बिहार

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Published / 2022-05-10 06:52:14
बिहार : हवा-धुंध से गिर गया पुल, IAS के बयान पर गडकरी हैरान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ने बिहार के सुल्तानगंज में एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने के लिए तेज हवाओं को जिम्मेदार बताने वाले एक बयान पर आश्चर्य जताया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोई इस तरह के जवाब पर विश्वास कैसे कर सकता है? हवा से पुल कैसे गिर सकता है : दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने सचिव से इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा तेज हवा और धुंध के कारण हुआ था। इसपर आश्चर्य जताते हुए उन्होंने कहा कि एक आईएएस अधिकारी इस तरह के स्पष्टीकरण पर विश्वास कैसे कर सकता है? इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि हवा और धुंध के कारण पुल कैसे गिर सकता है? जरूर कुछ गलती हुई होगी, जिससे पुल गिरा। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना पुलों के निर्माण की लागत कम करने की जरूरत पर बल दिया। कब गिरा था पुल : बता दें कि बिहार के भागलपुर के सुल्तानगंज में करीब 1,710 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा अगुवानी पुल मामूली सी आंधी नहीं झेल सका और पिछले दिनों 29 अप्रैल को धराशायी हो गया। इस हादसे की वजह से जानमाल को तो नहीं, लेकिन सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। IIT पटना, IIT रुड़की, पटना IIT की टीम करेगी जांच : अगवानी घाट पुल के सुपर स्ट्रक्चर ढह जाने के बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि आइआइटी, रूड़की व पटना एनआइटी की टीम संयुक्त रूप से यह जांच करेगी कि पुल किन वजहों से ध्वस्त हुआ। अगर निर्माण में लापरवाही सामने आती है तो हर हाल में इसके लिए दोषी पर कार्रवाई होगी। पथ निर्माण मंत्री ने बताया कि अगवानी घाट पुल के निर्माण को इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। विभाग की पूरी कोशिश है कि इस तय लक्ष्य तक ही पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाए।

Published / 2022-05-09 05:07:16
पूजा स्थलों पर अनियमितता रोकने को बिहार सरकार ने सभी 534 मंडलों को दिए कड़े निर्देश

टीम एबीएन, पटना। बिहार में कई धार्मिक स्थानों पर अनियमितताओं की शिकायतों के बीच सरकार ने राज्य के सभी 534 मंडलों में सर्किल अधिकारियों (सीओ) से उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत मंदिरों और मठों की पहचान तथा उन्हें चिह्नित करने और इसकी सूचना जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे पोर्टल्स पर अपलोड करने को कहा है। कानून विभाग द्वारा चलाए जाने वाले बिहार स्टेट रिलिजियस ट्रस्ट काउंसिल (बीएसआरटीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीओ को मंदिरों और मठों पर जानकारी एकत्रित करने के लिए एक सप्ताह में कम से कम दो बार बाहर निकलना होगा और जिलाधीश इस कवायद पर नजर रखेंगे। अधिकारी ने कहा, जिलाधीश यह सुनिश्चित करेंगे कि मंदिरों, मठों और न्यासों के बारे में सभी आवश्यक सूचना नियमित रूप से अपलोड की जाए। इसके अलावा वे ये जानकारियां बीएसआरटीसी को भेजेंगे। बिहार में सभी मंदिरों, मठों और धर्मशालाओं को बिहार हिंदू धार्मिक न्यास कानून, 1950 के तहत बीएसआरटीसी में पंजीकरण कराना होगा। मंदिर की देखभाल करने वाले लोगों द्वारा किए जा रहे जमीन के अनैतिक सौदों पर चिंता व्यक्त करते हुए विधि मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि धार्मिक संपत्तियों को अवैध दावों से बचाने के लिए फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा, विभिन्न धार्मिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का पता चलता है, जिसमें मंदिरों और मठों के पुजारी मालिकों के तौर पर अचल संपत्तियां बेच और खरीद रहे हैं। धार्मिक संपत्तियों की रक्षा और देखरेख के लिए प्राथमिकता के आधार पर पहचान की यह कवायद पूरी की जानी है। सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार, वैशाली में सबसे अधिक 438 अपंजीकृत मंदिर और मठ हैं। कैमूर में ऐसे 338 मंदिर हैं। मंत्री ने बताया कि मोटे तौर पर अनुमान के अनुसार करीब 2,200 अपंजीकृत मंदिर और मठ हैं जिसके तहत करीब 3,200 एकड़ भूमि आती है।

Published / 2022-05-07 13:00:08
गर्व की बात... मॉरीशस में प्रस्तुति देंगीं बिहार की शान लोकगायिका नीतू नवगीत

टीम एबीएन, पटना। मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान, हिंदी प्रचारिणी सभा, विश्व हिंदी सचिवालय कथा मुंबई की साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के तत्वावधान में 8 मई से 14 मई के बीच हिंदी के वैश्विक प्रसार में रामकथा की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन मॉरीशस में किया जा रहा है। इसमें बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत लोकगीतों में भगवान राम और माता सीता के संबंध में व्याख्यान देंगी। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के सचिव और साठवे महाविद्यालय मुंबई के प्रोफेसर डॉ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भारत के विभिन्न राज्यों से 28 सदस्य रिसोर्स पर्सन और विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी साहित्य, कला एवं संस्कृति का श्रीराम कथा के माध्यम से प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था द्वारा श्रीराम कथा विश्व संदर्भ महाकोष (इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण) के 55 खंडों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अनेक लब्ध प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत आलेख प्रस्तुति के साथ-साथ राम जानकी संदर्भ वाले लोक गीतों को पेश कर भारतीय संस्कृति की खुशबू मॉरीशस में फैलाएंगीं। मौके पर डॉ आशा तिवारी ओझा, डॉ कुसुम सिंह, राधेश्याम सिंह, डॉ रंजय कुमार सिंह, ललित सिंह ठाकुर, प्रशांत श्रीवास्तव, हरि शंकर ओझा, सुरेश चंद्र तिवारी, रमाशंकर शुक्ल, बनवारी लाल जाजोदिया यथार्थ, मीमांसा ओझा, अरविंद कुमार श्रीवास्तव, प्रो. मनोहर लोखंडे, राजकुमार चौधरी, प्रो कृष्णा जी श्रीवास्तव, चित्रा श्रीवास्तव, डॉ किरण त्रिपाठी, माधुरी सत्येंद्र सिंह, डॉ सुनीता चौहान, डॉ किरण शर्मा, सत्यनारायण विश्वकर्मा, डॉ पुष्पा सिंह, अरुण भटनागर, डॉ शिरीन कुरैशी, डॉ हिमांशु मोहन मिश्र दीपक, डॉ जगदीश प्रसाद शर्मा, अलका भटनागर सहित अनेक विद्वानों द्वारा अलग-अलग सत्रों में शोध पत्रों की प्रस्तुति की जाएगी। 9 मई को पहला कार्यक्रम महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस में आयोजित किया जाएगा।

Published / 2022-05-07 07:50:38
...आखिर कब होगी लाइब्रेरियन की बहाली?

एबीएन डेस्क (त्रिपुरारी पाण्डेय)।एक पुस्तकालय की पूरी व्यवस्था उसके अधीक्षक यानि पुस्तकालयाध्यक्ष पर निर्भर करती है। वह पुस्तकालय के संचालक होते हैं। कहा भी गया है कि जैसा पुस्तकालयाध्यक्ष होंगे वैसे ही पुस्तकालय। यदि हमारे पास अच्छी-अच्छी किताबें एवं पुस्तकालय अपनी सभी सामग्री के साथ उपलब्ध है। परन्तु उनको कुशलतापूर्वक संचालित करने वाला पुस्तकालयाध्यक्ष नहीं हैं तो यह बहुत कम लाभ प्रदान करने वाली सिद्ध होगी। इसीलिए प्रत्येक विद्यालय हेतु प्रशिक्षित एवं योग्य पुस्तकलयाध्यक्षों की आवश्यकता है। पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति किये बिना पुस्तकालय अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकता है। बिहार में लाइब्रेरियन की बहाली साल 2008 में हुई थी। लेकिन आज चौदह वर्ष हो गयी है और बिहार के हाई स्कूलों में लाइब्रेरियन की बहाली नदारद है। अभ्यर्थी लाइब्रेरियन बनने के सपने लेकर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में अध्यन कर डिग्रियां लेकर नौकरी की आस में बैठे हैं। किन्तु सरकार की ढुलमुल रवैया के कारण भर्ती प्रक्रिया की विज्ञापन नहीं आ रही है। लगभग हजारों छात्र हर साल पुस्तकालय विज्ञान में शिक्षा प्राप्त करके नौकरी की राह देख रहे हैं। लाइब्रेरियन की बहाली नहीं आने से अभ्यर्थियों में काफी मायूसी है। चौदह वर्षों से लाइब्रेरियन की बहाली नहीं होने से अनेक अभ्यर्थियों की उम्र सीमा भी लगभग समाप्ति के कगार पर है, तो वहीं अनेक अभ्यर्थियों की उम्र अब बस समाप्त होने ही वाली है। भर्ती के नाम पर विद्यार्थियों को सिर्फ आश्वासन मिलती है कि पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली हेतु अभी नियमावली बन रही है। अभी रिक्तियों का आकलन किया जा रहा है। जल्द पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली होगी। किन्तु हजारों छात्रों का सवाल यह है कि आखिर कबतक नियमावली बनकर तैयार होगी? कबतक पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली हेतु विज्ञापन आएगी? पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों का सब्र अब टूट रहा है। यह अत्यंत ही गंभीर एवं निंदनीय विषय है की रोजगार की राह देख रहे विद्यार्थियों को चौदह वर्षों से शिक्षित होकर भी बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ रही है। जिस क्षेत्र में अभ्यर्थियों की रूचि थी, जिस क्षेत्र में उन्होंने उपलब्धि हासिल की और उसकी बहाली न होने के कारण अपने आप में हीनता का भाव आना स्वाभाविक है। विद्यार्थी कातर निगाहों से पुस्तकालयाध्यक्ष बनने के सपने सजाकर सरकार से उम्मीदें लेकर उदास होकर बहाली की आस में हैं। यदि हजारों हजार छात्रों से पूछा जाये तो सभी अभ्यर्थियों का बस एक ही सवाल होगा कि आखिर कबतक होगी लाइब्रेरियन की बहाली...? (लेखक जमुई स्थित मलयपुर के निवासी हैं।)

Published / 2022-05-01 03:35:56
अच्छी योजना और मजबूत नींव से बनती है बड़ी इमारत : दिलीप कुमार

टीम एबीएन, पटना। बिहार उद्यमी संघ ने नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें जीवन में आने वाली चुनौतियां से निपटने के लिए तैयार रहने हेतु प्रेरित करने के लिए एक विशेष मोटिवेशनल सेशन का आयोजन किया, जिसमें बिहार सरकार, उद्योग विभाग के विशेष सचिव और मोटिवेशनल वक्ता दिलीप कुमार ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए नए रास्तों को अंगीकार करने की आवश्यकता होती है। सफलता के लिए सतत प्रयास और नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। अच्छी योजना बनाकर हम सफलता रूपी इमारत की अच्छी नींव तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने वालों के आलोचक हजारों होते हैं। नए प्रयास करने वाले और नवाचारों का उपहास उड़ाने वालों की संख्या अनंत होती है। हमारे मित्र, परिजन और मोहल्ले के लोग भी नया प्रयास करते समय हमारा मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते हैं। बाद में सफलता प्राप्त होने पर इन्हीं प्रयासों और विचारों को दृष्टांत के रूप में पेश किया जाता है। लोगों की आलोचना और उपहास की परवाह के बिना जो पूरे जुनून के साथ प्रयास करता रहता है, अंत में सफल होता है। सफलता की कहानी 1 दिन में नहीं लिखी जाती। हजारों दिन के मेहनत से, हिम्मत से और खून-पसीना एक करने से वह प्लॉट तैयार होता है जिसमें सफलता की कहानी होती है। शिखर पर बैठे लोगों को देखकर लोग उदाहरण दिया करते हैं। लेकिन शिखर पर पहुंचने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है। उन जटिलताओं को कोई नहीं देखता। लेकिन जो सफल होते हैं वह चुनौतियों को पार करके ही सफल होते हैं। लहरों के डर से जो किनारे में बैठे रह जाते हैं, वह कभी भी नदी पार नहीं कर पाते। जिन्हें फिसलने से डर लगता है, वह पर्वत पर कैसे चढ़ पाएंगे। इसलिए अपने डर पर जीत जरूरी है। जहां से डर समाप्त होता है, जीत की कहानी का लेखन वहीं से प्रारंभ हो जाता है। दिलीप कुमार ने कहा कि संघर्ष और सफलता की यात्रा में तनाव के क्षण भी आते हैं। सकारात्मक सोच और अटूट विश्वास के बल पर हम नकारात्मकता को पराजित कर सकते हैं। मोटिवेशनल सत्र के प्रारंभ में बिहार उद्यमी संघ के महासचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में समय अनमोल है। समय की पहचान करके जिसने सही फैसला लिया, समय ने उसका साथ दिया। कार्यक्रम में विक्रमशिला ग्रामोद्योग की नैना उपाध्याय, मिथिलेश्वर, अंकित सहित अनेक लोगों ने जीवन में तनाव से निपटने के तरीकों पर प्रश्न पूछे और मुख्य वक्ता के साथ संवाद किया।

Published / 2022-04-24 16:34:55
मूर्ख ब्राह्मणों से नहीं कराएं पूजा : जीतनराम मांझी

टीम एबीएन, पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह हम पार्टी सुप्रीमो जीतनराम मांझी रविवार को धनबाद पहुंचे। परिसदन में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान मांझी ने कहा कि दलित अब पूजा पाठ की तरफ ध्यान दे रहे हैं। लेकिन पूजा पाठ वैसे ब्राह्मण से करवाएं जो ज्ञानी, विद्वान हो, जो श्लोक जानता हो। अभी ऐसे ब्राह्मण पूजा कराते हैं, जो श्लोक जानते तक नहीं हैं। न्यूज पेपर लेकर पहुंच जाते हैं। हनुमान चालीसा पढ़ पूजा सम्पन्न करवा देते हैं। उन्होंने दलितों से अपील करते हुए कहा कि राजा रामचंद्र जी की आरती गाने से बेड़ा पार नहीं होगा। पढ़ोगे लिखोगे समझदार बनोगे बच्चों को पढ़ाओगे तभी बेड़ा पार होगा। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के बताए रास्तों पर चलें। बाबा साहब शिक्षा को महत्वपूर्ण बताये थे, इसलिये शिक्षा के बिना दलित आगे नंही बढ़ सकते। उन्होंने पार्टी को बिहार झारखंड के अलावा कई अन्य राज्यों में बढ़ाने की बात कही और कहा कि लोग हमारी विचारधारा से जुड़ रहे हैं। भले ही हम सत्ता में नहीं आ पाए लेकिन हम लोगों के बीच अपनी सेवा करते रहेंगे। दलित, शोषित और पीड़ितों को सहारा देते रहेंगे। उन्हें शोषण से मुक्त कराने का हर प्रयास करते रहेंगे जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का सपना था उसे साकार करने का भरसक प्रयास करेंगे। झारखंड में 1932 खतियान आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने ठीक से जवाब नहीं दिया और बताया कि उस विषय पर उन्हें बहुत अधिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान यह अधिकार सभी को देता है कि वह देश में कहीं भी जमीन ले सकता है। कहीं का भी नागरिकता ले सकता है।

Published / 2022-04-23 08:48:28
तेजस्वी के इफ्तार के बाद अमित शाह को रिसीव करने एयरपोर्ट भी पहुंचे नीतीश कुमार

टीम एबीएन, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इफ्तार में शामिल क्या हुए, मानो पूरे बिहार की राजनीति गरमा गई। लोग तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। कोई इसे महागठबंधन की वापसी के तौर पर देखने लगा, तो किसी ने कहा कि यह भाजपा पर एक दबाव बनाने की कोशिश है। आज सुबह जह वीर कुंवर सिंह की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सीएम मीडिया से बात कर रहे थे तो उन्होंने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्हें इसे आधारहीन करार दिया। नीतीश कुमार इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए आज पटना एयरपोर्ट पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्वागत करने के लिए भी पहुंच गए। नीतीश कुमार को करीब से जानने और देखने वाले लोगों के लिए भी हाल के वर्षों यह शायद पहला मौका होगा, जब वह किसी केंद्रीय मंत्री का स्वागत करने के लिए खुद पहुंचे हों। हां, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और नए राज्यपाल का स्वागत करने के लिए कई बार वह पहुंचे हैं, जो कि एक प्रोटोकॉल के तहत सामान्य बात है। ऐसी इफ्तार पार्टियों में बहुत से लोगों को आमंत्रित किया जाता है। इसका राजनीति से क्या संबंध है? हम भी एक इफ्तार पार्टी रखते हैं और सभी को इसमें आमंत्रित करते हैं।

Published / 2022-04-22 16:26:40
बिहार की सियासत तेज : राजद की इफ्तार पार्टी में पहुंचे नीतीश

टीम एबीएन, पटना। रमजान का महीना चल रहा है। हर साल की तरह रमजान में सियासी पार्टियां इफ्तार का आयोजन करती हैं। बिहार में प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी ने भी इफ्तार पार्टी रखी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पटना में राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। इस जानकारी के सामने आने के बाद सियासी पार्टियों ने इसके अलग-अलग मायने निकालने शुरू कर दिए हैं। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इफ्तार के बहाने राजनितिक गोलबंदी की कोशिश होगी। दरअसल, बोचहां उपचुनाव में मिली चुनावी-जीत के बाद महागठबंधन नए सियासी जोड़-तोड़ की तैयारियों में जुट गया है। फखऊ ने इफ्तार पार्टी के बहाने सियासी खेमेबंदी शुरू कर दी है। तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की तरफ से आयोजित इफ्तार में ठऊअ के मुकेश सहनी और चिराग पासवान को भी न्योता दिया गया है। सीएम आवास एक अणे मार्ग के बाद अब सूबे के दूसरे सबसे चर्चित आवास 10 सर्कुलर रोड शुक्रवार को कई सियासी समीकरणों का गवाह बना। दरअसल, पूर्व सीएम राबड़ी देवी का यह आवास काफी साल बाद दावत-ए-इफ्तार से गुलजार हो रहा है। भले ही इस आयोजन को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए कहा जा रहा है, लेकिन राजनीति को हर पल जीने वाले इस राज्य में इफ्तार के बहाने कई सियासी समीकरणों के बनने से राज्य के राजनीतिक जानकार इनकार नहीं कर रहे हैं। इधर, डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। इससे आरजेडी के नेताओं और कार्यकतार्ओं में जोश का संचार हुआ है। इसे काफी अहम माना जा रहा है। बता दें कि 5 सालों के बाद आरजेडी की तरफ से दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है। लालू यादव के जेल जाने के कारण आरजेडी पिछले कुछ सालों से दावत-ए-इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर रही थी। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 2 दिनों के बिहार दौरे पर आ रहे हैं। अमित शाह वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस दौरान सबसे ज्यादा तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड भी बनेगा। सबकी नजर बिहार में बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर भी है।

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