एबीएन बिजनेस डेस्क। गैर ब्रांडेड फूड आइटम पर जीएसटी लगाने की घोषणा के बाद बिहार में आटा, चावल और दाल की किल्लत हो गई। पटना के बाजार में आटा, चावल और दालों के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। महंगाई के इस झटके से आम जनता का हाल बेहाल हो गया है। रसोई का बजट बिगड़ गया है। कई छोटे ब्रांड के आटा पैकेट ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं। जीएसटी लागू होने से पहले बाजार में खाद्य पदार्थों की आवक 75 प्रतिशत तक कम हो गई है। बाजार से जुड़े कारोबारी कहते हैं कि गोदामों में मौजूद माल को बड़े कारोबारी फिलहाल निकालने में लगे हैं। बिहार राज्य खाद्यान्न व्यवसायी संघ के मंत्री ब्रजेश कुमार के मुताबिक थोक कारोबारी नया माल मंगाने के लिए 18 जुलाई का इंतजार कर रहे हैं। व्यवसायी संघ के महामंत्री नवीन कुमार ने बताया कि पटना की थोक मंडियों में आटा दो सौ टन प्रतिदिन आता था जो घटकर बमुश्किल 50 टन रह गया है। इसी तरह दाल की आवक भी प्रभावित हुई है। मंसूरगंज मंडी में जहां प्रतिदिन बीस ट्रक (25 टन/ट्रक) दाल की आवक थी, वहां अभी 5 ट्रक दाल भी नहीं पहुंच रही है। मंडी के अजय कुमार का कहना है कि 18 जुलाई के बाद उन्हें बचे हुए माल पर जीएसटी भरना होगा। इसलिए बड़े कारोबारी अपने गोदाम में मौजूद दाल को निकालने में लगे हैं। पटना की मंडियों में चावल की आवक भी बुरी तरह प्रभावित है। महाराजगंज मंडी के जितेन्द्र कुमार गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लगने के पहले मंडियों में चावल की आवक पर असर पड़ा है। चावल मिल से मंडियों के व्यापारियों को आपूर्ति नहीं हो रही है। मिल मालिक धान महंगा होने की बात कह रहे हैं। आवक कम होने से थोक मंडियों में ही चावल बढ़ी दर पर पहुंच रहा है। बोरा पर पांच सौ रुपये तक का इजाफा हो गया है। चूड़ा, मुरही, फरही भी महंगा : पटना में गैर ब्रांड वाले खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगने की घोषणा के बाद से ही पटनावासियों को महंगाई का झटका लगने लगा है। चूड़ा, मुरही, फरही आदि की कीमत में बीते दस दिनों से पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। बेऊर के खुदरा किराना दुकानदार मंटू कहते हैं कि दुकानों में आटा, चावल और दाल महंगे हो गए हैं। चावल की कीमत में दो से पांच रुपये किलोग्राम और दाल पांच रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई है।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार की 10 अहम सड़क परियोजनाओं का काम इस साल पूरा हो जाएगा। कुछ परियोजनाएं जून-जुलाई में पूरी हो जाएगी तो कुछ को इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिन परियोजनाओं का काम पूरा होगा, उसमें पटना-बख्तियारपुर सड़क के साथ ही अन्य सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इनके बनने से लोग कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान आ-जा सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार जून-जुलाई में पूरी होने वाली परियोजनाओं में फारबिसगंज-जोगबनी चार लेन सड़क शामिल है। 9.2 किमी लंबी इस सड़क के निर्माण पर 312 करोड़ खर्च हो रहे हैं। छपरा-सीवान-गोपालगंज दो लेन सड़क का काम अंतिम चरण में है। 94.2 किमी लंबी यह परियोजना 644 करोड़ की है। किशनगंज शहर में दो लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण हो रहा है। तीन किमी लंबी इस परियोजना की लागत 142 करोड़ है। पटना से बख्तियारपुर चार लेन सड़क निर्माण भी जारी है जो अंतिम चरण में है। 68.7 किमी लंबी यह परियोजना 687 करोड़ की है। जून-जुलाई में ही पूरी होने वाली अन्य परियोजनाओं में शिवहर-सीतामढ़ी-जयनगर-नरहिया दो लेन सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। 170 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 1217 करोड़ है। गया से दाउदनगर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर का काम चल रहा है। 64 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 268 करोड़ है। सहजीतपुर से मोहम्मदपुर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर का काम चल रहा है। 35 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 171 करोड़ है। वहीं आने वाले महीने में पूरी होने वाली परियोजनाएं कोईलवर से भोजपुर तक चार लेन सड़क है। 43 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 825 करोड़ है। अक्टूबर 22 तक यह पूरा हो जाएगा। भोजपुर से बक्सर चार लेन सड़क 47.9 किमी लंबी है। 682 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 22 में पूरी हो जाएगी। जबकि सिमरिया-खगड़िया चार लेन सड़क 60.2 किमी लंबी है। 567 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 22 में पूरी हो जाएगी। वहीं अगले साल राज्य की अहम आठ परियोजनाएं पूरी होगी। गया, हिसुआ, राजगीर, नालंदा, बिहारशरीफ चार लेन सड़क 93 किमी लंबी है। 2,138 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। लंबे समय से अधर में लटकी हाजीपुर से मुजफ्फरपुर चार लेन सड़क 63 किमी लंबी है। 766 करोड़ की इस परियोजना को मार्च 23 में पूरा करने का लक्ष्य है। पटना-गया-डोभी चार लेन सड़क 127 किमी लंबी है। 1610 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी हो जाएगी। बख्तियारपुर-मोकामा चार लेन सड़क 44.6 किमी लंबी है। 837 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी हो जाएगी। नरेनपुर से पूर्णिया चार-लेन सड़क 49 किमी लंबी है। 1905 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। वीरपुर से बिहपुर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर सड़क 106 किमी लंबी है। 781 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। रजौली-बख्तियारपुर चार लेन सड़क 47 किमी लंबी है। 1065 करोड़ की यह परियोजना अप्रैल 23 में पूरी होगी। मझौली से चरौत दो व चार लेन बन रही है। 63 किमी लंबी यह परियोजना 537 करोड़ की है जो मई 23 में पूरी होगी। अररिया से गलगलिया तक चार लेन सड़क 98 किमी लंबी है। 2150 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 23 में पूरी होगी। इस तरह अगले साल दिसम्बर तक 19 हजार करोड़ की लागत से बन रही 13 सौ किलोमीटर सड़क परियोजनाओं का काम पूरा हो जाएगा।
टीम एबीएन, पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और RJD के तेजस्वी यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष सलाह दी। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पीएम मोदी ने तेजस्वी यादव को वजन कम करने की सलाह दी। बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह के बाद निकलते हुए पीएम मोदी ने तेजस्वी से कहा, वजन थोड़ा कम करो। पीएम मोदी मंगलवार शाम करीब डेढ़ घंटे के लिए देवघर से पटना पहुंचे थे। उनका एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित भाजपा ने अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी बिहार विधानसभा भवन पहुंचे और शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। समारोह के दौरान पीएम मोदी ने एक स्मारक स्तंभ का अनावरण किया। साथ ही "कल्पतरु" का एक पौधा लगाया और एक गेस्ट हाउस तथा एक पुस्तकालय की आधारशिला रखी। मंच से उतरते हुए तेजस्वी को दी सलाह : बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह के बाद मंच से नीचे उतरते समय पीएम मोदी हाथ जोड़कर सभी को नमस्कार कर रहे थे। मंच पर आखिर में तेजस्वी यादव मौजूद थे। पीएम मोदी उन्हें देखकर मुस्कराए और कहा- थोड़ा वजन कम करो। इसके बाद तेजस्वी यादव भी मुस्कुराए और उनके साथ चलते-चलते बात करने लगे। बताया जाता है कि इस दौरान प्रधानमंत्री ने इस तेजस्वी से लालू यादव की सेहत के बारे में भी बात की। लालू इन दिनों दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। तेजस्वी ने पीएम मोदी को बताया कि लालू अब गंभीर अवस्था से बाहर हैं। इस पर पीएम ने कहा कि मैंने देखा है वह अब कुर्सी पर बैठ पा रहे हैं। बता दें कि चारा घोटाला मामले में जमानत पर चल रहे लालू यादव पटना में घर में गिर गए थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लालू को हार्ट और गुर्दे की बीमारी भी है। तेजस्वी यादव ने पिछले हफ्ते बताया था कि पीएम मोदी ने भी फोन पर उनसे लालू के स्वास्थ्य का हालचाल जाना था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक की। इस अहम बैठक में उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों का जायजा लिया और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से बात की। पार्टी के महासचिव विभिन्न राज्यों में पार्टी के काम (खासकर उन राज्यों में जहां चुनाव हों) और अन्य संगठनात्मक मामलों पर चर्चा करने के लिए नियमित तौर पर बैठक करते हैं। हैदराबाद में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने के बाद पार्टी 31 जुलाई को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों, युवाओं और किसानों जैसे विभिन्न सामाजिक समूहों को समर्पित अपने सभी मोर्चों और इकाइयों की एक संयुक्त बैठक का आयोजन पटना में करने जा रही है। नड्डा भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। राष्ट्रीय राजधानी के बाहर आयोजित होने वाली इस तरह की संयुक्त बैठक का यह पहला उदाहरण है। भाजपा के किसान मोर्चा के अध्यक्ष और लोकसभा के सदस्य राजकुमार चाहर ने कहा कि इस तरह की बैठक से पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी और मजबूत होगी तथा विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय में मदद मिलेगी।
टीम एबीएन, पटना। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया थाना क्षेत्र में रविवार को एम्बुलेंस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई तथा एक अन्य घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया राष्ट्रीय उच्च्पथ संख्या 28 पर भेखा चौक के समीप एम्बुलेंस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल हो गया। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के बदायूं जिला निवासी ठेला चालक सुनील राठौर और जिले के बंजरिया थाना क्षेत्र के झखडा गांव निवासी छात्र सरफराज आलम के रूप में की गई है। घायल को स्थानीय अस्पातल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों ने बताया कि दुर्घटना के बाद एम्बुलेंस चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
टीम एबीएन, पटना। जदयू से राज्यसभा नहीं भेजे जाने के कारण मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे चुके रामचंद्र प्रसाद सिंह अथवा आरसीपी सिंह ने शुक्रवार को पटना पहुंचकर अपने तेवर से बता दिया है कि भले ही वह राज्यसभा से रिटायर हो गए हों, लेकिन राजनीति से रिटायर नहीं हुए हैं। पटना में उन्होंने कहा, मैं जमीन का आदमी हूं, संगठन का आदमी हूं और संगठन में काम करूंगा। ग़ौरतलब है कि पिछलें माह राज्यसभा चुनाव में बिहार से दो सीटें नीतीश क़े खाते से थीं। यह दो सीटें राज्यसभा के जदयू सदस्य महेंद्र प्रसाद की मृत्यु और पार्टी के दूसरे सदस्य, केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह का छह वर्ष का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने के कारण खाली हुई थीं। नीतीश ने एक सीट से अनिल हेगड़े और आरसीपी की जगह पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो को उम्मीदवार बनाकर यह जाहिर कर दिया कि उनका मोदी सरकार में मंत्री के रूप में शामिल आरसीपी सिंह को फिर से राज्यसभा भेजने का कोई इरादा नहीं है। नीतीश के पिछले 25 वर्षों में सबसे विश्वासपात्र रहे आरसीपी को तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजने का उनका फैसला भाजपा क़े लिए भी चौंकाने वाला था। नीतीश कुमार जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री बने तब उत्तर प्रदेश कॉडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी आरसीपी सिंह उनके सम्पर्क में आए। नीतीश के मुख्यमंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह बिहार में उनके प्रमुख सचिव बने और 2010 में सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर जदयू के टिकट पर राज्यसभा गए। पिछले 12 वर्षों से वे नीतीश के बाद जदयू में राजनैतिक रूप से सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते रहे। 2019 क़े लोकसभा चुनाव में जदयू को 16 लोकसभा सीटों पर विजय मिली थी, लेकिन भाजपा केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने सभी सहयोगियों को संख्याबल को किनारे रखकर सिर्फ एक सीट की पेशकश कर रही थी। नीतीश ने अपने दो भरोसेमंद नेताओं, आरसीपी और ललन सिंह का नाम आगे किया था। हालांकि, जब नए मंत्रियों के नामों की घोषणा हुई तो उनमें सिर्फ आरसीपी सिंह का नाम शामिल था। आरसीपी सिंह के मंत्री बनने के बाद से ही ये खबरें दिल्ली से पटना पहुंच रही थीं कि आरसीपी भाजपा के करीब हो गए हैं और भाजपा उनकी मदद से जदयू में टूट करा सकती है। आरसीपी सिंह को राज्यसभा के लिए पुनः नामित नहीं करके नीतीश ने गेंद भाजपा के पाले में डाल दी। आरसीपी सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 7 जुलाई को समाप्त होने क़े बाद भी वह अगले छह महीने तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं रहने के बावजूद प्रधानमंत्री की इच्छा से मंत्री बने रह सकते थे लेकिन उन्होंने एक दिन पहले इस्तीफ़ा दे दिया। मोदी ने आरसीपी सिंह का इस्तीफ़ा स्वीकार कर साफ़ बता दिया है कि वह फ़िलहाल नीतीश से टकराना नहीं चाहते हैं। कुछ ही दिनो में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और बिहार में तेजस्वी यादव और नीतीश के बीच लगातार हो रहीं मुलाक़ातों क़े कारण भाजपा के लिए नीतीश को नाराज कर आरसीपी सिंह को मंत्री बनाये रखना आसान नहीं था। राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को अपने उम्मीदवार की जीत तय करने के लिए जदयू के सहयोग की ज़रूरत है। नीतीश ने पिछले दो राष्ट्रपति चुनावों में गठबंधन धर्म से इतर विरोधी पक्ष के उम्मीदवारों को मत दिया था। 2012 में जब वे एनडीए के साथ थे तो उन्होंने यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के लिए मतदान किया, जबकि 2017 में जब वे महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल के साथ थे तो वे एनडीए के रामनाथ कोविंद के समर्थन में सामने आए। नीतीश के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए भाजपा कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती थी, जिसका राष्ट्रपति चुनाव और बिहार में गठबंधन सरकार पर कोई प्रतिकूल असर हो। भाजपा नीतीश को चुनौती देने वाले जॉर्ज फ़र्नांडिस, शरद यादव, दिग्विजय सिंह और जीतनराम माझी का हाल देख चुकी है। इसके अलावा, भाजपा के लिए कम से कम 2024 के आम चुनाव तक नीतीश का साथ वैसे भी जरूरी है, क्योंकि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से एनडीए को पिछली बार 39 सीटें मिली थीं। बिहार चंद बड़े राज्यों में से एक है जहां भाजपा को 2024 में केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार काबिज होने के लिए अच्छे प्रदर्शन की दरकार है और नीतीश के साथ न होने से इस पर असर पड़ सकता है। बिहार में भाजपा लालू राजद के साथ नहीं जा सकती है लेकिन नीतीश भाजपा क़े अलावा लालू के साथ भी जा सकते हैं। भाजपा और आरजेडी दोनों को सरकार बनाने के लिये नीतीश की जरूरत है। पिछले 17 साल में हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जदयू को 15 से 25 प्रतिशत तक मत प्राप्त हुए हैं। 2020 में भले ही जदयू को विधानसभा की मात्र 43 सीटों पर जीत मिली, उसका मत प्रतिशत राजद के 23.11 और भाजपा के 19.46 के मुकाबले 15.39 प्रतिशत रहा है। जाहिर है, प्रदेश में जदयू जिसके साथ रहेगी उसी की सरकार बनेगी। यही कारण है कि गठबंधन के भीतर नीतीश के साथ अपने एजेंडे पर तमाम अंतर्विरोध और तनाव के बावजूद भाजपा के लिए जदयू के साथ डबल इंजन की सरकार चलाने की सियासी जरूरत भी है और शायद विवशता भी। इस कारण से भी आरसीपी सिंह क़ो मोदी मंत्रिमंडल से बाहर जाना पड़ा। आरसीपी सिंह आगे क्या करते है देखना दिलचस्प होगा। वो जमीनी संघर्ष की बात तो कर रहे हैं लेकिन बिहार में आरसीपी सिंह क़े पास ज़्यादा विकल्प नहीं है। नीतीश अब आरसीपी सिंह को फिर से उनका पुराना रुतबा देंगे, यह संभव नहीं लगता। आरसीपी सिंह खुद की पार्टी बनाकर ख़म ठोकें, यह भी मुमकिन नहीं। प्रशांत किशोर क़े बिहार में किए जा रहे प्रयोग के साथ आरसीपी सिंह जाएं, इतना धैर्य उनमें हो ऐसा लगता नहीं। ऐसे में भाजपा ही आरसीपी सिंह के लिए सबसे मुफ़ीद पार्टी है। फ़िलहाल, भाजपा ने आरसीपी सिंह से दूरी बनाकर रखी है। आगे क्या होगा यह अभी रहस्य है। लेकिन बिहार की राजनीति में अभी बहुत कुछ उलटफेर होना बाक़ी है।
टीम एबीएन, पटना। बिहार में एक बार फिर से बिजली का संकट गहरा गया है। राज्य में शनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (NTPC) की छह यूनिट, कांटी, नवीनगर और बरौनी के बंद हो गई है, जिस वजह से राज्य में बिजली की भारी किल्लत हो गई है। बीते दिन भी राज्य को जरूरत से 1500 मेगावाट तक कम बिजली ही मिल पाई है। इसी वजह से राज्य के शहरों में 4 से 5 घंटे में तो गांव में 8 से 10 घंटे तक कटौती हो रही है। इस समस्या को लेकर एसबीपीडीसीएल-एनबीपीडीसीएल के अधिकारियों ने कहा कि एनटीपीसी कांटी की एक यूनिट बंद होने से 133 मेगावाट, नवीनगर की एक यूनिट बंद होने से 525 मेगावाट और बरौनी की तीन यूनिट, यानी यूनिट संख्या सात बंद होने से 110 मेगावाट बिजली कम मिल रही है। इसके अलावा यूनिट संख्या छह बंद होने से 93 मेगावाट और यूनिट संख्या आठ बंद हो गई है। जिस वजह से राज्य को 230 मेगावाट कम बिजली मिल रही हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों के पास कोयले का संकट है, जिस वजह से उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। इसी वजह से जीएमआर कमलांगा से बिहार को 170 मेगावाट और जिंदल से 128 मेगावाट बिजली कम मिल रही हैं। इसी तरह से एनटीपीसी व निजी कंपनियों को मिलाकर राज्य को 494 मेगावाट बिजली कम मिली है, जिसका असर बिजली पर पड़ा है। बिजली न आने की वजह से लोग काफी ज्यादा परेशान हैं। एक तरफ जहां राज्य में गर्मी लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली की आंख मिचौली से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प रहेगा कि सरकार कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान कर पाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, लालू की किडनी सिर्फ 20 फीसदी ही काम कर रही है। डाक्टर्स की टीम उन पर निगरानी रखे हुए हैं। उनका मानना है कि खतरा अभी टला नहीं है। इस बीच उनके बड़े बेटे तेज प्रताप ने ट्विटर पर भावुक पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि पिताजी आप जल्द स्वस्थ हो कर घर आ जाइए। आप है तो सब है। प्रभु मैं आपकी शरण में हूं, तब तक रहूंगा, जब तक पापा घर नही आ जाते। मुझे बस पापा चाहिए और कुछ भी नहीं। ना राजनीति और ना कुछ और बस मेरे पापा और सिर्फ पापा...। बताते चलें कि बिहार के 74 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री को बुधवार रात को एम्स में भर्ती कराया गया था। पटना के एक अस्पताल में लालू प्रसाद के कंधे समेत तीन जगह फ्रैक्चर का शुरूआती इलाज किया गया। वह अपने घर में गिर पड़े थे, जिस वजह से उन्हें ये फ्रैक्चर हुए हैं। इससे पहले बताया गया कि राजद अध्यक्ष की तबीयत में लगातार सुधार हो रहा है। उन्हें जल्द ही सीसीयू से निजी वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि लालू यादव के कंधे और जांघ में मामूली फैक्चर आया था, इस कारण उन्हें किसी भी प्रकार की सर्जरी की जरूरत नहीं है। तीन से चार दिन में लालू यादव को पैरों पर चलाने का प्रयास भी किया जाएगा।
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