एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पटना में गुरुवार को अदालत में पेशी के लिए ले जाये जा रहे तीन विचाराधीन कैदी पुलिसकर्मियों की आंखों में बाम लगाकर फेंक कर हिरासत से फरार हो गये। कैदियों के भागने के बाद पटना पुलिस में हड़कंप मच गया। पुलिस अब तीनों की तलाश में जुटी है। तीनों ही आर्म्स एक्ट के दोषी हैं।
जाम को हटाने के लिए वैन से नीचे उतरे थे पुलिसकर्मी
जानकारी के अनुसार, यह घटना गुरुवार दोपहर 2.45 बजे की है। नगर पुलिस उपाधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि एनडीपीएस एवं शस्त्र अधिनियम के तहत फुलवारीशरीफ जेल में बंद तीनों कैदियों को एक वैन से पेशी के लिए अदालत ले जाया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि वैन में कुल पांच पुलिसकर्मी बैठे थे, दो लोगों के बीच हुई झड़प के कारण हुए यातायात जाम को हटाने के लिए उनमें से दो नीचे उतरे थे। अशोक ने बताया कि तीनों कैदियों ने शेष तीन पुलिसकर्मियों पर दर्द निवारक बाम फेंका, जो उनकी आंखों में चला गया। उन्होंने कहा- पुलिसकर्मी में से एक ने भाग रहे कैदियों का विरोध करने की कोशिश की और इस प्रक्रिया में उसका हाथ टूट गया।
फरार कैदियों की तलाश जारी
पुलिस उपाधीक्षक ने कहा- हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि विचाराधीन कैदियों के पास बाम कैसे आया और दोनों पुलिसकर्मी वाहन से नीचे क्यों उतरे, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि तीनों फरार नीरज चौधरी, सोनू शर्मा और सोनू कुमार की तलाश की जा रही है, सभी पटना के निवासी हैं और उनकी उम्र 20 के आसपास है। फरार कैदियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मुजफ्फरपुर। उद्योग विभाग द्वारा बेला अद्यौगिक परिक्षेत्र में स्थित आईडीटी सेंटर में उत्तर बिहार के 20 जिलाधिकारियों का समागम कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने किया। कार्यक्रम में सभी जिलाधिकारियों को उद्योग विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी।
बताया गया कि जिला के औद्योगिक विकास में सभी जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने आमंत्रित जिलाधिकारियों को औद्योगिक प्रगति के लिए मजबूत कड़ी के रूप में काम करने का आवाहन करते हुए कहा कि सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं में प्रोटोकॉल निहित है यथा आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा योजना, शौचालय निर्माण योजना आदि में लाभुकों का आर्थिक हित और लक्ष्य निर्धारित होते है।
जबकि उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में लचीलापन और आजादी है। कोई भी निवेशकर्ता हो सकते हैं, कितनी भी राशि निवेश किया जा सकता है। नये नये आइडिया लाये जा सकते है। नयी सेवा, नये उत्पाद और नवाचार की प्रबल संभावना उद्योग के क्षेत्र में है। उन्होनें उपस्थित जिलाधिकारियों को अपने आइडिया और प्रस्ताव भेजने हेतु निदेश दिया। उन्होंने चनपटिया (पश्चिमी चंपारण) कलस्टर का उदाहरण सबके सामने रखा।
उन्होंने कहा कि निवेशकर्ता और उद्यमियों को सुविधाएं मुहैया कराने में तत्परता से सहयोग करें। कोविड के दौरान कई स्किल्ड लोग बिहार आये थे और उनमें से कई लोग अभी बिहार में ही है। स्किल मैपिंग सर्वे कराकर उनका उद्योग की दिशा में सकरात्मक सहयोग प्राप्त करें। मुख्य सचिव ने बताया कि विगत 6 माह में बैंकों का ऋण मुहैया कराने में सकारात्मक सहयोग में प्राप्त हुआ है।
छोटे एवं लघु उद्यमियों को फेस्लीटेट करें। उन्होंने उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक को बधाई दी और कहा कि दक्षिण बिहार के जिलाधिकारियों के साथ भी इसी प्रकार के कार्यशाला का आयोजन जल्दी करें। समीक्षा बैठक से पूर्व आमंत्रित सभी जिलाधिकारियों द्वारा बेला बैग कलस्टर एवं पारले जी बिस्कुट फैक्ट्री का मुआयना किया गया।
जहां जिलाधिकारियों ने उद्योग लगाने और उद्योग संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने कार्यशाला का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि बिहार में उद्योग के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं और इस दिशा में विगत साल में अच्छी प्रगति हुई है। उन्होनें कहा कि देश में 35 इथनॉल प्लांट निमार्णाधीन हैं जिसमें 15 बिहार में है। अद्यौगिक क्षेत्र के लिए इंन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सड़क, उर्जा, ड्रेनेज, जल निकासी, भूमि कई चुनौतियों को सहजता से सुचारू बनाया जा रहा है। पीएमइजीपी और पीएमएफएमई कार्यक्रमों में हमारी स्वीकृति बढ़ी है। जहां 3000 लोन हेतु आवेदन स्वीकृत किये जाते थे वही आज 8800 मामले स्वीकृत किया जा रहे है। पीएमएफएमई में भी जानकारी एवं जागरूकता के कारण 3000 आवेदन स्वीकृत किये गये है। स्टार्टअप टीम नीति का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
कॉलेजों में स्टार्टअप नवाचार कार्यक्रम किये जा रहे है। उन्होंने स्वीकृति की सुगम प्रक्रिया की चर्चा की तथा उद्यमी एवं निवेशकर्ता को निवेश के लिए अनुकूल वातावरण की बात कही। उन्होंने बताया कि ये न सिर्फ उद्योग बल्कि और कई विभागों की समेकित जिम्मेवारी है। जिलावार कस्मटाईज्ड उत्पाद ब्रांडिग करने की आवश्यकता पर जोर दिया और निदेश दिया।
निदेशक, उद्योग विभाग सह अतिरिक्त प्रबंध निदेश बियाडा पंकज दीक्षित ने उद्योगों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र में जमीन आवंटन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी को। उन्होंने कहा कि कम दर पर काफी सुविधाओं के साथ निवेशकर्ता उद्यमी को जमीन उपलब्ध कराया जाता है। आनलाइन आवेदन के बाद आवेदकों के अनुरोध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के अंदर जमीन का आवंटन कर दिया जाता है।
सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्यमियों को हर प्रकार का क्लीयरेंस एक ही आवेदन पर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत लोन लेने पर ब्याज की राशि तथा राज्य जीएसटी की राशि सरकार वापस कर दी जाती है। साथ ही उत्पादन क्षेत्र से रोड तक माल ढुलाई भाड़ा का 30 प्रतिशत सरकार वापस कर देती है।
खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की मदद के लिए पीएमएफएमई स्कीम के तहत 3000 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को मदद पहुंचाई गई। पंकज दीक्षित ने बताया कि बिहार स्टार्टअप नीति के तहत 350 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।
तकनीकी विकास निदेशालय के निदेशक संजीव कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत करीब 29 सौ लोगों को 2000 करोड़ से अधिक रुपए की सहायता दी जा चुकी है।
मौके पर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक, निदेशक उद्योग पंकज दीक्षित, तकनीकी विकास के निदेशक संजीव कुमार, हथकरघा एवं रेशम निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, डीएम मुजफ्फरपुर प्रणव कुमार ,विशेष सचिव, उद्योग दिलीप कुमार सहित अनेक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में भाग लेने वाले जिलाधिकारियों में पश्चिमी चंपारण के दिनेश कुमार राय, दरभंगा के राजीव रंजन, डीएम शिवहर रमाशंकर, डीएम अररिया श्रीमती इनायत खान, डीएम किशनगंज, श्रीकांत शास्त्री, डीएम मधुबनी अरविंद कुमार वर्मा, डीएम पूर्णिया कुंदन कुमार, डीएम सुपौल कौशल कुमार, गोपालगंज डीएम नवल किशोर चौधरी, डीएम समस्तीपुर योगेंद्र सिंह, डीएम दरभंगा राजीव रौशन, डीएम पूर्वी चंपारण सौरव जोरवाल, डीएम वैशाली यशपाल मीणा, डीएम खगड़िया अमित कुमार पांडेय, डीएम सीतामढ़ी मनेश कुमार मीणा, डीएम सारण अमन समीर, डीएम कटिहार रवि प्रकाश, डीएम मधेपुरा विजय प्रकाश मीणा, डीएम सहरसा वैभव चौधरी, डीडीसी सिवान भूपेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा में आज एक बड़ी चूक हो गयी। दरअसल, मॉर्निंग वॉक के दौरान उनकी सुरक्षा घेरा तोड़कर एक बाइक सवार घुस गया। हालांकि इसके बाद नीतीश की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने उसे पकड़ लिया।
जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार गुरुवार को मॉर्निंग वॉक करते हुए अपने सरकारी आवास से 7 सर्कुलर की ओर जा रहे थे। इस बीच उन्हें सड़क से फुटपाथ की ओर जाना था कि तभी एक बाइक सवार उनके पास पहुंच गया।
हालांकि, नीतीश की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद एसएसजी कमांडेंट और पटना एसएसपी को सीएम आवास बुलाया गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। भारतीय विदेश सेवा के छः वरिष्ठ अधिकारियों ने विकास भवन में उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ से मुलाकात की और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार के उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया।
मुलाकात करने वालों में डॉ राजीव रंजन, वीरगंज नेपाल के महावाणिज्य दूतावास में पोस्टेड नितेश कुमार, नेपाल की राजधानी काठमांडू के भारतीय एंबेसी में पोस्टेड नवीन कुमार, पाकिस्तान के भारतीय उच्चायोग में कार्यरत गौरव ठाकुर, अनिल कुमार और बांग्लादेश में भारत के सहायक उच्चायुक्त मनोज कुमार शामिल रहे।
भारतीय विदेश सेवा के 2011 के इन सभी अधिकारियों ने उद्योग मंत्री से मुलाकात के दौरान बिहार के हस्तशिल्प और हथकरघा के उत्पादों के साथ-साथ लीची, केला, आम, मखाना मशरूम जैसे उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर प्रारंभिक चर्चा की।
सभी अधिकारियों का स्वागत करते हुए उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि बिहार में लेदर और टेक्सटाइल, इथेनॉल तथा फूड प्रोसेसिंग उद्योग लगाने की दिशा में काफी काम हुआ है और अनेक नई कंपनियों ने अपना उत्पादन चालू किया है।
बिहार के पास 3,000 एकड़ का लैंड बैंक और 24,00,000 वर्ग फीट का प्लग एंड प्ले इंडस्ट्रियल शेड उपलब्ध है, जहां उद्यमी अपना मशीन लगाकर एक माह के अंदर उत्पादन प्रारंभ कर सकते हैं।
उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित ने भारतीय विदेश सेवा के सभी अधिकारियों को सिंगल विंडो सिस्टम और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सभी अधिकारियों को उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने अंग वस्त्र और पटना का टिकुली आर्ट भेंट कर सम्मानित किया।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मुजफ्फरपुर। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा स्थानीय आरडीएस कॉलेज प्रांगण में लगाये गये खादी मेला एवं उद्यमी बाजार में जिला उद्योग केंद्र मुजफ्फरपुर द्वारा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के मार्गदर्शन के लिए संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयों को लगाने तथा पुरानी औद्योगिक इकाइयों को उन्नत बनाने के लिए पीएम एफएफएमई योजना एक विशिष्ट योजना है जिसका क्रियान्वयन बिहार सरकार के खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय द्वारा किया जाता है।
उन्होंने उद्यमियों को बताया कि यह क्रेडिट लिंक योजना है जिसमें औद्योगिक इकाइयों को अधिकतम 1000000 तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। किसानों की प्रड्यूसर कंपनियों तथा सेल्फ हेल्प ग्रुप के लिए भी अनेक प्रावधान इस योजना के तहत किये गये हैं।
इस योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप के सदस्यों को 40000 प्रति सदस्य की मदद की जाती है। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को आवेदन प्रक्रिया में मदद करने के लिए उद्योग विभाग द्वारा जिला संसाधन सेवी बहाल किये गये हैं जिनकी सेवा निशुल्क उपलब्ध है।
आवेदन करने से लेकर ऋण स्वीकृति और ऋण वितरण तक के कार्य में जिला संसाधन सेवी द्वारा सहायता दी जाती है। कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर के जिला खादी ग्रामोद्योग पदाधिकारी कमलेश कुमार त्रिवेदी, उद्योग विस्तार पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार, नरेश पासवान, राजेश कुमार श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश चौधरी और अनेक जिला संसाधन सेवियों ने भी हिस्सा लिया।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मुजफ्फरपुर। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा स्थानीय आरडीएस कॉलेज प्रांगण में लगाये गये खादी मेला एवं उद्यमी बाजार में जिला उद्योग केंद्र मुजफ्फरपुर द्वारा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया गया।
बिहार राज्य खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के जिला ग्राम उद्योग पदाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम 2008 में लांच किया गया था और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन तथा उद्योग लगाने के लिए यह उत्तम योजना है जिसके तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी की व्यवस्था सरकार द्वारा की गयी है।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा संचालित इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग बैंकों के माध्यम से स्वरोजगार और उद्योग लगाने के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
मैनुफैक्चरिंग उद्योग लगाने के लिए इस योजना के तहत ₹50,00,000 तक का ऋण दिया जाता है जबकि सेवा क्षेत्र में स्वरोजगार की स्थापना के लिए ₹20,00,000 तक के ऋण की व्यवस्था की जाती है।
इस ऋण पर बैंकों द्वारा निर्धारित दर पर ब्याज भी देना पड़ता है। पूरी योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभार्थी को परियोजना लागत का 10% और विशेष श्रेणी के लोगों को परियोजना लागत का 5% राशि स्वयं लगाना होता है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत शहरी क्षेत्र में 25% तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 35% तक के सब्सिडी की व्यवस्था है। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है जिसे जिला उद्योग केंद्र तथा बिहार राज्य खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के माध्यम से बैंकों को अग्रसारित किया जाता है।
ऋण की स्वीकृति बैंकों द्वारा दी जाती है जबकि सब्सिडी की व्यवस्था खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा की जाती है। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि खादी मेला 17 जून तक चलेगा। मेला में खादी, ग्राम उद्योग, स्टार्टअप आदि के 100 से अधिक स्टाल लगाये गये हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मुजफ्फरपुर। शहर के राम दयालु सिंह कॉलेज कैंपस में बिहार राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी मेला लगाया गया है, जिसका उद्घाटन बिहार के उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ, बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी दिलीप कुमार, मुजफ्फरपुर के एडीएम अजय कुमार, किसान चाची पद्मश्री राजकुमारी देवी, आर डी एस कॉलेज की प्राचार्य डॉ अमिता शर्मा और जिला जनसंपर्क अधिकारी दिनेश कुमार ने किया।
उद्घाटन के बाद खादी मेला में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि खादी हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है। महात्मा गांधी ने जब स्वदेशी का आंदोलन चलाया था तो घर-घर में चरखा चलाने का काम हुआ। घर-घर में कुटीर उद्योग प्रारंभ हुए। इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। लोग स्वाबलंबी हुए। चरखा और खादी से जो ताकत मिली उसी ताकत के बल पर देश आजाद हुआ।
प्रदेश के लाखों लोग खादी और ग्रामोद्योग से रोजगार पाते हैं। खादी और कुटीर उद्योगों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। हमारी सरकार बिहार के हर युवा को रोजगार देने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत हमने लगभग 29000 उद्यमियों को 2006 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है।
10- 10 लाख रुपये की सहायता पाकर बिहार के युवा न सिर्फ अपने लिए रोजगार का इंतजाम कर रहे हैं बल्कि दर्जनों दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चार-चार लाख रुपए की राशि पहली किस्त के रूप में दी जाती है। जिन लोगों ने प्रथम किस्त का उपयोग कर लिया उन्हें दूसरा किस्त भी दे दिया गया है और दूसरे किस्त की उपयोगिता का प्रमाण पत्र देने वाले उद्यमियों को तीसरा किस्त भी दे दिया गया है।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत पिछले 7 महीनों में हजारों नये उद्योग खुल चुके हैं। हर उद्योग में 5 से 10 लोगों को रोजगार मिला है। हम चाहते हैं कि बिहार के युवा बिहार में ही काम करें। बिहार में ही उद्योग लगायें और अपने गांव समाज के दूसरे लोगों को भी रोजगार दें। उद्योग विभाग की हर योजना का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा नए उद्योग स्थापित हों। सिवान जिला के युवा भी कमर कस लें। विभाग द्वारा उन्हें हर प्रकार की मदद दी जायेगी।
खादी मेला और हैंडलूम मेला लगा कर उन्हें मार्केटिंग का अवसर प्रदान किया जायेगा। इसके अलावा खादी मॉल के माध्यम से मार्केटिंग में मदद दी जायेगी । उन्होंने युवा उद्यमियों से कहा कि उद्योग के लिए मिलने वाले ऋण को खैरात नहीं समझे। योजना चाहे जो भी हो, सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता का उपयोग नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों के विस्तार के लिए करें।
मुजफ्फरपुर जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिन्ह ने कहा कि मुजफ्फरपुर जिला में उद्योगों की स्थापना के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार कोशिश हो रही है। सभी बैंकों को पीएमईजीपी और पीएमएफएमई जैसे कार्यक्रमों के तहत लक्ष्य के अनुसार ऋण स्वीकृत करने का निर्देश दिया गया है। जो बैंक लक्ष्य के अनुसार ऋण की स्वीकृति नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि प्रदेश की सभी खादी संस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड द्वारा सहायता दी जा रही है। मुजफ्फरपुर का खादी मेला भी एक ऐसा प्रयास है जिसके माध्यम से खादी वस्त्र के उत्पादकों को बाजार मुहैया कराया जा रहा है। ऐसा मेला मोतिहारी, गया, कैमूर, पूर्णिया, सिवान और आरा में भी लगाया जा चुका है।
कार्यक्रम में बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अभय कुमार सिंह, राजीव कुमार शर्मा, अजमत अब्बास रिजवी, जिला खादी ग्राम उद्योग पदाधिकारी कमलेश कुमार त्रिवेदी आदि भी मौजूद रहे।
खादी मेला सह प्रदर्शनी : बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य के विभन्न जिला यथा मोतिहारी, भभुआ, गया, पूर्णिया, आरा एवं सिवान में आयोजित किया गया है। छः जगहों पर आयोजित खादी मेला में संस्थाओं द्वारा लगभग रुपये 4.81 करोड़ की बिक्री की गयी है। इसके अतिरिक्त आईएनए, दिल्ली हाट, नई दिल्ली में 16 मार्च 2023 से 31 मार्च 2023 तक बिहार उत्सव तथा पटना के गांधी मैदान में दिनांक 22 मार्च 2023 से 31 मार्च 2023 तक बिहार दिवस का भी आयोजन किया गया। जिससे बिहार स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग संस्था/समितियों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कराया गया है।
प्रशिक्षण की योजना : वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा राज्य के खादी संस्था/समितियों के माध्यम से विभिन्न जिलों में एक से तीन माह का खादी सूत कताई, रेशमी सूत कताई, खादी बुनाई, रेशमी बुनाई एवं ग्रामोद्योगी इकाई में सिलाई-कताई, साबुन निर्माण, व्हाईट फिनाईल निर्माण, पापड़ बड़ी, बेंत-बांस , आचार निर्माण, लहठी निर्माण एव अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाने के अन्तर्गत 41 स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें 1025 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दे कर स्वालंबी बनाया गया है। इसके साथ ही चन्द्रगुप्त संस्थान द्वारा खादी संस्था/समितियों को दो प्रशिक्षण 25-25 के समूह में मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के लिए प्रशिक्षित कराया गया है।
खादी पुर्नरूद्धार योजना : बिहार स्थित खादी संस्थाओं को संस्था के कार्य सुचारू रूप से चलाने तथा कच्चा माल एवं कतिनों/बुनकरों को समय पर पारिश्रमिक भुगतान एवं अन्य भुगतान हेतु कार्यशील पूंजी (ऋण) मात्र 4% के ब्याज दर पर ऋण के रूप में 07 वर्षों के लिए संस्था/समितियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यशील पूंजी के रूप में आधुनिक चरखा के लिए 3 संस्थाओं को 28.50 लाख रूपये तथा कटिया चरखा के लिए 19 खादी संस्थाओं को कुल 180.00 लाख रूपये मात्र कार्यशील पूंजी (ऋण) में उपलब्ध करयी गयी है। पांच खादी संस्थाओं को 80 नग कटिया चरखा के लिए (50%) 1.71 लाख रूपये उपलब्ध करायी गयी है, 21 खादी संस्थाओं को 355 कटिया चरखा के खरीद के पश्चात शेष 40% राशि रुपये 6.07 लाख रूपये उपलब्ध करायी गयी है एवं 4 खादी संस्थाओं को 17 करघा के खरीद के पश्चात शेष 40% राशि रू0 2.04 लाख उपलब्ध करायी गयी है।
रिबेट योजना : राज्य के खादी संस्था/समितियों को खादी वस्त्रों के उत्पादन पर वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 का राज्य में उत्पादित खादी वस्त्रों पर 10% की छूट (रिवेट) की राशि का भुगतान किया गया है।
खादी मॉल पटना : खादी मॉल, पटना से जुड़े लगभग 80 खादी संस्थाओं तथा 120 ग्रामोद्योगी अन्तर्गत उत्पादन करने वाले आपुर्तिकर्ता के सामग्री को खादी मॉल, पटना में बिक्री हेतु रखा गया है जिससे मॉल में वितीय वर्ष 2022-23 में 16.30 करोड़ रूपये की बिक्री हुई है। खादी मॉल का निर्माण- खादी मॉल, पटना के तर्ज पर वितीय वर्ष 2022-23 में राज्य के जिला मुजफ्फरपुर तथा पूर्णिया में आयडा खादी मॉल का निर्माण करा रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। जून का माह चल रहा है और ऊपर से तापमान होने के कारण हीट वेव की स्थिति है। ऐसे में लोग गर्मी से बेहाल है। गर्मी के मौसम में खादी की डिमांड बढ़ने लग गयी है। अब युवाओं की पहली पसंद खादी हो गयी है।
इसी बीच राजधानी के गांधी मैदान के पास स्थित खादी मॉल में खादी एवं खादी से बने उत्पादों पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। वहीं, ग्रामोद्योग एवं अन्य उत्पादों पर 20 प्रतिशत की छूट है। इस दी ग्रैंड सेल आफर का लाभ 30 जून तक उठाया जा सकता है।
गर्मी के बीच ग्रैंड सेल आफर चलने से खादी के कपड़ों की बिक्री तेज हुई है। खादी के कपड़ो को लेने के लिए लोग खादी मॉल पर पहुंच रहे है। गर्मी में खादी के कपड़े शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं। खादी के कपड़े अन्य कपड़ों से सस्ता होते हैं। यह शरीर के लिए नुकसानदेह भी नहीं है। गर्मी में लोग संतुलित आहार-विहार के साथ पहनावे का भी ध्यान रखते हैं।
खासतौर से खादी के कपड़ों को लोग अधिक पसंद करते हैं। खादी मॉल में सफेद और रंग-बिरंगी खादी के कपड़े उपलब्ध हैं, जो लोगों को लुभा रहे हैं। लोग शर्ट के लिए कपड़े भी खरीद रहे हैं। युवाओं में बढ़ती मांग को देखते हुए सिले-सिलाए शर्ट-पैंट, कुर्ता-पाजामा, कुर्ती और अन्य पारंपरिक पोशाक उपलब्ध हैं।
बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के सीईओ दिलीप कुमार ने बताया कि गर्मी में बुनकरों को बाजार देने के लिए छूट दी जा रही है। इसका सीधा लाभ राज्य के बुनकरों को होगा। खादी की डिमांड लगातार बढ़ रही है। लोग अब स्वदेशी वस्त्र खादी की ओर रुख कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई विदेशी पर्यटक भी बिहार खादी के वस्त्र खरीदने के लिए खादी मॉल आए हैं और उन्होंने छूट का लाभ उठाते हुए मधुबनी की खादी और भागलपुर की सिल्क खादी की खरीदारी की है।
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