एबीएन सोशल डेस्क। प्रेम रावत जीवन और व्यक्तिगत शांति के महत्व को समझने की आवश्यकता पर संदेश प्रस्तुत करेंगे। बोधगया विश्व प्रसिद्ध शिक्षक और बेस्टसेलिंग लेखक, मानवतावादी और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित प्रेम रावत दुनिया भर के श्रोताओं को वास्तव में अपने अंदर स्थित शांति का अनुभव करने और संतुष्टि का जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रेम रावत ने अपने अथक प्रयासों से लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और आशा और शांति का एक व्यावहारिक संदेश दिया है। उनका यह संदेश बिना किसी भेदभाव के हर एक मनुष्य के लिए है। उन्होंने चार साल की छोटी उम्र से ही इस विषय में बोलना शुरू कर दिया था। उनका मुख्य संदेश है अपने आपको जानो जीवन के महत्व को समझो। यह एक व्यवहारिक संदेश है, जो मनुष्य को व्यक्तिगत संतुष्टि देता है। वो 11 वर्ष बाद गया में पुन: 26 नवम्बर को आ रहे हैं।
प्रेम का लक्ष्य शिक्षा के व्यावहारिक उपकरणों का उपयोग करके लोगों को फिर से अपने खुद के संपर्क में लाना है। उनका संदेश उनके गहन व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। उन्होंने पिछले छह दशकों से अधिक समय में 5,500 से अधिक इवेंट को संबोधित किया है। बोधगया के औरा गांव में अन्नपूर्णा राइस मिल के पास, राज विद्या केंद्र द्वारा आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में प्रेम रावत हजारों लोगों को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे से दोपहर तक निर्धारित है।
कार्यक्रम में भारत और विदेशों की कई जगहों से हजारों लोग कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना शुरू कर देंगे। प्रेम रावत जिस शांति की बात करते हैं। उसे अनुभव करने का एक व्यावहारिक तरीका भी बताते हैं वो अपनी पुस्तकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वेबसाइट की सामग्री, मीडिया साक्षात्कार और इन सबसे बढ़कर अपने लाइव कार्यक्रमों के माध्यम से दुनिया भर में लाखों लोगों को अपना संदेश देते हैं।
केवल 2023 में प्रेम रावत ने टीवी, प्रिंट और रेडियो सहित, मीडिया के सभी माध्यमों से 775 मिलियन से अधिक लोगों को अपना संदेश दिया है। प्रेम रावत ने हाल ही में दुबई, संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की जहां एक तरफ उन्होंने दुनिया भर के शिक्षकों को अपने पीस एजुकेशन प्रोग्राम से परिचित कराया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी बेस्टसेलिंग पुस्तक हियर योरसेल्फ: हाउ टू फाइंड पीस इन अ नोइजी वर्ल्ड का अरबी संस्करण लॉन्च किया।
उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया। जो उनकी अंतर्दृष्टि और प्रयासों को लाखों लोगों तक पहुंचा रहे हैं। कुछ दिनों बाद, प्रेम रावत को संयुक्त अरब अमीरात में प्रसिद्ध शारजाह अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में आयोजित एक कार्यक्रम में उनकी सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक के अरबी संस्करण के विमोचन के अवसर पर बोलने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। 50 से अधिक वर्षों से प्रेम रावत ने 100 से अधिक देशों में लाखों लोगों को शांति का दिया है।
भारत में जन्मे प्रेम रावत ने अपना पहला सार्वजनिक संबोधन चार साल की उम्र में दिया। तेरह साल की उम्र में उन्होंने दुनिया भर में अपना संदेश देना शुरू किया। एक प्रतिभाशाली बालक और 70 के दशक के किशोर से लेकर विश्व शांति दूत बनने तक प्रेम रावत ने लाखों लोगों को असाधारण स्पष्टता, प्रेरणा और जीवन की गहरी सीख दी है। पीस इज पॉसिबल और हियर योरसेल्फ के बेस्टसेलिंग लेखक और प्रेम रावत फाउंडेशन के संस्थापक प्रेम रावत जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ कार्य करते हैं।
उन्हें बताते हैं कि अपने भीतर शांति के स्रोत का अनुभव कैसे करें। उनका यह प्रयास विश्व के एक सौ से अधिक देशों तक फैला हुआ है। आशा, खुशी और शांति का उनका यह व्यावहारिक संदेश प्रत्येक मनुष्य के लिए है। उनके संदेश का 40 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उनके द्वारा बनाया गया पीस एजुकेशन कार्यक्रम जेलों में, युद्ध से तबाह देशों में, वयोवृद्ध केंद्रों में अस्पतालों में सिखाया जाता है। इसका प्रसार विश्व के 80 देशों में है। दुनिया भर में एक हजार से अधिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों में अपनाया गया।
यह कार्यक्रम जीवन के सभी क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। जिसमें समाज और संघर्ष से हाशिए पर रहने वाले लोग भी शामिल हैं। यह प्रतिभागियों को व्यक्तिगत शांति का वास्तविक अनुभव करने के लिए प्रेरित करता है। वर्ष 2012 में उन्हें ब्रांड लारिएट इंटरनेशनल हाल आफ फेम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
वो इस अवार्ड के चौथे प्राप्तकर्ता बने। इस अवार्ड के अन्य प्राप्तकर्ता नेल्सन मंडेला और स्टीव जॉब्स थे। प्रेम रावत का उल्लेख गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में किया गया है। उनकी पुस्तक स्वयं की आवाज के बुक लांच के अवसर पर सर्वाधिक श्रोता 1,14,704 उपस्थित हुए। यह किसी एक लेखक द्वारा अपनी पुस्तक पढ़ने के अवसर पर सबसे अधिक श्रोताओं की उपस्थिति का रिकार्ड है।
यह पुस्तक हियर योरसेल्फ हार्पर कॉलिन्स प्रकाशक द्वारा मूल में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। रावत पायलट भी हैं। जिन्हें 15 हजार घंटो की उड़ान का अनुभव प्राप्त है। वह वह एक आविष्कारक, फोटोग्राफर, क्लासिक कार रेस्टोरर और साथ ही एक सफल पारिवारिक व्यक्ति हैं। उनकी चार संतानें हैं। जबकि वह चार बच्चों के दादा भी हैं।
टीम एबीएन, पटना। छठ जीवन के उजास का पर्व है। पारंपरिक लोक गीतों की धुन पर जब पूरा समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को आंचल में समेटे प्रकृति के साथ आबद्ध होकर पूरी सादगी और स्वच्छता के साथ एकजुट खड़ा हो जाता है, तब छठ होता है।
पूर्वांचल का यह त्योहार अब राज्य और देश की सीमाओं को लांघते हुए विश्व के अनेक देशों में पहुंच चुका है। वस्तुतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग देश-विदेश में जहां भी गये, अपने गमछे में यहां की संस्कृति को बांधकर ले गए। उनके साथ गई महिलाओं ने अपने आंचल में संस्कारों और लोकगीतों का खोइंचा लेकर गयीं।
तभी तो छठ का त्योहार अब चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़ इंदौर जैसे स्थानों पर तो मनाया ही जाता है; विदेशों में लंदन, बर्लिन, मास्को, वाशिंगटन और नेवार्क जैसे वृहद शहरों में भी मनाया जाता है। मॉरीशस, फिजी और गुयाना जैसे देशों में तो हजारों लोग इस पर्व को मनाते हैं।
पूर्वी भारत में जितने भी लोक त्योहार मनाया जाते हैं, सब में महिलाएं एक साथ मिलकर गीत गाती हैं। भैया दूज हो या रक्षाबंधन, कार्तिक पूर्णिमा हो या एकादशी- लोक परंपरा से जुड़े सभी त्योहारों के दौरान लोक गीत गाए जाते हैं, लेकिन छठ की बात ही कुछ और है। इसे त्योहार की जगह महापर्व का दर्जा दिया गया है। लोक आस्था के महापर्व के गीत पूरी तरह प्रकृति को समर्पित हैं।
पारंपरिक धुनों पर सुरुज देव और छठी मैया की महिमा का बखान। साथ ही उन सभी प्राकृतिक सामग्रियों का भी बखान जिनका उपयोग छठ पर्व के दौरान किया जाता है। छठ से जुड़ी परंपराओं और छठ की पवित्रता को बरकरार रखने की कोशिशों का बखान। ये सभी छठ गीतों की कुछ खास विशेषताएं हैं।
जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर का अस्तित्व नहीं हो सकता, उसी प्रकार इस चराचर जगत की सत्ता भगवान भास्कर पर ही अवलंबित है। धरती यदि हमारी माता हैं तो सूर्य पिता हैं । पृथ्वी पर जब-जब संकट के क्षण आते हैं, इसकी रक्षा के लिए सूर्य देव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो जाते हैं। भगवान भास्कर में असीम शक्ति है।
इतनी प्रचंड शक्ति कि सारी प्रकार की व्याधियों का नाश सूर्य की किरणों से संभव है। 2023 में जब हम अटूट विश्वास के इस पर्व को मना रहे हैं तो सब की कामना यही है समस्त विश्व सुख और शांति फैले तथा अपने देश एवं बिहार राज्य की चहुमुखी प्रगति हो। विश्व पर मंडरा रहे खतरे और चिंताओं का नाश हो।
शुद्धता, स्वच्छता और असीम श्रद्धा छठ पर्व को खास बनाते हैं। हमें सदैव शुद्धता और स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है। छठ के दौरान स्वच्छता का भाव व्यक्तिगत स्तर पर भी दिखता है और सार्वजनिक स्तर पर भी। छठ व्रती अपने अपने घरों की सफाई तो करते ही हैं, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और स्वच्छता के लिए लोग स्वेच्छा से आगे आते हैं। इससे वातावरण में विशेष प्रकार की पवित्रता समाहित हो जाती है ।
इस महापर्व के दौरान गाये जाने वाले लोकगीतों की परंपरा बहुत ही समृद्ध रही है। इस चार दिवसीय अनुष्ठान की सारी गतिविधियों को गीतों में स्थान मिला है। पहला दिन नहाय-खाय का होता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। सभी व्रतधारी गीत गाते हुए गंगा स्नान के लिए जाते हैं। तट पर बैठकर भी मां गंगा की स्तुति की जाती है-
वस्तुतः मां गंगा के तट पर छठ पर्व करने का आनंद सबसे विशिष्ट होता है। लेकिन इस पर्व के दौरान एक और खास बात होती है और वह यह कि जिस किसी भी नदी या तालाब के तट पर छठ का महापर्व आयोजित होता है, वह तक भी पटना का गंगा घाट बन जाता है-
आधुनिकता ने छठ की सामग्रियों को बाजार का विषय बना दिया है। लेकिन पारंपरिक रूप से देखा जाए तो छठ सामाजिक समरसता का त्यौहार है। समाज के सभी वर्गों की भागीदारी छठ के सामग्रियों में होती है। कुम्हार के घर से दीया आता है तो जुलाहे के घर से बाती। डोम के घर से सुप आता है तो मालिन के घर से फूल। एक लोकगीत में छठ व्रती महिला अपने पति से गुजारिश करती है-
प्रकृति के कण-कण में जब सूर्य देव की सुनहरी किरणें प्रविष्ट होती हैं तो प्रकृति का रोम-रोम सिंदूरी हो उठता है । सूर्यदेव कभी केले के पत्ते पर तो कभी नारियल के पत्ते पर उदित होते दिखाई पड़ते हैं । छठ व्रती महिलाएं गाती हैं-
इस प्रकार के सवाल-जवाब के माध्यम से छठ व्रती स्त्री दूसरी स्त्री को बताती है कि वह अपने पुत्र-पुत्री और अपने स्वामी के सुख और समृद्धि के लिए यह छठ व्रत कर रही हैं। लोकगीतों में छठ पूजा की सामग्रियों की चर्चा बार-बार होती है। कांच ही बांस के बहंगिया बहुत ही चर्चित और प्रसिद्ध छठ गीत है-
छठ पूजा में पवित्रता का बहुत महत्व है, जो भी सामग्री पूजा के लिए उपयोग में लाई जाती है, वह पूरी तरह से शुद्ध होनी चाहिए । एक लोकगीत में जब तोता छठ की सामग्री को जूठा करने का प्रयास करता है, तो उसकी खूब खबर ली जाती है-
सुगा यानी तोता जब छठ सामग्री को जूठा करने के प्रयास में वाण लगने से मूर्छित हो गिर पड़ता है, तो फिर छठ व्रती महिला आदित्य देव से प्रार्थना करती हैं-
महापर्व छठ के लोकगीतों में सामाजिक ताने-बाने का एक दूसरा स्वरूप ही देखने को मिलता है। ग्रामीण भारतीय समाज में प्रायः हर लोक पर्व में बेटे की कामना की जाती है । लेकिन छठ के एक गीत में बेटी की कामना बड़े ही निराले अंदाज में की गयी है-
छठ गीतों में शारदा सिन्हा और विंध्यवासिनी देवी के गाये गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। अनुराधा पौडवाल, कल्पना, देवी, मैथिली ठाकुर आदि के गीत भी खूब बजते हैं। जिंदगी के केंद्र में सूरुजदेव हैं। जगत को समस्त ऊर्जा की प्राप्ति सूर्य से होती है। प्रतिवर्ष इस पवित्र लोक पर्व के दौरान लोक गायकों और गायिकाओं द्वारा नये-नये गीत भी पेश किए जाते हैं।
हमने भी छठ के कई गीत गाये हैं जिनमें मगही, मैथिली और भोजपुरी गीत शामिल हैं। चननी तानले चलथि रघुवीर सेवका घुटी भर धोती भींजे, सोना षट्कोनिया हे दीनानाथ हे घुमइछा संसार पारंपरिक और कौने खेत जनमल धान-सुधान हो, कौने खेत डटहर पान हे माई गीतों के बोल हैं।
वस्तुतः छठ गीतों की एक बड़ी ही समृद्ध परंपरा रही है। विंध्यवासिनी देवी और शारदा सिन्हा ने जो छठी मैया के जो गीत गाए हैं, वह अभी लोगों की जुबान पर हैं। बिहार के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग पारंपरिक छठ गीत गाये जाते हैं। छठ पर्व के दौरान इन गीतों का बहुत महत्व होता है। लोकगीतों के बिना छठ पर्व अधूरे लगते हैं। (नीतू कुमारी नवगीत बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका हैं।)
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज कल गुस्से में हैं। विधानसभा में कभी उनकी जुबान फिसल जाती है तो कभी ज्ञान देने के चक्कर में अजब-गजब ज्ञान दे रहे हैं। विपक्ष के हंगामे पर भी नीतीश कुमार को खूब गुस्सा आता है। गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी पर भी नीतीश कुमार गुस्से में आ गये।
सदन के सीनियर नेता जीतनराम मांझी को उन्होंने न सिर्फ तू-तड़ाक की भाषा में दुत्कारा, बल्कि अपमान भी किया। मांझी उस समय आरक्षण संशोधन विधेयक पर अपने विचार रख रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री शालीन भाषा में आरक्षण व्यवस्था की जमीनी हकीकत के बारे में बता रहे थे। इसी बीच नीतीश कुमार भड़क उठे। सदन के बाहर मांझी ने नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया।
माना जा रहा है कि जीतनराम मांझी जिस तरह सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, उससे नीतीश नाराज हैं। नीतीश पहले भी कई बार बोल चुके हैं कि मांझी उनकी कृपा से ही सीएम बने थे।
इसको कोई आइडिया है। यह तो मेरी गलती है कि मैंने इसको मुख्यमंत्री बना दिया था। इसको कोई सेंस नहीं है। अइसहिएं बोलते रहता था। हम तो कह रहे थे कि आप लोगों के साथ रहिये, मगर भागकर आ गया था मेरे पास। आप लोगों को जब छोड़ दिये थे, तब अकेले थे। हम इसको सीएम बना दिये। इसके बाद मेरी पार्टी के लोग कहने लगे कि यह गड़बड़ है, इसको हटाइये। फिर हम दोबारा मुख्यमंत्री बने थे। बोलते रहता है कि मुख्यमंत्री थे। यह क्या मुख्यमंत्री था? यह तो मेरी मूर्खता से मुख्यमंत्री बना। - नीतीश कुमार, सीएम, बिहार
एक दिन पहले ही नीतीश कुमार अपने दांपत्य जीवन के बायोलॉजिकल ज्ञान को लेकर सदन में माफी मांग चुके हैं। मंगलवार को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार जनसंख्या नियंत्रण पर चर्चा के दौरान बहक गये। उन्होंने शादी के बाद पहली रात से ही पुरुष... वाला जोरदार बयान दिया। कुछ देर बाद यह बॉयोलॉजी का ज्ञान विधान परिषद में दिया।
वह भी पूरे मसालेदार अंदाज में, पूरे हाव भाव के साथ। जब चहुंओर इसकी किरकिरी हुई तो विधानसभा में खुद अपनी निंदा भर कर ली। विपक्ष लगातार इस बयान पर नीतीश कुमार को घेर रहा था और उनसे इस्तीफे की मांग पर अड़ा था। विपक्षी दल नीतीश के बयानों को लेकर मुद्दा बना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सतना की रैली में बिना नाम लिये विधानसभा में बायोलॉजी के ज्ञान पर तंज कसा था। नीतीश को उम्मीद थी कि विधानसभा में सार्वजनिक तौर से माफी मांगने के बाद मामला रफा-दफा हो जायेगा, मगर ऐसा नहीं हुआ।
नीतीश कुमार 15 साल के इतिहास में पहली बार माफी मांगकर गुस्से में थे। गुरुवार को उन्होंने जीतनराम मांझी पर अपनी भड़ास निकाल ली। इस बार भी उन्होंने वहीं गलती की। शब्द चुनने और बोलने में उन्होंने यह ध्यान नहीं रखा कि जीतन राम मांझी सदन के सीनियर नेताओं में शुमार हैं।
नीतीश कुमार पहले भी विरोधियों पर बरसते रहे हैं। जब एनडीए के साथ थे तो तेजस्वी यादव की क्लास लगा दी थी। घटना 2021 की है, नीतीश कुमार ने विधानसभा में तेजस्वी यादव के साथ भी तू-तड़ाक कर दिया था। तब उन्होंने कहा था कि यह लड़का बकवास करता है। तुमको डिप्टी सीएम किसने बनाया था? तुम चार्जशीटेड हो, तुम क्या करते हो, हम सब जानते हैं।
इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद जब वह दोबारा महागठबंधन के हिस्सा बने तो भाजपा के विधायक नीतिन नवीन पर भड़क गये थे। तब भी नीतीश कुमार ने नीतिन नवीन के पिता का नाम लेकर गुस्सा निकाला था। 2024 के चुनाव से पहले नीतीश कुमार बड़े-बड़े दांव चल रहे हैं मगर पहले महिला, फिर दलित नेता के लिए बोले गये शब्दों से राजनीति गरमा सकती है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, छपरा। बिहार में सारण जिले के भगवान बाजार थाना क्षेत्र में निजी नर्सिंग होम में एक महिला की इलाज के दौरान हुयी मौत से आक्रोशित परिजनों ने नर्सिंग होम में तोड़फोड़ करने के बाद चिकित्सक की गिरफ्तारी के लिए सारण के पुलिस अधीक्षक के आवास का घेराव कर आवागमन बाधित कर दिया।
पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को यहां बताया कि जिले के गुदरी राय के चौक मोहल्ला निवासी अतुल्या वर्मा की पत्नी रेखा देवी ने एक बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को पटना रेफर कर दिया गया था, जबकि रेखा देवी की चिकित्सा उक्त नर्सिंग होम में की जा रही थी।
इलाज के दौरान गुरुवार की देर रात को रेखा देवी की मौत हो गयी। इसके बाद मृतका के परिजनों ने उक्त नर्सिंग होम में तोड़फोड़ की।परिजन मृतका के शव को लेकर पुलिस अधीक्षक के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन करने लगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पटना उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। न्यायिक अधिकारियों - रुद्र प्रकाश मिश्रा और रमेश चंद मालवीय को पदोन्नत कर न्यायाधीश बनाया गया है।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने गुरुवार को एक अधिसूचना जारी कर उनकी नियुक्ति से संबंधी यह घोषणा की। उच्चतम न्यायालय की कालेजियम ने 17 अक्टूबर को दोनों न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के बक्सर में हुए दर्दनाक रेल हादसे के 24 घंटे के अंदर ही एक और बड़ी खबर सामने आयी है। इस बार सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के अंदर गोलीबारी की घटना सामने आई है।
राजधानी ट्रेन में उस समय दहशत फैल गयी, जब अचानक ट्रेन में गोली चलने की आवाज आयी। गोली चलने की खबर फैलते ही रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। ट्रेन में सवार आरपीएफ के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और आरोपी को धर दबोचा। आरोपी सेना का रिटायर जवान बताया जा रहा है।
आरोपी रिटायर आर्मी जवान हरपिंदर सिंह पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला है और साल 2019 में सिख रेजीमेंट से हवलदार पद से वह रिटायर हुआ था। फिलहाल वह धनबाद की किसी को कोलयरी में बतौर सुरक्षा गार्ड ड्यूटी कर रहा था।
जानकारी के मुताबिक, हरपिंदर सिंह के पास 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन का टिकट था। लेकिन वह नशे की हालत में धनबाद स्टेशन से सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में सवार हो गया। ट्रेन खुलने के कुछ मिनटों के अंदर मतारी स्टेशन के समीप टीटीई से उसकी बहस हुई। जिस पर उसने गुस्से में फायरिंग कर दी।
तुरंत रेलवे पुलिस के जवानों ने उसे धर-दबोचा। कोडरमा स्टेशन पर उतारे जाने के बाद कोडरमा आरपीएफ व जीआरपी उससे पूछताछ कर रही है। कोडरमा उतारे जाने के दौरान भी रिटायर्ड आर्मी जवान शराब के नशे में था।
मेडिकल के लिए ले जाने के दौरान उसने ट्रेन में घटी घटना का जिक्र करते हुए अपनी गलती पर पछतावा भी प्रकट किया। नशे में होने के कारण पूछताछ के दौरान वह सवालों का ठीक-ठीक जवाब भी नहीं दे पा रहा था। जानकारी के मुताबिक, घटना के वक्त उसकी रिवाल्वर में 6 गोलियां लोड थीं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, बक्सर/ पटना। बिहार के बक्सर जिले में देर रात एक रेल दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गयी और 40 अन्य लोग घायल हो गये। रेलवे के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।
वहीं बिहार में बुधवार रात हुए ट्रेन दुर्घटना में घायल लोगों के लिए वक्त पर रक्त की सेवा के लिए मां वैष्णों देवी सेवा समिति आगे आयी है। मां ब्लड सेंटर परिवार का कहना है कि ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट के सरकारी नियमों का पालन करते हुए मां ब्लड सेंटर 100 यूनिट ब्लड की सेवा देने के लिए संकल्पित है। ये ब्लड यूनिट बिल्कुल रेडी है।
पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए रघुनाथपुर पहुंचे हैं, जहां दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनस से आ रही नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गये। प्रकाश ने वीडियो सेवा को बताया, मृतकों की संख्या चार है और 40 यात्री घायल हुए हैं।
उचित जांच के बाद ही डिब्बों के पटरी से उतरने का कारण सामने आ पायेगा। फिलहाल हमारी प्राथमिकता पटरी को खाली करवाना है। जब तक सामान्य यातायात बहाल नहीं हो जाता, ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित रहेगा। पहले घायलों की संख्या 70 बताई गई थी।
इस हादसे में ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए हैं, जिसमें से कुछ पलट भी गये हैं। इस बीच, ज्यादातर घायलों का इलाज बक्सर शहर और आरा के अस्पतालों में किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल आठ यात्रियों को पटना स्थित एम्स ले जाया गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने बिहार खादी उत्सव-2023 के दौरान आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार देने के लिए कार्यक्रम का आयोजन महेश भवन सभागार में किया गया।
जिसमें उद्योग विभाग के मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि खादी का रास्ता ही गांधी का रास्ता है। हम सबको खादी प्रतिदिन पहनना चाहिए और यदि प्रतिदिन हम खादी का वस्त्र न भी पहनें तो कम से कम सप्ताह में एक दिन खादी का वस्त्र अवश्य पहनें।
उन्होंने कहा कि खादी सम्मान का वस्त्र है। खादी देशभक्ति का वस्त्र है। हम सबको अपने मन में देशभक्ति का जज्बा जगाये रखना है। देश है तो हम हैं। अपना देश अभी प्रगति के रास्ते पर है। बिहार राज्य का विचार चहुंमुखी विकास हो रहा है। एक समय था जब परिवार के कई सदस्यों के लिए एक या दो वस्त्र ही हुआ करते थे।
एक ही साड़ी का प्रयोग घर की दो-तीन महिलाएं करती थी और एक साथ घर के किसी अतिथि के समक्ष नहीं आ पाती थी। अब स्थिति में बदलाव आया है। उद्योग विभाग बिहार में उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। पिछले साल मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 8000 लाखों का चयन किया गया।
इस साल पूरे 8000 लाखों का चयन कर दिया गया है। इससे गांव-गांव में नये उद्योगों को स्थापित करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 लाख की सहायता दी जा रही है, जिसमें 5,00,000 अनुदान का है और 5 लाख ऋण का है। अनुसूचित जाति जनजाति महिला और अति पिछड़ा वर्ग के लाभुकों को बिना ब्याज के खर्च दिया जा रहा है।
इस योजना से बिहार के लोगों में उद्योग लगाने की ललक पैदा हुई है। लगभग 29000 उद्योग लगाई जा चुके हैं। अभी उद्योगों के रजिस्ट्रेशन के मामले में देश के प्रथम तीन राज्यों में बिहार भी है। सर्टिफिकेशन में बिहार राज्य देश में पहले नंबर पर आ गया है। यह सब कड़ी मेहनत का फल है।
हम बात करने में विश्वास नहीं रखते हैं हम काम करते हैं। कड़ी मेहनत करते हैं और उसका बेहतर परिणाम निकलता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि खादी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील रहें खादी और ग्रामोद्योग के क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। खादी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। पूरी दुनिया गांधी के रास्ते पर चलने के लिए उत्प्रेरित हो रही है। इससे खादी और हस्थकरघा उद्योग को भी बल मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थिति अति विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ राम जी सिंह ने कहा कि भारत की पहचान के लिए एक शब्द का ही प्रयोग करना हो, तो वह शब्द गांधी ही हो सकता है और गांधी में खादी भी समाहित है। खादी को छोड़ेंगे तो गांधी को भी छोड़ना पड़ेगा। भारत माता ग्रामवासिनी है, इसलिए कृषि और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देना हम सबका कर्तव्य है। चरखा देश की उन्नति का प्रतीक है। चरखा लगातार चलते रहने की प्रेरणा है।
किसान चाची पद्मश्री राजकुमारी देवी ने कहा कि गांव की महिलाओं को रोजी रोजगार से जोड़ना जरूरी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने महिलाओं को सम्मान दिया। महिलाओं को चरखा काटने और कारखा चलाने का काम दिया। इससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ। छोटे-छोटे उद्योगों से सैकड़ों महिलाओं को काम मिल सकता है। महिलाएं आपस में मिलकर काम करें। छोटे-छोटे समूह बनाकर काम करें, तो चमत्कार हो सकता है। सरकार तो सहायता देती है। बस सरकार के नियमों का पालन करते हुए काम करना है।
इससे पहले सभी आदत अतिथियों का स्वागत बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी दिलीप कुमार ने किया। उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने पांच संस्थाओं को कार्यशील पूंजी का सांकेतिक चेक प्रदान किया। कार्यक्रम में पांच खादी संस्थाओं को टूल्किट वितरित किया गया। 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को भी उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ तथा लोक गायिका मैथिली ठाकुर के कर कमल से पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में मैथिली ठाकुर ने कहा कि खादी से जुड़ना अभियान की बात है। वह देश-विदेश में कोई भी कार्यक्रम करती हैं तो खादी के वस्त्र ही पहनती हैं। खादी के कपड़े आरामदायक भी हैं और फैशनेबल भी। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि सप्ताह में कम से कम एक दिन खादी का वस्त्र अवश्य पहनें।
पेंटिंग प्रतियोगिता में अ ग्रुप में प्रथम पुरस्कार अनुष्का प्रिया, केंद्रीय विद्यालय, द्वितीय पुरस्कार हर्ष वर्धन अमन, बीडी पब्लिक स्कूल एवं तृतीय पुरस्कार जोया अंसार, केंद्रीय विद्यालय को प्राप्त हुआ। ग्रुप इ में प्रथम पुरस्कार संजीत कुमार, बी डी कॉलेज पटना, द्वितीय पुरस्कार प्रियंका कुमारी, बीडी पब्लिक स्कूल एवं तृतीय पुरस्कार संज्ञा पलक, न्यू एरा स्कूल को प्राप्त हुआ।
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