई महीने में समाप्त हो रहा है, इसलिए अप्रैल और मई के बीच पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत सरकारी योजनाओं की नई घोषणाओं, बड़े फैसलों और चुनाव को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा।
गौरतलब है कि 2021 में भी इन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। उस समय चुनाव कार्यक्रम का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछले चुनाव में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि इस बार वहां सिर्फ दो चरणों में वोटिंग होगी। पिछले चुनाव के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, तमिलनाडु का 10 मई, असम का 20 मई और केरल का कार्यकाल 23 मई तक है। वहीं पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल सबसे बाद में 15 जून को समाप्त होगा।
इन चुनावों को लेकर सभी राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और रैलियों का दौर तेज होने की संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। असम से लेकर बंगाल तक चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम चुनाव आयोग ने घोषित कर दिया है। इन चुनावों में करीब 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाये गये हैं, जहां करीब 25 लाख मतदान अधिकारी तैनात रहेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि आयोग ने सभी चुनावी राज्यों का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मतदान कब-कहां होगा और नतीजों किस दिन घोषित किये जायेंगे।
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव एक ही चरण में होंगे। राज्य में नौ अप्रैल को मतदान कराया जायेगा। मतदान के बाद चार मई को मतगणना होगी। इस चुनाव में राज्य के लाखों मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और नई सरकार चुनेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के मामले में भारत को सबसे प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव देशों में से एक बताया गया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है।रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेज कूटनीतिक प्रयास, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सैन्य लॉजिस्टिक्स के जरिए कई सफल आपरेशन चलाये।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की, जिससे भारत की मानवीय छवि मजबूत हुई। जब मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा, तब भारतीय सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और निकासी के लिए तैयारियां तेज कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने Russia–Ukraine War में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए Operation Ganga शुरू किया। इस अभियान में 23,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी मदद मिली। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडिल ईस्ट में युद्ध ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा है, लेकिन इस युद्ध का असर सभी देशों पर देखने को मिल रहा है। भारत में तो LPG गैस सिलेंडर के लिए लोग लंबी-लंबी लाइनों में लग रहे हैं, फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर उड़ी अफवाह का असर ऐसा है कि अब तो लोग पेट्रोल-डीजल भी स्टॉक करके रखने लगे हैं। ऐसे में कई जगह आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। झारखंड के गढ़वा में तो एक युवक की इसी तरह के हादसे में जान चली गई। आग में झुलसे युवक की पहचान थाना क्षेत्र के ही ओबरा गांव निवासी शंभू प्रसाद गुप्ता के रूप में हुई।
आनन-फानन में पुलिस ने शंभू को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालात ज्यादा गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसे रांची रेफर कर दिया। हालांकि रास्ते में ही शंभू की मौत हो गई। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि युवक का शरीर 80 प्रतिशत तक झुलस चुका था। बचने की उम्मीद कम थी।
पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि शंभू ने लोटो गांव में पेट्रोल पंप पर प्लास्टिक के गैलन में पेट्रोल भराया। उसे मोपेड पर रखकर जैसे ही सड़क पर आया, तभी एक तेज रफ्तार कार ने मोपेड में टक्कर मार दिया। इससे गैलन फट गया और आग लग गई। शंभू भी आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद वह इधर-उधर दौड़ने लगा। घटनास्थल पर मौजूद लोग जब तक आग बुझाते, तब तक शंभू गंभीर रूप से झुलस चुका था। रांची ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
शंभू के परिजनों ने बताया कि युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल न मिलने का डर था। पेट्रोल खत्म न हो जाए, इसके लिए शंभू पेट्रोल लेकर घर आ रहा था। रास्ते में हादसे में उसकी मौत हो गई। गांव के मुखिया ने बताया कि शभूं पेट्रोल स्टॉक कर रहा था। उस डर था कि कहीं गैस सिलेंडर की तरह पेट्रोल की भी दिक्कत न हो जाए। यही स्टॉक करना उसके लिए भारी पड़ गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा में हरदीप पुरी ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा, हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है। पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। एलएनजी के कार्गो लगातार आ रहे हैं और वैकल्पिक मार्गों से भी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सीएनजी की आपूर्ति भी पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।
अविश्वास प्रस्ताव पर ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी, नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका; नियम सबसे ऊपर होर्मुज में 20 प्रतिशत आवाजाही प्रभावित मंत्री ने स्वीकार किया कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण लगभग 20 प्रतिशत समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाकर आपूर्ति को सुरक्षित रखा है। उन्होंने बताया कि भारत कनाडा, नॉर्वे और रूस सहित कई देशों से ईंधन आयात कर रहा है, जिससे सप्लाई चेन में किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई है।
एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी हरदीप पुरी ने कहा कि सरकार ने घरेलू स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। उनके अनुसार देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही सरकार ने वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति चैनलों को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर केरोसिन तेल की उपलब्धता भी रिटेल नेटवर्क के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है।
कांग्रेस का सरकार पर हमला, राहुल बोले- पीएम नरेंद्र मोदी खुद घबराए हुए हैं, सदन में नहीं आ पा रहे तीन मंत्रियों की समिति बना कर निगरानी सरकार ने मौजूदा हालात की निगरानी के लिए तीन मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति भी बनायी है। यह समिति अंतरराष्ट्रीय स्थिति और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक ऐसे हालात से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार की है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं।
घबराहट के कारण बढ़ी मांग हरदीप पुरी ने कहा कि देश में गैस और ईंधन की मांग में हालिया बढ़ोतरी का कारण पैनिक बाइंग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक घबराहट में ईंधन जमा न करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने गैस वितरण के लिए प्राथमिकताएं तय कर दी हैं, ताकि जरूरतमंद क्षेत्रों और उपभोक्ताओं तक समय पर आपूर्ति पहुंच सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज संकट के बीच भारत में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी, सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाये। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। संघर्ष के 12वें दिन देश के कई हिस्सों में रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गयी है। संभावित कमी की आशंका के चलते कुछ जगहों पर लोगों ने पहले से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए जल्दबाजी शुरू कर दी है।
वहीं होटल और ढाबा संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो उनके लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है। सरकार और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। हालांकि एलपीजी के परिवहन और आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे गैस के शिपमेंट की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट आॅफ होर्मुज के आसपास की स्थिति है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता तेल और गैस के वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। भारत में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए आता है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो गैस के शिपमेंट में देरी हो सकती है। इसी संभावना ने कई जगहों पर उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एलपीजी आपूर्ति को लेकर लोगों के बीच चिंता के कारण अचानक मांग बढ़ गई। मंगलवार को कई उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर पहुंच गये ताकि वे जल्द से जल्द अपना सिलेंडर प्राप्त कर सकें। लखीमपुर शहर और आसपास के इलाकों में एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गयीं। लोगों का कहना था कि वे पहले से बुक किये गये सिलेंडर जल्द लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि भविष्य में संभावित कमी से बचा जा सके।
हालांकि जिला प्रशासन ने लोगों से घबराने की अपील नहीं करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से सिलेंडर जमा न करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है।
स्थानीय निवासी प्रशांत ने बताया कि आम तौर पर सिलेंडर बुक करने के बाद उसी दिन या अगले दिन डिलीवरी हो जाती थी। लेकिन इस बार पांच दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा। इसी वजह से उन्हें लगा कि शायद गैस की आपूर्ति में कोई समस्या आ रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर मिलना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि गैस एजेंसियां फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं।
होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले कई व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। इसके कारण किचन का काम प्रभावित होने लगा ह। कुछ जगहों पर कारोबारियों को सीमित गैस के साथ काम चलाना पड़ रहा है, जबकि कुछ रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में भी बदलाव करने पर मजबूर हो गये हैं।
जिला आपूर्ति अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने स्थिति को लेकर कहा कि यह स्थिति उपभोक्ताओं में फैली घबराहट की वजह से बनी है। उनके मुताबिक जिले में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और स्टॉक भी पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 83 एलपीजी वितरण केंद्रों के माध्यम से लगभग 16 हजार घरेलू गैस सिलेंडर भेजे गए हैं, जबकि सामान्य दिनों में औसतन 15 हजार सिलेंडर की मांग रहती है। प्रशासन का कहना है कि लोग अनावश्यक घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव दिखाई दे रहा है।
गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच उत्तराखंड सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। सरकार ने उन व्यवसायों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो बड़े पैमाने पर एलपीजी पर निर्भर हैं। राज्य सरकार ने उत्तराखंड वन विकास निगम को निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर पर्याप्त मात्रा में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध करायी जाये। यदि एलपीजी की आपूर्ति में ज्यादा परेशानी आती है तो होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। गोवा में भी रेस्टोरेंट मालिकों ने आशंका जताई है कि यदि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कई रेस्टोरेंट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे जल्द ही केंद्र के पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने उठाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पर्यटन उद्योग से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है और सरकार जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेगी। गोवा में तीन हजार से अधिक पंजीकृत रेस्टोरेंट हैं और इनमें से अधिकांश अपने किचन संचालन के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर हैं।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भी गैस की कमी का असर देखने को मिला है। यहां कुछ होटल और खाने के प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से अपना काम बंद करना पड़ा। एक लोकप्रिय होटल के बाहर लगाये गये नोटिस में लिखा गया कि एलपीजी सप्लाई नहीं मिलने की वजह से 11 मार्च 2026 को होटल बंद रखा जायेगा। होटल संगठनों के अनुसार कई रेस्टोरेंट के पास मौजूद कमर्शियल गैस का स्टॉक केवल एक या दो दिन तक ही चल पायेगा। स्थिति को देखते हुए कई रेस्टोरेंट मालिकों ने अपने मेन्यू में बदलाव किया है और ऐसे व्यंजन पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें गैस की खपत कम हो।
देश में रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ जरूरी कदम उठाये हैं। सरकार ने तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ायें, ताकि देश में गैस की सप्लाई बनी रहे और घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह भी तय किया है कि गैस वितरण में सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जायेगी। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर को पहले उपलब्ध कराया जायेगा, जबकि व्यावसायिक उपयोग बाद में किया जायेगा।
इसके अलावा, गैस सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ता एक सिलेंडर लेने के 21 दिन बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे। अब इस समय को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा नहीं कर पायेंगे और गैस की सप्लाई सभी तक सही तरीके से पहुंच सकेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में LPG, पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि जो भी समस्याएं आ रही हैं, वो Panic Buying के चलते हैं।
Panic Buying मतलब अफवाहों के कारण बिना आवश्यकता के भी लोग ज़्यादा से ज़्यादा जमा कर रहे हैं । इसी के चलते लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे पास 7-8 हफ़्ते का रिज़र्व है। इसके अलावा हम अन्य देशों से तेल और LPG, पेट्रोल और डीजल खरीद पर बात कर रहे हैं।
ईरान ने भी रूस से आने वाले तेल टैंकरों पर हमला नहीं करने का आश्वाशन दिया है। उधर पुतिन ने कहा है कि हम जो गैस यूरोप को भेजते थे, उनमें कटौती कर एशिया के देशों जैसे भारत और चीन को भेजेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं के लागू होने से रेलवे नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि होगी और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के आवागमन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
कैबिनेट द्वारा जिन दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं। इन दोनों परियोजनाओं के जरिए रेलवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों के आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में भी बढ़ोतरी होगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से परिचालन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी और ट्रेनों की भीड़भाड़ कम करने में भी सहायता मिलेगी।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। इन परियोजनाओं को पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इस योजना में एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
इन दोनों परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के कुल पांच जिलों को लाभ मिलेगा। इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। इन गांवों की कुल आबादी करीब 147 लाख है, जिन्हें बेहतर रेल सेवाओं का फायदा मिलेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए रेल संपर्क में भी सुधार होगा। इनमें बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे स्थान शामिल हैं।
स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल और कंटेनर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग साबित होंगी। इन परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा।
क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने में भी मदद करेगा। इससे लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और करीब 28 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर माना गया है।
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